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नई दिल्ली।‘ पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पीएम विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) रोजगार के अवसर पैदा करने, देश के युवाओं को सशक्त बनाने और भविष्य के भारत के लिए मजबूत वर्कफोर्स तैयार कर रही है।
पीएम-वीबीआरवाई के तहत इंसेंटिव बांटने के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि इस पहल से हाल के वर्षों में लाखों नौकरियां पैदा करने में मदद मिली है और यह युवा भारतीयों को अवसर प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरी है।पीएम मोदी ने कहा, “पीएम-वीबीआरवाई एक नए भारत की पहचान है। यह ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व करता है जहां रोजगार सृजन देश की भावना के केंद्र में है। जब युवा, सरकार और उद्योग एक साथ आते हैं, तो नौकरी पैदा करने की गति कई गुना बढ़ जाती है।” पीएम ने कहा, “भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और एक विकसित भारत की ओर बढ़ने का सफर देश के युवाओं के सपनों, कौशल और क्षमताओं से तय होगा।”उन्होंने कहा कि युवाओं को सार्थक रोजगार के अवसर देकर उन्हें सशक्त बनाना केंद्र सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार पहली बार काम-काज की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है।उन्होंने कहा, “यह योजना न सिर्फ नौकरी चाहने वालों की मदद करती है, बल्कि उद्योगों को भी नए टैलेंट को काम पर रखने और उनमें निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है।” उन्होंने आगे कहा, “जब कोई युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, तो सरकार उनके साथ खड़ी होती है। इससे नियोक्ताओं का भी भरोसा बढ़ता है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि पूरी सरकारी व्यवस्था इस प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।” पीएम ने उन युवाओं को बधाई दी जिन्हें नौकरी के अवसर मिले और उन संस्थानों की भी सराहना की जिन्होंने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें नौकरियां दीं। उन्होंने कहा कि इन संगठनों ने हाल के महीनों में लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभाई है। सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि अनुभव और आंकड़ों से लगातार यह पता चला है कि जब सरकार, उद्योग और युवा मिलकर काम करते हैं, तो रोजगार सृजन में तेजी आती है। -
नई दिल्ली। ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। इन नियमों के तहत अब जहाजों को पहले से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते में प्रवेश करने से पहले परमिट और बीमा लेना जरूरी होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते के बाद हाल ही में यह जलमार्ग फिर से खोला गया है।
ईरान की नई बनाई गई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) ने ये नए नियम जारी किए हैं। यह संस्था वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका मकसद तीन महीने से ज्यादा चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू करना है।अथॉरिटी के मुताबिक, इन नियमों का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह रास्ता दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से के तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) व्यापार के लिए इस्तेमाल होता है।पीजीएसए ने कहा, “इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और संबंधित अधिकारियों के निर्देश जारी होने के बाद, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सूचित किया जाता है कि तय समय के दौरान केवल वही जहाज गुजर सकेंगे जो जरूरी नियमों को पूरा करते हुए अपनी यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन जमा करेंगे।”नए नियमों के अनुसार, जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज स्ट्रेट पहुंचने से कम से कम 48 घंटे पहले यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन करना होगा। पीजीएसए ने कहा कि जहाजों को प्रवेश और बाहर निकलने के समय देरी से बचने के लिए अपनी पूरी जानकारी पहले ही देनी होगी।अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया कि जहाजों को यात्रा की अनुमति मिलने से पहले जरूरी परमिट और बीमा भी लेना होगा। इसके अलावा, जहाजों को ईरानी अधिकारियों की ओर से तय किए गए शिपिंग कॉरिडोर का ही इस्तेमाल करना होगा, ताकि उन इलाकों से बचा जा सके जहां संघर्ष के बाद अभी भी बारूदी माइन या अन्य खतरों की संभावना हो सकती है। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज मालिकों की होगी। -
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नई तकनीकों, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में मिलकर काम आगे बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) का इस्तेमाल करके नए अवसर पैदा करने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने पर भी बात की।
यह चर्चा शुक्रवार को लंदन में भारत के उच्चायुक्त पी. कुमारन और ब्रिटेन के विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसआईटी) के स्थायी सचिव इमरान मियां के बीच हुई बैठक में हुई। भारतीय उच्चायोग ने इसकी जानकारी दी। लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “उच्चायुक्त पी. कुमारन ने गुरुवार को डीएसआईटी के स्थायी सचिव इमरान मियां के साथ एक अच्छी और सकारात्मक बैठक की। इस दौरान भारत-ब्रिटेन के बीच एआई, नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट का इस्तेमाल करने पर भी बात की।”बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई 2026 से औपचारिक रूप से लागू होगा। उन्होंने इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी मजबूत करेगा।”उन्होंने आगे कहा कि इससे भारतीय किसानों, कामगारों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के लिए कई नए अवसर खुलेंगे और यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और वह खुद जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात से खुश हैं कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल रही है।चार जून को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर से मुलाकात की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में चल रहे सहयोग की समीक्षा की। उन्होंने दुनिया के मौजूदा हालात पर भी चर्चा की।बैठक के बाद एस. जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-ब्रिटेन साझेदारी अब साझा आर्थिक लक्ष्यों और हाईटेक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर का भारत में स्वागत करके खुशी हुई। हमने व्यापार, तकनीक, सप्लाई चेन, रक्षा, जलवायु, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों में हो रही प्रगति की समीक्षा की। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में नए अवसरों पर भी चर्चा की।” उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र सहित दुनिया के कई मुद्दों पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी ‘विजन 2035’ के तहत लगातार आगे बढ़ रही है। - नई दिल्ली ।चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने शुक्रवार को कैलाश मानसरोवर यात्रा (केएमवाई) पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक वीडियो संदेश जारी किया। इस संदेश में उन्होंने यात्रियों का स्वागत किया और यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी सलाह दी। