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- सांसद ने टीबी मरीजों को प्रदान किए पोषण किट
राजनांदगांव । सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान अंतर्गत टीबी मरीजों को पोषण किट प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने दो टीबी मरीजों को गोद लेकर निक्षय मित्र के रूप में सहयोग करने का संकल्प लिया। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने भी दो टीबी मरीजों को गोद लेकर निक्षय मित्र बने।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कोई भी व्यक्ति, संस्था, एनजीओ, औद्योगिक इकाई या जनप्रतिनिधि निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद ले सकते है और उन्हें 6 माह तक प्रति माह लगभग 500 रूपए राशि का पोषण आहार उपलब्ध करा सकते है। इसमें तीन किलो चावल, डेढ़ किलो दाल, 250 मिलीलीटर तेल एवं एक किलो मूंगफली शामिल है। उन्होंने बताया कि जिले में 26 मार्च 2026 से 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान संचालित किया जा रहा है। अब तक 39 आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें हाई-रिस्क ग्रामों एवं वार्डों के 2 हजार 378 व्यक्तियों का एक्स-रे किया गया है। इसी प्रकार 131 स्कूलों में 2 हजार 919 छात्र-छात्राओं की टीबी जांच की गई है। जिला क्षय अधिकारी डॉ. अल्पना लूनिया ने बताया कि यह अभियान 100 दिनों तक संचालित होगा, जिसके अंतर्गत जिले के सभी हाई-रिस्क क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य शिविर आयोजित किए जाएंगे तथा 14 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों का नि:शुल्क एक्स-रे किया जाएगा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री संदीप ताम्रकार ने बताया कि अभियान में 22 वार्ड पार्षद एवं 291 पंचायत प्रतिनिधि सक्रिय रूप से शामिल हैं। अभियान के तहत जिला जेल, अनाथालय, वृद्धाश्रम, बाल संरक्षण गृह, ट्रायबल हॉस्टल सहित अन्य संस्थानों में भी टीबी जांच की जा रही है। इस अवसर पर विधायक खुज्जी श्री भोलाराम साहू, विधायक डोंगरगढ़ श्रीमती हर्षिता बघेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। - रायपुर - आज रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 2 स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त स्वच्छता से सम्बंधित जनशिकायत को तत्काल संज्ञान में लेते हुए नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप द्वारा दिए गए निर्देशानुसार जोन 2 जोन कमिश्नर श्री संतोष पाण्डेय के मार्गनिर्देशन और जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री रवि लावनिया की उपस्थिति में नगर निगम जोन 2 क्षेत्र अंतर्गत रेल्वे स्टेशन और पुराना पंडरी बस स्टेण्ड मार्ग में नगर निगम जोन 2 स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा स्वच्छता दीदियों के सहयोग से विभिन्न दुकानों की स्वच्छता व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया गया. इस दौरान डस्टबिन नहीं मिलने और गन्दगी फैलाये जाने से सम्बंधित प्राप्त जनशिकायत सही पाए जाने पर सम्बंधित 39 दुकान संचालकों पर कुल 10 हजार रूपये का ई चालान उन्हें भविष्य के लिये कड़ी चेतावनी देते हुए किया और प्राप्त जनशिकायत का जोन के स्तर पर त्वरित निदान किया गया.
