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- मेदिनीनगर. झारखंड के पलामू जिले में कुछ लोगों ने 'जादू-टोना' करने के संदेह में 60 वर्षीय एक बुजुर्ग को कथित तौर पर लाठी-डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना सोमवार को मनातू थाना क्षेत्र के छांका गांव में हुई। मृतक की पहचान फगुनी भुइयां के रूप में हुई है। लेस्लीगंज के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) मनोज कुमार झा ने बताया, "प्रारंभिक जांच से पता चला है कि बुजुर्ग की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या की गई है। इस घटना में दो से अधिक लोग शामिल थे।" उन्होंने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मेदिनीनगर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) भेजा गया है। झा ने बताया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए तलाश जारी है।
- नयी दिल्ली. प्लास्टिक के उत्पादन के दौरान निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों, वायु-प्रदूषक कणों और विषैले रसायनों समेत दुनिया भर में प्लास्टिक प्रणाली से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के मामले 2016 की तुलना में 2040 तक दोगुने से भी अधिक होने की आशंका है। एक अध्ययन में यह आशंका जताई गई है। 'द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ' पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन ने यह भी रेखांकित किया कि प्लास्टिक का वैश्विक उत्पादन 2100 के बाद तक भी चरम पर नहीं पहुंचा होगा यानी पहले से ही दबाव झेल रही प्रणाली में पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी बोझ अभी और बढ़ेगा। 'लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन' तथा फ्रांस के संस्थानों के शोधकर्ताओं ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण और इसके जीवनचक्र के दौरान होने वाले उत्सर्जन के मानव स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों को तेजी से पहचाना जा रहा है, लेकिन अब भी यह पूरी तरह पता नहीं लगाया जा सका है कि इसका प्रतिकूल प्रभाव का कुल पैमाना कितना है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक के जीवनचक्र के दौरान स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन प्रदूषण के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को दिशा दे सकता है और समस्या से निपटने के लिए पर्यावरण, अर्थव्यवस्था एवं स्वास्थ्य के स्तर पर सतत प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है। टीम ने कहा कि प्लास्टिक की रासायनिक संरचना का खुलासा नहीं किया जाना जीवनचक्र आकलनों को ''गंभीर रूप से सीमित'' कर रहा है जिससे प्रभावी नीति को दिशा देने में बाधा पैदा होती है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन के दौरान विश्लेषण किए गए प्लास्टिक उत्पादों के जीवनचक्र में कच्चे माल के निष्कर्षण से लेकर पॉलिमर उत्पादन, उपभोग के बाद अपशिष्ट संग्रहण, पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियां, कचरा-स्थल, खुले में जलाना और पर्यावरणीय प्रदूषण शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने कहा, ''हमने पाया कि प्लास्टिक के जीवनचक्र के दौरान होने वाले उत्सर्जन ने 'ग्लोबल वॉर्मिंग', वायु प्रदूषण, विषाक्तता से जुड़े कैंसर और गैर-संचारी रोगों के कारण मानव स्वास्थ्य पर बोझ को बढ़ाया और सबसे अधिक नुकसान प्राथमिक प्लास्टिक के उत्पादन तथा इसे खुले में जलाने से हुआ।'' उन्होंने अनुमान जताया कि वैश्विक प्लास्टिक प्रणाली के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के मामले 2016 की तुलना में 2040 में दोगुने से भी अधिक हो जाने की आशंका है। शोधकर्ताओं ने कहा कि प्लास्टिक उत्सर्जन और स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए नीति-निर्माताओं को गैर-आवश्यक उपयोगों के लिए नए प्लास्टिक के उत्पादन को बेहतर ढंग से विनियमित करना होगा और उसमें उल्लेखनीय कमी करनी होगी ताकि प्लास्टिक उत्सर्जन और स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल असर को प्रभावी ढंग से कम किया जा सके। दुनिया के 175 से अधिक देशों ने 'वैश्विक प्लास्टिक संधि' विकसित करने पर सहमति जताई है और इस पर बातचीत चल रही है।
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को सत्य, सेवा और समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने सत्यनिष्ठा और सकारात्मक सोच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सेवाभाव और ईमानदारी से किया गया कोई भी कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने कहा कि संकल्प, समर्पण और सकारात्मकता के माध्यम से न केवल अपना बल्कि पूरी मानवता का भी कल्याण किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह विचार ‘एक्स’ पर साझा किए। एक्स पोस्ट में उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित भी उद्धृत किया, “सत्यं बृहदृतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति। सा नो भूतस्य भव्यस्य पत्न्युरुं लोकं पृथिवी नः कृणोतु॥”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सुभाषित के माध्यम से सत्य, तप, यज्ञ और अनुशासन को जीवन और समाज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मूल्य ही पृथ्वी और मानवता को स्थायित्व प्रदान करते हैं। (
- चाईबासा (झारखंड। झारखंड में अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पश्चिम सिंहभूम जिले में ट्रक से टक्कर हो जाने के बाद एक मोटरसाइकिल पर सवार चार लोगों की मौत हो गई। अधिकारी ने बताया कि कराईकेला थाना क्षेत्र में एक मोटरसाइकिल ने ट्रक से आगे निकलने की कोशिश की, लेकिन वह उससे टकरा गयी तथा उस पर सवार चारों युवकों की मौत हो गयी। कराईकेला थाना के प्रभारी प्यारे हसन ने ' कहा, ''चारों की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पहचान चाईबासा सदर निवासी आकाश कुदादा (19), जमशेदपुर के सुंदरनगर के अर्जुन टुड्डू (22), सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई के आकाश गोपे (19) और रवि बिरुली (20) के रूप में हुई है।'' उन्होंने बताया कि पुलिस ने बंदगांव के पास ट्रक को भी जब्त कर लिया।उन्होंने कहा, ''प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ट्रक चालक की कोई गलती नहीं थी, क्योंकि बगल से तेज गति से आयी मोटरसाइकिल ट्रक से टकरा गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जान गंवाने वाले युवक नशे में थे या नहीं।'' इस बीच, गुमला जिले के सिसई ब्लॉक के पुसो थाना क्षेत्र के कोटारी गांव के पास सड़क किनारे एक पेड़ से टकराने के बाद एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन किशोरों की मौके पर ही मौत हो गई। पुसो थाने के प्रभारी अधिकारी मोहम्मद जहांगीर ने बताया कि तीनों लड़कों की पहचान अमन उरांव (17), सहदेव उरांव (16) और मुन्ना उरांव (17) के रूप में हुई है, ये सभी लोहरदग्गा जिले के भंडारा थाना क्षेत्र के मलंगटोली गांव के निवासी हैं। कोटारी में एक शादी समारोह में शामिल होने के बाद उनके घर लौटते समय यह दुर्घटना घटी। इस बीच, मंगलवार शाम को झारखंड के बोकारो जिले में पिंडराजोरा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत चास और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-32 पर कथित तौर पर नशे की हालत में एक 'ट्रेलर' (वाहन) के चालक ने दो ऑटोरिक्शा को टक्कर मार दी, जिसके चलते एक युवक की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग घायल हो गए। मृतक की पहचान पुरुलिया के निवासी सुरेश महतो (21) के रूप में हुई है।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने आयकर विभाग को निर्देश दिया है कि वह एक महिला को पति की "शुद्ध कर योग्य आय/सकल आय का सामान्य विवरण" प्रदान करे, ताकि वह गुजारे भत्ते के लिए कार्यवाही को आगे बढ़ा सके। आयोग ने कहा कि वैवाहिक विवादों में निजता को आधार बनाकर इस प्रकार की जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। सीआईसी विनोद कुमार तिवारी ने हाल ही में पारित एक आदेश में कहा कि वैवाहिक स्थिति और गुजारा भत्ता मामले की लंबित स्थिति की पुष्टि के बाद, प्रतिवादी प्राधिकरण (आयकर विभाग) को मांगी गई जानकारी देनी चाहिए। साथ ही आयुक्त ने स्पष्ट किया कि "आयकर रिटर्न का विवरण/प्रतिलिपि और तीसरे पक्ष की अन्य व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है।" एक महिला ने यह कहते हुए पिछले पांच वर्षों की पति की आय का विवरण मांगा था कि वह गुजारे भत्ते की जिम्मेदारी से बचने के लिए अपनी वास्तविक आय नहीं बता रहा है। आयकर विभाग ने यह कहते हुए सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन खारिज कर दिया था कि पति से संबंधित जानकारी "तीसरे व्यक्ति की निजी जानकारी" मानी जाती है, इसलिए आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत विवरण नहीं दिया जा सकता। महिला की अपील स्वीकार करते हुए आयोग ने कहा कि जब कोई कानूनी रूप से विवाहित पत्नी गुजारे भत्ते के लिए जानकारी मांगती है तो आय से संबंधित जानकारी केवल निजी नहीं रह जाती। आयोग ने अपीलकर्ता को निर्देश दिया कि वह अपने वैवाहिक संबंध और मामले की लंबित स्थिति को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे।
