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नयी दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में चांदी की कीमत बुधवार को 5,000 रुपये बढ़कर 2 लाख 56 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिकी खरीदारी से चांदी को समर्थन मिला। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। मंगलवार को चांदी 2 लाख 51 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों की मांग को बढ़ाया है, जबकि आपूर्ति बाधाओं और मजबूत औद्योगिक मांग ने चांदी की कीमतों को और बढ़ा दिया है। इस बीच, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का दाम 100 रुपये की मामूली गिरावट के साथ 1,41,400 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,41,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘हाल की तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से बुधवार को सोने की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई।'' उन्होंने कहा कि डॉलर में सुधार से भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा। हालांकि लगातार भू-राजनीतिक जोखिम, सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की मांग को समर्थन देते हैं। इससे तेज गिरावट होने से रुक रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 45.22 डॉलर यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 4,449.87 डॉलर प्रति औंस पर रहा। हाजिर चांदी 2.55 डॉलर यानी 3.15 प्रतिशत टूटकर 78.69 डॉलर प्रति औंस पर रही। - नयी दिल्ली। श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी लिमिटेड ने गुजरात के गिफ्ट सिटी में एक लक्जरी मिश्रित उपयोग वाली परियोजना के निर्माण के लिए अभिनेता अभिषेक बच्चन के साथ एक संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के बेटे अभिषेक के पास गिफ्ट सिटी में जमीन है। यह जमीन लगभग 15 साल पहले खरीदी गई थी। रियल एस्टेट कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि उसने अभिनेता अभिषेक बच्चन के साथ एक विकास समझौते के माध्यम से गांधीनगर के गिफ्ट सिटी क्षेत्र में विस्तार किया है। इस परियोजना का निर्मित क्षेत्रफल 10 लाख वर्ग फुट से अधिक होगा।कंपनी इस स्वामित्व वाली भूमि पर एक लक्जरी मिश्रित उपयोग (आवासीय और व्यावसायिक) वाली परियोजना का निर्माण करेगी। यह गुजरात में कंपनी की पहली परियोजना होगी। यह परियोजना कंपनी की अनुषंगी कंपनी राइज रूट प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिसने अभिषेक बच्चन के साथ समझौता किया है। इस समझौते में लाभ साझा करने का प्रावधान शामिल है।श्री लोटस डेवलपर्स ने आगामी परियोजना के विकास में किए गए निवेश की राशि का खुलासा नहीं किया है।श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक आनंद के पंडित ने कहा, "प्रगतिशील नीतिगत पहल, मजबूत बुनियादी ढांचा विकास और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बढ़ती रुचि के समर्थन से गिफ्ट सिटी तेजी से एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में उभर रहा है।" उन्होंने कहा कि गुजरात के बाजार में विस्तार का उद्देश्य इस क्षेत्र में प्रीमियम और लक्जरी आवासीय और वाणिज्यिक स्थानों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
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नयी दिल्ली ।टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लि. की सौर विनिर्माण इकाई और पूर्ण अनुषंगी कंपनी टीपी सोलर लि. का वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान सेल उत्पादन सालाना आधार पर करीब पांच गुना होकर 940 मेगावाट रहा। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही में यह 196 मेगावाट था।
टाटा पावर ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 990 मेगावाट के मॉड्यूल का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में उत्पादित 927 मेगावाट से लगभग सात प्रतिशत अधिक है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा पावर की अनुषंगी है।टीपी सोलर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में भारत की सबसे बड़ी अत्याधुनिक 4.3 गीगावाट सौर सेल और मॉड्यूल निर्माण सुविधा का संचालन करती है। टाटा पावर की इस इकाई को 4,300 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया गया है। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान इस संयंत्र ने 2.8 गीगावाट सौर सेल और 2.9 गीगावाट सौर मॉड्यूल का उत्पादन किया। - नयी दिल्ली. अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के 1,000 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र (एनसीडी) के सार्वजनिक निर्गम ने खुलने के 45 मिनट के भीतर ही पूर्ण अभिदान हासिल कर लिया। शेयर बाजार के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। इस निर्गम का आधार आकार 500 करोड़ रुपये था जबकि इसमें अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये का ‘ग्रीन शू' विकल्प यानी अतिरिक्त बोली आने पर उसे रखने का विकल्प भी शामिल है। इनका आवंटन ‘‘पहले आओ, पहले पाओ'' के आधार पर किया गया। कंपनी के अनुसार, निर्गम मंगलवार को शुरू हुआ जो 19 जनवरी 2026 को बंद होगा। एनसीडी बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध किए गए। इसमें निवेशकों को सालाना 8.90 प्रतिशत तक का प्रभावी प्रतिफल मिलेगा। एईएल द्वारा जुलाई 2025 में जारी किए जाने वाले 1,000 करोड़ रुपये के दूसरे एनसीडी निर्गम को भी पहले ही दिन महज तीन घंटे में पूर्ण अभिदान मिला था। बयान में कहा गया कि निर्गम से मिली कम से कम 75 प्रतिशत राशि का उपयोग मौजूदा कर्ज चुकाने में किया जाएगा। बाकी राशि सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
