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- दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से दुर्ग नगर निगम के पार्षदो ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा का भ्रमण किया। इस दौरान पार्षदो ने विधानसभा में बजट सत्र की कार्यवाही को नजदीक से देखा और संसदीय प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त किये।भ्रमण के दौरान पार्षदो ने विधानसभा परिसर दर्शक दीर्घा, पुस्तकालय तथा केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव के कक्ष पहुँचे और उनसे सौजन्य मुलाकात कर विभागीय कार्यों की जानकारी लिए। राज्य की राजनीति, विधायी प्रक्रिया और उनके महत्व के बारे में जानकारी लिए। उन्होंने सभी पार्षदो को अपने क्षेत्र में कार्य के साथ-साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी। इस दौरान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग निगम के पार्षदो को विधानसभा में बजट सत्र, मानसून सत्र और शीत सत्र में होने वाले कार्यवाही की जानकारी दिए। इसके पश्चात् विधानसभा सत्र की कार्यवाही से अवगत कराये।इस अवसर पर दुर्ग निगम के पार्षदो ने कहा कि यह भ्रमण उनके लिए सीखने और अनुभव प्राप्त करने का अनूठा अवसर था। इससे उन्हें राज्य की राजनीतिक संरचना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गहराई से समझने में मदद मिलेगी। मंत्री गजेन्द्र यादव ने विधानसभा भ्रमण के दौरान प्रश्नकाल में सवाल पूछने और आने की प्रक्रिया, ध्यानाकर्षण में जनता के मुद्दों को सदन में रखने की जानकारी साझा किये।विधानसभा भ्रमण के दौरान महापौर श्रीमति अलका बाघमार, पार्षद देवनारायण चंद्राकर, चंद्रशेखर चंद्राकर, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, नीलेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, श्रीमति रंजीता पाटिल, श्रीमति सुरुचि उमरे, युवराज कुंजाम, श्रीमति हर्षिता जैन, श्रीमति सावित्री दामाहे, जैन सहित अन्य पार्षदगण उपस्थित रहे।
- -नियमित मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति के 11.14 करोड़ का भी आबंटनबिलासपुर । होली के पहले निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए मानवीय सरोकार के साथ पहल करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से कुल 62.85 करोड़ रुपए का आबंटन आज जारी किया गया है। इसमें वेतन भुगतान के लिए कुल 51 करोड़ 71 लाख 21 हजार रुपये आबंटित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी नगरीय निकायों को प्रतिमाह नियमित रूप से दी जा रही चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत कुल 11 करोड़ 14 लाख 38 हजार 492 रुपये का भी आबंटन किया गया है।फरवरी-2026 की स्थिति में नगरीय निकायों में वेतन के लिए लंबित राशि के आधार पर नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से आबंटन किया गया है, ताकि नगरीय निकायों में वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सके और लंबित देयकों एवं वेतन का निराकरण हो सके।11 नगर निगमों को वेतन के लिए 25.05 करोड़प्रदेश के 11 नगर निगमों को कुल 25 करोड़ 5 लाख 34 हजार रुपये की राशि वेतन एवं चुंगी क्षतिपूर्ति मद में प्रदान की गई है। नगर पालिक निगम भिलाई को 4 करोड़, बिलासपुर को 5 करोड़, दुर्ग को 1 करोड़ 65 लाख 92 हजार, राजनांदगाँव को 3 करोड़, जगदलपुर को 1 करोड़ 50 लाख, अंबिकापुर को 3 करोड़, चिरमिरी को 2 करोड़, रिसाली को 2 करोड़, बीरगांव को 54 लाख 55 हजार, धमतरी को 1 करोड़ 7 लाख एवं भिलाई-चरोदा को 1 करोड़ 27 लाख 87 हजार रुपये जारी किए गए हैं। नगर निगमों में यह राशि मुख्य रूप से नियमित कर्मचारियों, स्वच्छता कर्मियों एवं संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान तथा चुंगी समाप्त होने से उत्पन्न राजस्व अंतर की भरपाई हेतु उपयोग की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों को चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत 7 करोड़ 51 लाख 55 हज़ार 420 रुपये भी आबंटित किए गए हैं।वेतन के लिए नगर पालिकाओं को 16.48 करोड़ व नगर पंचायतों को 10.17 करोड़नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 38 नगर पालिका परिषदों में 16 करोड़ 48 लाख की राशि तथा 85 नगर पंचायतों को कुल 10 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होली के पूर्व निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए आबंटित की है। छोटे एवं मध्यम नगरीय निकायों के लिए यह वित्तीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश के सभी 54 नगर पालिकाओं को भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ 8 लाख 52 हजार 17 रुपए का आबंटन जारी किया गया है। इसके अलावा सभी 124 नगर पंचायतों को एक करोड़ 54 लाख 31 हजार 55 रुपए की मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति राशि दी गई है।ज्ञातव्य हो कि राज्य में चुंगी समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति में राज्य सरकार द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को नियमित अंतराल पर राशि प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें। यह मद विशेष रूप से वेतन भुगतान, स्वच्छता व्यवस्था, जलप्रदाय सेवाओं एवं दैनिक संचालन व्यय को संतुलित करने में सहायक होती है।विभाग द्वारा आज आबंटित राशि से नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को होली के पूर्व वेतन प्राप्त होगा। इससे निकायों में स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य शहरी सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आबंटित राशि का उपयोग निर्धारित मदों में ही किया जाएगा। सभी निकायों को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए व्यय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। चुंगी क्षतिपूर्ति मद से वेतन के लिए 51.71 करोड़ एवं नियमित चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में 11.14 करोड़, इस प्रकार कुल 62.85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का होली के पहले आबंटन नगरीय निकायों के लिए बड़ी राहत है।“चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को समस्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान करने में स्थिरता आएगी और शहरी प्रशासन को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की यह पहल शहरी सेवाओं को निरंतर और प्रभावी बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त कदम है।’’ - श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री
