गो अभ्यारण्य और गो मुक्तिधाम से ही हटेंगे सडकों से गोवंश
0- महाराष्ट्र मंडल के मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के सातवें दिन नगर संवाद में विशेषज्ञों से आए महत्वपूर्ण सुझाव
गोवंश को सड़कों से हटाने के उपाय:-
0- 10 जोन के लिए पांच काउ कैचर वाहनों के साथ नगर निगम करे सभी वाहनों के साथ टीम की व्यवस्था।
0- गोवंश को रखने और चारे के लिए शहर के आउटर में हो एक बड़ा व व्यवस्थित अभयारण्य।
0- प्रत्येक गोवंश पर नए सिरे से मालिकों के नाम वाला टैग लगाए जाएं, ताकि गोवंश को सड़कों पर छोड़ने वालों पर हो सख्त कार्रवाई।
0- कम से कम दो स्थानों पर गो मुक्तिधाम की व्यवस्था हो, ताकि उनका ससम्मान अंतिम संस्कार किया जा सके।
श्वान को हटाने को लेकर सुझाव:-
-- श्वान के बधियाकरण के लिए नगर निगम के 10 जोन में बनानी और बढ़ानी होगी टीम
-- जितनी जल्दी हो सके डॉग शेल्टर शुरू करना चाहिए इससे श्वान बधियाकरण की क्षमता भी बढ़ानी चाहिए
-- राजधानी में डॉग कैचर की एकमात्र टीम है। इसे बढ़ाकर कम से कम 10 करनी पड़ेगी, जो दो- दो जोन के कुत्तों को पकड़े
रायपुर। राजधानी की सड़कों को मवेशी मुक्त रखने के लिए शहर के आउटर में गौ अभयारण्य और गो मुक्तिधाम स्थापित करना बेहद जरूरी है। इसके साथ सड़कों पर बैठे मवेशियों के मालिकों पर कार्रवाई करने के लिए मवेशियों को ट्रैकिंग नंबर एलाट होना चाहिए, ताकि कार्रवाई के समय मवेशी के मालिक का पता चल सके। इस कार्रवाई में आम लोगों की सहभागिता के लिए गो सेवकों की नियुक्ति गोसेवा आयोग की ओर से होना चाहिए। इस आशय के सुझाव नागरिक संवाद में ‘राजधानी की सड़कों से कैसे हटे मवेशी और श्वान’ विषय पर बोलते हुए विशेषज्ञों से मिले।
महाराष्ट्र मंडल में मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के सातवें दिन नगर संवाद में विशेषज्ञों ने कहा कि शहर में घूम रहे बेसहारा हिंसक श्वानों का बधियाकरण करने के लिए नगर निगम अभी सीमित संसाधनों के साथ संघर्ष कर रहा है। रायपुर निगम के 10 जोन को पांच भागों में विभक्त कर पांच टीमें बनानी होंगी और बधियाकरण का टारगेट लेकर कार्य करना होगा। तभी इन पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर वार्ड के पार्षद आशु चंद्रवंशी ने कहा कि मवेशियों को सड़कों पर आने से रोकने और श्वान से सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य जागरूकता है। इसी तरह गोसेवा आयोग की ओर से उन यदुवंशियों को गौ सेवक नियुक्त करना चाहिए, जो अपने मवेशी को सड़कों पर छोड़ देते हैं और निगम की कार्रवाई के समय विरोध करने आगे आ जाते हैं।
रायपुर नगर के राजस्व विभाग के अध्यक्ष अवतार सिंग बागल ने कहा कि आज मवेशियों को सड़कों से हटाने के लिए कड़ाई से कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। कुछ गो पालक दूधारु गाय की सेवा तो करते हैं, लेकिन दूध नहीं देने पर उसे सड़कों पर छोड़ देते है। ऐसे गो पालकों की पहचान कर कार्रवाई करनी होगी।
गौ संरक्षण समिति रावांभाठा के संरक्षक हरीश जोशी ने कहा कि पशु परीक्षण अधिनियम हमारे छत्तीसगढ़ में प्रभावशील है। इसमें गोवंश की हत्या पर 10 वर्ष कारावास और 50 हजार जुर्माने तक का प्रावधान है। लेकिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं, इसलिए उनमें इसे लेकर भय नहीं है।
नगर निगम की स्वास्थ्य अधिकारी प्रीति सिंह ने बताया कि सीमित संसाधनों के साथ लगातार गोवंश की सुरक्षा के साथ सड़कों पर घूम रहे बेसहारा श्वानों के बधियाकरण कर रहे है। सोनडोंगरी में जल्द शुरू होने वाले शेल्टर हाउस के बाद इस कार्य में तेजी आएगी।
आश्रय फार एनिमल वेलफेयर फाउंडेशन की संस्थापिका तनुश्री तिवारी ने कहा कि सड़कों पर बेसहारा श्वान पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाने के कारण आक्रामक हो जाते हैं। बैग लेकर स्कूल जाते बच्चे उन्हें डाग कैचर टीम की भांति लगते है, या यूं कहिए कि उन्हें बच्चों के स्कूल बैग से खाने पदार्थों की गंध आती है। इसलिए कुत्ते बच्चों पर टूट पड़ते हैं। बधियाकरण से ही शहर के श्वानों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने नागरिक संवाद कार्यक्रम में पहुंचे विशेषज्ञ वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निःसंदेह आप के विचार और प्रयासों से हमें राजधानी की सड़कों को मवेशियों और श्वानों से मुक्त और सुरक्षित करने का आधार मिलेगा। महाराष्ट्र मंडल नगर संवाद में आपसे मिले सुझावों और निष्कर्षों के साथ महापौर मीनल चौबे सहित राजधानी के चारों विधायकों से मिलेगा।
कार्यक्रम का संचालन सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी और आभार प्रदर्शन साहित्य समिति की प्रमुख कुमुद लाड ने किया। इस अवसर पर मंडल के सचिव चेतन दंडवते, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, युवा समिति समन्वयक विनोद राखुंडे, महाराष्ट्र मंडल भवन प्रभारी निरंजन पंडित, विजय लाड सहित अनेक पदाधिकारी व सभासद उपस्थित रहे।





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