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- नयी दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शिक्षित और सशक्त महिलाएं एक समृद्ध और प्रगतिशील राष्ट्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। शनिवार को जारी एक संदेश में राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि महिलाएं हमारे समाज और राष्ट्र की नींव हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं ने शिक्षा, विज्ञान, खेल, कला और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का प्रदर्शन किया है। शिक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त महिलाओं के एक समृद्ध और प्रगतिशील राष्ट्र में महत्वपूर्ण योगदान देने का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि युवा महिलाएं एक नए भारत के सपनों को आकार दे रही हैं, और उन्हें उचित अवसरों, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने कहा, "आइए हम सब मिलकर एक ऐसे समाज की दिशा में काम करें जहां महिलाओं को समान अवसर मिलें और वे अपनी क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ सकें और सफलता प्राप्त कर सकें।" मुर्मू ने महिला दिवस के सफल आयोजन और सभी महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
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नई दिल्ली। जन औषधि दिवस 2026 के अवसर पर आज शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल यह सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दिखाती है कि हर नागरिक को सस्ती कीमतों पर अच्छी दवाइयां मिलें।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “जन औषधि दिवस 2026 के अवसर पर, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना से लाभान्वित होने वाले सभी लोगों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। यह पहल गुणवत्तापूर्ण दवाओं को किफायती दामों पर उपलब्ध कराने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जन औषधि केंद्रों के माध्यम से अनगिनत परिवार स्वास्थ्य देखभाल खर्चों में बचत कर रहे हैं और उचित उपचार प्राप्त कर रहे हैं।”इसके साथ ही, पीएम मोदी ने ‘भारतीय जन औषधि योजना’ के परिवर्तनकारी प्रभाव की एक झलक भी शेयर की। ‘माईगव इंडिया’ ने लिखा है, “हेल्थकेयर सिस्टम तब सबसे मजबूत होते हैं जब वे आसानी से मिलने वाले और सबको साथ लेकर चलने वाले हों।”पोस्ट में आगे लिखा गया है, “जन औषधि लाखों लोगों की जिंदगी को बेहतर बना रही है, यह सुनिश्चित करके कि जरूरी दवाएं सस्ती और पहुंच में रहें। कस्बों और ग्रामीण जिलों में इसकी बढ़ती मौजूदगी न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूत कर रही है, बल्कि स्थानीय उद्यमियों और समुदायों को भी मजबूत बना रही है।”‘माईगव इंडिया’ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया गया, “सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों के जरिए जन औषधि केंद्र करोड़ों गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को बड़ी राहत दे रहे हैं। देशभर में हजारों केंद्रों के माध्यम से आम नागरिकों को 50–80 प्रतिशत तक सस्ती दवाइयां मिल रही हैं।”‘माईगव इंडिया’ के अनुसार, जन औषधि केंद्रों से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं लेकर देशवासियों ने अब तक 40,000 करोड़ रुपए से अधिक की बचत की है। हर दिन 15 लाख से अधिक लोग जन औषधि केंद्रों से गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाइयां खरीदकर इस पहल पर अपना भरोसा जता रहे हैं। केवल 12 वर्षों में जन औषधि केंद्रों का नेटवर्क 80 से बढ़कर 18,000 तक पहुंच गया है।इसके अलावा, जन औषधि केंद्रों की बिक्री 7.29 करोड़ रुपए (2014) से बढ़कर 2,000 करोड़ रुपए से अधिक पहुंची है, जो कि किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं पर देशवासियों के भरोसे को दर्शाती है। वहीं, जन औषधि केंद्रों पर 2,110 से अधिक दवाइयां, 315 सर्जिकल उत्पाद और 29 उपचार श्रेणियों की जरूरी दवाएं उपलब्ध, ताकि हर नागरिक को एक ही जगह सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। जन औषधि केंद्रों पर मात्र 1 रुपए प्रति पैड की दर से उपलब्ध सैनेटरी पैड्स की 100 करोड़ से अधिक बिक्री देशभर में महिलाओं की स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मान को सशक्त बना रही है।‘माईगव इंडिया’ के ‘एक्स’ पोस्ट में बताया गया कि महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त बनाते हुए पिछले तीन वित्तीय वर्षों में खुले नए जन औषधि केंद्रों में लगभग 60 प्रतिशत केंद्र महिलाओं की ओर से संचालित हैं। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को उत्तराखंड सरकार के 4 साल पूरे होने पर हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने लगभग 10 हजार से अधिक अतिक्रमण उखाड़कर फेंक दिए हैं। यह सिर्फ अतिक्रमण की बात नहीं है। मैं प्रदेशवासियों से कहना चाहता हूं कि पूरे देश में जहां-जहां घुसपैठिए हैं, केदारनाथ धाम से लेकर कन्याकुमारी तक, एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुनकर हम भारत के बाहर निकालने का काम करेंगे।”
इस दौरान शाह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची से कटना चाहिए। भाजपा चुनाव आयोग की प्रक्रिया का पूरा समर्थन कर रही है, क्योंकि जिस देश में लोकतंत्र को संभालने वाली इकाई, यानी मतदाता सूची शुद्ध न हो, उस देश का लोकतंत्र कभी सलामत नहीं रह सकता है। राहुल गांधी को जितना विरोध करना है, उतना कर लें। वे एसआईआर का भी विरोध करते हैं। उन्हें हर चीज में नकारात्मकता दिखाई देती है।”धामी सरकार के 4 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा, “आज पुष्कर सिंह धामी सरकार के 4 साल पूरे होने का अवसर है, लेकिन इसके साथ ही आज भाजपा सरकार के 9 साल पूरे होने का भी मौका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड आए थे। यहां राज्य के 25 साल पूरे होने का महोत्सव शुरू करके गए। मैं कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड की जनता को बताना चाहता हूं कि एक जमाना था जब उत्तराखंड की भूमि अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थी। उत्तराखंड की संस्कृति बचाने के लिए यहां के युवा मैदान में उतरे थे। उस समय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सहन न करने वाला दमन हमारे युवाओं पर किया था।”अमित शाह ने कहा, “अनेक युवाओं को गोली लगी। उन्होंने बलिदान दिया। रामपुर तिराहा की घटना आज भी उत्तराखंड वासी भूले नहीं हैं। उस वक्त भाजपा के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखंड की रचना की थी। कांग्रेस के शो कॉल्ड विद्वान कर रहे थे कि छोटे राज्य कैसे टिकेंगे और अर्थव्यवस्थाएं कैसे चलेंगी। अटल जी ने 3 छोटे राज्य बनाए थे जिनमें उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड शामिल हैं। ये तीनों राज्यों विकास के रास्ते पर आगे बढ़ गए हैं। जब हमारी सरकार के 9 साल पूरे हो रहे हैं।”कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब पहले कार्यक्रम में मैंने हिस्सा लिया था। तब मैंने कहा था कि ‘अटल जी ने बनाया है, पीएम नरेंद्र मोदी संवारने का काम करेंगे। ये 9 साल उत्तराखंड के विकास के थे। पिछले 4 साल के अंदर पुष्कर सिंह धामी ने एक-एक समस्या को चुन-चुनकर समाप्त करने का संकल्प लिया है। इसके कारण उत्तराखंड विकास के रास्ते पर तेज गति से आगे बढ़ रहा है।”उन्होंने यह भी कहा कि आज 1132 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन हो रहा है। यहां पर नई न्याय संहिताओं की प्रदर्शनी का भी उद्घाटन हो रहा है। राज्य के वकील मित्रों को आग्रह है कि वे ये प्रदर्शनी जरूर देखें। पीएम मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों की ओर से बनाए गए 150 साल पुराने कानून समाप्त करके नागरिकों की सुरक्षा के लिए न्याय संहिताएं बनाई गई हैं।अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों को 2028 में पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। उसके बाद कोई भी नागरिक पुलिस थाने में जाकर एफआईआर कराएगा तो तीन साल में सुप्रीम कोर्ट तक पूरी न्याय प्रणाली समाप्त हो जाएगी। अब समय पर न्याय मिलेगा। ये दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय संहिताएं हैं। इसी बीच, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2026 में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। 2027 का उद्घाटन उत्तराखंड की जनता को करना है। यहां फिर से पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनानी है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के शिलान्यास समारोह को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ सहित पूरे हड़ौती क्षेत्र के लिए एक नई आशा और नई उपलब्धि का दिन है।
