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आयकर विभाग ने विदेशों में पैसा भेजने के लिये कर फॉर्म हाथ से भरने की अनुमति दी

 नयी दिल्ली । आयकर विभाग ने सोमवार को कुछ फॉर्म हाथ से भरने की अनुमति दे दी। कर फाइल करने के नये पोर्टल के शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी तकनीकी खामियां जारी रहने के बीच यह मंजूरी दी गयी है। आयकर विभाग ने परिपत्र जारी कर बैंक के पास 30 जून तक फॉर्म 15सीए/15सीबी (विदेशों में पैसा भेजने के लिये जरूरी) हाथ से भरने की अनुमति दी है ताकि कामकाज को लेकर लेन-देन सुचारू चलता रहे। इन फार्मों को बाद में ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

नया पोर्टल डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.इंकमटैक्स.गॉव़ इन (www.incometax.gov.in) सात जून को चालू किया गया। आयकर विभाग और सरकार ने कहा कि इसका मकसद अनुपालन को करदाताओं के लिये और सुगम बनाना है। पोर्टल पर काम में तकनीकी समस्याओं की शिकायतें पहले दिन से ही आनी शुरू हो गयीं। एक सप्ताह के बाद भी शिकायतें बनी हुई हैं। चार्टर्ड एकाउंटेंट के अनुसार करदाता पिछली बार ई-फाइल किए गए अपने रिटर्न नहीं देख पा रहे हैं। कई सुविधाएं अभी शुरू नहीं हुई है। उस पर यह लिखा आ रहा है ‘कमिंग सून' यानी जल्द शुरू होगी। आयकर विभाग ने एक बयान में कहा, ‘‘करदाताओं ने आयकर फार्म 15सीए/15सीबी को पोर्टल पर भरने में समस्या की बात कही है, इसको देखते हुए यह निर्णय किया गया है कि करदाता ये फार्म 30 जून तक अधिकृत डीलरों के पास ‘मैनुअल' प्रारूप में भर सकते हैं।'' आयकर विभाग ने यह भी सलाह दी है कि अधिकृत डीलर विदेशों में पैसा भेजने के लिये 30 जून, 2021 तक ये फॉर्म स्वीकार करेंगे। बयान के अनुसार, ‘‘दस्तावेज पहचान संख्या सृजित करने के मकसद से इन फार्मों को अपलोड करने के लिये सुविधा बाद में दी जाएगी।'' किसी भी व्यक्ति को विदेशों में पैसा भेजने के लिये फॉर्म 15सीए ‘ऑनलाइन' फार्म/घोषणा पत्र देने की जरूरत होती है। उन्हें सौदे की प्राकृति और भेजी जा रही राशि पर काटे गये आयकर के बारे में जानकारी देनी होती है। कुछ मामलों में फॉर्म 15सीए को चार्टर्ड एकाउंटेंट के प्रमाणपत्र की जरूरत पड़ती है जो फॉर्म 15सीबी के जरिये दिया जाता है। नांगिया एंड कंपनी एलएलपी भागीदार शैलेश कुमार ने कहा कि पुराने ई-फाइलिंग पोर्टल के 31 मई, 2021 को बंद होने तथा नये पोर्टल में तकनीकी खामियों के कारण 15सीए और 15सीबी फॉर्म ‘ऑनलाइन' भरना अबतक संभव नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा, ‘‘इससे उन कंपनियों के लिये समस्याएं पैदा हुई हैं, जिन्हें आर्डर देने या लाइसेंस लेने अथवा वाणिज्यिक बाधाओं को पूरा करने के लिये दूसरे देशों में भुगतान करने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा, ‘‘बैंक फॉर्म 15सीए/15सीबी के अभाव में विदेशों में पैसा भेजने की अनुमति नहीं दे रहे। इससे कई कंपनियों के सौदे थम गये हैं।'' कुमार ने कहा कि कंपनियों की कठिनाइयों को समझते हुए, सरकार ने यह परिपत्र जारी किया है और फॉर्म 15सीए/15सीबी हाथ से भरने की