- रायपुर -उत्कल गौरव मधुसूदन दास की जयन्ती दिनांक 28 अप्रैल 2026 मंगलवार को प्रातः 11 बजे रायपुर नगर पालिक निगम के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में राजधानी शहर रायपुर के महिला पुलिस थाना चौक के किनारे स्थित उत्कल गौरव मधुसूदन दास के मूर्ति स्थल के समक्ष उन्हें सादर ससम्मान नमन करने पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है। पुष्पांजलि कार्यक्रम में उत्कल गौरव मधुसूदन दास से सम्बंधित उनके मूर्ति स्थल में नियत दिवस को मूर्ति स्थल के प्रांगण का संधारण और मूर्ति स्थल प्रांगण सहित उसके आसपास के क्षेत्र की विशेष सफाई, मूर्ति स्थल की पुष्पसज्जा सहित आवश्यकतानुसार पेयजल की व्यवस्था रायपुर नगर पालिक निगम के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में रायपुर नगर पालिक निगम के सम्बंधित जोन क्रमांक 4 के सहयोग से की जायेगी।
- रायपुर -आज रायपुर नगर पालिक निगम के सभापति श्री सूर्यकान्त राठौड़ के सभापतित्व में रायपुर नगर निगम सचिवालय द्वारा नगर निगम मुख्यालय भवन महात्मा गाँधी सदन के चतुर्थ तल पर स्थित सभागार में विशेष सामान्य सभा (विशेष सम्मिलन) की बैठक आहुत की गयी।विशेष सामान्य सभा की बैठक में सभापति श्री सूर्यकांत राठौड़ के समापतित्व में महिला सशक्तिकरण हेतु अल्पकालिक जनजागरूकता अभियान के आयोजन एव समन्वय पर चर्चा और विचार विमर्श किया गया और चर्चा उपरांत प्रस्ताव को विशेष सामान्य सभा की बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया।
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दुर्ग। रविवार देर रात बारात से वापस लौटते समय हुई बस दुर्घटना में घायल दुर्ग के तितुरडीह क्षेत्र के नागरिकों से मिलने प्रदेश के केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव आज जिला अस्पताल पहुँचे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती सभी घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा चिकित्सकों से उपचार की जानकारी लिए। मंत्री श्री यादव ने घायलों को हर संभव बेहतर इलाज उपलब्ध कराने भरोसा देते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना किए।
केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि रविवार की रात दुर्घटना में घायल हुए सभी नागरिकों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।अस्पताल पहुँचकर मंत्री श्री यादव ने एक-एक मरीज से संवाद कर दुर्घटना की जानकारी लिए और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने। उन्होंने उपस्थित डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ को निर्देशित किया कि सभी मरीजों का समुचित और प्राथमिकता के आधार पर इलाज सुनिश्चित किया जाए। साथ ही उन्होंने गंभीर रूप से घायलों की विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।अस्पताल में व्यवस्था का निरीक्षणकेबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव ने जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का जायजा लिये। इस दौरान उन्होंने दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छता व्यवस्था, मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी लिए और अस्पताल प्रबंधन को गंभीरता से कार्य करने निर्देश दिए। भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए मंत्री श्री यादव ने अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही वार्डों में कूलर एवं पंखों की पर्याप्त व्यवस्था करने तथा मरीजों और उनके परिजनों को गर्मी से राहत देने के लिए आवश्यक आवश्यक व्यवस्था करने कहा गया।निरीक्षण के दौरान मंत्री गजेन्द्र यादव ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों से भी बातचीत किए और अस्पताल में मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी लिए। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि शासन-प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ सभी शासकीय अस्पताल नागरिकों के बेहतर ईलाज और सुविधाओं का ध्यान रखने प्रयासरत है। मौके पर मंडल अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, पार्षदगण एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। - दुर्ग / छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका 28 अप्रैल 2026 को दुर्ग और भिलाई जिले के प्रवास पर रहेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्यपाल श्री डेका पूर्वान्ह 10.30 को लोक भवन रायपुर से दुर्ग के लिए प्रस्थान करेंगे। पूर्वान्ह 11.15 बजे दुर्ग पहुँचकर पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बैठक हॉल में आयोजित ब्लॉक समीक्षा बैठक में शामिल होेंगे। इसके पश्चात, अपरान्ह 01.15 को भिलाई निवास के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल श्री डेका शाम 04.45 बजे रूंगटा इंटरनेशनल स्किल यूनिवर्सिटी, भिलाई के लिए निकलेगे और शाम 05.00 बजे संस्थान में आयोजित विशेष कार्यक्रम ’सच हुए सपने’ में सम्मिलित होंगे। कार्यक्रम के बाद राज्यपाल शाम 06 बजे लोक भवन रायपुर के लिए रवाना होंगे।
