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नयी दिल्ली. केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति ने बुधवार को कहा कि ईपीएफओ जल्द ही अंतिम भविष्य निधि निकासी दावों के निपटान की प्रक्रिया को स्वचालित करेगा। इससे आवेदक के बैंक खातों में पैसे के अंतरण में तेजी आएगी। केंद्रीय भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सात करोड़ से अधिक अंशधारक हैं।
वर्तमान में, पांच लाख रुपये तक की आंशिक या अग्रिम निकासी दावों का निपटान स्वचालित रूप से किया जाता है। स्वचालित निपटान के लिए समयसीमा दावा दाखिल करने की तिथि से तीन दिन है। उद्योग मंडल एसोचैम के नए श्रम संहिता पर आयोजित एक कार्यक्रम में कृष्णमूर्ति ने कहा, ''हम फिलहाल जहां तक संभव हो, स्वचालित निपटान शुरू करने जा रहे हैं...। यह अबतक केवल अग्रिम निकासी के लिए उपलब्ध था। अब हम अंतिम निकासी के लिए भी स्वचालित निपटान शुरू कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियोक्ता बदलता है, तो ईपीएफओ भविष्य निधि खातों के स्वचालित निपटान और स्वचालित अंतरण की सुविधा भी शुरू कर रहा है। कृष्णमूर्ति ने कहा, ''अब आपको कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं है। हम आपके खातों को आपके नये सदस्य खाते में स्वतः अंतरित करने का प्रयास करेंगे।'' चारों श्रम संहिताओं को पूर्णतः कार्यान्वित करने और उनके अंतर्गत नियम प्रकाशित करने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि परिभाषाओं और अन्य शब्दों को सरल बनाने, संहिताबद्ध करने और मानकीकृत करने के लिए भरसक प्रयास किए गए हैं। सरकार ने आठ मई को चारों नई श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि ईपीएफओ से संबंधित अगली अधिसूचनाएं शीघ्र ही प्रकाशित की जाएंगी।
नए कानूनी ढांचे के तहत, तीन योजनाएं ... ईपीएफ योजना 1952, कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना 1976 और कर्मचारी पेंशन योजना 1995... भी पुनः अधिसूचित की जाएंगी। उन्होंने कहा, ''हमने कोई बड़े बदलाव नहीं किए हैं। हमने अतीत से जो भी सीखा है, उसे शामिल करने का प्रयास किया है। हमने केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा हाल ही में अनुमोदित सभी निर्णयों को शामिल किया है, जिनमें निकासी को सरल बनाना और अन्य सुधार शामिल हैं। साथ ही छूट प्राप्त न्यासों से संबंधित प्रावधानों में व्यापक संशोधन भी किया गया है। इन्हें नई योजनाओं में शामिल किया गया है।'' केंद्रीय श्रम सचिव वंदना गुरनानी ने कहा कि श्रम संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य अपने नियम स्वयं बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का सिद्धांत अनुपालन में कमी, कारोबार को सुगम बनाना, व्यापार विस्तार में आसानी और यह सुनिश्चित करना रहा है कि श्रमिकों के साथ कोई अन्याय न हो। गुरनानी ने कहा कि अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि सुधार को केवल अनुपालन सूची के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे एक खुशहाल, स्वस्थ और उत्पादक कार्यबल के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जाए। -
नयी दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक लाभांश दिए जाने की संभावना है। इससे केंद्र को पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए वित्तीय मदद मिल सकेगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी। आरबीआई ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लाभांश दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था। सूत्रों ने बताया कि आरबीआई इस महीने होने वाली अपनी निदेशक मंडल की बैठक में लाभांश की राशि पर निर्णय ले सकता है। किसी भी वित्त वर्ष के लिए हस्तांतरण योग्य अधिशेष का निर्धारण आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा स्वीकृत संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे (ईसीएफ) के आधार पर किया जाता है। संशोधित ढांचे के अनुसार, आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) के तहत जोखिम प्रावधान आरबीआई के बही-खाते के 4.50 से 7.50 प्रतिशत के बीच बनाए रखना होता है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, केंद्र को 2026-27 में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लाभांश और अधिशेष के रूप में 3.16 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है जो चालू वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 3.75 प्रतिशत अधिक है। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने सतर्क अनुमान लगाया है लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लाभांश भुगतान बजट अनुमान से अधिक हो सकता है क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 2025-26 में भी रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, स्वस्थ ऋण विस्तार और अधिक आय ने 2025-26 के दौरान पीएसबी की लाभप्रदता में सुधार किया है। कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि कुल शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। लगातार चौथे वर्ष पीएसबी ने समग्र लाभ अर्जित किया है। बजट दस्तावेजों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य निवेश से लाभांश 75,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के 71,000 करोड़ रुपये से अधिक है। लाभांश और आरबीआई के अधिशेष हस्तांतरण गैर-कर राजस्व की श्रेणी में आते हैं।
केंद्र को कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष 2026-27 में गैर-कर राजस्व के रूप में 6.66 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जो 2025-26 के 6.67 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा कम है। करों से होने वाली आय 28.66 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है जो 2025-26 के 26.74 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 7.18 प्रतिशत अधिक है।
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देख क्या रहा आज का भाव
नयी दिल्ली. सरकार के बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क 15 प्रतिशत किए जाने के बाद बुधवार को स्थानीय बाजार में सोने की कीमत 8,550 रुपये बढ़कर 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर पहुंच गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी की कीमत 20,500 रुपये बढ़कर 2,97,500 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो कल 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) थी। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 8,550 रुपये या पांच प्रतिशत से अधिक बढ़कर 1,65,350 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गया। इसका पिछला बंद भाव 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। इसके परिणामस्वरूप सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी कर में बदलाव किए गए हैं। ये नए शुल्क बुधवार से लागू हो गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद एवं विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों के आह्वान के बाद यह घोषणा की गई है। स्थानीय कारोबारियों ने कहा कि बढ़े हुए शुल्क का वास्तविक प्रभाव आने वाले दिनों में तब दिखाई देगा जब यह खरीद लागत में परिलक्षित होने लगेगा। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख (जिंस) हरीश वी. ने कहा, '' भारत में सोने पर आयात शुल्क में हालिया बढ़ोतरी से स्थानीय कीमतें बढ़ने एवं भौतिक मांग पर अस्थायी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। वैश्विक अनिश्चितता तथा घरेलू मुद्रा दबाव के समय सोना सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षक बना रहता है।'' विश्लेषकों ने कहा कि कमजोर रुपये ने भी बहुमूल्य धातुओं की कीमतों को बढ़ाया है।