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “विदेश मंत्रालय (एमईए) और चीन की सरकार के सहयोग से आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026, 20 जून को भारत से रवाना होगी। दूतावास की टीम आधिकारिक और निजी दोनों माध्यमों से यात्रा करने वाले सभी श्रद्धालुओं का पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा के लिए हार्दिक स्वागत करती है।”राजदूत दोरईस्वामी के नेतृत्व में दूतावास की टीम ने हाल ही में यात्रा मार्गों का दौरा किया। टीम ने भारत के सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (चीन) तक जाने वाले प्रमुख रास्तों का निरीक्षण किया। इस दौरान नाथू ला और लिपुलेख दर्रों के जरिए यात्रा व्यवस्थाओं और तैयारियों की समीक्षा की गई।दूतावास ने वीडियो साझा करते हुए कहा, “यह हमारे राजदूत का संदेश है। जल्द ही यात्रा से जुड़ी और तस्वीरें तथा जरूरी यात्रा सलाह भी जारी की जाएंगी। सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की शुभकामनाएं।” राजदूत ने संदेश में बताया कि नाथू ला दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी कस्टम और इमिग्रेशन अधिकारी श्रद्धालुओं का स्वागत करेंगे। इसके बाद उन्हें बसों के जरिए याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।उन्होंने वीडियो में यात्रा के समय, खाने-पीने की सुविधाओं और करेंसी एक्सचेंज जैसी अन्य जरूरी जानकारियां भी दीं। राजदूत ने यह भी कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़ी और जानकारी देने वाले कई वीडियो आगे भी जारी किए जाएंगे। पिछले सप्ताह उन्होंने तिब्बत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी ल्हासा का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर भारतीय श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और सुविधाओं की समीक्षा की।ल्हासा हवाई अड्डे पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के विदेश मामलों के कार्यालय के उप महानिदेशक यांग लाहोंग ने उनका स्वागत किया। दूतावास के अनुसार, बाद में राजदूत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष झाओ पेंग से मुलाकात की। झाओ पेंग ने श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इससे पहले 13 जून को विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
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नयी दिल्ली. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और दोनों ने सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेषकर आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। यह मुलाकात फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बैठक के एक दिन बाद हुई है। शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "आज नयी दिल्ली में भारत में अमेरिकी राजदूत श्री सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से आतंकवाद और मादक पदार्थों के खिलाफ भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत, व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी और दोनों देशों के लोगों को द्विपक्षीय संबंधों से लाभ सुनिश्चित करने के लिए भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है। गोर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "माननीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ एक शानदार बैठक हुई।" उन्होंने कहा, "आतंकवाद से लड़ने, अपने लोगों को मादक पदार्थों और अवैध पदार्थों से बचाने, हमारी सीमाओं को सुरक्षित करने और दोनों देशों में अपराधियों को संयुक्त रूप से न्याय के कटघरे में लाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर हमारी सार्थक चर्चा हुई।" एक अन्य पोस्ट में गोर ने कहा, "फ्रांस में जी 7 की शानदार यात्रा के बाद नयी दिल्ली वापस। अमेरिका और भारत के बीच बहुत सारे सकारात्मक परिणाम मिले!" बुधवार को ट्रंप के साथ अपनी बैठक के दौरान मोदी ने नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया और आग्रह किया कि ईरान के साथ वाशिंगटन के शांति समझौते के कार्यान्वयन के दौरान उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। साथ ही दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित किया जिसमें पिछले साल गंभीर तनाव देखा गया था।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने बृहस्पतिवार को नीट-यूजी के अभ्यर्थियों से कहा कि वे परेशान न हों और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। एजेंसी ने साथ ही कहा कि परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। एजेंसी ने 'एक्स' पर एक संदेश में कहा कि पुन: परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को ही आयोजित की जाएगी। इसने अभ्यर्थियों से अपील की कि वे परीक्षा स्थगित होने की अफवाहों या ''सोशल मीडिया पर मच रहे शोर-शराबे'' से प्रभावित न हों। संदेश में अभ्यर्थियों से कहा गया कि वे सिर्फ़ एनटीए की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
एनटीए ने कहा, ''हम आपको भरोसा दिलाना चाहते हैं कि संबंधित मंत्रालयों, राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक सुरक्षित एवं निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। इस प्रक्रिया की शुचिता हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए मज़बूत, बहु स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।'' एजेंसी ने कदाचार के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा, ''गलत तरीके अपनाने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा - क्योंकि ईमानदार और मेहनती छात्रों की सुरक्षा करना ही मुख्य मकसद है।'' तीन मई को हुई मूल परीक्षा को रद्द करने के बारे में एनटीए ने कहा कि यह फ़ैसला अभ्यर्थियों के हित में लिया गया था और इस घटना से मिले सबक का इस्तेमाल परीक्षा प्रक्रिया को मज़बूत बनाने के लिए किया गया है। एनटीए ने कहा, ''तीन मई को लिया गया मुश्किल फ़ैसला सिर्फ़ आपके भले के लिए था। जैसे ही समस्या सामने आई, हमने हर ईमानदार अभ्यर्थी के वास्ते प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कदम उठाए। हमने उन अनुभवों से सीखा है तथा इस बार प्रणाली को और मज़बूत किया है।'' एजेंसी ने परीक्षा से जुड़े तनाव का सामना कर रहे छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की उपलब्धता पर भी ज़ोर दिया। संदेश में कहा गया, ''अगर आप बहुत ज़्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं, तो जान लें कि आप अकेले नहीं हैं। 'मानस' मानसिक-स्वास्थ्य हेल्पलाइन (14416) उपलब्ध है और जिसे भी ज़रूरत हो, उसे मदद मिल सकती है। मदद मांगना हिम्मत की निशानी है।'' एनटीए ने माता-पिता, शिक्षकों और आम लोगों से यह भी अपील की कि वे छात्रों को शांत रखने में मदद करें तथा अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें। इसने कहा, ''कृपया हमारे छात्रों को शांत रखने में हमारी मदद करें। अपुष्ट जानकारी साझा न करें। उन्हें शांत और स्थिर मन के साथ परीक्षा के लिए जाने दें।'' अभ्यर्थियों से सीधे बात करते हुए एजेंसी ने कहा, ''नीट यूजी 2026 परीक्षा में बस तीन दिन बचे हैं। शांत रहें, अच्छी तरह आराम करें और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर ध्यान दें। आपसे बस यही उम्मीद की जाती है।'' चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) इस साल तीन मई को हुई थी लेकिन पेपर लीक के आरोपों के चलते एनटीए ने इसे 12 मई को रद्द कर दिया। केंद्रीय अन्वेषण बयूरो (सीबीआई) द्वारा इस मामले की जांच की जा रही है और पुन: परीक्षा परीक्षा 21 जून को होनी है। -