- बिलासपुर /जिला पंचायत बिलासपुर की सामान्य सभा की विशेष बैठक 28 अप्रैल को आयोजित की जाएगी। यह बैठक मंगलवार को शाम 4 बजे जिला पंचायत सभाकक्ष, बिलासपुर में संपन्न होगी। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी द्वारा की जाएगी। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल द्वारा जारी सूचना के अनुसार बैठक में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इनमें ज्ञान भारतम् पांडुलिपि सर्वेक्षण पर चर्चा, सुशासन तिहार 2026 की रूपरेखा पर विचार-विमर्श तथा अध्यक्ष की अनुमति से अन्य विषयों पर भी चर्चा शामिल है। बैठक में सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों को निर्धारित तिथि एवं समय पर बैठक में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
- बिलासपुर /महिलाओं की समस्याओं के त्वरित निराकरण, न्याय तक आसान पहुंच और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 29 अप्रैल 2026 को बिलासपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा महिला जनसुनवाई का आयोजन किया जाएगा।राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की अध्यक्षता में बुधवार 29 अप्रैल को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। कार्यक्रम के तहत प्रातः 10 बजे 'शी सर्वज' विषय पर कार्यक्रम का आयोजन स्वर्गीय लखीराम ऑडिटोरियम, कंपनी गार्डन के पास किया जाएगा, जिसमें महिलाओं से जुड़े मामलों की निगरानी, शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसके पश्चात सुबह 11:30 बजे कलेक्टोरेट स्थित मंथन मीटिंग हॉल में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महिला सुरक्षा, शिकायतों के निराकरण, कानून-व्यवस्था एवं महिला कल्याण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।निर्धारित कार्यक्रम के तहत इसके बाद दोपहर 1 बजे से जल संसाधन विभाग परिसर स्थित प्रार्थना सभा कक्ष में महिला जनसुनवाई आयोजित होगी, जहां महिलाएं घरेलू हिंसा, कार्यस्थल उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद, साइबर अपराध, पारिवारिक विवाद सहित विभिन्न मामलों की शिकायत सीधे आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगी। दोपहर 3 बजे यशोदा एआई विषय पर कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें एनआरएलएम से जुड़ी महिलाओं, स्व-सहायता समूहों एवं लघु उद्यम से जुड़ी लगभग 200 महिलाओं के साथ संवाद किया जाएगा। जन सुनवाई में पूर्व पंजीयन की आवश्यकता नहीं है। पीड़ित महिलाएं आवश्यक दस्तावेजों के साथ सीधे उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं। आयोग द्वारा मौके पर ही शिकायतों का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग ने बिलासपुर संभाग की महिलाओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाएं।
- -परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा-एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदमरायपुर परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान श्री ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।श्री पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद श्री पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण और लघु वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक अभिनव पहल के तहत जशपुर जिले में तीन दिवसीय स्टोरी टेलिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। वन मंडल जशपुर, जिला लघु वनोपज संघ मर्यादित एवं फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी के संयुक्त तत्वावधान में 24 से 26 अप्रैल तक जिला मुख्यालय स्थित निर्वाणा होटल में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विकासखंडों की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाईकार्यशाला में कुनकुरी, बगीचा, जशपुर, पत्थलगांव, कांसाबेल और सन्ना विकासखंडों के वन धन विकास केंद्रों से जुड़ी महिलाओं को अपने अनुभव, संघर्ष और सफलता की कहानियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास विकसित करना तथा जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाना रहा।प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नवरस और पांच ज्ञानेंद्रियों के समुचित उपयोग के माध्यम से कहानी कहने की कला को जीवंत और प्रभावशाली बनाने के गुर सिखाए। व्यावहारिक अभ्यास, समूह चर्चा और प्रस्तुतीकरण के जरिए महिलाओं की संप्रेषण क्षमता को मजबूत किया गया।कार्यशाला के अंतिम दिन प्रतिभागियों ने अपनी स्वयं की तैयार कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया, जिसमें उनके जीवन अनुभव, स्थानीय परंपराएं और वन संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई। प्रतिभागियों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया।यह कार्यशाला न केवल महिलाओं के अभिव्यक्ति कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सफल रही, बल्कि सामुदायिक स्तर पर प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण साबित हुई। वन विभाग ने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार के नवाचारपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाएगा।