विदेशी मुद्रा निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की चिंता के बीच रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.80 के निचले स्तर तक गिर गया। भारत बहुमूल्य धातुओं का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और हाल के महीनों में निवेश सहित मांग में लगातार वृद्धि के कारण कीमतों में तेजी आई है। रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद ने हालांकि आगाह किया कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने से आयात कम नहीं होता, बल्कि कीमतें बढ़ती हैं। आभूषण खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय सोने-चांदी के आयात पर मात्रात्मक अंकुश लगाना देश के चालू खाते के घाटा (कैड) को नियंत्रित करने का अधिक प्रभावी तरीका होगा। वैश्विक बाजार में बुधवार को ब्रेंट कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना हालांकि 0.3 प्रतिशत टूटकर 4,700.86 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी एक प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 87.45 डॉलर प्रति औंस हो गई।
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नयी दिल्ली. अमूल ने बुधवार को बढ़ती लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की। नई दरें कल यानी 14 मई से लागू होंगी। गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) अमूल ब्रांड के तहत अपने उत्पाद बेचती है। पिछली बार कीमतों में बढ़ोतरी एक मई, 2025 को की गई थी।
जीसीएमएमएफ ने बयान में कहा कि उसने ''पूरे भारत में दूध की कीमतें 14 मई से दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी हैं।'' उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी लगभग 2.5-3.5 प्रतिशत प्रति लीटर की है, जो औसत खाद्य महंगाई दर से कम है। जीसीएमएमएफ ने कहा, ''कीमतों में यह बढ़ोतरी दूध के परिचालन और उत्पादन की कुल लागत में वृद्धि के कारण की जा रही है। इस साल पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।'' इस सहकारी संस्था ने बताया कि उसके सदस्य संघों ने भी किसानों से दूध खरीदने की कीमत में 30 रुपये प्रति किलोग्राम वसा (फैट) की बढ़ोतरी की है, जो मई, 2025 की तुलना में 3.7 प्रतिशत अधिक है। जीसीएमएमएफ भारत में दूध के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के बीच रुपये को सहारा देने के लिए सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। ये दरें बुधवार से प्रभावी हो गई हैं।
वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में मंगलवार देर रात अधिसूचना जारी की । इसके अनुसार, सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर 10 फीसदी मूल सीमा शुल्क और 5 फीसदी कृषि अवसंरचना और विकास उपकर लगाया है। इससे प्रभावी आयात कर 6 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हो गया है। यह दरें आज13 मई से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना 16/2026 में सीमा शुल्क के माध्यम से कीमती धातुओं और उनसे बनी चीजों (निष्कर्ष) के लिए सीमा शुल्क दरों को अपडेट किया है।अधिसूचना के मुताबिक, सोना और चांदी से बनी चीजों पर पांच फीसदी शुल्क लगेगा, जबकि प्लैटिनम से बनी चीजों पर यह दर 5.4 फीसदी होगी। इसके अलावा कीमती धातुओं से बने इस्तेमाल हो चुके कैटेलिस्ट पर 4.35 फीसदी शुल्क निर्धारित किया गया है, बशर्ते संबंधित अनुपालन मानदंडों को पूरा किया जाए। -
नयी दिल्ली. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद दो महीने के ईंधन भंडार के साथ भारत को आपूर्ति को लेकर कोई चिंता नहीं है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं और खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं किया गया, तो सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों को एक ही तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि एक स्तर पर इस बात का आकलन करना होगा कि पेट्रोलियम कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) कब तक बेच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में मंत्री ने कहा, ''हमारे पास आपूर्ति से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।'' उन्होंने बताया कि भारत ने संकट की शुरुआत पर्याप्त भंडार के साथ की थी और तब से घरेलू एलपीजी उत्पादन को 36,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है। साथ ही, मंत्री ने खुदरा कीमतों को स्थिर रखने से बढ़ रहे वित्तीय दबाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ''मेरी पेट्रोलियम कंपनियों रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।'' उन्होंने बताया कि लागत और बिक्री मूल्य का कुल अंतर बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गया है और एक तिमाही में एक लाख करोड़ रुपये का घाटा पूरे क्षेत्र के वार्षिक लाभ को खत्म कर सकता है। पिछले 10 सप्ताह से पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद, सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) ने बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित की है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद, पेट्रोल और डीजल दो साल पुरानी दरों पर ही मिल रहे हैं। इस समय कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये, डीजल पर 42 रुपये और रसोई गैस पर 674 रुपये प्रति सिलेंडर का घाटा हो रहा है। पुरी ने ऊर्जा संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दूरदर्शी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि कल से कोई लॉकडाउन या राशनिंग (खरीद की सीमा) लागू होने वाली है, बल्कि यह भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का एक संदेश है। उन्होंने उद्योगों और घरों से अपील की कि वे जहां संभव हो एलपीजी से पीएनजी की ओर बढ़ें, क्योंकि भारत गैस पाइपलाइन नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रहा है। मंत्री ने बताया कि भारत के पास इस वक्त लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का एलएनजी भंडार और 45 दिन का एलपीजी भंडार है।