नयी दिल्ली/ ज्यूरिख। स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन वर्ष 2025 में आठ प्रतिशत से अधिक घटकर 3.25 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 36,793 करोड़ रुपये) रह गया। यह गिरावट स्थानीय शाखाओं और अन्य बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों के माध्यम से रखी गई राशि में कमी के कारण हुई। स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) की तरफ से बृहस्पतिवार को जारी वार्षिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। इन आंकड़ों के मुताबिक, कुल जमा राशि में गिरावट आने के बावजूद व्यक्तिगत और संस्थागत ग्राहकों के खातों में जमा धन 50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,000 करोड़ रुपये) हो गया। हालांकि, कुल राशि में इन जमाओं की हिस्सेदारी लगभग 16 प्रतिशत ही रही। कुल धनराशि का बड़ा हिस्सा 'बैंकों को देय राशि' के रूप में रहा, जो अन्य बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों के जरिये रखी गई थी। यह राशि पिछले साल करीब 15 प्रतिशत घटकर 2.6 अरब स्विस फ्रैंक रही। इससे पहले वर्ष 2024 में स्विस बैंकों में जमा कुल भारतीय धन तिगुना होकर 3.5 अरब स्विस फ्रैंक हो गया था, जो 2021 के बाद का उच्चतम स्तर था। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 14 साल के उच्चतम स्तर 3.83 अरब स्विस फ्रैंक पर था। ये बैंकों की तरफ से स्विस नेशनल बैंक को दी गई सूचनाओं पर आधारित आंकड़े हैं। ये स्विट्जरलैंड में भारतीयों के पास मौजूद कथित काले धन की बहुचर्चित मात्रा को नहीं दर्शाते हैं। इन आंकड़ों में वह धन भी शामिल नहीं होता जो भारतीयों, प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) या अन्य लोगों द्वारा स्विस बैंकों में तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखा गया हो। एसएनबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 के अंत में मौजूद कुल 325.05 करोड़ स्विस फ्रैंक की देनदारियों में से 52.4 करोड़ स्विस फ्रैंक ग्राहक जमा, 2.6 अरब स्विस फ्रैंक अन्य बैंकों के जरिये, 1.86 करोड़ स्विस फ्रैंक विश्वस्त संस्था या ट्रस्ट के जरिये और 10.57 करोड़ स्विस फ्रैंक बॉन्ड एवं प्रतिभूतियों जैसे अन्य वित्तीय साधनों के रूप में थे। एसएनबी के आंकड़ों के अनुसार, स्विस बैंकों में भारतीयों की कुल जमा राशि वर्ष 2006 में करीब 6.5 अरब स्विस फ्रैंक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें अधिकांश समय गिरावट का रुख रहा। हालांकि 2011, 2013, 2017, 2020, 2021, 2022, 2023 और 2024 जैसे कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि दर्ज की गई। एसएनबी ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े बैंकों द्वारा रिपोर्ट की गई कुल देनदारियों को दर्शाते हैं और इन्हें स्विस बैंकों में कथित काले धन का प्रत्यक्ष संकेतक नहीं माना जा सकता। साथ ही, इनमें तीसरे देशों की इकाइयों के नाम पर रखे गए धन को शामिल नहीं किया जाता। अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) के 'लोकेशनल बैंकिंग स्टैटिस्टिक्स' के मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों के जमा धन में 2025 के दौरान 20 प्रतिशत बढ़कर 8.97 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 780 करोड़ रुपये) हो गया। स्विट्जरलैंड और भारत के बीच 2018 से कर मामलों में स्वत: सूचना आदान-प्रदान व्यवस्था लागू है, जिसके तहत स्विस वित्तीय संस्थानों में खाताधारकों से जुड़ी विस्तृत जानकारी हर साल भारतीय कर अधिकारियों के साथ साझा की जाती है। वैश्विक स्तर पर स्विस बैंकों में विदेशी ग्राहकों की कुल जमा राशि 2025 में करीब आठ प्रतिशत घटकर 1.05 लाख करोड़ स्विस फ्रैंक रही। देशवार आंकड़ों में स्विस बैंकों में मौजूद विदेशी ग्राहकों के धन के मामले में ब्रिटेन 192 अरब स्विस फ्रैंक के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि अमेरिका (75 अरब स्विस फ्रैंक) और फ्रांस (63 अरब स्विस फ्रैंक) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। हालांकि, भारत वर्ष 2024 के 48वें स्थान से सुधरकर 2025 में 46वें स्थान पर पहुंच गया।
पाकिस्तान की जमा राशि 27.2 करोड़ स्विस फ्रैंक से घटकर 25.7 करोड़ स्विस फ्रैंक रह गई, जबकि बांग्लादेश की जमा राशि 43 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 84.2 करोड़ स्विस फ्रैंक पहुंच गई। रैंकिंग में बांग्लादेश 81वें स्थान पर रहा जबकि पाकिस्तान 108वें स्थान पर है। -
नई दिल्ली। सरकार खाद्यान्न भंडारण के लिए स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम लॉन्च करने जा रही है। यह कदम आधुनिक, तकनीक-सक्षम और अधिक कुशल सार्वजनिक भंडारण व्यवस्था के जरिए देश की खाद्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) 18 जून को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम का शुभारंभ करेगा। इस कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी मौजूद रहेंगे। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम को एक एकीकृत तकनीक-आधारित समाधान के रूप में विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य गोदाम प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाना और खाद्यान्न भंडारण से जुड़े कार्यों की दक्षता बढ़ाना है।इस पहल से एक आधुनिक भंडारण तंत्र विकसित होने की उम्मीद है, जो खाद्यान्न प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगा और लंबे समय तक देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल डिजिटल इंडिया, इंडिया एआई मिशन, पीएम गतिशक्ति और आत्मनिर्भर भारत जैसे सरकारी अभियानों की सोच के अनुरूप है।कार्यक्रम के दौरान विभाग केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के उन गोदामों को सम्मानित करेगा, जिन्होंने डिपो दर्पण मूल्यांकन ढांचे के तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। स्मार्ट वेयरहाउसिंग सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), स्वचालन और डेटा विश्लेषण जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिनके जरिए गोदाम संचालन को बेहतर बनाया जाएगा और निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।आधिकारिक बयान के अनुसार, इस प्रणाली के जरिए प्रवेश द्वार और वजन पुल (वेटब्रिज) संचालन का स्वचालन, डिजिटल प्रवेश प्रबंधन, गोदामों की स्थिति की स्मार्ट निगरानी, स्टॉक की बेहतर दृश्यता और एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से रियल टाइम में संचालन की निगरानी संभव हो सकेगी।यह पहल खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के व्यापक सुधार कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खाद्यान्न आपूर्ति शृंखला में डिजिटल परिवर्तन और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में खरीद, भंडारण और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, कार्यकुशलता सुधारने और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।कार्यक्रम के दौरान उन गोदामों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने डिपो दर्पण के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। डिपो दर्पण एक संरचित मूल्यांकन और प्रदर्शन निगरानी प्रणाली है, जिसे बुनियादी ढांचे, संचालन, सुरक्षा, स्वच्छता और सेवा गुणवत्ता में लगातार सुधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। बुधवार को -
नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) ने बुधवार को घोषणा करते हुए जानकारी दी कि कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इसी दिन सोशल सिक्योरिटी पर एग्रीमेंट, जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) कहा जाता है, वो भी लागू होगा। इससे यूके में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को अधिक सुविधा मिलेगी और कॉम्पिटिटिवनेस प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, डीसीसी के तहत मिलने वाली छूट की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है। यह यूके में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत-यूके संबंधों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुझे खुशी है कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को काफी बढ़ावा देगा।”उन्होंने आगे कहा, “इससे भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार करने वालों के लिए कई नए अवसर खुलेंगे। यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मैं और प्रधानमंत्री स्टार्मर हमारे आर्थिक संबंधों को मिली इस नई गति से बेहद खुश हैं।”इस ऐतिहासिक समझौते की नींव मई 2021 में रखी गई थी, जब दोनों देशों ने एन्हांस्ड ट्रेड पार्टनरशिप और इंडिया-यूके रोडमैप 2030 को अपनाया था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाना और 2030 तक आपसी व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना था।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “15 जुलाई 2026 से सीईटीए और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के एक साथ लागू होने से भारत के निर्यात के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे। हमारे 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच मिलने से लंबे समय से मौजूद शुल्क संबंधी बाधाएं खत्म हो जाएंगी।” उन्होंने कहा कि इससे भारत के वस्त्र, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को बराबरी का अवसर मिलेगा और वे अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बिना किसी नुकसान के वैश्विक बाजार में बेच सकेंगे।30 अध्यायों वाले सीईटीए को नई पीढ़ी के व्यापार समझौतों का एक नया मॉडल माना जा रहा है। यह सीधे तौर पर भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को समर्थन देता है। यह समझौता केवल आयात-निर्यात शुल्क कम करने तक सीमित नहीं है। इसमें डिजिटल व्यापार, दूरसंचार, वित्तीय सेवाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार और पहली बार द्विपक्षीय स्तर पर सरकारी खरीद जैसे आधुनिक क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।मंत्रालय के अनुसार, सीईटीए और डीसीसी के एक साथ लागू होने से भारत की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़ा और संरचनात्मक बदलाव आएगा। साथ ही भारत ने डेयरी उत्पाद, अनाज, मोटे अनाज (मिलेट्स), खाद्य तेल, तिलहन, सेब और कई सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की है। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नई दिल्ली को क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने में एक जरूरी पार्टनर बताया। उन्होंने कहा कि भारत एक “भरोसेमंद सहयोगी” है और पश्चिम एशिया के संकट को सुलझाने की कोशिशों में “बड़ी भूमिका” निभा रहा है।ट्रंप ने यह बात यहां G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई हाई-लेवल बातचीत के बाद कही। इस बातचीत में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में बदलते जियोपॉलिटिकल हालात पर चर्चा हुई।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाएगा, तो ट्रंप ने कहा, “हां, मुझे उम्मीद है। मुझे लगता है कि भारत हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है। जब तक वह (पीएम नरेंद्र मोदी) नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाता रहेगा।”अमेरिकी नेता ने दोनों लोकतंत्रों के बीच मज़बूत आपसी तालमेल और संस्थागत सहयोग पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि कमर्शियल बातचीत में काफी प्रगति हुई है और इस बात पर ज़ोर दिया कि दोनों देश ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने के “बहुत करीब” हैं। वॉशिंगटन की डिप्लोमैटिक कोशिशों को मानते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति को आगे बढ़ाने के लिए ट्रंप की कोशिशों की तारीफ़ की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थायी होगी।पीएम मोदी ने कहा, “पश्चिम एशिया में शांति की कोशिशों में हुई प्रगति के लिए मैं आपके नेतृत्व की तारीफ़ करता हूं।” उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता के महत्व के बारे में भी बात की और कहा कि ग्लोबल इकॉनमी के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखना बहुत ज़रूरी है।खास बात यह है कि प्रधानमंत्री ने अशांत समुद्री इलाकों में काम करने वाले कमर्शियल क्रू सदस्यों की सुरक्षा की वकालत की और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।यह कहते हुए कि भारतीय नाविकों का कल्याण भारत के लिए प्राथमिकता है, प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरा मानना है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा बहुत ज़रूरी है।” उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि क्षेत्र में बन रही शांति समझ के तहत नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह अहम बातचीत बहुत रणनीतिक महत्व रखती है और दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत में लंबे समय से चले आ रहे अंतराल को खत्म करती है। यह बैठक 16 महीनों से ज़्यादा समय में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच पहली आमने-सामने की मुलाकात थी और ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में तनाव, समुद्री सुरक्षा की चिंताएं और ट्रेड बातचीत ग्लोबल डिप्लोमेसी को आकार दे रही हैं। फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में हुई यह मुलाकात पश्चिमी एशिया में बदलते जियोपॉलिटिकल हालात और भारत व अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिशों के बीच हुई। इस बातचीत का गर्मजोशी भरा अंदाज, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारतीय नेतृत्व के बारे में पहले दिए गए सार्वजनिक बयानों के अनुरूप है।ट्रंप ने अक्सर प्रधानमंत्री के साथ अपने अच्छे तालमेल के बारे में बात की है और सार्वजनिक बयानों में पीएम मोदी के नेतृत्व की शैली का ज़िक्र किया है। इस महीने की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार चुने गए प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और उन्हें “मज़बूत, स्वस्थ और समझदार व्यक्ति” बताया। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए अवसरों का समर्थन किया। उन्होंने भारतीयों को ‘बहुत प्रतिभाशाली’ बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से रोजगार के क्षेत्र में अच्छे संबंध रहे हैं। ये बयान ट्रंप ने फ्रांस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय बैठक में दिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में भारतीय कुशल पेशेवरों को अमेरिका में आगे भी अवसर मिलते रहेंगे, तो ट्रंप ने सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रोजगार के मामले में हमारे हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने भारतीय पेशेवरों की तारीफ करते हुए कहा कि ये बहुत प्रतिभाशाली लोग हैं।