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- 0- बलौदाबाजार जिले के 1लाख 40 हजार से अधिक बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्यबलौदाबाजार। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस "पल्स पोलियो अभियान 2026" का आयोजन जिले में 28 से 30 जून 2026 तक किया जाएगा। अभियान अंतर्गत प्रथम दिवस 28 जून को जिले के लगभग 831 बूथ पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को दवा पिलाई जायेगी। 29 एवं 30 जून को घर-घर भ्रमण कर मितानिन,आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रशिक्षु नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्राओं द्वारा पिलाई जाएगी।अभियान के तहत जिले के 1 लाख 40 हजार 879 बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के सभी 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों के अभिभावकों से पोलियो बूथ में पहुंचकर अपने बच्चों को दवा पिलाने की अपील की है। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकताओं का सहयोग करने का आग्रह किया है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश कुमार अवस्थी ने बताया कि विश्व पोलियो उन्मूलन अंतर्गत राष्ट्रीय टीकाकरण का आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत जिले में 1 लाख 40 हज़ार 879 बच्चे लक्षित हैं। इसकी निगरानी के लिए अधिकारी- कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई लगाई गई है । इस बाबत पोलियो वैक्सीन और आवश्यक प्रशिक्षण सहित पूरी तैयारी कर ली गई है। समस्त टीमों को समय पर पोलियो की दवा उपलब्ध कराने एवं कार्य संपादन की निगरानी जिम्मेदारी दी गई है।सभी ब्लॉक के ग्रामों के अलावा बस स्टैंड, रेल्वे स्टेशन में पोलियो बूथ बनाने के साथ ट्रांजिट टीमों द्वारा निर्माणाधीन क्षेत्र, खदानों, ईट भट्टा, स्लम एरिया, मेला, बाजार आदि में छूटे हुए बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने हेतु ट्रांजिट टीम का गठन किया गया है।
- कवर्धा। कवर्धा (कबीरधाम) जिले के बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों की संयुक्त जांच में करीब 81.19 लाख रुपए का धान घोटाला पकड़ा गया है। तीनों केंद्रों के रिकॉर्ड में हेराफेरी कर कुल 2,441.92 क्विंटल धान और लगभग 21,982 नग खाली बारदाने गायब पाए गए। तीनों केंद्रों के प्रबंधक (मैनेजर) गंगादास मानिकपुरी थे, जिन्होंने अन्य फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर इस हेरफेर को अंजाम दिया।किसानों को फंसाने की साजिश: जांच में सामने आया कि तौल पत्रकों पर जानबूझकर ऑपरेटरों/प्रबंधकों के हस्ताक्षर नहीं थे, ताकि जांच होने पर केवल किसानों के हस्ताक्षर के जरिए उन्हें फंसाया जा सके।हुई कानूनी कार्रवाई:मामला सामने आने के बाद सहसपुर लोहारा थाने में मुख्य आरोपी प्रबंधक, फड़ प्रभारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों सहित 6 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।18 जून 2026 को खाद्य, सहकारिता और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के संयुक्त जांच दल द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में बासिनझोरी, बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा धान खरीदी केंद्रों से कुल 2,441.92 क्विंटल धान और 21,982 बारदाने गायब पाए गए। प्रारंभिक जांच में इस कथित घोटाले की राशि लगभग 81.19 लाख रुपए आंकी गई है। जांच के अनुसार बासिनझोरी केंद्र में 585.98 क्विंटल धान और 4,130 बारदाने, बिरनपुर कला में 1,032.36 क्विंटल धान और 5,777 बारदाने, जबकि सहसपुर लोहारा केंद्र में 823.58 क्विंटल धान और 12,075 बारदाने की कमी दर्ज की गई। खास बात यह है कि तीनों केंद्रों का संचालन एक ही प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी के जिम्मे था। बिरनपुर कला और सहसपुर लोहारा में वे प्रबंधक के साथ-साथ खरीदी प्रभारी की भूमिका भी निभा रहे थे। मामले में पुलिस ने प्रबंधक गंगादास मानिकपुरी, सहसपुर लोहारा के फड़ प्रभारी बलदाऊ डड़सेना, कंप्यूटर ऑपरेटर बिहारी राम साहू, बासिनझोरी के फड़ प्रभारी तुकाराम साहू, कंप्यूटर ऑपरेटर पीलूराम साहू तथा बिरनपुर कला के कंप्यूटर ऑपरेटर महावीर साहू के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
- 0- गांवों के विकास में सहभागी बनने किया आह्वान, पुनर्वासित युवाओं की सुनी समस्याएं0- सुविधाओं, प्रशिक्षण की ली जानकारी, सिंचाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के दिए निर्देशनारायणपुर. उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने नारायणपुर प्रवास के दौरान शनिवार देर शाम पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा से जुड़े पुनर्वासित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप भी उपस्थित रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य आवश्यक दस्तावेजों एवं शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रत्येक पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने पुनर्वासित युवाओं से अपील की कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मुलाकात कर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का मार्ग ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है।उप मुख्यमंत्री ने पुनर्वास केंद्र में संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी जानकारी ली। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही उत्साहपूर्ण भागीदारी की उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक उदाहरण है। युवाओं से चर्चा के दौरान जब खेतों में सिंचाई के लिए बोर व्यवस्था की आवश्यकता बताई गई, तब उप मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों एवं पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे कृषि के माध्यम से स्थायी आजीविका अर्जित कर सकें।श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और अधिक प्रभावी एवं सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली भ्रामक और भटकाने वाली सूचनाओं से सावधान रहने का आग्रह करते हुए कहा कि बस्तर का विकास बस्तर के लोगों के सहयोग से ही संभव है। उन्होंने पुनर्वासित युवाओं का आह्वान किया कि वे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनें। वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण और विकास तक आदिवासी समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लेने वाले युवाओं ने इस परिवर्तन की शुरुआत कर दी है और अब सभी को मिलकर क्षेत्र तथा समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करना चाहिए।इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक श्री सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नाराश्री रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- 0- कलेक्टर ने बोथापारा और चनागांव का किया जमीनी निरीक्षण0- वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी के इंटीग्रेटेड मॉडल से किसानों की आय होगी दोगुनी0- कॉर्पोरेट पार्टनरशिप (एबिस कंपनी) से इनपुट कॉस्ट में 25% की छूट, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष फोकसरायपुर. छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आर्थिक स्वावलंबन और जल संरक्षण को लेकर एक बेहद अनूठा और सफल प्रयोग सामने आ रहा है। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और 'जल निधि परियोजना' के बेहतरीन तालमेल ने पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के नए द्वार खोल दिए हैं। मनरेगा के तहत खोदे गए तालाबों (डबरी) को महज जल संचय तक सीमित न रखकर, उन्हें वैज्ञानिक मत्स्य पालन से जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका में क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। इसी जमीनी हकीकत और इसकी भविष्य की संभावनाओं को परखने के लिए कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के सुदूर ग्राम बोथापारा और चनागांव का सघन दौरा किया। उन्होंने सीधे खेतों की मेढ़ पर पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से संवाद किया और इस आजीविका मॉडल को ग्रामीण समृद्धि की एक नई और स्थायी दिशा बताया।अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को बताया कि प्रत्येक आजीविका डबरी का एक मानक आकार तय किया गया है। ग्रामीण इस मॉडल को अपनाकर बेहद कम लागत में अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। लगभग 33 हजार रुपये की लागत से वैज्ञानिक देखरेख में लगभग 6 महीने में 20*20*3 मीटर की आजीविका डबरी का निर्माण किया जा सकेगा।इस मॉडल को व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशासन ने 'एबिस कंपनी' के साथ हाथ मिलाया है। सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत कंपनी इन ग्रामीण मत्स्य पालकों को मछली दाना (फीड) की खरीदी पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दे रही है। इससे किसानों की उत्पादन लागत काफी घट गई है और उनका शुद्ध लाभांश बढ़ गया है। नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक श्रीमती सावित्री दर्रो के खेत पहुंचकर कलेक्टर ने खुद डबरी का मुआयना किया। सावित्री ने बताया कि उनके पास करीब 7 एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे बरसों से पारंपरिक रूप से सिर्फ धान की खेती करती आ रही थीं। लेकिन अब उन्होंने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार की हैं, जिनमें कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन हो रहा है।