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नई दिल्ली। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख अजित पवार का बुधवार को प्लेन हादसे में निधन हो गया है। इस दुखद घटना पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम मोदी समेत देशभर के नेता-मंत्री दुख व्यक्त कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री, अजित पवार समेत कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुखद है। अजित पवार का असामयिक निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्हें महाराष्ट्र के विकास में, विशेषकर सहकारी क्षेत्र में, विशेष योगदान के लिए सदैव याद रखा जाएगा। मैं उनके परिवार, समर्थकों एवं प्रशंसकों के प्रति गहन शोक-संवेदना व्यक्त करती हूं। ईश्वर इस दुर्घटना में मारे गए अन्य सभी लोगों के परिवारों को भी इस आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “अजित पवार लोगों के नेता थे, जिनका जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव था। महाराष्ट्र के लोगों की सेवा में सबसे आगे रहने वाले एक मेहनती व्यक्तित्व के तौर पर उनका बहुत सम्मान किया जाता था। प्रशासनिक मामलों की उनकी समझ और गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने का उनका जुनून भी काबिले तारीफ था। उनका असमय निधन बहुत चौंकाने वाला और दुखद है। उनके परिवार और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएँ। ओम शांति।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असमय निधन के बारे में जानकर गहरा सदमा लगा और दुख हुआ। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, वे महाराष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध रहे। वे लोगों के प्रति अपनी करुणा और सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए जाने जाते थे। मैं उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।”पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “अजित पवार के अचानक निधन से गहरा सदमा लगा और स्तब्ध हूं! महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और उनके सह-यात्रियों की आज सुबह बारामती में एक दुखद विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई है, और मुझे गहरा दुख हो रहा है। उनके परिवार, जिसमें उनके चाचा शरद पवार भी शामिल हैं, और दिवंगत अजित जी के सभी दोस्तों और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। इस घटना की उचित जांच होनी चाहिए।”बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “महाराष्ट्र के बारामती में हुई भीषण हवाई जहाज दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार सहित कई लोगों के निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति दें और शोकाकुल परिवारों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!”मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, “महाराष्ट्र के बारामती में एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के दुखद निधन का समाचार प्राप्त हुआ। अजित पवार के निधन से भारत की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने अपना पूरा जीवन महाराष्ट्र के लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवारजनों को यह दुख सहन करने की शक्ति दें। ओम शांति!”आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने लिखा, “यह खबर दिल दहलाने वाली है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य यात्रियों के दुखद विमान दुर्घटना में निधन की सूचना अत्यंत पीड़ादायक है। परिवारों को यह असहनीय शोक झेलना पड़ रहा है… ईश्वर उन्हें शक्ति दे। विनम्र श्रद्धांजलि।”विधायक प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। यह एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिजनों, सहयोगियों एवं समर्थकों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।”भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने लिखा, “शब्दों से परे एक नुकसान! अजित दादा… महाराष्ट्र के एक महान सपूत, बारामती की मिट्टी में पले-बढ़े। उन्होंने विद्रोह से सुलह और फिर मजबूती तक का लंबा, अकेला रास्ता तय किया। बजट के माहिर, सपनों को पूरा करने वाले, उनकी दहाड़ तेज थी, उनकी चुप्पी और भी गहरी थी। एनसीपी और पवार परिवार को संवेदनाएं। ओम शांति शांति।”भाजपा प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने लिखा, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार और अन्य लोगों के दुखद विमान हादसे में निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। यह महाराष्ट्र और पवार परिवार के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। गहरी संवेदनाएं। ओम शांति!”शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने लिखा, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी प्रमुख अजित पवार के बारामती के पास एक प्लेन क्रैश में निधन की दुखद खबर से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। पवार परिवार, उनके समर्थकों और महाराष्ट्र के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।” -
नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से मशहूर और उपमुख्यमंत्री अजित अनंतराव पवार का आज बुधवार को एक दु:खद विमान हादसे में निधन हो गया। मुंबई से बारामती जा रहा उनका चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें अजीत पवार सहित विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। DGCA ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। हादसा बारामती एयरपोर्ट के पास हुआ, जहां विमान रनवे से उतरकर क्रैश हो गया और आग लग गई।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली हस्ती थे अजित पवारअजित अनंतराव पवार, महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली हस्ती थे। वे अपनी प्रशासनिक दक्षता, बेबाक बोलने की शैली और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार देने में अपनी हालिया भूमिका के लिए जाने जाते थे। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर थे—यह उनका छठा गैर-लगातार कार्यकाल था। 2024 में चुनाव आयोग ने उनके गुट को “असली” NCP मान्यता दी थी और पार्टी का नाम और “घड़ी” चिन्ह सौंपा। वे वित्त, योजना जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे थे और राज्य के वित्तीय प्रबंधन में उन्होंने खासी कुशलता दिखाई।राजनीतिक सफर :1991 से लगातार सात बार विधायक चुने गएअजित पवार बारामती विधानसभा से 1991 से लगातार सात बार विधायक चुने गए, हर चुनाव में भारी अंतर से जीते। उनका आधार सहकारी क्षेत्र में मजबूत था—16 साल तक पुणे जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष रहे, चीनी मिलों और दूध संघों पर गहरा प्रभाव। विभिन्न मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में जल संसाधन, बिजली, ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख विभाग संभाले।साहसिक फैसलों से भरा रहा उनका राजनीतिक सफरउनका राजनीतिक सफर साहसिक फैसलों से भरा रहा। नवंबर 2019 में फडणवीस के साथ मात्र 80 घंटे की सरकार बनाई, फिर चाचा शरद पवार के पास लौटे। जुलाई 2023 में NCP में विभाजन कर शिंदे सरकार में शामिल हुए, जिसने शरद पवार के 25 साल के नेतृत्व को चुनौती दी। अजीत पवार सुबह 6.00 बजे ही अपना दिन शुरू करने और मौके पर ही फैसले लेने के लिए जाने जाते थे। उनकी पब्लिक इमेज एक ऐसे नेता की थी जो साफ़-साफ़ बात करते थे – अक्सर नागरिकों को गोलमोल वादे करने के बजाय तुरंत “हां” या “नहीं” बताते थे।हालांकि अजित पवार सालों से राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रहे, लेकिन उनका करियर विवादों से भी घिरा रहा, जैसे 70,000 करोड़ का सिंचाई घोटाला और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक मामले, लेकिन उन्होंने आरोपों से इनकार किया और कई क्लीन चिट मिलीं। दिग्गज नेता शरद पवार के भतीजे होने के बावजूद परिवार में फूट पड़ी, लेकिन 2026 की रिपोर्ट्स में स्थानीय चुनावों के लिए दोनों NCP गुटों में रणनीतिक गठबंधन या “दोस्ताना मुकाबला” की संभावना जताई गई थी।इस त्रासदी से महाराष्ट्र और देश भर में शोक की लहरपत्नी सुनेत्रा पवार बारामती में सामाजिक-राजनीतिक कार्यों में सक्रिय हैं। लोकसभा चुनाव में बारामती से सुप्रिया सुले से हार के बाद सुनेत्रा को राज्यसभा भेजा गया था। इस त्रासदी से महाराष्ट्र और देश भर में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। वहीं जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की गहन जांच कर रही हैं। -
