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- धान, सब्जी छोड़ फूलों की खेती अपनाकर सालाना लाखों की कमाईराष्ट्रीय बागवानी मिशन से बदली सुरेश की तकदीररायपुर/ राजधानी से लगे ग्राम काठाडीह के किसान श्री सुरेश सोनकर ने परंपरागत खेती से हटकर नवाचार की मिसाल पेश की है। शासकीय योजना से मिली सहायता से धान, सब्जी की खेती छोड़ उन्होंने गेंदा की खेती अपनाई और आज सालाना करीब 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।करीब ढाई साल पहले तक सुरेश पारंपरिक धान और सब्जी की खेती करते थे, जहां लागत अधिक और मुनाफा सीमित था। लेकिन उन्होंने जोखिम उठाते हुए गेंदा फूल की खेती अपनाने का निर्णय लिया। इस बदलाव में राष्ट्रीय बागवानी मिशन और जिला उद्यानिकी विभाग का सहयोग उनके लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। आर्थिक सहायता और उद्यानिकी विभाग से मिले गेंदे के छोटे पौधों ने उनकी इस नई शुरुआत को मजबूत आधार दिया।आज सुरेश करीब 3.5 एकड़ भूमि पर गेंदा उगा रहे हैं। उनकी फसल की खासियत यह है कि यह सालभर मांग में रहती है, चाहे शादी-विवाह हो या धार्मिक आयोजन। भांठागांव और डूमरतराई जैसे स्थानीय बाजारों में उनके फूल हाथों-हाथ बिक जाते हैं। फूल की लगातार मांग उन्हें सालभर स्थायी आय प्रदान कर रही है।सुरेश रोजाना लगभग 400 किलोग्राम फूलों की तुड़ाई करते हैं। इस खेती से उनकी कुल सालाना आय करीब 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिसमें से लगभग 2 लाख रुपये शुद्ध लाभ है।सुरेश कहते हैं, “पहले खेती में मेहनत ज्यादा और फायदा कम था। अब फूलों की खेती से न केवल अच्छी कमाई हो रही है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पहले सब्जी की फसल में नुकसान था लेकिन अब गेंदे की खेती से अच्छी कमाई हो रही है। अब मैं इस आय को अपने व्यवसाय को बढ़ाने और बच्चों के बेहतर भविष्य में उपयोग कर रहा हूं। सरकार की ये योजना वाकई में किसानों के लिए फायदेमंद है।"सुरेश की सफलता अब उनके गांव और आसपास के क्षेत्रों में बदलाव की लहर पैदा कर रही है। वे अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से हटकर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।जिला उद्यानिकी अधिकारी श्री कैलाश पैकरा के अनुसार, “राष्ट्रीय बागवानी मिशन किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है। इससे किसान फसल चक्रण अपनाकर कम लागत में अधिक आय अर्जित कर रहे हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रहे हैं।”
- स्वरोजगार से बदली जिंदगी, परिवार को मिला सम्मानजनक जीवनरायपुर। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित दीदी ई रिक्शा सहायता योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बन रही है। इसका प्रेरक उदाहरण रायपुर के मोवा-सड़दू क्षेत्र की निवासी श्रीमती भुनेश्वरी साहू हैं, जिन्होंने इस योजना के माध्यम से स्वरोजगार की राह अपनाकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।श्रीमती भुनेश्वरी साहू छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की पंजीकृत सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि रोजी-मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय से परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना कठिन हो रहा था। ऐसे में वे स्वरोजगार के अवसर की तलाश में थीं।श्रम विभाग से जानकारी मिलने पर उन्होंने दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने ई-रिक्शा क्रय किया।वर्तमान में भुनेश्वरी साहू स्वयं ई-रिक्शा चलाकर सम्मानपूर्वक अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है और अब वे अपने बच्चों की शिक्षा एवं परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन एवं श्रम विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं श्रमिक वर्ग के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से संचालित इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराना, सुरक्षित परिवहन को बढ़ावा देना एवं पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत पात्र महिला श्रमिकों को ई-रिक्शा क्रय हेतु अनुदान प्रदान किया जाता है।इच्छुक अभ्यर्थी योजना का लाभ लेने के लिए श्रम विभाग के पोर्टल shramevjayate.cg.gov.in या ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल एप के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
- बाल विवाह की जानकारी तुरंत देंरायपुर/अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के लिए समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है । शिक्षा का प्रचार प्रसार न होने जागरूकता की कमी , पुरानी परम्पराओ को पालन करने के नाम पर होने वाले बाल विवाहों को रोकना सभी जागरूक नागरिकों का कर्तव्य है,वैसे तो बाल विवाह भी साल भर होते है पर रामनवमी से अक्षय तृतीया के बीच में अधिकाधिक संख्या में बल विवाह संपन्न होते है ,जिनमे कई बार तो वर वधु बने बच्चे अंगूठा चूसते हुए माँ की गोद में बैठे रहते है तो अनेक मामलों में दस ग्यारह वर्ष की उम्र में ही शादी कर जाती है ,इस आयु में बच्चे न तो शारीरिक तथा मानसिक रूप से विवाह जैसी गंभीर जिम्मेदारी निभाने के लायक होते है। बाल विवाह से बालिकाओ की पढाई लिखाई बंद हो जाती है बल्कि उन्हें कम उम्र से ही मातृत्व का बोझ उठाना पड़ता है जिसके लिए वे शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार नहीं होती। बाल विवाह की प्रथा न ही धार्मिक रूप से सही है और न ही सामाजिक रूप से पुरातन भारतीय व्यवस्था में भी व्यक्ति के शिक्षा पूर्ण करने के बाद युवावस्था में ही विवाह कर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश को उचित बताया गया है किसी भी धर्मं ने नन्हे बच्चों की शादी को उचित नहीं ठहराया है बल्कि अल्पव्यस्क बालिकाओ की मृत्यु भी प्रसूति के समय हो जाती है।डॉ. मिश्र ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने आसपास अगर कोई भी नाबालिग बच्चे की शादी होते देखें तो तुरंत पुलिस प्रशासन एवं समिति को सूचित करें ताकि उस पर समय रहते समझाईश एवं कार्यवाही हो सके।
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- जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संपादित करने दिए आवश्यक दिशा-निर्देश
राजनांदगांव । आगामी 1 मई से प्रारंभ होने वाली जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल क्रियान्वयन हेतु जिला प्रशासन राजनांदगांव द्वारा प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सागरपारा राजनांदगांव क्षेत्र में फील्ड प्रशिक्षण का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं एवं प्रशिक्षण की गुणवत्ता का जायजा लिया तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रशिक्षण की प्रगति की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जनगणना कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए प्रगणकों को घर-घर जाकर सही जानकारी संकलित करने का अभ्यास कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लोग जागरूक हैं और सहयोग कर रहे हैं, जिससे कार्य को सुचारू रूप से संपादित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि 1 मई से मुख्य जनगणना कार्य प्रारंभ होगा, इसलिए यह आवश्यक है कि सभी प्रगणक पूर्ण दक्षता के साथ कार्य करें, ताकि किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे।
