- Home
- देश
- नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली की जयंती पर देशभर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इन नेताओं ने अरुण जेटली को एक कुशल वक्ता, कानूनी विशेषज्ञ और आर्थिक सुधारों के वास्तुकार के रूप में याद किया है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें याद कर रहे हैं। एक बेजोड़ संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञ और बेहतरीन वक्ता ने एक सांसद के तौर पर एक अमिट विरासत छोड़ी है और कई अहम कानूनी मामलों में उनके योगदान के लिए उन्हें याद किया जाएगा। अपनी तेज़ कानूनी समझ से पार्टी को मजबूत बनाने में उनकी समर्पित भूमिका हमेशा ज़िंदा रहेगी, जो समय की हर कसौटी पर खरी उतरेगी।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री पद्म विभूषण अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें अभिवादन।” यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री ‘पद्म विभूषण’ अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। राष्ट्र के आर्थिक सशक्तिकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में उनके योगदान अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद हैं।”बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली की जयंती पर उन्हें सादर नमन।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली की जयंती पर सादर नमन करता हूं। विधि, खेल, शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए राष्ट्र सदैव कृतज्ञ रहेगा।”भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने एक्स पोस्ट में लिखा, “पूर्व केंद्रीय मंत्री और पद्म विभूषण स्वर्गीय अरुण जेटली को उनकी 73वीं जयंती पर याद कर रहे हैं। वह सबसे बेहतरीन सांसदों में से एक थे और बीजेपी के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति थे, उन्होंने देश के लिए कई बड़े आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, जिसमें जीएसटी सिस्टम को लागू करना भी शामिल है। उनके मूल्य आज भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।” भाजपा सांसद रवि किशन ने लिखा, “भारत की प्रगति व सर्वांगीण विकास के लिए आजीवन समर्पित रहने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता, लोकप्रिय अर्थशास्त्री, महान चिंतक, कुशल संगठनकर्ता, भाजपा परिवार के वरिष्ठ सदस्य, प्रखर वक्ता व प्रख्यात अधिवक्ता एवं देश के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। राष्ट्र निर्माण में आपके द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान को सदैव याद किया जाएगा।”
- नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘गीतांजलि आईआईएससी’ ग्रुप की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि ‘गीतांजलि आईआईएससी’ यह अब सिर्फ एक क्लास नहीं, बल्कि कैंपस का सांस्कृतिक केंद्र है। यहां हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, लोक परंपराएं व शास्त्रीय विधाएं हैं और छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “आज का जीवन टेक संचालित होता जा रहा है। जो परिवर्तन सदियों में आते थे वो बदलाव हम कुछ बरसों में होते देख रहे हैं। कई बार तो कुछ लोग चिंता जताते हैं कि रोबोट्स कहीं मनुष्यों को ही न रिप्लेस कर दें। ऐसे बदलते समय में मानव विकास के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहना बहुत जरूरी है।”उन्होंने कहा, “मुझे ये देखकर बहुत खुशी होती है कि नई सोच के साथ और नए तरीकों के साथ हमारी अगली पीढ़ी अपनी संस्कृति की जड़ों को अच्छी तरह थाम रही है। भारतीय विज्ञान संस्थान की पहचान रिसर्च और इनोवेशन है। कुछ साल पहले वहां के कुछ छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और रिसर्च के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। बस यहीं से एक छोटी-सी म्यूजिक क्लास शुरू हुई।”पीएम मोदी ने कहा कि ना बड़ा मंच और ना कोई बड़ा बजट, बस धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘गीतांजलि आईआईएससी’ के नाम से जानते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र यहां साथ बैठकर रियाज करते हैं। प्रोफेसर साथ बैठते हैं और उनके परिवार भी जुड़ते हैं। पीएम मोदी ने बताया कि आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी ऑनलाइन जुड़कर इस ग्रुप की डोर थामे हुए हैं।इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं से ‘हैकेथन्स’ से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 साल में ‘स्मार्ट इंडिया हैकथॉन’ में 13 लाख से ज्यादा छात्र और 6 हजार से ज्यादा संस्थान हिस्सा ले चुके हैं । युवाओं ने सैंकड़ों समस्याओं के सटीक समाधान भी दिए हैं। इस तरह के ‘हैकेथन्स’का आयोजन समय-समय पर होता रहता है।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 2025 की कई तस्वीरें, कई चर्चाएं और कई उपलब्धियों के बारे में बात की, जिन्होंने पूरे देश को एक साथ जोड़ दिया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मन में पूरे एक साल की यादें घूम रही हैं। 2025 ने हमें ऐसे कई पल दिए, जिस पर हर भारतीय को गर्व हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की सुरक्षा से लेकर खेल के मैदान तक, विज्ञान की प्रयोगशालाओं से लेकर दुनिया के बड़े मंचों तक भारत ने हर जगह अपनी मजबूत छाप छोड़ी। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “इस साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बना। दुनिया ने साफ देखा कि आज का भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करता। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देश के कोने-कोने से मां भारती के प्रति प्रेम और समर्पण की तस्वीरें सामने आईं। लोगों ने अपने-अपने तरीके से अपने भाव व्यक्त किए।”उन्होंने आगे कहा कि यही जज्बा तब भी देखने को मिला जब ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे हुए। मैंने आग्रह किया था कि ‘हैशटैग वंदे मातरम 150’ के साथ अपने संदेश और सुझाव भेजें। देशवासियों ने इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2025 खेल के लिहाज से भी यादगार साल रहा। पुरुष क्रिकेट टीम ने आईसीसी चैंपियन्स ट्रॉफी जीती और महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया। भारत की बेटियों ने ‘ब्लाइंड टी-20 वर्ल्ड कप’ जीतकर इतिहास रच दिया। एशिया कप में भी तिरंगा शान से लहराया। पैरा एथलीटों ने विश्व चैंपियनशिप में कई पदक जीतकर यह साबित किया कि कोई बाधा हौसलों को नहीं रोक सकती है।उन्होंने याद किया कि विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई। पीएम मोदी ने कहा कि शुभांशु शुक्ला पहले भारतीय बने, जो अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सेंटर तक पहुंचे। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवों की सुरक्षा से जुड़े कई प्रयास भी 2025 की पहचान बने। भारत में चीतों की संख्या भी 30 से ज्यादा हो चुकी है।आस्था, संस्कृति और भारत की विरासत की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि साल की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ ने पूरी दुनिया को चकित किया। साल के अंत में अयोध्या में राम मंदिर पर ध्वजारोहण के कार्यक्रम ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया। स्वदेशी को लेकर भी लोगों का उत्साह खूब दिखाई दिया। लोग वही सामान खरीद रहे हैं, जिसमें किसी भारतीय का पसीना लगा हो और भारत की मिट्टी की सुगंध हो।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम गर्व से कह सकते हैं कि 2025 ने भारत को और अधिक आत्मविश्वास दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब 2026 में नई उम्मीदों और नए संकल्पों के साथ देश आगे बढ़ने के लिए तैयार है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुबई में कन्नड़ भाषा सिखाने-पढ़ाने वाले परिवारों की सराहना की है। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा है कि कन्नड़ परिवारों की पहल से एक हजार से ज्यादा बच्चे जुड़े हैं, जो गर्व की बात है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 129वें एपिसोड में कहा, “अपनी जड़ों से जुड़े रहने के ये प्रयास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग कोनों और वहां बसे भारतीय भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “दुबई में रहने वाले कन्नड़ परिवारों ने खुद से एक जरूरी सवाल पूछा कि हमारे बच्चे ‘टेक-वर्ल्ड’ में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन कहीं यह अपनी भाषा से दूर तो नहीं हो रहे हैं? यहीं से ‘कन्नड़ा पाठशाले’ का जन्म हुआ। यह एक ऐसा प्रयास है, जहां बच्चों को ‘कन्नड़’ पढ़ाना, सीखना, लिखना और बोलना सिखाया जाता है।” पीएम मोदी ने फिजी में भी भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए एक पहल को सराहा। उन्होंने बताया कि फिजी में नई पीढ़ी को तमिल भाषा से जोड़ने के लिए कई स्तरों पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले महीने फिजी के राकी-राकी इलाके में वहां के एक स्कूल में पहली बार तमिल दिवस मनाया गया। उस दिन बच्चों को एक ऐसा मंच मिला, जहां उन्होंने अपनी भाषा पर खुले दिल से गौरव व्यक्त किया। बच्चों ने तमिल में कविताएं सुनाई, भाषण दिए और अपनी संस्कृति को पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर उतारा। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर भी तमिल भाषा के प्रचार के लिए लगातार काम हो रहा है। कुछ दिन पहले ही वाराणसी में चौथा ‘काशी तमिल संगमम’ हुआ। इस साल वाराणसी में ‘काशी तमिल संगमम’ के दौरान तमिल सीखने पर खास जोर दिया गया था। ‘तमिल कराकलम’ इस थीम के तहत वाराणसी के 50 से ज्यादा स्कूलों में विशेष अभियान भी चलाए गए। दो बच्चियों के ऑडियो क्लिप सुनाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि तमिल भाषा में इतनी सहजता से अपनी बात रखने वाली बच्चियां काशी की हैं। इनकी मातृभाषा हिंदी है, लेकिन तमिल भाषा के प्रति लगाव ने इन्हें तमिल सीखने के लिए प्रेरित किया है।( - नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को भारतीय नौसेना की स्वदेशी रूप से निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पर सवार हुईं। भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रविवार को कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर पहुंची थीं। राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा भारतीय नौसेना की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के रक्षा निर्माण कार्यक्रम का सशक्त प्रतीक मानी जा रही है।इस विशेष अभियान में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी मौजूद रहे। पनडुब्बी पर उच्च नौसैनिक अधिकारियों और पनडुब्बी के कमांडिंग ऑफिसर ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मु को नौसेना की इस पनडुब्बी की परिचालन क्षमता, स्टील्थ फीचर्स व हथियार प्रणालियों से अवगत कराया गया। साथ ही, उन्हें भारतीय नौसेना के अंडरवॉटर वॉरफेयर नेटवर्क के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। यह सॉर्टी कई मायनों में ऐतिहासिक है।यह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का कलवरी क्लास की पनडुब्बी पर यह पहला दौरा था। भारतीय इतिहास में ऐसा करने वाली वह दूसरी राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने एक पनडुब्बी पर सॉर्टी की थी। भारतीय नौसेना के इतिहास में वह एक विशेष क्षण माना जाता है।रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक कारवार स्थित आईएनएस वाघशीर और अन्य नौसैनिक प्रतिष्ठानों पर राष्ट्रपति की यह यात्रा न केवल नौसेना के मनोबल को बढ़ाने वाली है, बल्कि यह दर्शाती है कि देश की सर्वोच्च नेतृत्व व्यवस्था सैन्य तैयारियों का प्रत्यक्ष अनुभव और मूल्यांकन करने में कितना सक्रिय है। राष्ट्रपति मुर्मु को समुद्र में तैनाती के दौरान पनडुब्बी कर्मियों की चुनौतियों, उनके प्रशिक्षण और मिशन प्रोफाइल के बारे में भी जानकारी दी गई। स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाली कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर क्षमता का मजबूत स्तंभ हैं।आईएनएस वाघशीर, प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित, अत्याधुनिक सेंसर, हथियारों और ध्वनि-रहित संचालन क्षमता से लैस है, जो इसे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री शक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन बनाता है। राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा पश्चिमी समुद्री तट पर नौसेना के परिचालन क्षेत्रों के व्यापक मूल्यांकन का हिस्सा मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों ने इसे नौसेना के लिए प्रेरणादायक क्षण बताया, जो सैन्य बलों के प्रति राष्ट्रीय नेतृत्व के समर्थन और संवेदनशीलता को दर्शाता है।गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बीते दिनों भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी थी। लड़ाकू विमान में उड़ान भरने के बाद अब उन्होंने पनडुब्बी की यात्रा की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में उड़ान भरी थी। अपनी इस उड़ान के साथ ही उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था। राष्ट्रपति मुर्मु 29 अक्टूबर को हरियाणा के अंबाला स्थित वायु सेना स्टेशन पर पहुंची थी। यहां उन्होंने वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ‘राफेल’ में सॉर्टी यानी उड़ान भरी।
-
अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर पूजा अनुष्ठान शनिवार को शुरू हो गए। प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का मुख्य कार्यक्रम 31 दिसंबर को होगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि होंगे। ये अनुष्ठान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ के नेतृत्व में बेंगलुरु विद्यापीठ से आए 15 वैदिक विद्वानों की उपस्थिति में किए जा रहे हैं। शनिवार को एक कवच की स्थापना की गई और हवन किया गया। साथ ही भगवान की पालकी यात्रा भी इस परिसर में निकाली गई।
स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ ने बताया कि अनुष्ठान के तहत तत्व हवन, एक तत्व कलश की पूजा, गणपति की पूजा और अन्य हवन किए गए। उन्होंने बताया कि प्रतिष्ठा द्वादशी (31 दिसंबर) को राम लला का पंच रस से अभिषेक किया जाएगा, 56 भोग लगाया जाएगा और भजन एवं आरती की जाएगी। स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ ने बताया कि एक ढोल उत्सव भी होगा और रत्न जड़ित प्रतिमा स्थापित करने के लिए बैठकें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली बार जो धार्मिक अनुष्ठान किए गए थे, वे सभी इस बार भी किए जाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में 22 जनवरी, 2024 को राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी।
न्यास के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि राम मंदिर के लिए सभी वीआईपी पास एक जनवरी, 2026 तक जारी हो चुके हैं और पिछले एक महीने से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह से सुगम है और आम दर्शन मार्ग से आ रहे श्रद्धालुओं को करीब आधे घंटे में दर्शन का अवसर मिल रहा है। मिश्रा ने बताया कि प्रतिदिन सीमित संख्या में पास जारी किए जाते हैं और दो घंटे के एक स्लॉट में कुल 400 पास निर्धारित हैं जो एक जनवरी तक जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि आरती के लिए भी सभी पास जारी हो चुके हैं। -
वलसाड (गुजरात) . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब भी उन्हें समान अवसर मिलते हैं, तो वे पुरुषों के बराबर या उनसे भी बेहतर प्रदर्शन करती हैं। गुजरात के वलसाड जिले के धरमपुर में श्रीमद राजचंद्र सर्वमंगल महिला उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन करने के बाद सिंह ने कहा कि जैन आध्यात्मिक गुरु श्रीमद् राजचंद्रजी ने अपने छोटे से जीवन में जो विरासत छोड़ी है वह सदियों तक लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी। वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वर्चुअल' तरीके से केंद्र की आधारशिला रखी थी, जो 11 एकड़ में फैला है और महिलाओं को कौशल विकास और आजीविका में सुधार में सहायता करता है। श्रीमद राजचंद्र एक जैन मुनि, कवि, रहस्यवादी, दार्शनिक और 19वीं सदी के अंत के एक प्रमुख सुधारक थे। उनके भक्त गुरुदेव श्री राकेशजी ने एक आध्यात्मिक संगठन श्रीमद राजचंद्र मिशन धरमपुर की स्थापना की। सिंह ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जो महिलाएं यहां काम करेंगी, वे न केवल सशक्त होंगी बल्कि आत्मनिर्भर भी बनेंगी और उन्हें अपने तरीके से आध्यात्मिक चिंतन में शामिल होने का अवसर और समय मिलेगा।'' सिंह ने ‘स्वरोजगार महिला संघ' (सेवा) की इला भट्ट और श्री महिला गृह