- -अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन के प्रवास से छत्तीसगढ़ पर्यटन को नई दिशा-सामुदायिक पर्यटन मॉडल एवं यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज मानकों की दिशा में बढ़ते कदमरायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक इबारत लिखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण गति प्रदान की है। उनका यह दौरा केवल औपचारिक भ्रमण नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय आधारित सतत पर्यटन मॉडल को वैश्विक मानकों से जोड़ने की ठोस रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।दौरे के दूसरे दिन सुश्री किर्सी बस्तर जिले के ग्राम धुड़मारास पहुंचीं, जहां धुरवा डेरा होमस्टे में उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर तथा धुरवा नृत्य और स्वागत गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। आत्मीय स्वागत से अभिभूत सुश्री किर्सी ने कहा कि इस प्रकार का अनुभव उनके लिए अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय है। यह स्वागत केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता का सशक्त परिचय था।प्रवास के दौरान उन्होंने बस्तर के पारंपरिक एवं जैविक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। कलम भाजी, सेमी और बोदई की सब्जी, केले की सब्जी, उड़द दाल, इमली की चटनी, कोसरा भात तथा मंडिया पेज जैसे स्थानीय व्यंजनों से सजी थाली ने उन्हें यहां की जीवनशैली और खाद्य परंपरा से परिचित कराया। वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में स्थानीय खान-पान एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है और बस्तर की जैव विविधता आधारित खाद्य संस्कृति विदेशी पर्यटकों के लिए विशिष्ट पहचान बना सकती है।यह प्रवास विशेष रूप से यूनाइटेड नेशन से जुड़े ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप धुड़मारास और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने पर केंद्रित है। सुश्री किर्सी धुरवा डेरा होमस्टे में रहकर स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और पर्यटन हितधारकों से संवाद कर सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रचार, ब्रांडिंग और होमस्टे संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मार्गदर्शन दे रही हैं। यह भ्रमण जिला प्रशासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के समन्वय से आयोजित किया गया है।प्रवास के दौरान उन्होंने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार कर वहां की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया और मेंदरी घूमर क्षेत्र में स्थानीय हितग्राहियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा की। चित्रकोट जलप्रपात पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है, किंतु अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ की उपस्थिति इसे वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकती है।सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का प्रभाव बहुआयामी होगा। एक ओर यह बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के स्थायी अवसर भी सृजित करेगा। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सतत विकास की अवधारणा को बल मिलेगा। कभी नक्सल प्रभाव की पहचान से जुड़े रहे बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के मॉडल के रूप में उभर रही है। यदि धुड़मारास ‘यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज’ मानकों पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो यह मॉडल देश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने की संभावना रखता है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।
- -एक्सपोजर विजिट में सीखीं इंटीग्रेटेड फार्मिंग की बारीकियांजगदलपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आजीविका के नए आयाम गढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक से आए 50 सदस्यीय दल ने बस्तर जिले का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित इस एक्सपोजर विजिट का मुख्य उद्देश्य बस्तर के जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉकों में संचालित सफल कृषि और पशुपालन मॉडल्स का गहन अध्ययन करना था। इस भ्रमण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत जनपद पंचायत के सभागार में आयोजित एक विस्तृत तकनीकी सत्र से हुई, जहाँ पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के क्रियान्वयन, किसानों के चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बिलासपुर से आए प्रतिभागियों, समूह सदस्यों और कार्यालय स्टाफ को उप-समिति के कार्यों के साथ-साथ आजीविका सेवा केंद्रों द्वारा महिला किसानों को दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की जानकारी दी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे एक व्यवस्थित कार्ययोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है।सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करने के पश्चात दल ने क्षेत्र का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर संचालित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। सदस्यों ने विशेष रूप से ब्रुडिंग सेंटर और उन्नत मुर्गी पालन की बारीकियों को समझा, जिसमें मुर्गियों के आहार प्रबंधन से लेकर टीकाकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही दल ने क्लस्टर के भीतर मछली पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका के पूरक माध्यमों का भी अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान बस्तर की दीदियों द्वारा अपनाई गई उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण के तरीकों ने बिलासपुर के दल को खासा प्रभावित किया। केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद होने वाली ग्रेडिंग, पैकेजिंग और स्थानीय मंडियों के माध्यम से सीधे बाजार से जुड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीति भी साझा की गई।बस्तर की दीदियों के द्वारा बुक्स ऑफ रिकॉर्ड के सटीक संधारण और उनके आत्मविश्वास ने आगंतुक दल के भीतर एक नया उत्साह भर दिया। 24 से 25 फरवरी तक आयोजित यह दो दिवसीय दौरा न केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि दो अलग-अलग जिलों के महिला समूहों के बीच तकनीकी कौशल और अनुभवों को साझा करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस पूरी यात्रा ने प्रतिभागियों को यह विश्वास दिलाया कि समेकित खेती और आधुनिक मार्केटिंग के तालमेल से ग्रामीण जीवन में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोले जा सकते हैं।
- -जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता: सांसद श्री चिंतामणि-केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से पहुंचे भू-गर्भ वैज्ञानिकों द्वारा जल संचय व प्रबंधन को लेकर जिले से आये सरपंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधियों का दी गई विस्तृत जानकारीसूरजपुर। जल संचय जन भागीदारी अभियान को लेकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम तिलसिवां सूरजपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप मे सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। जहां उन्होने वैज्ञानिक खेती और जल संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि पहले लोग नदी, नालों, तालाब, कुओं जैसे जल स्रोतों का पानी का उपयोग पीने एवं दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए करते थे, परंतु अधिकांश जलस्रोतों के सूखने या कम होने से भूजल का उपयोग होने लगा। इससे बोरिंग का प्रचलन बढ़ गया किंतु अधिकाधिक उपयोग से अब भूजल स्तर निरंतर गिर रहा है। ऐसे में जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हम सभी को न केवल जल का बेहतर एवं सीमित उपयोग करना होगा बल्कि निरंतर उसका संरक्षण भी करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, मृदा परीक्षण तथा सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सभी सरपंचों को योजनाओं की जानकारी होना आवश्यक है ताकि वे ग्रामवासियों तक इनका लाभ पहुंचा सकें।