ट्रंप के इन बयानों पर भारत में खास ध्यान दिया जाएगा, क्योंकि भारत अमेरिका में बड़ी संख्या में कुशल कर्मचारियों, इंजीनियरों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों को भेजने वाले देशों में शामिल है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और भारत के रिश्ते काफी मजबूत हैं। प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई। अमेरिका और भारत के बीच बहुत सारी चीजें आगे बढ़ रही हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और बातचीत करने की क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि वह बहुत मजबूत बातचीत करने वाले नेता हैं। वास्तव में, वह सबसे अच्छे बातचीत करने वालों में से एक हैं। बाद में ट्रंप ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर काफी सकारात्मक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे बीच सबसे अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मेरे और प्रधानमंत्री मोदी के बीच या हमारे दोनों देशों के बीच इससे ज्यादा करीबी रिश्ता हो सकता है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले अमेरिका दौरे के बाद से दोनों देशों के बीच सहयोग काफी बढ़ा है। पिछले साल वॉशिंगटन में हमारी बेहद सफल बैठक हुई थी। उसके बाद से हमने अपने रिश्तों में नई गति और नई ऊर्जा दी है। दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी भी तय किए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। हमारी टीमें भी आपस में लगातार बातचीत और सहयोग कर रही हैं। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौता काफी करीब है। उन्होंने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत के बाद यह भरोसा जताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है।जब ट्रंप से पूछा गया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के कितने करीब हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “बहुत करीब।”
इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत की क्षमता की तारीफ की और कहा कि बातचीत भले ही कड़ी रही हो, लेकिन काफी सकारात्मक रही। ट्रंप ने कहा, “वह बहुत सख्त बातचीत करने वाले नेता हैं। सच कहूं तो सबसे सख्त नेताओं में से एक हैं।”अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के व्यापक आर्थिक रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारी प्रधानमंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई। हम व्यापार समझौतों पर काम कर रहे हैं। हम कई और क्षेत्रों में भी साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका और भारत के बीच बहुत कुछ हो रहा है।ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका में निवेश बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री अमेरिका में बहुत सारे प्रोजेक्ट्स बना रहे हैं। वह अमेरिका में काफी पैसा निवेश कर रहे हैं।राष्ट्रपति ने बार-बार अमेरिका और भारत के मजबूत रिश्तों पर जोर दिया।भारत में हाल की कुछ अमेरिकी नीतियों को लेकर उठी चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि जब तक मैं राष्ट्रपति हूं, भारत का व्हाइट हाउस में एक बहुत अच्छा दोस्त है। ट्रंप ने कहा कि वे भारत से प्यार करते हैं। पीएम मोदी के लिए उनके मन में बहुत सम्मान है। ट्रंप ने दोनों देशों के रिश्तों को बेहद गर्मजोशी भरा बताया। उन्होंने कहा कि हमारे रिश्ते सबसे अच्छे हैं। दोनों देश इससे ज्यादा करीब नहीं हो सकते।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वॉशिंगटन में हुई पिछली मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग को नई गति मिली है। पिछले साल वॉशिंगटन में हमारी बेहद सफल और उपयोगी बैठक हुई थी, और उसके बाद हमारे रिश्तों को नई रफ्तार और नई ऊर्जा मिली है। हम कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारी उन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं, जिन पर दोनों नेताओं ने सहमति बनाई थी। हमारी टीमें भी लगातार आपसी तालमेल और सहयोग के साथ काम कर रही हैं। - नई दिल्ली। एक अहम कूटनीतिक बदलाव का संकेत देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को फ्रांस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से द्विपक्षीय बातचीत की। इस बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री स्थिरता और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर चर्चा हुई। इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की दिशा में ट्रंप के नेतृत्व प्रयासों की सराहना की और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से वैश्विक व्यापार के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।वैश्विक समुद्री मार्गों में भारत के रणनीतिक हितों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री ने बेहतर सहयोग की वकालत की। पीएम मोदी ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। भारत ने हमेशा नेविगेशन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया है, और हमें इस मुद्दे पर मिलकर काम करना चाहिए। दुनिया भर में, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, लाखों नाविक अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।”प्रधानमंत्री की बातों का जवाब देते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। मौजूदा प्रशासन के तहत नई दिल्ली के भू-राजनीतिक प्रभाव पर जोर देते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब तक प्रधानमंत्री मोदी नेता हैं, पश्चिम एशिया में भारत की बड़ी भूमिका है।” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की भी सराहना की और अमेरिका में भारत के निवेश का जिक्र किया।अमेरिकी बाजार में भारतीय व्यावसायिक उपस्थिति के पैमाने की तारीफ करते हुए, ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका में बहुत कुछ बना रहे हैं। वह अमेरिका में बहुत पैसा खर्च कर रहे हैं।” फ्रांस में द्विपक्षीय बैठक के दौरान ट्रंप ने यह बात कही। ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री के साथ अपने व्यक्तिगत अच्छे संबंधों पर भी जोर दिया और कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि वह लंबे समय से मेरे दोस्त रहे हैं। आपके साथ होना बहुत अच्छा है। बहुत-बहुत धन्यवाद।” दोनों नेताओं ने मंगलवार को G7 नेताओं की बैठक में मुलाकात की, एक-दूसरे का हाल-चाल जाना और संक्षिप्त बातचीत की। यह 16 महीनों में उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।यह कूटनीतिक मुलाकात पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के बाद हुई है, क्योंकि दोनों पक्ष अब द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों नेताओं की पिछली आमने-सामने की मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी, जो ट्रंप के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह के कुछ हफ़्ते बाद थी। इसके बाद, ट्रंप द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने और बाद में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म करने के उनके दावे के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव आ गया।