- नयी दिल्ली. भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से आगामी 2026-27 बजट में कर प्रोत्साहन, ब्याज सब्सिडी और माल ढुलाई सहायता प्रदान करने का मंगलवार को आग्रह किया ताकि स्थिरता संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए इस क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया जा सके। व्यापारिक संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से निर्यात ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी, सड़क एवं रेल माल ढुलाई के लिए तीन प्रतिशत समर्थन और शुल्क माफी योजनाओं (आरओडीटीईपी - निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) के समय पर वितरण की मांग की। आईआरईएफ के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने वित्त मंत्री को भेजे एक ज्ञापन में कहा, ‘‘ ये उपाय निर्यातकों की लागत को सीधे तौर पर कम करेंगे, स्थिरता को प्रोत्साहित करेंगे और मूल्यवर्धित लदान को बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।" उन्होंने कहा कि वैश्विक चावल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। उसने वित्त वर्ष 2024-25 में 170 से अधिक देशों को लगभग 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया। गर्ग ने कहा, ‘‘ चावल का निर्यात एक रणनीतिक आर्थिक संपत्ति बना हुआ है जो किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार एवं विदेशी बाजार को सहारा देता है।'' उन्होंने कहा कि इस प्रमुख खाद्य पदार्थ में निरंतर नेतृत्व भारत की आर्थिक मजबूती और कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाता है। गर्ग ने साथ ही कहा कि इस क्षेत्र को हालांकि कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिनमें प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में भूजल का कम होना, खरीद एवं भंडारण की उच्च लागत और बाजार में अस्थिरता शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ केंद्रीय बजट लक्षित राजकोषीय एवं सहायक उपायों के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ स्थिरता और किसानों के परिणामों में सुधार कर सकता है।'' आईआरईएफ ने प्रमाणित जल-बचत एवं कम उत्सर्जन वाली पद्धतियों जैसे कि वैकल्पिक गीलापन और सुखाने (एडब्ल्यूडी), सीधे बोए गए चावल (डीएसआर), ‘लेजर लेवलिंग' और ऊर्जा-कुशल ‘मिलिंग' से जुड़े कर और निवेश प्रोत्साहनों के माध्यम से टिकाऊ चावल उत्पादन के लिए समर्थन मांगा। संघ ने किसानों को बेहतर प्रतिफल देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद पर दबाव कम करने के लिए उच्च मूल्य वाली धान एवं चावल की किस्मों प्रीमियम बासमती, जीआई/जैविक/विशेष गैर-बासमती की ओर खेती का रकबा स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहन देने का भी आह्वान किया। कार्यशील पूंजी के संबंध में आईआरईएफ ने लघु एवं मझोले उद्यम चावल निर्यातकों को प्राथमिकता देते हुए निर्यात ऋण पर चार प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की मांग की। संघ ने कहा, ‘‘ इससे वित्तपोषण लागत कम होती है, नकदी प्रवाह सुगम होता है और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।" एक प्रमुख मांग कुछ चावल किस्मों पर 20 प्रतिशत निर्यात शुल्क लगाए जाने के बाद उत्पन्न हुए पूर्वव्यापी शुल्क दावों की एकमुश्त छूट है। आईआरईएफ ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रीय अधिकारियों तथा निर्यातकों के बीच शुल्क आधार एवं गणना पद्धति की असंगत व्याख्या के कारण अनजाने में विसंगतियां उत्पन्न हुईं। संघ ने प्रीमियम बाजारों में भारत की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए निर्यात वित्त गारंटी तथा अनुपालन बुनियादी ढांचे (परीक्षण, पता लगाने की क्षमता, गुणवत्ता आश्वासन) को मजबूत करने का भी आह्वान किया है।
- नयी दिल्ली. वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को कृत्रिम मेधा (एआई) और महत्वपूर्ण खनिजों से संचालित भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में सस्ती एवं भरोसेमंद बिजली की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि भारत की वृद्धि के अगले चरण का निर्धारण सस्ती बिजली से होगा। अग्रवाल ने ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा के बीच बढ़ते संबंध का उल्लेख करते सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' पर लिखा कि अमेरिका की तुलना में चीन की अर्थव्यवस्था छोटी होने के बावजूद आज उसकी बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी है। बिजली अवसंरचना में यह दीर्घकालिक निवेश एआई के दौर में फायदेमंद साबित होगा, जहां डेटा सेंटर, उन्नत विनिर्माण एवं खनिज प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र अत्यधिक ऊर्जा खपत वाले हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका पहले से ही बिजली की कमी का सामना कर रहा है क्योंकि एआई के तेजी से विस्तार के कारण भारी मात्रा में बिजली की खपत हो रही है जिससे अन्य औद्योगिक गतिविधियों के लिए सीमित एवं महंगी बिजली ही बच रही है।'' अग्रवाल ने कहा कि यह असंतुलन समय के साथ औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।उन्होंने कहा भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा के साथ उत्पादन एवं पारेषण में अपनी मजबूत क्षमता के साथ भारत घरों, कारखानों तथा डेटा सेंटर के लिए विश्वसनीय एवं किफायती बिजली सुनिश्चित कर खुद को भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर सकता है।'' अग्रवाल ने इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए बिजली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और नीतिगत ढांचों को सरल बनाने की वकालत की। उन्होंने बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण को एकीकृत करने वाली एक सरल एवं एकीकृत नीति अपनाने का सुझाव दिया, जिससे कंपनियां परियोजनाओं को शुरू से अंत तक गति और दक्षता के साथ पूरा कर सकें। वेदांता समूह के चेयरमैन ने कहा, ‘‘किफायती एवं सुरक्षित बिजली ही भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को परिभाषित करेगी।'' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज किए गए निर्णायक सुधार भारत को एआई-संचालित भविष्य में अग्रणी बनाने में मदद कर सकते हैं।