पीएम मोदी ने कहा कि करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने जा रहा ये आधुनिक एयरपोर्ट आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति देने वाला है। मैं कोटा और पूरे हड़ौती क्षेत्र के लोगों को एयरपोर्ट के शिलान्यास के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अपनी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मुझे याद है कि नवंबर 2023 में जब मैं कोटा आया था, तब मैंने जनता से एक वादा किया था। मैंने कहा था कि कोटा का एयरपोर्ट सिर्फ एक सपना बनकर नहीं रहेगा, बल्कि उसे साकार करके दिखाया जाएगा। आज मुझे प्रसन्नता है कि वो क्षण आ गया है, जब कोटा एयरपोर्ट के निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। अब तक कोटा के लोगों को जयपुर या जोधपुर जाकर फ्लाइट पकड़नी पड़ती थी। इसमें काफी समय भी लगता था और असुविधा भी होती थी। अब ये स्थिति बदलने जा रही है। जब ये एयरपोर्ट शुरू होगा, तो कोटा समेत आसपास के पूरे इलाके में यात्रा भी आसान होगी और व्यापार भी तेजी से बढ़ेगा।”पीएम मोदी ने कहा कि कोटा केवल शिक्षा का ही नहीं, बल्कि ऊर्जा का भी एक बड़ा केंद्र है। कोटा वह अनूठा क्षेत्र है, जहां न्यूक्लियर हो, कोयला आधारित हो, गैस और पानी हो, ऊर्जा के सभी स्रोतों से बिजली का उत्पादन होता है। कोटा और हाड़ौती की ये धरती उद्यम और आस्था का भी बड़ा केंद्र है। सदियों से देश दुनिया के श्रद्धालु यहां श्री मथुराधीश जी की पावन पीठ, केशवराय पाटन के तीर्थ, खड़े गणेश जी महाराज और गोदावरी बालाजी धाम के दर्शन के लिए आते रहते हैं।पीएम मोदी ने कहा कि कोटा आज कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कोटा के दोनों प्रमुख रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, जो कोटा और बून्दी से होकर गुजर रहा है, पूरे क्षेत्र के विकास का नया द्वार खोल रहा है।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अब दिल्ली, वड़ोदरा और मुंबई जैसे बड़े शहरों की दूरी महज कुछ घंटों की रह गई है। बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी के कारण यहां नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं। विशेष रूप से कृषि आधारित उद्योग के लिए ये क्षेत्र एक बड़ा केंद्र बनेगा। रेल और सड़क के बाद हवाई कनेक्टिविटी के ये नया अध्याय कोटा के विकास को और गति देगा। कोटा एयरपोर्ट पूरे हाड़ौती क्षेत्र और आसपास के जिलों के लिए प्रगति के नए अवसर लेकर आएगा। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज शनिवार को दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुईं। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह संथाल समुदाय के लिए गर्व की बात है कि हमारे पूर्वज तिलका मांझी ने करीब 240 साल पहले शोषण के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया था। उनके बगावत के करीब 60 साल बाद, बहादुर सिदो-कान्हू और चांद-भैरव ने बहादुर फूलो-झानो के साथ मिलकर 1855 में संथाल हुल का नेतृत्व किया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि साल 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उस साल, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। पिछले साल, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर, संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था।राष्ट्रपति ने कहा कि 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मू ने ओल चिकी स्क्रिप्ट बनाई थी। हाल ही में, हमने इस इन्वेंशन की 100वीं सालगिरह मनाई है। उनके योगदान ने संथाल भाषा बोलने वालों को अपनी बात कहने का एक नया मौका दिया। उन्होंने “बिदु चंदन,” “खेरवाल वीर,” “दलेगे धन,” और “सिदो कान्हू – संताल हुल” जैसे नाटक भी लिखे। इस तरह, उन्होंने संथाल समुदाय में साहित्य और सामाजिक चेतना की रोशनी फैलाई। उन्होंने कहा कि संथाल समुदाय के लोगों को दूसरी भाषाएं और स्क्रिप्ट पढ़नी चाहिए, लेकिन अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहिए।राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदायों ने सदियों से अपने लोक संगीत, नृत्य और परंपराओं को बचाकर रखा है। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रकृति संरक्षण का सबक आने वाली पीढ़ियों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लोक परंपराओं और पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ, हमारे आदिवासी समुदायों को आधुनिक विकास को अपनाना चाहिए और तरक्की की यात्रा पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि संथाल समुदाय समेत आदिवासी समुदायों के लोग तरक्की और प्रकृति के बीच तालमेल की मिसाल कायम करेंगे।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तीकरण पर ध्यान देना ज़रूरी है। आदिवासी युवाओं को शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के जरिए आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन इन सभी कोशिशों में उन्हें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में एकता और भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लेना चाहिए। इससे हमें एक सशक्त समाज और एक मजबूत भारत बनाने में मदद मिलेगी। -
नई दिल्ली। एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के टोल प्लाजा पर 5,100 से अधिक महिला कर्मचारियों को तैनात किया है। टोल संचालन में महिलाओं के सशक्तिकरण और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे नेटवर्क पर 1,140 से अधिक टोल प्लाजा पर टोल बूथों के प्रबंधन के लिए दिन की पाली (डे शिफ्ट) के दौरान 5,100 से अधिक महिला कर्मचारियों को तैनात किया है।
अग्रिम पंक्ति की परिचालन भूमिकाओं में विशेष रूप से महिला कर्मचारियों को तैनात करने का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के अनुभव को महत्वपूर्ण रूप से बेहतर बनाना है। इसका लक्ष्य एक कुशल, सहानुभूतिपूर्ण और उपयोगकर्ता के अनुकूल वातावरण तैयार करना है, साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर विवादों की संभावना को कम करना है ।यह निर्णय विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श और चर्चा के बाद लिया गया है। इसमें टोल प्लाजा संचालक तथा प्रमुख उद्योग संगठनों जैसे नेशनल हाइवेज बिल्डर फेडरेशन (एनएचबीएफ), हाइवे ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचओएआई) और ऑल इंडिया यूजर फी कॉन्ट्रैक्टर्स फेडरेशन (एआईयूसीएफ) शामिल थे। सभी टोल संचालकों ने टोल प्लाजा पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह के लिए दिन की पाली में महिला कर्मचारियों की तैनाती पर सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की है। अब तक 5,100 से अधिक महिला टोल कर्मचारी तैनात की जा चुकी हैं और निकट भविष्य में और भी महिलाओं के जुड़ने की संभावना है।एनएचएआई इस पहल के क्रियान्वयन की करीबी निगरानी करेगा, ताकि इसका सही अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना क्षेत्र में उनकी भागीदारी को मजबूत करेगी। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।