नयी दिल्ली. यूरोप और अमेरिका के बीच संबंधों में आई नई दरारों की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा की मेजबानी की। भारत और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता ऐतिहासिक व्यापार समझौते के लिए बातचीत के पूरा होने की मंगलवार को घोषणा करेंगे। दोनों पक्ष रणनीतिक रक्षा समझौते को अंतिम रूप देंगे और भू-राजनीतिक उथल-पुथल एवं व्यापार व्यवधानों से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण पेश करेंगे। शिखर सम्मेलन से पहले कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने राजघाट का दौरा किया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कोस्टा और वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। शिखर सम्मेलन से पहले वॉन डेर लेयेन ने कहा, '' एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, समृद्ध एवं सुरक्षित बनाता है। हम सभी को इसका लाभ मिलता है।'' अमेरिका की व्यापार एवं सुरक्षा नीतियों के कारण दुनिया में नए भू-राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रहे हैं। बहुप्रतीक्षित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता एक अत्यधिक महत्वपूर्ण समझौता है जिसे ''मदर ऑफ ऑल द डील्स'' कहा जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच संबंधों की समग्र दिशा में महत्वपूर्ण विस्तार होने की उम्मीद है क्योंकि यह विविध क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खोलेगा। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) दोनों पक्षों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने में सहायक होगी। यूरोपीय अधिकारियों ने पिछले सप्ताह कहा था कि यद्यपि दोनों पक्ष हर मुद्दे पर एकमत नहीं हैं। फिर भी उनके कुछ मूलभूत हित समान हैं जिनमें एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का होना शामिल है। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन भारत के साथ '' यूक्रेन के विरुद्ध रूस के आक्रामक युद्ध'' पर चर्चा करने का भी अवसर होगा। अधिकारियों ने बताया कि अध्यक्ष कोस्टा इस संदेश को दोहराएंगे कि यह युद्ध यूरोप के लिए खतरा है और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए एक सीधी चुनौती है। साथ ही इसके हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी स्पष्ट परिणाम होंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में मजबूत हुए हैं। -
नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि स्वदेशी प्रणालियां देश की परिचालन तैयारियों को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय सोच बन चुकी आत्मनिर्भरता को हासिल करने में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना भी की। सिंह डीआरडीओ के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में डीआरडीओ के वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हुए, जो गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा, ''आज जो भी तकनीक नयी है, वह चार-पांच साल में अप्रासंगिक हो सकती है। इसलिए, आज के समय में, विशेष रूप से युद्धक्षेत्र में, हमें केवल 'सर्वश्रेष्ठ की उत्तरजीविता' के सिद्धांत पर ध्यान देने के बजाय 'सबसे तेज और आगे रहने वालों के सफल होने' के सिद्धांत को भी ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा, ''जो देश तेजी से सोचता है, निर्णय लेता है और प्रौद्योगिकी को लागू करता है, वही आगे रहता है।'' उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्धक्षेत्र में डीआरडीओ की तकनीक का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया और स्वदेशीकरण के प्रयासों के आधार पर रक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों में यह संगठन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिंह ने आज के प्रौद्योगिकी युग में अग्रणी बने रहने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया और डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से नवीन और त्वरित सोच अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने जोखिम लेने से नहीं डरने की अपील भी की। सिंह ने डीआरडीओ से उन क्षेत्रों से आगे बढ़ने का आग्रह किया, जहां निजी क्षेत्र पहले ही अपनी क्षमताएं विकसित कर चुका है। उन्होंने सुझाव दिया कि संगठन के भीतर एक अलग प्रकोष्ठ का गठन किया जाए जो उन क्षेत्रों में जोखिम उठाए, जहां सफलता की संभावना कम लगती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि सफलता प्राप्त होती है, तो यह ऐतिहासिक होगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि डीआरडीओ आमतौर पर डिजाइन और 'प्रोटोटाइप' पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि उत्पादन उद्योगों की भूमिका है, और इस अंतर को पाटना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मॉडलों के अनुरूप सह-विकास की रणनीति अपनाई जा सकती है, जिसमें उद्योग को शुरुआती चरणों से लेकर डिजाइन और उत्पादन तक सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उपक्रमों के साथ गहन सहयोग स्थापित करने का आह्वान करते हुए कहा कि अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़ने का समय आ गया है। उन्होंने तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान का उदाहरण देते हुए बताया कि यह डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच ज्ञान साझा करने की मिसाल है और एक बड़ी उपलब्धि के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कई और उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए डीआरडीओ का अकादमिक जगत और अन्य क्षेत्रों के साथ मिलकर सहयोग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार का समर्थन तभी सार्थक होगा जब डीआरडीओ एकाधिकारवादी अनुसंधान एवं विकास मॉडल से हटकर एक सहयोगात्मक व्यवस्था की ओर बढ़े। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार के आत्मनिर्भरता प्रयासों के कारण आज रक्षा निर्यात बढ़कर लगभग 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वर्ष 2014 में यह 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने इसे और बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश ने 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को अपने सिस्टम के डिजाइन चरण से ही निर्यात बाजारों पर विचार करना चाहिए, विशेष रूप से ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और गोला-बारूद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने से लागत की वसूली होती है, वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ती है और रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ पुरस्कार योजना 2024 के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए। इस मौके पर ''द अनप्रेसिडेंटेड सक्सेस स्टोरी ऑफ द फर्स्ट इंडिजिनियस सुपरसोनिक मल्टी-टारगेट सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम-आकाश'' नामक पुस्कत का विमोचन भी किया गया।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वैश्विक निवेशकों को भारत के बढ़ते ऊर्जा क्षेत्र का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि यह क्षेत्र 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करता है। मोदी ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि देश जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा 'शोधन' केंद्र बन जाएगा।