- नयी दिल्ली. भारतीय बैंकों को आने वाले समय में रिजर्व बैंक की बेहतर निगरानी और मजबूत पर्यवेक्षण व्यवस्था का फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ बैंकिंग प्रणाली में जोखिम कम होंगे, बल्कि पूरे क्षेत्र का कामकाजी माहौल भी सुधरेगा। एक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने एक रिपोर्ट में कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं और महंगाई के जोखिमों में कमी आने के साथ ये बदलाव बैंकिंग क्षेत्र के लिए सकारात्मक हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में तनावपूर्ण हालात से निपटने, जोखिमों की निगरानी और खराब कर्ज की वसूली से जुड़े नियामकीय ढांचे में काफी सुधार हुआ है। फिच ने कहा, "वित्त वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में तेज बढ़ोतरी के पीछे जिन कमजोरियों की भूमिका थी, उन्हें अब काफी हद तक दूर कर लिया गया है। फिलहाल बैंकिंग प्रणाली के प्रमुख आंकड़े कई वर्षों की सबसे मजबूत स्थिति में हैं।" बैंकिंग क्षेत्र के कुल कर्जों में एनपीए का अनुपात वित्त वर्ष 2017-18 के 11.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 की पहली छमाही में 2.2 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह, बैंकों की पूंजी स्थिति भी बेहतर हुई है। इसके अलावा बैंक की वित्तीय मजबूती और संकट झेलने की क्षमता का पैमाना माना जाने वाला कॉमन इक्विटी टियर-1 अनुपात भी बढ़कर 14.8 प्रतिशत हो गया है, जो वित्त वर्ष 2013-14 में करीब 9.3 प्रतिशत था। बैंकों की लाभप्रदता भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र के समकक्ष देशों के अनुरूप है। हाल के वर्षों में परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) करीब 1.3 प्रतिशत रहा है। फिच का मानना है कि अपेक्षित ऋण क्षति (ईसीएल) ढांचे को लागू करने से मुनाफे में उतार-चढ़ाव कम होगा। आगे चलकर देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि (अगले दो वर्षों में छह प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान) बैंकों को कर्ज विस्तार के पर्याप्त अवसर देगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में बैंकिंग ऋण और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का अनुपात अभी 59 प्रतिशत है, जो अन्य देशों के औसत 101 प्रतिशत से कम है। इससे संकेत मिलता है कि सावधानी बरतते हुए कर्ज वृद्धि की अभी काफी अच्छी गुंजाइश मौजूद है।
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नयी दिल्ली. साख निर्धारित करने वाली इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा आयकर में कटौती जैसे प्रमुख सुधार और व्यापार समझौते, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के रूप में काम करेंगे। साथ ही अर्थव्यवस्था को वैश्विक उथल-पुथल से बचाएंगे। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अगले वित्त वर्ष में भी उच्च वृद्धि दर और कम महंगाई दर (औसतन 3.8 प्रतिशत खुदरा मुद्रास्फीति) की स्थिति बनी रहेगी। कम शुल्क वाले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के आंकड़ों में और इजाफा होगा। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और बाजार मूल्य पर जीडीपी नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रुपया औसतन 92.26 प्रति डॉलर रहेगा जो मौजूदा वित्त वर्ष में 88.64 प्रति डॉलर से अधिक है। एजेंसी ने साथ ही कहा कि सरकार के विशेष रूप से न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे और अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करके चालू खाता घाटा (सीए) को कम रखने में मदद करेंगे। पंत ने कहा कि सीमा शुल्क को युक्तिसंगत बनाना एवं विकसित भारत-राम-जी अधिनियम के तहत आवंटन एक फरवरी को निर्धारित 2026-27 के केंद्रीय बजट में अपेक्षित प्रमुख घोषणाएं होंगी। इसके अलावा, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को भी एक फरवरी को सार्वजनिक किया जाएगा। इसमें एक अप्रैल से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण के अनुपात का सुझाव दिया गया है। रेटिंग एजेंसी के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कर राजस्व में दो लाख करोड़ रुपये की कमी आएगी जिसकी भरपाई गैर-कर राजस्व संग्रह और पूंजीगत व्यय में मामूली कमी से की जाएगी। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट में अनुमानित 4.4 प्रतिशत और वास्तविक रूप से 15.69 लाख करोड़ रुपये रहेगा। एजेंसी के अनुसारख् संशोधित अनुमानों (आरई) में निरपेक्ष रूप से आंकड़ा बढ़ सकता है, हालांकि प्रतिशत के रूप में 4.4 प्रतिशत ही रहेगा।
- नयी दिल्ली। सरकार ने कम राख वाले 'मेटालर्जिकल' कोक पर आयात प्रतिबंध हटा दिए हैं, जिसमें राख की मात्रा 18 प्रतिशत से कम है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने इससे पहले 31 दिसंबर को एक अधिसूचना में कहा था कि वह कम राख वाले 'मेटालर्जिकल' कोक पर आयात प्रतिबंधों को एक जनवरी से बढ़ाकर 30 जून, 2026 तक कर रहा है। हालांकि, तीन जनवरी की एक ताजा अधिसूचना में विभाग ने कहा, ''कम राख वाले मेटालर्जिकल कोक (जिसमें राख की मात्रा 18 प्रतिशत से कम हो) का आयात अब मुक्त है, जिसमें कोक फाइन्स/कोक ब्रीज और फॉस्फोरस मेटालर्जिकल कोक शामिल हैं।''
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हैदराबाद/ केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने सोमवार को यहां देश के पहले एकीकृत आरएएस तकनीक पर आधारित ट्राउट मछली फार्म का उद्घाटन किया। 'पुनर्चक्रीय जलीय-कृषि प्रणाली' (आरएएस) के तहत मछलियों को खुले तालाब या नदी के बजाय टैंक के अंदर नियंत्रित माहौल में पाला जाता है। इसमें मछलियों द्वारा इस्तेमाल किए गए पानी को फेंका नहीं जाता, बल्कि उसे फिल्टर और शोधन इकाई से साफ कर फिर उसी टैंक में वापस भेज दिया जाता है। केंद्रीय मंत्री ने स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर लिमिटेड द्वारा स्थापित इस फार्म के उद्घाटन के अवसर पर कहा कि यह परियोजना मत्स्य-पालन क्षेत्र के लिए एक अहम उपलब्धि है और यह दिखाती है कि आधुनिक प्रौद्योगिकी की मदद से खेती और मत्स्य उत्पादन की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि ठंडे पानी में पाई जाने वाली ट्राउट मछली का हैदराबाद जैसे गर्म इलाके में सफल उत्पादन इस बात का प्रमाण है कि सही प्रौद्योगिकी अपनाकर देश में कहीं भी किसी भी प्रजाति की मछली पाली जा सकती है। एक विज्ञप्ति के मुताबिक, सिंह ने कहा कि तापमान नियंत्रित और बंद वातावरण वाली ऐसी प्रणालियां भौगोलिक और मौसम संबंधी बाधाओं को दूर करती हैं और इससे देशभर में मत्स्य पालन के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार आरएएस जैसी उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और वित्तीय सहायता के जरिए सहयोग करती रहेगी। करीब 60 लाख डॉलर की शुरुआती लागत से बने इस फार्म की सालाना उत्पादन क्षमता 1,200 टन है। आमतौर पर ट्राउट मछली का पालन उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे ठंडे पहाड़ी राज्यों तक सीमित रहा है।
