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 कुपोषण दूर करने के लिए फोर्टिफाइड फसलों का उपयोग किया जाए : डॉ. चंदेल

 -कृषि विश्वविद्यालय में कृषि, पोषण एवं लोक स्वास्थ्य विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

-कार्यशाला में वैज्ञानिक, चिकित्सक, पोषण विशेषज्ञ, उद्योगपति तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी एवं विद्यार्थी शामिल हुए
  रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा  है कि आज हमारा देश खाद्यान्न उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है और लोगों को पर्याप्त मात्रा में खाद्य सुरक्षा प्राप्त हो रही है लेकिन फिर भी हमारा देश कुपोषण से जूझ रहा है। इसका प्रमुख कारण खाद्य पदार्थां में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होना है। उन्होंने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि फोर्टिफाईड फसलों एवं खाद्य पदार्थां का उपयोग किया जाए। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों एवं जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों से आव्हान किया कि वे विभिन्न फसलों की फोर्टीफाईड किस्में विकसित करें जो लोगों को अधिक मात्रा में पौष्टिक तत्व प्रदान करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि स्कूलों तथा आंगनबाडी केन्द्रों में में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराये जाने वाले भोजन में फोर्टीफाईड खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जाना चाहिए। डॉ. चंदेल इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 38वें स्थापना दिवस के अवसर पर बायोटेक्नालॉजी विभाग एवं खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से कृषि, पोषण एवं लोक स्वास्थ्य विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला में राज्य शासन के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग के विभिन्न अधिकारी, चिकित्सक, कृषि वैज्ञानिक, जैव प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, उद्योगपति, स्वंय सेवी संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित थे।
कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान जनसंख्या वृद्धि की दर को देखते हुए यह अनुमानित है कि वर्ष 2047 तक देश की जनसंख्या लगभग 165 करोड़ होगी। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों एवं बायोटेक्नोलॉजिस्ट को मिलकर काम करना होगा तथा फसलों की अधिक उत्पादन एवं पोषण देने वाली किस्में विकसित करनी होगी। पं. जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के समुदायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. प्रशान्त जायसवाल ने पोषण की चुनौतियों एवं इसके लोक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय लोगों में काफी बड़ी संख्या में एनिमिया पाया जाता है, जिसकी रोकथाम के लिए प्रोटीन समृद्ध भोजन लिया जाना चाहिए जिससे आयरन एवं फोलिक एसिड का शरीर में पर्याप्त मात्रा में अवशोषण हो सके। पं. जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के एनिमिया विशेषज्ञ डॉ. शैलेन्द्र अग्रवाल ने एनिमिया के विभिन्न पहलुओं तथा इसके कारण होने वाले स्वास्थ्यगत समस्याओं के बारे में जानकारी दी तथा एनिमिया से लड़ने के तरीकों पर प्रकाश डाला। गोयेल्ड फ्रोज़न फूड्स के प्रमुख डॉ. राकेश मिणा ने पोषक समृद्ध खाद्य पदार्थां के विकास, संभावनाओं तथा चुनौतियों पर चर्चा की।
‘‘फार्म टू फोर्क सॉल्यूशंस’’ मुम्बई के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. उमेश कांबले ने खाद्य सुरक्षा एवं एफ.एस.एस.ए.आई. संस्था की भूमिका पर प्रकाश डाला। कृषि विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश वेरूलकर ने विभिन्न प्रकार के फोर्टीफाईड्स फूड्स के बारे में जानकारी देते हुए मानव स्वास्थ्य पर फोर्टीफाईड खाद्य पदार्थां के प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने फोर्टीफाईड चावल के दानों के विकास तथा इन्हें सामान्य चावल में मिश्रित करने के उचित तरीके के बारे में जानकारी दी। खाद्य एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता डॉ. ए.के. दवे ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। मंच संचालन एवं कार्यशाला का संयोजन डॉ. शुभा बैनर्जी ने किया।

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