सागरपारा राजनांदगांव में आयोजित फिल्ड प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना से संबंधित तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर्स द्वारा बताया गया कि इस बार जनगणना कार्य पूर्णत: डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए प्रगणकों को मोबाइल ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में परिवार की जानकारी, आवास की स्थिति, संचार सुविधाएं तथा घर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे शौचालय आदि से संबंधित जानकारी को ऐप में दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही डेटा प्रविष्टि के दौरान आवश्यक सावधानियों के संबंध में जानकारी दी गई।
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि जनगणना देश के विकास की योजनाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगामी 15 दिनों के भीतर नागरिक स्व-गणना की प्रक्रिया का भी उपयोग कर सकते हैं तथा प्रगणकों को सही एवं पूर्ण जानकारी देकर सहयोग प्रदान करें। इस अवसर पर तहसीलदार एवं चार्ज अधिकारी श्री प्यारेलाल नाग, नायब तहसीलदार श्री राकेश नागवंशी सहित जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। - महासमुंद / प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत प्राईस सपोर्ट स्कीम के अतंर्गत रबी वर्ष 2025-26 में दलहन / तिलहन खरीदी का शुभारंभ जिले के 03 उपार्जन केन्द्रों में किया गया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किसानों द्वारा तिलहन उत्पाद का उपार्जन किया गया। जिसमें कृषि उपज मंडी पिटियाझर महासमुंद में कृषक श्री खोरबाहरा निषाद ग्राम घोडारी द्वारा 7 क्विटल सरसों बीज उपार्जन किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्री जागेश्वर चन्द्राकर, उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप, जिला नोडल अधिकारी श्री अविनाश शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी श्रीमती गणेश्वरी बंजारे, जिला विपणन महासमुंद से प्रोग्रामर श्री प्रशांत जोशी, समिति प्रबंधक एवं कृषकगण उपस्थित रहे।इसी तरह कृषि उपज मंडी बसना के कृषक श्री मोहन नायक ग्राम दलदली द्वारा 15 क्विटल सरसों बीज उपार्जन किया गया। इस अवसर श्री रमेश अग्रवाल, श्रीमती दीपा अरुण साह, बसना सहकारी समिति अध्यक्ष श्री जन्मजय साव उपस्थित रहें। इसके अलावा कृषि उपज मंडी सरायपाली में कृषक श्री पंकज राज पटेल ग्राम कुटेला (1.5 किंव.) एवं श्री सागरचंद पटेल ग्राम केना (01 क्विं.) से किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियो ं एवं कृषि विभाग के अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा बड़ी संख्या में कृषक भी उपस्थित होकर योजना का लाभ लेने पहुंचे।कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोगरा पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री प्रकाश पटेल, कृषि सभापति श्रीमती बालमोती पटेल एवं अन्य जनप्रतिनिधियो ने सहभागिता करते हुए किसानों को योजना का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। इस अवसर पर अनुविभागीय राजस्व अधिकारी, अनुविभागीय कृषि अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी मण्डी सचिव, प्रा.कृ.सा. सह. समिति सरायपाली प्रबंधक, कृषि विकास अधिकारी एवं समस्त ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों द्वारा सरसों की गुणवता जांच, तौल प्रक्रिया एवं खरीदी व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। उपस्थित कृषकों को समर्थन मूल्य पर चना 5875 रु प्रति क्विटल, मसूर 7000 रू प्रति क्विटल एवं सरसों 6200 रू प्रति क्विटल पर अपनी उपज बेचने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओ ं की जानकारी दी गई तथा पारदर्शी एवं सुचारू रूप से खरीदी व्यवस्था का क्रियान्वयन किया जा सके। कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा खरीदी केन्द्र पर अपनी उपज लेकर पहुंचे।ई-समृद्धि पोर्टल में दलहन एवं तिलहन फसलों का पंजीयन तिथि 20 अप्रैल 2026 तक बढ़ाई गई है। उपसंचालक कृषि द्वारा महासमुंद जिले के अंतर्गत सभी 06 उपार्जन केन्द्रों पिटियाझर, सिर्रीपठारीमुड़ा, कोमाखान, पिथौरा, बसना एवं सरायपाली के माध्यम से किसानों को अधिक से अधिक पंजीयन कराकर योजना का लाभ लेने हेतु आव्हान किया गया है। छ.ग. शासन किसानों की आय बढ़ाने हेतु निरंतर प्रयासरत है।
- अम्बिकापुर । भाषा के आधार पर बालक को प्रवेश देने से इंकार करने के संबंध में सोशल मीडिया तथा विभिन्न न्यूज चैनलों के माध्यम से सामने आए मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने तत्काल जांच के निर्देश दिए । कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रकरण की विस्तृत जांच कराई गई।जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ दिनेश कुमार झा ने आदेश जारी किया गया है, जांच में यह तथ्य प्रकाश में आया कि स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर द्वारा 04 वर्ष के एक मासूम बच्चे को विद्यालय में प्रवेश देने से इस आधार पर इंकार किया गया कि वह हिन्दी में बातें नहीं कर पाता तथा स्थानीय सरगुजिहा भाषा में बात करता है। संस्था द्वारा बच्चे के पिता से यह भी कहा गया कि इस विद्यालय में बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं और शिक्षक बच्चे की बातें नहीं समझ पा रहे हैं, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया जा सकता।इस प्रकार भाषा के आधार पर किसी बालक के साथ किया गया भेदभाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत तथा पूर्णतः अनुचित एवं अस्वीकार्य पाया गया। इस संबंध में संस्था से स्पष्टीकरण प्राप्त किया गया, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संस्था बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रही थी तथा शाला प्रबंधन एवं शिक्षकों द्वारा अपनी गलती स्वीकार की गई।प्राप्त शिकायत की जांच हेतु श्रीमती रूमी घोष, वरिष्ठ प्राचार्य, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केदारपुर अम्बिकापुर की अध्यक्षता में जांच दल गठित किया गया। जांच दल द्वारा भी समाचारों में प्रसारित घटना की पुष्टि करते हुए संस्था के बिना मान्यता संचालन की जानकारी दी गई।उक्त कृत्य को निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 तथा छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया। अतः निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा-18 (5) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी) चोपड़ापारा अम्बिकापुर पर 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) का आर्थिक दण्ड अधिरोपित किया गया है तथा आगामी आदेश तक संस्था का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया है कि अधिरोपित आर्थिक दण्ड शासन के खजाने में चालान के माध्यम से जमा कर उसकी प्रति प्रस्तुत की जाए। साथ ही विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, अम्बिकापुर को निर्देश दिए गए हैं कि संस्था में अध्ययनरत बच्चों के पालकों से संपर्क कर उनके बच्चों को अन्य उपयुक्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित करें।