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नयी दिल्ली. मूडीज रेटिंग्स ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान मंगलवार को 0.8 प्रतिशत अंक घटाकर छह प्रतिशत कर दिया। यह कटौती निजी खपत और औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती के साथ-साथ ऊंची ऊर्जा लागत के कारण की गई है। साख निर्धारण एजेंसी ने अपनी 'ग्लोबल मैक्रो आउटलुक' के मई संस्करण में कहा कि अगले छह महीनों में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी तथा ईंधन एवं उर्वरक की कमी का असर विभिन्न देशों में अलग-अलग होगा जो उनकी निर्भरता तथा लचीलेपन पर निर्भर करेगा। एजेंसी ने कहा, '' वैश्विक परिदृश्य अत्यधिक अनिश्चित बना हुआ है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की स्थिति नाजुक है। हम भारत के लिए वृद्धि दर में करीब 0.8 प्रतिशत अंक तक की गिरावट का अनुमान लगाते हैं।'' इसके अलावा, 2027 (कैलेंडर वर्ष) के लिए भी मूडीज रेटिंग्स ने भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर का अनुमान 0.5 प्रतिशत अंक घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति में सुधार और शिपिंग प्रवाह के सामान्य होने के साथ ये दबाव धीरे-धीरे कम होंगे एवं आर्थिक गतिविधियां सुधरेंगी। मूडीज ने साथ ही कहा कि भारत ऊंची तेल कीमतों के प्रति ''विशेष रूप से संवेदनशील'' है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव शक्तिकांत दास ने सोमवार को भारतीय उद्योग को मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपने कारोबार के रणनीतिक पुनर्संयोजन का सुझाव देते हुए कहा कि आपूर्ति के एक ही स्रोत पर निर्भरता घटाकर आपूर्ति शृंखला में विविधता लानी चाहिए। दास ने यहां उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में कहा कि वैश्विक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनाव के दौर में सीमित बाजारों या भौगोलिक क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता से खासकर निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ता है। उन्होंने कहा, "बाजार में विविधता लाने से जोखिम का बंटवारा होगा, राजस्व स्थिर रहेगा और कंपनियों को वृद्धि के नए क्षेत्रों और मांग के अवसर मिलेंगे।" दास ने कहा, "भू-आर्थिक विखंडन और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के इस दौर में भारतीय उद्योग के लिए अपने कारोबार का रणनीतिक पुनर्संयोजन करना जरूरी हो गया है, क्योंकि 'कॉर्नर सॉल्यूशन' मॉडल अब कम प्रभावी होता जा रहा है।" 'कॉर्नर सॉल्यूशन' का मतलब उत्पादन या आपूर्ति के लिए किसी एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भर रहना है। इसमें आपूर्ति शृंखला का 'जस्ट-इन-टाइम' मॉडल भी शामिल होता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा संदर्भ में कॉरपोरेट जगत के लिए अपनी लागत न्यूनतम रखने के बजाय 'जुझारूपन को अधिकतम करना' अब प्राथमिकता बनती जा रही है, जो लंबी अवधि में अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। दास ने कहा कि सरकार ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर, बुनियादी ढांचे पर बढ़ते पूंजीगत व्यय और विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) जैसे कई कदम उठाए हैं तथा सुधारों को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। बुनियादी ढांचा निवेश पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि होने से देश में बड़ी-बड़ी अवसंरचना परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत को एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में पेश करती हैं। दास ने घरेलू उद्योगों के लिए सात रणनीतियों का सुझाव दिया जिनमें संगठनात्मक मजबूती बढ़ाना, बही-खाते को मजबूत करना, नई आपूर्ति शृंखला विकसित करना, कौशल उन्नयन, नए बाजारों में विस्तार, भविष्य की तैयारी के लिए निवेश और शोध एवं विकास पर जोर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत स्थिरता और समय पर सुधारों के जरिये भारत न केवल व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी और समावेशी अर्थव्यवस्था के रूप में भी उभरेगा।
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नयी दिल्ली. सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारियों के संगठन एनआईटीईएस ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय से एक परामर्श जारी करने का आग्रह किया है, जिसमें आईटी और आईटीईएस क्षेत्रों के लिए जहां भी संभव हो, 'वर्क फ्रॉम होम' अनिवार्य करने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह मांग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए हाल ही में कुछ विशेष उपाय करने के आह्वान के बाद की गई। मंत्रालय को सौंपे गए एक औपचारिक प्रतिवेदन में नैसेंट इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एम्प्लॉइज सीनेट (एनआईटीईएस) ने कहा कि लाखों आईटी पेशेवरों के दैनिक आवागमन को कम करने से ईंधन संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण सहित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। एनआईटीईएस के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा, ''भारतीय आईटी क्षेत्र ने कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पादकता या व्यावसायिक निरंतरता में बाधा डाले बिना बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम को सफलतापूर्वक लागू किया था। इस क्षेत्र में दूर से काम करके राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का समर्थन करने के लिए बुनियादी ढांचा और क्षमता दोनों मौजूद हैं।'' संगठन ने कहा कि घर से काम करने से न केवल अनावश्यक यात्रा और ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, बल्कि कर्मचारियों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। साथ ही डिजिटल संचालन व आर्थिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी। दूसरी ओर, आईटी उद्योग की संस्था नैसकॉम ने सोमवार को कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां घर से या मिलेजुले रूप से काम करने सहित विवेकपूर्ण प्रबंधन उपाय अपना रही हैं। संस्था ने एक बयान में कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र स्थापित हाइब्रिड वर्क मॉडल पर काम कर रही हैं।