उन्होंने आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन करना चाहिए। वैज्ञानिक विधियों से खेती कर हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य दे सकते हैं। अच्छी शिक्षा और वैज्ञानिक सोच से ही कृषि क्षेत्र में समृद्धि लाई जा सकती है। इस कार्यक्रम में “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन” की भी जानकारी दी गई।कार्यक्रम में केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से भू-गर्भ वैज्ञानिक श्री बी अभिषेक व श्री साईं प्रसन्ना पहुचे थे। जिन्होने जिले से उपस्थित सरपंच, उपसरपंच व अन्य जनप्रतिनिधियों के समक्ष जल संचय को लेकर जागरूकता का प्रचार प्रसार किया। उन्होने “डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन योजना अंतर्गत जल प्रबंधन से लाभकारी खेती” विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियमित वर्षा, गिरता भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई मांग के कारण पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं। ऐसे में डाटा ड्रिवन वाटर प्लानिंग सतत कृषि के लिए प्रभावी समाधान है। उन्होंने चेक डैम, परकोलेशन टैंक, फार्म पॉन्ड, माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), फसल विविधीकरण तथा रिचार्ज संरचनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही वैज्ञानिको द्वारा भूमिगत जल दोहन के संबध मे जानकारी देते हुए बताया कि भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए जल संरक्षण क्यों आवश्यक है। उन्होने उपस्थितजनों को वर्षा जल संचय के तरीको के संबंध मे विस्तार पूर्वक जानकरी दी गई और जिले से आए हुए जनप्रतिनिधियों के सवाल व समस्याओं का वैज्ञानिक पद्धति से निदान बताया गया। इसके साथ ही उन्होने जल वृत प्रबंधंन एवं वाटर बजटिंग को लेकर विस्तृत चर्चा की।कलेक्टर एस जयवर्धन ने कहा कि समाज के निचले स्तर तक जल संरक्षण एवं जल संचयन के उपायों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जल खपत कम करने और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में संचालित योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग आवश्यक है। सरपंचों के सहयोग से आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य विभाग आदि की सेवाओं और बेहतर किया जा सकता है। बेहतर सेवा वितरण के लिए आपसी समन्वय बेहद जरूरी है।इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर ने कानून व्यवस्था, साइबर अपराध एवं सड़क सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग लालच या झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं। जिससे उनके बैंक खातों से राशि निकाली जा रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्रामीणों को इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्ति अभियान, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई में सहयोग तथा हेलमेट पहनने के महत्व पर भी जोर दिया। किसी भी अपराध की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 9575770004 पर देने की अपील की गई, जहां शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाता है।कार्यक्रम के अंत में वीबी राम जी के महत्वपूर्ण बिंदुओ के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” बनाने के लिए सभी उपस्थितजनों को शपथ दिलाई गई। इसके अलावा कार्यक्रम में सभी उपस्थितजनों को कृषि, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, वन, विद्युत, महिला एवं बाल विकास, उद्यान, आदिवासी विकास तथा मनरेगा के अधिकारियों द्वारा योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी गई।कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजवाड़े, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती स्वाति संत सिंह, जिला पंचायत सदस्यगण, जिला अध्यक्ष सरपंचगण अध्यक्ष, सरपंचगण, उपसरपंचगण, श्री शशिकांत गर्ग, श्री संदीप अग्रवाल, श्री अजय अग्रवाल, जनप्रतिनिधिगण, जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले, जिला स्तरीय अधिकारी इत्यादि उपस्थित थे।
- रायपुर । बकावण्ड ब्लॉक के ग्राम जामगुड़ा (धनपुर) में रहने वाले महेश भारती के घर जब बेटी रंजना का जन्म हुआ, तो खुशियों के साथ-साथ एक गहरी चिंता ने भी दस्तक दी। मासूम रंजना जन्मजात क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) की समस्या से ग्रसित थी। जैसे-जैसे रंजना बड़ी हो रही थी, माता-पिता के मन में अपनी बेटी के भविष्य, उसकी पढ़ाई और समाज में उसे मिलने वाली स्वीकार्यता को लेकर डर गहराता जा रहा था। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक तंगी थी। एक साधारण परिवार के लिए निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का भारी-भरकम खर्च उठा पाना असंभव सा था, जिससे माता-पिता स्वयं को असहाय महसूस कर रहे थे।उनकी इस मायूसी के बीच उम्मीद की पहली किरण 19 जून 2025 को तब जगी, जब चिरायु दल बकावण्ड की टीम आँगनबाड़ी केंद्र पहुँची। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने रंजना की स्थिति को पहचाना और माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र रेफर किया। इसके बाद की राह जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से आसान होती गई। 06 नवंबर 2025 को बच्ची को रायपुर के मेडिसाईन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ विशेषज्ञों ने रंजना का सफल ऑपरेशन किया।सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जाँच, ऑपरेशन और अस्पताल में रहने का समस्त खर्च शासन द्वारा वहन किया गया, जिससे महेश भारती का परिवार आर्थिक बोझ से मुक्त रहा। 13 फरवरी को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम फॉलो-अप के लिए पहुँची, तो रंजना को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। बेटी के चेहरे की बनावट में आए इस सुखद बदलाव और उसकी खिलखिलाती मुस्कान ने माता-पिता के सालों पुराने डर को खत्म कर दिया है। शासन की इस कल्याणकारी योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए परिजनों ने बताया कि अब वे अपनी बेटी के सुनहरे और सामान्य भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।
- -प्रधानमंत्री आवास योजना से बना आत्मनिर्भररायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत जिला कोंडागांव के ग्राम पंचायत बड़े कनेरा निवासी श्री चमन लाल पवार का परिवार आज शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी रहा है। कभी कच्चे मकान में रहने वाला उनका परिवार अब पक्के, सुरक्षित एवं सौर ऊर्जा से रोशन घर में निवास कर रहा है।यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। जिला प्रशासन के सतत मॉनिटरिंग एवं जागरूकता के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुँचाया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण श्री पवार वर्षों तक कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात में छत से पानी टपकना और दीवारों का कमजोर होना आम समस्या थी। प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के अंतर्गत आवास की स्वीकृति प्राप्त होने के साथ उन्हें आवास निर्माण में मनरेगा के अंतर्गत 95 मानव दिवस का भी लाभ प्राप्त हुआ, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक संबल मिला और मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित हुआ। आज उनका घर सुरक्षित, स्वच्छ और सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त है।