‘एक मैसेज फारवर्ड और सैकड़ों लोग उतर आएंगे सड़कों पर’
0- ‘सोशल मीडिया का छात्र जीवन में प्रभाव’ पर हुई वाद विवाद स्पर्धा में
0- तन्मय भगाड़े और प्रिया राठौर विजेता
रायपुर। सोशल मीडिया प्लेटफार्म हमारे युवा समाज के लिए अभिशाप है और वरदान भी। इन दोनों को जस्टिफाई करने लिए सबसे अधिक जिम्मेदार इसके इस्तेमाल के समय, उपयोग, दूरदर्शिता और उद्देश्य पर निर्भर करता है। एक सही मैसेज जहां पीड़ित को न्याय दिलाता और सही बात लाखों लोगों तक पहुंचाता है। वहीं एक गलत मैसेज का फारवर्ड होना इतना खतरनाक हो सकता है, कि देखते ही देखते लाखों लोग सड़क पर उतर आते हैं। ‘सोशल मीडिया का छात्र जीवन पर प्रभाव’ विषय पर हुई वाद विवाद स्पर्धा में विभिन्न शालाओं के छात्र-छात्राओं ने अपनी बातें दमदार कंटेंट के साथ न केवल प्रस्तुत की, बल्कि प्रतिद्वंद्वी वक्ताओं के तर्कों को अपनी सटीक उदाहरणों के साथ काटा भी।
महाराष्ट्र मंडल के मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के छठवें दिन आयोजित शालेय वाद विवाद स्पर्धा में मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल सहित श्री बालाजी विद्यालय, माता सुंदरी कालीबाड़ी स्कूल के बच्चे भी शामिल हुए। एक के बाद एक वक्ता छात्र - छात्राओं ने अपने सुलझे हुए तर्कों से सामने प्रतिद्वंद्वी पर भरपूर हमले किए। वक्ताओं ने कहा कि निर्भया कांड के बाद सोशल मीडिया ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में मदद की। वहीं इसी सोशल मीडिया से कोविड काल में वैक्सीन के दुष्प्रभाव की अफवाह के कारण न जाने कितने लोगों ने वैक्सीन नहीं लगाई और उनकी जान चली गई।
स्पर्धा में कालीबाड़ी स्कूल के गौरव शर्मा, विवेक, संत ज्ञानेश्वर स्कूल की कोमल जांगे, हिमांशी लोढ़ा, तन्मय भगाड़े, श्रद्धा इस्सर, श्री बालाजी स्कूल की चयनिका पांडे, प्रिशा राठौर ने अपने प्रभावी संबोधनों से प्रभावित किया। युवा समिति की प्रमुख डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि स्पर्धा में निर्णायक की भूमिका महाराष्ट्र मंडल साहित्य समिति की प्रमुख वरिष्ठ कुमुद लाड और सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी ने अदा की। दोनों निर्णायकों ने कार्यक्रम के उपरांत बच्चों को उच्च स्तरीय वाद-विवाद में भाग लेने की तकनीक साझा की।
स्पर्धा में पक्ष में एसडीवी के तन्मय भगाड़े प्रथम और श्री बालाजी स्कूल की चयनिका देवांगन द्वितीय रही। वहीं विपक्ष में श्री बालाजी स्कूल की प्रिशा राठौर प्रथम और एसडीवी की श्रद्धा इस्सर द्वितीय स्थान पर रहीं। इस अवसर युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे, रीना बाबर, उदित बक्षी, मेघा पोतदार, समीर देशमुख और करिश्मा अंजनकर ने भरपूर सहयोग दिया।





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