- -मनरेगा के तहत बने चेक डैम से किसानों को सालभर सिंचाई, आय और रोजगार में वृद्धिरायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेक डैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं।छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेक डैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं।इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बदौली एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चेक डैम निर्माण ने जल संकट से जूझ रहे गांव को जल समृद्ध और आत्मनिर्भर बना दिया है।पहले बदौली गांव के किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे। बारिश की अनिश्चितता के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था और गर्मी के मौसम में जल संकट के चलते खेती करना मुश्किल हो जाता था। कई किसानों को आजीविका के लिए पलायन करना पड़ता था।लेकिन मनरेगा के तहत चेक डैम निर्माण के बाद अब गांव में जल का प्रभावी संग्रहण होने लगा है। इससे न केवल भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है, बल्कि कुओं और हैंडपंपों में भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।चेक डैम से सीधे तौर पर 20 से 25 किसानों को सालभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है। परिणामस्वरूप किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों एवं नगदी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। पहले जहां एक फसल पर निर्भरता थी, अब दो से तीन फसलें लेकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।गांव के किसान श्री ईश्वर और श्री कपिल बताते हैं कि चेक डैम बनने के बाद खेती आसान हो गई है और अब वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं। खेती में बढ़ी उत्पादकता ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।चेक डैम निर्माण से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर काम मिलने से ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिला, जिससे पलायन में कमी आई है।राज्य में जल संरक्षण की इस तरह की पहलें ग्रामीण विकास के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। बदौली जैसे गांव इस बात का प्रमाण हैं कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी सुनिश्चित हो, तो ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।
- -पानी की किल्लत झेलने वाले गांव में अब हर घर नल कनेक्शनरायपुर ।जल जीवन मिशन से गांवों की तस्वीर बदल रही है। इसने ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। हर साल पानी की किल्लत झेलने वाले गांवों में भी अब मिशन की बदौलत नल से हर घर स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। राजनांदगांव के डोंगरगढ़ विकासखंड के दूरस्थ वनांचल गांव घीकुड़िया में जल जीवन मिशन के तहत सोलर आधारित जल आपूर्ति की व्यवस्था ने गांव की सूरत बदल दी है।जल जीवन मिशन से घीकुड़िया में अब हर घर तक शुद्ध पेयजल की पहुंच सुनिश्चित हो गई है। इससे ग्रामीणों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। मिशन के अंतर्गत गांव में पानी टंकी का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने तथा नल कनेक्शन के माध्यम से प्रत्येक घर तक जल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इस सुविधा से महिलाओं को काफी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता और वे अपने अन्य कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं।घीकुड़िया में जल आपूर्ति की नई व्यवस्था से बच्चों की दिनचर्या में भी सार्थक बदलाव आया है। पहले जहां पानी लाने में समय व्यतीत होता था, वहीं अब बच्चे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में अधिक समय दे पा रहे हैं। साथ ही गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे जलजनित बीमारियों में भी कमी आई है। ग्रामीणों ने पानी की महत्ता को समझते हुए हर घर नल के साथ जिम्मेदारी भी निभानी शुरू कर दी है। जल संरक्षण और स्वच्छता को लेकर गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।जल जीवन मिशन से जल की आपूर्ति शुरू होने के पहले गर्मी के मौसम में गांव में पानी की भारी किल्लत रहती थी। एक-एक बाल्टी पानी के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे समय की बर्बादी और स्वास्थ्य समस्याएं होती थीं, लेकिन अब जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से घीकुड़िया के हर घर तक नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
- -जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्नरायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्री श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ श्री सुनील मिश्रा शामिल हुए।छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं।अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सुश्री इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में टिकाऊ और जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उद्देश्य से हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।कृषि विभाग द्वारा जिले के सभी विकासखंडों में इस वर्ष 600 हेक्टेयर क्षेत्र में हरी खाद का प्रदर्शन किया जा रहा है। किसानों से अपील की गई है कि वे कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद तकनीक अपनाएं, जिससे मिट्टी की सेहत में सुधार के साथ दीर्घकालीन उत्पादकता सुनिश्चित हो सके।