- महासमुंद / विकासखंड बागबाहरा अंतर्गत शासकीय माध्यमिक शाला खुसरूपाली में आज नेवता भोज कार्यक्रम का गरिमामय एवं सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। यह आयोजन कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह द्वारा अपनी माता स्व. संतोष कुमारी जी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया गया। जो सेवा भावना, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करने की प्रेरणादायक पहल के रूप में परिलक्षित हुआ। कार्यक्रम के लिए विद्यालय परिसर को स्वच्छ, आकर्षक एवं सुव्यवस्थित रूप से सजाया गया था। विद्यार्थियों, अभिभावकों और ग्रामवासियों के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था की गई थी। पूरे आयोजन में अनुशासन और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा गया। भोजन की गुणवत्ता उत्कृष्ट रही और वितरण व्यवस्था पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संपन्न हुई।कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी विजय लहरे ने उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में सेवा, सहयोग और संवेदनशीलता जैसे मानवीय मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दौरान डीईओ श्री लहरे ने विद्यार्थियों को खीर, पुड़ी एवं मिठाई परोसा। इस अवसर विद्यालय के वातावरण में उत्साह का माहौल रहा।कार्यक्रम में सरपंच पवन ठाकुर, एसएमडीसी अध्यक्ष, विद्यालय परिवार, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी शामिल हुए। साथ ही एबीईओ रामता मन्नाडे, सीएसी देव सिन्हा, प्रधानपाठक प्रेमचंद डड़सेना सहित शिक्षकों और स्टाफ की उपस्थिति रही। सभी ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
- -बकरी पालन बना आजीविका का सशक्त माध्यम, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभाररायपुर प्रदेश सरकार की फ्लैगशिप ’महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की महिलाओं के लिए न केवल आर्थिक संबल, बल्कि स्वावलंबन का नया आधार बन रही है। विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की श्रीमती करियो के जीवन में आई खुशहाली लेकर आई है। अम्बिकापुर विकासखण्ड के ग्राम रामनगर की रहने वाली श्रीमती करियो ने योजना से प्राप्त सहायता राशि का सदुपयोग कर न केवल अपना भविष्य संवारा है, बल्कि अपने पूरे परिवार की स्थिति को बेहतर बनाया है।श्रीमती करियो बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। दैनिक खर्चों के लिए उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता था। महतारी वंदन योजना के लागू होने के बाद, जब उनके खाते में राशि आनी शुरू हुई, तो उन्होंने इसे घरेलू खर्चों में लगाने के बजाय निवेश का रास्ता चुना। उन्होंने इस राशि को सहेज कर बकरियां खरीदीं और पशुपालन शुरू किया।अपनी सफलता साझा करते हुए श्रीमती करियो ने बताया कि मैंने योजना के पैसों से बकरियां खरीदीं और साल भर उनकी देखभाल की। अब मेरे पास छह बकरियां हैं। बकरियां समय-समय पर बच्चे देती हैं, जिससे उनकी संख्या बढ़ती जा रही है। अब मुझे इनसे निरंतर लाभ मिल रहा है और मैंने अपना गुजारा इन्हीं के माध्यम से सुरक्षित कर लिया है।आर्थिक स्थिति सुधरने से श्रीमती करियो अब अपने पति और नाती-पोतों की बेहतर देखभाल कर पा रही हैं। वे कहती हैं कि पहले और अब के जीवन में बड़ बड़ा बदलाव आ गया है। अब घर में अच्छा खान-पान है और बच्चों का भविष्य सुरक्षित हुआ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, यह सब सरकार की मदद से संभव हो पाया है, वरना हमारे लिए यह सब सोच पाना भी कठिन था।अपनी और अपने परिवार की बदलती तस्वीर देख श्रीमती करियो ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें समाज में सम्मान से जीने का अवसर दिया है। उनके अनुसार, यह योजना ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
- 0- 200 वर्ष पुरानी पाण्डुलिपियों का हुआ संग्रहण0- नई पीढ़ी के लिए सुरक्षित हो रही प्राचीन धरोहर0- डाक्टर पंडा से ताड़ पत्र में लिखी पांडुलिपि प्राप्तरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के आह्वान पर ज्ञानभारतम् मिशन के अंतर्गत जिले में प्राचीन एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण का कार्य किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना है। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिले में विभिन्न ऐतिहासिक पाण्डुलिपियों का संग्रहण कर उन्हें ज्ञानभारतम् पोर्टल में दर्ज किया जा रहा है। इसी क्रम में सेजेज निवेदिता, गुरु नानक चौक रायपुर की व्याख्याता श्रीमती नीतू शर्मा द्वारा लगभग 200 वर्ष पुरानी दुर्लभ पाण्डुलिपियों का संग्रहण किया गया। यह पाण्डुलिपियाँ डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा के निवास, विकास विहार कॉलोनी रायपुर में प्राप्त हुईं। इनका मूल निवास ग्राम बिरकोल, तहसील सरायपाली, जिला महासमुंद है। ताड़पत्र पर लिखी इन पाण्डुलिपियों में ज्योतिष एवं कर्मकांड से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है।उड़िया भाषा में लिखी ये पाण्डुलिपियाँ पूर्वजों की ज्ञान परंपरा को दर्शाती हैं। ज्ञानभारतम् मिशन के माध्यम से इस प्रकार की धरोहरों का संरक्षण कर उन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।--
- 0- पेंटर के बेटे राम ने प्रावीण्य सूची में स्थान पाकर रचा सफलता का नया अध्यायरायपुर. आर्थिक सीमाओं के बावजूद मेहनत और लगन से हासिल की गई सफलता तब और मायने रखती है, जब उसे आगे बढ़ने का सहारा भी मिल जाए। रायपुर के महंत लक्ष्मी नारायण वार्ड निवासी श्रमिक श्री कमल सोनी के पुत्र राम सोनी की कहानी इसी का उदाहरण है। पेशे से पेंटर कमल सीमित आय में अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। राम सोनी ने अपनी मेहनत के दम पर कक्षा 10वीं की छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया।राम की इस उपलब्धि पर उन्हें श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस आर्थिक सहायता ने उनके आगे की पढ़ाई के रास्ते को आसान बना दिया है।कमल बताते हैं कि उनकी आर्थिक स्थिति उच्च शिक्षा का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त नहीं थी, लेकिन इस योजना से मिली सहायता ने उनके बेटे के सपनों को नई दिशा दी है। अब राम बेहतर संसाधनों के साथ अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखते हुए भविष्य में कुछ बड़ा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2012 से संचालित इस योजना का उद्देश्य श्रमिक वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना आज भी निरंतर जारी है और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- 0- रायपुर के गुखेरा गाँव के छात्र टूकेश ने अपनी वाणी, संस्कार और आत्मविश्वास से समानता का संदेश पहुँचाया0- प्रोजेक्ट “पढ़े रायपुर, लिखे रायपुर” बच्चों की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने में निभा रही महत्वपूर्ण भूमिकारायपुर. जिले के छोटे से गाँव गुखेरा जहाँ कक्षा तीसरी का एक छात्र अपनी प्रभावशाली वाणी और संस्कारों के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। शासकीय प्राथमिक शाला का छात्र टूकेश सोनवानी आज अपनी सहज अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास के कारण एक उभरते बाल वक्ता के रूप में पहचान बना रहा है। कम उम्र में ही टूकेश ने कहानियों और प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से अपनी झिझक को दूर किया और आत्मविश्वास विकसित किया। वह पूज्य गुरु घासीदास बाबा के विचारों से प्रेरित होकर “मनखे-मनखे एक समान” जैसे संदेशों को सरल भाषा में प्रस्तुत करता है, जो सीधे लोगों के दिल तक पहुंचते हैं।