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खरगोन (मध्यप्रदेश). पिछले साल प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई मोनालिसा भोंसले द्वारा केरल में एक मुस्लिम युवक से शादी किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश के खरगोन में रह रहे उसके परिजनों ने कहा कि यह शादी उनकी मर्जी के खिलाफ की गई है। भोंसले के परिवार के सदस्यों ने यहां संवाददाताओं को बताया कि महेश्वर की निवासी एवं घुमंतू पारधी समुदाय से संबंध रखने वाली मोनालिसा ने बुधवार को केरल के पूवर के अरुमानूर स्थित नैनार मंदिर में फरमान खान नामक युवक से विवाह किया। उन्होंने बताया कि दोनों की पहचान करीब छह महीने पहले फेसबुक के जरिए हुई थी।
मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले ने कहा, ''दो मार्च को केरल से कुछ लोग आए और हमसे कहा कि वे मेरी बेटी को फिल्मों में काम दिलाने और अभिनय का प्रशिक्षण देने में मदद करेंगे। मैं उसके साथ केरल गया था, लेकिन वहां उसने फरमान खान नाम के युवक से शादी कर ली।'' उन्होंने कहा, ''मैंने इस कदम का विरोध किया और उसे महेश्वर लौटने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया।'' जयसिंह ने कहा कि उन्होंने केरल में पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि मोनालिसा बालिग है और अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र है। मोनालिसा के चाचा विजय सिंह भोंसले ने बताया कि वह इस साल जनवरी में 18 वर्ष की हुई थी।उन्होंने कहा, ''कुछ लोग उसे अभिनय के अवसरों के बहाने केरल ले गए थे। हम बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि यह सब कैसे हुआ। शायद किसी ने उसे प्रभावित किया है। परिवार के पास उसके फैसले को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''उसके भाग्य में जो लिखा है, वही होगा। हम केवल यह आशा करते हैं कि वह अपने करियर में सफल हो और जीवन में आगे बढ़े।'' परिवार के सदस्यों के अनुसार, मोनालिसा ने इससे पहले फिल्म निर्माता सनोज मिश्रा की 'द डायरी ऑफ मणिपुर' नामक फिल्म में लिया गया था और उसे मिला पारिश्रमिक उसकी यात्रा, ठहरने और प्रशिक्षण पर खर्च हुआ था। मोनालिसा के चचेरे भाई जय भोंसले ने बताया कि उसने एक बार अपने इलाके में एक स्कूल खोलने की इच्छा भी जताई थी। शादी की खबर फैलने के बाद महेश्वर में उसके घर पहुंचे पत्रकारों ने पाया कि परिवार इस मुद्दे पर ज्यादा बात करने से बच रहा है। मोनालिसा की दादी प्रमिला ने कहा कि वह फिल्म से जुड़े काम के सिलसिले में बाहर गई थी।उन्होंने कहा, ''अगर वह शादी करना चाहती थी, तो हमें बता सकती थी। हम इसकी व्यवस्था कर देते।''मोनालिसा के वीडियो वायरल होने के बाद उसकी पढ़ाई और अभिनय प्रशिक्षण में मदद कर रहे उज्जैन के महेंद्र लोधी ने बताया कि परिवार के फोन आने के बाद उन्होंने उससे बात की थी। लोधी ने कहा, ''उसने मुझे बताया कि उसका परिवार उसकी शादी कहीं और करना चाहता था, जबकि उसने पहले ही किसी को चुन लिया था, इसलिए उसने उससे शादी करने का फैसला किया।'' उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा प्रशिक्षण के दौरान उज्जैन में किराये के मकान में रह रही थी और उसे 'लाइफ' नामक एक तेलुगू फिल्म में भी काम करने का मौका मिला था। महेश्वर थाना प्रभारी जगदीश गोयल ने कहा कि परिवार ने उसके ठिकाने के बारे में कई बार पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, ''मुझे पहले पता नहीं था कि वह केरल में है। बाद में हमने संबंधित पुलिस थाने से संपर्क किया और उसकी लोकेशन प्राप्त कर परिवार की चिंता दूर की।'' इससे पहले दिन में मोनालिसा ने तिरुवनंतपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एक मुस्लिम युवक के साथ उसकी शादी उसकी अपनी पसंद से और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई है। उसने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि यह 'लव जिहाद' का मामला है।'लव जिहाद' शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी समूहों द्वारा मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं को प्रेम के बहाने धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के आरोपों के संदर्भ में किया जाता है। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी मोनालिसा ने कहा कि उसके माता-पिता चाहते थे कि वह अपनी चाची के बेटे से शादी करे, लेकिन उसने इसका विरोध किया। मोनालिसा ने यह भी कहा कि उसके पिता उससे नाराज हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया की ''गंभीर स्थिति'' पर चर्चा की। मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ असैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। मैंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान जाने और असैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।'' प्रधानमंत्री ने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संकट को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है। दो दिन पहले, भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था। पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए समन्वित हमले के बाद प्रधानमंत्री ने पिछले 10 दिनों में कई पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से बात की है। अमेरिका और इज़राइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, जिनमें दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्र भी शामिल हैं। इससे पहले मोदी ने ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जॉर्डन, इज़राइल और कतर के नेताओं से बात की और उनके देशों पर हुए हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कुछ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की। उन्होंने इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा पर भी चर्चा की।खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। इनमें से लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में रहते हैं, जबकि 40,000 से अधिक इज़राइल में रहते हैं। - नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों को कड़े शब्दों में संदेश दिया कि वे मुद्दा उठा कर सदन से भाग नहीं सकते और मंत्री का जवाब सुनने के लिए उन्हें यहां बैठना होगा। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और के. सुरेश की कुछ टिप्पणियों के बाद वित्त मंत्री ने यह बात कही।वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा में भाग लेते हुए बोरदोलोई ने कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिए शुरूआती प्रावधान 288 करोड़ रुपये था और हाल तक 1,800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि असम की ''डबल इंजन सरकार'' ने इस पूरी कवायद को ठंडे बस्ते में डालने का निर्णय लिया, जो सार्वजनिक धन की बर्बादी है। बोरदोलोई ने भाजपा नीत असम सरकार पर ''सार्वजनिक ऋण और अनुत्पादक व्यय के चिंताजनक स्तर'' को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर, वित्त मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि वह असम के बारे में उनके सवालों का जवाब देंगी, तो फिर उन्हें अन्य राज्यों पर भी बोलना होगा। वहीं, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कांग्रेस सदस्य बोरदोलोई से कहा कि वह अनुदान की मांग पर ही बोलें। इस पर, कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि आसन का कहना है कि केवल अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें, इसलिए सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को भी केवल अनुदान मांगों तक सीमित रहना चाहिए।उन्होंने कहा, ''आप हमें अनुमति नहीं देते, लेकिन उन्हें (सत्तापक्ष के सदस्यों को) अनुमति देते हैं। यह ठीक नहीं है।'' इस पर पाल ने कहा कि मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें। इसके बाद, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यदि सदस्यों को यह लगता है वे जो विषय उठा रहे हैं वह अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित है तो ''मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं।'' वित्त मंत्री ने कहा, ''मैं यह देखकर चकित हूं कि के. सुरेश (बोरदोलोई का) बचाव कर रहे हैं। जब मैं केरल के बारे में बात करूंगी तो क्या वह उस वक्त बचाव करेंगे? यहां बैठे अन्य राज्यों के सदस्य अपने राज्य के बारे में बोलेंगे तो क्या मुझे जवाब देना चाहिए?'' उन्होंने कहा, ''यह केवल इसलिए नहीं हो सकता कि मैं विपक्ष में हूं तो कोई भी मुद्दा उठाऊं और जब मंत्री जवाब दें तो गायब हो जाऊं, बहिर्गमन कर जाऊं, प्रदर्शन करूं और मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करूं...यह एकतरफा नहीं हो सकता।'' सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे बोलना चाहते हैं तो ''मैं यहां जवाब देने के लिए तैयार हूं लेकिन प्रदर्शन नहीं होना चाहिए...उन्हें जवाब सुनने के लिए यहां बैठना होगा, मुद्दा उठाकर (सदन से) भाग नहीं सकते।--