हरी खाद के अंतर्गत ढेंचा, सनई, मूंग, उड़द और बरसीम जैसी फसलों को खेत में उगाकर 40 से 50 दिन बाद जुताई कर मिट्टी में मिला दिया जाता है। इसके पश्चात 2 से 3 सप्ताह बाद मुख्य फसल की बुवाई की जाती है। यह प्रक्रिया मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्वों की पूर्ति करती है।हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में नाइट्रोजन, पोटाश एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है, साथ ही जैविक पदार्थों में वृद्धि होती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बेहतर होती है और भूमि भुरभुरी एवं अधिक उपजाऊ बनती है। हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, की आवश्यकता में कमी आती है।विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का उपयोग कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उपाय है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक है। राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयास किसानों को आत्मनिर्भर और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित “छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम” की योजनाएं आज हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रही हैं। राज्य सरकार की संवेदनशील पहल और सशक्त क्रियान्वयन ने दिव्यांगजनों को न केवल आर्थिक संबल दिया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया है।रायपुर की श्रीमती गिरजा जलक्षेत्री इस बदलाव की जीवंत मिसाल हैं। 60 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने अपने आत्मविश्वास और शासन की योजना के सहारे अपने जीवन को नई दिशा दी। वर्ष 2017 में निगम से 1 लाख 75 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ई-रिक्शा संचालन शुरू किया। कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने निरंतर परिश्रम किया और समय पर ऋण चुकाकर 25 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी प्राप्त किया।श्रीमती गिरजा जलक्षेत्री यहीं नहीं रुकीं उन्होंने आगे बढ़ते हुए 2 लाख 75 हजार रुपये का अतिरिक्त ऋण लेकर अपने कार्य का विस्तार किया। आज वे रायपुर के कोर्ट परिसर में चाय एवं नाश्ता केंद्र संचालित कर रही हैं। यह केंद्र सिर्फ उनका व्यवसाय नहीं, बल्कि कई अन्य दिव्यांगजनों के लिए रोजगार का माध्यम बन चुका है। वर्तमान में लगभग 10 दिव्यांगजन उनके साथ कार्य कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं।राज्य सरकार की इस योजना के तहत दिव्यांगजनों को 10 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक का ऋण अत्यंत रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हितग्राहियों के लिए 5 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित है। साथ ही, समय पर ऋण अदायगी करने पर 25 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान, इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाता है।इस योजना के माध्यम से राज्यभर में दिव्यांगजन किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, फैंसी स्टोर, सायकल रिपेयरिंग, चाय-नाश्ता केंद्र जैसे अनेक छोटे-छोटे व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं। इससे वे न केवल अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं।रायपुर जिले में अब तक 187 से अधिक दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जो इस पहल की सफलता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ आज समावेशी विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां हर वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
- -उपार्जन केंद्रों पर बढ़ी किसानों की भीड़रायपुर। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) 2018 में शुरू की गई एक प्रमुख सरकारी योजना है। इसका उद्देश्य दलहन, तिलहन किसानों को उनकी उपज का लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करना है। यह योजना मूल्य अस्थिरता को कम कर किसानों की आय की रक्षा करती है। प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत छत्तीसगढ के धमतरी जिले में चना खरीदी का कार्य अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। राज्य में सर्वाधिक चना उत्पादक जिले के रूप में अपनी धाक जमा चुके धमतरी में, अब उपार्जन केंद्रों पर किसानों की चहल-पहल और भी बढ़ गई है।जिले की 76 हजार क्विंटल की शानदार उपलब्धि के बाद, कृषि विभाग अब शेष 24 हजार क्विंटल के लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिशन मोड पर है। राज्य स्तरीय कृषि अधिकारियों का मानना है कि धमतरी जिले द्वारा अपनाई गई पारदर्शी पंजीकरण और त्वरित भुगतान की प्रणाली (DBT) अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है। प्रशासन की सक्रियता से किसानों को प्राथमिकता मिल रही है। जिले के 11 खरीदी केंद्रों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है।कलेक्टर ने उपार्जन केंद्रों पर नोडल अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी है, ताकि तौल से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में कहीं कोई बाधा न आए। इसके साथ ही उन्होंने परिवहन में तेजी लाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। खरीदी गई उपज को जल्द से जल्द गोदामों तक पहुँचाने के लिए परिवहन की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है, जिससे केंद्रों पर किसानों को अपनी बारी का इंतजार न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उपज लेकर आने वाले किसी भी किसान को निराश होकर न लौटना पड़े।