उद्योग की संस्थापक जसवंतीबेन पोपट का उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘महिलाओं ने साबित कर दिया है कि जब भी उन्हें समान अवसर दिए गए हैं, उन्होंने पुरुषों के बराबर या उससे भी बेहतर प्रदर्शन किया है।'' सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता केंद्र, जिसका प्रबंधन पूरी तरह से ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जाएगा, महिला उद्यमिता को और मजबूत करेगा और महिला सशक्तिकरण और महिला नेतृत्व वाले विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण स्थापित करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह परिसर महिला सशक्तिकरण के आर्थिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को बढ़ावा दे रहा है। एक बार जब यहां के उत्पाद वैश्विक बाजार में पहुंच जाएंगे, तो यह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत पहल को प्रोत्साहित करेगा।'' सिंह ने कहा कि लगभग 150 साल पहले श्रीमद राजचंद्रजी द्वारा फिर से दिखाए गए ‘मुक्ति मार्ग' ने एक नए युग के लिए आध्यात्मिकता की नींव रखी है। लगभग 2,500 साल पहले भगवान महावीर द्वारा पहली बार यह मार्ग दिखाया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘श्रीमद राजचंद्रजी ने अपने छोटे से जीवनकाल में जो विरासत छोड़ी है, वह सदियों तक हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी। समय के साथ उनकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि मैं कहूंगा कि उनकी प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है।'' सिंह ने इसे एक सुखद संयोग बताया कि इस वर्ष धर्मपुर में जैन आध्यात्मिक गुरु के आगमन के 125 वर्ष पूरे हुए। उन्होंने कहा, इस साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) भी अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘दोनों परंपराएं भारत की शाश्वत संस्कृति का प्रतीक हैं। दोनों परंपराएं आध्यात्मिकता, अनुशासन और परोपकार जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती हैं। और यह संयोग हमें याद दिलाता है कि सांस्कृतिक जागृति, सेवा और चरित्र विकास के संगम से ही सच्चा राष्ट्र-निर्माण संभव है।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने जैन परंपरा और विरासत को संरक्षित करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में चोरी हुई 20 से अधिक प्रतिष्ठित तीर्थंकर की प्रतिमाओं को विदेश से भारत वापस लाया गया है। पिछले साल, हमने ‘प्राकृत' भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था।'' उन्होंने कहा कि जैन धर्म का ‘अनेकांतवाद' (गैर-निरपेक्षता) का दर्शन आपसी सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को मुख्य सचिवों के एक राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। मोदी ने ‘एक्स' पर लिखा, “दिल्ली में आयोजित मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शासन और सुधारों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।” इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, नीति आयोग के सदस्य और सभी राज्यों व केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, नीति आयोग, राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों तथा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर इस सम्मेलन में सप्ताहांत में ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी' विषय पर चर्चा की जाएगी, जिसमें राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की ओर से अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं तथा रणनीतियों को शामिल किया जाएगा। पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिनमें बच्चों की शुरुआती शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां शामिल हैं। सम्मेलन के कार्यक्रम के अनुसार, सप्ताहांत में छह विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें राज्यों में विनियमन में ढील; शासन में प्रौद्योगिकी : अवसर, जोखिम और उनका निवारण; स्मार्ट आपूर्ति शृंखला और बाजार संबंधों के लिए कृषि व्यवस्था; एक राज्य, एक विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल; आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी तथा वामपंथी उग्रवाद से निपटने को लेकर योजनाएं शामिल हैं। मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। पहला सम्मेलन जून 2022 में हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित किया गया था, जिसके बाद जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में नयी दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किए गए।
- नई दिल्ली। भारत रेलवे अगले पांच वर्षों में देश में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत 48 रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों को संभालने की क्षमता को दोगुना करने की योजना पर काम कर रहा है। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में दी गई।सरकार ने जिन शहरों में रेलवे स्टेशनों की ट्रेनों को संभालने की क्षमता को दोगुना करने की योजना बनाई है। उनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल, गुवाहाटी, वाराणसी, आगरा, पुरी, कोचीन, कोयंबटूर, वडोदरा, सूरत, अमृतसर, लुधियाना, विशाखापट्टनम, तिरूपति, कोयंबटूर, विजयवाड़ा और मैसूर आदि का नाम शामिल है।स्टेशनों की ट्रेनों की संभालने के लिए कई प्रकार के बदलाव किए जाएंगे, जिनमें मौजूदा टर्मिनल्स में नए प्लेटफॉर्म को जोड़ना, स्टेब्लिंग लाइनें, पिट लाइनें, और पर्याप्त शंटिंग सुविधाएं, साथ ही शहरी इलाके में और उसके आसपास नए टर्मिनल पहचानना और बनाना शामिल हैं।बयान में कहा गया है कि स्टेशनों पर रखरखाव की सुविधाओं का विकास का काम भी किया जाएगा, जिसमें मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स और ट्रैफिक सुविधा कार्यों के साथ सेक्शनल क्षमता बढ़ाना, सिग्नलिंग अपग्रेडेशन, और अलग-अलग पॉइंट्स पर बढ़ी हुई ट्रेनों को संभालने के लिए जरूरी मल्टी ट्रैकिंग भी शामिल है।टर्मिनल की क्षमता बढ़ाने की योजना बनाते समय, टर्मिनल के आस-पास के स्टेशनों पर भी विचार किया जाएगा ताकि क्षमता समान रूप से संतुलित रहे। उदाहरण के लिए, पुणे के लिए, पुणे स्टेशन पर प्लेटफार्म और स्टेबलिंग लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खडकी और आलंदी पर भी क्षमता बढ़ाने पर विचार किया गया है।बयान में कहा गया है, “हालांकि क्षमता को दोगुना करने का प्लान 2030 तक का है, लेकिन उम्मीद है कि अगले 5 सालों में क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा ताकि क्षमता बढ़ने का फायदा तुरंत मिल सके। इससे आने वाले सालों में ट्रैफिक की जरूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस प्लान में कामों को तीन कैटेगरी- तत्काल, शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म में बांटा जाएगा।”सभी जोनल रेलवे के जनरल मैनेजरों को लिखे एक लेटर में, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित प्लान स्पेसिफिक होना चाहिए, जिसमें साफ टाइमलाइन और तय नतीजे हों। हालांकि यह काम खास स्टेशनों पर फोकस करता है, लेकिन हर जोनल रेलवे को अपने डिवीजनों में ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने का प्लान बनाना चाहिए, यह पक्का करते हुए कि न सिर्फ टर्मिनल क्षमता बढ़े, बल्कि स्टेशनों और यार्ड में सेक्शनल क्षमता और ऑपरेशनल दिक्कतों को भी प्रभावी ढंग से हल किया जाए। (
- नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों (पुत्रों) का सर्वोच्च बलिदान क्रूर मुगल सल्तनत के खिलाफ भारत के अदम्य साहस, शौर्य और वीरता की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। वीर बाल दिवस के मौके पर साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि देश उन वीर सपूतों को याद कर रहा है जो भारत के अदम्य साहस, वीरता और शौर्य के शिखर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आज हम अपने राष्ट्र के गौरव, वीर साहिबजादों को याद करते हैं। वे भारत के अदम्य साहस और शौर्य के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक हैं। उन वीर साहिबजादों ने उम्र और अवस्था की सीमाओं को तोड़ दिया। वे क्रूर मुगल सल्तनत के खिलाफ चट्टान की तरह ऐसे खड़े रहे कि मजहबी कट्टरता और आतंक का वजूद ही हिल गया। जिस राष्ट्र के पास ऐसा गौरवशाली अतीत हो, जिसकी युवा पीढ़ी को ऐसी प्रेरणाएं विरासत में मिली हों, वह राष्ट्र क्या कुछ नहीं कर सकता है।’’प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादे उस समय काफी युवा थे, लेकिन मुगल सम्राट औरंगजेब की क्रूरता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।उन्होंने कहा, ‘‘औरंगजेब जानता था कि यदि वह भारत की जनता में भय उत्पन्न करना चाहता है और उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर करना चाहता है, तो उसे सबसे पहले भारतीयों का मनोबल तोड़ना होगा। इसीलिए उसने साहिबजादों को अपना निशाना बनाया। लेकिन औरंगजेब और उसके सिपहसालार यह भूल गए थे कि हमारे गुरु साधारण मनुष्य नहीं थे। वे तपस्या और त्याग के साक्षात अवतार थे।’’मोदी ने कहा कि माता गुजरी जी, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और चारों साहिबजादों का साहस और आदर्श प्रत्येक भारतीय को शक्ति प्रदान करते रहते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘साहिबजादा अजीत सिंह जी, साहिबजादा जुझार सिंह जी, साहिबजादा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी को बहुत कम उम्र में ही उस समय की सबसे बड़ी सत्ता से टकराना पड़ा था। यह संघर्ष महज सत्ता के लिए नहीं था, बल्कि भारत के मूल विचारों और मजहबी कट्टरता के बीच टकराव था। यह सत्य और असत्य की लड़ाई थी।’’प्रधानमंत्री ने श्री गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर नौ जनवरी 2022 को घोषणा की थी कि उनके पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा, जिनका अद्वितीय बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है।वीर बाल दिवस के मौके पर भारत सरकार देशभर में सहभागितापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य नागरिकों को साहिबजादों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से रूबरू कराना तथा भारत के इतिहास के इन युवा नायकों के अदम्य साहस, त्याग और वीरता का सम्मान करना तथा उन्हें स्मरण करना है।
-
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के तहत लाभ पाने वाले लोगों की संख्या 2025 में बढ़कर 10.25 करोड़ हो गई है। यह जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।पीएमयूवाई के तहत सरकार गरीब परिवारों को 14.2 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर पर 300 रुपए की सब्सिडी देती है और एक साल में एक परिवार अधिकतम नौ सिलेंडर्स पर यह सब्सिडी ले सकता है।एलपीजी की खपत बढ़ी है; प्रति परिवार औसत सिलेंडर 2019-20 में 3 से बढ़कर 2024-25 में 4.47 हो गया है और 2025-26 में इसके 4.85 तक पहुंचने का अनुमान है
इससे देश में एलपीजी की खपत बढ़ाने में मदद मिली है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश में प्रति परिवार औसत खपत बढ़कर 4.47 सिलेंडर हो गई है, जो कि पहले वित्त वर्ष 2019-20 में 3 थी। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 4.85 प्रति परिवार तक पहुंचने की उम्मीद है।सरकार ने बयान में कहा कि बकाया आवेदन को निपटाने और ज्यादा परिवारों तक एलपीजी गैस को पहुंचाने के लिए, सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन जारी करने को मंजूरी दी है। आधार ऑथेंटिकेशन में तेजी लाकर सब्सिडी टारगेटिंग और पारदर्शिता में सुधार किया गया।1 दिसंबर, 2025 तक, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन ने पीएमयूवाई के 71 प्रतिशत और नॉन-पीएमयूवाई के 62 प्रतिशत उपभोक्ताओं को कवर किया। सरकार ने बताया कि देश भर में चलाए गए ‘बेसिक सेफ्टी चेक’ अभियान ने ग्राहक सुरक्षा को मजबूत किया है। ग्राहकों के घरों पर 12.12 करोड़ से अधिक फ्री सेफ्टी इंस्पेक्शन किए गए और 4.65 करोड़ से अधिक एलपीजी होज रियायती दरों पर बदले गए, जिससे घरेलू एलपीजी इस्तेमाल में जागरूकता और सेफ्टी स्टैंडर्ड में काफी सुधार हुआ।मंत्रालय ने पेट्रोलियम मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया। 90,000 से अधिक रिटेल आउटलेट्स को डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी गई, जिन्हें 2.71 लाख से ज्यादा पीओएस टर्मिनलों का सपोर्ट मिला। मंत्रालय ने आगे कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कवरेज बढ़कर 307 ज्योग्राफिकल इलाकों तक पहुंच गई है। सितंबर 2025 तक पीएमजी घरेलू कनेक्शन की संख्या बढ़कर 1.57 करोड़ और सीएनजी स्टेशन की संख्या बढ़कर 8,400 से अधिक हो गई है।( -
नई दिल्ली। जनवरी-फरवरी में आयोजित महाकुंभ से लेकर नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर आयोजित होने वाले समारोहों की शुरुआत तक, साल 2025 में संस्कृति मंत्रालय बेहद व्यस्त रहा।साल जाते जाते दीपावली को रोशनी के पर्व के रूप में यूनेस्को की मान्यता मिली।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान ‘कलाग्राम’ के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। 10.24 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला ‘कलाग्राम’ एक संवेदनात्मक यात्रा बताता था, जिसमें भारत की सांस्कृतिक विरासत के मूर्त और अमूर्त दोनों पहलुओं को एक साथ प्रस्तुत किया गया।अवसर को खास बनाने के लिए महाकुंभ का लोगो विभिन्न केंद्रीय संरक्षित स्मारकों पर दिखाया गया।संस्कृति मंत्रालय ने नवंबर में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की। इसी दौरान भोपाल में अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती का भव्य आयोजन किया गया और देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मनाई गई।वर्ष 2025 के दूसरे हिस्से में भारत को यूनेस्को से दो महत्वपूर्ण मान्यताएं मिलीं। पहली, ‘भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ को जुलाई में पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र के दौरान विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ के 12 घटक महाराष्ट्र का साल्हेर किला, शिवनेरी किला, लोहगढ़ किला, खंडेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला किला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग; तथा तमिलनाडु का जिंजी किला हैं।दूसरी मान्यता 10 दिसंबर को दीपावली को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की यूनेस्को प्रतिनिधि सूची में शामिल किए जाने के रूप में मिली। यह भारत से इस सूची में शामिल होने वाला 16वां पर्व है। अन्य 15 पर्वों में कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा और रामलीला शामिल हैं।केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस अंकन के साथ “यूनेस्को नवीकरण, शांति और अच्छाई की विजय की शाश्वत मानवीय आकांक्षा का सम्मान करता है।”उन्होंने कहा कि कुम्हारों से लेकर कारीगरों तक, लाखों हाथ इस विरासत को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह यूनेस्को टैग एक जिम्मेदारी भी है और “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि दीपावली जीवंत विरासत बनी रहे।’’दिसंबर में, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अंतर-सरकारी समिति का 20वां सत्र दिल्ली के लाल किले में आयोजित किया गया। यह पहली बार था जब भारत ने इस महत्वपूर्ण सत्र की मेजबानी की। लाल किला यूनेस्को का एक विश्व धरोहर स्थल है।यह बैठक 10 नवंबर को लाल किले में हुए विस्फोट के लगभग एक महीने बाद हुई। विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे।आगामी वर्ष में सरकार श्रीलंका में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बना रही है। “योजना फरवरी में कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने की है। ये देवनिमोरी अवशेष हैं।”जानकारी के अनुसार, ये पवित्र अवशेष गुजरात के देवनिमोरी से उत्खनन में प्राप्त हुए थे और वर्तमान में वडोदरा स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के संरक्षण में हैं।देश के विभिन्न स्थलों पर प्रतिष्ठित भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पिछले कुछ वर्षों में विदेशों में आयोजित कई प्रदर्शनों का हिस्सा रहे हैं। नवंबर में, नयी दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित अवशेषों का एक हिस्सा 17 दिनों की सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए थिम्पू (भूटान) ले जाया गया था।2024 में, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष उनके दो शिष्यों अरहंत सारिपुत्र और अरहंत मौद्गल्यायन के अवशेषों के साथ थाईलैंड ले जाए गए और फरवरी-मार्च में 26 दिनों की प्रदर्शनी के तहत विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शित किए गए। यह पहली बार था जब भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के पवित्र अवशेष एक साथ प्रदर्शित किए गए।