इस कहानी में नया मोड़ तब आया जब अधिकारियों ने बताया कि सावित्री के बेटे ओमप्रकाश को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों की एडवांस ट्रेनिंग के लिए अगले महीने पुरी (ओडिशा) भेजा जा रहा है। वहां से ट्रेनिंग लेकर लौटने के बाद वह न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके के युवाओं को उन्नत और आधुनिक मत्स्य पालन की बारीकियां सिखाएगा। इसके बाद कलेक्टर चनागांव के प्रगतिशील किसान श्री नारायण सिंह नेताम के खेत पहुंचे। श्री नेताम ने अपनी 5 एकड़ कृषि भूमि में से दो आजीविका डबरियां विकसित की हैं। खास बात यह है कि वे डबरी के पानी से सिर्फ मछली पालन नहीं कर रहे, बल्कि उसके चारों तरफ आम की बागवानी (हॉर्टिकल्चर) भी अपना चुके हैं। डबरी के पोषक तत्वों से भरपूर पानी की वजह से बागवानी की फसल भी बंपर हो रही है, जिससे उन्हें सालभर एक फिक्स और मोटी आमदनी मिल रही है।कलेक्टर ने खुद मौके पर जाकर डबरी के पानी की गुणवत्ता (Water Quality) की जांच भी कराई।कलेक्टर ने जिले के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मनरेगा के तहत बनने वाली हर एक सरकारी और निजी परिसंपत्ति का शत-प्रतिशत उत्पादक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खुदवाना या अस्थाई रोजगार देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों के हाथ में एक ऐसा साधन सौंपना है जिससे वे जीवनभर कमाई कर सकें। मनरेगा, जल संरक्षण और वैज्ञानिक मत्स्य पालन का यह त्रिवेणी संगम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा, गांवों में कुपोषण दूर कर पोषण सुरक्षा लाएगा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देगा।वर्तमान में धमतरी जिले के 16 गांवों में यह आजीविका मॉडल सफलतापूर्वक जमीन पर उतर चुका है। इसकी अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब अगले चरण में 50 गांवों की 50 आजीविका डबरियों में इस मत्स्य पालन विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सतत कृषि विकास (Sustainable Agriculture) को गति देने की दिशा में यह प्रयोग एक नजीर बन चुका है।
- राजनांदगांव। कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने बताया कि अल-नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य एवं पूर्वी भाग के समुद्री जल का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसके प्रभाव से भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है, वर्षा में कमी या असमान वितरण हो सकता है तथा सूखे जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को अग्रिम तैयारी करने की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में संभावितअल-नीनो प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श एवं आकस्मिक कार्ययोजना जारी की गई है। इसमें मानसून के आगमन में विलंब, कम वर्षा तथा लंबे शुष्क अंतराल (ड्राई स्पेल) की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है। कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करें। धान की रोपा पद्धति के स्थान पर सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता दें। खेतों में मजबूत मेड़बंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करें। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में धान के स्थान पर अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाएं। फसल विविधीकरण द्वारा जोखिम को कम करें। बुवाई से पूर्व बीजों का कार्बेन्डाजिम एवं थायमेथोक्साम व इमिडाक्लोप्रिड से उपचार करें। धान में एजोस्पिरिलम, अन्य फसलों में एजोटोबैक्टर तथा दलहनी फसलों में राइजोबियम जैव उर्वरकों का उपयोग करें। बुवाई के 3 से 5 दिन के भीतर अनुशंसित अंकुरण पूर्व खरपतवारनाशी का प्रयोग करें। यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त अंकुरण न हो तो पुन: बुवाई करें तथा सामान्य बीज दर से 10 प्रतिशत अधिक बीज का उपयोग करें। जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द तथा अगस्त माह में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि की अरहर की बुवाई करें। कतार पद्धति से बुवाई एवं मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की नमी संरक्षित रखें। गांवों में नालों पर अस्थायी बांध बनाकर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें। कम वर्षा की स्थिति में नत्रजन उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें। 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव तथा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग करें। दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल का छिड़काव करें। तालाब, कुएं एवं अन्य जल संरचनाओं में वर्षा जल संग्रहित करें तथा आवश्यकता पडऩे पर जीवन रक्षक सिंचाई दें। ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाएं। मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्यों की योजना बनाएं तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह का पालन करें। किसान समय रहते उचित तैयारी, जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर एल-नीनो के संभावित प्रतिकूल प्रभावों को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
- 0- राजनांदगांव जिले के 0-5 वर्ष तक के कुल 111770 बच्चों को पिलाई जाएगी पल्स पोलियो की दवाराजनांदगांव। जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान के संबंध में कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान पल्स पोलियो अभियान के जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यशाला में बताया गया कि जिला स्तरीय पल्स पोलियो अभियान के प्रथम दिवस 28, 29 एवं 30 जून 2026 को जिले के 0-5 वर्ष तक के कुल 111770 बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलायी जाएगी। अभियान के प्रथम दिवस 28 जून को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक बूथ के माध्यम से पल्स पोलियो की खुराक बच्चों को पिलायी जायेगी तथा 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य कार्यकत्ताओं द्वारा घर-घर भ्रमण कर बच्चों को शत-प्रतिशत दवा पिलायी जाएगी। पोलियो की दवा पिलाने के लिए जिले में कुल 447 बूथ बनाए गए है। 89 सुपरवाईजर की ड्यूटी लगाई गई है। कुल 894 टीम का गठन किया गया है।1788 बच्चों को वैक्सीनेट किया जाएगा। अभियान को सफल बनाने के लिए मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्ताओं तथा अन्य समाजिक संस्थाओं का विशेष योगदान हेतु समन्वयक किया गया है। पोलियो की दवा पिलाने से कोई भी बच्चा न छूटे इसके लिए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ईंट भ_ों, मदरसों और छात्रावासों के लिए ट्रांजिट और मोबाइल टीमें भी गठित की गई हैं। शहरी क्षेत्र एवं ग्रामीण क्षेत्रों में माईकिंग एवं दीवाल लेखन के माध्यम से पल्स पोलियो अभियान से नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला स्तरीय मॉनिटरिंग टीम एवं कंट्रोल रूम की स्थापना कर ली गयी है। जिसका मोबाइल नंबर 7744356770 है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 0-5 वर्ष के सभी बच्चों के अभिभावकों से बूथ में पहुंचकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने की अपील की गई है। कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बीएल तुलावी, सर्विलेंस मेंडिकल ऑफिसर डब्लूएचओ डॉ. असिम रियाज खान, खंड चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री विकास राठौर, जिला डाटा प्रबंधक एनएचएम श्री अखिलेश चोपड़ा, शहरी कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री पूजा मेश्राम, जिला सलाहकर आरएमएनसीएचए श्रीमती स्नेहा जैन, श्री अखिलेश नारायण सिंह एवं विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक, विकासखंड डाटा प्रबंधक, बीईटीओ एवं समस्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी उपस्थित थे।
