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- रायपुर/नई दिल्ली। बागेश्वर धाम से छत्तीसगढ़ लौटते समय झाँसी के समीप हुई एक सड़क दुर्घटना में चोटिल हुए भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष किरण देव की नई दिल्ली स्थित मेदांता अस्पताल में सोमवार को सफल शल्य क्रिया (ऑर्थो सर्जरी) संपन्न हुई।छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि विख्यात अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अतीक वसदेव एवं उनकी समर्पित मेडिकल टीम की देखरेख में यह सर्जरी पूर्णतः सफल रही। आज 3 अगस्त को यह ऑपरेशन 1 घंटे से अधिक चला एवं इसमें मुख्यतः एसिटाबुलम फैक्चर रिपेयर किया गया। इस सर्जरी के उपरांत उनके स्वास्थ्य में तेज़ी से सुधार दर्ज किया जा रहा है और वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। श्री शर्मा ने बताया कि चिकित्सकों के परामर्श अनुसार, पूर्ण स्वास्थ्य लाभ लेने के पश्चात श्री देव अतिशीघ्र छत्तीसगढ़ वापस लौटेंगे। चिकित्सकों ने उन्हें कुछ दिनों के अनिवार्य विश्राम की सलाह दी है।विश्राम अवधि पूर्ण होने के उपरांत, श्री देव पुनः अपनी नियमित दिनचर्या और संगठन द्वारा निर्धारित आगामी कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे व संगठन कार्यों का नेतृत्व संभालेंगे। file photo
- बालोद । आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ऑनलाइन पंजीयन, स्वीकृति एवं छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। योजना के तहत शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेजों, आईटीआई तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ प्रदान किया जाएगा। सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण आवेदन की ऑनलाइन प्रक्रिया 20 जून 2026 से प्रारंभ होकर 30 दिसंबर 2026 तक संचालित होगी, जबकि नवीन आवेदन 01 अगस्त 2026 से 30 दिसंबर 2026 तक वेबसाईट https://postmatric-scholarship.cg.nic.in/ पर ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। छात्रवृत्ति की राशि विद्यार्थियों के आधार से सीडेड बैंक खातों में भुगतान आदेश जारी होने के पश्चात 07 कार्य दिवस के भीतर अंतरित की जाएगी। विभाग द्वारा सभी संस्था प्रमुखों, छात्रवृत्ति प्रभारियों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन, सत्यापन एवं स्वीकृति संबंधी समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
- -सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संस्था अध्यक्षों को सदस्य के रूप में शामिल करने हेतु प्रविष्टियां 15 अगस्त तक आमंत्रितबालोद। संचालनालय, महिला एवं बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार बालोद जिले में महिलाओं और उनके परिवारों में मजबूत रिश्तों को बढ़ावा देना, वैवाहिक चुनौतियों में कमी लाना, मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण, लिंग आधारित हिंसा और तलाक रोकने में मदद करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना आदि के उद्देश्य से बालोद जिले में विवाह पूर्व संवाद केन्द्र (पीएमसीसी) का संचालन एवं क्रियान्वयन किया जाएगा। जिसके अंतर्गत जिले के सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं संस्था अध्यक्षों को सदस्य के रूप में शामिल करने हेतु प्रविष्टियां 15 अगस्त 2026 तक आमंत्रित की गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग के मार्गदर्शन में ’तेरे मेरे सपने’ नामक विवाह पूर्व संवाद केन्द्र की परिकल्पना की गई है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में विवाह पूर्व संवाद केन्द्र ’तेरे मेरे सपने’ का संचालन का प्रारंभ किया जाएगा। विवाह पूर्व संवाद केन्द्र का क्रियान्वयन जिला स्तर पर गठित समिति के द्वारा जिला स्तरीय हब के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि केंद्र के संचालन हेतु जिला स्तर पर गठित समिति में क्रियाशील समाजिक कार्यकर्ता एवं संस्था के अध्यक्ष को सदस्य के रूप में लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले के इच्छुक जिला स्तर पर क्रियाशील सामाजिक कार्यकर्ता एवं संस्था के अध्यक्ष से प्रविष्टियां 15 अगस्त 2026 तक जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, कक्ष क्रमांक 79 संयुक्त कलेक्ट्रेट परिसर बालोद में स्वयं उपस्थित होकर या रजिस्टर्ड डॉक के माध्यम से प्रस्तुत कर सकते है।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने तथा सड़क पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने के उद्देश्य से जोन-01 नेहरू नगर क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। निगम प्रशासन एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने नेहरू नगर चौक गुरुद्वारा से मौर्या टॉकीज मार्ग तक सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े किए गए वाहनों तथा अवैध गुमटियों को हटाने की कार्रवाई की।