विद्यालय की प्रार्थना सभा हो, ग्रामीण सामाजिक आयोजन हों या शासकीय मंच हर जगह टूकेश की वाणी श्रोताओं को प्रभावित करती है। यह सकारात्मक बदलाव प्रोजेक्ट “पढ़े रायपुर, लिखे रायपुर” जैसी अभिनव पहल के माध्यम से संभव हुआ है। यह पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में संचालित की जा रहा है।इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए उसे संस्कार, अभिव्यक्ति और व्यक्तित्व विकास से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के नवाचार ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने और बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- 0- नारायणपुर के युवाओं को मिला रोजगार का अवसररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संबल केंद्र रायपुर दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसका एक प्रेरक उदाहरण नारायणपुर जिले के श्री सौनारू राम साहू एवं श्री गोविंद कुमार नाग हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर नई राह बनाई है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार में बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले से आए इन दोनों दिव्यांगजनों को रायपुर स्थित संबल केन्द्र में 3 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें क्षतिग्रस्त सहायक उपकरणों की मरम्मत की तकनीकी जानकारी दी गई।इस प्रशिक्षण से न केवल दोनों हितग्राहियों के कौशल में वृद्धि हुई है, बल्कि वे अब अपने क्षेत्र में अन्य दिव्यांगजनों की सहायता करने के लिए भी सक्षम हो गए हैं। इससे नारायणपुर जिले में इस योजना के सुचारू संचालन में भी मदद मिलेगी और स्थानीय स्तर पर दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।प्रशिक्षण के माध्यम से दिव्यांगजनों को अपने दैनिक जीवन के कार्यों को सुगमता से करने में सहायता मिलेगी तथा वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे।उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में स्थापित संबल केन्द्र रायपुर में बैटरी चलित ट्रायसाइकिल, हस्तचलित ट्रायसाइकिल सहित विभिन्न सहायक उपकरणों की मरम्मत की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही यहां कृत्रिम हाथ एवं पैर भी बनाए जाते हैं। ‘दिव्यांग गैरेज’ परियोजना के तहत उपकरणों की मरम्मत कर दिव्यांगजनों को राहत प्रदान की जाती है।शासन के प्रावधानों के अनुसार दिव्यांगजनों को प्रत्येक 5 वर्ष में उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं, किंतु उपयोग के दौरान उनमें आने वाली खराबियों के समाधान हेतु संबल केन्द्र एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरा है।यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता एवं सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध हो रही है।
- 0- शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने मंत्री गजेन्द्र यादव ने ली बैठकदुर्ग। दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के सभी शासकीय स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ आज शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने एक महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में शिक्षकीय व्यवस्था, अतिरिक्त कक्ष निर्माण, संधारण एवं नवनिर्माण कार्यों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए प्राचार्यों से विस्तृत संवाद किये। शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें नैतिक शिक्षा एवं संस्कारों से परिपूर्ण बनाने पर जोर दिया। साथ ही स्कूलों में दर्ज संख्या बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूल परिसर में स्वच्छ, अनुशासित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारी सभी की सुनिश्चित करने की बात कही।मंत्रोच्चार से होगी पढ़ाई की शुरुआतबैठक में शिक्षा, ग्रामोद्योग एवं विधी विधायी मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिकता के इस दौर में आगामी शिक्षण सत्र से स्कूलों में मंत्रोच्चार के साथ पढ़ाई की शुरुआत करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों में एकाग्रता, सकारात्मकता और अनुशासन का विकास होगा।साथ ही उन्होंने आगामी सत्र के पूर्व सभी स्कूलों में साफ-सफाई, संधारण, रंग-रोगन एवं आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने हेतु पालकों से सतत संपर्क बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।नवाचार गतिविधियों पर फोकसबैठक में मंत्री श्री यादव ने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षण कार्य में नवाचार गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षकों से उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा इंस्पायर अवार्ड में विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित करने को कहा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET और JEE के लिए प्रारंभ से ही लक्ष्य निर्धारित कर तैयारी कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को स्कूलों का सतत मॉनिटरिंग कर शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को भी कहा गया।बैठक के दौरान मंत्री श्री यादव ने प्राचार्यों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों को प्रेरित करने वाले मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं और उन्हें अनुशासन, समय प्रबंधन तथा लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व समझाएं। मंत्री श्री यादव ने कहा कि शासन की मंशा है कि शासकीय स्कूल भी गुणवत्ता, संसाधन और परिणाम के मामले में उत्कृष्ट बनें, इसके लिए सभी स्तर पर समन्वय और निरंतर प्रयास आवश्यक है।--
- -’भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी ने कहा: कांग्रेस ने हमेशा मातृशक्ति का अपमान किया है’-सदन में नारी शक्ति वन्दन अधिनियम का विरोध करके कांग्रेस व विपक्ष ने मातृशक्ति का घोर अपमान कियारायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी ने कहा है कि नारी शक्ति वन्दन अधिनियम का विरोध कर कांग्रेस पार्टी ने देश की मातृशक्ति का अपमान किया है। इसके विरोध में देश की मातृशक्ति कांग्रेस सहित समचे विपक्षी दल के लोगों के खिलाफ एक उग्र जन आक्रोश यात्रा निकालेगी।भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अवस्थी ने कहा कि कांग्रेस के महिला विरोधी चेहरे को देश की जनता के सामने लाने के लिए प्रदेश, संभाग, जिलों में प्रेसवार्ता की जाएगी। नारी शक्ति वन्दन अधिनियम का विरोध करने पर प्रदेश की महिलाएँ उग्र हो चुकी हैं। श्रीमती अवस्थी ने बताया कि 20 एवं 21 अप्रैल को प्रदेश में जन आक्रोश महिला पदयात्रा निकालकर कांग्रेस की महिला विरोधी चेहरे को उजागर किया जाएगा। इसके साथ ही 23 एवं 24 अप्रैल को जन आक्रोश महिला सम्मेलन का आयोजन रखकर महिला हितैषी बिल का विरोध करने पर कांग्रेस पार्टी एवं समूचे विपक्ष का चेहरा बेनकाब किया जाएगा।रायपुर में निकाला जाएगा नारी जन आक्रोश रैलीमहिला मोर्चा की जन आक्रोश पदयात्रा 20 अप्रैल को दोपहर 03 बजे इंडोर स्टेडियम से शुरू होगा। नारी जन आक्रोश पदयात्रा इंडोर स्टेडियम से लेकर सुभाष स्टेडियम तक होगी। पदयात्रा के बाद सुभाष स्टेडियम में एक बड़ी सभा होगी। सभा में प्रदेश की सभी महिला सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, महापौर, नगर पंचायत अध्यक्ष - उपाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष विभिन्न समाजिक संगठन, सहित महिला मोर्चा की कार्यकर्ता शामिल होगी।