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राजमहेंद्रवरम . आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में संदिग्ध रूप से मिलावटी दूध पीने के कारण मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है और सात अन्य लोगों का राजमहेंद्रवरम के अस्पतालों में इलाज जारी है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस मामले का पता सबसे पहले 22 फरवरी को चला था जब कई बुजुर्ग व्यक्तियों को पेशाब न आना, उल्टी, पेट दर्द और अन्य दिक्कतों के कारण अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। लालाचेरुवु के चौडेश्वरनगर और स्वरूपनगर इलाकों के निवासी कथित तौर पर मिलावटी दूध पीने के बाद बीमार पड़ गए। अधिकारी ने कहा, ''पूर्वी गोदावरी जिले में संदिग्ध मिलावटी दूध मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है और सात लोगों का राजमहेंद्रवरम के अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है।' प्राधिकारियों ने कहा कि महामारी विज्ञान संबंधी पुख्ता साक्ष्य दूध में मिलावट को संभावित कारण के रूप में इंगित करते हैं तथा विभिन्न विभागों ने इस मामले में समन्वित कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि नैदानिक जांच में रक्त में यूरिया और 'सीरम क्रिएटिनिन' का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया जो विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का संकेत देता है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दूध का सेवन ही विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का मुख्य स्रोत था। ऐसा बताया जा रहा है कि कोरुकोंडा मंडल में स्थित एक डेरी 106 परिवारों को दूध की आपूर्ति करती है। आपूर्ति को तुरंत रोक दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में आपातकालीन चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं और चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों का एक दल तैनात किया गया है। डेरी से आवश्यक नमूने लिये गए हैं और संदिग्ध दूध विक्रेता को हिरासत में लिया गया है। डेरी को सील कर दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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बेंगलुरु/ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित अपने प्रणोदन परिसर में नोजल सुरक्षा प्रणाली और बहु-तत्व इग्नाइटर का इस्तेमाल करते हुए 22 टन थ्रस्ट स्तर पर अपने क्रायोजेनिक इंजन (सीई20) का समुद्र तल पर सफलतापूर्वक परीक्षण (हॉट टेस्ट) किया है। इससे पहले, नोजल सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए समुद्र तल परीक्षण 19 टन थ्रस्ट स्तर पर किए जा रहे थे। सीई20 क्रायोजेनिक इंजन 'लॉन्च व्हीकल मार्क-3' (एलवीएम3) के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है। इसरो ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में कहा, ''एलवीएम3 वाहन की भार वहन क्षमता को बढ़ाने के लिए, एलवीएम3 के भावी मिशनों को उन्नत सी32 चरण के साथ संचालित करने की योजना है, जिसमें सीई20 इंजन के लिए 22 टन का थ्रस्ट होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए, सीई20 इंजन का उड़ान स्वीकृति परीक्षण भी 22 टन थ्रस्ट स्तर पर आयोजित किया जाना आवश्यक है।'' इसमें कहा गया है, ''इसलिए, वर्तमान परीक्षण (10 मार्च को) ने नोजल सुरक्षा प्रणाली (एनपीएस) का इस्तेमाल करते हुए 22 टन थ्रस्ट स्तर पर 165 सेकंड की परीक्षण अवधि के साथ इंजन के समुद्र-स्तर परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है, एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और सरकार की प्राथमिकता है कि देश में करोड़ों परिवारों की रसोई में खाना पकाने के लिए गैस की कमी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरुमध्य में बनी प्रतिकूल स्थिति का जिक्र करते हुए पुरी ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष में कोई भूमिका नहीं होने के बावजूद भारत को इसके परिणामों से पार पाना होगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पुरी ने कहा, ''दुनिया ने ऐसा संकट, ऊर्जा के इतिहास में कभी नहीं देखा। होर्मुज जलडमरूमध्य से 20 प्रतिशत कच्चा तेल की आपूर्ति होती है। इतिहास में पहली बार वाणिज्यिक पोत परिवहन के लिए होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है।'' उन्होंने देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा, ''पिछले पांच दिन में एलपीजी उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा है। मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और वंचितों की रसोई को (एलपीजी की) किसी कमी का सामना नहीं करना पड़े।'' पुरी ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर के मांग प्रबंधन उपाय के तौर पर शहरों में 25 दिन के न्यूनतम अंतराल पर बुकिंग की जा सकती है, वहीं ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन के बाद सिलेंडर की बुकिंग की जा सकती है।उन्होंने कहा, ''भारत को कच्चा तेल की आपूर्ति सुरक्षित है। 45 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज से आता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उत्कृष्ट कूटनीतिक पहुंच के कारण भारत ने इस अवधि में जो कच्चा तेल प्राप्त किया, वह संकटग्रस्त होर्मुज से ऐसे समय में आपूर्ति हो सकने वाली मात्रा से अधिक है।'' पुरी ने कहा, ''देश में रिफाइनरी उच्च क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कई मामलों में तो शत-प्रतिशत से अधिक काम कर रही हैं। देश में पेट्राल, डीजल, एटीएफ (विमान का ईंधन), केरोसिन की कमी नहीं है। खुदरा विक्रेता के पास भंडार है और इन उत्पादों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं।'' पुरी ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी का मानक समय ढाई दिन बना हुआ है जो बदला नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में निर्बाध आपूर्ति प्राथमिकता के साथ की जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक एलपीजी को पूरी तरह विनियमित तरीके से बेचा जा रहा है जो बाजार मूल्य पर उपलब्ध है। पुरी ने यह भी कहा कि हाल ही में 60 रुपये के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर का मूल्य 913 रुपये है, जबकि बाजार द्वारा तय मूल्य लगभग 987 रुपये है।
पुरी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि एक पड़ोसी देश ने सारे स्कूल बंद कर दिए हैं, घर से काम करने के नियम जारी किए हैं और सड़कों पर सरकारी वाहनों की संख्या आधी कर दी है। उन्होंने कहा कि एक और पड़ोसी देश में विश्वविद्यालय तय समय से पहले बंद कर दिए गए और ईंधन बचाने के लिए ईद की छुट्टियां बढ़ा दी गईं। मंत्री ने कहा कि यह अफवाह फैलाने और झूठे विमर्श पैदा करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में स्कूल खुले हुए हैं और पेट्रोल-डीजल सामान्य तरीके से मिल रहा है। विपक्ष की नारेबाजी के बीच पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इस संकट से पहले भारत के कच्चे तेल का करीब 45 प्रतिशत आयात होर्मुज मार्ग से हो रहा था। उन्होंने कहा, ''कच्चे तेल का गैर-होर्मुज स्रोत से आयात बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है जो संघर्ष शुरू होने से पहले 55 प्रतितश था।'' पुरी ने सदन में कहा कि भारत आज 40 देशों से कच्चे तेल का आयात करता है जो 2006-07 में 27 देशों से होता था। अमेरिका और इजराइल द्वारा गत 28 फरवरी को संयुक्त रूप से हमला किए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही रोक दी है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया को 20 प्रतिशत कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आपूर्ति होती है। पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल की खरीद में विविधता लाई गई है और खाड़ी क्षेत्र के उपलब्ध स्रोतों के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मालवाहक जहाज आ रहे हैं।