- नयी दिल्ली. इक्विटी बाजार में सकारात्मक रुझान के बीच पिछले सप्ताह शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में सात के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में 1,23,724.19 करोड़ रुपये का उछाल आया। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे अधिक लाभ हुआ। पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 720.56 अंक या 0.84 प्रतिशत चढ़ा।शीर्ष 10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर लाभ में रहे, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और बजाज फाइनेंस के मूल्यांकन में गिरावट दर्ज की गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 45,266.12 करोड़ रुपये बढ़कर 21,54,978.60 करोड़ रुपये हो गया। भारतीय स्टेट बैंक ने 30,414.89 करोड़ रुपये जोड़े, जिससे इसका मूल्यांकन 9,22,461.77 करोड़ रुपये पहुंच गया। हालांकि, टीसीएस के बाजार मूल्यांकन में 10,745.72 करोड़ रुपये की गिरावट आई और यह 11,75,914.62 करोड़ रुपये रह गया। इंफोसिस का मूल्यांकन 6,183.25 करोड़ रुपये घटा। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब बरकरार रखा।
- नयी दिल्ली. लग्जरी कार खंड में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की पैठ में 'जीएसटी 2.0' सुधारों के बाद लगभग तीन प्रतिशत की गिरावट हुई है। उद्योग से जुड़े लोगों ने बताया कि अब इंटरनल कंबशन इंजन (आईसीई) संस्करण वाली गाड़ियां स्वामित्व की कुल लागत के मामले में बेहतर विकल्प दे रही हैं। वैसे तो ये रुझान किफायती और मध्यम खंड में भी दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ऐसा शुरुआती लक्जरी खंड में खासतौर से देखा जा रहा है, जहां नई जीएसटी दरों के तहत ईवी और आईसीई के बीच कीमत का अंतर बढ़ गया है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ संतोष अय्यर ने बताया, ''अगर मैं अक्टूबर और नवंबर (2025) को देखूं, तो व्यापक बाजार के साथ ही लग्जरी में भी यह 2 से 3 प्रतिशत घटा है। अब ईवी की तुलना में आईसीई का टीसीओ बहुत बेहतर है। जब ये समीकरण बदलेगा, हम ईवी की पैठ में बदलाव देख सकते हैं।'' उन्होंने कहा कि यह उतार-चढ़ाव शुरुआती लग्जरी ईवी खंड में ज्यादा है, और मर्सिडीज-बेंज इंडिया के ज्यादातर ईवी मॉडल अत्यधिक लग्जरी खंड के हैं। मर्सिडीज-बेंज इंडिया की कुल बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी आठ प्रतिशत है, लेकिन 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की गाड़ियों में यह 20 प्रतिशत है। बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के अध्यक्ष और सीईओ हरदीप सिंह बरार ने कहा, ''हालांकि जीएसटी 2.0 ने हमारे आईसीई पोर्टफोलियो को और अधिक आकर्षक बना दिया है, लेकिन हम ईवी की मांग में भी मजबूत और निरंतर गति देख रहे हैं। आज ग्राहक केवल कीमत से प्रेरित नहीं हैं। वे स्थिरता, गाड़ी चलाने की कम लागत और भविष्य के लिए तैयार तकनीक को महत्व देते हैं।'' उन्होंने कहा कि बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया ने आईसीई मॉडल पर जीएसटी कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाया है, जिससे कीमतों में औसतन 6.7 प्रतिशत की कमी आई है।
- नयी दिल्ली । एलन मस्क के स्वामित्व वाली सोशल मीडिया साइट 'एक्स' अवैध सामग्री को हटाएगी और ऐसी सामग्री अपलोड करने वाले खातों को स्थायी रूप से निलंबित करेगी। एक्स ने रविवार को बताया कि वह जरूरत के अनुसार स्थानीय सरकारों के साथ काम करेगी। कंपनी के वैश्विक सरकारी मामलों के खाते से यह बयान जारी किया गया। इससे पहले उसने कहा था कि मंच की एआई सेवा 'ग्रोक' का उपयोग करके अवैध सामग्री बनाने वालों पर भी वैसी ही कार्यवाही होगी, जैसी अवैध सामग्री अपलोड करने वालों पर की जाती है। मस्क ने 'अनुचित छवियों' पर एक पोस्ट के जवाब में एक्स पर कहा, ''अवैध सामग्री बनाने के लिए ग्रोक का उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को वही परिणाम भुगतने होंगे, जैसा कि अवैध सामग्री अपलोड करने वालों के साथ होता है।'' एक्स के वैश्विक सरकारी मामलों ने अवैध सामग्री पर मस्क के रुख को दोहराया। इसमें कहा गया, ''हम एक्स पर बाल यौन शोषण सामग्री सहित अवैध सामग्री के खिलाफ कार्रवाई करते हैं, इसे हटाकर, खातों को स्थायी रूप से निलंबित करके और आवश्यकतानुसार स्थानीय सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते हैं।'' इसमें आगे कहा गया, ''अवैध सामग्री बनाने के लिए ग्रोक का उपयोग करने या उसे उकसाने वाले किसी भी व्यक्ति को वही परिणाम भुगतने होंगे जैसा कि अवैध सामग्री अपलोड करन वालों के साथ किया जाता है।'' भारत सरकार ने पाया है कि एक्स पर अश्लील, अभद्र और अन्य गैर-कानूनी सामग्री अपलोड की जा रही है जो स्थानीय कानूनों का उल्लंघन है।
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नई दिल्ली। बीएमडब्ल्यू मोटरराड ने एक नई इलेक्ट्रिक बाइक का कॉन्सेप्ट पेश किया है। इस बाइक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे चलाने के लिए हेलमेट की जरूरत नहीं होगी। इसमें कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं। साथ ही इसमें कई बेहतरीन फीचर्स दिए गए हैं।