इस पहल के तहत एनएचएआई तैनात महिला कर्मचारियों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण की सुविधा भी प्रदान करेगा। प्रशिक्षण राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के साथ विनम्र व्यवहार, आपातकालीन स्थितियों को संभालने, बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल और कुशल टोल प्लाजा संचालन बनाए रखने जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। यह संरचित क्षमता-निर्माण प्रयास एक सुरक्षित और और पेशेवर कार्य वातावरण सुनिश्चित करते हुए सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा।अग्रिम पंक्ति की परिचालन भूमिकाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करके एनएएचआई का लक्ष्य लैंगिक समावेशिता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है, साथ ही देशभर में राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर सेवा वितरण में सुधार करना है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 9 मार्च को बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित करेंगे, जिसका विषय होगा “सबका साथ, सबका विकास–जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति: शिक्षा, कौशल और विश्वविद्यालय टाउनशिप”। वेबिनार में भारत की शिक्षा, कौशल और एवीजीसी–क्रिएटर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 की पहलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी), उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित प्रमुख पहलों पर विचार-विमर्श करने के लिए वेबिनार में भाग लेगा। इस वेबिनार में नीति निर्माता, उद्योगपति, शिक्षाविद, स्टार्टअप और छात्र भारत के शिक्षा, कौशल और रचनात्मक अर्थव्यवस्था तंत्र को मजबूत करने के लिए कार्यान्वयन के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक साथ आएंगे।उद्घाटन सत्र में माननीय पीएम 9 मार्च को सुबह 11:30 बजे उपस्थित रहेंगे, जहां वे एवीजीसी-क्रिएटर अर्थव्यवस्था के लिए बजटीय पहल के पीछे की परिकल्पना को रेखांकित करते हुए एक विशेष संबोधन देंगे, जहां रचनात्मकता, संस्कृति और प्रौद्योगिकी विकास, रोजगार और सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने के लिए एक साथ काम करते हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स पर ब्रेकआउट सत्र दोपहर 12:20 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक आयोजित किया जाएगा।वेबिनार के तहत, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय “स्कूलों और कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स” विषय पर एक ब्रेकआउट सत्र आयोजित करेगा। यह सत्र केंद्रीय बजट में घोषित 15,000 स्कूलों और 500 उच्च शिक्षण संस्थानों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स (सीसीएल) की स्थापना के कार्यान्वयन पर केंद्रित होगा, जिसका मकसद रचनात्मक प्रतिभाओं को बढ़ावा देना, भारत के एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) तंत्र को मजबूत करना और देश की तेजी से बढ़ती ऑरेंज इकोनॉमी के लिए कुशल रचनाकारों की एक सशक्त श्रृंखला तैयार करना है।दोपहर 12:20 बजे से दोपहर 1:50 बजे तक चलने वाले “स्कूलों और कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स” विषय पर ब्रेकआउट सत्र का संचालन व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री चैतन्य चिंचलिकर करेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्य भाषण देंगे।इसके बाद सत्र में सरकार और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ एक पैनल चर्चा होगी, जिसमें श्री धीरज साहू, अतिरिक्त सचिव (विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग), डॉ. आशीष कुलकर्णी (अध्यक्ष, फिक्की एवीजीसी फोरम), श्री राजन नवानी (संस्थापक एवं समूह सीईओ, जेटसिंथेसिस), और सुश्री सोनम भगत (सीईओ, व्याग्र) के साथ-साथ आईआईसीटी के एक छात्र प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस चर्चा को उद्योग जगत की प्रमुख हस्तियों जैसे श्री मुंजल श्रॉफ (ग्राफिटी मल्टीमीडिया), श्री बीरेन घोष (टेक्नीकलर ग्रुप), श्री मनवेंद्र शुक्ल (लक्ष्य डिजिटल), सुश्री माला शर्मा (एडोबी इंडिया), सुश्री प्रीति व्यास (अमर चित्र कथा) और मायभारत के दो युवा स्वयंसेवकों के विचारों से और समृद्ध बनाया जाएगा। -
नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है। यूपीएससी द्वारा घोषित परिणाम के अनुसार, इस वर्ष सिविल सेवा परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने टॉप किया है। वहीं, दूसरे स्थान पर राजेश्वरी सुवे एम रही हैं और तीसरे स्थान पर अकांश ढुल रहे हैं। यह परिणाम अगस्त 2025 में आयोजित लिखित परीक्षा और दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच हुए व्यक्तित्व परीक्षण यानी साक्षात्कार के आधार पर घोषित किया गया है।
आयोग की ओर से जारी मेरिट सूची के अनुसार, कुल 958 उम्मीदवारों को विभिन्न अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया गया है। यूपीएससी की सिविल सर्विसेज में चौथे स्थान पर राघव झुनझुनवाला, पांचवें स्थान पर ईशान भटनागर और छठे स्थान पर जिनिया अरोड़ा ने जगह बनाई है। सातवें स्थान पर एआर राजा मोहिदीन, आठवें स्थान पर पक्शल सेक्रेटरी, नौवें स्थान पर आस्था जैन और दसवें स्थान पर उज्जवल प्रियंक हैं।इस तरह शीर्ष 10 में अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमियों से आने वाले प्रतिभाशाली उम्मीदवारों ने अपनी जगह बनाई है। आयोग के अनुसार, इस बार कुल 958 उम्मीदवारों को नियुक्ति के लिए चुना गया है। इनमें सामान्य वर्ग के 317, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, यानी ईडब्ल्यूएस, के 104, अन्य पिछड़ा वर्ग के 306, अनुसूचित जाति के 158 और अनुसूचित जनजाति के 73 उम्मीदवार शामिल हैं। इसके साथ ही, दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों को भी अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया गया है। कुल मिलाकर, इन विभिन्न श्रेणियों में कई दिव्यांग उम्मीदवार भी सिविल सेवाओं के लिए चयनित हुए हैं।सरकार द्वारा आयोग को कुल 1087 पदों की जानकारी दी गई थी, जिन पर नियुक्ति की जानी है। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस के 180 पद, भारतीय विदेश सेवा के 55 पद और भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के 150 पद शामिल हैं। इसके अलावा सिविल सर्विस के माध्यम से विभिन्न केंद्रीय सेवाओं (केंद्र सरकार) के विभागों में ग्रुप ‘ए’ के 507 पद और समूह ‘बी’ सेवाओं के 195 पद भी भरे जाएंगे। इन पदों पर अंतिम नियुक्ति उपलब्ध रिक्तियों और नियमों के अनुसार की जाएगी।आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन उम्मीदवारों को चयनित किया गया है, उनके आरक्षण से जुड़े दावों की जांच संबंधित प्राधिकरणों द्वारा की जाएगी। इसके अलावा 348 चयनित उम्मीदवारों की उम्मीदवारी फिलहाल अस्थायी रूप से रखी गई है, जबकि दो उम्मीदवारों का परिणाम अभी रोका गया है।परीक्षा से संबंधित किसी भी जानकारी या स्पष्टीकरण के लिए आयोग ने अपने परिसर में सुविधा काउंटर भी उपलब्ध कराया है। यहां सभी कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उम्मीदवार जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, और इसके माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, सहित कई महत्वपूर्ण केंद्रीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। -
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने बड़ा फैसला किया है। मंदिर प्रबंधन ने घोषणा की है कि इस दिन महिलाओं को निशुल्क दर्शन की विशेष व्यवस्था की जाएगी। चाहे वे काशी की निवासी हों या देश-विदेश से आईं श्रद्धालु, सभी मातृशक्ति को बिना टिकट के भगवान विश्वनाथ के दर्शन का अवसर मिलेगा।