श्री चमन लाल पवार को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी उस समय प्राप्त हुई जब ग्राम पंचायत में आए बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी दी गई। कर्मचारियों ने सोलर रूफटॉप योजना, शासकीय अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद श्री पवार ने योजना के तहत आवेदन किया और अपने नव-निर्मित आवास की छत पर 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया। इस हेतु उन्हें 1 लाख 8 हजार रुपये का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ। सोलर प्लांट स्थापित होने से अब उनके घर में नियमित एवं पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। घर में रूफटॉप सोलर लगने के बाद बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे मासिक बचत बढ़ी है। इस बचत का अब वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं में उपयोग कर रहे हैं।चमन लाल के परिवार को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ, जिससे अब उनका परिवार धुएँ से मुक्त रसोई में खाना बना रहा है। वहीं, नल-जल योजना के तहत घर में नल कनेक्शन मिलने से स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हुई है। इससे परिवार की दिनचर्या सरल हुई है और स्वास्थ्य सुरक्षा भी मजबूत हुई है l प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मनरेगा, उज्ज्वला योजना, नल-जल योजना एवं पीएम सूर्य घर योजना का समन्वित लाभ श्री चमन लाल पवार के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आया है। उनका घर अब पक्का, स्वच्छ, सुरक्षित और सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है।
- -राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भररायपुर । सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है। छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की श्रीमती रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं। रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
- -विभिन्न रंगों और आकर्षक पैकेजिंग के साथ समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल-हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम ज़िले की महिला स्व-सहायता समूह महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्व-सहायता समूह से जुड़ी दीदियों ने रंगोत्सव त्योहार होली के लिए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। महिला समूह ने हर्बल गुलाल के व्यवसाय से जुड़कर आजीविका के नए रास्ते खोले है। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके आय का अच्छा स्रोत है। लाल, गुलाबी, पीले सहित अन्य रंगों और प्रकृति खुशबू से भरपूर हर्बल गुलाल बाजार में आने के लिए उपलब्ध है।कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले की विभिन्न महिला समूह द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट, सभी जनपद पंचायत कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर उनके द्वारा स्टॉल लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री की जाती है। समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों की तुलना में सस्ता होता है। हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बहुत आकर्षक है और यह उपहार देने के भी बहुत अच्छा है। हर्बल गुलाल अनेक रंगो के साथ अलग-अलग मात्रा में पैकेजिंग सहित उपलब्ध है। गतवर्ष भी हमने देखा है कि समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाब को क्षेत्रवासियों ने बहुत पसंद किया है और इस व्यवसाय से जुड़कर हमारी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है।जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बहुत से समूह इसका निर्माण करते है। प्रत्येक समूह को इस व्यवसाय द्वारा 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है। हर्बल गुलाल की अच्छी गुणवत्ता और आकर्षक पैकिंग सभी को पसंद आती है। योजना से जुड़े मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूह को मौसमी व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण करने प्रोत्साहित किया जाता है। इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता के लिए समूह को सहायता प्रदान की जाती है।हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल-पत्तियों आदि से बनाए जाते हैं और त्वचा के लिए यह पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। इसके साथ हर्बल गुलाल के और भी कई फायदे हैं। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक रंग होता हैं और इसके निर्माण में कोई अतिरिक्त मिलावट नही की जाती। हर्बल गुलाल पर्यावरण अनुकूल होता हैं। अन्य रंगों की तरह इसे छुड़ाने में मेहनत नहीं लगती बल्कि पानी द्वारा आसानी से धो कर साफ किया जा सकता है। इससे पानी की बचत भी होती है। हर्बल गुलाल में हानिकारक रसायन नहीं होते और यह त्वाचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हर्बल गुलाल का निर्माण प्राकृतिक सामग्रियों से होने के कारण शरीर पर एलर्जी नहीं होती। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक सुगंध होता है। खुशबू के लिए कोई केमिकल का उपयोग नहीं होने के कारण यह पूरा तरह सुरक्षित है।
- रायपुर । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। साथ ही भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिले में इस योजना के प्रति आमजन में तेजी से रूचि बढ़ रही है और लोग सोलर पैनल लगाकर बिजली बचत के साथ-साथ ऊर्जा-दाता भी बन रहे हैं।सूरजपुर जिला के विकासखण्ड राजपुर के ग्राम लडूवा निवासी श्री विकास शर्मा ने अपने घर के छत पर 3 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाया है। सोलर पैनल लगवाने में केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये और राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले हर माह उनका बिजली बिल अधिक आता था, परन्तु सोलर पैनल लगने से अब उन्हें अधिक बिजली बिल की चिन्ता से मुक्ति मिलेगी। साथ ही इसके अलावा अतिरिक्त बिजली का उत्पादन होने पर वह ग्रिड में भी जमा होगी, जिसका उपयोग जरूरत पडने पर भविष्य में किया जा सकता है।श्री विकास शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना बहुत की उपयोगी एवं लाभकारी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस योजना का लाभ लेकर बिजली उपभोक्ता से ऊर्जा-दाता बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अपना योगदान दें। श्री शर्मा ने योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।प्रधानमंत्री सूर्यघर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को वेबसाईट पीएमसूर्यघर डॉट जीओव्ही डॉट ईन या पीएम सूर्यघर मोबाइल एप पर पंजीयन कर लॉग इन आईडी प्राप्त करना होगा। इसके बाद वेब पोर्टल पर उपलब्ध वेंडर का चुनाव कर बिजली कर्मचारी की मदद से वेब पोर्टल पर पूर्ण आवेदन करना होगा। निर्धारित अनुबंध हस्ताक्षरित होने के पश्चात वेंडर द्वारा छत पर प्लांट की स्थापना एवं डिस्कॉम द्वारा नेट मीटर स्थापित किया जाता है। स्थापित प्लांट के सत्यापन पश्चात शासन द्वारा सब्सिडी ऑनलाईन जारी कर दी जाती है।इस दौरान यदि उपभोक्ता इच्छुक हो तो शेष राशि का प्रकरण 7 प्रतिशत ब्याज दर पर बैंक ऋण हेतु बैंकों को जनसमर्थन पोर्टल द्वारा ऑनलाईन प्रेषित किया जाता है, जिससे बैंक के माध्यम से आसानी से लोन मिल जाता है।
- रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड) के प्राधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने वित मंत्री ओपी चौधरी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत 1,72,000 करोड़ रूपए का बजट को किसानों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली बजट बताया है।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हमारा गांव, हमारी सरकार की अवधारणा को साकार करने हेतु ग्रामीण विकास, कृषि उन्नयन एवं महिला सशक्तिकरण पर विशेष प्रावधान किए गए हैं। बजट में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं शामिल की गई हैं, जिनका लाभ प्रदेश की हजारों महिलाओं को मिलेगा।श्री द्विवेदी ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि उन्नति योजना के साथ ही कृषि, सिंचाई एवं आजीविका से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया है किसानों को कर्ज के बोझ से राहत देने हेतु सहकारी बैंकों के माध्यम से 300 करोड़ रूपए की ब्याजमुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण योजना जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत किसानों को बिना ब्याज के फसली ऋण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खाद-बीज एवं कृषि उपकरणों की व्यवस्था सुगमता से हो सकेगी। फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी एवं कपास जैसी फसलों को विशेष योजना में शामिल किया गया है। इसके लिए 10,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही धान खरीदी व्यवस्था को मजबूत करने हेतु 6,000 करोड़ रूपए की राशि निर्धारित की गई है। यह बजट प्रदेश के किसानों, महिलाओं और युवाओं के आर्थिक सशक्तिकरण एवं प्रोत्साहन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
- -किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय-एक पेड़ से 35 साल तक आय अर्जित किया जा सकेगारायपुर । पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल - ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान श्री मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में श्री चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। श्री चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है। गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।
- -हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं पर अर्धदिवसीय सेमिनार आयोजितरायपुर। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) द्वारा आज छत्तीसगढ़ को ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्लोबल क्लीन एनर्जी के विस्तार के उद्देश्य से अर्धदिवसीय सेमिनार का आयोजन कोर्टयार्ड बाय मैरियट में किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग के सचिव श्री रोहित यादव (आईएएस) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।सचिव श्री रोहित यादव ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक परिवेश में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना तथा पारंपरिक औद्योगिक ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ विकल्पों को अपनाने की दिशा में कार्य करना है। उन्होंने बताया कि बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए इसे प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकेगी।सेमिनार में चर्चा के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट, फल एवं सब्जी मंडियों का जैविक कचरा तथा गोबर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। उपयुक्त तकनीक के माध्यम से इनके प्रसंस्करण द्वारा बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।राज्य में स्टील एवं स्पंज आयरन उद्योग का मजबूत आधार रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्र जैसे उरला, सिलतरा, भिलाई तथा रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर एवं बस्तर में भी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। इन क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।ग्रीन हाइड्रोजन को औद्योगिक ईंधन के रूप में अपनाने से दोहरे लाभ होंगे—एक ओर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं बायोमास के मूल्य संवर्धन से किसानों की आय में वृद्धि होगी। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से आय सृजन तथा नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगी।ऊर्जा विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना, भविष्य के अनुसंधान की दिशा तय करना, संभावित बाधाओं की पहचान करना तथा इसके व्यापक क्रियान्वयन के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।सेमिनार में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। “Hydrogen Economy: Innovation-Led Growth in Industrial Clusters in Chhattisgarh” विषय पर भाभा परमाणु अनुसंधान रिसर्च संस्थान (बार्क) के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री सयाजी मैहत्रे ने बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर प्रस्तुतीकरण दिया।“Accelerating Green Hydrogen Adoption in Chhattisgarh” विषय पर Ministry of New and Renewable Energy, भारत सरकार के विषय विशेषज्ञ श्री धर्मेन्द्र कुमार पंचार्या, भिलाई स्टील प्लांट के प्रतिनिधियों एवं अन्य उद्यमियों ने पैनल चर्चा में भाग लिया। सेमिनार में वित्तीय संस्थानों जैसे एसबीआई एवं नाबार्ड के प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही। इसके अतिरिक्त नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सचिन कुमार, बार्क, सीएसएमसीआरआई भावनगर, आईआईटी भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक, विभिन्न निजी औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि तथा सीबीडीए के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। फिल्म सिटी निर्माण स्थल पर चल रहे विरोध के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह परियोजना केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक हरित विकास मॉडल पर आधारित है। बोर्ड द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि फिल्म सिटी निर्माण की प्राथमिकताओं में पर्यावरण संरक्षण, संतुलित वृक्षारोपण और क्षेत्रीय सौंदर्य संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है।परियोजना के अंतर्गत जहां निर्माण कार्य प्रस्तावित है, केवल वहीं न्यूनतम आवश्यक संख्या में पेड़ों की कटाई की जा रही है। यह प्रक्रिया राज्य शासन के नियमानुसार और सभी प्रशासनिक स्वीकृतियों के पश्चात की जा रही है। संबंधित प्रावधानों के तहत सक्षम अधिकारियों को विधिवत सूचना देकर ही कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिल्म सिटी परिसर में बड़ी मात्रा में छोटे एवं बड़े पेड़ों का रोपण किया जाएगा। इसके साथ ही आकर्षक सजावटी पौधे, विभिन्न प्रजातियों के फूलदार पौधे और हरित पट्टियां विकसित की जाएंगी, जिससे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन और अधिक सुदृढ़ होगा। परियोजना को ग्रीन कैंपस कॉन्सेप्ट के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिसमें वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक जल निकासी, हरित खुले क्षेत्र और जैव विविधता संरक्षण जैसे उपाय भी शामिल रहेंगे।