कालजयी गायकों रफी-किशोर की स्मृति में रसमंजरी ने सजाई सुरों की महफ़िल
टी सहदेव
भिलाई नगर। रागमंजरी कराओके ग्रुप द्वारा शनिवार को आयोजित संगीत संध्या एक अविस्मरणीय संगीतमय अनुभव में तब्दील हो गई, जब मंच पर स्वर गूंजे और दर्शक सुरों की दुनिया में डूबते चले गए। अवसर था ‘रफ़ी–किशोर को नमन’ – दो कालजयी गायकों, मोहम्मद रफ़ी और किशोर कुमार, को समर्पित कराओके संध्या का। कार्यक्रम का आयोजन सेक्टर 5 के दुर्गा मंडप, सत–विजय ऑडिटोरियम (महापौर निवास के पास) में किया गया, जिसमें शहर के संगीत प्रेमियों की भरपूर उपस्थिति रही। 31 जुलाई को मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि और 4 अगस्त को किशोर कुमार के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में यह विशेष संध्या आयोजित की गई थी। इस भावपूर्ण संध्या में नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग के छात्रों द्वारा 28 गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिनमें रफ़ी–किशोर के सदाबहार गीतों ने दर्शकों की स्मृतियों को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत 'बने चाहे दुश्मन ज़माना हमारा' जैसे जोशीले युगल गीत से हुई और 'छू कर मेरे मन को' जैसे रूमानी गीतों तक श्रोताओं को भावनाओं की यात्रा पर ले जाया गया। कलाकारों में तपन नाथ, ऋषभ साहू, सन्ध्या सरकार, जीवनदान वर्मा, प्रमोद ताम्रकार, तिलक वर्मा, जगदीश बमणिया, रोशनी निर्वाण, तथा तमेश्वर साहू आदि की भागीदारी उल्लेखनीय रही। रागमंजरी ग्रुप ने यह दिखा दिया कि कराओके भी एक गंभीर और सजीव मंच हो सकता है, जहाँ संजीदा प्रस्तुति के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों की भारी तालियों और प्रशंसा ने इस शाम को यादगार बना दिया।





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