वाराणसी आने वाली महिलाएं इस दिन भगवान बाबा विश्वनाथ के दर्शन आसानी से कर सकेंगी और मंदिर की इस विशेष व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगी। यह पहल न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि समाज में महिलाओं की गरिमा और सम्मान को बढ़ावा देने का भी संदेश देती है।मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि 8 मार्च को द्वार संख्या 4-बी से महिलाओं को सीधा प्रवेश दिया जाएगा। विशेष रूप से गोद में बच्चों को लेकर आने वाली महिलाओं को प्राथमिकता से दर्शन कराए जाएंगे। इस व्यवस्था से महिलाओं को लंबी कतारों और टिकट की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। सुबह 4 बजे से 5 बजे तक और शाम 4 बजे से 5 बजे तक का समय पहले से ही काशीवासियों के लिए आरक्षित रहता है, इसलिए इस दौरान काशी निवासियों की विशेष व्यवस्था यथावत रहेगी। शेष पूरे दिन महिलाओं के लिए यह निशुल्क और विशेष प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी।श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने इस फैसले के माध्यम से मातृशक्ति का सम्मान किया है। विश्वभूषण मिश्रा ने कहा, भगवान विश्वनाथ मातृशक्ति का आशीर्वाद संपूर्ण मानवता पर, संपूर्ण आराधकों पर बनाए रखें। हम सभी मातृशक्ति की सुख-समृद्धि, सनातन धर्मावलंबियों और भगवान विश्वनाथ के समस्त श्रद्धालुओं के कल्याण की कामना करते हैं। हर हर महादेव।मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस दिन शांति और व्यवस्था बनाए रखें, ताकि सभी महिलाएं सुगमता से दर्शन कर सकें। वाराणसी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक है। इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख माना जाता है। गंगा तट पर अवस्थित यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में भव्य कॉरिडोर, निशुल्क दर्शन और विशेष पूजा व्यवस्था है। बाबा के दर्शन को प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। -
नई दिल्ली। आज के समय में आधुनिक तरीके से लड़े जाने वाले युद्धों में वन-वे अटैक ड्रोन एक खासियत बनकर उभर रहे हैं। ऐसे में जानी-मानी डिफेंस टेक्नॉलजी कंपनी आईजी डिफेंस ने दावा किया है कि उसने भारत में लंबी दूरी तक निशाना लगाने में सक्षम ड्रोन बनाया है, जो 1,000 किलोमीटर तक विस्फोटक ले जा सकता है।
‘प्रोजेक्ट काल’ के तहत विकसित किए जा रहे अपनी तरह के इस अनोखे ड्रोन की तुलना ईरानी शाहेद-क्लास स्वार्म ड्रोन सहित आधुनिक ड्रोन सिस्टम से की जा सकती है। ओडिशा में स्थापित और नई दिल्ली में मुख्यालय वाली इस कंपनी ने हाल में उन्नत ड्रोन की पहली झलक को पेश किया। इस तरह के अगली पीढ़ी के ड्रोन का निर्माण इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि शाहेद-136 जैसे प्लेटफॉर्म ने खासकर एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव के बीच अपेक्षाकृत कम लागत पर लंबी दूरी तक विस्फोटक ले जाने की अपनी काबिलियत की वजह से दुनिया का ध्यान खींचा है।आईजी डिफेंस के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी बोधिसत्त्व संघप्रिय ने कहा कि लंबी दूरी के मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम तेजी से आधुनिक संघर्षों के आकार को दुनिया भर में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘प्रोजेक्ट काल के साथ, हमने लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले ड्रोन की इस उभरती श्रेणी में स्वदेशी सिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। आगामी ड्रोन सिस्टम विकास के अपने पहले चरण में है और इसे जल्द ही पेश किया जाएगा।’ शाहेड श्रेणी के ड्रोन को काफी सस्ती कीमत पर बनाया जा सकता है और बड़ी संख्या में तैनात किया जा सकता है, जिससे एयर डिफेंस सिस्टम पर भारी असर पड़ेगा और दुश्मनों को कहीं ज्यादा महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ेगा। -
नई दिल्ली। यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी है। उन्होंने उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की मेहनत, समर्पण और धैर्य की सराहना की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, “सिविल सेवा परीक्षा 2025 को सफलतापूर्वक पास करने वाले सभी लोगों को बधाई। उनकी लगन, और कड़ी मेहनत ने उन्हें यह बड़ा मुकाम दिलाया है। देश की सेवा करने और लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के सफर पर उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”
एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने उन अभ्यर्थियों को हौसला दिया, जिन्हें परीक्षा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण निश्चित रूप से कठिन हो सकते हैं, लेकिन यह जीवन की बड़ी यात्रा का केवल एक पड़ाव है। पीएम ने पोस्ट में लिखा, “जिन लोगों को सिविल सर्विस एग्जाम में मनचाहा रिजल्ट नहीं मिला, मैं समझता हूं कि ऐसे पल मुश्किल हो सकते हैं, हालांकि यह एक बड़े सफर का सिर्फ एक कदम है। आगे कई मौके हैं। आने वाले एग्जाम में और उन कई तरीकों से जिनसे आप हमारे देश में योगदान दे सकते हैं। आगे के सफर के लिए मेरी शुभकामनाएं।”यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन हर साल यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन कराता है। इसका मकसद भारत की हायर सिविल सर्विसेज के लिए ऑफिसर्स की भर्ती करना है। इसमें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस), इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) और इंडियन फॉरेन सर्विस (आईएफएस) के साथ-साथ केंद्र सरकार की कई दूसरी ग्रुप ए और ग्रुप बी सर्विसेज शामिल हैं। सिलेक्शन प्रोसेस में एक शुरुआती एग्जाम, मेन लिखित एग्जाम और एक पर्सनैलिटी टेस्ट शामिल है। इस साल, अनुज अग्निहोत्री ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की। राजेश्वरी सुवे एम ने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल की। वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी कॉम ग्रेजुएट आकांश ढुल ने तीसरी रैंक हासिल की। -
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कतर की राजधानी दोहा में स्थित भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने जारी पत्र में कहा, “वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए कतर में रहने वाले सभी भारतीयों से अनुरोध है कि वे कतर के अधिकारियों, विशेष रूप से गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
मंत्रालय ने कतर में मौजूद सभी भारतीयों को सुरक्षित स्थानों पर रहने, अत्यंत आवश्यक होने पर ही निकलने और खिड़कियों और खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है। दूतावास कतर के अधिकारियों की सलाह को अपने सोशल मीडिया चैनलों, फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से भी साझा कर रहा है।दूतावास ने कहा है, “कतर का हवाई क्षेत्र फिलहाल बंद है और उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित हैं। कतर एयरवेज 7 मार्च को सुबह 9 बजे (दोहा समय) नवीनतम जानकारी जारी करेगी। सभी यात्रियों से अनुरोध है कि वे अपनी-अपनी एयरलाइन से संपर्क में रहें।” कतर के आंतरिक मंत्रालय ने सभी श्रेणियों के प्रवेश वीजा, जो समाप्त हो चुके हैं या समाप्त होने वाले हैं, उनकी वैधता एक महीने के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। स्थिति के अनुसार इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। यह वैधता 28 फरवरी, 2026 से प्रभावी होगी।आपातकालीन स्थिति में कतर से सलवा भूमि सीमा चौकी के माध्यम से सऊदी अरब जाने का विकल्प वर्तमान में खुला है। अमेरिकी, ब्रिटिश या शेंगेन वीजा धारक भारतीय नागरिक (जिनका कम से कम एक बार उपयोग किया जा चुका हो) सऊदी अरब में आगमन पर वीजा प्राप्त कर सकते हैं। सऊदी अरब के रास्ते यात्रा करने के इच्छुक अन्य भारतीय नागरिक निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार सऊदी वीज़ा के लिए आवेदन कर सकते हैं।