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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बुधवार को ध्वनिमत से खारिज होने के बाद गुरुवार को अध्यक्ष के आसन पर बैठे। उन्होंने कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर संकल्प आया और इस पर दो दिनों तक 12 घंटे से अधिक चर्चा हुई। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन के भीतर प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपने विचार व्यक्त कर सके और सभी को पर्याप्त अवसर मिले।
ओम बिरला ने कहा कि भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान पर सभी को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, “सदन में सहमति और असहमति की एक महान परंपरा रही है। मैंने हमेशा कोशिश की है कि सदन में संतुलन बना रहे और सभी की आवाज सुनी जाए।”उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी के लिए नियम समान हैं और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। ओम बिरला ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले नोटिस देना पड़ता है।स्पीकर ने स्पष्ट किया कि नियमों से परे जाकर किसी को बोलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता और सदन केवल प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चेयर के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे किसी सांसद का माइक बंद या चालू किया जा सके। सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी आती है।ओम बिरला ने लोकसभा में कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और सदन की कार्यवाही हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है।ओम बिरला ने कहा कि वे उन सभी सांसदों के आभारी हैं, जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद में संवैधानिक गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।विपक्ष के इस आरोप पर कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया, लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत चलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को सदन में बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।ओम बिरला ने कहा कि संसद में कोई भी फोटो, दस्तावेज, उद्धरण या छपी हुई सामग्री सदन में पेश करने से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष ने कई बार इन नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें कठिन फैसले लेने पड़े।सांसदों के निलंबन को लेकर उठे सवालों पर ओम बिरला ने कहा कि वे किसी भी सदस्य को निलंबित करना नहीं चाहते, लेकिन कभी-कभी सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं।उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे फैसले लेने में दुख होता है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आखिर निलंबन की नौबत क्यों आती है। जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।”उन्होंने बताया कि नियम 377 के तहत स्पीकर के पास सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की शक्ति होती है। विपक्ष की महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए स्पीकर ने कहा कि जब कुछ सांसद तख्तियां लेकर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़े, तब संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी।ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा सदन की गरिमा बढ़ाने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की कोशिश की है और आगे भी इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे। -
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रयागराज के दो प्रमुख आस्था केंद्रों के पर्यटन विकास की योजना को मंजूरी दी है। करछना स्थित फलाहिरी बाबा मंदिर और सोरांव तहसील के दुर्गा मंदिर देवी धाम पचदेवा के विकास एवं सौंदर्यीकरण पर लगभग 3.46 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इन परियोजनाओं के माध्यम से मंदिर परिसरों का कायाकल्प किया जाएगा और श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि तीर्थ नगरी प्रयागराज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कम चर्चित आस्था केंद्रों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में करछना स्थित फलाहिरी बाबा मंदिर के पर्यटन विकास के लिए लगभग 1.64 करोड़ रुपए तथा सोरांव तहसील के दुर्गा मंदिर और देवी धाम पचदेवा के सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए करीब 1.82 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।उन्होंने बताया कि फलाहिरी बाबा मंदिर के विकास के लिए 40 लाख रुपए और सोरांव स्थित दुर्गा मंदिर परियोजना के लिए 45 लाख रुपए की पहली किस्त जारी कर दी गई है। इन परियोजनाओं के तहत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था, भव्य प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के लिए यात्री शेड, स्टाम्प फ्लोरिंग युक्त मार्ग, बैठने के लिए बेंच, स्वच्छ शौचालय, पेयजल सुविधा, डस्टबिन, साइनेज और म्यूरल आर्ट जैसे कार्य कराए जाएंगे।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि संगम नगरी प्रयागराज सदियों से आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र रही है और यह प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण त्रिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि प्रसिद्ध तीर्थस्थलों के साथ-साथ अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाया जाए।उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में लगभग 69 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने प्रयागराज का भ्रमण किया। वहीं हाल ही में आयोजित माघ मेला 2026 में करीब 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जो जिले में तेजी से बढ़ रहे धार्मिक पर्यटन की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम के गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की 22वीं किस्त के रूप में देश के 9.32 करोड़ किसानों के खातों में ₹18,640 करोड़ की राशि सीधे तौर पर हस्तांतरित करेंगे।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी गुरुवार को अपने आवास पर पत्रकारों को दी। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत सरकार की कृषि के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत अब अनाज की कमी वाले देश से निकलकर एक वैश्विक शक्ति बन गया है और ये साकार हुआ है सरकार की नीति और किसानों कि मेहनत के कारण।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की भारत 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़कर आज दुनिया में पहले स्थान पर है।केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2014 के कुल खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन के मुकाबले आज देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 357 मिलियन टन हो गया है। बागवानी (Horticulture) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फल और सब्जियों का उत्पादन 277 मिलियन टन से बढ़कर 369 मिलियन टन तक पहुंच गया है।उन्होंने कहा कि दाल उत्पादन में आज भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। आज भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। सरकार तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की रिकॉर्ड खरीदारी कर रही है।शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों की सहायता के लिए सरकार ने “भारत विस्तार” (Bharat Vistar) नामक एक AI डिजिटल प्लेटफॉर्म का पहला चरण लॉन्च किया है। इसके माध्यम से किसान केवल एक फोन कॉल के जरिए अपनी स्थानीय भाषा में खेती से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पिछले वर्षों में हमने एमएसपी गेहूं, धन कपास तिलहन और दलहन की रिकार्ड खरीदी की है और किसानों को सस्ते दामों पर खाद खरीदना सुनिश्चित किया है। इस दौरान, केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2014 में जो कृषि ऋण ₹8 लाख 45 हजार करोड़ था, वह अब बढ़कर ₹28 लाख 69 हजार करोड़ हो गया है। फसल बीमा योजना के तहत किसानों के खातों में लगभग ₹2 लाख करोड़ की क्लेम राशि जमा की गई है। साथ ही बजट में भारी वृद्धि की गई है। यूपीए सरकार के समय का ₹27,000 करोड़ का कृषि बजट अब बढ़कर ₹1.40 लाख करोड़ सालाना से अधिक हो गया है। -