- 0- हर गांव तक बेहतर सड़क, हर क्षेत्र तक विकास की रफ्तार: मंत्री केदार कश्यप0- ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग होगी पूरी, मर्दापाल क्षेत्र में सड़क और पुल निर्माण कार्यों की शुरुआतकोंडागांव। मर्दापाल क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में आधारभूत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में साय सरकार में बेहतर कार्य हो रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के वनमंत्री तथा नारायणपुर विधायक श्री केदार कश्यप ने शुक्रवार को लगभग 8 करोड़ 63 लाख 78 हजार रुपये की लागत से विभिन्न सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी। भूमिपूजन के अंतर्गत खोड़सानार से नवागांव तक 2.30 किलोमीटर डामरीकरण सड़क निर्माण, ग्राम बांसगांव से जोगियालवाड़ मार्ग पर फोटकी नाला में मध्यम पुल का निर्माण, मर्दापाल-बयानार मार्ग पर नवागांव से एहरा तक पुलिया एवं एप्रोच निर्माण, आदनार क्षेत्र में तीन स्थानों पर पुलिया निर्माण, तथा तोड़म मेन रोड से मुंडापारा तक 2.65 किलोमीटर सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने से बरसात के दिनों में आवागमन की समस्याओं का स्थायी समाधान होगा और क्षेत्र के कई गांवों की कनेक्टिविटी पहले से अधिक सुदृढ़ होगी। इस अवसर पर मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य विकास को केवल शहरों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बसे गांवों तक गुणवत्तापूर्ण सड़क, पुल और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से अधूरी पड़ी विकास संबंधी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के समग्र विकास की आधारशिला होता है। जब गांव बेहतर सड़कों से जुड़ते हैं तो किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होती है, विद्यार्थियों को शिक्षा, मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं और आम नागरिकों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलती है। यही सुशासन और समावेशी विकास का वास्तविक स्वरूप है।मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी क्षेत्र की जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को निरंतर स्वीकृति दी जाती रहेगी।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने के बाद मर्दापाल क्षेत्र की विकास यात्रा को नई गति मिलेगी और क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। सरकार जनविश्वास के साथ विकास की इस गति को निरंतर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
- 0- कृषक रतन सिंह ने नैनो डीएपी और नैनो यूरिया अपनाकर आधुनिक खेती की दिशा में बढ़ाया कदमकोरबा। कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।कोरबा जिले के ग्राम जपेली निवासी कृषक श्री रतन सिंह इसका एक प्रेरक उदाहरण हैं। लगभग साढ़े चार एकड़ कृषि भूमि पर खेती करने वाले श्री रतन सिंह के लिए कृषि ही आय का प्रमुख साधन है। वर्षों से खेती कर रहे रतन सिंह ने बदलते समय के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और पिछले वर्ष से अपने खेतों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया।श्री रतन सिंह बताते हैं कि प्रारंभ में उन्होंने नैनो उर्वरकों को लेकर जानकारी प्राप्त की और कृषि विभाग के मार्गदर्शन में इसका उपयोग किया।उपयोग के बाद उन्हें फसलों की वृद्धि एवं विकास में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उनका कहना है कि नैनो उर्वरक कम मात्रा में उपयोग होने के बावजूद प्रभावी साबित हो रहे हैं, जिससे खेती के कार्यों को अधिक व्यवस्थित ढंग से करने में सहायता मिल रही है।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से खेतों में पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन संभव हुआ है। साथ ही इनके परिवहन, भंडारण एवं उपयोग में भी सुविधा मिलती है। आधुनिक तकनीक को अपनाने से खेती के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है तथा वे अन्य किसानों को भी नई कृषि तकनीकों की जानकारी लेने और उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।श्री रतन सिंह ने कहा कि उन्होंने इस वर्ष के खरीफ सीजन के लिए नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया प्राप्त कर लिया है और इसका उपयोग अपनी खेती में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में खेती को अधिक उत्पादक एवं लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। वैज्ञानिक पद्धतियों एवं नवाचार आधारित कृषि उपायों से किसानों को बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक करने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों की सराहना करते हुए धन्यवाद दिया।
- 0-- आंगनबाड़ी, एनआरसी, इमली प्रसंस्करण केंद्र और नक्सल पुनर्वास केंद्र का दौरा, अधिकारियों को दिए गुणवत्ता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देशसुकमा। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने शुक्रवार को सुकमा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान विभिन्न विभागीय संस्थानों का निरीक्षण कर जमीनी स्तर पर संचालित योजनाओं और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने बच्चों के पोषण, शिक्षा, महिला स्वावलंबन और आत्मसमर्पित युवाओं के पुनर्वास को राज्य सरकार की प्राथमिकता बताते हुए संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।दौरे की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्र रोकेल और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) से हुई। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बच्चों के बीच फर्श पर बैठकर उनसे आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से एबीसीडी और पहाड़े सुने, उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों की जानकारी ली तथा उन्हें फल और चॉकलेट वितरित कर उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी किया और निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। एनआरसी में उन्होंने कुपोषित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण भोजन एवं बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने तथा अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को केंद्र तक लाने पर विशेष जोर दिया। इसके बाद मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कुम्हाररास स्थित इमली प्रसंस्करण केंद्र का निरीक्षण किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने उन्हें केंद्र की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां स्व-सहायता समूहों की लगभग 60 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है और इमली से विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। मंत्री ने महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण का प्रभावी मॉडल बताया तथा उत्पादन एवं विपणन को और मजबूत करने पर बल दिया।अपने प्रवास के दौरान मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े नक्सल पुनर्वास केंद्र पहुंचीं, जहां उन्होंने आत्मसमर्पित युवाओं से संवाद कर उनके रहने, भोजन और प्रशिक्षण संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आत्मसमर्पित युवाओं को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने 36 प्रशिक्षणार्थियों को वेलकम किट वितरित की और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नए जीवन की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया। दौरे के दौरान कलेक्टर श्री अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण, जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर सहित विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और सतत निगरानी के साथ योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति, आस्था और राष्ट्रीय एकात्मता का अनूठा अभियान हुआ सफल-प्रदेश के विशिष्टजनों ने किया प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शनरायपुर। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाली छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी ’’सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा’’ शुक्रवार को सफलता के साथ संपन्न हुई। पांच दिवसीय इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद प्रदेश के सभी जिलों से शामिल 1040 विशिष्टजन सकुशल रायपुर लौटे, जहां रायपुर रेलवे स्टेशन पर उनका आत्मीय, गरिमामय एवं भव्य स्वागत किया गया। यात्रियों के चेहरों पर संतोष, श्रद्धा और आत्मिक आनंद की झलक इस अभिनव यात्रा की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण बनी।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक यात्रा ने केवल श्रद्धालुओं को भारत के प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ के दर्शन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय एकात्मता का भी जीवंत अनुभव कराया। यात्रा ने यह संदेश भी दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय गौरव को भी समान प्राथमिकता दे रही है।इस यात्रा में प्रदेश के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियों, राष्ट्रीय एवं राज्य सम्मान से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों, संस्कृति कर्मियों, समाजसेवियों तथा अन्य विशिष्टजनों ने सहभागिता की। इससे छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली।संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के सुव्यवस्थित प्रबंधन में आयोजित इस यात्रा की देशभर में सराहना हुई। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग, गुजरात राज्य सरकार के समन्वय तथा सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के आत्मीय सहयोग से यात्रा का प्रत्येक चरण अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ।यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन-पूजन के साथ मंदिर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक सोमनाथ धाम के महत्व को निकट से अनुभव किया। अनेक प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रों की पावन मिट्टी और नदियों का जल भगवान सोमनाथ को अर्पित कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एकता के सूत्र से जोड़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित आकर्षक लाइट एंड साउंड शो का भी अवलोकन किया, जिसने मंदिर के पुनर्निर्माण, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रेरक गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।पूरी यात्रा के दौरान आवागमन, आवास, भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा तथा अन्य सभी व्यवस्थाएं उच्च स्तर पर सुनिश्चित की गईं। संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे स्वयं विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पूरी यात्रा में उपस्थित रहे और प्रत्येक यात्री की सुविधा का विशेष ध्यान रखा। यात्रियों ने व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि शासन ने उन्हें परिवार जैसा स्नेह और सम्मान प्रदान किया।यात्रा से लौटे प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताते हुए कहा कि वर्षों से संजोई गई सोमनाथ दर्शन की उनकी इच्छा शासन की इस निःशुल्क और सुव्यवस्थित पहल से पूरी हो सकी। उन्होंने कहा कि भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन, वहां का आध्यात्मिक वातावरण, ऐतिहासिक लाइट एंड साउंड शो तथा उत्कृष्ट यात्रा प्रबंधन ने उन्हें आत्मिक शांति के साथ भारतीय संस्कृति के प्रति नया गर्व प्रदान किया।रायपुर रेलवे स्टेशन पर लौटे श्रद्धालुओं का पारंपरिक रीति-रिवाज, पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और आत्मीय अभिनंदन के साथ भव्य स्वागत किया गया। स्वागत समारोह के दौरान यात्रियों ने छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता का प्रेरक अभियान रही।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप यह यात्रा इस बात का प्रमाण बनी कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर से जन-जन को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में संस्कृति विभाग द्वारा किए गए सफल आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि इस तरह के आयोजन समाज में आत्मगौरव, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा की सफलता ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में नई पहचान प्रदान की है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, गुजरात राज्य सरकार, सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट तथा छत्तीसगढ़ शासन के समन्वित प्रयासों से संपन्न यह ऐतिहासिक यात्रा आने वाले समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय एकात्मता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।
- -शहीदों की स्मृति में बनाए जाएंगे स्मारक और सार्वजनिक स्थलों का होगा नामकरणरायपुर ।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट कांकेर में नक्सली पीड़ित परिवारों एवं शहीद जवानों के परिजनों से आत्मीय मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को सभी मामलों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और शहीदों के आश्रितों के सम्मान, सुरक्षा एवं पुनर्वास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक बुधवार को जिले के पुलिस अधीक्षक नक्सली पीड़ित परिवारों एवं शहीद जवानों के परिजनों से नियमित रूप से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनेंगे तथा उनके निराकरण की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना और उनकी प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना है।श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेशभर में वीर शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत गांवों में सामुदायिक भवन, चौक-चौराहों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों का नामकरण शहीदों के नाम पर किया जाएगा। साथ ही जिन स्थानों पर नक्सल हिंसा की बड़ी घटनाएं हुई हैं, वहां उपयुक्त स्थान चिन्हित कर स्मारकों का निर्माण कराया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां शहीदों के सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकें।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक पात्र शहीद परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाए तथा पात्र आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया में प्राथमिकता देते हुए शीघ्र लाभान्वित किया जाए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने शहीद स्मारकों के निर्माण के लिए समग्र निधि से 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे प्रदेशभर में सम्मानजनक एवं प्रेरणादायी स्मारकों का निर्माण कराया जाएगा।बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने सभी नक्सली पीड़ित एवं शहीद परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान राष्ट्र और समाज के लिए अमूल्य है तथा उनके परिवारों का सम्मान और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि उनको भी नक्सल हिंसा के कारण अपने घर को त्यागना पड़ा था इसलिए वे नक्सल पीड़ितों की व्यथा को अच्छी तरह समझ सकते हैं। आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दृढ़ निश्चय और दीर्घकालीन रणनीति एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा की संवेदनशीलता से प्रदेश नक्सल हिंसा से मुक्त हो पाया है, जिसका परिणाम है कि अब सभी स्वतंत्र रूप से बिना डर के रह पा रहे हैं।इस अवसर पर राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, अंतागढ़ विधायक श्री विक्रम उसेंडी, कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आकाश श्रीश्रीमाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- -सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक में सामाजिक सशक्तिकरण, पेसा क्रियान्वयन और देवस्थलों के संरक्षण पर हुई व्यापक चर्चारायपुर । उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा शुक्रवार को जिला पंचायत कांकेर सभाकक्ष में सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की बैठक लेकर बस्तर के नक्सल उन्मूलन के बाद चहुंमुखी विकास, सामाजिक एकता तथा आदिवासियों की पारंपरिक संस्कृति और विरासत को सहेजने, संरक्षित करने पर चर्चा की। जिसमें जिले में पेसा एक्ट का समुचित क्रियान्वयन और पारंपरिक देव स्थलों को संरक्षित करने जैसे विषयों पर द्विपक्षीय सकारात्मक चर्चा हुई। इस दौरान समाज प्रमुखों ने भी बारी बारी से सुझाव दिए।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में समाज प्रमुखों से कहा कि किसी समाज की परंपरा और सांस्कृतिक धरोहरों व पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। किसी बड़े लक्ष्य की सफलता समाज के सहयोग से ही संभव होती है और बस्तर में नक्सल उन्मूलन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र की मुख्यधारा से टूट कर हिंसा का मार्ग अपनाने वाले युवाओं को वापस मुख्यधारा में लेकर आने में समाज प्रमुखों ने सराहनीय कार्य किया, जिसमें सुरक्षा बलों और जवानों का सतत् सहयोग मिला, जिसके फलस्वरूप आज बस्तर का लाल आतंक से मुक्त होना संभव हुआ। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि आज वर्षों से बंद मेला-मड़ई, बाजार, हाट अब आबाद होने लगे हैं। पहले जहां रिश्तेदार भी घर आने में डरते थे वे भी बेखौफ आने जाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी वे पहली बार (नक्सलवाद से) आजाद होने का अनुभव कर रहे हैं।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कतिपय बाहरी लोग स्थानीय लोगों में भ्रम फैला रहे हैं कि बस्तर के संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। इस पर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि बस्तर का विकास बस्तर के युवाओं और लोगों के द्वारा ही किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय संसाधनों का प्रयोग कर ही ग्रामों का विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए शुरुआत के रूप में सुरक्षा कैम्पों को सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान द्वारा स्थानीय संसाधनों से ही विकसित किया जाएगा।समाज प्रमुखों से चर्चा के दौरान श्री शर्मा ने बताया कि इसी क्रम में अब बस्तर के देव स्थलों को संरक्षित करने के लिए 197 गांवों के देव स्थलों का राजस्व रिकॉर्ड में चिन्हांकन कर उसे स्थायी पंजीयन की व्यवस्था की जा रही है ताकि देव स्थलों को अच्छे से संरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार के द्वारा पेसा एक्ट को और भी सशक्त करने का कार्य किया गया है। इसके लिए पहली बार सरकार ने गांव गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर पेसा मोबिलाइजर, कोऑर्डिनेटर रखने का कार्य किया जा रहा है।