दोहा स्थित भारतीय दूतावास, सऊदी अरब के लिए अस्थायी ट्रांजिट वीजा प्राप्त करने में सुविधा प्रदान करने के लिए एक पंजीकरण लिंक खोल रहा है। यह सुविधा केवल उन भारतीय नागरिकों के लिए है, जो वर्तमान में कतर में ट्रांजिट के दौरान फंसे हुए हैं, बशर्ते उनके पास सऊदी अरब से बाहर जाने के लिए पुष्ट टिकट हों। पंजीकरण के समय कृपया कतर आने वाली फ्लाइट टिकट और सऊदी अरब से बाहर जाने वाली टिकट की प्रतियां जमा करें। सलवा सीमा चौकी तक और उसके आगे प्रस्थान हवाई अड्डे तक की यात्रा से संबंधित अन्य सभी व्यवस्थाएं प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं करनी होंगी।कृपया ध्यान दें कि दूतावास को यह सुविधा प्रदान करने के लिए पर्याप्त समय (कम से कम 48 घंटे) की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, भारतीय दूतावास के हेल्पलाइन नंबर +974 55647502 या +97455362508 पर संपर्क कर सकते हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण ऑर्गेनिक और केमिकल-फ्री खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और भारत को इस अवसर का लाभ उठाते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादों को निर्यात उन्मुख बनाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने “कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक डाइट, ऑर्गेनिक फूड और समग्र स्वास्थ्य देखभाल के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। ऐसे में भारत के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती और केमिकल-फ्री उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचने का एक “हाईवे” बन सकते हैं।उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए प्रमाणन, प्रयोगशालाओं और आवश्यक ढांचे के विकास पर विचार कर रही है, लेकिन इस दिशा में सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने से किसानों के लिए जोखिम बढ़ जाता है और आय के विकल्प सीमित हो जाते हैं। इसी कारण सरकार फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दे रही है। खाने के तेल और दालों के लिए राष्ट्रीय मिशन तथा प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय मिशन जैसे प्रयास कृषि क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।पीएम मोदी ने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ है। इसी सोच के साथ सरकार ने पिछले वर्षों में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करीब 10 करोड़ किसानों को चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जिससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिली है।उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सुधार के कारण किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है। संस्थागत ऋण की पहुंच 75 प्रतिशत से अधिक किसानों तक हो चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटारा किया गया है। इन पहलों के कारण किसानों का जोखिम कम हुआ है और कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ा है।आज भारत अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा हैप्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अनाज, दालों और तिलहन का रिकॉर्ड उत्पादन कर रहा है, लेकिन 21वीं सदी के दूसरे चरण में प्रवेश करते हुए कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा भरना आवश्यक है। इस वर्ष के बजट में इसी दिशा में कई नए अवसर प्रदान किए गए हैं, जो उत्पादकता बढ़ाने और कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करने में मदद करेंगे।उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से खुल रहे हैं और दुनिया की मांग में बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारत को अपनी कृषि को निर्यात उन्मुख बनाने पर ध्यान देना होगा। देश के विविध जलवायु क्षेत्रों और समृद्ध एग्रो-क्लाइमेटिक जोन का लाभ उठाकर विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट में उच्च मूल्य वाली कृषि पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी फसलों को क्षेत्रीय आधार पर प्रोत्साहित करने की योजना है।उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों, विशेषकर केरल और तमिलनाडु में बड़ी मात्रा में नारियल का उत्पादन होता है, लेकिन कई स्थानों पर पेड़ पुराने हो चुके हैं और उनकी उत्पादकता कम हो गई है। इसलिए बजट में नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में टेम्पर्ड नट फसलों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव किया गया है। जैसे-जैसे निर्यात उन्मुख उत्पादन बढ़ेगा, वैसे-वैसे प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके लिए सरकार, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग और किसानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि उच्च मूल्य वाली कृषि को सामूहिक प्रयासों से बढ़ावा दिया जाए तो भारत का कृषि क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए गुणवत्ता, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजारों में मजबूत पहचान बन सके।उन्होंने पशुपालन क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का तेजी से उभरता स्तंभ बताते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र को और आगे बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण समृद्धि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्वामित्व योजना जैसी योजनाओं ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता देकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2029 तक तीन करोड़ और “लखपति दीदी” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने राज्यों से भी कृषि क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने और किसानों को नई तकनीकों तथा बाजारों से जोड़ने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। -
नई दिल्ली। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत की ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए बायोगैस सबसे अच्छा विकल्प है।
उन्होंने यह बात पुणे के यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन अकादमी में आयोजित संपीड़ित बायोगैस सम्मेलन 2026 के उद्घाटन के अवसर पर कही।इस सम्मेलन में भारतीय हरित ऊर्जा संघ के अध्यक्ष प्रमोद चौधरी और सांसद डॉ. टी. कृष्ण प्रसाद भी उपस्थित थे। श्री गडकरी ने कहा कि भारत का वार्षिक ईंधन आयात बिल 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।उन्होंने कहा इस निर्भरता को कम करने के लिए संपीड़ित बायोगैस जैसे स्वदेशी और किफायती ईंधन की आवश्यकता है।श्री गडकरी ने बताया कि कृषि अवशेषों, विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर भारत में फसल के अवशेषों को बायोगैस में परिवर्तित करने से पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उद्यमियों से बायोगैस उत्पादन में लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। साथ ही, बायोगैस परियोजनाओं और इस क्षेत्र में नवाचार में निवेश करने का आह्वान भी किया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना जरूरी है। इस साल के बजट में इस दिशा में नए प्रयास हुए हैं और मुझे विश्वास है कि वेबिनार में हुई चर्चा व इससे निकले विचार बजट प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने में मदद करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के बाजार खुल रहे हैं और ग्लोबल डिमांड बदल रही है। इस वेबिनार में अपनी खेती को एक्सपोर्ट ऑरिएंटेड बनाने पर भी ज्यादा से ज्यादा चर्चा जरूरी है। हमारे यहां अलग-अलग तरह का क्लाइमेट है और हमें इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। हमारे यहां एग्रो-क्लाइमेटिक जोन बहुत ज्यादा हैं।उन्होंने कहा कि बजट में हमने हाई वैल्यू एग्रीकल्चर पर फोकस किया है। केरल और तमिलनाडु के किसानों को अधिक फायदे मिलें, यह सुनिश्चित करने के लिए इस बार नारियल पर खास जोर दिया गया है, जिससे हमारे किसानों को फायदा होगा। बजट में नॉर्थ ईस्ट की फसलों को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव शामिल किया गया है।