कार्रवाई के दौरान सड़क पर अवैध पार्किंग करने वाले वाहन चालकों को हटाया गया तथा मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रही गुमटियों को भी हटवाया गया। निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सड़कों पर अतिक्रमण एवं अवैध पार्किंग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।निगम प्रशासन ने नागरिकों एवं व्यापारियों से अपील की है कि वे सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण न करें तथा अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही खड़े करें। भविष्य में भी इस प्रकार की संयुक्त कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- महासमुंद / धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अतंर्गत वन अधिकार अधिनियम 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रबंधन योजना के विकास के लिए जिला महासमुन्द में तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन एवं स्थानीय संस्थाओं से 10 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए गए है।कार्यालय कलेक्टर आदिवासी विकास महासमुन्द से जारी सूचना के अनुसार भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय एवं आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चयनित संस्थायें ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना तैयार करने तथा उसके प्रभावी क्रियान्वयन में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगी, इसके लिये भारत सरकार द्वारा आवश्यक वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। चयनित तकनीकी सहयोगी संस्थाओं को ग्राम सभाओं का क्षमता विकास, वन भूमि का सर्वेक्षण प्राकृतिक संसाधनों एवं लघु वनोपज की मैपिंग, जैव विविधता का दस्तावेजीकरण तथा सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति को तकनीकी हैन्ड होल्डिंग उपलब्ध कराने का दायित्व निभाना होगा, साथ ही सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजनाओं के प्रभावी संचालन में भी सहयोग प्रदान करना होगा।
- दुर्ग / सार्वजनिक स्वास्थ्य संरक्षण, उपभोक्ता हितों की रक्षा तथा खाद्य व्यापार में निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा राज्य में पनीर एनालॉग तथा गैर-दूध खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण एवं बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। आयुक्त खाद्य सुरक्षा, छत्तीसगढ़ द्वारा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 18 एवं धारा 30 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया गया है। इसके अंतर्गत ऐसे किसी भी गैर-दूध उत्पाद जो असली पनीर, क्रीम, मक्खन या अन्य दुग्ध उत्पादों की नकल (इमिटेशन) करते हैं, उनके संपूर्ण चक्र पर रोक लगा दी गई है।खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग, जिला दुर्ग के अभिहित अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के समस्त खाद्य कारोबारकर्ताओं जैसे निर्माता फर्म, डेयरी फर्म, होटल, रेस्टोरेंट, थोक विक्रेता एवं फुटकर विक्रेताओं को निर्देशित किया गया है कि वे पनीर एनालॉग या नकली दुग्ध उत्पादों का निर्माण, भंडारण, परिवहन व विक्रय तुरंत बंद करना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, निर्माता फर्में अपने लाइसेंस से एनालॉग उत्पादों को हटाने हेतु तत्काल आवश्यक सुधार करें। विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। व्यवस्था को प्रभावी बनाने एवं व्यवसायियों को जागरूक करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा शीघ्र ही होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों की एक विशेष बैठक आयोजित कर इस प्रतिबंधात्मक आदेश और खाद्य सुरक्षा मानकों के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही, जिले में सघन जांच अभियान भी संचालित किया जाएगा।