नई दिल्ली। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) 13 मार्च 2026 को विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के लिए 100 दिन शेष रहने की शुरुआत का प्रतीक होगा। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से आयोजित किया जाएगा।
आयुष मंत्रालय ने अपने विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर “100 दिन शेष” अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत देशभर में 100 संगठन, 100 अलग-अलग स्थानों और शहरों में योग के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एस-व्यासा सोसाइटी के अध्यक्ष एच.आर. नागेंद्र और आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश सहित कई गणमान्य व्यक्ति, योग गुरु, विशेषज्ञ और योग प्रेमी शामिल होंगे।इस अवसर पर प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। योग की वैश्विक स्वीकार्यता भारत के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।आयुष मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के लिए नोडल मंत्रालय है। हर वर्ष इस दिवस का मुख्य कार्यक्रम सामूहिक योग प्रदर्शन होता है, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां पहले से शुरू हो चुकी हैं।मंत्रालय के अनुसार, योग दिवस से पहले के 100 दिनों को जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान देशभर के लोगों को योग को समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के मार्ग के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। आगामी 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर के 100 प्रतिष्ठित स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके साथ ही योग दिवस-2026 की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय स्कूली छात्रों की पाठ्य पुस्तकों को स्वदेशी और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। मौजूदा साल में ही छात्रों को यह स्वदेशी सिलेबस पढ़ने को मिलेगा। एनसीईआरटी ने अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों में नए बदलाव लागू किए हैं। इसके तहत अंग्रेजी भाषा की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए अब विदेशी लेखकों को नहीं बल्कि भारतीय शिक्षाविदों को तरजीह दी है।
एनसीईआरटी, यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, ने कक्षा 9 की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में व्यापक बदलाव किए हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि हुए नए बदलावों के चलते सिलेबस सटीक और थोड़ा हुआ है। कक्षा 9 की अंग्रेजी की इस पाठ्यपुस्तक में भारतीय साहित्य पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। इस पाठ्यपुस्तक में राज्यसभा की मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति का अध्याय है। पाठ्यपुस्तक में रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे सुप्रसिद्ध व महान भारतीय लेखकों की रचनाएं भी शामिल की गई हैं।एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने बताया कि पहले पुस्तक में कुल 29 अध्याय थे। अब इनकी संख्या घटाकर 16 कर दी गई है। खास बात यह है कि पहले इन 29 चैप्टर्स में से 15 चैप्टर विदेशी या अंतरराष्ट्रीय लेखकों द्वारा लिखे गए थे। यह सिलसिला वर्ष 2006-07 से लेकर 2025-26 के शैक्षणिक वर्ष तक जारी रहा, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है।अधिकारियों का कहना है कि अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों की संख्या भी दो से कम कर एक कर दी गई है। इस पुस्तक में अब कुछ 16 चैप्टर्स होंगे। कक्षा 9 की इस नई अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक का नाम कावेरी है। पाठ्यपुस्तक में पहला चैप्टर राज्यसभा सांसद व लेखिका सुधा मूर्ति की पुस्तक ‘हाउ आई टॉट माय ग्रैंडमदर टू रीड एंड अदर स्टोरीज’ से लिया गया है।सुधा मूर्ति की यह पुस्तक वर्ष 2004 में प्रकाशित हुई थी। सभी पुस्तकें तय नियमों के तहत राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा 2023 के अनुरूप तैयार की गई हैं। अंग्रेजी की इस पाठ्यपुस्तक में सुधा मूर्ति के अलावा भी कई अन्य भारतीय लेखकों की रचनाएं शामिल की गई हैं। जिन लेखकों की रचनाओं को सम्मिलित किया गया है, उनमें तमिल के महान कवि सुब्रमण्यम भारती, नागा लेखिका टेमसुला आओ, प्रसिद्ध कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर और असमिया उपन्यासकार मित्रा फुकन जैसे लेखक शामिल हैं।एनसीईआरटी के अधिकारियों का कहना है कि नई पुस्तकों में भारतीय ज्ञान प्रणालियों (आईकेएस) को महत्व दिया गया है। वहीं, अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक के 16 चैप्टर्स में से आठ चैप्टर्स भारतीय लेखकों द्वारा लिखित हैं और छह अंतरराष्ट्रीय लेखक भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं। - नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि भारतीय रेल अपने पूरे नेटवर्क में सुरक्षा और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निरीक्षण सिस्टम, ड्रोन निगरानी और कई नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। लोकसभा में लिखित जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में तकनीकी सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और कई नई प्रणालियों को शुरू किया गया है या पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उनका परीक्षण किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि रेलवे में मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस), व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी), ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (ओएमआरएस), इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम्स (आईटीएमएस) और ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) जैसे सिस्टम लगाए जा रहे हैं।मंत्री के अनुसार, एमवीआईएस एक एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित सिस्टम है, जो चलती ट्रेन में लटके हुए, ढीले या गायब हिस्सों का पता लगाने में मदद करता है। इस सिस्टम की तीन यूनिट नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में, दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में और एक साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाई गई हैं। रेलवे ने डीएफसीसीआईएल के साथ समझौता भी किया है, जिसके तहत मालगाड़ियों के लिए नेटवर्क में चार और एमवीआईएस यूनिट लगाई जाएंगी।मंत्री ने बताया कि रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) भी उद्योगों के साथ मिलकर इस तकनीक को और विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर सिस्टम ट्रैक पर पहियों के असर को मापकर खराब पहियों की पहचान करता है और ऐसे 24 सिस्टम पूरे रेलवे नेटवर्क में लगाए जा चुके हैं।वहीं ओएमआरएस सिस्टम ट्रेन के बेयरिंग और पहियों की स्थिति पर नजर रखता है और अब तक 25 ओएमआरएस सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनमें एक सिरपुर कागजनगर में सिकंदराबाद डिवीजन के साउथ सेंट्रल रेलवे के तहत लगाया गया है। रेल पटरियों की जांच के लिए आईटीएमएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग की मदद से रेल, स्लीपर और फास्टनिंग में खराबी का पता लगाता है।इसके अलावा, रायपुर डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ड्रोन के जरिए ओवरहेड उपकरणों की थर्मल इमेजिंग से निगरानी शुरू की गई है। आरडीएसओ त्रि-नेत्र नाम का एक सिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिसमें ऑप्टिकल कैमरा, इंफ्रारेड कैमरा और रडार या लिडार जैसे उपकरण होंगे, ताकि कोहरे या खराब मौसम में लोको पायलट को ट्रेन चलाने में मदद मिल सके। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने 26 फरवरी को नई रेल टेक पॉलिसी लागू की है, जिससे रेलवे में नई तकनीकों और नवाचार को तेजी से अपनाया जा सके।
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नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने कंबाइंड मेडिकल सर्विस (सीएमएस) परीक्षा 2026 के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यूपीएससी ने इस साल सीएमएस के कुल 1,358 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थानों में कंबाइंड मेडिकल सर्विस के रिक्त पद भरे जाएंगे।