उपार्जन केंद्रों पर मौजूद किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य पर त्वरित भुगतान मिलने से उन्हें रबी की कटाई के बाद के खर्चों को संभालने में बहुत मदद मिल रही है। समय पर मिल रहे इस आर्थिक संबल के कारण किसानों का रुझान अब अन्य फसलों की तुलना में दलहन उत्पादन की ओर अधिक बढ़ रहा है। यह योजना न केवल किसानों को सही दाम दिलाती है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को भी नियंत्रित करती है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले कुछ दिनों में शेष लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी संसाधन झोंक दिए जाएंगे। प्रशासनिक स्तर पर किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने संबंधित उपार्जन केंद्रों के नोडल अधिकारियों से संपर्क बनाए रखें ताकि खरीदी प्रक्रिया सुगमता से संपन्न हो सके।
- - निर्माण कार्यों में बढ़ रही ‘साईं बाबा समूह’ की आजीविकारायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिसे ष्बिहानष् के नाम से जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह भारत सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का छत्तीसगढ़ में क्रियान्वयन कर रहा है। ग्रामीण गरीब परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थायी और विविध स्व-रोजगार के अवसर पैदा करना ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।छत्तीसगढ़ में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाली ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना महिलाओं के जीवन में सामाजिक और आर्थिक बदलाव का बड़ा माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले में सहारा आजीविका क्लस्टर के उदयपुर विकासखंड के डाड़गांव की रहने वाली सकीना की कहानी आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जो सकीना कभी बैंक जाने के नाम से घबराती थीं, वे आज स्वयं सहायता समूह के माध्यम से न केवल अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।अभिसरण का कमालः डीएमएफ मद से मिली मिक्सर मशीनशासन की विभिन्न योजनाओं के आपसी समन्वय से जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव आ रहे हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से सीमेंट मिक्सर मशीनें समूहों प्रदान की गई हैं। इन्ही में से एक मशीन ‘रामगढ़’ ग्राम संगठन के ‘साईं बाबा समूह’ को मिली, जिसकी सदस्य सकीना हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।निर्माण कार्यों में बढ़ी भागीदारी, बढ़ी आमदनीसकीना ने बताया कि उन्होंने अपनी आजीविका विस्तार के लिए समूह से 60,000 का ऋण लिया था। समूह को मिली मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स अब उनकी आय का मुख्य जरिया बन गई हैं। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे प्रधानमंत्री आवास निर्माण कार्यों के लिए उनकी मिक्सर मशीन और शटरिंग प्लेट्स की भारी मांग है। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टिंग और अन्य खर्चे निकालकर समूह से अब तक 6,000 से 7,000 की प्रतिदिन की कमाई हो रही है।आत्मविश्वास से भरा सफरः बैंक जाने की हिचकिचाहट हुई खत्मसकीना अपनी सफलता का श्रेय बिहान योजना को देते हुए कहती हैं, पहले मुझे बैंक जाने में भी डर लगता था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद मैं जागरूक और सक्रिय हो गई हूँ। अब मुझे किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है, मैं खुद सक्षम हूँ। अब मैं दूसरी दीदियों को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हूँ।बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींवसकीना की आर्थिक मजबूती का सीधा असर उनके परिवार पर पड़ा है। उनकी बेटी अब कॉलेज में है और बेटा हाई स्कूल की पढ़ाई कर रहा है। सकीना का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता मिलने से अब बच्चों की पढ़ाई-लिखाई बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चल रही है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपये से अधिक करने का प्रयास किया जा रहा है।योजना के लिए शासन का जताया आभारसकीना ने अपनी इस सफलता और आत्मनिर्भरता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को केवल काम ही नहीं दिया, बल्कि समाज में एक सम्मानित पहचान भी दी है।