- रायपुर।. पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। इस नवाचार को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित “इनोवेटर्स टू इंडस्ट्री कनेक्ट” समिट में प्रदर्शित करने के लिए चयनित किया गया है। यह समिट 23 अप्रैल 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जहां देशभर के प्रमुख बायोमेडिकल इनोवेटर्स और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।इस सिकल सेल डायग्नोस्टिक किट की खोज एमआरयू के वैज्ञानिक डॉ. जगन्नाथ पाल, डॉ. योगिता राजपूत एवं उनकी टीम द्वारा किया गया है। इस किट के अनुसंधान में एमआरयू की नोडल ऑफिसर डॉ. मंजुला बेक का विशेष सहयोग रहा है। यह किट विशेष रूप से नवजात शिशुओं में सिकल सेल एनीमिया के शीघ्र निदान तथा एंटीनेटल (गर्भावस्था के दौरान) जांच को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।आईसीएमआर (ICMR) के “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर से चयनित शीर्ष 10 तकनीकों में इस किट को स्थान मिला है। इस सूची में आईआईटी गुवाहाटी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली तथा टाटा मेमोरियल सेंटर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। ऐसे में इस उपलब्धि को संस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।इस नवाचार के लिए 6 फरवरी 2026 को इंडियन पेटेंट के लिए आवेदन भी पहले ही किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को आईसीएमआर (ICMR) के एक्स्ट्राम्यूरल फंड द्वारा स्पॉन्सर किया गया था, जिससे शोध को आवश्यक सहयोग मिला। यह उपलब्धि क्षेत्र में सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी के शीघ्र और सटीक निदान की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।आईसीएमआर (ICMR) के तहत “मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र” पहल के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम टेक्नोलॉजी शोकेसिंग और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य बायोमेडिकल इनोवेशन को उद्योग से जोड़ना, पेटेंट लाइसेंसिंग को प्रोत्साहित करना और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूत बनाना है।इस कॉन्क्लेव में चयनित तकनीकों को नवीनतम मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रदर्शित करने, इंडस्ट्री लीडर्स के साथ सीधे संवाद स्थापित करने तथा कमर्शियलाइजेशन के अवसर तलाशने का मंच मिलेगा।एमआरयू, रायपुर की टीम को इस किट के प्रदर्शन के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया है। उन्हें इवेंट में भाग लेने हेतु पंजीयन, तकनीक का एक पेज का फ्लायर तथा “मेक इन इंडिया” से संबंधित अंडरटेकिंग निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, प्रतिभागियों को अपनी विकसित किट के साथ कार्यक्रम में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है।इस उपलब्धि पर डीन डॉ. विवेक चौधरी ने कहा कि संस्थान में शोध और नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं। यह उपलब्धि प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।वहीं, अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि यह नवाचार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाला है और इससे सिकल सेल जैसी बीमारियों के समय पर निदान में बड़ी मदद मिलेगी।यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है, बल्कि देश में बायोमेडिकल इनोवेशन को नई दिशा देने वाली पहल के रूप में भी देखी जा रही है।
- बालोद ।अगर इरादे मजबूत हों और अवसर मिल जाए, तो अभाव के बीच भी खुशियों के फूल खिल सकते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है ग्राम सिरपुर की रहने वाली नन्हीं भाविका राणा की, जिसका चयन 'शिक्षा का अधिकार' (RTE) के अंतर्गत हुआ है। यह महज एक स्कूल में दाखिला नहीं है, बल्कि एक पूरे परिवार के बेहतर भविष्य की ओर बढ़ता कदम है।भाविका का परिवार एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आता है। परिवार में माता-पिता सहित कुल 6 सदस्य हैं। घर की आर्थिक स्थिति का आधार पिता नरेश कुमार की कड़ी मेहनत है, जो किसानी और मिस्त्री का काम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके पास मात्र 1.50 एकड़ कृषि भूमि है, जिससे गुजर-बसर करना चुनौतीपूर्ण होता है। माता भी अपने स्तर पर मेहनत-मजदूरी कर पिता का हाथ बंटाती हैं।भाविका के चयन की खबर जैसे ही घर पहुँची, पूरे परिवार में उत्सव जैसा माहौल हो गया। भाविका की खुशी का तो ठिकाना ही नहीं है। वह बड़े उत्साह से सबको बता रही है कि "अब मैं डौण्डीलोहारा पढ़ने जाऊंगी।" उसकी आँखों की चमक यह बताने के लिए काफी है कि वह नए माहौल में जाने और कुछ नया सीखने के लिए कितनी आतुर है।माता चित्रलेखा और पिता नरेश कुमार का हमेशा से यह सपना था कि उनकी बेटी भी शहर के अच्छे माहौल में शिक्षा प्राप्त करे। वे कहते हैं, हम चाहते थे कि हमारी बच्ची भी ग्रामीण परिवेश की सीमाओं से बाहर निकले और अन्य बच्चों की तरह शहर जाकर पढ़ाई करे। हमें खुशी है कि आरटीई के जरिए उसे वह माहौल मिलेगा जिससे वह पढ़ाई और अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ सके।"यहाँ न केवल नन्हीं भाविका के सपनों को 'शिक्षा का अधिकार' (RTE) के तहत पंख मिले हैं, बल्कि परिवार को बुनियादी सुविधाओं और आर्थिक संबल की सुरक्षा भी मिली है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपना 'पक्का घर' मिला है। अब परिवार कच्चे मकान की चिंताओं से मुक्त होकर एक सुरक्षित छत के नीचे रहता है। इतना ही नहीं, महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ भी भाविका की माता को मिल रहा है। हर महीने सीधे बैंक खाते में आने वाली सहायता राशि ने परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों और बेटी की पढ़ाई के खर्चों में बड़ी राहत प्रदान की है।भाविका के पिता नरेश राणा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास से हमें सिर छिपाने को पक्की छत मिली, महतारी वंदन से आर्थिक मजबूती आई और अब आरटीई के माध्यम से हमारी बेटी का भविष्य सुरक्षित हो रहा है। हम मुख्यमंत्री जी के बहुत आभारी हैं कि उनकी योजनाओं से हम जैसे गरीब परिवारों का जीवन आसान हो रहा है।