यूपीएससी ने सीएमएस के जिन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं, उनमें पहली कैटेगरी के जनरल ड्यूटी में मेडिकल ऑफिसर ग्रेड और मेडिकल ऑफिसर सब कैडर ऑफ सेंट्रल हेल्थ सर्विस के 864, दूसरी कैटेगरी के असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर के 450, जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर के 14 और जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर ग्रेड-II के 30 पद शामिल हैं।आयोग की ओर से जारी पदों के लिए ऑनलाइन मोड में आवेदन प्रक्रिया 11 मार्च से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। ऐसे में जो योग्य और इच्छुक उम्मीदवार एप्लीकेशन फॉर्म भरने की सोच रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर अंतिम तिथि को शाम 6 बजे से पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर दें।एप्लीकेशन फॉर्म भरने वाले कैंडिडेट्स को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्लूएस कैंडिडेट्स के लिए 200 रुपए निर्धारित किए गए हैं। महिला/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के कैंडिडेट्स को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।कैंडिडेट्स का चयन लिखित परीक्षा और पर्सनैलिटी टेस्ट/पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित उम्मीदवारों की सैलरी वेतन मैट्रिक्स स्तर 10 के अनुसार 56,100 से 177,500 रुपए प्रति महीने होगी।अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 32 साल निर्धारित है, जिसकी गणना 1 अगस्त के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आयोग की ओर से लिखित परीक्षा का आयोजन निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर 2 अगस्त को किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पद के लिए एक्टिव आवेदन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट्स को सही साइज और फॉन्ट में अपलोड करें। फिर आवेदन शुल्क का भुगतान करें। इसके बाद फॉर्म को चेक कर सबमिट कर दें। लास्ट में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट आउट भविष्य के लिए निकाल लें। -
नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि पिछले पांच दिनों में रिफाइनरियों को दिए गए निर्देशों के बाद एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही अतिरिक्त एलपीजी की खरीद भी सक्रिय रूप से की जा रही है। यह अफवाहें फैलाने या झूठे आख्यान गढ़ने का समय नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि देश के 33 करोड़ से अधिक परिवारों, खासकर गरीब और वंचित वर्ग की रसोई में गैस की कमी न हो। उन्होंने बताया कि घरेलू गैस की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और सिलेंडर की डिलीवरी का समय पहले की तरह ही बना हुआ है।केंद्रीय मंत्री पुरी ने संसद को बताया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से लेकर डिलीवरी तक का औसत समय अभी भी 2.5 दिन है, जो संकट से पहले भी इतना ही था। इसके अलावा, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बिना रुकावट गैस सप्लाई दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों से ऐसी जानकारी मिली है कि डिस्ट्रीब्यूटर और रिटेल स्तर पर गैस सिलेंडर जमा करने और घबराहट में ज्यादा बुकिंग करने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। हालांकि यह स्थिति किसी वास्तविक सप्लाई की कमी के कारण नहीं, बल्कि लोगों की चिंता के कारण पैदा हुई है।केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि सरकार डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली का विस्तार कर रही है। अभी यह करीब 50 प्रतिशत उपभोक्ताओं के लिए लागू है, जिसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा रहा है। इस व्यवस्था में सिलेंडर की डिलीवरी तभी दर्ज होगी, जब उपभोक्ता अपने मोबाइल पर आए वन-टाइम कोड से इसकी पुष्टि करेगा, जिससे गैस की गलत तरीके से सप्लाई या हेरफेर को रोकना आसान होगा। मांग को संतुलित रखने के लिए शहरी क्षेत्रों में गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन का अंतर तय किया गया है।मंत्री ने बताया कि तेल मार्केटिंग कंपनियों के फील्ड अधिकारी और एंटी-अडल्टरेशन सेल डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर निगरानी कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक कर राज्य प्रशासन को इस व्यवस्था के साथ जोड़ने पर चर्चा की है। पुरी ने कहा कि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को नियंत्रित करने का उद्देश्य काला बाजारी रोकना है, न कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को नुकसान पहुंचाना। कमर्शियल एलपीजी पूरी तरह बाजार आधारित कीमत पर बिना सब्सिडी के बेची जाती है और इसके लिए कोई पंजीकरण या बुकिंग प्रणाली नहीं होती।उन्होंने कहा कि अगर कमर्शियल एलपीजी की बिक्री पूरी तरह खुली छोड़ दी जाती, तो काउंटर से खरीदे गए सिलेंडर अवैध बाजार में भेजे जा सकते थे, जिससे असली व्यावसायिक और घरेलू उपभोक्ताओं को नुकसान होता। इसलिए सरकार ने स्पष्ट प्राथमिकता और पारदर्शी आवंटन प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था की निगरानी के लिए इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति 9 मार्च को बनाई गई थी। इस समिति ने देश भर में राज्य के नागरिक आपूर्ति विभागों और रेस्तरां संघों के साथ बैठकें आयोजित की हैं और ये बैठकें जारी हैं।समिति ने विभिन्न क्षेत्रों और सेक्टरों के आधार पर कमर्शियल एलपीजी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया है। इसके तहत एक बड़े फैसले में आज से तेल कंपनियां औसत मासिक कमर्शियल एलपीजी मांग का 20 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करेंगी, ताकि जमाखोरी और काला बाजारी न हो। पुरी ने कहा कि एलपीजी और गैस पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी सक्रिय किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि हालिया 60 रुपए के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से इसकी कीमत करीब 987 रुपए होनी चाहिए थी। वैश्विक कीमतों के अनुसार, प्रति सिलेंडर 134 रुपए की बढ़ोतरी की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने 74 रुपए खुद वहन किए। इसके कारण उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त खर्च प्रतिदिन 80 पैसे से भी कम बैठता है।पुरी ने बताया कि पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतें भारत से ज्यादा हैं। पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर करीब 1,046 रुपए, श्रीलंका में 1,242 रुपए और नेपाल में 1,208 रुपए के आसपास है। उन्होंने यह भी कहा कि तेल मार्केटिंग कंपनियों को 2024-25 में हुए करीब 40,000 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है। -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में एक थाई जहाज पर हुए हमले को लेकर भारत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया जाना चिंताजनक है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है।विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार 11 मार्च को जिस थाई मालवाहक जहाज ‘मयूरी नारी’ पर हमला हुआ, वह भारत के गुजरात स्थित कांडला बंदरगाह की ओर आ रहा था। घटना के बाद भारत स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों और इजरायल में स्थित सभी भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को 24X7 सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, ताकि संकट में फंसे भारतीय तुरंत संपर्क कर सकें।सरकार ने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। भारत ने क्षेत्र में सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखने की अपील भी की है। भारत ने दोहराया है कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना, निर्दोष नागरिक चालक दल के सदस्यों को खतरे में डालना या समुद्री मार्गों पर आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा डालना उचित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य व्यापारिक सामान का आवागमन होता है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण हाल के दिनों में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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नई दिल्ली। आधार प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने नया बग बाउंटी कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और एथिकल हैकर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म में संभावित कमजोरियों की पहचान करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार इस पहल के तहत 20 अनुभवी सुरक्षा शोधकर्ताओं और एथिकल हैकर्स के पैनल का चयन किया गया है। ये विशेषज्ञ यूआईडीएआई के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा जांच करेंगे।