'भारत ऊर्जा सप्ताह' (आईईडब्ल्यू) 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने निवेशकों से शोधन (रिफाइनिंग), एलएनजी 'वैल्यू चेन' अवसंरचना, सिटी गैस वितरण तथा तेल एवं गैस अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में निवेश करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का लक्ष्य 2030 तक तेल एवं गैस क्षेत्र में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करना है। तेल शोधन क्षमता को 26 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 30 करोड़ टन प्रति वर्ष किया जाएगा। मोदी ने कहा, '' ऊर्जा क्षेत्र हमारी आकांक्षाओं का केंद्र है। इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर मौजूद हैं। इसलिए, मेरी अपील है कि भारत में बनाओ, भारत में नवाचार करो, भारत के साथ विस्तार करो, भारत में निवेश करो। '' उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत शीर्ष पांच निर्यातकों में से एक है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में निवेश के अपार अवसर मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, अन्वेषण क्षेत्र को ही देखें। भारत ने इसे काफी हद तक खोल दिया है।'' उन्होंने कहा, '' आप हमारे गहरे समुद्र में अन्वेषण प्रयासों, 'समुद्र मंथन' परियोजना से भी अवगत हैं।'' मोदी ने कहा, '' हम इस दशक के अंत तक अपने तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य अन्वेषण के दायरे को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करना भी है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यहां 170 से अधिक ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार बेसिन भी देश की अगली हाइड्रोकार्बन उम्मीद के रूप में उभर रहा है। मोदी ने अन्वेषण क्षेत्र में किए गए कई सुधारों पर भी चर्चा की और बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा, '' आईईडब्ल्यू के पिछले संस्करण में जो भी सुझाव दिए गए थे उनके अनुरूप हमने अपने नियमों में बदलाव किए हैं। यदि आप अन्वेषण क्षेत्र में निवेश करते हैं, तो आपकी कंपनी की लाभप्रदता में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।'' उन्होंने कहा कि भारत की एक और विशेषता ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को अत्यधिक लाभदायक बनाती है। इसकी शोधन क्षमता बहुत अधिक है। शोधन क्षमता के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री ने कहा, '' जल्द ही हम पहले स्थान पर होंगे। आज भारत की शोधन क्षमता लगभग 26 करोड़ टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है। इसे बढ़ाकर 30 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह निवेशकों के लिए एक बड़ा लाभ है।'' उन्होंने बताया कि भारत में एलएनजी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत ने अपनी कुल ऊर्जा मांग का 15 प्रतिशत एलएनजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, '' इसलिए, हमें संपूर्ण एलएनजी मूल्य श्रृंखला पर काम करने की आवश्यकता है। भारत परिवहन पर भी बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। हम एलएनजी परिवहन के लिए आवश्यक जहाजों का विनिर्माण यहीं भारत में कर रहे हैं।''
मोदी ने बताया कि हाल ही में भारत में जहाज निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये का एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत अब ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा ऊर्जा क्षेत्र परिवेश बना रहा है जो घरेलू मांग को पूरा कर सकता है और किफायती शोधन एवं परिवहन समाधानों के साथ, विश्व को निर्यात को भी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। 'भारत ऊर्जा सप्ताह' 2026 ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता एवं समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और नवप्रवर्तकों को एकजुट करने वाला एक प्रमुख वैश्विक मंच है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल खुद विकास के नए प्रतिमान गढ़ रहा है, बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के तहत पूरे विश्व को एक परिवार मानते हुए उसके कल्याण के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत विश्व कल्याण की दिशा में भी अपनी ओर से भरसक योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की शासन व्यवस्था का मुख्य ध्येय सामाजिक कल्याण रहा है और यह लगातार विचार किया जा रहा है कि वैश्विक समुदाय के हित में भारत किस प्रकार योगदान दे सकता है।केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज भारत चावल उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। यह उपलब्धि हरित क्रांति के दौर से भी तेज गति से किए गए कृषि विकास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान कई अहम बिंदु सामने आए, जिन पर कृषि मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि घटिया कीटनाशकों के कारण उन्हें भारी नुकसान हो रहा है और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए पेस्टिसाइड एक्ट और सीड एक्ट पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे और उन्हें इसका निरंतर लाभ मिलता रहे। इस संबंध में सुझाव भी मांगे गए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की जा रही है।केंद्रीय कृषि मंत्री ने मनरेगा को लेकर कहा कि सरकार ने इस योजना में कई अहम बदलाव किए हैं। पहले मनरेगा के तहत किसानों और मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जिसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों और मजदूरों को व्यापक स्तर पर लाभ पहुंचाना और उनके हितों की पूरी तरह रक्षा करना है।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस रूपरेखा के तहत काम करने से आने वाले दिनों में गरीबी मुक्त गांवों का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और ग्राम विकास से जुड़ी योजनाओं से मजदूरों और किसानों- दोनों को लाभ होगा और गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। -
नई दिल्ली। इंडिया–यूरोपीय यूनियन (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक उपलब्धि बताया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में इस एफटीए को संपन्न करने की संयुक्त घोषणा की थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद और देशवासियों को बधाई दी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत–यूरोपीय व्यापार समझौता भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक मंच पर दूरदर्शी कूटनीति का सशक्त उदाहरण है, जो पारस्परिक लाभ और संतुलित साझेदारी को सुनिश्चित करता है।अमित शाह ने कहा कि यह एफटीए सभी पक्षों के लिए लाभकारी समझौतों के माध्यम से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को और मजबूत करता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी को हार्दिक धन्यवाद दिया और भारत की जनता को बधाई दी।इस एफटीए के जरिए भारत और यूरोपीय संघ खुले बाजारों, पूर्वानुमान-आधारित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित होंगे। यह समझौता 2022 में वार्ता के पुनः शुरू होने के बाद गहन चर्चा और लंबे संवाद के उपरांत संपन्न हुआ है।एफटीए की घोषणा भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्षों की निरंतर बातचीत और सहयोग की परिणति मानी जा रही है। यह एक संतुलित, आधुनिक और नियम-आधारित आर्थिक व व्यापार साझेदारी के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में शामिल है। वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपए (136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपए (75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपए (60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात शामिल है।सेवा क्षेत्र में भारत–यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपए (83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग को दर्शाता है।भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के करीब 25% और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन दो बड़ी, विविध और एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के एक साथ आने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय गणराज्य की असली ताकत इसी में निहित है कि शासन आम नागरिकों के लिए काम करे। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर लिखे अपने लेख में उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र केवल संविधान और चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सार्थक होता है जब उसका लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।