- -नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी किए निर्देश-महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण हेतु गहन जन-जागरूकता अभियान के आयोजन और समन्वय के लिए दिए निर्देशबिलासपुर । नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकों, नारी शक्ति वंदन सम्मेलनों और रोड-शोज के आयोजन एवं आवश्यक समन्वय के लिए राज्य के सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने मंत्रालय से सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन द्वारा एक विशेष अल्पकालिक एवं गहन जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में ये अभियान संचालित किए जाएंगे।नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र के माध्यम से इन जन-जागरूकता अभियानों के आयोजन एवं समन्वय के संबंध में सभी निकायों को जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार आवश्यक बुनियादी ढांचा (छाया, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था) और स्थल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। महिला सशक्तीकरण से संबंधित जन-जागरूकता अभियान के प्रथम चरण में संबंधित निकायों को विशेष सामान्य सभा आहूत कर कार्यक्रम की महत्ता पर विशेष चर्चा एवं संकल्प पारित करने को कहा गया है। राज्य शासन की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं को आमजनों तक पहुंचाने एवं इसके लिए जागरूक करने महिला हितग्राहियों, स्वसहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय जमीनी नेटवर्क को सक्रिय कर हितग्राहियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।विभाग ने विभागीय अभिसरण के जरिए जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में विभिन्न योजनाओं के लाभ की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने सभी विभागों से आवश्यक समन्वय स्थापित कर स्टॉल व अन्य उपाय करने के निर्देश निकायों को दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य शासन की इस सर्वोच्च प्राथमिकता के अंतर्गत संचालित कार्यो का संपादन कर किए गए कार्यों एवं कार्यवाहियों की जानकारी संचालनालय को भेजना सुनिश्चित करने को कहा है।
- बिलासपुर /भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, बिलासपुर के स्काउटर एवं गाइडर 15 अप्रैल 2026 को नेपाल में आयोजित प्राकृतिक अध्ययन (जिला हाइक) के लिए उत्साहपूर्वक रवाना हुए। यह दल बिलासपुर के नेहरू चौक से बस द्वारा प्रस्थान किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार टांडे एवं जिला मुख्य आयुक्त श्री चंद्रप्रकाश बाजपेयी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। उन्होंने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए इस यात्रा को ज्ञानवर्धक और अनुशासनपूर्ण बनाने की प्रेरणा दी। इस हाइक में कुल 40 दल भाग ले रहे हैं, जो विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रतिभागियों को इस दौरान देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।यह यात्रा साहसिक गतिविधियों के साथ-साथ प्रकृति के निकट रहकर सीखने, आत्मनिर्भरता विकसित करने और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। स्काउट्स एवं गाइड्स का यह प्रयास युवाओं में अनुशासन, सहयोग और सामाजिक समरसता की भावना को प्रोत्साहित करेगा।
- बिलासपुर। राज्य शासन द्वारा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में 37 अधिकारियों-कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए हैं। इनमें मुख्य नगर पालिका अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी से लेकर राजस्व निरीक्षक, राजस्व उप निरीक्षक, सहायक राजस्व निरीक्षक, लेखापाल और सहायक ग्रेड-2 तक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों-कर्मचारियों को सात दिनों के भीतर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयवाधि में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर वर्तमान पदस्थापना स्थल से वेतन आहरण नहीं होगा। इसके उल्लंघन की स्थिति में नियंत्रण अधिकारी के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
- -प्रदेश कार्यालय में श्री सिंह एवं मुख्यमंत्री श्री साय करेंगे पत्रकार वार्ता को संबोधितरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री व राज्यसभा सांसद अरुण सिंह आज 19 अप्रैल को अपने एक दिवसीय प्रवास पर रायपुर पहुँचेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह सुबह 08 बजे राजधानी रायपुर स्थित स्वामी विवेकानंद विमानतल पहुँचेंगे। वहाँ से विमानतल से भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर जाएंगे एवं नारी शक्ति वन्दन अधिनियम को लेकर प्रदेश भाजपा के द्वारा कार्यों की समीक्षा करेंगे एवं आगामी कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री श्री सिंह कल 19 अप्रैल को भाजपा प्रदेश कार्यालय (कुशाभाऊ ठाकरे परिसर) में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ दोपहर 12 बजे प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे। प्रेस वार्ता के बाद श्री सिंह दोपहर 02ः35 बजे दिल्ली रवाना होंगे।
- -संयुक्त टीम की ताबड़तोड़ छापेमारी-सुरंगों में घुसकर कार्रवाई, उपकरण भी बरामद, प्रशासन ने बढ़ाई सख्तीरायपुर । कोरिया जिला के पटना तहसील अंतर्गत देवखोल जंगल में अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने व्यापक कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में कोयला जब्त किया है। खनिज, वन, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने शनिवार को सुबह से सघन अभियान चलाकर अवैध सुरंगों को ध्वस्त किया और मौके से करीब 150 बोरी यानी 6 टन 61 किलो अवैध कोयला बरामद किया।सुरंगों में घुसकर की गई कार्रवाई, उपकरण भी जब्तजिले में गठित टास्क फोर्स के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान में एसडीएम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने सुरंगों के भीतर प्रवेश कर कार्रवाई की और कोयले के साथ-साथ फावड़ा, गेती, विद्युत पंप, फुटबॉल पाइप तथा बड़ी मात्रा में बिजली के तार भी जब्त किए। इससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध उत्खनन संगठित रूप से संचालित किया जा रहा था।कानूनी प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्जइस मामले में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 की धारा 71 तथा खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 से 23 (ख) के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।पहले भी बंद की गईं खदानें, फिर दोहराई जा रही गतिविधियांवन विभाग के अनुसार देवखोल क्षेत्र में पूर्व में भी अवैध खदानों को ब्लास्ट कर बंद किया गया था। एसईसीएल के माध्यम से सुरंगों को सील करने की कार्रवाई लगातार की जा रही है, लेकिन कुछ लोग इन्हें दोबारा खोलने का प्रयास करते हैं। हाल ही में पटना पुलिस द्वारा भी 3 टन 200 किलो अवैध कोयला जब्त कर बीएनएस की धारा 106 के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।प्रशासन की सख्ती, लगातार निगरानीजिला खनिज अधिकारी ने बताया कि जिले में अवैध कोयला उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।वनमंडलाधिकारी ने भी कहा कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नियमित अभियान चलाया जाएगा और आगे और सख्ती बरती जाएगी।ग्रामीणों के लिए रोजगार के विकल्प उपलब्धप्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में आजीविका के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि लोग अवैध गतिविधियों से दूर रहें। वी-बीजी रामजी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन) के तहत स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। ग्राम पंचायत मुरमा एवं आसपास के क्षेत्रों में 20.07 लाख रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हैं, जिनमें भूमि समतलीकरण, डबरी निर्माण और तालाब गहरीकरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 54 लाख रुपये के 30 कार्य प्रस्तावित हैं, जिन्हें मांग के आधार पर क्रियान्वित किया जाएगा।कलेक्टर के निर्देश, वैकल्पिक आजीविका पर जोरजिला कलेक्टर ने इस जोखिमपूर्ण कार्य से ग्रामीणों को दूर रहने की अपील करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों और स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिला पंचायत के सीईओ को आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