किन प्लेटफॉर्म की होगी जांचशोधकर्ता यूआईडीएआई के कई डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच करेंगे, जिनमेंयूआईडीएआई की आधिकारिक वेबसाइटमायआधार पोर्टलसिक्योर क्यूआर कोड एप्लिकेशनशामिल हैं।इन प्लेटफॉर्म में मौजूद संभावित कमजोरियों को क्रिटिकल, हाई, मीडियम और लो जोखिम श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। जिन शोधकर्ताओं द्वारा महत्वपूर्ण सुरक्षा खामियां खोजी जाएंगी, उन्हें उनकी गंभीरता के आधार पर पुरस्कार दिया जाएगा।साइबर सुरक्षा कंपनी के साथ साझेदारीयह कार्यक्रम साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता कॉमओल्हो आईटी प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।डिजिटल सुरक्षा को प्राथमिकतायूआईडीएआई का कहना है कि डिजिटल युग में सूचना सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्था पहले से ही कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय लागू कर रही है, जिनमें नियमित सुरक्षा ऑडिट, कमजोरियों का आकलन, पेनिट्रेशन टेस्टिंग और निरंतर निगरानी शामिल हैं।स्कूलों में बायोमेट्रिक अपडेट अभियानहाल ही में यूआईडीएआई ने आधार के तहत छात्रों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट के लिए देशभर के 1.03 लाख से अधिक स्कूलों को शामिल किया है। इस पहल के तहत अब तक लगभग 1.2 करोड़ बच्चों का बायोमेट्रिक अपडेट स्कूल परिसर में ही पूरा कराया जा चुका है। -
नई दिल्ली। महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए निकाली गई ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पूरे देश में मनाई जा रही है। जगह-जगह विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन कर महात्मा गांधी को याद किया जा रहा है।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी महात्मा गांधी को याद करते हुए एक्स पोस्ट पर लिखा है, “महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 में इसी दिन शुरू हुआ ऐतिहासिक दांडी सत्याग्रह भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक निर्णायक मोड़ था, जिसने सत्य और अहिंसा के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्रव्यापी आत्मनिर्भरता की भावना को प्रेरित किया। मैं बापू और इस ऐतिहासिक मार्च में भाग लेने वाले सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करता हूं। जैसे-जैसे हम आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर रहे हैं और विकसित भारत के सपने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस आंदोलन द्वारा प्रेरित आत्मनिर्भरता की भावना हमारे राष्ट्र के मार्ग का मार्गदर्शन करती रहेगी।”वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट में लिखा, 12 मार्च 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा साबरमती से दांडी तक आरंभ किया गया दांडी मार्च भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय है। नमक कानून के विरुद्ध यह शांतिपूर्ण आंदोलन सत्य, अहिंसा और दृढ़ संकल्प की शक्ति का प्रतीक बना। इस ऐतिहासिक आंदोलन ने पूरे देश को अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े होने की प्रेरणा दी और स्वतंत्रता व स्वाभिमान की भावना को नई ऊर्जा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण पड़ाव के सूत्रधार महात्मा गांधी और सभी समर्पित सत्याग्रहियों को सादर नमन।भाजपा नेता डॉ. महेंद्र सिंह ने पोस्ट में लिखा, “1930 में आज ही के दिन ‘राष्ट्रपिता’ महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह शुरू किया गया था, जिसने हर आयु-वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। दांडी यात्रा में सम्मिलित होने वाले सभी सत्याग्रहियों को शत-शत नमन।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुरुवार को ‘दांडी मार्च’ की वर्षगांठ पर इसमें शामिल सभी विभूतियों को याद करते हुए एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण।” उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ लिखा, “सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥”
इस ‘सुभाषितम्’ का संदेश है कि सदैव सत्य की ही विजय होती है और असत्य का नाश होता है। इसलिए उस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिस मार्ग पर चलकर ऋषियों ने आनंद और परमसत्य की प्राप्ति की।इससे पहले, स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय ‘दांडी नमक सत्याग्रह’ की वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी को याद किया। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी जी ने दांडी सत्याग्रह शुरू किया था, जिसने हर आयु और वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। यह स्वदेशी की दिशा में उठाया गया ऐसा कदम था, जिसने स्वाधीनता आंदोलन की दिशा बदल दी। दांडी सत्याग्रह के सभी महापुरुषों को नमन करता हूं।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “महात्मा गांधी ने 1930 में आज ही के दिन अंग्रेजों के अत्याचारी नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दांडी नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय दांडी नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर पूज्य महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को विनम्र अभिवादन।”वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “पूज्य बापू और अमर संघर्ष के सभी सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन। साल 1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता संग्राम की उस ज्योति का प्रज्ज्वलन था, जिसने जन-जन में आत्मबल और स्वराज का नया मंत्र भर दिया। बर्बर और अलोकतांत्रिक ब्रिटिश शासन की जड़ें हिलाने वाले इस अभूतपूर्व ‘दांडी मार्च’ ने यह सिद्ध किया कि सत्य, साहस और सामूहिक संकल्प से साम्राज्य भी डगमगा जाते हैं।” -
तिरुचिरापल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। उन्होंने देश के इस संकट से उबरने का भरोसा व्यक्त करते हुए लोगों से अपील की कि वे घबरायें नहीं। रसोई गैस की आपूर्ति में कमी और विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार पर ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान को लेकर तैयारी करने में "विफल" होने का आरोपों के बीच, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हमेशा भारतीयों के हितों को सर्वोपरि रखती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, "आज मैं तमिलनाडु के लोगों से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बारे में बात करना चाहता हूं। इसने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया है। हम 'इंडिया फर्स्ट' की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।" उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि हर परिस्थिति में हमारी सरकार हमेशा भारतीयों के हितों को सर्वोपरि रखती है। इन परिस्थितियों में भी हमारा यही दृष्टिकोण रहेगा। घबराने या अफवाहों पर ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। मैं जनता से अपील करता हूं कि हम केवल सही और सत्यापित जानकारी का प्रसार करे।" प्रधानमंत्री ने कहा, "कोविड महामारी के दौरान, 140 करोड़ भारतीयों ने दुनिया को दिखाया कि हमारा राष्ट्र कितना परिपक्व है। मुझे विश्वास है कि एक राष्ट्र के रूप में, हम हर परिस्थिति का सफलतापूर्वक सामना करेंगे।" तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने और मूल्य वृद्धि के प्रभाव को कम करने के लिए मोदी से हस्तक्षेप की मांग की।