हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. नरेंद्र कोहली का निधन, कोरोना से संक्रमित थे
नई दिल्ली। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नरेंद्र कोहली का कोरोना संक्रमण के कारण शनिवार को नई दिल्ली में निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे। उनकी हालत खराब होने के बाद शुक्रवार को उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है।
वे कुछ दिनों पहले संस्कार भारती के 'कला संकुल' के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। कोहली की पहली कहानी 1960 में प्रकाशित हई थी। वे वाणी प्रकाशन ग्रुप से 1988 से जुड़े हुए थे। उनकी 92 पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
6 जनवरी 1940 को अविभाजित भारत के सियालकोट, पंजाब (अब पाकिस्तान ) में जन्मे डॉ. कोहली ने हिंदी साहित्य की सभी विधाओं में लेखन किया था। दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में वे हिंदी के प्राध्यापक रहे, लेकिन लेखन को प्राथमिकता देने के लिए उन्होंने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
माना जाता है कि साहित्य में 'महाकाव्यात्मक उपन्यासÓ की विधा को प्रारंभ नरेंद्र कोहली ने किया था। पौराणिक एवं ऐतिहासिक चरित्रों की गुत्थियों को सुलझाते हुए उनके माध्यम से आधुनिक समाज की समस्याओं एवं उनके समाधान को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना उनकी विशेषताओं में से एक था। कोहलीजी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय जीवन-शैली एवं दर्शन का सम्यक् परिचय करवाया है। अहिल्या इनका नया उपन्यास है।
डॉ. नरेंद्र कोहली को 2017 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा व्यास सम्मान, शलाका सम्मान, पंडित दीनदयाल उपाध्याय सम्मान, अट्टहास सम्मान भी उन्हें मिले थे। परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटे-बहू और पोते हैं।
संस्कृति मंत्री ने शोक जताया
केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने नरेंद्र कोहली के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि जैसे समुद्र मंथन से अमृत निकला था, इस तरह ही स्व. नरेंद्र कोहली जी ने अपने लेखन से युवा पीढ़ी को प्रसाद दिया। मैं सेतुबंध, सांस्कृतिकमंथन के पुरोधा को नमन और श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।


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