प्रस्तावित चित्रोत्पला फिल्म सिटी पर्यटन और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में राज्य को नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगी। इससे छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म शूटिंग के प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य सेवाओं से जुड़े व्यवसायों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और राजस्व में वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने आश्वस्त किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ही परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। बोर्ड ने ग्रामीणों से संवाद और सहभागिता के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता दोहराई है, ताकि यह परियोजना सभी के सहयोग से एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित हो सके। फिल्म सिटी केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यटन विकास की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, जो हरित विकास और समावेशी प्रगति के सिद्धांतों पर आधारित है।
- -उप मुख्यमंत्री ने केमिस्ट के पद पर चयनितों को सौंपे नियुक्ति पत्र-प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगारायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में केमिस्ट के पद पर चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 10 चयनितों को नियुक्ति पत्र सौंपा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी भी इस दौरान मौजूद थे।उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने नव नियुक्त केमिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि केमिस्टों की संख्या बढ़ने से विभागीय जल परीक्षण प्रयोगशालाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा मैदानी स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है। इन नियुक्तियों से विभाग में तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की संख्या बढ़ी है।श्री साव ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से प्रदेश के युवाओं में विश्वास और उत्साह बढ़ा है। युवाओं को उनकी मेहनत और प्रतिभा का उचित प्रतिफल मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनियुक्त सभी केमिस्ट पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि जल गुणवत्ता की निगरानी में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी ने बताया कि विभाग द्वारा स्वीकृत केमिस्ट के 12 पदों पर व्यापम के माध्यम से चयन प्रक्रिया संपन्न की गई थी। दस्तावेज परीक्षण में 11 अभ्यर्थी पात्र पाए गए, जबकि एक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहा। चयनित 11 अभ्यर्थियों में 2 महिला एवं 9 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं।
- रायपुर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित ECI एवं राज्य चुनाव आयुक्तों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने सहभागिता की। इस अवसर पर चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू एवं डॉ. विवेक जोशी उपस्थित रहे।राज्य चुनाव आयुक्तों द्वारा सम्मेलन की व्यापक सराहना की गई। यह सम्मेलन 27 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित किया गया। ECI एवं SECs ने भविष्य में इस प्रकार के राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन को वार्षिक रूप से आयोजित करने का संकल्प लिया।मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी राज्य चुनाव आयुक्तों ने ‘राष्ट्रीय घोषणा 2026’ को अपनाने का संकल्प लिया। इसमें यह पुनः स्थापित किया गया कि शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची लोकतंत्र की आधारशिला है तथा चुनावों का पारदर्शी, निष्पक्ष एवं कुशल संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाता है।राष्ट्रीय एवं संवैधानिक हितों को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रियाओं में समन्वय स्थापित करने हेतु सभी राज्य चुनाव आयोगों के साथ पारस्परिक रूप से स्वीकार्य एवं विधिसम्मत तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इसके अंतर्गत ECINET, EVM, मतदाता सूची एवं इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के उन्नत प्रशिक्षण अवसंरचना को साझा करने का प्रावधान शामिल है।घोषणा में यह भी उल्लेख किया गया कि पंचायत एवं नगरीय निकायों के चुनावों से संबंधित विधिक प्रावधानों को संसद एवं राज्य विधानसभाओं के चुनावों से संबंधित कानूनों के अनुरूप बनाने हेतु भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एवं राज्य चुनाव आयुक्तों (SECs) मिलकर कार्य करेंगे तथा राष्ट्रीय एवं संवैधानिक हितों को सुदृढ़ करने हेतु आपसी सहयोग को और अधिक सशक्त बनाएंगे।भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा राज्य चुनाव आयुक्तों को इसके अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी सक्रिय सहभागिता हेतु आमंत्रित किया गया है।सम्मेलन के दौरान प्राप्त सुझावों का विस्तृत परीक्षण ECI के उप चुनाव आयुक्तों के नेतृत्व में गठित विधिक एवं तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा।राष्ट्रीय हित में प्रभावी निर्णय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आगामी तीन माह के भीतर राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशवार कार्ययोजन आयोग को प्रस्तुत की जाएगी।
- -बजट में अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए कैशलैस चिकित्सा सुविधा की घोषणा पर जताया मुख्यमंत्री का आभाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य बजट में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए कैशलैस चिकित्सा सुविधा शामिल किए जाने पर अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया।मुख्यमंत्री श्री साय से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक श्री कमल वर्मा ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारी वर्ग एवं उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलना एक ऐतिहासिक एवं कर्मचारी हितैषी कदम है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन सरकार के इस संवेदनशील निर्णय का स्वागत करता है तथा आशा करता है कि भविष्य में भी कर्मचारी हितों को इसी प्रकार प्राथमिकता दी जाती रहेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। कैशलैस चिकित्सा सुविधा का लाभ शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। मेडिकल लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के सरलीकरण से कर्मचारीगण अपने और अपने परिवार की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निश्चिंत रहेंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी कार्य गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।प्रतिनिधिमंडल में श्री कमल वर्मा (प्रांतीय संयोजक), श्री सुनील उपाध्याय, श्री जय कुमार साहू, श्री राजेश सिंघी, श्री संतोष कुमार वर्मा, श्री संजीत शर्मा, श्री देवाशीष दास, श्री लोकेश वर्मा, श्री अमित शर्मा, श्रीमती सोनाली तिडके, श्री आकाश त्रिपाठी, श्री जगेश्वर भट्ट, श्री दीपक सोनकर, श्री प्रवीण सिंह एवं श्रीमती निशा यादव उपस्थित रहे।
- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आज अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंग की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा उपायों के अंतर्गत “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर पेट्रोल पम्प एसोसिएशन के सदस्यों एवं संचालकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस विभाग से एएसपी श्री सुखनंदन राठौर एवं खाद्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। अपर कलेक्टर श्री सिंग ने दोपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट पेट्रोल न दिए जाने के आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कदम जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है और इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी। उन्होंने पेट्रोल पम्प संचालकों को आमजन के बीच इस संबंध में व्यापक जनजागरूकता फैलाने के निर्देश भी दिए। साथ ही, किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित कर कार्य करने की बात कही गई। एएसपी श्री सुखनंदन राठौर ने भी बैठक में हेलमेट की अनिवार्यता पर जोर देते हुए सभी पेट्रोल पम्प संचालकों से प्रशासन के आदेशों का पालन करने का आग्रह किया।बैठक के दौरान पेट्रोल पम्प संचालकों ने भी अपनी-अपनी समस्याओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों से प्रशासन को अवगत कराया, जिस पर प्रशासन द्वारा आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया गया। इसके अतिरिक्त, सभी पेट्रोल पम्पों पर आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हवा, स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
- - ऑनलाइन फाइल प्रबंधन, सम्पत्ति प्रबंधन, अवकाश प्रबंधन एवं अन्य कार्यालयीन प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की दी गई जानकारीदुर्ग/ शासकीय कार्यों को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए बीआईटी दुर्ग में ई-ऑफिस क्रियान्वयन हेतु दो पालियों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में सामान्य प्रशासन विभाग से आए मास्टर ट्रेनरों ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विभिन्न ऑनलाइन प्रणालियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण की प्रथम पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की गई, जिसमें सभी विभागों के कर्मचारियों ने भाग लिया। वहीं द्वितीय पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित हुई, जिसमें सभी विभागों के कार्यालय प्रमुखों को प्रशिक्षण दिया गया।मास्टर ट्रेनरों द्वारा ई-ऑफिस, स्पायरो एवं ई-एचआरएमएस से संबंधित कार्यप्रणाली की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारी एवं कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया तथा ऑनलाइन फाइल प्रबंधन, ऑनलाइन सम्पत्ति प्रबंधन, अवकाश प्रबंधन एवं अन्य कार्यालयीन प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान डेमो के माध्यम से फाइल संचालन, नोटशीट तैयार करने तथा ऑनलाइन अनुमोदन की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण देने का प्रयोजन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यालयीन कार्यों को पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से करने के लिए सक्षम बनाना है। इससे कार्यों में पारदर्शिता आएगी, समय की बचत होगी तथा कार्यालयीन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित की जा सकेगी।इस दौरान वनमंडलाधिकारी श्री दीपेश कपिल, जिला पंचायत के सीईओ श्री बी.के. दुबे, अपर कलेक्टर श्रीमती योगिता देवांगन, अपर कलेक्टर श्री विरेन्द्र सिंह, नगर निगम दुर्ग के आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल, नगर निगम भिलाई के आयुक्त राजीव पाण्डेय, डिप्टी कलेक्टर श्री हितेश पिस्दा एवं श्री उत्तम ध्रुव सहित विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
- राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ की विधानसभा में आज प्रस्तुत बजट को ऐतिहासिक बताते हुए भाजपा पार्षद एवं अध्यक्ष जनभागीदारी समिति शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय रवि सिन्हा ने कहा कि यह बजट मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को “विकसित छत्तीसगढ़” बनाने की दिशा में ठोस और दूरदर्शी पहल है। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत यह बजट हर वर्ग के कल्याण और संतुलित विकास का प्रतीक है।रवि सिन्हा ने कहा कि लगभग ₹1.80 लाख करोड़ से अधिक के इस बजट में किसानों, महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों और गरीब वर्गों के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है।किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूतीकृषि क्षेत्र में सिंचाई विस्तार, समर्थन मूल्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा ग्रामीण अधोसंरचना के विकास हेतु पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। इससे किसानों की आय में वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकतामहतारी वंदन योजना सहित महिला कल्याण योजनाओं के लिए बड़े बजट प्रावधान से स्पष्ट है कि सरकार मातृशक्ति के सम्मान और आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिबद्ध है।शिक्षा एवं युवा विकास पर विशेष फोकसविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के उन्नयन, छात्रावास सुविधाओं के विस्तार तथा कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प इस बजट में दिखाई देता है। स्वास्थ्य एवं अधोसंरचना विकासजिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, नई स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना तथा सड़क, पुल एवं नगरीय विकास कार्यों के लिए महत्वपूर्ण राशि का प्रावधान प्रदेश के संतुलित विकास को सुनिश्चित करेगा।रवि सिन्हा ने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जन-जन की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।उन्होंने प्रदेश सरकार को जनहितैषी एवं दूरदर्शी बजट के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त राज्य के रूप में स्थापित होगा।
- राजनांदगांव । जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, राजनांदगांव के अध्यक्ष सचिन सिंह बघेल ने आज छत्तीसगढ़ का वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट सहकारिता क्षेत्र, कृषक सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने वाला दूरदर्शी दस्तावेज है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत बजट किसानों एवं ग्रामीण अंचलों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।सचिन सिंह बघेल ने कहा कि कृषि, सिंचाई, ग्रामीण अधोसंरचना और सहकारी संस्थाओं के सशक्तिकरण हेतु किए गए प्रावधान से राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) तथा जिला सहकारी बैंकों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। इससे किसानों को समय पर फसल ऋण, अल्पकालीन एवं मध्यकालीन ऋण तथा कृषि निवेश के लिए वित्तीय सहायता सहजता से उपलब्ध हो सकेगी।सहकारिता क्षेत्र को मजबूतीबजट में सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण और पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। इससे बैंकिंग सेवाएँ ग्रामीण स्तर तक सुलभ एवं प्रभावी बनेंगी।