- -आयुष्मान भारत योजना में छत्तीसगढ़ को मिला राष्ट्रीय सम्मान राज्य की पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेन्द्रित स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमाण: मुख्यमंत्री श्री साय-यह सम्मान निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम: स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवालरायपुर / आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा 17 एवं 18 अप्रैल 2026 को पुणे (महाराष्ट्र) में आयोजित चिंतन शिविर में देश के सभी राज्यों के मध्य छत्तीसगढ़ को "बड़े राज्यों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य" (Best Performing Large State) के रूप में दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ को ‘हाई ट्रिगर एफिकेसी’ श्रेणी में संदिग्ध क्लेम की सटीक पहचान और उनके प्रभावी विश्लेषण के लिए तथा ‘टाइमली प्रोसेसिंग ऑफ सस्पिशियस क्लेम्स’ श्रेणी में संदिग्ध दावों के त्वरित और समयबद्ध निपटान के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ है।छत्तीसगढ़ में उन्नत आईटी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, सुदृढ़ क्लेम ऑडिट तंत्र तथा ट्रिगर-आधारित निगरानी प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते संदिग्ध प्रकरणों की समय पर पहचान और उनके त्वरित निराकरण में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। अस्पतालों के साथ बेहतर समन्वय और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से क्लेम प्रोसेसिंग की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है तथा अनावश्यक विलंब में कमी आई है, जिससे योजना के लाभार्थियों को समयबद्ध, सहज और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हो रही हैं। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी सुदृढ़ता को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश सरकार की जनकेन्द्रित सोच और सेवा-भावना को भी प्रतिबिंबित करती है।इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष्मान भारत योजना में छत्तीसगढ़ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान राज्य की पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेन्द्रित स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है, और इसी दिशा में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, सुदृढ़ प्रबंधन और सतत सुधार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों और सभी सहयोगी संस्थानों को देते हुए विश्वास जताया कि छत्तीसगढ़ भविष्य में भी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करता रहेगा।इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से राज्य सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए संकल्पित है और यह उपलब्धि स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक टीम तथा सभी सहयोगी संस्थानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा।
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रूचि नही लेने पर आवास स्वीकृति की जाएगी निरस्त
दुर्ग/कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में सभी नगर निगम आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (नगर पालिका परिषद) एवं नगर पंचायत अधिकारियों की बैठक लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अपूर्ण एवं अप्रारंभ कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। उन्होंने हितग्राहियों को निर्माण कार्य में सक्रिय रूप से प्रेरित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में हितग्राहियों से सतत संपर्क बनाए रखते हुए निर्माण कार्यो की नियमित निगरानी करें, ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर प्राप्त किया जा सके।
कलेक्टर ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप आवास निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कर हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जाए। जिन हितग्राहियों की निर्माण कार्य में रुचि नहीं है, उनकी बैठक लेकर उन्हें समझाइश दी जाए, इसके बावजूद रूचि नही लेने पर उनकी आवास स्वीकृति निरस्त करने की कार्यवाही करने को कहा। इसके साथ ही जिन हितग्राहियों ने अपने अंशदान की पूरी राशि जमा कर दी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आवास का पजेशन दिया जाए। कलेक्टर ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पात्र हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। बैठक में अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और हितग्राहियों से निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही ठेकेदारों को कार्य में तेजी लाने के लिए कहा गया। कलेक्टर श्री सिंह ने निर्देश देते हुए कहा कि सभी लंबित कार्यों को मई माह तक हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि हितग्राहियों को शीघ्र लाभ मिल सके। बैठक में नगर निगम भिलाई आयुक्त श्री राजीव पाण्डेय, नगर निगम दुर्ग आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल, नगर निगम भिलाई चरोदा आयुक्त श्री दशरथ राजपूत, नगर निगम रिसाली आयुक्त श्रीमती मोनिका वर्मा सहित सभी मुख्य नगर पालिका अधिकारी उपस्थित थे। -
02 हाइवा व 03 ट्रैक्टर ट्राली जप्त
बिलासपुर/कलेक्टर बिलासपुर के निर्देशानुसार एंव उप संचालक के मार्गदर्शन मे जिला बिलासपुर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एंव भण्डारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। खनिज अमला बिलासपुर द्वारा सकरी, गनियारी, तुरकाडीह, कोनी, मस्तूरी, पचपेड़ी, जोंधरा, गोपालपुर, कुकुरदिकला, भिलोनी, मानिकचौरी क्षेत्र की जाँच की गयी। जाँच के दौरान सकरी क्षेत्र में खनिज गिट्टी का परिवहन करते 1 हाइवा वाहन को जप्त किया गया। पचपेड़ी क्षेत्र में खनिज ईट मिट्टी का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया। गोपालपुर क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। जोंधरा क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली वाहन को जप्त किया गया।मानिकचौरी क्षेत्र से खनिज रेत का परिवहन करते 1 ट्रैक्टर ट्राली को जप्त किया गया। इस प्रकार जप्त कुल 05 वाहनों को पुलिस थाना सकरी व पचपेड़ी कि अभिरक्षा में रखा गया है। खनिजों के अवैध उत्खनन,परिवहन, और भण्डारण पर खनिज विभाग,राजस्व विभाग व पुलिस विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। -