- -कबीरधाम जिले की बेटियों की शिक्षा को मिली नई उड़ान, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी आर्थिक सहायतारायपुर । कबीरधाम जिले में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने आर्थिक सहायता प्रदान कर एक प्रेरणादायक पहल की है। उन्होंने जरूरतमंद छात्राओं की पढ़ाई में सहयोग करते हुए ग्राम हरमो निवासी भारती साहू को 2 लाख रुपए तथा ग्राम चिल्फी निवासी रंजना झारिया को 25 हजार रुपए की राशि प्रदान की। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर उक्त राशि के चेक प्रदान किए गए। इस अवसर पर श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, श्री अमर कुर्रे, श्री ओमकार साहू, श्री लोकचंद साहू, श्री मिलू साहू उपस्थित रहे।इस दौरान रंजना झारिया ने बताया कि उनके पिता के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई थी, जिसके कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा जरूरतमंदों की मदद करते हैं, तब उन्होंने उनसे संपर्क कर अपनी समस्या बताई। उनकी स्थिति को समझते हुए श्री शर्मा ने 25 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। रंजना ने बताया कि इस सहायता से वह अब दोबारा नर्सिंग की पढ़ाई शुरू कर सकेंगी और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने इसके लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद उनके जीवन में नई उम्मीद लेकर आई है।
- -खस की जड़ों से माला, तोरण, हाथ का पंखा सहित सात प्रकार की आकर्षक कलाकृतियांरायपुर ।खस की सुगंधित जड़ों से शिल्प कला कृतियां और उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण एक पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल कौशल है, जो ग्रामीण कारीगरों, विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाता है। खस की जड़ों को साफ करके, सुखाकर और कभी-कभी भिगोकर (लचीलापन बढ़ाने के लिए) उपयोग किया जाता है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई। 25-26 अप्रैल को बोर्ड कार्यालय के सभागार में खस (वेटीवर) की सुगंधित जड़ों से शिल्प कला कृतियां और उत्पाद बनाने का दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।इस प्रशिक्षण का उद्देश्य धमतरी जिले में नदी किनारे खस की खेती कर रही महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाना है। प्रशिक्षण में कुरूद विकासखंड के तीन गांवों के चार महिला स्व सहायता समूहों की सदस्य शामिल हुईं। इनमें ग्राम नारी से अन्नपूर्णा और जय मां सरस्वती समूह, ग्राम परखंदा से धान का कटोरा उत्पादन समिति तथा ग्राम मदरौद से वंदना महिला स्व सहायता समूह की महिलाएं शामिल रहीं। प्रशिक्षण के माध्यम से खस की जड़ों से मैट (चटाई), परदे, टोकरियाँ, पेन स्टैंड, छोटे बक्से, सजावटी सामान और ज्वेलरी जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं।प्रशिक्षण देने के लिए तमिलनाडु के मदुरै से विशेषज्ञ प्रशिक्षक श्रीमती निर्मला और श्री शन्वगम को आमंत्रित किया गया। श्रीमती निर्मला ने महिलाओं को खस की जड़ों से माला, तोरण, हाथ का पंखा सहित सात प्रकार की आकर्षक कलाकृतियां बनाना सिखाया। कार्यक्रम के दौरान बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने प्रशिक्षणार्थियों से मुलाकात कर उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियों का अवलोकन किया और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बताया कि धमतरी में नदी किनारे खस की खेती का मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुका है और इसे आगे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बनाई जा रही है।बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 में बस्तर क्षेत्र की शबरी और इंद्रावती नदी के किनारे भी खस की खेती के इस मॉडल को विकसित किया जा रहा है, जिसे आगे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जाएगा। खस से बने उत्पाद न केवल सुगंधित होते हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले और एंटी-टर्माइट (दीमक रोधी) गुण वाले भी होते हैं। प्रशिक्षक श्रीमती निर्मला ने बताया कि खस से बने उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। खस की माला, तोरण और अन्य छोटे उत्पाद अच्छी कीमत पर बिकते हैं। इन उत्पादों की खासियत उनकी सुगंध और आकर्षक डिजाइन है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला विकास केंद्रों के माध्यम से भी यह हुनर सिखाया जाता है। यह कौशल महिलाओं और कारीगरों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करता है।प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बोर्ड के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर औषधीय पौधों की खेती के सलाहकार श्री डी.के.एस. चौहान तथा धमतरी जिले के समन्वयक श्री फकीर राम कोसरिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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-संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के विद्यार्थियों को मिलेगी सुविधा
रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज लोकभवन में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की नई बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल छात्रों और स्टाफ के लिए परिवहन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है।इस वाहन के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को कला, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विभिन्न स्थानों तक आवागमन में सुविधा मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को अपने प्रतिभा प्रदर्शन के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह कदम विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन और छात्रों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए उठाया गया है।