1. डिजाइन जो सबसे अलग हैइसका लुक काफी मॉडर्न है। भारी-भरकम क्रोम वाली पारंपरिक बाइकों के उलट, यह बाइक स्लिम, शार्प और पूरी तरह से आधुनिक है। इसमें कैफे रेसर और साइबरपंक ( स्टाइल का मिश्रण देखने को मिलता है। फीचर्स की बात करें तो इसमें एलईडी लाइटिंग, पिछले हिस्से में एक बड़ा डिस्क-स्टाइल रिम और फ्लोटिंग बॉडीवर्क दिया गया है।2. हेलमेट की जरूरत नहींइस बाइक में एक खास स्ट्रक्चरल कैनोपी (ऊपरी ढांचा) और फोर-पॉइंट हार्नेस (सुरक्षा बेल्ट) दी गई है। यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। कंपनी का कहना है कि इस सुरक्षा घेरे के कारण राइडर को पारंपरिक मोटरसाइकल की तरह हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना जरूरी होगा। यह डिजाइन 25 साल पहले आई BMW C1 की याद दिलाता है, जिसमें ऐसा ही हेलमेट-फ्री जैसा डिजाइन था।3. परफॉर्मेंस और पावरयह कॉन्सेप्ट मौजूदा CE 04 बाइक पर आधारित है। हालांकि अभी सटीक आंकड़े नहीं आए हैं, लेकिन जिस प्लेटफॉर्म पर यह बाइक बनी है वह 31 kW (42 hp) की पावर देता है और इसकी टॉप स्पीड 120 किलोमटर प्रति घंटा है। यह शहर में चलने और छोटी हाईवे यात्राओं के लिए बेहतरीन है।4. क्या यह सच में सड़कों पर आएगी?BMW का कहना है कि यह सिर्फ एक डिजाइन नहीं है, बल्कि यह ब्रांड के भविष्य की दिशा दिखाता है। जल्द ही यह बाइक भी हमें हमें सड़कों पर देखने को मिल सकती है। अगर आप एक ऐसी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल का इंतजार कर रहे हैं जो न सिर्फ इंजन बदले बल्कि चलाने का पूरा एक्सपीरियंस ही बदल दे, तो BMW का यह नया कॉन्सेप्ट आपके लिए सही हो सकता है। -
नयी दिल्ली. सरकार ने संशोधित कर ढांचे के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर एक फरवरी से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने का निर्णय लिया है जिसमें लंबी एवं प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त मंत्रालय ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन को अधिसूचित करते हुए सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क तय किया है। यह शुल्क इन उत्पादों पर पहले से लागू 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा। नई शुल्क व्यवस्था एक फरवरी से प्रभावी होगी। मंत्रालय ने स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम को भी अधिसूचित किया है, जिसके तहत पान मसाला से जुड़े कारोबार की विनिर्माण क्षमता पर उपकर लगाया जाएगा। पान मसाला पर 40 प्रतिशत जीएसटी को ध्यान में रखते हुए कुल कर भार 88 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।
नया कर ढांचा तंबाकू उत्पादों पर लागू 28 प्रतिशत जीएसटी एवं क्षतिपूर्ति उपकर की मौजूदा व्यवस्था का स्थान लेगा। संशोधित ढांचे के तहत 65 मिलीमीटर तक की छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट पर प्रति स्टिक करीब 2.05 रुपये जबकि समान लंबाई की फिल्टर सिगरेट पर लगभग 2.10 रुपये अतिरिक्त शुल्क लगेगा। वहीं, 65 से 70 मिलीमीटर लंबाई वाली सिगरेट पर 3.6 से चार रुपये प्रति स्टिक, जबकि 70 से 75 मिलीमीटर लंबाई वाली प्रीमियम सिगरेट पर करीब 5.4 रुपये प्रति स्टिक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। ‘अन्य' श्रेणी में आने वाली असामान्य या गैर-मानक डिजाइन की सिगरेट पर 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक शुल्क तय किया गया है। हालांकि, सिगरेट के अधिकांश लोकप्रिय ब्रांड इस श्रेणी में नहीं आते हैं। चबाने वाले एवं जर्दा-युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पर क्रमशः 82 प्रतिशत एवं 91 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। एक फरवरी से सिगरेट, पान मसाला, सिगार, हुक्का, जर्दा एवं सुगंधित तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी जबकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू रहेगा। वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा-युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण एवं शुल्क संग्रह) नियम, 2025 को भी अधिसूचित किया है। इस नियम के तहत संबंधित उत्पादों के विनिर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और फुटेज को न्यूनतम 24 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। विनिर्माताओं को मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी उत्पाद शुल्क अधिकारियों को देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार 15 दिन या उससे अधिक समय तक बंद रहती है तो उस अवधि के लिए विनिर्माता उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य तंबाकू उत्पादों पर उनके गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ को सुनिश्चित करना और भारत की कर व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के करीब लाना है। भारत में जुलाई, 2017 में जीएसटी प्रणाली लागू होने के बाद पिछले सात वर्षों से सिगरेट पर कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। विश्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक, भारत में सिगरेट पर कुल कर भार खुदरा कीमत का करीब 53 प्रतिशत है, जो तंबाकू खपत में प्रभावी कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा सुझाए गए 75 प्रतिशत या उससे अधिक के मानक कर बोझ से काफी कम है। ब्रिटेन एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में सिगरेट पर कर भार 80-85 प्रतिशत से अधिक है जबकि न्यूजीलैंड, फ्रांस और कई यूरोपीय देशों में 75-80 प्रतिशत से ऊपर है। पान मसाला पर उपकर और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर संसद ने पिछले महीने मंजूरी दे दी थी। जीएसटी परिषद ने पिछले वर्ष सितंबर में क्षतिपूर्ति उपकर व्यवस्था समाप्त होने के बाद जीएसटी के ऊपर उपकर एवं उत्पाद शुल्क लगाने की व्यवस्था लाने का निर्णय लिया था। कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र द्वारा लिए गए 2.69 लाख करोड़ रुपये के ऋण का भुगतान 31 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाना है। -
नयी दिल्ली. मनीष राज गुप्ता ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया। आरआईएनएल ने एक बयान में कहा कि गुप्ता ‘स्टील ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) में निदेशक (तकनीकी, परियोजना और कच्चामाल) के पद पर हैं। प्रबंधन में स्नात्कोत्तर, गुप्ता वर्ष 1991 में कंपनी के दुर्गापुर स्टील प्लांट में प्रशिक्षु (टेक्निकल) के तौर पर सेल में शामिल हुए थे और तब से उन्होंने सेल की अलग-अलग इकाइयों में काम किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को आरआईएनएल के अतिरिक्त चेयरमैन' और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) का प्रभार संभाला।