रक्षा मंत्री ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1952 के ऐतिहासिक भाषण को याद करते हुए कहा कि आजादी और संविधान मिलना कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत थी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र का असली उद्देश्य लोगों की मुश्किलों को कम करना और उनके जीवन में खुशहाली लाना होना चाहिए।राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल ‘जनता का’ और ‘जनता द्वारा’ शासन नहीं है, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण है ‘जनता के लिए’ शासन। यानी सरकार का हर निर्णय आम नागरिकों के हित में होना चाहिए, विशेषकर गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के लिए।उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा यह है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, जरूरी यह है कि सरकार जमीनी स्तर पर लोगों की जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।रक्षा मंत्री ने भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए योग-क्षेम, महात्मा गांधी के सर्वोदय और दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को जन-केंद्रित शासन की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ इसी विचारधारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए कार्यों का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि बीते 12 वर्षों में नीतियों को सीधे आम आदमी के जीवन से जोड़ा गया है। श्रम कानूनों में सुधार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर इसी दिशा में उठाए गए अहम कदम हैं।उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 17 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं। दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों को भी उन्होंने सम्मान और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया।स्वच्छ भारत मिशन पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल सफाई अभियान नहीं रहा, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक बड़ा आंदोलन बना, जिसने स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, मुद्रा योजना और कौशल भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान प्रदान किया है।राजनाथ सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा नीति-निर्माण में महिलाओं की भूमिका और प्रभावी बनेगी।लेख के अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय गणराज्य कोई एक बार पूरा हो जाने वाला कार्य नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को जमीनी हकीकत से जोड़े। उन्होंने कहा कि आज देश में शासन के केंद्र में आम नागरिक हैं और भारत सामाजिक न्याय तथा आर्थिक समावेशन के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है। -
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सोमवार को इंटरनेशनल बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया।अधिकारियों ने बताया कि रविवार देर रात इंटरनेशनल बॉर्डर पर भारतीय सैनिकों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गोली मार दी।घुसपैठिया रामगढ़ सेक्टर के माजरा इलाके में एक बॉर्डर चौकी से भारतीय इलाके में घुसने की कोशिश कर रहा था, तभी चौकस बीएसएफ जवानों ने उसकी हरकत देख ली।
अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ जवानों ने घुसपैठिए को चुनौती और चेतावनी दी। हालांकि, जब उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा की तरफ बढ़ता रहा, तो सैनिकों ने गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने आगे बताया, “मारे गए पाकिस्तानी नागरिक का शव इंटरनेशनल बॉर्डर के पास पाकिस्तान की तरफ पड़ा है।”जम्मू और कश्मीर में सांबा, कठुआ और जम्मू जिलों में 240 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। बीएसएफ भारत की तरफ इंटरनेशनल बॉर्डर की रखवाली करती है, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तानी रेंजर्स इसकी रखवाली करते हैं।इस केंद्र शासित प्रदेश में कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों और पुंछ, राजौरी और कुछ हद तक जम्मू जिलों में 740 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ कंट्रोल है। सेना लाइन ऑफ कंट्रोल की रखवाली करती है। सेना और बीएसएफ की ड्यूटी बॉर्डर पर घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और पाकिस्तान की तरफ से होने वाली ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए लगाई गई है।इन ड्रोन का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तानी सेना की मदद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बनाए रखने के लिए हथियार/गोला-बारूद, कैश और ड्रग्स गिराने के लिए करते हैं। इन पेलोड्स को आतंकी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर उठाते हैं और आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं।जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हैं। इन अभियानों में तस्करी विरोधी अभियान भी शामिल हैं। माना जाता है कि ड्रग तस्करी और हवाला मनी रैकेट से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बनाए रखने के लिए किया जाता है। - नई दिल्ली। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार और लोगों को अपनी और रानी कैमिला की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थायी और घनिष्ठ संबंधों की सराहना की।राष्ट्रपति मुर्मु को लिखे पत्र में किंग ने भारत और ब्रिटेन के बीच पक्की साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह कॉमनवेल्थ को बताने वाले शेयर्ड वैल्यूज और आपसी सम्मान पर आधारित है। उन्होंने दुनिया भर में समझ, सहयोग और मौके को बढ़ावा देने में कॉमनवेल्थ मेंबर देशों की भूमिका पर भी गर्व जताया।पत्र में लिखा गया, “कॉमनवेल्थ की रिच डायवर्सिटी और इसकी युवा जेनरेशन की एनर्जी उम्मीद और विकास को प्रेरित करती रहती है। वैश्विक अस्थिरता के इस समय में, हमारी कलेक्टिव स्ट्रेंथ और यूनिटी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है। मुझे बहुत खुशी है कि हमारे देश नवंबर में एंटीगुआ और बारबुडा में अगली कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग में एक साथ आएंगे, जहां हम अपने साझा कमिटमेंट्स की फिर से पुष्टि करेंगे और फ्यूचर के लिए एक कलेक्टिव विज़न सेट करेंगे।”पत्र में आगे कहा गया, “मैं इस साल गर्मियों में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का भी इंतजार कर रहा हूं और अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को सिक्योर करने के लिए आपको बधाई देता हूं।”किंग चार्ल्स ने क्लीन एनर्जी इनिशिएटिव, क्लाइमेट फाइनेंस पर सहयोग, और क्लीन टेक्नोलॉजी और ग्रीन ग्रोथ पर इनिशिएटिव के ज़रिए क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को गहरा करने का स्वागत किया। उन्होंने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इनिशिएटिव के जरिए भारत की इंटरनेशनल क्लाइमेट लीडरशिप की तारीफ की।पत्र के अंत में लिखा था, “भारत इस जरूरी काम के लिए एक मजबूत वैश्विक आवाज है, और हमारा सहयोग एक खुशहाल, सुरक्षित और स्थिर दुनिया बनाने के साझा इरादे को दिखाता है। मैं और मेरी पत्नी आपको और भारत के सभी लोगों को आने वाले शांतिपूर्ण और खुशहाल साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं।”भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो 1950 में संविधान को औपचारिक रूप से अपनाने और लागू करने की याद में है, जिसने देश के एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य में बदलाव को दिखाया। यह मौका संविधान में दिए गए न्याय, बराबरी, आज़ादी और भाईचारे के मुख्य सिद्धांतों को फिर से पक्का करता है।
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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में देश की मजबूत होती स्वदेशी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता व जन भागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। कर्तव्य पथ पर शानदार परेड आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। यूरोपीय यूनियन के दो बड़े नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि रहे।
इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की तरक्की, स्वदेशी सैन्य उपकरण, सेना की ताकत, भारत की संस्कृति और आम लोगों की भागीदारी सब कुछ एक साथ देखने को मिला। जहां एक ओर सेना ने गणतंत्र दिवस परेड में स्वदेशी रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित की, वहीं दूसरी ओर 10 हजार से ज्यादा विशेष अतिथियों की मौजूदगी ने देश के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व किया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुई झांकियों की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ तथा ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ रही।कर्तव्य पथ पर समारोह की शुरुआत 100 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई। इसमें अलग-अलग राज्यों की झलक दिखी। वहीं आसमान से चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर्स ने फूल बरसाए। परेड में भारतीय सेना का युद्ध वाला रूप खास तौर पर दिखाया गया। यहां कर्तव्य पथ पर परेड में स्वदेशी टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग्स नजर आए। इसके अलावा टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर व स्पेशल फोर्सेज की मौजूदगी ने भी लोगों को रोमांचित किया।एक खास झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाया गया। इसके माध्यम से बताया गया कि कैसे सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मन को जवाब देती हैं। भारतीय नौसेना की झांकी में पुराने जहाजों से लेकर आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तक की कहानी दिखाई गई। वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट किया। तटरक्षक बल की महिला टुकड़ी भी परेड का हिस्सा बनी। कर्तव्य पथ पर देश के 17 विभिन्न राज्यों और 13 मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां निकाली गईं।इन झांकियों में संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत, कृषि, तकनीक और आजादी की कहानी दर्शायी गई। कई झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। गणतंत्र दिवस समारोह में इस साल करीब 10,000 खास मेहमान भी आमंत्रित थे। ये मेहमान किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप करने वाले युवा, खिलाड़ी, महिला समूह, आदिवासी प्रतिनिधि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग थे।इनमें गगनयान, चंद्रयान जैसे इसरो अभियानों से जुड़े उत्कृष्ट वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, डीप ओशन मिशन तथा समस्थानिक अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, अटल टिंकरिंग लैब्स के उत्कृष्ट विद्यार्थी, किसान व ‘मन की बात’ कार्यक्रम के प्रतिभागी शामिल थे। ये विशिष्ट अतिथि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित किए गए थे। इनमें वे नागरिक भी शामिल रहे जिन्होंने रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, खेल, कृषि, विज्ञान, सामाजिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।इस पहल का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करना तथा राष्ट्रीय आयोजनों में जन-भागीदारी को और सशक्त बनाना था। कर्तव्य पथ पर इन विशिष्ट अतिथियों के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं राज्यों की झांकियों की बात करें तो असम की मनमोहक झांकी में आशारिकांडी यानी असम के टेराकोटा शिल्प ग्राम को दर्शाया गया था। गुजरात की झांकी स्वदेशी का मंत्र: आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता – वंदे मातरम् पर आधारित थी। हिमाचल प्रदेश की झांकी में देव भूमि, वीर भूमि के दर्शन हुए। जम्मू-कश्मीर की झांकी जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोकनृत्य को समर्पित रही।मणिपुर की झांकी ‘समृद्धि की ओर: कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक’ की थीम पर केंद्रित थी। ओडिशा अपनी झांकी के माध्यम से मिट्टी से सिलिकॉन तक: परंपरा में निहित, नवाचार के साथ उन्नति को दर्शा रहा था। तमिलनाडु की झांकी में समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई दी। उत्तर प्रदेश ने इस बार अपनी झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया। मध्य प्रदेश की झांकी पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर पर आधारित रही।वहीं, पंजाब की झांकी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350 वर्ष पर केंद्रित थी। वायु सेना मुख्यालय ने अपनी झांकी में ‘पूर्व सैनिक झांकी: युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ को दिखाया। त्रि-सेवा झांकी में ऑपरेशन सिंदूर, संयुक्तता से विजय को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर अग्रसर भारतीय स्कूली शिक्षा पर आधारित झांकी प्रदर्शित की। -
नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना का फ्लाई पास्ट इस बार बेहद महत्वपूर्ण रहा। वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलटों ने कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाया। यह फॉर्मेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को समर्पित था। फ्लाई-पास्ट गणतंत्र दिवस परेड के सबसे ज्यादा इंतजार वाले कार्यक्रमों में से एक है। इस वर्ष फ्लाई-पास्ट में कुल 29 विमान शामिल हुए। फ्लाई-पास्ट करने वाले विमानों में 16 फाइटर विमान भी शामिल थे। वहीं वायुसेना के चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलीकॉप्टर भी इस शानदार फ्लाई-पास्ट में शामिल हुए।
गणतंत्र दिवस समारोह में किए गए फ्लाई-पास्ट में वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जगुआर विमान शामिल रहे। साथ ही रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण सी-130 और आधुनिक सी-295 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान भी इसका हिस्सा बने। आसमान में इन विमानों की गर्जना ने यहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। वायुसेना के विमानों ने फ्लाई-पास्ट के दौरान अर्जन फॉर्मेशन, वज्रांग फॉर्मेशन, वरुण फॉर्मेशन और विजय फॉर्मेशन भी बनाया।वहीं ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग 29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर विमान नजर आए।बताते चलें कि भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बीते साल पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने वाले ये भारतीय लड़ाकू विमान अब इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर उड़ान भरते हुए दिखाई दिए।गौरतलब हो, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत इन भारतीय लड़ाकू विमानों ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फ्लाई पास्ट में भारतीय वायुसेना के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में नजर आए। ये हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज, आर्मी, नेवी और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहराते हुए नजर आए। अपने इस बेहतरीन प्रदर्शन के जरिए भारतीय वायुसेना ने गणतंत्र दिवस समारोह में अनुशासन, नेतृत्व और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लेकर कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड तक, वायुसेना के अधिकारी एवं बैंड महत्वपूर्ण भूमिकाओं में उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि समारोह में स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कन्यार गार्ड ऑफ ऑनर के कमांडर रहे। मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने कर्तव्य पथ पर ध्वजारोहण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।गणतंत्र दिवस 2026 ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली 150 वर्षों को समर्पित रहा। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की स्पष्ट व प्रभावी छाप दिखाई दी। वायुसेना के बैंड ने इससे जुड़ी धुनें बजाईं। परेड में विभिन्न सर्विसिस की कुल 18 मार्चिंग टुकड़ियां और 13 बैंड शामिल हुईं। परेड के तुरंत बाद वायुसेना के राफेल, सुखोई-30, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, एमआई-17 जैसे विमान व हेलीकॉप्टर फ्लाईपास्ट करते हुए दिखाई दिए। गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं के स्वदेशी उपकरण एवं हथियार भी प्रदर्शित किए गए। -