किसानों को सुलभ ऋण एवं आर्थिक सुरक्षाकृषि ऋण वितरण, ब्याज अनुदान योजना और समर्थन मूल्य व्यवस्था को मजबूत करने के प्रावधान से किसानों की आय में स्थिरता आएगी। सहकारी बैंक किसानों के लिए वित्तीय सेतु का कार्य करते रहेंगे।ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गतिसड़क, सिंचाई और भंडारण सुविधाओं के विस्तार से कृषि उत्पादों के विपणन में सुविधा होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।आत्मनिर्भर ग्रामीण व्यवस्थासहकारी ढांचे को सुदृढ़ कर सरकार ने आत्मनिर्भर ग्राम अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिससे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को लाभ मिलेगा।सचिन सिंह बघेल ने कहा कि यह बजट केवल वित्तीय प्रावधान नहीं, बल्कि “सहकार से समृद्धि” की अवधारणा को साकार करने का संकल्प है। किला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रदेश सरकार की नीतियों के अनुरूप किसानों को बेहतर बैंकिंग सुविधा, पारदर्शी ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को जनहितैषी बजट के लिए बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अधिक सशक्त होगी।
- राजनांदगांव। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री मूलचंद लोधी ने प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को किसान, गरीब और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाला बजट बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को लाभकारी बनाने और गांवों के समग्र विकास की दिशा में ठोस कदम है।श्री लोधी ने कहा कि बजट में कृषि अधोसंरचना, सिंचाई विस्तार, समर्थन मूल्य पर खरीदी की सुदृढ़ व्यवस्था तथा कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रावधान स्वागतयोग्य हैं। इससे प्रदेश के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन में वृद्धि होगी।उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन, उद्यानिकी, जैविक खेती और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देकर किसानों की अतिरिक्त आय के स्रोत भी विकसित किए जा रहे हैं। यह बजट “समृद्ध किसान – सशक्त छत्तीसगढ़” की संकल्पना को साकार करने वाला है।प्रदेश मंत्री लोधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। यह बजट किसान कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।अंत में लोधी ने प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान मोर्चा गांव-गांव जाकर बजट की जानकारी किसानों तक पहुंचाएगा और सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों को दिलाने के लिए कार्य करेगा।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई जोन-1 नेहरू नगर अंतर्गत विनोबा नगर परिया पारा में किये गये अवैध निर्माण को निगम द्वारा तोड़कर कब्जा मुक्त कराया गया। प्राप्त सूचना के आधार पर आसाराम ज्ञान सिंह बबलू द्वारा नाली के उपर अवैध अतिक्रमण कर मकान निर्माण कर लिया गया था। आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय एवं जोन आयुक्त अजय सिंह राजपूत के निर्देश पर जोन-1 का राजस्व एवं बेदखली टीम द्वारा मौका निरीक्षण किया गया। स्थल पर पाया गया कि अतिक्रमणकारी द्वारा नाली के उपर अतिक्रमण कर मकान निर्माण किया गया है। अवैध अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही सहायक राजस्व अधिकारी सुनील जोशी, राजस्व उप निरीक्षक विनोद शुक्ला, इमान सिंह, बेदखली सहायक हरिओम गुप्ता, वार्ड प्रभारी एवं बेदखली दल उपस्थित रहे।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय ने शहर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में आज जोन-2 वैशाली नगर क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रस्तावित वृद्धाश्रम स्थल और प्रस्तावित सड़क का जायजा लेते हुए उपस्थित अभियंताओं को जनहित में आवश्यक और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।निगम आयुक्त ने वैशाली नगर थाना के पीछे 'हमर क्लीनिक' के समीप वृद्धाश्रम के लिए प्रस्तावित स्थल का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन यापन के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराना निगम की प्राथमिकता है। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृद्धाश्रम स्थल के समीप रोड का तत्काल सीमांकन कराया जाए, वैशाली नगर थाना के बाउंड्रीवाल निर्माण कार्य को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए।निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने कुरूद सुन्दर विहार के पास कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों की मूलभूत सुविधा विशेषकर सुगम आवागमन को दृष्टिगत रखते हुए सड़क निर्माण के कार्य हेतु प्रस्ताव तैयार किया जाए ।इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान आयुक्त के साथ मुख्य रूप से येशा लहरे जोन आयुक्त अरविंद शर्मा कार्यपालन अभियंता, अर्पित बंजारे सहायक अभियंता, श्वेता वर्मा उप अभियंता, प्रशन्न तिवारी सहायक राजस्व अधिकारी, शंकर सहानी जोन स्वास्थ्य अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, सुपरवाइजर एवं अन्य उपस्थित रहे।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप, दूरदर्शी और राज्य को समृद्ध बनाने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज बताया है। श्री देव ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, क्षेत्रीय संतुलन, मजबूत आधारभूत संरचना, मानव संसाधन विकास, अंतिम छोर तक सेवाओं की उपलब्धता तथा राज्य को निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बनाने पर केंद्रित है। बजट राज्य की नीति को प्रदर्शन में, निवेश को परिणामों में और आकांक्षाओं को प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्धियों में बदलने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'गारंटी' को पूरा करने और छत्तीसगढ़ को 2047 तक 'विकसित राज्य' बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने बजट को 'ज्ञान' और 'गति का संगम' और 'विकसित छत्तीसगढ़' का आधारस्तम्भ बताते हुए कहा कि बजट में कृषक उन्नति योजना और सिंचाई परियोजनाओं के लिए किया गया प्रावधान यह सिद्ध करता है कि हमारी सरकार किसानों की खुशहाली के लिए प्रतिबद्ध है। बिना किसी नए कर के राजस्व बढ़ाना और किसानों को समय पर इनपुट सब्सिडी देना प्रशंसनीय है। बजट में युवाओं के कौशल विकास, स्वरोजगार और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के उन्नयन पर जोर दिया गया है। 'अटल निर्माण वर्ष' के तहत बुनियादी ढांचे में निवेश से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। 'महतारी वंदन योजना' के सफल क्रियान्वयन के साथ-साथ महिलाओं के स्वरोजगार और लखपति दीदी योजना को नई गति देना महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। बजट में सड़क, बिजली और ग्रामीण विकास (गति) के लिए आवंटित भारी भरकम राशि से राज्य के सुदूर वनांचलों तक विकास की किरण पहुँचेगी। श्री देव ने विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए किए गए विशेष प्रावधानों हेतु मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह हर छत्तीसगढ़िया के स्वाभिमान और समृद्धि का रोडमैप है। यह अंत्योदय के संकल्प को चरितार्थ करता है।



























