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- -बीसी सखी और डिजिटल सेवा केंद्र के माध्यम से बदली जिंदगी, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणारायपुर । राज्य शासन की महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि स्वरोजगार अपनाकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं। इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के ग्राम छतरंग की श्रीमती सुशीला सिंह की कहानी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी है।कभी कृषि मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाली श्रीमती सुशीला सिंह आज बीसी सखी के रूप में कार्य करते हुए डिजिटल सेवा केंद्र संचालित कर रही हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी और परिवार की अधिकांश जिम्मेदारियां उन्हीं पर थीं। सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था।इसी दौरान उन्हें शिवा स्व-सहायता समूह की जानकारी मिली और उन्होंने समूह की सदस्यता ग्रहण की। समूह से जुड़ने के लगभग छह माह बाद उन्हें कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के तहत ऋण उपलब्ध हुआ। प्राप्त राशि में से 5 हजार रुपये का उपयोग कर उन्होंने बीसी सखी के रूप में कार्य प्रारंभ किया, जिससे उनकी आय में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी।आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर श्रीमती सुशीला सिंह ने लैपटॉप खरीदकर फोटोकॉपी एवं ऑनलाइन सेवा केंद्र की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कम्प्यूटर, पासबुक प्रिंटर मशीन सहित अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे और ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना प्रारंभ किया। व्यवसाय के विस्तार के लिए उन्होंने स्व-सहायता समूह से 50 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण भी प्राप्त किया।वर्तमान में उनके व्यवसाय में लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश है तथा अब तक उन्हें करीब 2.70 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हो चुका है। उनकी वार्षिक आय लगभग 1.40 लाख रुपये है, जबकि मासिक आय 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आज वे अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं।श्रीमती सुशीला सिंह का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन आया है। बढ़ती आय के साथ वे नियमित रूप से ऋण का भुगतान भी कर रही हैं और आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं। वे राज्य शासन की आजीविका एवं महिला सशक्तिकरण योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि इन पहलों ने उन्हें गरीबी से उबरने, आत्मविश्वास प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि उचित मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त बन सकती हैं, बल्कि अपने परिवार, गांव और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
- -आधुनिक अधोसंरचना से व्यापार, रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति-प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को मिलेगा आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय व्यापारिक परिसररायपुर ।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा रायपुर के डूमरतराई में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण समारोह अब 8 जुलाई 2026 को आयोजित किया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का लोकार्पण एवं नामकरण कर इसे प्रदेशवासियों और व्यापारियों को समर्पित करेंगे। समारोह की अध्यक्षता आवास एवं पर्यावरण, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी करेंगे।उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में 5 जुलाई 2026 को प्रस्तावित था, किन्तु अपरिहार्य कारणों से इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह समारोह 8 जुलाई को आयोजित किया जा रहा है।गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह अत्याधुनिक थोक बाजार व्यापारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुगम यातायात व्यवस्था, सुव्यवस्थित व्यापारिक अवसंरचना तथा आवश्यक नागरिक सुविधाओं का समुचित प्रावधान किया गया है। यह बाजार रायपुर सहित पूरे प्रदेश के व्यापारिक विकास को नई दिशा देने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करेगा।डूमरतराई व्यापारिक परिसर का विकास चरणबद्ध रूप से किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए, जिससे व्यापारियों को आधुनिक एवं सुव्यवस्थित व्यावसायिक सुविधाएँ उपलब्ध हुईं। वहीं द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से विभिन्न श्रेणियों की 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं समग्र थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिलेगी।यह नवीन थोक बाजार प्रदेश के व्यापार, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसरों का सृजन करते हुए रायपुर को एक सुदृढ़ एवं सुव्यवस्थित व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली यह परियोजना उन्हें सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक व्यावसायिक वातावरण उपलब्ध कराएगी।लोकार्पण एवं नामकरण समारोह में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री राजेश मूणत, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा एवं श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, गणमान्य नागरिक तथा मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे।डूमरतराई का नवीन थोक बाजार छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की गुणवत्ता, नवाचार एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- - स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन का बना प्रभावी माध्यमरायपुर ।छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण को नई गति देने के उद्देश्य से ग्राम पंचायतों में उपलब्ध कराए गए ईवी गार्बेज रिक्शा और ईवी लोडर वाहन बहुआयामी बदलाव के वाहक बन रहे हैं। इन वाहनों के माध्यम से जहां गांवों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत हुई है, वहीं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को नियमित रोजगार और आय का नया अवसर भी प्राप्त हो रहा है। ईंधन रहित संचालन के कारण ये वाहन पर्यावरण संरक्षण और संचालन लागत में कमी की दृष्टि से भी प्रभावी साबित हो रहे हैं। बालोद जिले के जनपद पंचायत डौंडीलोहारा इसका एक उदाहरण बनकर उभरा है।बालोद जिले के जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री पंकज देव ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को लगभग 7.60 लाख रुपये की लागत से एक ईवी गार्बेज रिक्शा और एक ईवी लोडर वाहन उपलब्ध कराया गया है। ईवी गार्बेज रिक्शा के माध्यम से स्व-सहायता समूह की महिलाएं घर-घर पहुंचकर गीले एवं सूखे कचरे का पृथक संग्रहण कर रही हैं, जिससे गांवों में स्वच्छता व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हुई है। उन्होंने बताया कि ईवी लोडर वाहन ग्राम पंचायतों के लिए बहुउपयोगी साबित हो रहे हैं। इनका उपयोग भवन निर्माण सामग्री, कृषि उपज, घरेलू एवं किराना सामग्री सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में किया जा रहा है। कई महिला स्व-सहायता समूह इन वाहनों का उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। श्री पंकज देव ने बताया कि इन सभी वाहनों की खरीदी शासन के वित्तीय नियमों के अनुरूप जेम पोर्टल के माध्यम से पूर्ण पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया अपनाते हुए न्यूनतम (एल-1) दर पर की गई है। इससे सार्वजनिक धन का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होने के साथ खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बनी रही। उन्होंने कहा कि ईवी वाहनों के संचालन में पेट्रोल अथवा डीजल की आवश्यकता नहीं होती। केवल चार्जिंग से संचालित होने के कारण ईंधन व्यय में उल्लेखनीय बचत हो रही है, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
- रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री श्री मोदी जी का नहीं, बल्कि पूरे 140 करोड़ भारतवासियों का सम्मान, भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और विश्व मंच पर सशक्त होती उसकी भूमिका का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी कूटनीति ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है तथा मित्र देशों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व समुदाय में अपनी भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ वैश्विक शांति, सहयोग और साझा समृद्धि के लिए निरंतर योगदान देता रहेगा। file photo
- -कम लागत, अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी से खेती बनी लाभ का सौदा-आधुनिक कृषि तकनीक के साथ शासकीय योजनाओं का लाभ उठाकर किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोतरायपुर। राज्य शासन की किसान हितैषी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रभाव अब किसानों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने और शासन की योजनाओं का लाभ लेने से किसान कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं। बालोद जिले के ग्राम सोंहपुर के किसान श्री भूपेश कुमार साहू इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने आधुनिक खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है।श्री भूपेश कुमार साहू पहले पारंपरिक छिड़काव पद्धति से धान की बुवाई करते थे, जिसमें बीज, श्रम और लागत अधिक लगती थी। चार वर्ष पूर्व उन्होंने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में सीड ड्रिल मशीन से बुवाई शुरू की। इस तकनीक को अपनाने के बाद खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। कम मात्रा में बीज की आवश्यकता, रोपाई में लगने वाली मजदूरी की बचत तथा कतारबद्ध बुवाई के कारण फसल को पर्याप्त पोषण मिलने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई है। इससे कम समय और कम लागत में अधिक उपज प्राप्त हो रही है।आधुनिक तकनीक के साथ-साथ केंद्र और राज्य शासन की किसान कल्याणकारी योजनाओं ने भी उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत उन्हें प्रतिवर्ष छह हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिल रही है। वहीं कृषक उन्नति योजना के माध्यम से धान के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का लाभकारी मूल्य प्राप्त होने से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर खेतों का निरीक्षण कर उन्नत खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी दी जाती है, जिससे खेती और अधिक लाभकारी बन रही है।श्री भूपेश कुमार साहू बताते हैं कि पहले खेती में लागत अधिक और लाभ कम होता था, लेकिन सीड ड्रिल तकनीक अपनाने तथा शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने के बाद खेती लाभ का माध्यम बन गई है। अब कम खर्च में बेहतर उत्पादन प्राप्त हो रहा है और आय में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार की किसान हितैषी नीतियों और कृषि विभाग के सतत मार्गदर्शन से छोटे और सीमांत किसानों का खेती के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है तथा वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राज्य शासन द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