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उदयपुर (राजस्थान). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि भारत का इतिहास गुलामी का नहीं बल्कि आक्रमणकारियों के खिलाफ निरंतर प्रतिरोध का है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और विदेश में भारत के उत्थान को रोकने के लिए झूठे विमर्श गढ़े जा रहे हैं। भागवत हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ''आज भारत को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिशें हो रही हैं। झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं और लोगों को गुमराह करने के लिए कई तरीके अपनाए जा रहे हैं।'' आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत के उत्थान का विरोध करने वाले लोग जनसंख्या, शक्ति, आर्थिक संसाधन और संगठनात्मक क्षमता रखते हैं, फिर भी हमें अपने मूल्यों के आधार पर दृढ़ रहना होगा।'' भागवत ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक संकल्प का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, ''वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें अपने आदर्शों और सभ्यतागत मूल्यों पर टिके रहना होगा।'' भागवत ने राजपूत शासक महाराणा प्रताप की विरासत और ऐतिहासिक हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए इसे भारत के सभ्यतागत प्रतिरोध का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा का प्रतीक है।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि महाराणा प्रताप ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा, ''हमारा इतिहास गुलामी का नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ संघर्ष का है जिन्होंने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की।'' भागवत ने कहा, ''महाराणा प्रताप ने अत्याचारों के खिलाफ, धर्म और संस्कृति के लिए तथा अपनी भूमि की स्वतंत्रता के लिए युद्ध किया।'' आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए उन ऐतिहासिक महापुरुषों से सीख लेने की आवश्यकता है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और संकल्प पर अडिग रहकर संघर्ष किया। भागवत ने कहा कि भारत की शक्ति केवल उसकी जनसंख्या या भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि उसके सभ्यतागत मूल्यों में निहित है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और संकीर्ण पहचान की सीमाओं से ऊपर उठने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा, ''हमें उसी प्रकार एकजुट रहना चाहिए, जैसे मेवाड़ की जनता महाराणा प्रताप के साथ खड़ी रही थी। भारत की प्रगति के लिए हमें मिलकर कार्य करना होगा।'' हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि इसे केवल एक सैन्य संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक लड़ाई नहीं था। यह विदेशी आक्रमणों के विरुद्ध भारतीय समाज के दीर्घकालीन संघर्ष का प्रतीक था।'' भागवत ने कहा कि महाराणा प्रताप इस युद्ध में विजयी होकर उभरे थे।
उन्होंने कहा, ''विभिन्न आक्रमणकारी आए, कुछ ने सत्ता भी प्राप्त की, लेकिन भारत ने सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर कभी भी गुलामी को स्वीकार नहीं किया। इतिहास के कठिन दौर में भी भारत ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा। हमने अच्छे और बुरे दोनों समय देखे हैं, लेकिन हमारा धर्म और हमारी संस्कृति अक्षुण्ण बनी रही।'' भागवत ने कहा कि भारत का उत्थान केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है और एक सशक्त भारत दुनिया के लिए भी आवश्यक है। हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून, 1576 को मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर की ओर से आमेर के राजा मानसिंह के नेतृत्व वाली सेना के बीच लड़ा गया था। कई इतिहासकारसें का मानना है कि इसमें मुगलों को सामरिक जीत मिली। वहीं, कुछ इतिहासकार इसे अनिर्णायक युद्ध मानते हैं, क्योंकि मुगल महाराणा प्रताप को पकड़ने या मेवाड़ को पूरी तरह अपने अधीन करने में असफल रहे। युद्ध के बाद भी महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाकर मुगलों का लगातार प्रतिरोध किया। -
नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बुधवार को यहां मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित अपने आधिकारिक आवास में स्थानांतरित हो गए। नवीन के नये आवास (टाइप-8 बंगला) पर उनके करीबी परिजनों की उपस्थिति में 'गृह प्रवेश' समारोह आयोजित किया गया। यह बंगला (1, मोतीलाल नेहरू मार्ग) पहले झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को आवंटित था।
इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, अर्जुन राम मेघवाल, किरेन रीजीजू तथा जी किशन रेड्डी सहित भाजपा के कई नेता नितिन नवीन के आवास पर पहुंचे। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सांसदों के अलावा भाजपा के कई अन्य नेता भी नवीन के सरकारी आवास पर पहुंचे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दलों के नेता भी इस अवसर पर मौजूद रहे, जिनमें जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। नवीन 20 जनवरी को निर्विरोध चुने जाने के बाद केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा के स्थान पर भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। वे बिहार के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और मार्च में राज्य से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। - नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को घोषणा की कि 'दिल्ली स्लम एवं झुग्गी झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2026' को अंतिम रूप दे दिया गया है, जिससे ऐसे स्थानों पर रहने वाले चार लाख परिवारों को लाभ मिलेगा। शाह ने कहा कि दिल्ली सरकार को हर महीने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित कम से कम पांच पुनर्वास परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी करनी चाहिए। राष्ट्रीय राजधानी में झुग्गी-झोपड़ी वासियों के पुनर्वास को लेकर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए गृह मंत्री ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को 45 दिनों के भीतर पांच झुग्गी बस्तियों के लिए निविदाएं जारी करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को अतिरिक्त 50 झुग्गी बस्तियों के लिए परियोजना दस्तावेज और निविदा प्रपत्र तैयार करने के भी निर्देश दिए। शाह ने कहा कि झुग्गी बस्तियों के लिए पात्रता की तिथि एक जनवरी, 2025 के अनुसार तय की जाए।बैठक में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, दिल्ली के उप-राज्यपाल तरणजीत सिंह संधु, दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता तथा अन्य वरिष्ठ मंत्री तथा अधिकारी शामिल हुए।