बालाजी के अनुसंधान पीठम और पद्म पीठम के बीच लगाया गया अष्टबंधन

-अग्नि प्रज्वलित कर की गई कुंभाराधना
- भगवान बालाजी का माताओं समेत महाशांति अभिषेक
टी सहदेव
भिलाई नगर। बालाजी मंदिर में शुक्रवार को सुबह आंध्र साहित्य समिति की देखरेख में अष्टबंधन महासंप्रोक्षण के दूसरे दिन वैदिक मंत्रों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि के बीच धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान अष्टबंधन समर्पण संपन्न हुआ। अष्टबंधन आठ तरह के द्रव्यों शंखचूर्ण, लाख, राल, माखन, गेरुलाल, मोम, पित्त, अखरोट से बना एक खास तरह का पवित्र लेप है, जिसे तिरुपति से आए पंडितों ने तैयार किया। इस लेप को तैयार करने में भक्तों ने भी अच्छी खासी दिलचस्पी दिखाई। पंडितों ने इस लेप को बालाजी भगवान की मुख्य प्रतिमा के अनुसंधान पीठम और पद्म पीठम के बीच लगाया। इसकी पकड़ सीमेंट से भी ज्यादा मजबूत होती है, एक बार जब यह लेप लग जाता है, तो बारह वर्षों तक प्रतिमा टस से मस नहीं होती।
इष्टदेव की पूजा से हुई अनुष्ठान की शुरुआत
इससे पहले अनुष्ठान की शुरुआत में अतिथि पंडितों के सान्निध्य में यज्ञशाला में प्रतिष्ठित इष्टदेव बालाजी, माता श्रीदेवी-भूदेवी के उत्सव विग्रहों की धार्मिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना की गई। उसके बाद श्रीविष्णु के सेनाधिपति एवं वैकुंठ के द्वारपाल विष्वक्सेन की आराधना की गई। प्राचीन वैष्णव संप्रदाय वैखानस के आगमोक्त विधि-विधान से संपन्न हो रहे अनुष्ठान में विष्वक्सेन की आराधना के बाद पुण्याहवचनम कलश की पूजा की गई। इस कलश में पांच नदियों कृष्णा, कावेरी, गोदावरी, तुंगभद्रा और नर्मदा का मंत्रोच्चारित जल भरकर उसकी पूजा की जाती है, जिससे अज्ञात दोषों और विकारों का निवारण हो सके।
अग्नि प्रज्वलित कर की गई कुंभाराधना
कलश पूजन के बाद हवनकुंडों में अग्नि प्रणयम यानी कि अग्नि प्रज्वलित कर कुंभाराधना की गई। तत्पश्चात विशेष उक्तहोम के माध्यम से कुंभ में शक्ति का आह्वान किया गया। उसके बाद पंचगव्याधिवास संस्कार करके भगवान का अभिषेक किया गया, जिससे कि उनका बिंब संपूर्ण और दिव्य आभा के साथ दमके। पंचगव्याधिवास के उपरांत क्षीराधिवास, जलाधिवास, चतुर्दश कलश स्नपन और फिर नवकलश का अभिषेक किया गया। इस तरह अनुष्ठान के पहले चरण का समापन अष्टबंधन समर्पण के साथ किया गया। अनुष्ठान में यजमान के तौर पर पीएस राव दंपति शामिल हुआ। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष पीवी राव ने आंध्र समाज के प्रमुख व्यक्तियों का शॉल देकर सम्मान भी किया।
भगवान बालाजी का माताओं समेत महाशांति अभिषेक
अनुष्ठान के अगले चरण में शाम को भगवान बालाजी माता श्रीदेवी-भूदेवी, द्वारपाल, ध्वज और विष्णु वाहन गरुड़ का महाशांति अभिषेक किया गया। इससे पहले हर बार की तरह पुनः विष्वक्सेन आराधना और पुण्याहवचनम कलश की पूजा-अर्चना भी की गई। इसके बाद यज्ञशाला में कुंभाराधना, अग्नि प्रणयम, विशेष होम, शय्याधिवासम, हौत्र प्रशंसनम, मूर्तिहोम और नीराजन जैसे धार्मिक कृत्य संपन्न किए गए। विशेष होम में सभी देवताओं का आह्वान किया गया, जबकि शय्याधिवासम में शैय्या पर विग्रहों को विश्रांति दी गई। इस दौरान अधिकतर अनुष्ठानों का बड़ी स्क्रीन से सीधा प्रसारण भी किया गया।
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