- -“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 कोरायपुर ।पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मानित करना है। “दीदी के गोठ” ने बीते एक वर्ष में महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री एव पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा द्वारा की जाएगी।कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएँ एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित होकर इस सफल यात्रा के साक्षी बनेंगे।विदित हो कि “दीदी के गोठ” के प्रथम एपिसोड का प्रसारण अगस्त 2025 में हुआ था, जो “लखपति दीदी” विषय पर केंद्रित था। इसके उपरांत प्रत्येक माह के द्वितीय गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों की समूह की महिलाओं द्वारा ड्रोन दीदी, एफपीसी, जेंडर, सरस मेला, वित्तीय जागरूकता, साइबर सुरक्षा, सरस मेला तथा “छत्तीसकला” ब्रांड जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सफलता की प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं। “दीदी के गोठ” की एकवर्षीय सफल यात्रा का विशेष प्रसारण 09 जुलाई 2026 को किया जाएगा।“दीदी के गोठ” ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। यह मंच न केवल संवाद का माध्यम बना है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बनकर उभरा है।कार्यक्रम में वर्षभर की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण, “दीदी के गोठ” में प्रतिभागिता करने वाली महिलाओं का सम्मान तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन- बिहान द्वारा सभी नागरिकों ,संबंधित हितधारकों, स्व सहायता समूहों, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद् ( कैबिनेट) की बैठक बुधवार, 08 जुलाई को शाम 4.00 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में होगी।
- -सहकारिता सप्ताह के समापन पर जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी का हुआ आयोजन-आधुनिक कृषि तकनीकों, सामूहिक भागीदारी और सहकारिता आधारित आर्थिक विकास पर दिया गया विशेष जोर-किसानों को प्रदान किया अल्पकालीन कृषि ऋण और मछली कीट, विजेता बालिकाओं को किया सम्मानितरायपुर। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक आयोजित सहकारिता सप्ताह का समापन कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम, कवर्धा में जिला स्तरीय कृषक संगोष्ठी के साथ हुआ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा भी उपस्थित रहीं। संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने, आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सहकारिता सप्ताह का समापन किसी अभियान का अंत नहीं, बल्कि नए संकल्प और नई शुरुआत का अवसर है। उन्होंने कहा कि आज हमें सहकारिता को नई दिशा देने का संकल्प लेना होगा और इसे केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर बहुआयामी विकास का मजबूत माध्यम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि सहकारिता का वास्तविक अर्थ है, सभी लोगों का एकजुट होकर साझा उद्देश्य के लिए कार्य करना। आज सहकारिता के माध्यम से धान उपार्जन और बैंकिंग जैसी व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि इसे कोल्ड स्टोरेज, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन, गैस एजेंसी संचालन तथा अन्य रोजगारमूलक गतिविधियों तक भी विस्तारित किया जाए। इससे किसानों और ग्रामीणों की आय बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में पहले 90 सहकारी समितियां थीं, लेकिन अब 40 नई समितियों के गठन के बाद उनकी संख्या बढ़कर 138 हो गई है। उन्होंने कहा कि आज महान शिक्षाविद् और राष्ट्रचिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती भी है। इसी ऐतिहासिक तिथि पर भारत सरकार ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करना तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में सहकारिता की भावना स्वाभाविक रूप से मौजूद है। बस्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां लोग मिल-जुलकर अनेक कार्य करते हैं, जो सहकारिता की सशक्त मिसाल है। उन्होंने कहा कि कबीरधाम का शक्कर कारखाना भी सहकारिता मॉडल की सफलता का उदाहरण है। गुजरात के बनासकांठा के अनुभव साझा करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि वहां सहकारिता के माध्यम से दुग्ध उत्पादन के साथ कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं और उसका लाभांश सभी सदस्यों में वितरित होता है। उन्होंने किसानों से सहकारिता को बहुआयामी जनआंदोलन बनाकर नए क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि सहकारिता का अर्थ है, साथ मिलकर कार्य करना और एक-दूसरे का सहयोग करना। उन्होंने कहा कि भारत के गांवों में प्राचीन काल से ही सहकारिता की भावना जीवंत रही है। गांवों में सुख-दुख, खेती-किसानी और सामाजिक कार्यों में लोग हमेशा मिलकर एक-दूसरे का साथ देते आए हैं, यही सहकारिता की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद इस क्षेत्र को नई दिशा और गति मिली है तथा आज मंत्रालय के पाँच वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा किसानों की मेहनत और समर्पण ने बनाया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता की वास्तविक ताकत और महत्व को सबसे बेहतर किसान ही समझते हैं। सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है और यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि जनभागीदारी का सशक्त आंदोलन बनकर उभरा है।कार्यक्रम में 08 किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण, मछली कीट प्रदान किया। कार्यक्रम में निबंध, प्रश्नोत्तरी और चित्रकला प्रतियोगिता में 15 विजेता बालिकाओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री बिसेषर पटेल, कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, किसान एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
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-छात्र सम्मेलन में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री