कृषि और किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत संबंधित विभागों के अधिकारी वेबिनार में शामिल हुए। पीएम मोदी ने कहा, “अब बजट के बाद उसके फुल पोटेंशियल का लाभ देश को मिले, इस दिशा में भी आपका अनुभव, आपके सुझाव और बजट का सर्वाधिक लोगों को लाभ हो, बजट का पाई-पाई पैसा जिसके लिए दिया गया है, उसको जल्द से जल्द परिपूर्ण कैसे करें, आपके सुझाव इस वेबिनार के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।”उन्होंने कहा कि सभी जानते हैं कि कृषि, एग्रीकल्चर, विश्वकर्मा हमारी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं। एग्रीकल्चर भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का रणनीतिक स्तंभ भी है। इसी सोच के साथ हमारी सरकार ने कृषि सेक्टर को लगातार मजबूत किया है।पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए करीब 10 करोड़ किसानों को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मिले हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा, “एमएसपी में हुए रिफॉर्म से अब किसानों को डेढ़ गुना तक रिटर्न मिल रहा है। संस्थागत ऋण कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपए के दावे का निपटान किया गया है। ऐसे अनेक प्रयासों से किसानों का रिस्क बहुत कम हुआ है और उन्हें एक बुनियादी आर्थिक सुरक्षा मिली है। - नई दिल्ली। अमरीका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल की खरीद के लिए 30 दिन की छूट देने की घोषणा की है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस छूट के अंतर्गत भारत को उस रूसी तेल की खरीद की अनुमति दी गई है, जो इस समय समुद्र में फंसा हुआ है।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहले से भेजी गर्इ तेल आपूर्ति अंतरराष्ट्रीय परिवहन जटिलताओं के कारण नष्ट होने की बजाए अपने गंतव्य तक पहुंच सके। अमरीका के अनुसार इन विशेष तेल खेपों की आवाजाही को संभव बनाकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सहारा मिलेगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार के सुचारू संचालन में मदद मिलेगी। यह छूट एक अस्थाई व्यवस्था के रूप में दी गई है। यह केवल उन तेल खेपों पर लागू होगा जो पहले से ही परिवहन में हैं।
- नई दिल्ली। International Monetary Fund ( आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि भारत वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) क्रांति में एक अहम भूमिका निभा रहा है और यह तकनीक को न केवल अपने नागरिकों बल्कि दुनिया के कई विकासशील देशों के लिए भी अधिक सुलभ बना रहा है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक जॉर्जीवा ने यह बात बैंकॉक में आयोजित Asia in 2050 Conference में कही। उन्होंने कहा कि एआई का तेजी से विकास वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है और इस बदलाव में एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।जॉर्जीवा के अनुसार यदि एशियाई देश उत्पादकता बढ़ाने के लिए एआई का प्रभावी उपयोग करते हैं तो इससे क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर हर साल लगभग एक प्रतिशत तक बढ़ सकती है।उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा डिजिटल इकोसिस्टम, तेजी से बढ़ता तकनीकी क्षेत्र और युवा कार्यबल एआई तकनीक को वैश्विक स्तर पर अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एआई के बढ़ते उपयोग से श्रम बाजार में बदलाव आ सकता है।उनके मुताबिक, उच्च कौशल और कम कौशल वाले कामों की मांग बढ़ सकती है, लेकिन मध्यम स्तर की कई नौकरियों पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है।उन्होंने विशेष रूप से शुरुआती स्तर की नौकरियों को लेकर चिंता जताई, क्योंकि इनमें अक्सर नियमित और दोहराए जाने वाले काम होते हैं जिन्हें आसानी से स्वचालित किया जा सकता है।आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए सरकारों को डिजिटल अवसंरचना में निवेश करना होगा, कौशल प्रशिक्षण को मजबूत करना होगा और कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करना होगा।उन्होंने कहा कि जो देश समय रहते अपने लोगों में निवेश करेंगे और सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे, वही एआई से होने वाली आर्थिक प्रगति का अधिक लाभ उठा सकेंगे।
- नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते तकनीक आधारित दौर में जीआरएसई को अत्याधुनिक और नवाचार आधारित जहाज एवं प्लेटफॉर्म विकसित करने चाहिए। उन्होंने जीआरएसई से भारत के विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाने का आह्वान किया।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स परिसर में कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा, “आज का युग तकनीक का युग है। जीआरएसई को इसी के साथ तालमेल बिठाते हुए ऐसे जहाज और प्लेटफॉर्म तैयार करने चाहिए, जो भारत और दुनिया में जहाज निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रतीक बनें।” उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह सरकार के विकसित भारत-2047 के सपने को साकार करने में जीआरएसई की अहम भूमिका होगी।राष्ट्र-निर्माण और समुद्री अर्थव्यवस्था में जीआरएसई के योगदान की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय शिपयार्ड देश के औद्योगिक और रक्षा इतिहास का जीवंत अध्याय हैं। पिछले डेढ़ सदी से जीआरएसई ने भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल को शक्तिशाली युद्धपोत, फ्रिगेट और अन्य जहाज उपलब्ध कराए हैं, जिन्होंने देश के समुद्री हितों की रक्षा की है।राजनाथ सिंह ने कहा, “जब आपका बनाया हुआ आधुनिक युद्धपोत समुद्र की लहरों पर चलता है, तो वह केवल स्टील और मशीनों का ढांचा नहीं होता। यह हजारों श्रमिकों की मेहनत, इंजीनियरों की नवाचार क्षमता, तकनीशियनों की सटीकता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक होता है।”रक्षा मंत्री ने जीआरएसई के कर्मचारियों को केवल नौकरीपेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के महान अभियान का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, कौशल और प्रतिबद्धता से जीआरएसई ने असंभव को संभव बनाया है। उन्होंने कर्मचारियों से इसी उत्साह और समर्पण के साथ काम करते रहने की अपील करते हुए कहा, “नई चुनौतियां आएंगी, नई तकनीकें आएंगी और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी, लेकिन इसी मेहनत और समर्पण से जीआरएसई भारत और दुनिया में जहाज निर्माण उत्कृष्टता का चमकता सितारा बनेगा।”कार्यक्रम में जीआरएसई के कर्मचारियों और उनके परिवारों ने रक्षा मंत्री के सम्मान में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। राजनाथ सिंह ने इसे ‘बहुत शानदार’ बताते हुए कहा कि यह भारत की विविधता, एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत झलक थी। इस अवसर पर जीआरएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त), रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और शिपयार्ड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।--
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नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए विकसित डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया। इस दौरान उन्होंने जनगणना के आधिकारिक शुभंकर “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) का भी औपचारिक अनावरण किया।