समाज प्रमुखों की जेल में बंद भटके हुए युवाओं के पुनर्वास पर चिंता के संबंध में उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि हमने हर युवा को मुख्यधारा में लाने के लिए जेल से भी पुनर्वास की व्यवस्था की है। इसके लिए समाज को भी प्रेरित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि अब पुनर्वासित युवा खुद भी जेल में जाकर भटके युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अन्य मतों में जाने वाले लोगों के साथ सामाजिक स्तर पर चर्चा कर शांति स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा शासन द्वारा भोले भाले ग्रामीणों की रक्षा के लिए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक का निर्माण भी किया गया है।इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि समाज में वैचारिक चिंतन की आवश्यकता है, ग्रामों की संस्कृति के संरक्षण की जरूरत है। उन्होंने विकास के साथ स्थानीय लोगों का भी विकास के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि विकास के लिए समाज के प्रतिनिधि और प्रशासन के समन्वय के द्वारा आगे बढ़ना है।सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव रखे। उन्होंने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए समाज की सहभागिता से बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करने का विश्वास दिलाया।इस अवसर राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, अंतागढ़ विधायक श्री विक्रम उसेंडी, कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर सहित गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्री सुमेर सिंह नाग, सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव श्री राजेश भास्कर सहित विभिन्न आदिवासी समाज के प्रमुखगण मौजूद थे।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नए लोगो का किया विमोचन-पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को सक्षम बनाकर प्रदेश के विकास को गति देना हमारी इकोनॉमिक फिलॉसफी : मंत्री श्री ओ पी चौधरी-आवास बुक करने वाले लकी ड्रा के विजेताओं को कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन सहित अन्य पुरस्कार का किया वितरण-दो वर्षों में 07 हजार से अधिक परिसंपत्तियों का विक्रय कर 1500 करोड़ रुपये का किया राजस्व अर्जित-छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले श्री अंशुल कश्यप को दी 2.50 लाख रुपये की पुरस्कार राशिरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शुक्रवार को नया रायपुर स्थित सर्किट हाउस में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के नवीन लोगो का विमोचन किया। इस अवसर पर वर्ष 2025 के आवास मेले में आवास बुक करने वाले हितग्राहियों को लकी ड्रा के माध्यम से कार, स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित विभिन्न पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का नया लोगो तैयार करने वाले श्री अंशुल कश्यप को शुभकामनाएं दी और प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि ढाई लाख रुपए का चेक सौंपा।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक परिवार का अपना पक्का घर होने का सपना होता है और राज्य सरकार इस सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पूर्व में केवल गृह निर्माण तक सीमित रहा मंडल अब अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे प्रदेश के विकास को नई गति मिलेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आर्थिक चुनौतियों से उबरते हुए मंडल ने लगभग 7,388 संपत्तियों का विक्रय कर 1,532 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग, मंडल के अध्यक्ष तथा पूरी टीम को बधाई दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सभी संकल्पों और वायदों को तेजी से पूरा किया है। सरकार के गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति प्रदान की गई थी। आज प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद साढ़े दस लाख से अधिक परिवार के आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1,600 नए आवास तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार से 15 हजार अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए भी विशेष आवास योजना संचालित की जा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन हमारे सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 'सेवा सेतु' के माध्यम से 450 से अधिक शासकीय सेवाएं अब मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 भी प्रारंभ की गई है, जहां नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज कर समयबद्ध समाधान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 65 हजार घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। पीएम सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना के माध्यम से सरकार घर में सोलर संयंत्र लगाने के लिए आकर्षक सब्सिडी भी दे रही है और इन परिवारों लिए आने वाले समय में बिजली पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी और अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेच पाएंगें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से लंबित बिजली बिल के भुगतान का भी बड़ा अवसर दिया है और बिल पर लगने वाले सरचार्ज समेत आकर्षक छूट का प्रावधान किया है। श्री साय ने कहा कि सरकार न केवल जनहितैषी योजनाएं लागू कर रही है बल्कि सुशासन तिहार के माध्यम से उसका फीडबैक लेने लोगों के बीच भी गई। दो महीने लगातार जनता से फीडबैक लेकर व्यवस्थाओं में सुधार का काम किया गया है। उन्होंने इस दौरान शासन की विभिन्न नवाचारी पहल की जानकारी देते हुए सुशासन और पारदर्शी सरकार के संकल्प को दोहराया।आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विभाग में व्यापक प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। गृह निर्माण मंडल को अधोसंरचना विकास मंडल के रूप में नई पहचान देकर प्रदेश के पूंजीगत व्यय और विकास कार्यों में इसकी भूमिका का विस्तार किया गया है। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय करने वाले विभागों को वित्तीय और मानव संसाधन के माध्यम से सक्षम बनाने का काम किया है ताकि प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अब किसी भी नई आवासीय परियोजना का निर्माण तभी प्रारंभ होगा जब पर्याप्त बुकिंग सुनिश्चित हो जाएगी, जिससे अनावश्यक निर्माण और वित्तीय जोखिम से बचा जा सके। मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू कर वर्षों से लंबित संपत्तियों के विक्रय को गति दी तथा वित्तीय अनुशासन स्थापित किया। इसके परिणामस्वरूप मंडल की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब यह अधोसंरचना विकास के नए आयाम स्थापित करने के लिए तैयार है।मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मंडल ने नई कार्य संस्कृति अपनाई है। गृह निर्माण मंडल का विस्तार कर अधोसंरचना विकास मंडल बनाया जाना प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मंडल ने रिकॉर्ड संपत्तियों का विक्रय कर नई उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य में मांग आधारित, गुणवत्तापूर्ण तथा वित्तीय रूप से व्यवहारिक परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा।कार्यक्रम में लकी ड्रा के नौ विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। सारंगढ़ की श्रीमती पूजा बरेठ को प्रथम पुरस्कार के रूप में कार प्रदान की गई। इसके अलावा स्कूटी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित अन्य आकर्षक पुरस्कार भी वितरित किए गए।इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ,आयुक्त श्री अवनीश शरण, तथा विभाग एवं मंडल के वरिष्ठ अधिकारी और हितग्राही उपस्थित थे।
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रायपुर। परमहंस राजयोगी प्रभु बा के सानिध्य में ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र के अखंड जाप का आठ दिवसीय आयोजन 28 जून से 5 जुलाई तक किया गया है। इस दौरान प्रभु बा अपने भक्तों व अनुयायियों को दिव्य दर्शन देने के साथ उन्हें शक्तिपात दीक्षा भी देंगी। महाराष्ट्र मंडल की सभासद बरखा सौरभ राहटगांवकर ने बताया कि गुरुदेव के दर्शन और सत्संग का समय रात्रि 11 बजे के बाद निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम राजीव नगर स्थित विनीत गुप्ता के निवास तृप्ति, द्वितीय तल, एच-3 फर्स्ट लेन में आयोजित किया गया हैँ|
बताते चलें कि परम पूज्य परमहंस स्वामी सुगंधेश्वरानंद राजयोगी प्रभु "बा" एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्हें "शक्तिपात दीक्षा" का आशीर्वाद पूज्य योगीराज गुलवणी जी महाराज से प्राप्त हुआ। उन्होंने जीवनकाल में कई दिनों की समाधि लेने के अनुभव के कारण अध्यात्म जगत ने उन्हें 'परमहंस' पद से विभूषित किया है। भक्तों द्वारा प्रेम से उन्हें "बा" (मां) कहकर पुकारा जाता है। -
दुर्ग। दुर्ग के गंजपारा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में कैबिनेट मंत्री एवं दुर्ग शहर विधायक गजेन्द्र यादव ने शुक्रवार को गंजपारा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में जनदर्शन में नागरिकों एवं कार्यकर्ताओं से सौजन्य भेंट कर उनकी समस्याओं, मांगों एवं सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुने। जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के लिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए।
केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि शासन की प्राथमिकता आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इसी उद्देश्य से नियमित जनदर्शन के माध्यम से लोगों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करना भी जनप्रतिनिधि की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी भावना के अनुरूप वे नियमित रूप से जनदर्शन आयोजित कर लोगों से सीधे संवाद करते हैं और उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक पहल करते हैं।जनदर्शन के दौरान मठपारा निवासी कक्षा चौथी की छात्रा प्रतिज्ञा सारथी से भी उनकी मुलाकात हुई। छात्रा की शिक्षा के प्रति लगन और उत्साह से प्रभावित होकर मंत्री श्री यादव ने उसकी आगे की पढ़ाई के लिए सहयोग प्रदान किये तथा उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली और मेहनती बच्चों की शिक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी तथा ऐसे विद्यार्थियों को हरसंभव प्रोत्साहन और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। -
0 साल 2027 को ‘सामाजिक जन जागरण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा, कार्यकारिणी व पदाधिकारियों की बैठक में नई समितियों व उनके दायित्व पर खुलकर चर्चा
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने नई कार्यकारिणी व विभिन्न समितियों के भावी पदाधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ शुक्रवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कहा कि मंडल अगले दो सालों में गुरुकुल और गौशाला शुरू करने के लक्ष्य को हासिल कर लेगा। काले मंडल के अगले 10 सालों की कार्ययोजनों को लेकर बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा शंकर नगर बाल वाचनालय की तर्ज पर महाराष्ट्र मंडल रोहिणीपुरम सहित रायपुर के कम से कम तीन स्थानों पर नगर निगम अथवा रायपुर विकास प्राधिकरण की जगह पर भवन बनाकर वहां के लोगों के बीच, बाल संस्कार शिविर, सामाजिक जन जागरण अभियान जैसे कार्यक्रम आयोजित करेगा।काले ने कहा कि अगले साल यानी 2027 को महाराष्ट्र मंडल सामाजिक जन जागरण वर्ष के रूप में मनाएगा। सालभर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में संगोष्ठी, विचार विमर्श होंगे। मराठी समाज के लोगों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने, संस्कारों व परंपराओं से नए सिरे से अवगत कराने के लिए कई तरह के अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के रूप में नए कार्यकाल में कुछ और नई समितियां बनाईं जा रहीं हैं। कुछ पुरानी समितियों को नया स्वरूप भी दिया जा रहा है। सभी समितियों में समन्वयक, प्रभारी, सह प्रभारी समेत कुल 14 पदाधिकारी रखे जाएंगे। अपनी- अपनी टीम बनाने की जिम्मेदारी समिति समन्वयक व प्रभारी की होगी।इससे पहले स्वास्थ्य समिति की समन्वयक डॉ. कमल वर्मा ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही संस्कार देना चाहिए। सही मायनों में गर्भावस्था में ही बच्चों को संस्कार मिलने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। आज घरों में विघटन की बड़ी वजह ईगो है। यदि हम अपने आप से ईगो हटा लें, अपने घर के सदस्यों से नाराजगी, उपेक्षा की नजरअंदाज करें, तो निश्चत ही हमारे घर में एकजुटता बनी रहेगी। बृहन्महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ प्रभारी सुबोध टोले ने कहा कि कमी हमारे बच्चों में नहीं, हम में ही है, जिसे दूर करने की जरूरत है। हम जल्दी नहीं उठेंगे, तो हमारे बच्चे भी देर से उठेंगे। हम पूजा- पाठ से दूर रहेंगे, तो बच्चों से पूजा, आरती, संस्कार और मंत्रोच्चार की उम्मीद नहीं कर सकते।दिव्यांग बालिका विकास गृह के प्रभारी प्रसन्न निमोणकर ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल परिवार परामर्श समिति गठित रहा है। साथ ही वर- वधु की तलाश कर रहे अभिभावकों को मार्गदर्शन देने की जरूरत है, ताकि वे अपने बच्चों की शादी नौकरी या पैकेज से करने के बजाय उनके लिए बेहतर जीवन साथी की तलाश करें। निमोणकर ने कहा कि बच्चों को उच्च शिक्षा हम ही देते हैं। उन्हें उड़ना भी हम ही सिखाते हैं। जब बच्चे बहुत ऊंची उड़ान भरते हैं तो उन्हें वहां से चौबे कॉलोनी, समता कॉलोनी, तात्यापारा, बूढ़ापारा दिखाई नहीं देते, उन्हें दिखाई देता है गुड़गांव, नोएडा, हैदराबाद, बंगुलुरु, पुणे से लेकर यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया। फिर वे लौटकर नहीं आते। इसके लिए जिम्मेदार हम ही हैं।बैठक का संचालन कर रहे सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने कहा कि लड़की की शादी जोड़ने के लिए निकले माता- पिता को लड़के के पास कार, मकान और बड़ा सा बैंक बैलेंस चाहिए। सवाल ये है कि क्या लड़की के पिता के पास शादी से पहले वो सभी चीजें और सुविधाएं थीं, जो वो अपने भावी दामाद के पास देखना चाहते हैं। चेतन ने कहा कि शादी के बाद भी मां के अपनी नव विवाहित बेटी के पास लगातार मोबाइल कॉल आते रहते हैं और वो अपनी बेटी के अभी- अभी शुरू हुए वैवाहिक जीवन में न केवल दखल देतीं हैं, बल्कि अपने सास- ससुर से अलग होने के लिए भड़काती भी हैं। इसलिए परिवार परामर्श समिति की आवश्यकता अधिक जान पड़ती है। -
धमधा। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में संचालित गृहे-गृहे यज्ञ अभियान के अंतर्गत 28 जून रविवार को ग्राम मेडेसरा में एक विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया जाएगा। सुबह 8 बजे से गांव के 60 घरों में एक साथ वैदिक विधि-विधान से यज्ञ संपन्न होंगे। आयोजन का संचालन गायत्री प्रज्ञापीठ नंदकट्ठी–बोड़ेगांव द्वारा किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य यज्ञ संस्कृति को घर-घर तक पहुंचाना, परिवारों में आध्यात्मिक चेतना का विकास करना तथा समाज में सद्भाव, संस्कार और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है।
आयोजन की जानकारी देते हुए श्रीमती ऊषा केसरा ने बताया कि इस सामूहिक आयोजन के लिए 60 प्रशिक्षित यज्ञाचार्यों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक यज्ञाचार्य एक-एक घर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराएंगे। उन्होंने बताया कि यह अभियान पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों और जीवन-दर्शन से प्रेरित है। दोनों ने यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति, परिवार और समाज के सर्वांगीण उत्थान का प्रभावी माध्यम बताया है। इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गृहे-गृहे यज्ञ अभियान चलाया जा रहा है।उन्होंने बताया कि इस आयोजन में गायत्री मंदिर धमधा के परिजन भी सक्रिय रूप से भाग लेंगे और आयोजन को सफल बनाने में अपनी सेवाएं देंगे। आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। यज्ञ सामग्री, मंत्र-पुस्तिकाएं तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं संबंधित यज्ञाचार्यों को उपलब्ध करा दी गई हैं।आयोजकों के अनुसार गृहे-गृहे यज्ञ अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को भारतीय संस्कृति, नैतिक जीवन, स्वावलंबन, सेवा और संस्कारों से जोड़ना है। यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द और सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया जाएगा। आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं एवं गायत्री परिवार के परिजनों से इस पुण्य अभियान में सहभागी बनकर इसे सफल बनाने की अपील की है। - -जैविक खेती, दुग्ध उत्पादन एवं लघु वनोपज प्रसंस्करण से जुड़ने किया प्रोत्साहित-कहा- अगले ढाई महीने में प्रत्येक ग्रामीण का हो बैंक खाता-महिला स्व सहायता समूहों से जुड़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने दिए निर्देश-बोडागांव में अटल डिजिटल सेवा केंद्र एवं आमाबेड़ा में किसान सदन निर्माण के लिए की 15 लाख रुपये की घोषणारायपुर / उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज अपने उत्तर बस्तर कांकेर प्रवास के दौरान अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम बोड़ागांव स्थित सीएएफ कैंप परिसर में चौपाल लगाकर ग्रामीणों से संवाद करते हुए शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आगामी ढाई महीने के भीतर प्रत्येक ग्रामीण का बैंक खाते की उपलब्धता सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच सके।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने चौपाल में ग्रामीणों से चर्चा के दौरान क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने, दुग्ध उत्पादन को आजीविका के साधन के रूप में विकसित करने तथा लघु वनोपज के प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आधुनिक ढंग से दुग्ध उत्पादन के लिए इसमें रुचि लेने वाले 10-10 ग्रामीणों की टीम गठित कर गुजरात में एक्पोजर विजिट कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीणों को रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।