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सौंपा चेक, राज्य में पहली बार किसी खिलाड़ी को दी गई है इतनी बड़ी प्रोत्साहन राशि
बिलासपुर/ भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली संजू देवी को राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी प्रोत्साहन राशि दी गई है। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह राशि सौंपी। श्री साव ने इस दौरान बिलासपुर के चिंगराजपारा कबड्डी क्लब को कबड्डी मैट भी प्रदान किया।
संजू देवी को उनके शानदार खेल की वजह से पिछले साल नवम्बर में बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी विश्वकप में मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया था। कबड्डी विश्वकप के फाइनल में भारत को मिले 35 प्वाइंट्स में से 16 प्वाइंट्स अकेले संजू ने दिलाए थे। सेमी-फाइनल सहित अन्य मैचों में भी उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत को चैंपियन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
संजू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्य की पहली कबड्डी खिलाड़ी है। कबड्डी विश्व कप के साथ ही उन्होंने पिछले साल मार्च में ईरान में आयोजित एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था और भारत को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। कोरबा के छोटे से गांव केराकछार की श्रमिक दंपति की संतान 23 साल की संजू राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बिलासपुर के बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में जुलाई-2023 से प्रशिक्षण ले रही है।
उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने संजू देवी को सम्मानित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य में लगातार खेल और खिलाड़ियों की तरक्की व बेहतरी के लिए काम हो रहे हैं। संजू देवी ने अपने बेहतरीन खेल की बदौलत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने अपने उत्कृष्ट खेल से देश को दो-दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक दिलाया है और अपने खेल कौशल से मोस्ट वेल्युबल प्लेयर बनी हैं। छत्तीसगढ़ की बेटी का यह प्रदर्शन राज्य का मान-सम्मान और गौरव बढ़ाने वाला है। उन्होंने संजू देवी को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे आने वाले समय में भी इसी तरह हमारे राज्य और देश का नाम रोशन करती रहेंगी।
उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि राज्य में जब ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी हों तो हमारी जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाएं और प्रोत्साहित करें। हमारे खिलाड़ियों को... और विशेषकर लड़कियों को अच्छा खेलने का प्रोत्साहन मिले, इसके लिए सरकार संजू देवी को 50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दे रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अभी हाल ही में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी की है। बस्तर ओलंपिक और सरगुजा ओलंपिक के भी वृहद आयोजन किए गए हैं।
श्री साव ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में लगातार खेल प्रतियोगिताएं चलती रहें, चाहे वो सरकार के माध्यम से हों, अन्य संस्थाओं के माध्यम से हों या खेल संघों के माध्यम से हों। खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने बजट में पर्याप्त प्रावधान किए हैं। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक श्रीमती तनुजा सलाम, छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ के अध्यक्ष श्री शशिकांत बघेल और संजू देवी के कोच श्री दिल कुमार राठौर सहित राज्य शासन के विभिन्न अकादमियों में प्रशिक्षण ले रहे खिलाड़ी, कबड्डी संघ के पदाधिकारी एवं विभागीय अधिकारी भी सम्मान समारोह में मौजूद थे।
जुनून, कड़ी मेहनत, मानसिक मजबूती, समर्पण और संघर्ष का नाम संजू देवी रावत
दमदार खेल और विपक्षी टीम के पाले में जाकर अपनी टीम के लिए अंक बटोरने की काबिलियत की वजह से संजू देवी को नवम्बर-2025 में बांग्लादेश में हुए कबड्डी विश्वकप में टूर्नामेंट का मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया। फाइनल और सेमीफाइनल सहित शुरूआती मैचों में भी निर्णायक क्षणों में उसने टीम की जीत सुनिश्चित करने वाले अंक बटोरे। संजू छत्तीसगढ़ की पहली अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी है। बांग्लादेश में कबड्डी विश्व कप खेलने के साथ ही वह मार्च-2025 में ईरान में हुए एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में देश के लिए खेल चुकी है। ईरान में भी उसने उम्दा प्रदर्शन किया था।
संजू ने गरीबी व अभावों के बीच संघर्ष और कड़ी मेहनत से ये उपलब्धियां हासिल की हैं। वे खेल के प्रति अपने जुनून, समर्पण, अनुशासन, मानसिक मजबूती, कठोर परिश्रम और संघर्ष से यहां तक पहुंची हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के अपने जुनून और जज्बे के बीच उसने जो मानसिक मजबूती दिखाई है, वह दुर्लभ है। अपनी लगन, कड़ी मेहनत और कबड्डी के प्रति जुनून से उन्होंने एक छोटे से गांव से निकलकर दो-दो अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत को चैंपियन बनाने में महती भूमिका निभाई है।
संजू की सफलता और उपलब्धियां खेल में अपना करियर बनाने की सोच रहे बच्चों और युवाओं को प्रेरित करने वाली है। बिलासपुर के शासकीय कबड्डी अकादमी में अपने खेल को तराशने वाली संजू कहती है कि बड़े स्तर पर सफल होने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना जरूरी है। बाधाओं के बीच पहली सीढ़ी पार करने के बाद ही आपको दूसरी सीढ़ी चढ़ने का मौका मिलता है।
लगातार अच्छे प्रदर्शन से मिली भारतीय टीम में जगह
संजू ने अपने गांव केराकछार से कबड्डी विश्व कप तक के सफर के बारे में बताया कि उन्होंने जनवरी-2024 में कोलकाता में आयोजित ईस्ट जोन इंटरयुनिवर्सिटी टूर्नामेंट में और जनवरी-2025 में भटिंडा में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में बिलासपुर विश्वविद्यालय की ओर से तथा विशाखापट्टनम, तमिलनाडु, नागपुर, महासमुंद और भजियापार (महाराष्ट्र) के ऑल इंडिया टूर्नामेंट में राज्य की ओर से भागीदारी की है।
वर्ष-2024 में छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ द्वारा आयोजित चयन स्पर्धा में अच्छे प्रदर्शन के फलस्वरूप इंडिया कैंप के लिए संजू का चयन हुआ। इंडिया कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर ईरान में हुए एशियन कबड्डी चैम्पियनशिप के लिए उन्हें भारतीय टीम में स्थान मिला। इसमें लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उन्हें महिला कबड्डी वर्ल्ड कप की टीम में भी शामिल किया गया। वे भारतीय टीम के लिए गांधी नगर और सोनीपत में आयोजित चार कैंपों में शामिल हो चुकी हैं।

















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