ये अवशेष चौथी-पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के हैं और 1970 के दशक में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारियों की एक टीम को पिपरहवा में किए गए उत्खनन में मिले थे, जिसे प्राचीन कपिलवस्तु स्थल का हिस्सा माना जाता है।मंत्रालय के लिए 2025 एक और महत्वपूर्ण वर्ष रहा, क्योंकि सितंबर में भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण और प्रसार के लिए ‘ज्ञान भारतम्’ नामक एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की गई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर को ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल का शुभारंभ किया। सम्मेलन का समापन ‘दिल्ली घोषणापत्र’ के साथ हुआ, जिसमें विकसित भारत 2047 की भावना के अनुरूप भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण और पुनरोद्धार के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन ने शुक्रवार को वीर बाल दिवस पर गुरुद्वारा बंगला साहिब में मत्था टेका।पार्टी के एक बयान के अनुसार, नवीन के साथ भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक संजय मयूख भी मौजूद थे।
बयान में कहा गया है कि गुरु गोबिंद सिंह के दो साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह तथा उनकी दादी माता गुजरी के बलिदान को याद करते हुए नेताओं ने गुरुद्वारा बंगला साहिब में मत्था टेका। मुगल काल के दौरान गुरु गोबिंद सिंह के दो ‘छोटे साजिबजादों’ की शहादत की स्मृति में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 और 28 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित होने वाले मुख्य सचिवों के पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। यह सम्मेलन राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं पर केंद्रित है और सतत संवाद के माध्यम से केंद्र-राज्य साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, सहकारी संघवाद के दृष्टिकोण पर आधारित यह सम्मेलन एक ऐसे मंच के रूप में कार्य करता है, जहां केंद्र और राज्य मिलकर भारत की मानव पूंजी क्षमता को अधिकतम करने और समावेशी, भविष्य के लिए तैयार विकास को गति देने के उद्देश्य से एकीकृत रणनीति तैयार करते हैं।26 से 28 दिसंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में साझा विकास एजेंडा को अंतिम रूप देने के लिए गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की जनसंख्या को केवल जनसांख्यिकीय लाभांश के रूप में देखने के बजाय नागरिकों को मानव पूंजी के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत शिक्षा प्रणालियों को मजबूत करने, कौशल विकास पहलों को आगे बढ़ाने और देशभर में भविष्य के रोजगार अवसरों के सृजन के लिए ठोस रणनीतियां तैयार की जाएंगी।पांचवें राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय ‘विकसित भारत के लिए मानव पूंजी’ रखा गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाई जा रही सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और रणनीतियों को साझा किया जाएगा। इस व्यापक विषय के अंतर्गत पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा, जिनमें प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्कूली शिक्षा, कौशल विकास, उच्च शिक्षा, खेल और पाठ्येतर गतिविधियां शामिल हैं।सम्मेलन के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्वदेशी’ और ‘पोस्ट-एलडब्ल्यूई भविष्य’ से जुड़ी योजनाओं जैसे विषयों पर छह विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा, भोजन सत्रों के दौरान विरासत और पांडुलिपि संरक्षण व डिजिटलीकरण तथा सभी के लिए आयुष-आधारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण में ज्ञान के एकीकरण जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होगा।मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन पिछले चार वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। इसका पहला सम्मेलन जून 2022 में धर्मशाला में आयोजित हुआ था। इसके बाद जनवरी 2023, दिसंबर 2023 और दिसंबर 2024 में नई दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किए गए। इस सम्मेलन में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के साथ वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ और अन्य गणमान्य व्यक्ति भाग लेंगे।
- नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान जीरो डिग्री से ऊपर चला गया, जबकि पहलगाम हिल स्टेशन में शुक्रवार को यह जीरो डिग्री से नीचे रहा। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर शहर में न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में माइनस 4.5 और पहलगाम में माइनस 1.6 डिग्री रहा।वहीं, जम्मू शहर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, कटरा में 9.5, बटोटे में 6.1, बनिहाल में 3.8 और भद्रवाह में 2.6 डिग्री दर्ज किया गया है। गुरुवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस, गुलमर्ग में 4 और पहलगाम में 9 डिग्री सेल्सियस था। यह बताता है कि अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का अंतर कम हो रहा है, जो 40 दिन लंबे ‘चिल्लई कलां’ के दौरान एक आम बात है, जो 21 दिसंबर को शुरू हुआ और 30 जनवरी को खत्म होगा।इस भीषण ठंड के मौसम में, घाटी में ज्यादातर पानी के स्रोत आंशिक या पूरी तरह से जम जाते हैं, जिससे नदियों और झीलों में नाव चलाना मुश्किल हो जाता है। लोगों को ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़ों की कई परतें पहननी पड़ती हैं। इसी वजह से, ‘फेरहन’ नाम का ऊनी ओवर गारमेंट कश्मीर में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सर्दियों का पहनावा है।ज्यादातर कश्मीरी लोग फेरहन के नीचे एक मिट्टी का बर्तन रखते हैं, जिसमें जलते हुए कोयले होते हैं, जिसे एक सुंदर ढंग से बनी हुई बेंत की टोकरी में रखा जाता है। इसे ‘कांगड़ी’ कहा जाता है और यह सदियों से कश्मीर की संस्कृति का हिस्सा बन गया है।नए साल पर बड़ी संख्या में लोग गुलमर्ग, श्रीनगर और पहलगाम पहुंचे हैं, जबकि होटल मालिक और टूर एंड ट्रेवल ऑपरेटर्स का कहना है कि बुकिंग अभी भी बढ़ रही है। 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले की वजह से कश्मीर के टूरिज्म इंडस्ट्री को नुकसान हुआ है। हालांकि, अब स्थिति बेहतर है। साल के आखिर में टूरिस्टों के आने से पता चलता है कि 2026 उन लोगों के लिए एक बेहतर और खुशहाल साल होगा जो अपनी रोजी-रोटी के लिए इस इंडस्ट्री पर निर्भर हैं।
- नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने लाल किला विस्फोट मामले में दो आरोपियों की एनआईए हिरासत शुक्रवार को बढ़ा दी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने जांच एजेंसी को आरोपी यासिर अहमद डार से दस और दिनों तक हिरासत में पूछताछ करने की अनुमति दी, जबकि दूसरे आरोपी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला से आठ और दिनों तक पूछताछ की जायेगी।मीडियाकर्मियों को कार्यवाही को कवर करने से रोक दिया गया था।राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच के अनुसार, उमर-उन-नबी 10 नवंबर को विस्फोटक से भरी कार चला रहा था और वह इस आतंकवादी हमले का कथित षड्यंत्रकारी था। इस घटना में 15 लोगों की मौत हुई थी।एनआईए ने डॉ. मल्ला को नौ दिसंबर को दिल्ली में गिरफ्तार किया था और उसे साजिश का मुख्य आरोपी बताया।एनआईए की जांच के अनुसार, नसीर ने उमर-उन-नबी को सहायता प्रदान करके जानबूझकर उसे शरण दी थी। एजेंसी ने नौ दिसंबर को पहले ही बताया था कि उस पर आतंकवादी हमले से संबंधित सबूतों को नष्ट करने का भी आरोप है।एनआईए ने 18 दिसंबर को इस मामले में नौवें आरोपी डार को गिरफ्तार किया। वह जम्मू-कश्मीर का निवासी है और कथित तौर पर उमर-उन-नबी का करीबी सहयोगी है। एनआईए ने इस मामले में डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. अदील राथेर, डॉ. शाहीन सईद समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है।
