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एग्रीस्टेक पोर्टल में खामियों के चलते 30 प्रतिशत किसान पंजीयन से वंचित, धान नहीं बेच पायेंगे...!

- पोर्टल में किसानों का आद्यतन डाटा की प्रविष्टि नहीं / व्यक्तिगत खाते के साथ सामूहिक खाता का पंजीयन नहीं / एक से अधिक जिले व ग्राम के खातों का पंजीयन नहीं/ एडीशन / माडीफिकेशन/ एडिट सुविधा नहीं /मोबाइल एप से पंजीयन असंभव 

-- धान खरीदी पूर्ववत एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से खरीदी की मांग 
रायपुर ।प्रत्येक किसान का डिजीटल आई डी बना शासकीय योजनाओं का लाभ देने के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये एग्रीस्टेक बेवसाइट की निर्धारित अवधि 30 अगस्त समाप्त होने पर प्रदेश के 30 प्रतिशत किसान बेवसाइट ( पोर्टल ) में खामियों की वजह से पंजीयन कराने से वंचित रह गये हैं । छग शासन के खाद्य मंत्रालय द्वारा इस पोर्टल में पंजीयत किसानों का‌ ही धान खरीदी करने के फरमान जारी करने से ये वंचित किसान सोसायटियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान नहीं ‌बेच पायेंगे। पोर्टल की खामियों को दूर कर पंजीयन हेतु समायावधि बढ़ाने व इस कृषि सत्र के खरीफ धान को पूर्ववत एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से खरीदने की मांग को ले शासन - प्रशासन ‌के मुखियाओं को ज्ञापन प्रेषित किया गया है ।
      ज्ञातव्य हो कि किसानों की पहचान , फसल , वित्तीय व फसल बीमा विवरण को एकीकृत कर डिजीटल डेटा बेस तैयार करने ‌के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एग्रीस्टेक पोर्टल बनवा किसानों के पंजीयन हेतु अंतिम तिथि बीते 30 अगस्त निर्धारित ‌की थी। इसके पीछे केद्र सरकार का उद्देश्य प्रत्येक किसान का सांख्यिकी डाटा तैयार करवाना था ताकि भविष्य में किसानों के लिये योजनाये निर्मित करने के साथ - साथ वर्तमान में जारी योजनाओं का लाभ पात्रों को मिल सके व अपात्रों को वंचित किया जा सके। इसके लिये प्रत्येक किसान को डिजीटल आई डी प्रदान किया जाना था । छग के खाद्य मंत्रालय ने इस कृषि सत्र में सोसायटियों में धान बेचने के लिये एग्रीस्टेक में पंजीयन को अनिवार्य कर दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डाक्टर रमन सिंह, कृषि मंत्री रामविचार नेताम , मुख्य सचिव अमिताभ जैन व मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा, छग मनवा क्षत्रिय कुर्मी समाज चंदखुरी राज के अध्यक्ष चिंताराम वर्मा व स्वामी अमृतानंद ( पवन दीवान ) स्मृति छग ब्रम्हचर्य आश्रम न्यास समिति के सचिव अनिल तिवारी ने मेल के माध्यम से ज्ञापन ‌भेज जानकारी दी है कि पोर्टल में तकनीकी ‌खामियो‌ के चलते प्रदेश ‌के‌ 30 प्रतिशत किसान पंजीयन कराने से ‌वंचित रह गये हैं । ज्ञापन में सनसनीखेज रहस्योद्घाटन किया गया है कि इस पोर्टल में किसानों का आद्यतन डाटा फीड नहीं किया गया था और कहीं सन् 2017- 18 का तो कहीं 2021-22 का डाटा फीड किया गया था जिसके चलते इन वर्षों के बाद खरीदी - बिक्री हुये नामान्तरित भूमियों का पंजीयन नहीं हो पाया । इसी तरह एकल खाता के साथ संयुक्त खाता/ एक से अधिक जिलों में व ग्रामों में खाता की‌ स्थिति में भी पंजीयन नहीं हो पाया । मोबाइल से तो पंजीयन असंभव होने , ग्रामीण  अंचल में सर्वर की समस्या व  पोर्टल में एडीशन / माडीफिकेशन  / एडिट का भी प्रावधान न होने से दिक्कतें आने की जानकारी देते हुये सुझाव दिया गया है कि छग  शासन के भुईयां साफ्टवेयर को आद्यतन करा सीधे  एग्रीस्टेक पोर्टल में प्रविष्ट कराने डाटा पुलिंग एप्लीकेशन का प्रबंध पोर्टल में कराने के साथ - साथ पोर्टल में एडीशन / माडीफिकेशन / एडीट का प्रावधान करावें । साथ ही मोबाइल एप का भुईयां साफ्टवेयर से नहीं जुड़ने की वजह से मोबाइल से पंजीयन न‌ हो पाने संबंधी दिक्कत की ओर ध्यानाकृष्ट कराते हुये इसे भी दूर कराने का आग्रह किया गया है ।ज्ञापन में अंतिम तिथि के बाद ओ पी जनरेट नहीं होने की जानकारी देते हुये मांग किया गया है कि साफ्टवेयर में इन खामियों को दूर करने के बाद किसानों को पंजीयन हेतु पर्याप्त समय दिया जावे । पंजीयन करा चुके ‌70 प्रतिशत किसानों में से अधिकतर किसानों को भी अभी तक यूनिक फार्मर ‌आई डी नहीं ‌मिलने व पंजीयन प्रकिया पूरा  होते ही  इसकी पुष्टि न होने की भी जानकारी देते हुये आग्रह किया गया है कि धान ‌खरीदी की तिथि सन्निकट होने के परिप्रेक्ष्य में इस साल पूर्ववत एकीकृत किसान पोर्टल को आद्यतन करा इसी पोर्टल के माध्यम से धान खरीदी की व्यवस्था की जावे । ज्ञापन की प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह को भी प्रेषित किया गया है ।

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