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों से पीएम-किसान पोर्टल पर अपने विवरण को सत्यापित करने और जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करने का आग्रह किया। यह आग्रह 13 मार्च को 18,640 करोड़ रुपये की 22वीं किस्त जारी होने से पहले किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी असम के गुवाहाटी से 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (पीएम-किसान) योजना के तहत 9.32 करोड़ पंजीकृत किसानों के खातों में यह राशि डिजिटल माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश भर के किसानों, विशेष रूप से असम के किसानों से अपील की है कि वे पीएम-किसान पोर्टल पर अपनी जानकारी की स्थिति की जांच करें। उन्होंने एक बयान में कहा, ''यदि आवश्यक हो, तो जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें, ताकि 13 मार्च को जारी होने वाली 22वीं किस्त का लाभ उनके खातों में समय पर पहुंच सके।'' लाभार्थियों की सहायता के लिए, पोर्टल पर 'अपनी स्थिति को जानों (केवाईएस)' नामक एक मॉड्यूल उपलब्ध कराया गया है। यह मॉड्यूल भुगतान की स्थिति, पात्रता, भूमि विवरण, आधार जोड़ने और ई-केवाईसी की स्थिति जैसी सभी जानकारियों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराता है। सरकार ने चेहरे की पहचान पर आधारित एक मोबाइल ऐप भी पेश किया है, जिससे किसान बिना किसी ओटीपी या बायोमेट्रिक डिवाइस की आवश्यकता के, घर बैठे ही अपना ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं। राज्य और ग्राम स्तर के नोडल अधिकारी इस कार्य में अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रहे हैं। मंत्रालय का कृत्रिम मेधा-आधारित वॉयस चैटबॉट 'किसान-ईमित्र' 11 क्षेत्रीय भाषाओं में चौबीसों घंटे सहायता प्रदान कर रहा है, और अब तक इसने लाखों किसानों के प्रश्नों का समाधान किया है। अपात्र लाभार्थियों को बाहर करने के लिए एक मजबूत सत्यापन प्रणाली लागू की गई है, जबकि संपन्न किसानों के लिए अपनी पात्रता स्वेच्छा से छोड़ने (स्वैच्छिक समर्पण) की सुविधा भी शुरू की गई है। उन किसानों को फिर से जोड़ने के लिए भी व्यवस्था की गयी है, जिन्होंने अनजाने में अपनी पात्रता छोड़ दी थी। 22वीं किस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसान हैं। इस योजना के तहत, पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये की राशि तीन समान किस्तों में दी जाती है, जिसे 'प्रत्यक्ष लाभ अंतरण' (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाता है। इस किस्त के जारी होने के साथ, पीएम-किसान के तहत वितरित कुल राशि 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने बुधवार को त्वरित संदेश मंच 'टेलीग्राम' को कॉपीराइट कानून का उल्लंघन करने वाले 3,100 से अधिक चैनल को तीन घंटे के भीतर निष्क्रिय करने का निर्देश दिया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने यह पाया था कि इन चैनल पर कुछ सामग्री मालिकों, ओटीटी मंचों और निर्माताओं के स्वामित्व वाले या उनके लाइसेंस-प्राप्त कार्यक्रमों को बिना कानूनी अनुमति के साझा और वितरित की जा रही थीं। मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में संयुक्त सचिव सी. सेंथिल राजन ने कहा कि ये सामग्री कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मंच पर डाली और प्रसारित की जा रही थीं। अधिसूचना के मुताबिक, "मध्यस्थ मंच टेलीग्राम को निर्देश दिया जाता है कि वह इस सूचना के जारी होने के तीन घंटे के भीतर संबंधित टेलीग्राम चैनल और उनकी सभी सामग्रियों को हटा दे और उनकी पहुंच बंद कर दे। साथ ही किसी भी प्रकार से साक्ष्यों को प्रभावित न होने दे।" सरकार के इस आदेश में कुल 3,142 टेलीग्राम चैनल को हटाने के लिए चिन्हित किया गया है।
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नयी दिल्ली/ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आचरण और सदन की कार्यवाही में उनकी भागीदारी पर तीखी टिप्पणियां करते हुए बुधवार को विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि उन्हें निचले सदन में बोलने नहीं दिया जाता। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए संकल्प पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने यह भी कहा, ''आप प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रस्ताव लाइए। हम मुद्दों पर जवाब देंगे। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव को मैं सामान्य बात नहीं मानता।'' शाह के भाषण के बाद, सदन ने ध्वनिमत से विपक्ष के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, ''विपक्ष के नेता का यह आरोप सही नहीं है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। नेता प्रतिपक्ष की पार्टी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाई, उस पर भी वह नहीं बोले। वह बोलना ही नहीं चाहते। बोलना चाहते हैं तो नियमानुसार बोलना नहीं आता। यह कोई सभा (रैली) नहीं है, यहां नियमानुसार बोलना होता है।'' गृह मंत्री ने बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि यह बहुत अफसोसजनक घटनाक्रम है। उन्होंने कहा, ''जब सदन के मुखिया की निष्ठा पर सवाल उठाया जाता है तो दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की साख पर सवाल खड़े हो जाते हैं।'' शाह ने कहा कि बजट सत्र के पहले चरण में लोकसभा अध्यक्ष के चैम्बर में ऐसा माहौल खड़ा किया गया कि अध्यक्ष की सुरक्षा की चिंता पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि लोकसभा का संचालन कैसे करना है, इसके लिए इसी सदन ने नियम बनाए हैं और सदन के नियम जिसकी अनुमति नहीं देते, उस हिसाब से बोलने का अधिकार किसी को भी नहीं है। उन्होंने कांग्रेस सदस्यों को आड़े हाथ लेते हुए कहा, ''जब आप सदन के संचालन के नियमों को नजरअंदाज करेंगे तो अध्यक्ष का दायित्व है कि ऐसे सदस्य को रोकें, टोकें और बाहर निकाल दें।'' शाह ने कहा कि भाजपा और राजग के विपक्ष में रहते अध्यक्ष के खिलाफ कभी अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया गया और हमने हमेशा रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया। उन्होंने कहा, ''मेरी पार्टी का मजबूत मत है और मान्यता है कि कभी भी लोकसभा अध्यक्ष की निष्ठा पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।'' शाह ने बजट सत्र के पहले चरण में आसन की अवहेलना के मामले में आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा, ''कागज फाड़कर आसन पर फेंकना कैसा आचरण है। किसी के सलाहकार आंदोलनकारी हो सकते हैं। लेकिन उन्हें सदन में नियमों के अनुसार ही चलना होगा।'' उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को सदन के नियम के तहत, आसन की अवहेलना के लिए सदस्य को चेतावनी देने, निलंबित करने और निष्कासित करने का अधिकार है। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष को ओम बिरला को नैतिकता सिखाने की जरूरत नहीं है क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान में भाग नहीं लिया और इससे उच्च नैतिकता कुछ और हो ही नहीं सकती। उन्होंने माइक बीच में बंद होने के विपक्षी सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियमानुसार सदन की कार्यवाही चलती है और मंत्रियों के भी माइक बंद कर दिए जाते हैं। शाह ने कहा, ''जो नियमानुसार नहीं चलेगा, उसका माइक बंद हो ही जाएगा, बंद हो ही जाना चाहिए।''
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपने प्रस्ताव को लेकर ही गंभीर नहीं है और इस पर चर्चा के लिए निर्धारित नौ मार्च की तारीख को वह कोई और विषय लेकर आ गया। शाह ने कहा, ''जिस दिन प्रस्ताव लाया गया, उस पर चर्चा करने की जगह सदन को बाधित किया गया। इससे ज्यादा शर्मनाक घटना कोई नहीं हो सकती।'' शाह ने कहा कि देशभर में भाजपा की छवि बिगाड़ने के लिए प्रचार किया जा रहा है कि विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा, ''कौन बोलेगा, क्या बोलेगा, कितना बोलेगा? यह आसन तय करता है, सत्ताधारी पार्टी तय नहीं करती। हमने कभी विपक्ष की आवाज दबाने का काम नहीं किया।'' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अपने अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 51 प्रतिशत रही, 16वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 52 प्रतिशत रही। शाह ने कहा कि गांधी ने 16वीं लोकसभा में एक भी बार अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया, बजट की चर्चा में हिस्सा नहीं लिया, एक भी सरकारी विधेयक पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। गृह मंत्री ने कहा कि 17वीं लोकसभा में भी उन्होंने तीन बार धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में, चार बार बजट पर चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने दावा किया कि 2025 के शीतकालीन सत्र में राहुल गांधी जर्मनी की यात्रा पर थे, बजट सत्र में वियतनाम की यात्रा पर थे। शाह ने कहा, ''जब भी बजट या कोई महत्वपूर्ण सत्र आता है, उनकी विदेश यात्रा होती है। फिर कहते हैं कि बोलने नहीं देते। विदेश से सदन में कैसे बोलेगे।'' बजट सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी द्वारा एक पूर्व सेना प्रमुख के संस्मरण का उल्लेख किये जाने के संदर्भ में शाह ने कहा, ''अध्यक्ष ने उन्हें एक बार टोका। जब वह नहीं सुनेंगे तो दूसरी बार टोकने के अलावा क्या विकल्प रह जाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि वह (राहुल) अप्रकाशित पुस्तक को उद्धृत नहीं कर सकते। वह ऐसी पत्रिका को उद्धृत कर रहे थे जिसकी छवि उनकी पार्टी की पत्रिका की है।'' शाह ने कहा, ''यह सब्जी बाजार नहीं है, लोकसभा है। चर्चा के विषय तय होते हैं।