नई दिल्ली। भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 77वें गणतंत्र दिवस के आयोजन समारोह में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उर्सुला ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट बनना जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर, खुशहाल और सुरक्षित बनाता है और हम सभी को फायदा होता है।”बता दें, ईयू के दोनों बड़े नेता भारत पहुंचे हुए हैं, जहां 27 जनवरी को 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसकी मेजबानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस मौके पर दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते का ऐलान भी हो सकता है।यूरोपीय देश परंपरागत तौर पर अमेरिका के करीब रहे हैं। ईयू-यूएस मिलकर वैश्विक आर्थिक उत्पादन के 40 फीसदी से ज्यादा और विश्व व्यापार के लगभग एक तिहाई हिस्से के साझेदार हैं। हालांकि, अमेरिकी सत्ता में राष्ट्रपति ट्रंप की वापसी के बाद से ‘टैरिफ बम’ ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है। आज यूरोप यूएस से इतर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के लिए उत्साहित है और वह एक स्थिर साझेदार के रूप में भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रहा है।दिल्ली में रविवार को दोनों ईयू नेताओं को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके अलावा सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने से पहले उर्सुला और कोस्टा ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, “ईयू काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और ईयू कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। 77वें रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के लिए उन्हें चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है। मुझे यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आने वाली बातचीत भारत-यूरोपियन यूनियन के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी।”बता दें, इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत-ईयू: भरोसे और भरोसे की साझेदारी। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा का भारत के राजकीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचने पर दिल से स्वागत है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। -
नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा दिखाकर दुनिया को भारत की उस बहादुरी की याद दिलाई, जो पिछले साल आतंकियों के खिलाफ दिखाई गई थी। इस मौके पर भारतीय रक्षा बलों की ट्राई-सर्विसेज झांकी भी दिखाई गई, जिसकी थीम थी ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत’। यह झांकी देश की सुरक्षा की रक्षा में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सामूहिक ताकत, एकता और बेहतरीन तालमेल का प्रतीक थी।
इस प्रदर्शन में, इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को उजागर किया, जिसमें मिशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के समन्वित और तालमेल वाले प्रयासों पर जोर दिया गया। इस ऑपरेशन की योजना राष्ट्रीय और सैन्य नेतृत्व द्वारा प्रभावी ढंग से बनाई गई। इस मिशन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह सेनाओं के बीच का आपसी तालमेल और वहां के स्थानीय लोगों का भरपूर साथ था।‘विरासत, विविधता और विकास’ के मेल को ऑपरेशन सिंदूर की एक खास पहचान के तौर पर दिखाया गया।जहां ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ने दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक हमले किए, वहीं आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 एयर डिफेंस नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत आम नागरिकों को एक मज़बूत सुरक्षा कवच दिया।झांकी के कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स सेगमेंट में, दिव्यास्त्र को शक्तिबाण के साथ दिखाया गया। हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे ये प्लेटफॉर्म भारतीय सेना का स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण पर बढ़ते जोर को दिखाते हैं। सर्विलांस और टारगेटिंग के इंटीग्रेटेड कॉन्सेप्ट पर बने ये सिस्टम सेना के टेक्नोलॉजी-आधारित और सटीक युद्ध की ओर बढ़ने में एक बड़ी छलांग हैं।शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड वाले ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड लगे हैं, जो तोपखाने की फायरिंग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म ग्रुप ड्रोन, सटीक हमले के मिशन के लिए लंबी दूरी के ड्रोन और प्रभावी युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन की तैनाती को संभव बनाते हैं।शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली थी, जबकि दिव्यास्त्र वाहन की कमान उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार ने संभाली थी, जो इसमें शामिल भारतीय सेना के जवानों की ऑपरेशनल तैयारी और प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है।ज्ञात हो, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया था – यह सैन्य कार्रवाई मई 2025 में की गई थी, जिसे 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में लॉन्च किया गया था, जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। - नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में सोमवार को पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया। ‘बैटल एरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना। इसके माध्यम से दिखाया गया कि कैसे जंग के समय सेना आगे बढ़ती है, हमला कैसे किया जाता है और कैसे दुश्मन को जवाब देते हैं।कर्तव्य पथ पर यह सब कुछ एक ही जगह देखने को मिला। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक भी दिखाई दी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक गर्व भरा सलाम था। वहीं सेना के खास टैब्लो ने एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर को दिखाया। यहां से पूरी जंग की योजना बनती है। इसमें दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम में टारगेट तय होते हैं, हमला होता है और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी वायु रक्षा से देश की सुरक्षा होती है। वहीं इसमें हवाई घटक भी शामिल रहे।रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में रही। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल था, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता के रूप में स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र प्रहार फॉर्मेशन था। यह युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करता है। इसके बाद कॉम्बैट एलिमेंट्स यानी युद्ध में अग्रणी भूमिका निभाने वाले टैंक आए। इनमें टी-90 भीष्म और मेन बैटल टैंक अर्जुन सलामी मंच के सामने से गुजरे। वहीं अपाचे एएच-64 ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से इन्हें हवाई सहायता मिली। अन्य मैकेनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-2 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, साथ में नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल रही।अब तक परेड में सैन्य मार्चिंग टुकड़ियां और हथियार अलग-अलग नजर आते रहे हैं। हालांकि इस बार जंग के असली क्रम जैसी तैयारी देखने को मिली। यानी दुश्मन पर नजर रखने वाले सिस्टम, टैंक और पैदल सेना, उसके साथ ही तोपखाना, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और अंत में सप्लाई व सुरक्षा व्यवस्था। इससे साफ दिखा कि भारतीय सेना कितनी तैयार, मजबूत और फुर्तीली है। यहां सेना द्वारा हाई-टेक और स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ी। इस टुकड़ी में अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और धवंशक लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे।इनके बाद वाहनों पर लगे रोबोटिक डॉग, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और चार ऑटोनॉमस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (निग्रह, भैरव, भुविरक्षा और कृष्णा) नजर आए। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल थे। उन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के जरिए दिखाया गया, जो खास हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे हुए थे। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस, ये एक साथ झुंड में ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जोल्ट के जरिए एडवांस्ड सर्विलांस दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल तोपखाने की फायरिंग को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।बैटल एरे में यह भी दिखाया गया कि आज की भारतीय सेना सिर्फ बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। अब जंग डेटा, ड्रोन और टेक्नोलॉजी से लड़ी जाती है। सेना ने दिखाया कि कैसे वह दूर बैठकर भी दुश्मन पर नजर रखती है, सही वक्त पर फैसला लेती है और फिर सटीक हमला करती है। खास बात यह है कि यह हमला पूरी तरह स्वदेशी हथियारों और सिस्टम के दम पर किया जाता है। इस बार परेड में कई नए यूनिट और हथियार पहली बार नजर आए, जैसे कि पहली बार भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी परेड में शामिल हुए। 