रायपुर । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने सोमवार को बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आयोजित व्याख्यान माला (छात्र सम्मेलन) को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अतुलनीय योगदान को लंबे समय तक भुलाने का प्रयास किया गया, जबकि उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका जीवन प्रत्येक विद्यार्थी और युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बचपन से ही उनमें राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के प्रति गहरा समर्पण था। कम आयु में ही वे विद्वान शिक्षाविद् बने और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने देशहित को सर्वोपरि मानते हुए हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना किया।श्री साव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विभाजन के समय प्रताड़ित और पीड़ित हिंदू परिवारों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने संयुक्त बंगाल के प्रस्ताव का दृढ़ता से विरोध किया, जिसके कारण आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने नई शिक्षा व्यवस्था में भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपरा को स्थान देने की सोच भी बहुत पहले प्रस्तुत की थी, जो आज देश में नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार हुआ है।श्री साव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अनुच्छेद-370 और कश्मीर में लागू परमिट प्रथा का खुलकर विरोध किया। उनका स्पष्ट संदेश था कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे। इसी संकल्प के साथ वे बिना अनुमति कश्मीर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया। उन्होंने यातनाएं झेलीं, उचित उपचार नहीं मिला और अंततः राष्ट्र की एकता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका यह सर्वोच्च बलिदान भारत की एकता और अखंडता के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।उप मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संघर्ष केवल उनके जीवनकाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके विचारों को साकार करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारतीय संविधान की मुख्य धारा से जोड़ा। साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को सम्मानपूर्वक भारतीय नागरिकता प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और उनके संघर्ष को सच्ची श्रद्धांजलि है।श्री साव ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के जिस मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, उसकी मजबूत नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान राष्ट्रनायकों ने रखी थी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेकर भारत को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित प्रकाश पटैरिया, अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव और जिला पंचायत के अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी भी छात्र सम्मेलन में शामिल हुए। - -बारिश के साथ दिखने लगा ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान का असररायपुर। मानसून की शुरुआत के साथ दुर्ग जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान 2.0 के सकारात्मक परिणाम अब गांव-गांव में दिखाई देने लगे हैं। अभियान के तहत निर्मित आजीविका डबरियां, नवा तरिया, चेक डैम, परकोलेशन पॉण्ड और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से लबालब भर रही हैं। इससे न केवल भू-जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी तथा अन्य आजीविका गतिविधियों के लिए वर्षभर पानी उपलब्ध हो सकेगा।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन तथा सीईओ जिला पंचायत श्री बजरंग कुमार दुबे के नेतृत्व में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान 2.0 और वीबी जी राम जी के प्रभावी समन्वय से जिले की 300 ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किए गए। जनभागीदारी से संचालित इस अभियान ने वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को नई गति दी है।एक ही वित्तीय वर्ष में जिले में 55,965 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, 20,518 कंटूर ट्रेंच, 9,663 सोख्ता गड्ढे, 1,324 रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 834 रिचार्ज पिट, 123 ग्राम तालाब, 26 चेक डैम, 15 परकोलेशन पॉण्ड तथा 28 बोरवेल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण किया गया। इन संरचनाओं में वर्षा जल का तेजी से संचयन होने से अभियान की उपयोगिता स्पष्ट रूप से सामने आने लगी है।जिले में निर्मित 30 आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं 'नवा तरिया-आय के जरिया' पहल के अंतर्गत बनाए गए 112 डबरी एवं तालाब भी बारिश के पानी से भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं से मत्स्य पालन, सिंचाई, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीणों को वर्षभर स्थायी जल स्रोत उपलब्ध होंगे।जिला प्रशासन का मानना है कि 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान केवल जल संरक्षण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के साथ आने वाले समय में जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
- -सहकारिता मंत्री कश्यप ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का किया अनावरणरायपुर। भारत सरकार द्वारा गठित 'सहकारिता मंत्रालय' की स्थापना के सफल 5 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित "सहकारी सप्ताह" का भव्य समापन जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर के प्रांगण में हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के सहकारिता एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों द्वारा बैंक के संस्थापक पं. वामन बलीराम लाखे के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरुआत की गई। इसके साथ ही बैंक परिसर में 'छत्तीसगढ़ महतारी' की प्रतिमा का गरिमामय अनावरण भी किया गया।समारोह के दौरान देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के भाषण का यूट्यूब चैनल के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया। अपने संबोधन में श्री शाह ने सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र किया, जिनमें 50,000 पैक्स (PACS) को ई-पैक्स में बदलना,त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना,दुनिया की सबसे बड़ी अन्न गोदाम श्रृंखला का निर्माण,सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) बनाना और देश भर में भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत आदि कार्य शामिल हैं।