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 मंत्रोच्चार के बीच हुआ महासुदर्शन होम एवं बालाजी संग श्रीदेवी-भूदेवी कल्याणोत्सव

 

-सुदर्शन होम के लिए वेदी पर नवग्रहों  की स्थापना 
 
बालाजी संग श्रीदेवी-भूदेवी परिणय सूत्र में बंधे 
 
टी सहदेव
भिलाई नगर। बालाजी मंदिर में सोमवार को आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में मनाए जा रहे ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महासुदर्शन होम किया गया और शाम को बालाजी संग माता श्रीदेवी-भूदेवी का कल्याणोत्सव (विवाहोत्सव) सनातन रस्मों तथा धार्मिक सद्भाव से मनाया गया। दोनों अनुष्ठानों में यजमान‌ पीएस राव, के लक्ष्मीनारायण तथा पी केशवराव दंपति समेत सौ से ज्यादा दंपति शामिल हुए। 29 फरवरी से 6 मार्च तक हो रहे अनुष्ठानों में प्रदेश की दुर्ग जिला इकाई श्री सत्य साईं सेवा संगठन पादुका सेवा का दायित्व संभाले हुए है।
 सुदर्शन होम के लिए वेदी पर नवग्रहों  की स्थापना 
महासुदर्शन होम की शुरुआत तिरुपति से आए प्रधान पंडित डी फणी कुमार की अगुवाई में नित्य की भांति श्रीविष्णु के सेनाधिपति विष्वक्सेन एवं वरुण देवता के प्रतीक पुण्याहवचनम कलश की आराधना से की गई। इसके बाद यज्ञशाला मंच पर बने एक ओर सभ्यम हवनकुंड, तो दूसरी तरफ पौंडरिकम हवनकुंड में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि प्रज्वलित कर महासुदर्शन होम का विधि-विधान से सूत्रपात किया गया। यज्ञ स्थल पर एक वेदी भी बनाई गई, जिस पर नवग्रहों को स्थापित किया गया, जबकि सुदर्शन हवनकुंड में समर्पित करने के लिए लाई, मधु, मिश्री, सुगंधदायक द्रव्य, गुड़, काजू सहित  27 प्रकार के हविष्य व्यवस्थित किए गए।
 मंत्रोच्चार के बीच हुआ महासुदर्शन होम 
सुदर्शन होम को शुरू करने से पहले एक बार फिर पुण्याहवचनम कलश की पूजा-अर्चना की गई। इससे पहले हवन-स्थल का शुद्धीकरण अभिमंत्रित जल का छिड़काव कर किया गया। शुद्धीकरण के उपरांत नवग्रहों की पूजा की गई। फिर अतिथि पंडितों ने पुरुष सूक्त और श्रीसूक्त के मंत्रों का जाप करते हुए महासुदर्शन होम का संस्कार पूरा किया। होम की इतिश्री पूर्णाहुति से हुई। इससे पहले प्रधान पंडित ने भगवान विष्णु के आयुध सुदर्शन चक्र और सुदर्शन होम के महत्व के बारे में भक्तों को बताया कि सुदर्शन चक्र से श्रीविष्णु दुष्ट शक्तियों और राक्षसों का संहार करते हैं, जबकि सुदर्शन होम से सभी दोषों और व्याधियों का निवारण होता है। उन्होंने बताया कि सुदर्शन होम में दुर्लभ द्रव्यों को अर्पित करना होता है, जो जंगल में पाए जाते हैं। उनके स्थान पर जो द्रव्य सुलभ हैं, उन्हें अर्पित करने से भी हमारे मनोरथ पूरे हो सकते हैं।
 बालाजी संग श्रीदेवी-भूदेवी परिणय सूत्र में बंधे 
अनुष्ठान के दूसरे चरण में शाम को विष्वक्सेन और पुण्याहवचनम कलश की पुनः आराधना की गई। और उसके बाद शुभमुहूर्त पर भगवान बालाजी संग माता श्रीदेवी-भूदेवी का कल्याणोत्सव (विवाहोत्सव) शुरू हुआ। इस विवाहोत्सव में सारी सनातन रस्में निभाई गईं। पहले रक्षासूत्र आराधना की गई और उसके बाद उसे यजमानों को धारण कराया गया। रक्षासूत्र धारण के पश्चात यजमानों को पंडितों ने संकल्प दिलाया। उसके बाद क्रम से वर पूजा, कन्यादान, मांगल्य पूजा, यज्ञोपवीत पूजा, यज्ञोपवीत धारण, मंगलसूत्र धारण, अक्षतारोपण, माल्यार्पण जैसी वैवाहिक रीति-रिवाज निभाए गए। मंगलसूत्र धारण और अक्षतारोपण के समय पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि अपनी पराकाष्ठा पर थी। दोनों अनुष्ठानों में समिति के अध्यक्ष पीवी राव, सचिव पीएस राव, उपाध्यक्ष के सुब्बाराव, कोषाध्यक्ष टीवीएन शंकर और संयुक्त सचिव एनएस राव समेत कार्यकारिणी के सभी सदस्य पूरे समय तक मौजूद रहे।
 

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