155 मिमी एटीएजीएस तोप, लंबी दूरी तक मार करने वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग, बिना चालक वाले वाहन और लुटेरिंग म्यूनिशन भी पहली बार देश की जनता के सामने आए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद नायकों को श्रद्धांजलि देकर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत की। समारोह में पीएम मोदी ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने में देश का नेतृत्व किया। इंटर-सर्विसेज गार्ड्स, जिसमें एक अधिकारी और 21 इनर गार्ड्स (हर सर्विस से सात) शामिल थे ने सम्मान देने के लिए ‘सलामी शस्त्र’ और उसके बाद ‘शोक शस्त्र’ की परंपराओं का पालन किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद थे। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी पुष्पांजलि समारोह के दौरान मौजूद थे। इस अवसर पर पीएम मोदी ने डिजिटल नोटबुक में अपने विचार भी व्यक्त किए।इससे पहले दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह राष्ट्रीय त्योहार नागरिकों में नई ऊर्जा और उत्साह भरेगा और विकसित भारत बनाने के सामूहिक संकल्प को और मजबूत करेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।”इस दिन के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने एक अन्य संदेस में कहा, “गणतंत्र दिवस हमारी आजादी, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक मजबूत प्रतीक है। यह त्योहार हमें राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।” यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे।इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो शो ‘मन की बात’ के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण मज़दूर, लखपति दीदी और अलग-अलग क्षेत्रों के लगभग 10 हजार अन्य खास मेहमान गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, खास मेहमानों की लिस्ट में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने इनकम और रोजगार पैदा करने में बेहतरीन काम किया है, बेस्ट इनोवेटर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप्स, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और सरकार की मुख्य पहलों के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल हैं।इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल, भारत की सैन्य शक्ति, जिसमें ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें शामिल हैं, और 30 शानदार झांकियों के ज़रिए समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद होने वाली यह पहली गणतंत्र दिवस परेड है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों के शानदार फ्लाईपास्ट के जरिए सैन्य शक्ति का खास प्रदर्शन किया जाएगा। गणतंत्र परेड में अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 2,500 कलाकारों द्वारा शानदार सांस्कृतिक प्रदर्शन होगा, जो वंदे मातरम और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जश्न मनाएंगे। -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया। झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, राष्ट्रगान की मधुर धुन गूंजी और स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गनों से 21 तोपों की सलामी दी गई, जिससे पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों अतिथियों का सलामी मंच पर स्वागत किया। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति और मुख्य अतिथियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट ने कर्तव्य पथ तक पहुंचाया। पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का भी स्वागत किया।इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों की झलक, देश की सैन्य ताकत और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों जैसे आधुनिक हथियारों के साथ 30 रंग-बिरंगी झांकियां भी शामिल होंगी।यह परेड पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार आयोजित की जा रही है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों की भव्य फ्लाईपास्ट विशेष आकर्षण होगी। फ्लाईपास्ट में राफेल, सुखोई-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, और एमआई-17 जैसे विमान अलग-अलग संरचनाओं में आसमान में करतब दिखाएंगे।गणतंत्र दिवस परेड में करीब 2,500 कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे, जो ‘वंदे मातरम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाएंगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण कार्य में लगे श्रमिक, लखपति दीदी और लगभग 10,000 विशेष अतिथि भी परेड देखने पहुंचे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अतिथियों में रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग शामिल हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की और 2025 में अपनी स्पेस फ्लाइट पूरी की थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे। इस मिशन के दौरान उन्होंने असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।अंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और कृषि से जुड़े परीक्षण भी किए। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज को सफलतापूर्वक उगाया, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता और शांत निर्णय लेने की कला को इस सम्मान के जरिए सराहा गया है।इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान दिखाने के लिए 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे।वीरता पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (पांच मरणोपरांत), छह नौसेना मेडल (वीरता), और दो वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।इसके अलावा, ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वे एक प्रतिष्ठित फाइटर टेस्ट पायलट हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं। उनके नाम 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है और वे 2019 से इसरो के साथ गगनयान कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं। -
नई दिल्ली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में जल्द ही गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के अनुसार, सदियों पुराने मंदिरों में सिर्फ हिंदुओं की एंट्री होगी। यह प्रस्तावित पाबंदी समिति द्वारा चलाए जा रहे सभी मंदिरों पर लागू होगी, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं।
इस बात की पुष्टि करते हुए बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले को लागू करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।बद्रीनाथ मंदिर सर्दियों के मौसम में छह महीने बंद रहने के बाद 23 अप्रैल को फिर से खुलेगा। केदारनाथ मंदिर के फिर से खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के मौके पर घोषित की जाएगी। चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। इन दोनों तीर्थस्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के त्योहार के साथ फिर से खुलने वाले हैं।यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर चल रही एक बड़ी बहस के बीच आई है।इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी को ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ घोषित करने वाले पोस्टर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर दिखाई दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से ‘हिंदू क्षेत्र’ बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई।श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र”। हालांकि, संगठन ने दावा किया कि इस कदम का मकसद सिर्फ लोगों को जानकारी देना है और इसका कोई गलत इरादा नहीं है।श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस घटनाक्रम के बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हर नागरिक के लिए कानून की बुनियादी जानकारी जरूरी है। हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं के बाद गंगा सभा को लगा कि लोगों को नियमों और विनियमों के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है। इसी मकसद से हरिद्वार के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं ताकि आम जनता, श्रद्धालु और पर्यटक कानून के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें और संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ले सकें।”नितिन गौतम ने आगे कहा कि हाल के दिनों में दो-तीन घटनाएं हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि सही जानकारी की कमी ही विवाद और झगड़े की असली वजह थी।उन्होंने बताया था कि इन बैनरों का मकसद लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है ताकि कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति और सद्भाव बना रहे।




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