बैंक की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अपेक्षा व्यास ने प्रगति प्रतिवेदन पढ़ते हुए बैंक की शानदार उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष (31 मार्च 2026) की स्थिति में बैंक को 216 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सकल लाभ हुआ है। केंद्र सरकार की 'सहकार से समृद्धि' योजना के तहत बैंक द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्य हैं जिसमें माइक्रो एटीएम: बैंक से जुड़ी 682 सहकारी समितियों और 98 डेयरी समितियों में माइक्रो एटीएम का संचालन।कॉमन सर्विस सेंटर: समितियों के माध्यम से नागरिकों को 32 जरूरी सेवाएं दी जा रही हैं।जन औषधि केंद्र: 12 प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा सस्ते इलाज के लिए जन औषधि केंद्रों का संचालन।उज्ज्वला योजना: दुर्गम क्षेत्रों की 10 सहकारी समितियों के माध्यम से एलपीजी गैस का वितरण।इसके साथ ही पैक्स का कंप्यूटरीकरण और 132 नवीन सहकारी समितियों का गठन किया गया है।सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में सफल कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी लगभग 1300 सहकारी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करें और जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को "क्वांटिटी (मात्रा) के स्थान पर क्वॉलिटी (गुणवत्ता)" वाली खेती पर ध्यान देना चाहिए।विशिष्ट अतिथि और सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री श्री कनीराम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना से 2021 में सहकारिता मंत्रालय बना, जिसने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें इस दिशा में काम करना होगा ताकि हमारे अन्नदाता (किसानों) को कभी कर्ज लेने की आवश्यकता ही न पड़े। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदार नाथ गुप्ता ने भी सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और कृषि नवाचार पर अपने विचार रखे।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला सहकारी बैंक रायपुर के अध्यक्ष श्री निरंजन सिन्हा ने सहकारिता मंत्री का आभार व्यक्त किया, वहीं उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन किया।इस भव्य समारोह में जिला सहकारी बैंक दुर्ग के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन, राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रवीण दुबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्री संदीप यदु सहित सहकारिता विभाग की संयुक्त आयुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे और बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं के अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा और आभार प्रदर्शन बैंक के वरिष्ठ अधिकारी श्री एस.पी. चंद्राकर द्वारा किया गया।
- रायपुर । राज्यपाल श्री रमेन डेका ने सोमवार को भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित प्रणवानंद अकादमी में रोबोटिक्स लैबोरेट्री का लोकार्पण किया। इस लैबोरेट्री की स्थापना के लिए राज्यपाल द्वारा अपने स्वेछानुदान मद से राशि प्रदान की गई है ।इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स जैसे तकनीक हमारे जीवन को आसान बनाते है। लेकिन आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानव जीवन के कल्याण और समाज के विकास के लिए किया जाए।उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान केवल उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों से नहीं होती, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों से होती है जो ज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दें। प्रणवानंद अकादमी शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण को भी समान महत्व देती है यह प्रसन्नता का विषय है।राज्यपाल ने कहा कि आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता रोबोटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकें विश्व को नई दिशा दे रही हैं। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों को भी आत्मसात करना चाहिए। कोई भी नया आविष्कार या नवाचार मानवता के हित में होना चाहिए। मानव पर खुद का नियंत्रण होना चाहिए न कि कोई तकनीक उसे नियंत्रित करे।राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों का संदेश देते हुए कहा कि जीवन में संतोष का विशेष महत्व है। हमें जो प्राप्त है, उसमें प्रसन्न रहना सीखना चाहिए तथा कठिन परिश्रम, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव एवं चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन गिरने के बाद फिर से उठना और आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है।उन्होंने कहा कि समाज ने हमें क्या दिया, यह सोचने के बजाय हमें यह विचार करना चाहिए कि हम समाज को क्या दे सकते हैं। समाज के प्रति सेवा, सहयोग, संवेदनशीलता और पड़ोसियों के प्रति आत्मीयता की भावना हमारे जीवन में आनंद लाता है।कार्यक्रम में अकादमी के अध्यक्ष स्वामी श्री शिवरूपानंद ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्राचार्य श्रीमती नीति यदुवंशी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
- -राष्ट्रनिर्माण के लिए युवाओं को लक्ष्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनानी होगी : श्री चौधरी-वित्त मंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में युवाओं से किया संवाद-करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर साझा किए प्रेरक विचाररायपुर / देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।