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मुंबई. पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक वर्ष तक सोने की खरीद टालने संबंधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद रत्न एवं आभूषण उद्योग पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एक उद्योग संगठन ने सोमवार को यह आशंका जताई। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाले रत्न एवं आभूषण उद्योग पर प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, "हम सोने की जिम्मेदारी से खपत करने संबंधी प्रधानमंत्री की अपील को समझते हैं। यह बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव की व्यापक राष्ट्रीय चिंता को दर्शाती है। लेकिन भारत में पहले से ही हजारों टन सोना घरों में रखा हुआ है। ऐसे में समाधान केवल सोने की मांग घटाने में नहीं, बल्कि स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (जीएमएस) के जरिये मौजूदा सोने के उपयोग में है।" रोकड़े ने कहा कि अतीत में इस तरह के मामलों में 'रिवेंज बाइंग' यानी प्रतिबंध के बाद अधिक खरीद की स्थिति भी देखी गई है, जिससे आगे चलकर सोने की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, ''बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा क्षेत्र (बीएफएसआई), खुदरा, ई-कॉमर्स, आभूषण डिजाइनिंग और लॉजिस्टिक जैसे संबद्ध क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ेगा। इसलिए हम सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।'' जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि सोने का भारतीय परिवारों से भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ाव है, लेकिन वर्तमान में आर्थिक स्थिरता के साथ मांग का संतुलन भी जरूरी है। गुप्ता ने कहा, ''आभूषण उद्योग का मानना है कि एक मजबूत एवं पारदर्शी स्वर्ण मौद्रीकरण योजना भारत के लिए दीर्घकालिक समाधान हो सकती है। इस योजना के जरिये घरों और लॉकर में रखे निष्क्रिय सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाया जा सकता है। इससे आयात घटेगा, चालू खाते के घाटे (सीएडी) पर दबाव कम होगा और वित्तीय प्रणाली मजबूत होगी।'' प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोना खरीद और विदेशी यात्रा टालने समेत कई उपाय सुझाए थे, ताकि पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके।
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बताया कि पिछले दो दिनों में करीब 87.66 लाख सिलेंडर बुकिंग के मुकाबले 97 लाख से ज्यादा घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई। वहीं, रसोई गैस की ऑनलाइन बुकिंग बढ़कर 99 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ऑथेंटिकेशन कोड के आधार पर 95 प्रतिशत डिलीवरी की जा रही है, ताकि डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर गैस की हेराफेरी रोकी जा सके। पश्चिम एशिया संकट के कारण सप्लाई में आई दिक्कतों के बावजूद किसी भी रिटेल गैस एजेंसी पर गैस खत्म होने की स्थिति सामने नहीं आई है। पिछले दो दिनों में करीब 1.11 लाख छोटे 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर भी बेचे गए। 3 अप्रैल से अब तक सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने 10,700 से ज्यादा जागरूकता शिविर लगाए हैं, जिनमें शहरी इलाकों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों को छोटे सिलेंडर के उपयोग के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 15,493 मीट्रिक टन से ज्यादा कमर्शियल एलपीजी की बिक्री हुई, जो 19 किलोग्राम वाले करीब 8.15 लाख सिलेंडरों के बराबर है।आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति राज्य सरकारों और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल एलपीजी बिक्री की योजना तय कर रही है। करीब 6.5 लाख पीएनजी कनेक्शन में गैस सप्लाई शुरू की जा चुकी है और अतिरिक्त 2.66 लाख कनेक्शन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। इसके साथ कुल पीएनजी कनेक्शन की संख्या 9.16 लाख तक पहुंच गई है। वहीं, 7.08 लाख नए ग्राहकों ने नए कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है।बयान में आगे कहा गया है कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए देश भर में लगातार कार्रवाई जारी है। गुरुवार को पूरे देश में 2,000 से ज्यादा छापेमारी की गई।सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अचानक निरीक्षण अभियान तेज कर दिए हैं। अब तक 378 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरों पर जुर्माना लगाया गया है, जबकि 76 गैस एजेंसियों को गुरुवार तक निलंबित किया जा चुका है।मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। देश भर में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर दोनों ईंधनों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों और एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।सरकार के अनुसार, सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और उनके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों में स्थानीय एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है।सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की अतिरिक्त खरीदारी न करें। साथ ही अफवाहों से बचें और सही जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। एलपीजी उपभोक्ताओं से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर भीड़ लगाने से बचने को कहा गया है। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की एनएमडीसी ने लौह अयस्क के टुकड़े और चूरे की कीमतों में 200 रुपये प्रति टन की वृद्धि की है। बढ़ी हुई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गयी हैं। देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसने बैला टुकड़े (लंप) अयस्क का दाम 5,500 रुपये प्रति टन और चूरे (फाइन) का 4,700 रुपये प्रति टन तय किया है। लौह अयस्क टुकड़े या उच्च श्रेणी के लौह अयस्क में 65.5 प्रतिशत लौह सामग्री होती है। वहीं लौह अयस्क चूरा निम्न श्रेणी का अयस्क हैं जिनमें 64 प्रतिशत या उससे कम लौह सामग्री होती है। एनएमडीसी ने पांच अप्रैल को घोषित पिछले मूल्य संशोधन में, बैला टुकड़े का दाम 5,300 रुपये प्रति टन और चूरे का 4,500 रुपये प्रति टन तय किया था। छह मई से प्रभावी नई कीमतों में रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (डीएमएफ) तथा राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (डीएमईटी) शामिल नहीं हैं। इनमें उपकर, 'वन परमिट' शुल्क, पारगमन शुल्क, जीएसटी, पर्यावरण उपकर और अन्य कर भी शामिल नहीं हैं। लौह अयस्क इस्पात विनिर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल में शामिल है और इसकी कीमतों में किसी भी प्रकार का बदलाव इस्पात की दरों पर सीधा प्रभाव डालता है। इस्पात एक मिश्रधातु है जिसका व्यापक उपयोग निर्माण, अवसंरचना, मोटर वाहन और रेलवे जैसे क्षेत्रों में होता है। इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला हैदराबाद स्थित एनएमडीसी (जिसका पहले नाम राष्ट्रीय खनिज विकास निगम था) भारत के कुल लौह अयस्क उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान देता है।