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने पिछले 12 वर्षों में आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है और अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाओं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आदि को बेहतर बनाने के लिए काम किया है। अपनी सरकार को 'मध्यम वर्ग की सरकार' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में काम करना उनके लिए सौभाग्य की बात है, क्योंकि इस वर्ग ने अनगिनत तरीकों से राष्ट्र-निर्माण में योगदान दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''पिछले एक दशक में शासन का ध्यान लगातार आम नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने पर केंद्रित रहा है। हमारे प्रयास अवसरों तक आसान पहुंच, बेहतर बुनियादी ढांचे, उन्नत सार्वजनिक सेवाएं, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ शहरों और दैनिक जीवन में बोझ कम करने आदि का है।'' केंद्र सरकार के नागरिकों से जुड़ने के मुख्य मंच 'माई जीओवी इंडिया' में कहा गया है कि मोदी के नेतृत्व में, पिछले 12 सालों में भारत के मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है। इसमें बेहतर आधारभूत ढांचा, बेहतर संपर्क, कर में राहत और सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार का अहम योगदान रहा है। इसमें कहा गया है कि बेहतर परिवहन से लेकर मज़बूत डिजिटल पहुंच तक, देश भर के लाखों परिवारों के लिए रोज़मर्रा की ज़िंदगी ज़्यादा आसान और अवसरों से भरी हो गई है। 'माई जीओवी इंडिया' के अनुसार, ग्रामीण और शहरी भारत में इंटरनेट के विस्तार के साथ संपर्क अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। इसमें कहा गया है कि 103 करोड़ से ज़्यादा कनेक्शन और डेटा की कीमतों में भारी कमी के कारण अब नागरिक बहुत कम खर्च में शिक्षा, रोज़गार के अवसर, डिजिटल पेमेंट और मनोरंजन का आसानी से लाभ उठा पा रहे हैं। 'माई जीओवी इंडिया' ने कहा है कि वंदे भारत सेवाओं के विस्तार से रेल यात्रा तेज़ और ज़्यादा आरामदायक हो गई है। 164 ट्रेन और नौ करोड़ से ज़्यादा यात्रियों को सेवा देने के साथ, मुख्य मार्गों पर यात्रा का समय काफ़ी कम हो गया है। इसमें कहा गया, ''बेहतर राजमार्गों और आसान टोल प्रणाली की वजह से भारत का सड़क आधारभूत ढांचा अच्छा हो गया है, जिससे यात्रा जल्दी पूरी होती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील से प्रेरित होकर महाराष्ट्र के वर्धा जिले के पुलगांव निवासी सतीश गौरीशंकर चौबे के परिवार ने बेटे के विवाह में सोने की आभूषण नहीं खरीदने का निर्णय किया है। चौबे परिवार मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं से दशकों पहले महाराष्ट्र आकर बस गया था। सतीश के सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे यश का विवाह एक जुलाई को होना है। इस संबंध में सतीश ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिवार के फैसले की जानकारी दी। सतीश ने बताया कि होने वाली बहू के लिए नया मंगलसूत्र खरीदने पर चर्चा चल रही थी, लेकिन उनकी पत्नी सीमा ने अपना ही मंगलसूत्र पॉलिश और मरम्मत करवाकर बहू को उपहार स्वरूप देने का फैसला किया। पत्र में सतीश चौबे ने लिखा कि यह केवल धन बचाने का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित में जिम्मेदार खर्च की भावना को अपनाने का प्रयास है। परिवार ने प्रधानमंत्री को भी विवाह में शामिल होने का न्यौता दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मई को हैदराबाद की एक रैली में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक वर्ष तक सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने तथा ईंधन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की अपील की थी।
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नयी दिल्ली. भारतीय ध्वज वाला एलएनजी से भरा जहाज 'दिशा' तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला जहाज बन गया है। भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (एससीआई) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा प्रबंधित यह जहाज 62,370 टन एलएनजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आगे बढ़ चुका है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, "एलएनजी पोत 'दिशा' सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और यह 62,370 टन एलएनजी लेकर आ रहा है। इसके 18 जून के आसपास भारत के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।" मंत्रालय ने कहा कि नौवहन महानिदेशालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार समन्वय में है। मंत्रालय के मुताबिक, स्थापित नियंत्रण कक्ष ने पिछले 96 घंटों में 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटान किया है। इस दौरान नाविकों, उनके परिवारों और अन्य समुद्री हितधारकों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए। मंत्रालय ने यह भी बताया कि महानिदेशालय ने अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की है, जिनमें पिछले 96 घंटे में 50 नाविक शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि देशभर में बंदरगाह परिचालन सामान्य हैं और कहीं से भी जाम की स्थिति की सूचना नहीं है।
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भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सोमवार को 12वीं कक्षा की राज्य बोर्ड परीक्षा की टॉपर चांदनी विश्वकर्मा से मिलने के लिए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से यहां एक झुग्गी बस्ती स्थित उसके घर पहुंचे और उसे उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। भोपाल के भीमनगर क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय चांदनी विश्वकर्मा ने इस वर्ष मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। यादव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक भगवानदास सबनानी के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर से चांदनी के घर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की संकरी गलियों से होकर सफर किया। मुख्यमंत्री ने चांदनी को उसकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि उसकी उपलब्धि ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। यादव ने बाद में कहा कि उनकी चांदनी और उसके परिवार से आत्मीय मुलाकात हुई तथा उन्होंने उनके साथ 'सेल्फी' भी ली। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद चांदनी ने परिश्रम, समर्पण और दृढ़ संकल्प के बल पर यह सफलता हासिल की है, जो प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भीमनगर तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का उनका अनुभव अच्छा रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम ईंधन संरक्षण में सहायक होते हैं और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करते हैं।
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शांति बहाल होने की उम्मीद जताई
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का सोमवार को स्वागत किया, साथ ही उम्मीद जताई कि इस समझौते के लागू होने से क्षेत्र में शांति बहाल करने और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान ने अपने 107 दिन लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार, इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, '' मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस संघर्ष के कारण दुनिया भर में गंभीर आर्थिक उथल-पुथल हुई है और कई देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। भारत को उम्मीद है कि इस सहमति को अमल में लाने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नौवहन व व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि बाकी मुद्दों पर बातचीत से एक टिकाऊ समझौता हो सकेगा। -