अनुमति दे दी है ताकि सौदा नये ई-फाइलिंग पोर्ट पर तकनीकी खामियों के बाद भी जारी रहे।'' वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वयं पोर्टल तैयार करने वाली आईटी कंपनी इन्फोसिस और उसके चेयरमैन नंदन निलेकणि से आयकर विभाग की नई ई-फाइलिंग वेबसाइट में आ रही तकनीकी खामियों को दूर करने को कहा था। पोर्टल शुरू होने के दूसरे ही दिन सीतारमण के ट्विटर टाइमलाइन पर भारी संख्या में उपयोगकर्ताओं ने पोर्टल के सही तरीके से काम नहीं करने की शिकायत की थी। उसके बाद वित्त मंत्री ने ट्वीट कर इन्फोसिस और उसके चेयरमैन से समस्याओं को दूर करने को कहा था।
सीतारमण के ट्वीट का जवाब देते हुए निलेकणि ने कहा था कि इन्फोसिस तकनीकी दिक्कतें दूर कर रही है। इन्फोसिस को 2019 में अगली पीढ़ी की आयकर फाइलिंग प्रणाली तैयार करने का अनुबंध दिया गया था। इसका मकसद रिटर्न की प्रसंस्करण प्रक्रिया में लगने वाले 63 दिन के समय को कम कर एक दिन करने और ‘रिफंड' प्रकिया को तेज करना है। कुमार ने कहा कि पोर्टल में ‘लॉग इन' करने में होने वाली समस्याओं के साथ महत्वपूर्ण सुविधाएं अभी शुरू नहीं हुई है। जैसे 'ई-कार्यवाही' टैब पर ‘जल्द शुरू होने' का संदेश आ रहा है। इससे करदाताओं और कर पेशेवरों के बीच आदेशों के संबंध में चिंता बढ़ रही है। आदेश पारित किये जा रहे हैं और संबंधित मामले में अपना पक्ष रखने के लिये पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है क्योंकि नोटिस के अनुपालन में समस्या आ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘करदाताओं को उन कारणों से दंड भुगतना पड़ सकता है, जो उनके नियंत्रण में ही नहीं है। साथ ही, करदाताओं को विदेशों में धन भेजने के लिए एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि वे फॉर्म 15सीए/सीबी जारी करने में असमर्थ हैं।'' कुमार ने कहा, ‘‘पोर्टल शुरू होने के सात दिन बाद भी ये समस्याएं हैं। ये छोटी-मोटी गड़बड़ियां नहीं हैं और इस पर तत्काल ध्यान देने और समाधान करने की आवश्यकता है।'' एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार रजत मोहन ने कहा कि पिछले सप्ताह से पोर्टल पर जिन सामान्य मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, उनमें ‘लॉग इन' में 10-15 मिनट का समय लगना, आकलन नोटिस के जवाब दाखिल करने में समस्या, पिछले फाइलिंग से संबंधित आंकड़े पोर्टल पर दिखाई नहीं देना और ई-कार्यवाही प्रणाली का पूरी तरह चालू नहीं होना शामिल हैं।'' मोहन ने कहा, ‘‘नये आयकर पोर्टल की समस्याओं को जल्द-से-जल्द दूर करने की जरूरत है। तकनीकी खामियों से करदाताओं और कर पेशेवरों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।'' डेलॉयट इंडिया की भागीदार आरती राउत ने कहा कि नए आयकर पोर्टल ने सभी के लिये उम्मीदें जगाई हैं। उन्होंने कहा कि नये पोर्टल का लाभ तभी दिखेगा, जब तकनीकी खामियां दूर हो जाएंगी। ध्रुव एडवाइजर्स एलएलपी भागीदार संदीप भल्ला ने भी कहा कि वेबसाइट उपयोग करने वालों के लिये अनुकूल जान पड़ती है लेकिन यह काफी धीमी चल रही है।
 

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