सरकार की ओर से 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही भारत की जनगणना-2027 की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। दो चरणों में होने वाली यह जनगणना दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना अभियान मानी जा रही है। इस बार पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी और नागरिकों को स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा।स्व-गणना के लिए एक सुरक्षित वेब-आधारित पोर्टल तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पहले अपनी जानकारी 16 भाषाओं में ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। सफल पंजीकरण के बाद उन्हें एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करने पर दर्ज जानकारी की पुष्टि की जा सकेगी।इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किए गए, जिन्हें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है। इनमें हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर (एनएलबीसी) वेब एप्लिकेशन, एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन, स्व-गणना पोर्टल और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल शामिल हैं। ये प्लेटफॉर्म जनगणना कार्यों की योजना, डेटा संग्रह और निगरानी को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाएंगे।जनगणना-2027 के शुभंकर “प्रगति” और “विकास” को मित्रवत और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों पात्र वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं। इनके माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी समाज के विभिन्न वर्गों तक सरल तरीके से पहुंचाई जाएगी।जनगणना-2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच गृह-सूचीकरण और आवास संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए चलाया जाएगा। दूसरा चरण फरवरी 2027 में देशभर में जनसंख्या गणना के रूप में आयोजित होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति के सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किए जाएंगे।पूरे अभियान में देशभर के लगभग 30 लाख प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी शामिल होंगे, जो सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा एकत्र करेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के उपयोग से इस विशाल जनगणना को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाना है। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह सचिव, भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6 मार्च 2026 को सुबह 11:15 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “कृषि और ग्रामीण रूपांतरण” विषय पर बजट-उपरांत वेबिनार को संबोधित करेंगे। इस वेबिनार का उद्देश्य बजट में घोषित पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करना है।
इस विषय के अंतर्गत आठ अलग-अलग वेबिनार सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें चार प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है—कृषि, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य पालन तथा ग्रामीण आजीविका। इन सत्रों में इन क्षेत्रों के विकास और बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा होगी।बजट-उपरांत वेबिनार में उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत काजू, नारियल, चंदन, अगरवुड, बादाम, अखरोट और चिलगोज़ा जैसी फसलों की संभावनाओं के विकास पर विचार किया जाएगा।वेबिनार में ‘भारत विस्तार’ के माध्यम से उपलब्ध अवसरों पर भी चर्चा होगी, जो कृषि क्षेत्र के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना है। इसके जरिए कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और बेहतर प्रबंधन को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जाएगा।सत्रों में पशुपालन मूल्य श्रृंखला में निजी क्षेत्र के निवेश और उद्यमिता को बढ़ावा देने, मत्स्य पालन के लिए जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास तथा तटीय मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।इसके साथ ही एसएचई-मार्ट्स के माध्यम से ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने के उपायों पर भी चर्चा की जाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता को मजबूती मिल सके। -
नई दिल्ली। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने गुरुवार (5 मार्च 2026) को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-फिनलैंड संबंधों और विभिन्न वैश्विक व द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति स्टब का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस वर्ष के ‘रायसीना डायलॉग’ में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी उपस्थिति भारत के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि समकालीन वैश्विक स्थिति पर उनके विचार कार्यक्रम के सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत उपयोगी होंगे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत फिनलैंड को एक भरोसेमंद और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और दीर्घकालिक सहयोग पर आधारित हैं।दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि हाल के वर्षों में भारत-फिनलैंड संबंध नवाचार, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, शिक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे क्षेत्रों के कारण और मजबूत हुए हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि हाल ही में घोषित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देगा।राष्ट्रपति ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी से लेकर 6जी तक अत्याधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। उन्होंने ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में फिनिश कंपनियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि कई भारतीय कंपनियां भी फिनलैंड में सक्रिय हैं। इसके साथ ही हजारों भारतीय, विशेषकर आईटी पेशेवर, वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।राष्ट्रपति मुर्मु ने सतत विकास और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों में फिनलैंड के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने सौर और पवन ऊर्जा के विस्तार, हरित हाइड्रोजन को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन जैसी पहलों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है।उन्होंने राष्ट्रपति स्टब को ‘लाइफ मिशन’ के बारे में भी जानकारी दी, जो लोगों को टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि फिनलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के हरित ऊर्जा नवाचार मिलकर यह दिखा सकते हैं कि समृद्धि और स्थिरता साथ-साथ संभव है। -
नई दिल्ली। भारत और फिनलैंड के बीच पर्यावरण सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दोनों देशों ने वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित पर्यावरण सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत और फिनलैंड ने वर्ष 2020 में किए गए समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण किया है। इससे ज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग के माध्यम से प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, वन तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग और गहरा होगा।नवीनीकृत समझौता ज्ञापन दोनों देशों के बीच सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए एक संरचित ढांचा प्रदान करेगा। इसके तहत वायु और जल प्रदूषण की रोकथाम तथा नियंत्रण, दूषित मिट्टी के पुनः उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन, खतरनाक अपशिष्ट के निपटान, अपशिष्ट से ऊर्जा उत्पादन और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।समझौते में प्राकृतिक संसाधनों और वनों के उपयोग में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने, जलवायु परिवर्तन के शमन और अनुकूलन, पर्यावरण एवं वन निगरानी, डेटा प्रबंधन तथा समुद्री और तटीय संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग पर भी सहयोग को शामिल किया गया है।