इस्पात मंत्रालय के तहत, आरआईएनएल भारत में इस्पात बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी है। - रायपुर। इंडियन स्टील एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन जिन्दल ने कहा है कि फ्लैट स्टील उत्पादों पर ‘सेफगार्ड ड्यूटी’ लगाना सरकार का एक सोच-समझकर लिया गया संतुलित कदम है। इसका उद्देश्य घरेलू स्टील बाज़ार को स्थिर रखना है, ताकि उपभोक्ताओं और देश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को स्टील की लगातार और भरोसेमंद आपूर्ति मिलती रहे।श्री जिन्दल ने कहा कि आज जब दुनिया का स्टील उद्योग कमजोर मांग और अतिरिक्त उत्पादन की समस्या से जूझ रहा है, तब भारत का स्टील सेक्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह प्रगति बढ़ती घरेलू मांग और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहे निरंतर निवेश का परिणाम है। लेकिन इसी बढ़ती मांग को देखते हुए चीन, जापान, कोरिया और वियतनाम जैसे देशों से सस्ते स्टील को भारत में खपाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर हमारी घरेलू क्षमता, नए निवेश और रोजग़ार पर पड़ता है। सेफगार्ड ड्यूटी ऐसे दबाव को रोकने में मदद करती है। यह अनुचित प्रतिस्पर्धा से घरेलू उद्योग की रक्षा करती है, बाज़ार में संतुलन बनाए रखती है और स्टील वैल्यू चेन को मजबूत करती है।श्री जिन्दल ने कहा कि इसी संतुलन से उद्योग आत्मनिर्भर बनता है और देश के हित सुरक्षित रहते हैं। इसलिए मौजूदा वैश्विक आपूर्ति असंतुलन को देखते हुए, घरेलू स्टील क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास के लिए सरकार से आगे भी ऐसे आवश्यक व्यापारिक उपायों पर विचार किए जाने की हमें उम्मीद है।
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नयी दिल्ली. दिसंबर महीने में सकल जीएसटी संग्रह 6.1 प्रतिशत बढ़कर 1.74 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। करों में कटौती के बाद घरेलू बिक्री राजस्व में वृद्धि सुस्त रहने से जीएसटी संग्रह की रफ्तार नरम पड़ी है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। दिसंबर 2024 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में घरेलू लेनदेन से सकल राजस्व 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया जबकि आयातित वस्तुओं से राजस्व 19.7 प्रतिशत बढ़कर 51,977 करोड़ रुपये रहा। दिसंबर में कर ‘रिफंड' 31 प्रतिशत बढ़कर 28,980 करोड़ रुपये रहा।
शुद्ध जीएसटी राजस्व (कर रिफंड समायोजन के बाद) 1.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2.2 प्रतिशत अधिक है। पिछले महीने उपकर संग्रह घटकर 4,238 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 12,003 करोड़ रुपये था। उल्लेखनीय है कि 22 सितंबर, 2025 से लगभग 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी गईं। इससे सामान सस्ता हुआ है। इसके अलावा पहले की तरह विलासिता, अहितकर वस्तुओं पर क्षतिपूर्ति उपकर अब नहीं लगाया जाता है। अब केवल तंबाकू एवं संबंधित उत्पादों पर ही यह लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह प्रभावित हुआ है। -
नयी दिल्ली. विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) या विमान ईंधन की कीमत में 7.3 प्रतिशत की कटौती की गई जबकि वाणिज्यिक एलपीजी 111 रुपये प्रति सिलेंडर महंगा किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने वैश्विक ईंधन मानकों के अनुरूप अपने मासिक मूल्य संशोधन को लागू किया। सार्वजनिक क्षेत्र के ईंधन खुदरा विक्रेताओं के अनुसार, दिल्ली में एटीएफ की कीमत 7,353.75 रुपये प्रति किलोलीटर या 7.3 प्रतिशत की कटौती के साथ 92,323.02 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई। कीमतों में तीन महीने लगातार बढ़ोतरी करने के बाद यह कटौती गई। कीमतों में एक दिसंबर को प्रति किलोलीटर 5,133.75 रुपये या 5.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इससे पहले एक नवंबर को करीब एक प्रतिशत तथा एक अक्टूबर को 3.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। बृहस्पतिवार को घोषित कटौती से एक अक्टूबर से हुई मूल्य वृद्धि के दो-तिहाई से अधिक हिस्से की भरपाई हो गई है। इस नवीनतम कटौती से विमानन कंपनियों पर दबाव कम होने की उम्मीद है जिनके परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। मूल्य परिवर्तन के प्रभाव पर विमानन कंपनियों ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। मुंबई में एटीएफ की कीमत संशोधित होकर 86,352.19 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई जबकि चेन्नई और कोलकाता में कीमतें क्रमशः 95,770 रुपये और 95,378.02 रुपये प्रति किलोलीटर पर पहुंच गई। स्थानीय करों के कारण शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं। इसके साथ ही दिल्ली में होटल व रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी करते हुए 111 रुपये की वृद्धि की गई है जिससे इसकी कीमत बढ़कर 1,691.50 रुपये हो गई है। दो बार मासिक कटौती के बाद अब कीमतों में यह वृद्धि हुई है। 19 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत में आखिरी कटौती एक दिसंबर को 15.50 रुपये प्रति सिलेंडर की गई थी। इससे पहले प्रति सिलेंडर कीमत में पांच रुपये की कटौती की गई थी। व्यावसायिक एलपीजी की कीमतें अब पिछले साल जून के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर हैं। घरेलू रसोई में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कीमतें अप्रैल 2025 में 50 रुपये की बढ़ोतरी के बाद 853 रुपये प्रति 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर अपरिवर्तित रहीं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अंतरराष्ट्रीय मानकों और विनिमय दर के आधार पर हर महीने की पहली तारीख को एटीएफ और एलपीजी की कीमतों में संशोधन करते हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले साल मार्च में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी। तब से कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में फिलहाल पेट्रोल की कीमत 94.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 87.62 रुपये प्रति लीटर है।