- नई दिल्ली। एक विस्फोटक बल्लेबाज के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से उभर रहे बिहार के वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। पिछले एक साल में वैभव सूर्यवंशी ने हर फॉर्मेट में देश-विदेश में अपनी बल्लेबाजी से दुनियाभर के क्रिकेट फैंस को हैरान किया है। उनकी असाधारण बल्लेबाजी क्षमता और प्रदर्शन को देखते हुए ही उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया।सम्मान समारोह की वजह से वैभव सूर्यवंशी दिल्ली में हैं। दिल्ली में होने के कारण वे रांची में विजय हजारे ट्रॉफी में मणिपुर के खिलाफ खेले जा रहे मैच में बिहार टीम का हिस्सा नहीं हैं। वैभव सूर्यवंशी ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 के पहले मैच में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 84 गेंदों पर 190 रन की पारी खेली थी। इस पारी में 16 चौके और 15 छक्के शामिल थे।वैभव के लिए साल 2025 स्वर्णिम रहा है। इसकी शुरुआत आईपीएल 2025 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए गुजरात टाइटंस के खिलाफ शतक लगाने से हुई थी। वैभव ने 35 गेंद पर शतक लगाते हुए लीग में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। आईपीएल 2025 के 7 मैचों में उन्होंने 252 रन बनाए थे। इसके अलावा वैभव ने हाल ही में अंडर-19 एशिया कप में शतक लगाया था। वैभव यूथ वनडे में भी शतक लगा चुके हैं।26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर वीरता, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रधानमंत्री ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर नौ जनवरी 2022 को उनके पुत्रों साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की याद में 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
- नयी दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ‘जीवन सुगमता’ को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है इसलिए उसका सुधार अभियान आने वाले समय में और अधिक उत्साह और दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा अपनी विभिन्न सुधार पहलों पर किए गए कई पोस्ट के संदर्भ में यह टिप्पणी की।मोदी ने कहा, ‘‘हमारी सरकार जीवन सुगमता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और नीचे दिए गए लेख में हमने इस दिशा में किए गए कार्यों के उदाहरण दिए हैं। आने वाले समय में हमारी सुधार यात्रा और भी अधिक उत्साह के साथ जारी रहेगी।’’हैशटैग ‘‘रिफॉर्म इन एक्शन और हैशटैग गुड गवर्नेंस’’ के साथ केंद्र सरकार ने अपने कई पोस्ट में कहा कि किसी भी सुधार की असली कसौटी यह होती है कि वह लोगों का बोझ कितना कम करता है। वर्ष 2025 में शासन व्यवस्था में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिला, जहां सुधार जटिलता के बजाय परिणामों पर केंद्रित रहे।‘माई जीओवी इंडिया’ पर किए गए पोस्ट में बताया गया है कि सरल कर कानूनों, तेजी से विवाद निपटान, आधुनिक श्रम संहिताओं और कुछ नियमों या कानूनों के उल्लंघन को अपराध की श्रेणी से बाहर रखकर सिर्फ उनके अनुपालन पर जोर देने से नागरिकों और व्यवसायों, दोनों के लिए प्रक्रियाएं आसान हुई हैं। भरोसे, पूर्वानुमेयता और दीर्घकालिक विकास पर जोर दिया गया है, जिससे यह दिखता है कि अच्छी तरह तैयार की गई नीतियां किस तरह रोजमर्रा की जिंदगी को सहज बना सकती हैं।पोस्ट में कहा गया है कि करोड़ों भारतीयों के लिए कर राहत अब वास्तविकता बन गई है। अब 12 लाख रुपये तक की आय पर शून्य कर लगता है। मध्यम वर्गीय परिवार अब अपनी कमाई का अधिकतर हिस्सा अपने पास रख पा रहे हैं, जिससे उन्हें खर्च, बचत और निवेश करने के साथ अधिक आत्मविश्वास मिला है।पोस्ट में कहा गया कि आयकर अधिनियम, 2025 ने अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और प्रत्यक्ष कर प्रणाली में स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाई है, जिससे यह करदाताओं के लिए अधिक अनुकूल और वर्तमान जरूरतों के अनुरूप बनी है।सरकार ने बताया कि छोटे व्यवसाय अब लाभ खोने के डर के बिना विस्तार कर सकते हैं। निवेश और टर्नओवर की बढ़ी हुई सीमाओं से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को ऋण और कर प्रोत्साहनों का लाभ बनाए रखते हुए आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इससे व्यवसायों का विस्तार, अधिक रोजगार सृजन और स्थानीय उद्यमों को मजबूती मिल रही है।ग्रामीण रोजगार को लेकर सरकार ने कहा कि अब यह केवल मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिसंपत्ति का निर्माण भी कर रहा है। सुनिश्चित रोजगार की अवधि बढ़ने और गांवों के बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने से ग्रामीण श्रमिक स्थायी परिसंपत्ति बना रहे हैं, जो समुदायों और आजीविका को सशक्त करती हैं।सरकार ने यह भी बताया कि श्रमिकों को अब दर्जनों कानूनों से नहीं जूझना पड़ता क्योंकि 29 श्रम कानूनों को चार सरल संहिताओं में समाहित किया गया है, जो वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा को कवर करती हैं।इन सुधारों से अधिकार अधिक स्पष्ट हुए हैं, अनुपालन आसान हुआ है और महिलाओं को मातृत्व तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा से जुड़े सुनिश्चित लाभ मिले हैं।सरकार ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को भी व्यवसायों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए सरल बनाया गया है। सरलीकृत कर स्लैब, आसान पंजीकरण, स्वचालित प्रक्रियाएं और तेज रिफंड के जरिए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार व्यापार सुगमता को बेहतर बना रहे हैं।इसका प्रभाव दिवाली पर रिकॉर्ड बिक्री (6.05 लाख करोड़ रुपये) और पिछले एक दशक में सबसे मजबूत नवरात्रि खरीदारी के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।पोस्ट में यह भी कहा गया कि अब व्यवसाय अपने उत्पादों को तेजी से बाजार में ला सकते हैं।गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के युक्तिकरण से भारतीय निर्माताओं के अनुपालन खर्च कम हुए हैं, दक्षता बढ़ी है और वैश्विक बाजारों में उनकी स्थिति मजबूत हुई है। सरकार ने बताया कि छोटी कंपनियों की परिभाषा का विस्तार किए जाने से अनुपालन बोझ और लागत में कमी आई है, जिससे 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले उद्यम नवाचार और विस्तार पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।
-
नई दिल्ली। नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास, साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।
रेलवे ने साधारण नॉन-एसी (गैर-उपनगरीय) सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी, स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है।सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा, जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1,250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1,251 किलोमीटर से 1,750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है, और 1,751 किमी से 2,250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर, जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं, कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास, जिसमें स्लीपर, फर्स्ट क्लास, एसी चेयर कार, एसी 3-टियर, एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं, सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है। बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए, जैसे कि 500 किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा, पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।तेजस राजधानी, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, वंदे भारत, हमसफर, अमृत भारत, तेजस, महामना, गतिमान, अंत्योदय, गरीब रथ, जन शताब्दी, युवा एक्सप्रेस, नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं (जहां लागू हो, एस मेमू को छोड़कर) सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा, और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर, 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा। - नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 बच्चों को कला, संस्कृति, खेल और इनोवेशन समेत अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी असाधारण उपलब्धियों और योगदान को पहचान देते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने पुरस्कार पाने वालों को अपना आशीर्वाद भी दिया।