- -रेशम विभाग की योजना से हितग्राहियों को 79,800 रुपए की सब्सिडी, तसर पालन से बढ़ेगी आयरायपुर / राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत बीजापुर जिले में रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में तसर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया।इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपए रही। इसमें राज्य शासन ने 79,800 रुपए की सब्सिडी प्रदान की, जबकि हितग्राहियों से केवल 11,400 रुपए का अंशदान लिया गया। इससे कम लागत में गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराकर तसर पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूहों से बेहतर उत्पादन की संभावना है। इससे हितग्राही वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन कर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल हितग्राहियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।रेशम विभाग ने बताया कि राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।
- रायपुर / वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
- रायपुर / बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।
- -समय पर खाद-बीज ने बढ़ाया अन्नदाताओं का विश्वास-मानसून की मेहरबानी और शासन की तैयारी से खेती को मिली नई रफ्तार, खेतों में लौटी रौनकरायपुुर / जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। आसमान में बादलों की आवाजाही तो थी, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूने पड़े थे। खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और बेहतर उत्पादन को लेकर किसान चिंतित थे। हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते अन्नदाता अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे थे। आखिरकार पिछले कुछ दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खुशी में बदल दिया। तपती धूप से तपी धरती पर जैसे ही वर्षा की बूंदें बरसीं, केवल मिट्टी ही नहीं महकी, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास के अंकुर फूट पड़े।मानसून की यह दस्तक केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। दूर-दूर तक फैले खेतों में अब पानी लबालब दिखाई दे रहा है। गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज, कृषि यंत्रों की आवाज, धान की रोपाई में जुटे किसान परिवार और प्रकृति का नव श्रृंगार ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। कहीं खेतों की जुताई अंतिम चरण में है तो कहीं किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में जुट गए हैं। वर्षा की हर बूंद मानो किसानों की मेहनत को नई शक्ति प्रदान कर रही है। यही वह समय है, जब धरती और अन्नदाता का अटूट रिश्ता सबसे अधिक सजीव दिखाई देता है। किसान पूरे विश्वास के साथ खेतों में उतरता है, क्योंकि उसे पता है कि आज की मेहनत ही आने वाले कल की समृद्धि की नींव बनेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी कर किसानों की खेती को मजबूत आधार प्रदान किया है। कृषि विभाग द्वारा मानसून से पहले ही गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जैसे ही वर्षा ने रफ्तार पकड़ी, किसान बिना किसी विलंब के खेती के कार्यों में जुट गए। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता के कारण बुआई और रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।कोरबा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अनुदानित दरों पर खाद एवं बीज सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को न तो बाजार में भटकना पड़ रहा है और न ही आवश्यक उर्वरकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अनुकूल वर्षा ने किसानों के उत्साह को नई उड़ान दी है।इसका उदाहरण करतला स्थित आदिवासी सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला। ग्राम कछार निवासी कृषक श्री घनश्याम राठिया, जो लगभग साढ़े छह एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने समिति से 12 बोरी यूरिया, 6 बोरी डीएपी तथा 4 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें न लाइन में लगना पड़ा और न ही किसी प्रकार का इंतजार करना पड़ा। समिति में सभी व्यवस्थाएं सुचारु हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो रहा है। शासन द्वारा रियायती दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से खेती की लागत कम हुई है और छोटे एवं मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिली है।श्री राठिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने और अच्छी बारिश होने से इस वर्ष खेती की शुरुआत बेहद अच्छी हुई है। अब पूरे परिवार के साथ धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है और उन्हें इस वर्ष अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बरसती यह वर्षा केवल खेतों को ही नहीं सींच रही, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और समृद्ध भविष्य की आशाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रकृति की अनुकंपा और शासन की दूरदर्शी व्यवस्था का यह प्रभावी समन्वय खेती-किसानी को नई गति दे रहा है। समय पर उपलब्ध खाद-बीज, अनुकूल मौसम और किसानों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया है कि इस खरीफ सीजन में अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