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि बैंकों की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात में आगे भी सुधार जारी रहने की संभावना है और मार्च 2027 तक यह घटकर 1.9 प्रतिशत रह सकता है। यह अनुमान सामान्य परिस्थितियों के आधार पर लगाया गया है। रिजर्व बैंक ने अपनी छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में बताया कि सितंबर 2025 तक सकल एनपीए अनुपात 2.1 प्रतिशत पर आ गया था, जो कई दशकों का निचला स्तर है। रिपोर्ट के अनुसार, 46 बैंकों का संयुक्त सकल एनपीए अनुपात सितंबर 2025 के 2.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 में 1.9 प्रतिशत हो सकता है। हालांकि, यदि आर्थिक स्थिति प्रतिकूल रहती है, तो यह अनुपात 3.2 प्रतिशत से 4.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। पूंजी की स्थिति पर रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों में पूंजी जोखिम-भारित परिसंपत्तियों का अनुपात (सीआरएआर) के पास नुकसान सहने के लिए पर्याप्त पूंजी मौजूद है। सितंबर 2025 तक सार्वजनिक क्षेत्र बैंकों में यह 16 प्रतिशत और निजी बैंकों में 18.1 प्रतिशत है। इससे बैंक आर्थिक झटकों का सामना कर सकते हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार, यदि आर्थिक हालात बहुत खराब हो जाते हैं, तो भी अधिकांश बैंक टिके रह सकते हैं। हालांकि, ऐसे हालात में कुछ बैंकों की पूंजी कम हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों के तहत, 46 प्रमुख अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) का कुल सीआरएआर सितंबर 2025 में 17.1 प्रतिशत से घटकर मार्च 2027 तक 16.8 प्रतिशत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वृद्धि में नरमी और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रतिकूल परिदृश्यों के तहत यह घटकर क्रमशः 14.5 प्रतिशत और 14.1 प्रतिशत तक हो सकता है। इसमें यह भी कहा गया है, ‘‘दबाव परीक्षण से पता चला है कि निजी बैंकों और विदेशी बैंकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की पूंजी में अपेक्षाकृत अधिक कमी आई है।" रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गंभीर संकट की स्थिति में, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की कुल संपत्ति में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले छह बैंक सीआरएआर के मामले में न्यूनतम स्तर से नीचे जा सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का कुछ बड़े कर्जदारों पर निर्भर रहना कम हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है। कुल कर्ज में बड़े कर्जदारों की हिस्सेदारी लगभग 44 प्रतिशत बनी हुई है, लेकिन खराब कर्ज में उनकी हिस्सेदारी घटकर 33.8 प्रतिशत रह गई है। कमाई के मामले में रिपोर्ट बताती है कि बैंकों की ब्याज से होने वाली आय की बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी है। सितंबर 2025 में यह वृद्धि घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई। इसकी एक वजह ब्याज दरों में कटौती है।
- नयी दिल्ली. महाराष्ट्र में उत्पादन में भारी बढ़ोतरी के कारण, चालू सत्र 2025-26 के पहले तीन महीनों में भारत का चीनी उत्पादन 23.43 प्रतिशत बढ़कर एक करोड़ 18.3 लाख टन हो गया। सहकारिता निकाय एनएफसीएसएफ ने बुधवार को यह कहा। पिछले साल इसी समय, चीनी उत्पादन 95.6 लाख टन था, जबकि पूरे 2024-25 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) में कुल उत्पादन दो करोड़ 618 लाख टन रहा। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने एक बयान में कहा कि 31 दिसंबर तक, लगभग 499 मिलों ने 13.4 करोड़ टन गन्ने की पेराई की, जिससे 8.83 प्रतिशत की औसत चीनी प्राप्ति दर पर 1.18 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ। देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 2025-26 सत्र के अक्टूबर-दिसंबर के दौरान बढ़कर 35.6 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी समय में 32.6 लाख टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य, महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 29.9 लाख टन से 63 प्रतिशत बढ़कर 48.7 लाख टन हो गया, जबकि कर्नाटक में उत्पादन इसी समय में 20.5 लाख टन से बढ़कर 22.1 लाख टन हो गया। इस दौरान गुजरात में चीनी का उत्पादन बढ़कर 2,85,000 टन, बिहार में 1,95,000 टन और उत्तराखंड में 1,30,000 टन हो गया। एनएफसीएसएफ ने 2025-26 सत्र के लिए 3.15 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है, जिसमें एथनॉल के लिए 35 लाख टन का स्थानांतरण शामिल नहीं है।
- नयी दिल्ली. सरकार ने एक जनवरी से रेफ्रिजरेटर, टीवी, एलपीजी गैस चूल्हा एवं कूलिंग टॉवर जैसे कई उपकरणों पर ऊर्जा दक्षता वाली स्टार रेटिंग को अनिवार्य कर दिया है। बिजली मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) की गजट अधिसूचना के मुताबिक, इस नए नियम का विस्तार डीप फ्रीजर, वितरण ट्रांसफॉर्मर और ग्रिड से जुड़े सोलर इनवर्टर पर भी होगा। उल्लेखनीय है कि बीईई का स्टार रेटिंग ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में से एक है। इसके तहत उपकरणों पर एक से पांच स्टार की रेटिंग दी जाती है जो बताता है कि संबंधित उपकरण कितनी बिजली खपत करेगा। पहले फ्रॉस्ट-फ्री एवं डायरेक्ट कूल रेफ्रजरेटर, डीप रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर (कैसेट, फ्लोर स्टैंडिंग टावर, सीलिंग, कॉर्नर एसी), रंगीन टीवी और अल्ट्रा एचडी टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर स्टार रेटिंग को दर्शाना स्वैच्छिक था। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि स्टार-रेटिंग वाले उपकरणों की सूची समय-समय पर अद्यतन की जाती है। जुलाई 2025 में इन उपकरणों के लिए मसौदा नियम जनता से सुझाव लेने के लिए जारी किए गए थे और नए बदलाव इन्हीं सुझावों पर आधारित हैं। पहले भी रूम एयर कंडीशनर, इलेक्ट्रिक सीलिंग फैन, इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर, वाशिंग मशीन, ट्यूबलर फ्लोरसेंट लैंप और सेल्फ-बैलास्टेड एलईडी लैंप पर स्टार-रेटिंग अनिवार्य था। अधिकारी ने बताया कि अब इन उपकरणों के लिए नियम पहले से अधिक ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन किए गए हैं।