पुरस्कार पाने वालों में से एक छात्र ने बताया कि उन्हें यह पुरस्कार इनोवेशन कैटेगरी में दो इनोवेशन के लिए मिला है। मैंने दो एआई सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन बनाए हैं, जो लकवा से ग्रस्त मरीजों की उंगलियों और हाथों के मूवमेंट में मदद करते हैं। इनको भारत सरकार ने पेटेंट और कॉपीराइट भी किया है।पुरस्कार लेने वालों में एक छोटा बच्चा ऐसा भी है, जिसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भारतीय सेना के खानपान का ख्याल किया था। राष्ट्रपति से पुरस्कार लेने के बाद उसने कहा, “यह पुरस्कार पाकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार मिलेगा और मैं राष्ट्रपति से मिलूंगा।”पुरस्कार विजेता ने बताया कि जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू हुआ था और सीमापार से पाकिस्तान के ड्रोन भी आ रहे थे, तब भारतीय फौज भी उनके खेतों के पास भी तैनात थी। उसने कहा, “तब मैंने उनकी सेवा करने के बारे में सोचा। मैं उनके लिए हर दिन मिठाई, चाय, छाछ और बर्फ लाता था।”इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “सभी बच्चों ने अपने परिवारों, समाज और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। इसलिए, मैं इन बच्चों के परिवार के सदस्यों को भी बधाई देती हूं। इतने अच्छे और होनहार बच्चों के लिए पुरस्कार समारोह आयोजित करने के लिए मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी और उनकी पूरी टीम की सराहना करती हूं।”इस दिन के महत्व के बारे में बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों, साहिबजादों के साहस और बलिदान का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
-
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश में पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 महत्वपूर्ण डिजिटल सुधारों की शुरुआत की। इन पहलों का लक्ष्य सरकारी कामकाज को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाना है।
इन पांचों डिजिटल पहलों का उद्घाटन केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित ‘सुशासन प्रथाएं 2025’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान किया। इन सुधारों में पूर्व सैनिक आरक्षण संकलन, एआई आधारित भर्ती टूल, ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल ऐप, आईजीओटी एआई प्लेटफॉर्म और कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 शामिल हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुशासन केवल एक विचार नहीं, बल्कि रोजमर्रा के प्रशासन की जिम्मेदारी है, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों को बेहतर सेवाएं देने पर आधारित है। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला सुशासन दिवस पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती का दिन है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जनहित आधारित शासन की मजबूत नींव रखी।मंत्री ने कहा कि सुशासन की अवधारणा पहले भी मौजूद थी, लेकिन वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे सही मायनों में लागू किया गया। यह ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के मंत्र पर आधारित है। उन्होंने बताया कि ये पांचों डिजिटल पहलें प्रशासन की मूल प्रक्रियाओं को मजबूत करने, विभिन्न हितधारकों को सशक्त बनाने और सरकारी कर्मचारियों को बदलते समय की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं।पूर्व सैनिक आरक्षण संकलन के तहत केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों को मिलने वाले आरक्षण से जुड़ी सभी गाइडलाइनों को एक ही स्थान पर सरल और अपडेटेड रूप में उपलब्ध कराया गया है, जिससे नियमों में स्पष्टता आएगी और लाभ समय पर मिल सकेगा।डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि एआई आधारित भर्ती नियम निर्माण टूल सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को आसान बनाएगा। यह टूल सवाल-जवाब के माध्यम से उपयुक्त भर्ती प्रक्रिया सुझाएगा और नियमों का ड्राफ्ट स्वतः तैयार करेगा, जिससे देरी और त्रुटियों में कमी आएगी।ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल ऐप, जो एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, सरकारी कर्मचारियों को उनके सेवा रिकॉर्ड, प्रमोशन, ट्रांसफर, प्रशिक्षण और रिटायरमेंट से जुड़ी जानकारी मोबाइल पर ही उपलब्ध कराएगा। इससे कागजी कामकाज कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म में एआई सारथी, एआई ट्यूटर और विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल जैसे नए एआई फीचर्स जोड़े गए हैं, जो कर्मचारियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सीखने और कौशल विकास में मदद करेंगे। कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 में एआर/वीआर, गेमिफिकेशन और इंटरैक्टिव सिमुलेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल लर्निंग सामग्री तैयार की जाएगी, जिससे सुधारों और सर्वोत्तम प्रथाओं की जानकारी तेजी से देशभर में पहुंचेगी।मंत्री ने कहा कि ये सभी पहलें शासन सुधार के लिए एक सुसंगत और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जो तकनीक के माध्यम से संस्थानों को मजबूत करती हैं और नागरिकों व सरकारी कर्मचारियों दोनों को परिवर्तन के केंद्र में रखती हैं। -
नयी दिल्ली. सरकार ने पांच साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद चार श्रम संहिताओं को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 2026 में पूर्ण रूप से लागू हो जाएंगी। ये नियम देश के सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन और सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। श्रम मंत्रालय ने 2026 में ईपीएफओ 3.0 संस्करण लाने की भी योजना बनाई है, जो कर्मचारियों की भविष्य निधि की तेजी से निकासी सुनिश्चित करेगा एवं कर्मचारियों की पेंशन योजना 1995 के तहत पेंशन निर्धारण तथा कर्मचारियों की जमाकर्ता-सम्बंधित बीमा योजना 1976 के तहत बीमा दावों को भी सुविधाजनक बनाएगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि 2025 वास्तव में भारत के श्रम एवं रोजगार परिवेश के लिए परिवर्तनकारी वर्ष रहा जिसे ऐसे सुधारों ने चिह्नित किया जो श्रमिकों को शासन के केंद्र में रखते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष की एक प्रमुख उपलब्धि 21 नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताओं का लागू होना रही। इससे 29 श्रम कानूनों को आधुनिक, समेकित एवं सरल ढांचे में परिवर्तित किया गया। मंत्री ने कहा, ‘‘ 2026 में ध्यान प्रौद्योगिकी-संचालित सेवा वितरण तथा प्रभावी भौतिक क्रियान्वयन के माध्यम से सुधारों को और बढ़ाने पर रहेगा। इसके साथ ही श्रम संहिताओं के तहत नियमों का कार्यान्वयन भी समान रूप से महत्वपूर्ण होगा।'' मांडविया ने कहा, ‘‘ एक बार लागू होने पर ये नियम कार्यस्थल स्तर पर विधायी ढांचे को व्यावहारिक परिणामों में बदल देंगे जिससे कर्मचारियों एवं नियोक्ताओं दोनों के लिए अधिक स्पष्टता, समानता एवं पूर्वानुमेयता सुनिश्चित होगी। इससे भारत के आधुनिक, औपचारिक तथा समावेशी श्रम बाजार की ओर बदलाव तेजी से होगा।'' उन्होंने बताया कि ये नियम भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में सबसे व्यापक सुधार का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका उद्देश्य कर्मचारियों की भलाई सुनिश्चित करना, और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, जिसकी परियोजना लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है, अगले दो वर्ष में 3.5 करोड़ नौकरियों के सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने बताया कि निरंतर नीतिगत ध्यान के परिणामस्वरूप भारत में सामाजिक सुरक्षा एक दशक पहले 19 प्रतिशत लोगों को मिलती थी जो अब 64 प्रतिशत से अधिक लोगों को मिल रही है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसे अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ द्वारा भी मान्यता दी गई है। मांडविया ने कहा कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के कार्य संचालन में महत्वपूर्ण सुधार, विशेषकर निकासी प्रक्रियाओं के सरलीकरण ने सदस्यों के जीवन को आसान बनाया है और करोड़ों सदस्यों के लिए उनकी बचत तक तेज एवं सुगम पहुंच सुनिश्चित की है। मंत्री ने साथ ही कहा कि श्रम के लिए भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (जिसमें ई-श्रम पोर्टल और राष्ट्रीय कैरियर सेवा प्लेटफॉर्म शामिल हैं) ने अभूतपूर्व स्तर हासिल कर लिया है जिससे सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार सेवाओं की पहुंच मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इन पहलों ने समावेशिता तथा श्रमिकों को बड़े पैमाने पर सेवाएं देने में प्रौद्योगिकी के उपयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त की है। ये सुधार मिलकर भविष्य के तैयार कार्यबल और विकसित भारत के लिए मजबूत आधार बनाते हैं।