आगरा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को जोर देकर कहा कि भारत शांतिप्रिय देश है, लेकिन यह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों से अच्छी तरह से निपटने में पूर्ण रूप से सक्षम है। यहां महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, "हम शांति चाहने वाले लोग हैं, लेकिन जो लोग अशांति फैलाते हैं, उन्हें स्थायी रूप से शांत करना हमें आता है।" राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस नीत सरकार की यह कहते हुए आलोचना की कि 2014 से पहले आतंकवादी हमले आम थे और उस समय के राजनेता आतंकवाद के प्रति नरम रवैया अपनाते थे। उन्होंने कहा, "आज हमारे सशस्त्र बलों को पूरी स्वतंत्रता है। यदि कोई आतंकवादी हमला होता है तो आतंकवादियों को खत्म कर दिया जाता है। यदि उन्हें खत्म करने के लिए सीमा पार करना आवश्यक है तो यह भी किया जाना चाहिए।" अर्थव्यवस्था को लेकर सिंह ने कहा कि भारत फिलहाल विश्व की सबसे तेजी से प्रगति कर रही अर्थव्यवस्था वाला देश है और यह एक प्रमुख विनिर्माण स्थल के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, "आईफोन का विनिर्माण भारत में किया जा रहा है और पूरे विश्व को इसकी आपूर्ति की जा रही है। वर्ष 2014 से पहले निराश और हताश रहा भारत अब उम्मीद, ऊर्जा, विश्वास और संकल्प से परिपूर्ण है।" सिंह ने कहा, "इस बदलाव के पीछे का कारण लोगों का विश्वास और इस सरकार का सही इरादा एवं नीतियां हैं।"
महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि महान शासक की बहादुरी और बलिदान किसी सरकार या इतिहासकार की मंजूरी की मोहताज नहीं है। सिंह ने कहा, "अकबर चला गया, मुगल चले गए और यहां तक कि उनके वंशज भी इतिहास के पन्नों में खो गए। लेकिन महाराणा प्रताप हर भारतीय के दिल में बसे हुए हैं।" महाराणा प्रताप को सिर्फ एक राजा से कहीं बढ़कर बताते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने एक ऐसे भारत का प्रतिनिधित्व किया जो आत्म सम्मान और मूल्यों से कभी समझौता नहीं करता। सिंह ने कहा कि उन्होंने हर मुश्किल का सामना किया, लेकिन मुगलों के सामने कभी नहीं झुके।
रक्षा मंत्री ने कहा कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने हल्दीघाटी की पीली मिट्टी को दुश्मनों के खून से लाल कर दिया। सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन यह शिक्षा देता है कि राष्ट्र और इसके लोगों की गरिमा से अधिक महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, "इसी विचार के मार्गदर्शन पर हमने भारत का गौरव बढ़ाने और प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए पिछले 12 वर्षों से काम कर रहे हैं।" आंतरिक सुरक्षा के संदर्भ में सिंह ने कहा कि एक दशक पूर्व कोई कल्पना भी कर सकता था कि भारत नक्सली हिंसा से मुक्ति की दिशा में बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलियों ने निर्दोष लोगों और सुरक्षा कर्मियों का खून बहाया और हिंसा की वजह से उद्योग स्थापित नहीं हुए, सड़कों का निर्माण नहीं किया जा सका और स्कूल नहीं चल सके। -
सोलापुर (महाराष्ट्र). सोलापुर जिले की मालशिरस तहसील में रविवार को एक पिकअप वैन सड़क किनारे बने कुएं में गिर गई, जिससे चार बच्चों समेत आठ लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हुए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह घटना तंदुलवाड़ी गांव के निकट हुई और वाहन में 15 लोग सवार थे।
सोलापुर के पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी ने बताया, ''शुरुआती जानकारी के मुताबिक 15 लोगों को ले जा रही एक पिकअप वैन का चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा, और वाहन सड़क किनारे बने एक कुएं में गिर गया। इस हादसे में चार महिलाओं और चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग घायल हुए हैं।'' उन्होंने बताया कि वाहन को कुएं से बाहर निकाला जा रहा है और घायलों को अस्पताल ले जाया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुर्घटना में हुई मौतों पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। फडणवीस ने बताया कि सात लोगों को बचाया गया है और अभी उनका इलाज जारी है।
उन्होंने कहा कि सोलापुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक तुरंत दुर्घटनास्थल पर पहुंच गए थे और राज्य सरकार हालात पर नजर रखने के लिए स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में है। - पणजी. गोवा सरकार द्वारा नियुक्त जीवनरक्षक एजेंसी ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से मानसून के दौरान समुद्र में न जाने की अपील की। एजेंसी ने कहा कि इस मौसम में स्थिति कभी भी अचानक बदल सकती है और हालात खतरनाक हो सकते हैं। 'दृष्टि मरीन' जीवनरक्षक एजेंसी ने शुक्रवार को जारी एक परामर्श में कहा कि मानसून के दौरान समुद्र में तैराकी और तटीय जल क्रीड़ा गतिविधियों पर रोक है। पर्यटकों की सहायता और आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए राज्य के 54 समुद्र तटों पर 450 से अधिक प्रशिक्षित जीवन रक्षकों और बीच मार्शल तैनात किए गए हैं।इनमें दक्षिण गोवा के 30 और उत्तर गोवा के 24 समुद्र तट शामिल हैं।बयान में बताया गया कि समुद्र तटों के अलावा मायेम झील, दूधसागर जलप्रपात, सवरी जलप्रपात और म्होवाचो गुनो में भी जीवन रक्षक तैनात किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, लोगों को पानी में उतरने से रोकने और खतरे के प्रति आगाह करने के लिए गोवा के विभिन्न समुद्र तटों पर लाल झंडे लगाए गए हैं। 'दृष्टि मरीन' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नवीन अवस्थी ने बताया, "मानसून के दौरान समुद्र एक पल शांत दिखाई दे सकता है और अगले ही पल खतरनाक हो सकता है। तेज धाराएं, ऊंची लहरें और तेजी से बदलता मौसम सामान्य से दिखते पानी को भी असुरक्षित बना देता है।" उन्होंने कहा कि सबसे सुरक्षित विकल्प यही है कि लोग पानी में जाने से बचें और समुद्र तटों पर जारी सभी सुरक्षा सलाहों का पालन करें।
- लातेहार/गोड्डा. झारखंड के लातेहार और गोड्डा जिलों में शनिवार को हुई दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। लातेहार में सदर थाना क्षेत्र के खुटगढ़ी गांव के पास एक मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहन की आमने-सामने की भिड़ंत में दो भाइयों की मौके पर ही मौत हो गई। सदर थाना प्रभारी प्रमोद कुमार ने कहा, ''मृतकों की पहचान चंदवा थाना क्षेत्र के मूर्तिया गांव निवासी बीरेंद्र लोहरा और सुरेंद्र लोहरा के रूप में हुई है। दोनों मोटरसाइकिल से लातेहार शहर जा रहे थे, जबकि कार विपरीत दिशा से आ रही थी। प्रारंभिक तौर पर दुर्घटना तेज रफ्तार के कारण होने की आशंका है।मोटरसाइकिल सवारों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था।'' उन्होंने बताया कि दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। चारपहिया वाहन घटनास्थल पर लावारिस अवस्था में मिला और उसके चालक की तलाश के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। दोनों वाहनों को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। एक अन्य दुर्घटना में गोड्डा जिले के महागामा थाना क्षेत्र स्थित बसुआ चौक के पास सुबह की सैर पर निकले 55 वर्षीय एक व्यक्ति को पीछे से आ रही एक पिकअप वैन ने कुचल दिया। महागामा थाना प्रभारी मनोज कुमार पाल ने बताया, ''मृतक की पहचान उसी क्षेत्र की रविदास कॉलोनी के निवासी अर्जुन रविदास के रूप में हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।'' उन्होंने कहा, ''दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पिकअप वैन को जब्त कर लिया गया है और चालक की गिरफ्तारी के लिए तलाश अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।''















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