उन्होंने महिला स्व सहायता समूहों से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ने तथा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने से आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने बोड़ागांव में स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवकों को रोजगार देने के लिए अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने एवं आमाबेड़ा में किसान सदन निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की स्वीकृति देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं और किसानों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीणों को बेहतर लाभ मिलेगा।ग्रामीणों ने उप मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आवश्यकताओं और स्थानीय समस्याओं से भी अवगत कराया, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए। इस अवसर पर कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग और अंतागढ़ विधायक श्री विक्रम उसेंडी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए नक्सलवाद की समाप्ति के बाद ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से जुड़कर विकास की मुख्य धारा में शामिल होने की अपील की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिले के कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी श्री आकाश श्रीश्रीमाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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*सर्वाधिक पंजीयन कराने वाले जिलों में शामिल हुआ बिलासपुर*
बिलासपुर/स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बिलासपुर जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले में अब तक 106 संस्थानों का बल्क वेस्ट जनरेटर (बीडब्ल्यूजी) के रूप में पंजीयन किया जा चुका है। यह संख्या प्रदेश में सर्वाधिक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के ऑनलाइन पोर्टल पर किए गए इस पंजीयन से जिले में कचरे के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन को नई मजबूती मिली है।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ बिलासपुर के निर्माण में सभी संस्थानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने पंजीयन कराने वाले संस्थानों की सराहना करते हुए अन्य पात्र संस्थानों से भी अभियान से जुड़ने और कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन करने की अपील की। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि कचरे का पृथक्करण और उसका उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने संस्थानों से गीले और सूखे कचरे को अलग रखने तथा जैविक कचरे के प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित करने का आग्रह किया। जिले में शासकीय एवं निजी अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा बड़े आवासीय परिसरों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। नियमानुसार प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा निकलने वाले संस्थानों के लिए बल्क वेस्ट जनरेटर के रूप में पंजीयन आवश्यक है।जिला प्रशासन ने शेष पात्र संस्थानों से भी शीघ्र पंजीयन कराने तथा कचरे के पृथक्करण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है। जिला प्रशासन का मानना है कि संस्थानों की सक्रिय भागीदारी से बिलासपुर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने के प्रयासों को और गति मिलेगी। -
*प्रति एकड़ सालाना दो लाख रुपये की आमदनी, आधा एकड़ में एप्पल की खेती से भी बनाई अलग पहचान*
बिलासपुर/मस्तुरी विकासखंड के नगर पंचायत मल्हार के प्रगतिशील किसान जदुनंदन वर्मा ने जैविक खेती अपनाकर यह साबित कर दिया है कि खेती में नवाचार और वैज्ञानिक सोच से बेहतर आय के साथ मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रखी जा सकती है। पिछले लगभग दस वर्षों से वे अपनी खेती पूरी तरह जैविक और प्राकृतिक पद्धति से कर रहे हैं। आज उन्हें प्रति एकड़ सालाना लगभग दो लाख रुपये की आमदनी हो रही है। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।जदुनंदन वर्मा बताते हैं कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार उपयोग से मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी सोच के साथ उन्होंने जैविक खेती को अपनाया। वे गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत तथा अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर खेती करते हैं। इससे उत्पादन लागत में कमी आई है, फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता भी लगातार बढ़ी है। उनकी खेती की एक विशेष पहचान आधा एकड़ में एप्पल की खेती भी है। यह नवाचार क्षेत्र के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और यह दर्शाता है कि नई तकनीकों और सही प्रबंधन से विविध फसलों की सफल जैविक खेती की जा सकती है।जदुनंदन वर्मा को कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर आयोजित प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और जागरूकता कार्यक्रमों से भी लाभ मिला है। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से उन्होंने जैविक खाद निर्माण, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की, जिसका सकारात्मक परिणाम उनकी खेती में देखने को मिल रहा है।उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी नियमित रूप से मिल रहा है। योजना से प्राप्त राशि का उपयोग वे जैविक आदानों, कृषि उपकरणों एवं अन्य आवश्यक कृषि कार्यों में करते हैं, जिससे खेती की लागत कम करने और समय पर कृषि कार्य करने में सहायता मिलती है।श्री जदुनंदन वर्मा का मानना है कि जैविक खेती केवल खेती की एक पद्धति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और बेहतर भविष्य की नींव है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन, नवाचार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी, टिकाऊ और सम्मानजनक व्यवसाय बना सकते हैं। आज वे जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं। -
*बच्चों को पिलाएं जाएंगे, दो बूंद जिंदगी की पोलियो खुराक*
बिलासपुर/जिले में 28 जून 2026 को राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का आयोजन किया जाएगा। अभियान के तहत 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई जाएगी। इसके बाद 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाएंगे।जिले में अभियान के सफल संचालन के लिए 1530 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। ये बूथ जिला चिकित्सालय, सिम्स, सभी शासकीय अस्प्ताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित होंगे। जिले के 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 2 लाख 78 हजार 149 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, ईंट-भट्ठों, कोयला भट्ठों, निर्माण स्थलों, बस्तियों एवं अन्य क्षेत्रों के लिए विशेष मोबाइल टीमों का गठन किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रहे।विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन पड़ोसी देशों में अभी भी पोलियो वायरस की मौजूदगी के कारण सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पल्स पोलियो अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. शुभा गढ़ेवाल ने जिले के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे 28 जून को अपने 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ पर अवश्य ले जाएं। -
रायपुर/प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah तथा छत्तीसगढ़ शासन के सहकारिता मंत्री Kedar Kashyap के मार्गदर्शन एवं “सहकार से समृद्धि” की परिकल्पना के अनुरूप कलेक्टर रायपुर श्री गौरव सिंह के मार्गदर्शन में रायपुर जिले में 29 जून से 06 जुलाई 2026 तक सहकारी सप्ताह का आयोजन किया जाएगा।