-
मुंबई. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए दंत स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रा की तैयारी के दौरान उन्हें दो अक्ल दाढ़ निकलवानी पड़ी थी।
शुक्ला ने कहा कि हालांकि अंतरिक्ष यात्रियों को आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है लेकिन वे अंतरिक्ष यान पर दांतों से जुड़ी सर्जरी नहीं कर सकते। उन्होंने बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएसआई) में यह बात कही और इस दौरान ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप उनके साथ थे। ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप को देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान' के लिए चुना गया है। नायर ने बताया कि भारतीय वायु सेना के परीक्षण पायलट अंतरिक्ष यात्राओं के लिए स्वाभाविक पसंद क्यों हैं। वायु सेना के अधिकारी एवं टेस्ट पायलट, ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने इस वर्ष की शुरुआत में इसरो व नासा द्वारा समर्थित और एक्सिओम स्पेस द्वारा संचालित वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की। उन्होंने कहा, “आपके दांतों का स्वास्थ्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। चयन प्रक्रिया के दौरान, कई (अंतरिक्ष यात्री बनने की इच्छा रखने वाले) लोगों ने अपने दांत निकलवाए।” शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में जाने के प्रशिक्षण के दौरान अक्ल दाढ़ निकाली जाती है।अंतरिक्ष यात्री ने कहा, “मैंने अपनी दो अक्ल दाढ़ निकलवाई हैं।” उन्होंने बताया कि नायर के तीन दांत निकलवाए गए हैं जबकि प्रताप के चार दाढ़ निकाले गए हैं। शुक्ला ने बताया कि गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के कुशल पायलटों को मिशन के लिए मंजूरी मिलने से पहले कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक मूल्यांकन से गुजरना पड़ा। ग्रुप कैप्टन नायर ने बताया कि 2019 के अंत तक उन्हें रूस भेजा गया, जहां रूसी चिकित्सकों ने भी उनका चिकित्सा मूल्यांकन किया। ग्रुप कैप्टन प्रताप ने अंतरिक्ष मिशन के लिए टेस्ट पायलटों के चयन के बारे में बताते हुए कहा कि जिन देशों के पास शक्तिशाली अंतरिक्ष कार्यक्रम हैं और जिन्होंने स्वतंत्र रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा है उन सभी ने इसी तरह का रास्ता अपनाया है। अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने वाले देशों में अमेरिका, सोवियत संघ, रूस और चीन शामिल हैं।उन्होंने कहा कि टेस्ट पायलट स्वयं ही एक विशेष समूह होते हैं, जो इस क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रताप ने बताया कि वायु सेना के हर साल 200 जवान टेस्ट पायलट बनने के लिए आवेदन करते हैं और उनमें से केवल पांच का चयन होता है। उन्होंने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के लिए वायु सेना ने 75 टेस्ट पायलटों पर विचार किया, जिनमें से केवल चार का चयन हुआ। अंतरिक्ष यात्री ने बताया, “हमें वास्तव में अंतरिक्ष में भेजे जाने के लिए नहीं चुना गया बल्कि हमें जमीन पर रोजाना काम करने, डिजाइनरों के साथ मिलकर काम करने और उस सिस्टम को विकसित करने के लिए चुना गया है, जिसके लिए हमें औपचारिक प्रशिक्षण दिया गया है।” प्रताप ने कहा, ‘‘टेस्ट पायलटों का चयन करना और उन्हें सीधे अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करना बहुत आसान है क्योंकि हमारा 70-80 प्रतिशत प्रशिक्षण अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के समान है।” -
नई दिल्ली। गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई है, जो सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में था। झटके महसूस होने पर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। फिलहाल, किसी तरह के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भूकंप को लेकर जानकारी शेयर की। एनसीएस के अनुसार, यह 4.4 तीव्रता का भूकंप सुबह 4:30 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। भूकंप सतह के करीब होने की वजह से लोगों को कम तीव्रता के बावजूद झटके काफी महसूस हुए।बता दें कि गुजरात का कच्छ क्षेत्र भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यह भूकंपीय क्षेत्र-5 के अंतर्गत आता है। इस श्रेणी को भारत में सबसे खतरनाक और उच्च जोखिम वाला इलाका माना जाता है।इस हफ्ते में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई जगह भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। गुरुवार को असम के उदलगुरी में भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, यह 3.0 तीव्रता का भूकंप था, जिसका केंद्र 19 किलोमीटर की गहराई में था।बुधवार को बंगाल की खाड़ी, राजस्थान और सिक्किम के हिस्सों में भूकंप दर्ज किया गया। बंगाल की खाड़ी में भूकंप की तीव्रता 4.2 थी, जबकि सिक्किम के गंगटोक में 3.3 और मंगन में 3.0 तीव्रता का भूकंप आया। राजस्थान के जालौर में 5 किलोमीटर की गहराई में 3.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ। इससे पहले, 23 दिसंबर को महाराष्ट्र के रायगढ़ में 2.6 तीव्रता का भूकंप आया।( -
नयी दिल्ली. केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है। सिंह ने यहां सुशासन प्रथाओं पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करने और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करने के उद्देश्य से पांच प्रमुख पहलों की भी शुरुआत की। मंत्री ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति निर्माताओं और हितधारकों को 25 दिसंबर को प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले सुशासन दिवस के मौके पर संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन एक अमूर्त आदर्श नहीं बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के वितरण पर आधारित एक दैनिक प्रशासनिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सुशासन दिवस का विशेष महत्व है क्योंकि देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की अवधारणा को संस्थागत रूप दिया और लोक आधारित शासन की नींव रखी। सिंह ने कहा कि सुशासन का विचार पहले भी रखा गया था, लेकिन 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन'' के मंत्र के मार्गदर्शन में इसे अक्षरशः और पूरी भावना के साथ लागू करने की शुरुआत की गई। मंत्री ने कहा कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) इस सुशासन दिवस पर पांच प्रमुख पहल शुरू कर रहा है, जिनका उद्देश्य मुख्य शासन प्रक्रियाओं को मजबूत करना, प्रमुख हितधारक समूहों का समर्थन करना और तेजी से विकसित हो रहे प्रशासनिक परिदृश्य की चुनौतियों के लिए लोक सेवकों को तैयार करना है। पहले डिजिटल सुधार में केंद्र सरकार में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का एक संकलन शामिल है, जिसमें सभी मौजूदा निर्देशों को एक ही, अद्यतन और उपयोगकर्ता अनुकूल संदर्भ में समेकित किया गया है। दूसरी पहल में एआई-संचालित भर्ती साधन शामिल है, जिसे भर्ती नियम निर्माण, संशोधन एवं निगरानी प्रणाली (आरआरएफएएमएस) पोर्टल के साथ एकीकृत किया गया है। तीसरी पहल में ई-एचआरएमएस 2.0 मोबाइल फोन एप्लिकेशन की शुरुआत की गई है जो सरकारी कर्मचारियों को प्रमुख मानव संसाधन सेवाएं सीधे उपलब्ध कराता है। मिशन कर्मयोगी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित, ई-एचआरएमएस 2.0 सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति, तबादले, प्रतिनियुक्ति, प्रशिक्षण और सेवानिवृत्ति जैसी मानव संसाधन प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है, साथ ही एसपीएआरआरडब्ल्यू पीएफएमएस और भविष्य जैसे मंचों से भी जुड़ा हुआ है। चौथी पहल कर्मयोगी मंच पर नयी कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
पांचवीं पहल कर्मयोगी डिजिटल लर्निंग लैब 2.0 की शुरुआत आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए की गई है।










.jpg)







.jpg)



.jpeg)
.jpeg)

.jpeg)