दोनों देशों ने केंद्रित संवाद और संयुक्त पहलों के माध्यम से चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसरों पर भी चर्चा की। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने देशभर के 26 युवा चिकित्सा पेशेवरों को ऑन्कोलॉजी, बाल रोग, एंडोक्रिनोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स और आपातकालीन चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम आयोजित करने वाले मीडिया संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि करियर के शुरुआती दौर में इस तरह का सम्मान मिलना युवा डॉक्टरों के लिए बड़ी पहचान और प्रोत्साहन होता है। उन्होंने कहा कि करियर के बाद के चरण में मिलने वाले पुरस्कारों की तुलना में शुरुआती दौर में मिली मान्यता कहीं अधिक प्रेरणादायक होती है।उन्होंने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए युवा डॉक्टरों को उनके करियर के प्रारंभिक चरण में ही पहचान देना महत्वपूर्ण है। इससे उन्हें उत्कृष्टता हासिल करने और तेजी से बदलते चिकित्सा क्षेत्र में अपने ज्ञान को लगातार अद्यतन रखने की प्रेरणा मिलती है।डॉ. सिंह ने कहा कि नई तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के आगमन से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आ रहे हैं। हालांकि तकनीक ने निदान और उपचार में काफी सुधार किया है, लेकिन डॉक्टर की भूमिका अभी भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनुभव और नैदानिक अंतर्ज्ञान रोगी की देखभाल में अहम भूमिका निभाते हैं।उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले चिकित्सा शिक्षा कुछ विशेष रोगों तक सीमित थी, लेकिन आज चिकित्सा क्षेत्र अनेक विशेषज्ञताओं और नई उपचार पद्धतियों के कारण बहुत व्यापक हो गया है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता कई पारंपरिक शैक्षणिक कार्यों को भी संभालने लगी है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तकनीकी प्रगति, नए रोगों और बदलती स्वास्थ्य आवश्यकताओं के कारण चिकित्सा क्षेत्र पहले से अधिक जटिल हो गया है। ऐसे में हर युवा चिकित्सक को उभरती तकनीकों और विकल्पों के बीच चिकित्सा विशेषज्ञता के किसी एक विशेष क्षेत्र पर लगातार ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करना चाहिए।उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद के दौर में संक्रामक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां बनकर उभरी हैं। ऐसे में चिकित्सा पेशेवरों के लिए विशेष ज्ञान और निरंतर सीखना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।जितेंद्र सिंह ने सम्मानित किए गए युवा डॉक्टरों पर भरोसा जताते हुए कहा कि इनमें से कई भविष्य में अपने करियर में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करेंगे और चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए आजीवन उपलब्धि सम्मान भी प्राप्त करेंगे। -
नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने गुरुवार को पटना में आगामी द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। भाजपा ने उन्हें बिहार से राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है।
नितिन नबीन के नामांकन के दौरान केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी व विजय कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। वहीं, बिहार में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी इस अवसर पर मौजूद थे।भाजपा अध्यक्ष ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा को याद किया। उन्होंने लिखा कि राज्यसभा के लिए नामांकन प्रस्तुत करते हुए मन स्वाभाविक रूप से उस लंबी यात्रा को याद कर रहा है, जिसे उन्होंने जनता के साथ मिलकर तय किया है। उन्होंने कहा कि पटना पश्चिम (बांकीपुर) की जनता ने उन्हें हाथ पकड़कर चलना सिखाया और पिछले दो दशकों से अधिक समय से मिले विश्वास और स्नेह के बल पर उन्हें बिहार सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला।नितिन नबीन ने अपने पोस्ट में कहा कि चाहे श्रीरामनवमी की भव्य शोभायात्रा की तैयारियां हों, आस्था के पर्वों की व्यवस्थाएं हों या बांकीपुर के विकास से जुड़े संकल्प—हर कदम पर उन्होंने स्वयं को जनता के विश्वास का प्रतिनिधि मानकर काम किया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए नामांकन करते समय भी उनके मन में वही जिम्मेदारी और सेवा का संकल्प है।अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि बांकीपुर की जनता के साथ उनका आत्मीय संबंध आगे भी इसी विश्वास और समर्पण के साथ बना रहेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी मिलकर ‘विकसित बिहार’ के संकल्प को आगे बढ़ाते रहेंगे और जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।नामांकन दाखिल करने से पहले नितिन नबीन ने पटना जंक्शन स्थित श्री महावीर मंदिर में दर्शन-पूजन कर भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने पटना के बांसघाट स्थित काली मंदिर बांसघाट और गोलघर स्थित मां अखंडवासिनी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को गति देने के क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 6 मार्च 2026 को ओडिशा दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे पारादीप में इफको द्वारा स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड संयंत्र (एसएपी-3) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे और सहकारिता, डेयरी विकास तथा गृह मंत्रालय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ करेंगे।
पारादीप में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह इफको के पारादीप संयंत्र में स्थापित सल्फ्यूरिक एसिड प्लांट (एसएपी-3) को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह संयंत्र उर्वरक उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद अमित शाह भुवनेश्वर के आईडीसीओ प्रदर्शनी मैदान, यूनिट-3 में आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत करेंगे। इनमें राज्य सहकारिता नीति का विमोचन, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के स्कूल की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन, बदाम्बा शुगर उद्योग के पुनर्जीवन के लिए समझौता ज्ञापन तथा पीएसीएस और लैम्प्स द्वारा संचालित 1567 कॉमन सर्विस सेंटरों का समर्पण शामिल है। कार्यक्रम में 141 पीएसीएस के लिए आवश्यकता आधारित अवसंरचना का वर्चुअल उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही आरसीएस कार्यालय पोर्टल की शुरुआत, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक लिमिटेड के डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर पोर्टल का डिजिटल शुभारंभ तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड द्वारा विकसित ‘कूप मार्क’ और ‘साविद्या’ एआई-सक्षम बहुभाषी डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया जाएगा।डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में ओएमफेड से जुड़ी पहलों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही दो दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों को पंजीकरण प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री कामधेनु योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को अनुदान जारी किया जाएगा और प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र के उन्नयन के लिए एनडीडीबी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।इस अवसर पर विभिन्न विभागों की परियोजनाओं पर वीडियो प्रस्तुति भी दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान 1159.03 करोड़ रुपए की लागत वाली 69 परियोजनाओं का उद्घाटन तथा 2116.06 करोड़ रुपए की लागत वाली 130 परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा।








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