सहकारी सप्ताह का उद्देश्य सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, सहकारी संस्थाओं का विस्तार करना तथा आमजन को सहकारी योजनाओं से जोड़ना है। इस अवसर पर जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS), मत्स्य सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), महिला स्व-सहायता समूहों तथा अन्य सहकारी संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।सप्ताह भर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सदस्यता विस्तार अभियान, सहकारिता जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं, स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण एवं स्वच्छता अभियान, मॉडल पैक्स भ्रमण, जनऔषधि केंद्रों में स्वास्थ्य परीक्षण, सहकारी उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार तथा उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं एवं व्यक्तियों का सम्मान शामिल रहेगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सहकारिता आंदोलन को और अधिक सशक्त बनाने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।सहकारी सप्ताह के अंतर्गत कृषि मंडपम, रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सहकारिता क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं उपलब्धियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा।रायपुर जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, महिला समूहों, युवाओं एवं आम नागरिकों से सहकारी सप्ताह के विभिन्न कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता कर सहकारिता आंदोलन को सशक्त बनाने तथा “सहकार से समृद्धि” के संकल्प को सफल बनाने की अपील की गई है। - 0- 297 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित, 164 को मिले मोटराइज्ड ट्राइसायकल0- सहायक उपकरण वितरण समारोह में दिलाई गई नशामुक्ति की शपथबिलासपुर. जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (एआईसी) एवं एलिम्को के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय तिफरा में दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में सीएसआर मद के अंतर्गत जिले के 297 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण एवं 164 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसायकल का वितरण किया गया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे। समारोह के दौरान विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत लोगों को नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।बतौर मुख्य अतिथि विधायक श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 85 लाख 33 हजार रुपये की लागत से 164 हितग्राहियों को मोटराइज्ड ट्राइसायकल सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों से दिव्यांगजन आम लोगों की तरह अपने दैनिक कार्यों का संचालन कर सकेंगे तथा शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसरों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री कौशिक ने कहा कि सीएसआर के माध्यम से भविष्य में भी दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से आग्रह किया कि जो पात्र हितग्राही अभी तक योजनाओं से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी चिन्हांकित कर लाभान्वित किया जाए, ताकि शत-प्रतिशत पात्र दिव्यांगजनों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों का जीवन होगा अधिक सुगम : महापौर श्रीमती पूजा विधानीमहापौर श्रीमती पूजा विधानी ने लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सरल और सुगम बनाएंगे। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों की सहायता से दिव्यांगजन अपनी दैनिक गतिविधियों का संचालन अधिक आत्मनिर्भरता के साथ कर सकेंगे तथा अपने जीवन को नई दिशा दे पाएंगे।प्रधानमंत्री ने दिव्यांगजनों को सम्मान की नई पहचान दी : जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशीजिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि मोटराइज्ड ट्राइसायकल एवं अन्य सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा वे अधिक आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपनी सहभागिता निभा सकेंगे। उन्होंने नशामुक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया।समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक श्री टी.पी. भावे ने स्वागत भाषण देते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा एवं सहायक उपकरण वितरण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व में किए गए सर्वेक्षण एवं आवश्यकता आकलन के आधार पर पात्र हितग्राहियों का चयन किया गया था। कार्यक्रम में एआईसी की सहायक प्रबंधक श्रीमती निधि मिश्रा एवं श्री ब्रूस वागे, एलिम्को जबलपुर के मैनेजर श्री नितिन माहौर तथा एलिम्को छत्तीसगढ़ के मैनेजर श्री वंशीलाल साकेत ने भी योजना एवं सहायक उपकरणों के उपयोग संबंधी जानकारी दी।समारोह में सभापति श्री हरीश साहू, श्री श्याम कार्तिक वर्मा, एसडीएम श्री मनीष साहू, उपनियंत्रक ब्रेल प्रेस श्रीमती बबीता कमलेश, सहायक सांख्यिकी अधिकारी श्री प्रशांत मोकासे, श्री उत्तमराव माथनकर, श्रीमती सरस्वती रामेश्वरी, सुश्री बीना दीक्षित, श्रीमती राजकुमारी सोनी, श्रीमती सरस्वती जायसवाल, स्नेहलता वैष्णव, अशोक अग्रवाल, लीलाधर भांगे, अनिश मानिकपुरी, सौरभ दीवान, श्रीमती उमा पाण्डेय, श्री प्रशांत द्विवेदी, श्री संजय खाना, श्रीमती ज्याति तिवारी, श्री वैभव गुप्ता, विजय केशकर, श्रीमती रेखा चौहान, कु. नीतू दीवान, श्री राजेश सिंह, श्री मनीष डागौर, उपेन्द्र सिंग, कृष्णा वामशी, मुरली निर्मलकर, आकाश लहसे उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री प्रशांत मोकासे ने किया।
- बिलासपुर. सड़क दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने तथा पीएम राहत योजना एवं ई- डार (इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट) प्रणाली के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्टोरेट बिलासपुर के मंथन सभाकक्ष में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में संभाग के सभी जिलों के परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नोडल अधिकारी शामिल हुए।कार्यशाला में अधिकारियों को पीएम राहत योजना के नवीन दिशा-निर्देशों, पात्र हितग्राहियों के चयन, राहत राशि के त्वरित भुगतान तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आवेदन एवं सत्यापन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही पोर्टल पर दुर्घटना संबंधी प्रकरणों की ऑनलाइन प्रविष्टि, सत्यापन एवं त्रुटि सुधार की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।प्रशिक्षण के दौरान विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराई जा सके। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि किसी भी पात्र हितग्राही को प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े तथा सभी प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।कार्यशाला में परिवहन आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पीएम राहत योजना का उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों और जरूरतमंदों तक शीघ्र सहायता पहुंचाना है तथा इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। संभाग स्तरीय इस प्रशिक्षण से सभी जिलों में योजना के संचालन में एकरूपता, पारदर्शिता और गति आने की अपेक्षा की गई।कार्यशाला में श्री एम.आर. आहिरे, डीआईजी यातायात रायपुर, श्री मनोज धुव, उप परिवहन आयुक्त रायपुर, श्री शिवकुमार बनर्जी, अपर कलेक्टर बिलासपुर, श्री अरविंद यादव, एनआईसी, श्री रामगोपाल करियारे, अति पुलिस अधीक्षक (यातायात) बिलासपुर तथा श्री असीम माथुर, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी बिलासपुर सहित संभाग के सभी जिलों के जिला परिवहन अधिकारी, यातायात पुलिस विभाग के अधिकारी, थाना प्रभारी, विवेचना अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- 0- महापौर पूजा विधानी ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन में जनभागीदारी पर दिया जोर, 350 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया भागबिलासपुर। नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यापक जनजागरूकता के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, बिलासपुर द्वारा देवकीनंदन सभागृह में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों तथा विभिन्न विभागों के लगभग 350 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महापौर श्रीमती पूजा विधानी उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के नए नियमों का सफल क्रियान्वयन स्वच्छ और स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी संस्थाओं और नागरिकों से कचरा प्रबंधन के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की।कार्यशाला में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, मुख्य रसायनज्ञ श्री सुरेश कुमार धुर्वे, संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन विभाग की नोडल अधिकारी श्रीमती हर्षा तिवारी तथा डिविजनल कोऑर्डिनेटर श्री विनीत साहू सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।विशेषज्ञों द्वारा नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। बताया गया कि अब ठोस अपशिष्ट का पृथक्करण गीला, सूखा, सैनिटरी तथा विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट के रूप में किया जाएगा। साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर की नई परिभाषा, पंजीयन प्रक्रिया, अपशिष्ट प्रसंस्करण, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी तथा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्रों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यशाला में प्रतिभागियों को नियमों में किए गए नवीन संशोधनों एवं पुराने प्रावधानों से उनके अंतर की जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर मेसर्स राशि स्टील एंड पावर लिमिटेड द्वारा इको-फ्रेंडली जूट बैग वितरित किए गए तथा उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नए नियमों के पालन की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।



















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