- प्रशासन की सक्रिय पहल से हड़मा राम ने समय पर शुरू की खरीफ की खेतीरायपुर / समय पर खाद, उन्नत बीज और कृषि ऋण मिल जाए तो खेती आसान हो जाती है। सुकमा जिले के किसान हड़मा राम मरकाम की कहानी इसका अच्छा उदाहरण है। जिला प्रशासन की सक्रिय पहल से उन्हें समय पर सभी आवश्यक सुविधाएं मिलीं, जिससे वे बिना किसी परेशानी के खरीफ फसल की तैयारी कर सके।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप सुकमा जिला प्रशासन ने खरीफ सीजन से पहले किसानों तक खाद, उन्नत बीज और अन्य कृषि सामग्री समय पर पहुंचाने की व्यवस्था की। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में दूरस्थ गांवों तक भी कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई, जिससे किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।सुकमा जिले के रानीबहाल गांव के प्रगतिशील किसान हड़मा राम मरकाम लगभग 32 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। खेती के लिए उन्हें छिंदगढ़ सहकारी समिति के माध्यम से 3 लाख 50 हजार रुपये का सब्सिडीयुक्त कृषि ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने समय पर खाद और उन्नत बीज खरीदे तथा खेती की सभी तैयारियां पूरी कर लीं।हड़मा राम मरकाम बताते हैं कि समय पर ऋण और कृषि सामग्री मिलने से उन्हें आर्थिक चिंता नहीं रही। वे बिना देरी के बोआई की तैयारी कर सके। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।जिला प्रशासन किसानों को उचित मूल्य पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है। कालाबाजारी, अवैध भंडारण और बिचौलियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीमें नियमित निरीक्षण कर रही हैं। इससे किसानों को सही समय पर और उचित कीमत पर कृषि सामग्री मिल रही है।यह पहल दिखाती है कि सरकार की किसान हितैषी योजनाओं और प्रशासन की समयबद्ध कार्यप्रणाली से किसानों का भरोसा मजबूत हो रहा है। समय पर मिली सहायता से किसान बेहतर खेती कर रहे हैं और उन्हें इस खरीफ सीजन में अच्छी उपज और अधिक आय की उम्मीद है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं मंत्रीगण, सांसद व विधायकगण होंगे शामिल- पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार भी होंगे मौजूदरायपुर / पंडवानी की अप्रतिम साधिका, पद्मविभूषण एवं डी.लिट. से सम्मानित डॉ. श्रीमती तीजन बाई को 8 जुलाई को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। संस्कृति विभाग द्वारा स्व. तीजन बाई को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पण का यह कार्यक्रम दोपहर 2 बजे महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, स्थित मुक्ताकाशी मंच से आयोजित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं जनप्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ के पद्मश्री एवं राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकार, साहित्यकार, संस्कृति कर्मी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहेंगे।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित लोक कलाकार अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस महान विभूति को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे, जिन्होंने पंडवानी जैसी लोकवाचिक परंपरा को गांव के चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। गीत, संगीत, पंडवानी, लोकगायन और अन्य लोककलाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व का स्मरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के उस स्वर्णिम अध्याय को नमन है, जिसे डॉ. श्रीमती तीजन बाई ने अपने संपूर्ण जीवन की साधना से रचा।पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ। उनके निधन से न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश और विश्व के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके साथ भारतीय लोककला का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय समाप्त हुआ, जिसने पंडवानी को नई प्रतिष्ठा, नई पहचान और वैश्विक सम्मान दिलाया।24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई का बचपन अत्यंत साधारण परिस्थितियों में बीता। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक मंच प्रदर्शन किया और उसी समय यह संकल्प लिया कि वे पंडवानी को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाएंगी। उस दौर में महिलाओं द्वारा पारंपरिक वेदमती शैली में बैठकर पंडवानी प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन उन्होंने साहस के साथ कपालिक शैली में खड़े होकर पंडवानी प्रस्तुत की। अपनी दमदार आवाज, सशक्त अभिनय और प्रभावशाली भावाभिव्यक्तियों से उन्होंने पंडवानी को नई पहचान दिलाई और इसे जन-जन तक पहुंचाया।प्रख्यात रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद डॉ. तीजन बाई ने 17 से अधिक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर न केवल इस लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। वे विश्व मंच पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बन गईं।पांच दशक से अधिक समय तक उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में जीवंत किया। उनके मंचन में गायन, अभिनय, संवाद, भावाभिव्यक्ति और लोकभाषा का अद्भुत समन्वय था। उन्होंने सिद्ध किया कि लोककला किसी क्षेत्र विशेष की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विरासत है।उनकी अनुपम कला साधना के लिए उन्हें पद्मश्री (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995), पद्मभूषण (2003), जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (2018), पद्मविभूषण (2019) तथा डी.लिट. (मानद उपाधि) सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। इन सम्मानों ने उनके गौरवशाली सांस्कृतिक योगदान को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्रदान की।संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम वास्तव में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण है। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला साधना, संघर्ष और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को साकार करेंगे।