- दुर्ग / भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई के शोधकर्ताओं ने PET प्लास्टिक कचरा को एक उच्च-मूल्य वाली पुनः उपयोग योग्य सामग्री में परिवर्तित करने की एक अभिनव तकनीक विकसित की है। इस नई सामग्री को बार-बार नया आकार दी जा सकती है, मरम्मत की जा सकती है तथा पुनर्चक्रित की जा सकती है। यह उपलब्धि प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, सतत विनिर्माण को बढ़ावा देने तथा चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।यह शोध आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. संजीब बनर्जी के नेतृत्व में प्रियंक सिन्हा, भरतभूषण मेश्राम एवं ओंकारनाथ वर्मा द्वारा किया गया। इस शोध के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित शोध पत्रिका "Materials Today Catalysis" में प्रकाशित हुए हैं, जो टिकाऊ सामग्री के क्षेत्र में आईआईटी भिलाई के बढ़ते योगदान को दर्शाते हैं। इस विकसित तकनीक के लिए शोधकर्ताओं ने भारतीय पेटेंट आवेदन भी दायर किया है।PET बोतलें विश्वभर में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक उत्पादों में शामिल हैं, विशेषकर पेय पदार्थों की बोतलों और खाद्य पैकेजिंग में। इनसे प्रतिवर्ष लाखों टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है। यद्यपि इनका पुनर्चक्रण किया जाता है, लेकिन पारंपरिक पुनर्चक्रण तकनीकों में प्लास्टिक की गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होती जाती है, जिससे इसका दोबारा उपयोग सीमित हो जाता है।इस चुनौती का समाधान करने के लिए आईआईटी भिलाई की शोध टीम ने सबसे पहले नीलगिरी की पत्तियों से एक हरित (Green), पुनः उपयोग योग्य उत्प्रेरक विकसित किया। यह उत्प्रेरक अपशिष्ट PET बोतलों को एक मूल्यवान रासायनिक बिल्डिंग ब्लॉक में परिवर्तित करता है। उत्प्रेरक को चुंबक की सहायता से आसानी से अलग कर पुनः कई बार उपयोग किया जा सकता है, जिससे पुनर्चक्रण प्रक्रिया अधिक स्वच्छ, टिकाऊ और किफायती बनती है। इसके बाद इस रासायनिक निर्माण खंड को एक उच्च-प्रदर्शन, पुनः संसाधित एवं संभावित 3D प्रिंट योग्य गतिशील पॉलिमर में परिवर्तित किया जाता है।यह तकनीक फेंकी गई PET बोतलों को पर्यावरणीय बोझ से मूल्यवान इंजीनियरिंग सामग्री में बदलकर "वेस्ट-टू-वेल्थ" की अवधारणा को साकार करती है। यह प्लास्टिक कचरे को कम करने, पेट्रोलियम-आधारित नए कच्चे माल पर निर्भरता घटाने तथा एक ही सामग्री को बार-बार उपयोग करने की सुविधा प्रदान करती है। इससे प्लास्टिक उत्पादों के पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में सहायता मिल सकती है। इस प्रकार की टिकाऊ सामग्री प्रौद्योगिकियाँ परिपत्र अर्थव्यवस्था को मजबूत करने तथा स्वच्छ विनिर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।इस विकसित सामग्री की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि गर्म करने पर इसे मनचाहे आकार में ढाला जा सकता है तथा ठंडा होने पर यह उसी नए आकार को स्थायी रूप से बनाए रखती है। शोधकर्ताओं ने इसे विभिन्न आकृतियों में बार-बार ढालकर इसकी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया, जबकि इसके गुणों में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई। यह विशेषता इसे मरम्मत योग्य एवं पुनः उपयोग योग्य बनाती है, जिससे इसकी उपयोग अवधि बढ़ती है और प्लास्टिक कचरे में कमी आती है।डॉ. संजीब बनर्जी के अनुसार, वर्तमान में उपयोग होने वाले अधिकांश थर्मोसेट प्लास्टिक मजबूत और टिकाऊ तो होते हैं, लेकिन एक बार तैयार हो जाने के बाद उन्हें दोबारा आकार नहीं दिया जा सकता और न ही पुनर्चक्रित किया जा सकता है। इससे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है। आईआईटी भिलाई द्वारा विकसित यह नई सामग्री मजबूती और पुनः उपयोग की क्षमता, दोनों को एक साथ प्रदान करती है तथा यह दर्शाती है कि फेंकी गई PET बोतलों को लैंडफिल में भेजने के बजाय उच्च-मूल्य वाले इंजीनियरिंग पदार्थों में बदला जा सकता है।यह तकनीक अनुकूलित प्लास्टिक उत्पादों, पुनः उपयोग योग्य उपभोक्ता वस्तुओं, शैक्षणिक मॉडल तथा इंजीनियरिंग प्रोटोटाइप के निर्माण में उपयोगी हो सकती है, जहाँ बार-बार आकार बदलने और मरम्मत की आवश्यकता होती है। गर्म करने पर इसका मुलायम होना तथा ठंडा होने पर पुनः अपनी मजबूती प्राप्त कर लेना इसे भविष्य की 3D प्रिंटिंग एवं एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों के लिए भी एक संभावित सामग्री बनाता है, जिससे कम सामग्री अपशिष्ट के साथ अधिक टिकाऊ उत्पादन संभव हो सकेगा।यह नवाचार भारत सरकार की स्वच्छ भारत मिशन, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया तथा राष्ट्रीय संसाधन दक्षता नीति (National Resource Efficiency Policy) जैसी पहलों के अनुरूप परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने, प्लास्टिक प्रदूषण कम करने तथा सतत विनिर्माण को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। अपशिष्ट PET बोतलों को पुनः उपयोग योग्य उच्च-मूल्य सामग्री में परिवर्तित करने वाली यह तकनीक नए प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने, संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग को बढ़ावा देने तथा स्वच्छ एवं टिकाऊ विनिर्माण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
- रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से निगम के कार्यों के सुचारु एवं प्रभावी संचालन के उद्देश्य से आगामी आदेश तक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपने संबंधी आदेश जारी किए हैं।जारी आदेश के अनुसार श्रीमती जागृति साहू, उपायुक्त को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग (जाति प्रमाण पत्र) के उपायुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।इसी प्रकार श्री जसदेव सिंह बाबरा, उपायुक्त को उनके वर्तमान कार्यों के अतिरिक्त सामान्य प्रशासन विभाग के उपायुक्त एवं जोन क्रमांक 2 के चेक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।वहीं श्रीमती संगीता साहू, प्रभारी उपायुक्त को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ जनसूचना अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। यह आदेश नगर निगम आयुक्त द्वारा तत्काल प्रभाव से प्रभावशील कर दिया गया है।
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-रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप तथा विशेष आरती का आयोजन भी किया गया-धार्मिक आयोजन का समापन रात को महाभोग से हुआटी सहदेवभिलाई नगर। सावन माह के प्रथम सोमवार को तालपुरी बी ब्लॉक स्थित शिवमंदिर में शिवमंदिर समिति के तत्वावधान में सनातन विधिविधान से रुद्राभिषेक और पूजन हुआ। मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं विशेषकर महिलाओं की भारी भीड़ ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं बेलपत्र, धतूरा पुष्प आदि अर्पित कर सुख समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की। इस धार्मिक अनुष्ठान में मुख्य यजमान के रूप में यमलेश देवांगन और गजानन अवचट दंपति बैठे। शाम को रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप तथा विशेष आरती का आयोजन भी किया गया। प्रथम सोमवार के धार्मिक आयोजन का समापन रात को महाभोग से हुआ।सुबह ही से लगा भक्तों का तांतामंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। शिव भक्ति में लीन श्रद्धालुओं के 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। मंदिर में भक्तों की आस्था ऐसे उमड़ी कि पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया और दिन भर भोलेनाथ के जयकारे और मंदिर की घंटियों की ध्वनि गूंजती रही। शिवमंदिर समिति के कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय सोमवार को डीसी गढ़ेवाल और ओमवीर सिंह, तृतीय सोमवार को हरिजीत सिंह, जोगाराव तथा मोनिका वर्मा एवं अंतिम सोमवार को आरके दत्ता, एसएल साहू और आरती चौधरी भोग की व्यवस्था करेंगे। भोग की व्यवस्था करने वाले शिवभक्त उस दिन के यजमान होंगे।धार्मिक अनुष्ठान में इस बार नगद राशि नहींसमिति ने बताया कि इस बार समिति ने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन राशि स्वीकृत नहीं करने का फैसला किया है, उसके स्थान पर इच्छुक शिवभक्त पूजा सामग्री या भोग की व्यवस्था स्वयं कर सकते हैं या समिति से संपर्क कर सीधे कैटरर्स के माध्यम से भी व्यवस्था कर सकते हैं। वहीं रुद्राभिषेक में सम्मिलित होने के इच्छुक श्रद्धालु अपने नाम मंदिर समिति में दर्ज करा सकते हैं। प्रसाद या अन्य पूजन सामग्री मंदिर में उपस्थित पंडित को दे सकते हैं। - रायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य में किफायती परिवहन की दिशा में सतत् विकल्प योजना (एस.ए.टी.ए.टी.) के क्रियान्वयन एवं निगरानी हेतु गठित समिति की बैठक यहां मंत्रालय महानदी भवन में ऊर्जा विभाग एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में कचरे और बायोगैस से संपीड़ित जैव गैस (CBG) के उत्पादन को ईंधन के रूप में उपयोग करने के संबंध में व्यापक चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया की सी.बी.जी. प्लांटों के लिए जिलों में भूमि चिन्हित कर प्लांट लगाने के लिए सभी जरूरी कार्य किए जा रहें हैं। राज्य में छत्तीसगढ़ सी.बी.जी. पॉलिसी 2026 नीति का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके लिए राज्य शासन के विभिन्न विभागों की भूमिका एवं जिम्मेदारियां निर्धारित की गई है।बैठक में सी.बी.जी. प्लांट की स्थापना तथा इसमें निवेश करने वाले उद्यमियों और निवेशकों को प्रोत्साहित करने के बारे में चर्चा हुई। बैठक में अधिकारियो ने बताया कि किफायती परिवहन की दिशा में सतत् विकल्प (SATAT) योजना भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृति गैस मंत्रालय की पहल है। अधिकारियों नें बताया कि यह योजना पूरे देश में लागू है, तथा छत्तीसगढ़ में भी लागू है। योजना के तहत तेल विपणन कंपनियाँ (ओ.एम.सी. व ओ.एन.जी.सी.)जैसे इंडियन ऑईल बी.