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नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला ने कहा है कि 2026 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगा, जब इसका फोकस केवल चर्चा और प्रयोगों से हटकर वास्तविक जीवन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की ओर बढ़ेगा।
एक ब्लॉग पोस्ट में नडेला ने कहा कि AI उद्योग अब आकर्षक डेमो और दिखावे से आगे बढ़कर यह समझने की दिशा में है कि यह तकनीक असल में कहां और कैसे लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने माना कि AI की क्षमता तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसका व्यावहारिक इस्तेमाल उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पाया है।नडेला ने इस स्थिति को “मॉडल ओवरहैंग” बताया, यानी AI मॉडल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी, कारोबार और समाज में जितना लागू हो पा रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा तेज़ी से विकसित हो चुके हैं। उन्होंने लिखा कि हम अभी AI की लंबी यात्रा की शुरुआती अवस्था में हैं और इसके भविष्य को लेकर कई सवाल अभी भी खुले हैं।उन्होंने कहा कि आज AI की कई क्षमताएं अभी तक बड़े स्तर पर उत्पादकता, फैसले लेने की प्रक्रिया और मानव जीवन को बेहतर बनाने में पूरी तरह तब्दील नहीं हो पाई हैं। निजी कंप्यूटर के शुरुआती दौर का जिक्र करते हुए नडेला ने स्टीव जॉब्स के उस विचार को याद किया, जिसमें कंप्यूटर को “दिमाग की साइकिल” कहा गया था। उनका कहना है कि AI के युग में इस सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है।नडेला ने स्पष्ट किया कि AI को इंसानी सोच की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उसे मजबूत करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए, ताकि यह लोगों को अपने लक्ष्य ज्यादा बेहतर तरीके से हासिल करने में मदद कर सके। उनके अनुसार, AI की असली ताकत इस बात में नहीं है कि मॉडल कितना शक्तिशाली है, बल्कि इस बात में है कि लोग उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।उन्होंने कहा कि AI से असली बदलाव तभी आएगा जब उद्योग केवल मॉडल बनाने से आगे बढ़कर पूरे सिस्टम विकसित करेगा, जिनमें सही सॉफ्टवेयर, काम करने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय शामिल हों। नडेला ने यह भी माना कि AI तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा सिस्टम में अभी भी कई सीमाएं और चुनौतियां हैं, जिन्हें सावधानी से संभालने की जरूरत है। - नयी दिल्ली. सरकार ने हर वित्त वर्ष में 50,000 टन तक जैविक चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। यह निर्यात एपीडा (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात संवर्धन प्राधिकार) के नियमों पर निर्भर है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘जैविक चीनी के निर्यात... की अनुमति है, जो एपीडा द्वारा अलग से तय किए गए तरीकों के हिसाब से हर वित्त वर्ष में 50,000 टन की कुल मात्रा के तहत है।'' जैविक चीनी बिना कीटनाशक और उर्वरकों के उगाए गए गन्ने से बनती है। यह जैविक खेती और प्रसंस्करण मानकों का भी पालन करती है।
- जोहानिसबर्ग. इस साल दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाली आधी कारें किसी-न-किसी रूप में भारत से संबंधित हैं। ये कारें या तो महिंद्रा एवं टाटा जैसी भारतीय कंपनियों द्वारा विनिर्मित हैं या फिर इन कारों के कलपुर्जे भारत में बने हुए हैं। बाजार सूचना फर्म लाइटस्टोन की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, बिक्री आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने, खासकर अपनी ‘पिकअप' शृंखला के जरिये अग्रणी भूमिका निभाई है। लाइटस्टोन ने कहा कि वर्ष 2024 में दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाले जापानी कार कंपनियों के 84 प्रतिशत हल्के वाहन भारत से आयात किए गए थे, जबकि केवल 10 प्रतिशत वाहन ही वास्तविक रूप से जापान में विनिर्मित थे। आमतौर पर चीनी ब्रांडों की बढ़ती मौजूदगी को स्थानीय वाहन निर्माताओं के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है, लेकिन इन आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में आयातित अधिकांश कारों का वास्तविक स्रोत भारत है। रिपोर्ट कहती है कि दक्षिण अफ्रीका में बिकने वाले कुल वाहनों में से 36 प्रतिशत वाहन भारत से सीधे या जापानी और कोरियाई स्थापित ब्रांडों के जरिए परोक्ष रूप से आयात किए गए थे। यह हिस्सेदारी स्थानीय स्तर पर उत्पादित वाहनों के 37 प्रतिशत योगदान से थोड़ी ही कम है। लाइटस्टोन के आंकड़ों का हवाला देते हुए ‘इंडिपेंडेंट ऑनलाइन' वेबसाइट ने कहा है कि यदि पिकअप और हल्के वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री को अलग कर दिया जाए, तो 2025 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग आधी हो गई। लाइटस्टोन के मुताबिक, वर्ष 2025 के पहले पांच महीनों में कुल यात्री वाहन बिक्री में से 49 प्रतिशत वाहन भारत से आयात किए गए थे। इनमें से अधिकांश वाहन भारत में मारुति सुजुकी के परिचालन से आते हैं। लाइटस्टोन के वाहन विश्लेषक एंड्रयू हिबर्ट ने कहा, “भारत से आने वाले वाहनों की बिक्री में वृद्धि का श्रेय इस तथ्य को दिया जा सकता है कि बड़ी संख्या में वाहन विनिर्माता अब भारत में उत्पादन कर रहे हैं, जहां श्रम और कुल विनिर्माण लागत अपेक्षाकृत कम है।” विश्लेषकों ने कहा कि इस रुझान से खरीदारों को कीमतों में राहत मिल रही है, लेकिन यह स्थानीय वाहन उद्योग के लिए चिंता का विषय है।

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