- रायपुर। कभी भय और अनिश्चितता से घिरे जीवन जीने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए आज नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा अब आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि रोजगार और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीद है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), सुकमा द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने पर जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि वे आसानी से रोजगार या स्वरोजगार से जुड़ सकें।इस प्रशिक्षण से जुड़ी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि यहां हमें सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सिखाया जा रहा है। अब हमें विश्वास है कि हम अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान के साथ जीवन जी सकेंगे। इसके लिए हम सरकार और प्रशासन के आभारी हैं।इसी तरह पुनेम ज्योति कहती हैं कि रोजाना मिलने वाले प्रशिक्षण से हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है। ड्राइविंग सीखने के बाद हम रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभा सकेंगे।कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आज सुकमा के ये युवा आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ-साथ अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास योजनाओं की सार्थक सफलता का प्रेरक उदाहरण है।
- -चार नॉमिनी को सौंपी गई बीमा राशिरायपुर । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़े परिवारों के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना कठिन समय में आर्थिक सहारा बन रही है। सोमवार को जिला पंचायत कांकेर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी ने योजना के तहत चार मृतक हितग्राहियों के नामांकित परिजनों को बीमित राशि के चेक प्रदान किए।बीमा राशि कांकेर विकासखंड के ग्राम मनकेशरी निवासी भूपेश देवांगन और पवन पटेल तथा ग्राम बारदेवरी निवासी रामेश्वरी पटेल और तेजसिंह दनेलिया के निधन के बाद उनके नॉमिनी को प्रदान की गई। बिहान मिशन के पीआरपी और एफएलसीआरपी ने तत्परता से बीमा दावा तैयार कर संबंधित बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी कराई, जिसके बाद दावा स्वीकृत होने पर राशि का भुगतान किया गया। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में कांकेर विकासखंड में अब तक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के 9 बीमा दावों का सफलतापूर्वक निपटारा कर संबंधित परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
- -पुनर्वास नीति से मिला सम्मानजनक जीवन का नया अवसर, दंतेवाड़ा कलेक्टर कार्यालय में भृत्य पद पर नियुक्तिरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की "छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025" नक्सल प्रभावित परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है। इसी नीति के तहत दंतेवाड़ा जिले के नक्सल पीड़ित परिवार के सदस्य देवा मंडावी को शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है।देवा मंडावी, ग्राम धुरवापारा, अरनपुर (विकासखंड कुआकोण्डा) के निवासी हैं। उनके पिता स्वर्गीय बुधरा मंडावी नक्सल हिंसा से प्रभावित थे। जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की अनुशंसा और दंतेवाड़ा कलेक्टर की स्वीकृति के बाद देवा मंडावी को कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा), जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर नियुक्त किया गया है। वे शीघ्र ही अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।यह नियुक्ति गृह (सी-अनुभाग) विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार की गई है। नियुक्ति के साथ उन्हें सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन मैट्रिक्स लेवल-01 का वेतन, महंगाई भत्ता तथा शासन के नियमानुसार अन्य सभी सुविधाएं भी मिलेंगी।राज्य सरकार की यह पहल नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुनर्वास नीति के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे न केवल उनका भविष्य सुरक्षित हो रहा है, बल्कि शासन की संवेदनशील और जनकल्याणकारी सोच भी साकार हो रही है।
- रायपुर ।राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सौजन्य भेंट की।
- रायपुर ।प्रखर राष्ट्रवादी नेता एवं महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर आज लोक भवन में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।राज्यपाल ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्र की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण सभी देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। लोक भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
- -20 जुलाई 2026 तक भरे जाएंगे आवेदन, निर्धारित अवधि तक वैध पासपोर्ट अनिवार्य -मिर्ज़ा एजाज़ बेगरायपुर /हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। हज यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी ने मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार स्थित अपने कार्यालय में निःशुल्क ई-हज सुविधा केंद्र प्रारंभ किया है।छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन मिर्ज़ा एजाज़ बेग ने आज बताया कि इस केंद्र के माध्यम से हज 2027 के इच्छुक आवेदकों के ऑनलाइन आवेदन निःशुल्क भरे जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के चेयरमैन श्री बेग ने बताया कि अनेक आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन भरने में कठिनाई होती है। ऐसे में समय सीमा के भीतर आवेदन सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से यह विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा हज 2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास 31 दिसंबर 2027 तक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है। श्री बेग ने हज यात्रा के इच्छुक सभी आवेदकों से निर्धारित अंतिम तिथि से पूर्व अपना ऑनलाइन आवेदन पूर्ण करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी कार्यालय में इसके लिए एक विशेष काउंटर स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर आवेदक अपना ऑनलाइन आवेदन भरवा सकते हैं। अधिक जानकारी अथवा ऑनलाइन आवेदन संबंधी सहायता के लिए कार्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी, मुखर्जी बड़ा, बैरन बाजार, रायपुर अथवा दूरभाष क्रमांक 0771-4266646 पर संपर्क किया जा सकता है।



























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