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नयी दिल्ली. लक्जरी वाहन विनिर्माता जगुआर लैंडरोवर (जेएलआर) की भारतीय इकाई ने मंगलवार को भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) लागू होने की संभावना को देखते हुए ब्रिटेन में निर्मित रेंज रोवर मॉडलों की कीमतों में 75 लाख रुपये तक की कटौती की घोषणा की। जेएलआर इंडिया ने एक बयान में कहा कि पूरी तरह निर्मित इकाई के रूप में भारत आने वाले वाहनों की कीमतों में कटौती का प्रमुख लाभ रेंज रोवर एसवी और रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी मॉडलों को मिलेगा। इस कटौती के बाद रेंज रोवर एसवी मॉडल की शुरुआती शोरूम कीमत 4.25 करोड़ रुपये से घटाकर 3.5 करोड़ रुपये हो गई है। वहीं रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी मॉडल की कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटाकर 2.35 करोड़ रुपये कर दी गई है। टाटा समूह के नियंत्रण वाली कंपनी ने कहा कि संशोधित कीमतें एफटीए के तहत मिलने वाली नई शुल्क संरचना को दर्शाती हैं और ये तत्काल प्रभाव से लागू होंगी। जेएलआर इंडिया के प्रबंध निदेशक राजन अंबा ने कहा, "भारत-ब्रिटेन एफटीए के लागू होने की उम्मीद के बीच हम अपने ग्राहकों को इसका लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नई कीमतें ग्राहक को प्राथमिकता देने के हमारे दृष्टिकोण और दीर्घकालिक संबंध बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।" हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया कि भारत में स्थानीय रूप से निर्मित मॉडल, मसलन रेंज रोवर, रेंज रोवर स्पोर्ट, रेंज रोवर इवोक, रेंज रोवर वेलार और डिस्कवरी स्पोर्ट की कीमतों पर इस एफटीए का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, डिफेंडर और डिस्कवरी मॉडलों की कीमतें भी पुराने स्तर पर बनी रहेंगी क्योंकि इनका उत्पादन स्लोवाकिया में होने से ये भारत-ब्रिटेन एफटीए के दायरे में नहीं आते हैं।
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नयी दिल्ली/ निजी क्षेत्र के बैंक एक्सिस बैंक ने शनिवार को यहां अपनी पहली डिजिटल लॉकर-केंद्रित शाखा का उद्घाटन किया। एक्सिस बैंक ने बयान में कहा कि यह शाखा सुरक्षित बैंकिंग को नए सिरे से परिभाषित करने की दिशा में एक कदम है। इसमें उन्नत स्वचालन, उच्च स्तरीय सुरक्षा और अत्याधुनिक लॉकर सेवाओं के माध्यम से ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर जोर दिया गया है। इस शाखा का उद्घाटन वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने बैंक के प्रबंध निदेशक अमिताभ चौधरी और कार्यकारी निदेशक मुनीश शारदा की उपस्थिति में किया। बयान के अनुसार, भारत में सुरक्षित जमा लॉकर की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है, खासकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में लगभग छह करोड़ संपन्न लोगों को बैंक लॉकर की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान में केवल करीब 60 लाख लॉकर ही उपलब्ध हैं। यह अंतर बड़े शहरों में और अधिक स्पष्ट है, जहां शहरी आवास तेजी से 'गेटेड' रिहायशी परिसरों पर केंद्रित हो रहा है। एक्सिस बैंक की यह डिजिटल लॉकर-केंद्रित शाखा इसी बढ़ती आवश्यकता को पूरा करने के लिए विकसित की गई है, जो प्रीमियम आवासीय क्षेत्रों में सुरक्षित और स्वचालित लॉकर सेवाएं प्रदान करती है। बैंक ने कहा कि शाखा के डिजाइन और सेवा वितरण को नए सिरे से तैयार कर वह घनी शहरी आबादी वाले क्षेत्रों में अपनी भौतिक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है और ग्राहकों को अधिक नियंत्रण, गोपनीयता और सुविधा प्रदान कर रहा है।
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नयी दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमत 2,000 रुपये चढ़कर 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी। इस तेजी का कारण वैश्विक बाजारों में मजबूत रुझान और कमजोर डॉलर है। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में 2,000 रुपये यानी 1.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1,54,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) पर पहुंच गया। पिछले सत्र में यह 1,52,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (शोध) सौमिल गांधी ने कहा, ''सोने की कीमतों में एक महीने के निचले स्तर से सुधार आया है। बृहस्पतिवार को इसमें मामूली बढ़त देखने को मिली, क्योंकि कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी से इसे समर्थन मिला।'' उन्होंने कहा कि डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल में आई नरमी ने हाल की कमजोरी के बाद कीमतों को स्थिर करने में मदद की, जबकि प्रमुख समर्थन स्तरों के पास हुई लिवाली ने भी इस सुधार में योगदान दिया। सर्राफा संघ के अनुसार, हालांकि, चांदी की कीमत में 1,800 रुपये यानी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट आई। इसकी कीमत घटकर 2,42,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) रही जो बुधवार को 2,44,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोने की कीमत में 91.80 डॉलर यानी 2.02 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 4,635.52 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत 3.31 प्रतिशत बढ़कर 73.69 डॉलर प्रति औंस हो गई। वायदा बाजार में डॉलर सूचकांक 0.27 प्रतिशत गिरकर 98.69 रहा, जिससे अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए सर्राफा (सोना-चांदी) खरीदना अधिक आकर्षक हो गया।
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नयी दिल्ली. एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि सरकार की पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान समाप्त होने के बाद कीमतों में बढ़ोतरी की अटकलों को खारिज किया। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में रिकॉर्ड चौथे साल भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पिछले दो महीनों में कच्चा तेल 50 प्रतिशत से अधिक महंगा हो गया है। लागत और बिक्री मूल्य के बीच बढ़ते अंतर के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। कुछ अनुमानों के अनुसार यह दैनिक नुकसान लगभग 2,400 करोड़ रुपये है। इसी कारण अटकलें लगाई जा रही थीं कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव बुधवार को संपन्न होने के बाद कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों के प्रभाव पर एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, ''पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।'' उनसे पूछा गया था कि कि क्या बुधवार को पश्चिम बंगाल में मतदान संपन्न होने के बाद ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कीमतों में तत्काल वृद्धि की उन अटकलों को खारिज कर दिया, जिनकी वजह से आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ हिस्सों में ईंधन खरीदने की होड़ मच गई थी। शर्मा ने कहा, ''हमने कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी देखी है। हम इन सभी जगहों पर राज्य सरकारों के संपर्क में हैं। सभी खुदरा बिक्री केंद्रों की निगरानी की जा रही है और जहां अधिक खरीदारी हो रही है, वहां आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।''
