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 आदि कैलाश यात्रा के लिए 'इनर लाइन परमिट' का टूटा रिकॉर्ड

 पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) . । आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा शुरू होने के महज 40 दिनों के भीतर कुल 37,818 'इनर लाइन परमिट' (विशेष अनुमति पत्र) जारी किए जा चुके हैं। यह संख्या पिछले साल जारी किए गए परमिट की कुल संख्या से भी अधिक है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। चीन और नेपाल की सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र में जाने के लिए प्रशासन द्वारा यह विशेष अनुमति पत्र जारी किया जाता है। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले साल जारी किए गए कुल 36,526 परमिट का रिकॉर्ड सोमवार (8 जून) को ही टूट गया था। इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए तीर्थयात्रियों को 1,194 परमिट जारी किए गए, जिससे कुल संख्या बढ़कर 36,776 पहुंच गई। इसके बाद नौ जून को भी श्रद्धालुओं का उत्साह बना रहा और उस दिन 1,042 परमिट जारी किए गए जबकि पिछले साल इसी तारीख को महज 618 परमिट दिए गए थे। यह वार्षिक यात्रा एक मई से शुरू हुई थी और नवंबर तक छह महीने से अधिक समय तक चलती है। हालांकि जुलाई और अगस्त के दौरान (मानसून के कारण) इसे स्थगित रखा जाता है। धारचूला में कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) बेस कैंप के प्रभारी धन सिंह बिष्ट ने बताया कि इस साल तीर्थयात्रियों की कुल संख्या एक लाख के पार जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में आने वाले लोगों में बड़ी संख्या छुट्टियां मनाने वालों की दिख रही है, जबकि पारंपरिक तीर्थयात्रियों का आना जून के मध्य के बाद नियमित होने की संभावना है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने श्रद्धालुओं की इस भारी संख्या का श्रेय होमस्टे सुविधाओं में सुधार को दिया जिसने इस ऊंचाई वाले क्षेत्र की यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बना दिया है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों और श्रद्धालुओं की इस बढ़ी संख्या से परिवहन सेवाओं, होमस्टे (स्थानीय लोगों के घरों में ठहरने की व्यवस्था), स्व-रोजगार और स्थानीय हस्तशिल्प की बिक्री के जरिए लोगों को आजीविका मिल रही है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। भटगांई ने बताया कि इससे मार्ग में पड़ने वाले सीमावर्ती गांवों के परिवारों को अपने पैतृक घरों में ही टिके रहने का जरिया मिला है। उन्होंने कहा कि इन सीमांत इलाकों में साल भर लोगों की मौजूदगी रहने से भारत, चीन और नेपाल की त्रिकोणीय सीमा पर स्थानीय नागरिकों की 'दूसरी रक्षा पंक्ति' मजबूत होती है यानी संकट या घुसपैठ के समय ये नागरिक सेना के लिए आंख-कान का काम करते हैं और देश की सुरक्षा को मजबूती देते हैं।

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