राज्यपाल श्री डेका ने वाहन के सदुपयोग, नियमित रखरखाव और विद्यार्थियों के हित में प्रभावी उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे संसाधन संस्थानों की शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति देते हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा सहित विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। - अम्बिकापुर । उपसंचालक रोजगार ने बताया कि जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र अम्बिकापुर के द्वारा 28 अप्रैल 2026 को प्रातः 11:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें विभिन्न क्षेत्र के निजी नियोजक विभिन्न तकनीकी एवं गैर तकनीकी लगभग 335 पदों पर साक्षात्कार के लिए उपस्थित रहेंगे। जिला स्तरीय रोजगार मेला पूर्णतः निःशुल्क है। नियुक्ति की शर्तों के लिए नियोजक स्वयं जिम्मेदार होंगे। कार्यालय की भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में सिर्फ सुविधाप्रदाता के रूप में होगी। जिले के इच्छुक ऐसे समस्त आवेदक जो रोजगार मेला में भाग लेना चाहते है, अपने साथ शैक्षणिक योग्यता की अंकसूची, निवास प्रमाण पत्र, पासपोर्ट साईज के फोटो के साथ 28 अप्रैल 2026 दिन को प्रातः 11:00 बजे से सायं 04:00 बजे तक जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र गंगापुर अम्बिकापुर में आयोजित जिला स्तरीय रोजगार मेला में उपस्थित होकर रोजगार के अवसर का लाभ प्राप्त कर सकते है। जिला स्तरीय रोजगार मेला हेतु सरगुजा संभाग के समस्त शिक्षित युवाओं को रोजगार मेला में सहभागिता हेतु ऑनलाईन पोर्टल www.erojar.cg.gov.in एवं छत्तीसगढ़ रोजगार एप पर अपना रोजगार पंजीयन, रोजगार मेले हेतु पंजीयन दोनों ही आवश्यक है। अतः ऐसे आवेदक जिन्होंने ऑनलाईन पोर्टल ई-रोजगार पर अपना पंजीयन नहीं करवाया है, वे विभागीय पोर्टल पर अपना पंजीयन करवा सकते हैं।
- अम्बिकापुर। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि आगामी 30 अप्रैल को पूरे देश में आयुष्मान भारत दिवस मनाया जाएगा। जिसके अंतर्गत आयुष्मान भारत कार्ड निर्माण हेतु जिले में तीनदिवसीय शिविर आयोजित किया जाएगा। यह शिविर 28 अप्रैल, 29 अप्रैल एवं 30 अप्रैल को लगाया जाएगा, जिसमें लोगों का आयुष्मान भारत कार्ड बनाया जाएगा तथा योजना के लाभ के बारे में बताया जाएगा। जिले में कुल लक्ष्य 922111 के विरूद्ध में 842431 कार्ड निर्माण किया जा चुका है। हितग्राही अपना राशन कार्ड, आधार कार्ड लेकर अपने नजदीकी पंचायत भवन, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र में जाकर निःशुल्क कार्ड बनवा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत बीपीएल परिवार को 05 लाख एवं एपीएल परिवार को प्रति वर्ष 50 हजार रूपये का मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करता है। आयुष्मान वय वंदना के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 05 लाख तक का मुफ्त इलाज की सुविधा प्रदान करता है। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों लिवर प्रत्यारोपण, किडनी प्रत्यारोपण फेफड़ा प्रत्यारोपण, हृदय रोग, कैंसर, एप्लास्टिक अमीनिया, एसिड अटैक के उपचार के लिए 25 लाख तक की मुफ्त उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमानरायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। श्री शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई - के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।
- रायपुर । राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में छत्तीसगढ़ शासन के चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज श्री हिम शिखर गुप्ता ने मुलाकात की। भेंट के दौरान राज्यपाल श्री डेका ने कारखानों में होने वाली औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने और श्रमिकों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।राज्यपाल ने निर्देश दिए कि कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो, मशीनों की नियमित जांच की जाए तथा कर्मचारियों को समय-समय पर सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की लगातार मॉनिटरिंग की जाए, ताकि संभावित दुर्घटनाओं को समय रहते रोका जा सके और श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार हो।
- रायपुर । राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में 64 अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता पैरा आर्मरेसलर श्री श्रीमंत झा ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने हाल ही में नार्वे के ईदफ्योर्ड में आयोजित हुए पैरा आर्मरेसलिंग कप 2026 प्रतियोगिता में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीत कर देश का नाम रोशन किया है।छत्तीसगढ़ के भिलाई के निवासी श्रीमंत झा एक प्रसिद्ध भारतीय पैरा-आर्मरेसलर (विकलांग कुश्ती खिलाड़ी) हैं, जिन्होंने नॉर्वे पैरा-आर्म रेसलिंग कप 2026 में 85 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रौशन किया है। वे एशिया नंबर-1 और वर्ल्ड नंबर-3 के रूप में पहचान रखते हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 64 से अधिक पदक जीत चुके हैं। श्री झा ने राज्यपाल को अपनी उपलब्धियों की जानकारी दी। श्री डेका ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी तथा उनका सम्मान किया।



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