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विशाखापत्तनम/ उद्योगपति जीत अदाणी और राकेश भारती मित्तल ने भारत के एआई परिवेश को आकार देने में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा एवं संपर्क के महत्व पर जोर देते हुए मंगलवार को कहा कि विशाखापत्तनम एक प्रमुख 'डिजिटल प्रवेशद्वार' के रूप में उभरने जा रहा है। विशाखापत्तनम के पास 15 अरब डॉलर के गूगल एआई डेटा सेंटर के शिलान्यास कार्यक्रम के बाद अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी ने कहा कि अदाणी समूह और एयरटेल भी इसके निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक कृत्रिम मेधा (एआई) प्रतिस्पर्धा अब केवल सॉफ्टवेयर से नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा खड़ा करने की क्षमता से तय हो रही है और भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। अदाणी ने कहा, ''कुछ क्षण इतिहास की दिशा तय करते हैं और आज विशाखापत्तनम ऐसा ही एक क्षण देख रहा है जब यह भारत के एआई-आधारित डिजिटल भविष्य का आधार बन रहा है।'' यह परियोजना अदाणीकनेक्स और नेक्स्ट्रा बाय एयरटेल के साथ साझेदारी में विकसित की जा रही है जिसका उद्देश्य 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप गीगावाट स्तर का एआई परिवेश स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में करीब 1.3 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता है और केवल विशाखापत्तनम में करीब एक गीगावाट (1000 मेगावाट) क्षमता विकसित करने की योजना है, जो बड़े बदलाव का संकेत है। जीत अदाणी ने कहा कि एआई परिवेश में ऊर्जा की भूमिका केंद्रीय है, क्योंकि बुद्धिमत्ता (इंटेलिजेंस) की लागत सीधे बिजली की लागत से जुड़ी होती है और सस्ती ऊर्जा से एआई का व्यापक उपयोग संभव होगा। उन्होंने कहा कि समुद्र के भीतर बिछाई जा रही केबल अवसंरचना से यह बंदरगाह शहर एक नए डिजिटल प्रवेशद्वार के रूप में उभरेगा जिससे विलंब में कम होगी और 'एआई वर्कलोड' को तेजी से संचालित करने में मदद मिलेगी। इस बीच, भारती एंटरप्राइजेज के वाइस चेयरमैन राकेश मित्तल ने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश सरकार ने नीतिगत स्पष्टता और क्रियान्वयन क्षमता दिखाई है। उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम जो पहले समुद्री प्रवेश द्वार था...अब मजबूत फाइबर नेटवर्क और डिजिटल अवसंरचना के सहारे एआई (इंटेलिजेंस) युग का प्रवेश द्वार बनेगा। मित्तल ने कहा, ''इस क्षेत्र के लिए अवसर बेहद बड़े हैं और विशाखापत्तनम डिजिटल इंडिया तथा एआई-आधारित अवसंरचना का प्रमुख प्रवेश द्वार बनेगा।'' उन्होंने बताया कि नेक्स्ट्रा बाय एयरटेल देशभर में 120 से अधिक डेटा सेंटर संचालित करता है और यह परियोजना टिकाऊ होगी तथा नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होगी। मित्तल ने कहा कि इस पहल में अत्याधुनिक केबल लैंडिंग स्टेशन और मजबूत शहर व अंतर-शहर फाइबर नेटवर्क शामिल होंगे, जिससे क्षमता और मजबूती बढ़ेगी। दोनों उद्योगपतियों ने कहा कि वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों और घरेलू अवसंरचना प्रदाताओं के बीच मजबूत साझेदारी भारत की एआई क्षमताओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा लागत कम होने से कंप्यूटिंग, प्रशिक्षण और एआई मॉडल तैनाती की लागत घटेगी जिससे प्रौद्योगिकी अधिक सुलभ और विस्तार योग्य बनेगी। इस अवसर पर भारती एयरटेल के कार्यकारी उपाध्यक्ष गोपाल विट्टल ने कहा कि एयरटेल की एकीकृत क्षमताएं विशाखापत्तनम में बड़े पैमाने पर एआई अवसंरचना को सक्षम बनाएंगी। उन्होंने कहा, ''गूगल और अदाणी के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी इस महत्वपूर्ण एआई केंद्र के निर्माण में भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में सहायक होगी।''
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नयी दिल्ली. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सोमवार को जारी एक परामर्श पत्र में कहा कि मुफ्त वाई-फाई सेवा की इच्छा सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और आर्थिक बाधा पैदा कर रही है। 'भारत में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क का प्रसार' विषय पर जारी परामर्श पत्र में ट्राई ने कहा कि 4जी और 5जी मोबाइल डेटा की आक्रामक कीमतों के कारण भारतीय उपभोक्ताओं की मानसिकता ऐसी बन गई है कि वे इंटरनेट संपर्क को लगभग शून्य लागत वाली वस्तु के रूप में देखते हैं। इसी कारण वे पांच रुपये या 10 रुपये की मामूली दर पर भी सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट के लिए वाउचर खरीदने में संकोच करते हैं। ट्राई ने कहा, ''मुफ्त वाई-फाई की व्यापक इच्छा सार्वजनिक वाई-फाई के विस्तार में एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और आर्थिक बाधा के रूप में काम करती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन हॉटस्पॉट प्रदाताओं की व्यावसायिक व्यवहार्यता को कमजोर करती है जो सशुल्क बिजनेस मॉडल पर काम करते हैं।'' नियामक ने कहा कि भारत में प्रतिस्पर्धी डेटा शुल्क और मोबाइल उपयोग की सुविधा ने अनजाने में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क को अपनाने और उनकी व्यावसायिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है। ट्राई ने इस परामर्श पत्र पर टिप्पणी के लिए 25 मई और जवाबी टिप्पणी के लिए आठ जून की अंतिम तारीख तय की है।
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मुंबई. वैश्विक संकेतों में सुधार और प्रमुख कंपनियों में खरीदारी के चलते घरेलू शेयर बाजारों में तीन दिन की गिरावट के बाद सोमवार को तेजी लौटी। सेंसेक्स 639 अंक चढ़कर बंद हुआ जबकि निफ्टी में 195 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। विश्लेषकों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और सन फार्मा के शेयरों में जोरदार लिवाली आने से मानक सूचकांकों में उछाल देखा गया। इसके अलावा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव घटने के संकेतों ने भी धारणा को मजबूती दी। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 639.42 अंक यानी 0.83 प्रतिशत उछलकर 77,303.63 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 755.83 अंक तक चढ़कर 77,420.04 के स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 194.75 अंक यानी 0.81 प्रतिशत बढ़कर 24,092.70 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से सन फार्मा का शेयर करीब सात प्रतिशत तक उछल गया। सन फार्मा द्वारा अमेरिकी कंपनी ऑर्गेनॉन के अधिग्रहण के लिए 11.75 अरब डॉलर के सौदे की घोषणा के बाद इसमें तेज खरीदारी देखी गई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में भी 2.88 प्रतिशत की तेजी आई। साथ ही, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एनटीपीसी, एचसीएल टेक और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी तरफ, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रेंट और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीत मिश्रा ने कहा, "यह तेजी मुख्य रूप से विभिन्न क्षेत्र के दबावग्रस्त शेयरों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज में आए सुधार की उपज रही। साथ ही, वैश्विक अधिग्रहण से जुड़ी खबरों के बाद दवा कंपनियों में तेज खरीदारी देखी गई, जिससे बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।" उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता में संभावित प्रगति से जुड़ी उम्मीदों ने भी वैश्विक निवेशकों की धारणा को मजबूत किया। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों का ऊंचे स्तर पर बने रहना बाजार के लिए एक जोखिम कारक बना हुआ है। व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सेलेक्ट सूचकांक दो प्रतिशत चढ़ गया जबकि मझोली कंपनियों का मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 1.35 प्रतिशत की तेजी पर रहा। बाजार में चौतरफा तेजी के बीच सभी क्षेत्रवार सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। इसकी अगुवाई जन केंद्रित सेवाओं ने 2.50 प्रतिशत तेजी के साथ की जबकि स्वास्थ्य देखभाल खंड में 2.43 प्रतिशत और फोकस आईटी खंड में 2.41 प्रतिशत की बढ़त रही। बीएसई पर सूचीबद्ध कुल 3,075 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए जबकि 1,288 शेयरों में गिरावट रही और 193 अन्य अपरिवर्तित रहे। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन का शंघाई कंपोजिट बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग गिरावट में रहा। यूरोपीय बाजारों में भी दोपहर कारोबार में सकारात्मक रुख था। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। लाइवलॉन्ग वेल्थ के संस्थापक एवं शोध विश्लेषक हरिप्रसाद के. ने कहा, "पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका और ईरान के बीच संभावित तनाव घटने की खबरों से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इससे घरेलू बाजारों को भी समर्थन मिला।" इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.53 प्रतिशत बढ़कर 107.9 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 8,827.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 999.79 अंक टूटकर 76,664.21 अंक और निफ्टी 275.10 अंक की गिरावट के साथ 23,897.95 अंक पर बंद हुए थे। -
नयी दिल्ली। दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) की फिलहाल मोबाइल शुल्क दरों में व्यापक बढ़ोतरी की योजना नहीं है लेकिन वह मौजूदा दरों में मामूली संशोधन कर सकती है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। वोडाफोन आइडिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अन्य दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने हाल ही में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज प्लान की दरों में करीब चार-पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। ऐसी स्थिति में विश्लेषकों ने चालू वर्ष की पहली छमाही में शुल्क दरों में लगभग 15 प्रतिशत तक वृद्धि की आशंका जताई है। वीआईएल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अभिजीत किशोर ने 'सीओएआई डिजीकॉम समिट 2026' के दौरान संवाददाताओं से कहा, "दरों में कुछ मामूली सुधार होंगे, लेकिन आमतौर पर होने वाली व्यापक ढांचा-आधारित बढ़ोतरी फिलहाल नहीं होगी।" उन्होंने कहा कि सरकार कंपनी में लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एक महत्वपूर्ण शेयरधारक है और इससे कंपनी को भरोसा मिला है। वीआईएल पिछले कुछ वर्षों से लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। इस बीच सरकार ने बकाया राजस्व के एवज में इसमें हिस्सेदारी ली है। किशोर ने कहा कि कंपनी का ध्यान अपने प्रदर्शन में सुधार पर है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में ग्राहकों की संख्या में सुधार के संकेत मिले हैं। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वोडाफोन आइडिया ने मार्च में एक लाख से अधिक मोबाइल ग्राहकों को जोड़ा है, जो पिछले कुछ वर्षों में ग्राहक आधार में लगातार आ रही गिरावट के बाद सुधार को दर्शाता है।
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नयी दिल्ली. सरकारी एजेंसियों ने मौजूदा रबी विपणन सत्र में 148 लाख टन गेहूं की खरीद की है। यह पिछले साल की इसी अवधि में की गई खरीद की तुलना में 11.37 प्रतिशत कम है। इस गिरावट का मुख्य कारण मंडियों में फसल की देर से हुई आवक है। खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पिछले साल की इसी अवधि में यह खरीद 167 लाख टन रही थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद करती हैं। गेहूं की खरीद मार्च से अप्रैल तक चलती है, जिसमें अनाज का अधिकांश हिस्सा पहले तीन महीनों में खरीदा जाता है। अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''खरीद में कमी का कारण मंडियों में फसल की देर से आवक है। अब खरीद की गति बढ़ रही है।'' अधिकारी ने बताया कि विशेष रूप से चमक में कमी और टूटे हुए दानों के मामले में खरीद के नियमों में ढील पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक बढ़ाई गई है, क्योंकि इन राज्यों में फसल बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित हुई थी। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 22 अप्रैल तक पंजाब में गेहूं की खरीद 67 लाख टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के 49 लाख टन से अधिक है। हरियाणा में यह आंकड़ा 53 लाख टन के मुकाबले 61 लाख टन दर्ज किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश में खरीद 52 लाख टन से घटकर 10 लाख टन रह गई, जबकि राजस्थान ने पिछले साल की इसी अवधि के 7.8 लाख टन के मुकाबले पांच लाख टन गेहूं की खरीद की। अधिकारी ने कहा कि भंडारण को लेकर कोई चिंता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकारों ने इसके लिए पर्याप्त व्यवस्था कर ली है। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 12.02 करोड़ टन रहने का अनुमान है। -
नयी दिल्ली, 23 अप्रैल (भाषा) देश का चावल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 7.5 प्रतिशत घटकर 11.53 अरब डॉलर रह गया। पश्चिम एशिया क्षेत्र के देशों सहित प्रमुख बाजारों को निर्यात में कमी इसकी मुख्य वजह रही। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। वहीं मार्च में निर्यात 15.36 प्रतिशत घटकर 99.75 करोड़ डॉलर रहा।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और ओमान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र के देशों को होने वाले निर्यात पर असर पड़ा है। ईरान, भारत के बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है लेकिन मौजूदा अस्थिरता के कारण ऑर्डर प्रवाह, भुगतान और जहाजों की आवाजाही पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। खबरों के अनुसार, आयातकों ने अपनी मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और भारत को भुगतान भेजने में असमर्थता जताई है जिससे निर्यातकों के लिए अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 172 से अधिक देशों को 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था जिसकी कीमत 12.5 अरब डॉलर थी। भारत, दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है। 2024-25 में देश ने लगभग 4.7 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र से करीब 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत है। औसत उपज 2014-15 में 2.72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में लगभग 3.2 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। इसकी मुख्य वजह बीज की बेहतर किस्में, उन्नत कृषि पद्धतियां और सिंचाई क्षेत्र का विस्तार है। -
नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एंथ्रोपिक के 'माइथोस' मॉडल द्वारा वित्तीय प्रणालियों की डेटा सुरक्षा से संबंधित खतरों की बात सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े जोखिमों पर बैंक प्रमुखों के साथ बैठक की। यह बैठक एंथ्रोपिक द्वारा 'क्लाउड माइथोस' एआई मॉडल के विकास के मद्देनजर महत्वपूर्ण है, जिसमें दावा किया गया है कि उसने कई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम में कमजोरियां पाई हैं। सूत्रों के अनुसार बैठक में एआई से निपटने के लिए जरूरी जोखिमों और उपायों पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में वित्तीय क्षेत्र पर एआई द्वारा उत्पन्न विभिन्न जोखिमों पर विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों ने बताया कि बैंकों से अपनी प्रणालियों, डेटा और ग्राहकों के पैसे को सुरक्षित करने के लिए एहतियाती कदम उठाने को कहा गया। इस बैठक में बैंकों के शीर्ष अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मंत्रालय और आरबीआई इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इस सुरक्षा चूक से भारतीय वित्तीय क्षेत्र को किस हद तक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार मंत्रालय और आरबीआई इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि इस सुरक्षा चूक से भारतीय वित्तीय क्षेत्र को किस हद तक जोखिम हो सकता है। अधिकारी ने कहा कि अब तक भारतीय प्रणालियां सुरक्षित हैं और अनावश्यक रूप से चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आरबीआई अपने स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच कर रहा है कि भारत का वित्तीय क्षेत्र सुरक्षित रहे। खबरों के अनुसार एंथ्रोपिक ने कहा कि 'माइथोस' साइबर सुरक्षा कार्यों में मनुष्यों से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। यह प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में 27 साल पुरानी कमियों सहित हजारों 'बग' को खोजने और उनका फायदा उठाने में सक्षम है। अमेरिका स्थित एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा कि उसके नए मॉडल 'माइथोस' तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी। माइथोस एक शक्तिशाली एआई मॉडल है, जिसने डिजिटल सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने की अपनी अभूतपूर्व क्षमता और दुरुपयोग की संभावना के कारण नियामकों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फरवरी में हाजिर मुद्रा बाजार से शुद्ध रूप से 7.41 अरब डॉलर खरीदे। बृहस्पतिवार को जारी मासिक बुलेटिन के अनुसार सकल आधार पर केंद्रीय बैंक ने फरवरी में 21.40 अरब डॉलर खरीदे और 13.994 अरब डॉलर बेचे। लगातार सात महीनों तक विदेशी मुद्रा की शुद्ध बिक्री करने के बाद, यह लगातार दूसरा महीना है जब केंद्रीय बैंक ने शुद्ध खरीदारी की है। आरबीआई के मासिक बुलेटिन के आंकड़ों के अनुसार जनवरी में केंद्रीय बैंक ने 2.53 अरब डॉलर खरीदे थे। आंकड़ों के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने दिसंबर में 10.02 अरब डॉलर, नवंबर में 9.71 अरब डॉलर, अक्टूबर में 11.88 अरब डॉलर, सितंबर में 7.91 अरब डॉलर, अगस्त में 7.69 अरब डॉलर, जुलाई में 2.54 अरब डॉलर और जून में 3.66 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की थी। आरबीआई ने बुलेटिन में कहा कि फरवरी 2026 की शुरुआत में अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के चलते रुपया मजबूत हुआ, लेकिन मार्च में पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने के कारण इसमें गिरावट आई। आरबीआई ने कहा कि हालांकि दूसरी छमाही में निहित विकल्प अस्थिरता पहली छमाही की तुलना में औसत रूप से कम रही, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जोखिम न लेने की धारणा के कारण यह उच्च बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 6.2 प्रतिशत कमजोर हुआ। आरबीआई ने कहा कि 40 मुद्राओं के वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) के संदर्भ में सितंबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच रुपये में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई।
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नयी दिल्ली। उद्योग निकाय एसोचैम ने बुधवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से उपभोग आधारित है और कच्चे तेल की कीमत 90-100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद देश सालाना सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज कर सकता है। निकाय ने कहा कि उच्च ऊर्जा लागत के प्रति भारत का लचीलापन पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है, क्योंकि देश ने तेल के गंभीर झटकों को सहन किया है और इसके बावजूद वृद्धि दर मजबूत बनी रही है। एसोचैम ने अपने विश्लेषण के आधार पर कहा कि भारत ने आर्थिक वृद्धि की गति से समझौता किए बिना उच्च ऊर्जा कीमतों को प्रबंधित करने की अपनी क्षमता दिखाई है। इसमें कहा गया, ''2000-01 से 2025-26 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत ने कच्चे तेल की मध्यम से उच्च कीमतों के स्तर पर भी अपने कुछ सबसे मजबूत वृद्धि दर वाले वर्ष दर्ज किए हैं।'' एसोचैम के अनुसार 2022-23 में वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत थी, जबकि तेल की कीमतें (भारतीय बास्केट) 93 डॉलर प्रति बैरल (वार्षिक औसत) पर थीं। वहीं 2023-24 में तेल की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल रहने पर वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही थी। एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने कहा, ''भारत की वृद्धि गाथा मुख्य रूप से इसके उपभोग क्षेत्र द्वारा संचालित है। यह कारखानों के विस्तार, अधिक श्रमिकों की नियुक्ति और उच्च आय स्तरों के माध्यम से आपूर्ति पक्ष को मजबूत करती है, जिससे वृद्धि का एक सकारात्मक चक्र बनता है और अर्थव्यवस्था का लचीलापन बढ़ता है।'' मिंडा ने कहा कि एसोचैम का मानना है कि मजबूत उपभोग, स्थिर निर्यात और बढ़ते पूंजी निवेश के समर्थन से 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी।





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