उन्होंने सदन की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए राहुल पर निशाना साधा और कहा कि ''प्रधानमंत्री के पास आकर उनके गले लग जाना, सत्ता पक्ष की ओर 'फ्लाइग किस' करना, आंखें मटकाना। नेता प्रतिपक्ष का इस तरह का आचरण नहीं होता।'' इस दौरान शाह के एक शब्द पर विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिस पर गृह मंत्री ने कहा कि कोई अससंदीय शब्द हो तो उसे कार्यवाही से हटा दिया जाए। पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कहा कि वह कार्यवाही को देखेंगे और यदि कोई असंसदीय शब्द होगा तो उसे हटा दिया जाएगा। इस दौरान विपक्ष के सदस्य आसन के समीप आकर शाह के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। शाह ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में किसानों को नुकसान होने के विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि किसी भी समझौते में भारत के किसानों का नुकसान नहीं हुआ। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में 93,000 से अधिक पद रिक्त हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने अर्द्धसैनिक बलों में रिक्तियों के आंकड़े पेश किए, जिसके अनुसार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सबसे अधिक 27,400 पद रिक्त हैं। इसके बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) है, जिसमें 28,342 पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 14,531 रिक्तियां हैं, जबकि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में 12,333 और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में 6,784 रिक्त पद हैं। असम राइफल्स में 3,749 रिक्तियां हैं। रिक्त पदों के कारण कानून प्रवर्तन, आंतरिक सुरक्षा और आपदा राहत क्षमता पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के संदर्भ में राय ने कहा कि बल अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, ''बल उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए अत्यंत पेशेवर तरीके से सभी कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।'' मंत्री ने कहा कि सीएपीएफ और असम राइफल्स में रिक्त पदों को भरना एक सतत प्रक्रिया है, जिसकी भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) जैसी एजेंसियों के जरिये की जा रही है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
राय ने कहा कि सरकार ने चिकित्सा परीक्षणों में लगने वाले समय को भी कम कर दिया है और आवश्यकतानुसार 'कट-ऑफ' अंक भी कम किए दिए हैं, ताकि पर्याप्त भर्ती सुनिश्चित हो सके। उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सीएपीएफ के इस्तीफे के आंकड़े प्रस्तुत किए। पेश आंकड़ों के अनुसार 2021 से इस्तीफों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2025 में 2,333 इस्तीफे दिए गए, जबकि 2021 में यह संख्या 1,255 थी। आंकड़ों के अनुसार, 2022, 2023 और 2024 में क्रमशः 1,183; 2,037 और 2,724 इस्तीफे दर्ज किए गए।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि अर्द्धसैनिक बलों में आत्महत्याओं, सहकर्मियों की हत्याओं और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की संख्या में भी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 143 आत्महत्याओं की तुलना में 2025 में यह संख्या घटकर 158 रह गई। सहकर्मियों की हत्याओं के मामले 2021 में 11 थे, जो 2025 में घटकर चार रह गए। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की संख्या 2021 में 10,828 थी, जो 2025 में 4,291 रह गई। -
फूलबनी. ओड़िशा के कंधमाल जिले में बुधवार को 10 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा(माओवादी) की राज्य समिति के सदस्य सानू पोट्टम उर्फ नितू शामिल हैं, जिस पर 55 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले इन दस माओवादियों में छह महिलायें एवं चार पुरुष हैं। इन लोगों ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) संजीब पांडा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिरीक्षक अमितेंद्र नाथ सिन्हा, दक्षिणी संभाग बहरामपुर के पुलिस महानिरीक्षक निति शेखर, पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) दीपक कुमार एवं अन्य अधिकारियों के समक्ष एक समारोह में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि आत्मसर्मण करने वालों में सानू पोट्टम के अलावा संताई सलाम, लक्ष्मी मडवी (उर्फ अनुपा), सुनील टेलम, मंजुला पुनेम, रामबती अय्यम, गणेश कुंजम, सुशीला डुडी, शरीर कूहुड़म और चौड़ी योड़ी शामिल हैं। इनमें एक डिवीज़नल कमिटी सदस्य और दो एरिया कमिटी सदस्य भी हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह 10-सदस्यीय दल कंधमाल जिले में प्रतिबंधित संगठन के केकेबीएन (कंधमाल-कलाहंडी-बौध-नयागढ़)संभाग के तहत कार्य कर रहा था। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी ने पांडा को अपने हथियार सौंपे, जिनमें दो इंसास राइफलें, दो स्वचालित राइफलें, तीन .303 राइफलें, दो सिंगल-शूटर्स, एक 12-बोर की पिस्तोल एवं बड़ी मात्रा में कारतूस आदि शामिल हैं। पांडा ने कहा कि सानू पोट्टम उर्फ नितु समेत 10 माओवादी का आत्मसमर्पण इस क्षेत्र में वामपंथी उग्रवादी विचारधारा के धीरे-धीरे कमजोर पड़ने को दर्शाता है।" उन्होंने कहा कि कंधमाल में माओवादी का आधार कमजोर हुआ है, जो ओड़िशा का एकमात्र ऐसा जिला है जो अब भी एसआरई (सिक्योरिटी-रिलेटेड एक्सपेंडिचर) सूची में शामिल है। उन्होंने आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के लाभ मिलेंगे, जिसमें वित्तीय सहायता और व्यवसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं, ताकि वे गरिमा के साथ समाज में पुनः शामिल हो सकें।
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नयी दिल्ली. राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया पश्चिम बंगाल दौरे में हुए कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर क्षोभ व्यक्त करते हुए सरकार से मांग की कि राज्य सरकार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए अन्यथा आने वाले समय में कोई और राज्य इसकी पुनरावृत्ति कर सकता है। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के बाबू राम निषाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान जो प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ वह चूक नहीं बल्कि एक संवैधानिक अपराध है। उन्होंने कहा ''यह विषय राष्ट्रपति की गरिमा और संविधान के सम्मान से संबंधित है। जब एक राज्य सरकार जानबूझकर देश के सर्वोच्च पद की अवहेलना करती है तो वह यह कैसे भूल जाती है कि उसने खुद संविधान की शपथ ली है।'' निषाद ने जब यह मुद्दा उठाया तब तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने हंगामा किया। दूसरी ओर भाजपा सदस्यों ने उनका पुरजोर विरोध किया। निषाद ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 52 से 62 तक राष्ट्रपति के पद की व्याख्या की गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल सरकार का यह आचरण अनुच्छेद 256 और 257 का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस तरह के उल्लंघन की स्थिति के लिए विशेष कानून बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई राज्य सरकार जानबूझकर राष्ट्रपति या संवैधानिक प्रमुख का अपमान करती है तो उसे संवैधानिक विफलता मान कर ऐसी सरकार के खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए, उसके विवेकाधीन अनुदानों में कटौती का प्रावधान होना चाहिए और उसके संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर अभी पश्चिम बंगाल सरकार पर कार्रवाई नहीं की गई तो अन्य राज्य सरकारें भी ऐसा कर सकती हैं। उन्होंने कहा ''संविधान सर्वोपरि है और राष्ट्रपति पद 140 करोड़ भारतीयों के गौरव का प्रतीक है।'' राष्ट्रपति की सात मार्च की बंगाल यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक वहां मौजूद नहीं थे। नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का वहां मौजूद होना प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है।










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