पी.सी.एल. और पी.सी.एल. इन प्लांटों से उत्पादित सी.बी.जी. को खुद खरीदने का अनुबंध किया जाता है। सी.बी.जी. प्लांटस लगाने से खेता की पराली, धान का पैरा और कचरा सड़ने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है। इसमें किसानों को उनके कृषि अवशेषों और पशु अपशिष्ट के एवज में अतिरिक्त आय होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढाया जायेगा। बैठक में राज्य के विभिन्न नगर पालिका, निगमों में सी.बी.जी. संयंत्रों की स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की गई।बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी सतत् ऊर्जा उत्पादक और नगरीय निकायों में कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए योजना के तहत नये प्रयास किये जा रहें हैं। राज्य के भिलाई, रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, कोरबा, अंबिकापुर, रायगढ़ नगरीय निकायो में सी.बी.जी. संयंत्र स्थापित करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।बैठक में परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह और नगरीय प्रशासन एवं विकास, पशुधन विकास, पर्यावरण संरक्षण मंडल, कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण, सी.एस.आई.डी.सी. और ऑईल मार्केटिंग कम्पनी के अधिकारी शामिल हुए।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा शहर में सार्वजनिक स्थानों पर निर्माण सामग्री डम्प कर आवागमन में बाधा उत्पन्न करने वालों के विरूद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में निगम के जोन क्रमांक-2 वैशाली नगर अंतर्गत वार्ड क्रमांक-26 रामनगर मुक्तिधाम तालाब पार क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान पर बिल्डिंग मटेरियल डम्प किए जाने पर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति पर 1000 रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रामनगर मुक्तिधाम तालाब पार क्षेत्र में गिट्टी एवं रेत को सार्वजनिक स्थान पर डम्प कर दिया गया था। निर्माण सामग्री के इस प्रकार रखे जाने से आसपास के क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हो रहा था तथा नागरिकों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा सड़क किनारे गिट्टी एवं रेत रखे जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। मामले की जानकारी मिलने पर नगर निगम की टीम द्वारा मौके का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान सार्वजनिक स्थान पर गिट्टी एवं रेत डम्प किया हुआ पाया गया। निगम की टीम ने संबंधित व्यक्ति के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए बाधा शुल्क के रूप में 1000 रुपये का अर्थदण्ड वसूल किया। साथ ही सार्वजनिक स्थान पर इस प्रकार निर्माण सामग्री नहीं रखने की समझाइश भी दी गई।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त के निर्देशानुसार शहर में वर्षा जल की सुचारु निकासी सुनिश्चित करने के लिए सभी जोनों में नालियों की व्यापक सफाई कराई जा रही है। बरसात के दौरान जलभराव की स्थिति से मौसमी बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे नागरिकों को भी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए निगम प्रशासन द्वारा सफाई कर्मियों की टीम लगाकर छोटी एवं बड़ी नालियों की नियमित सफाई कराई जा रही है। सफाई के दौरान नालियों से निकाले गए गाद एवं कचरे मलबे को तत्काल हटाकर उसका उचित निस्तारण भी किया जा रहा है, ताकि दोबारा नालियां अवरुद्ध न हों।जोन-2 वैशाली नगर क्षेत्रांतर्गत वार्ड 26 रामनगर मुक्तिधाम तालाब परिसर झाडू कार्य एवं पुजा सामाग्रियों का तालाब विसर्जन का कचरा सफाई कार्य किया जा रहा है।नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे नालियों में कचरा एवं प्लास्टिक सामग्री न डालें तथा स्वच्छ एवं स्वस्थ शहर बनाने में निगम प्रशासन का सहयोग करें।
- शिकायत के त्वरित निराकरण से नियमित राशन मिलने लगा, हितग्राही ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का जताया आभारजांजगीर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 इसी दिशा में एक भरोसेमंद और प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है, जहां प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम भवतरा निवासी श्री देवेंद्र दिनकर की राशन कार्ड संबंधी शिकायत का त्वरित निराकरण किया गया। राशन कार्ड में त्रुटि होने के कारण उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनके परिवार को खाद्यान्न प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।समस्या के समाधान के लिए श्री देवेंद्र दिनकर ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही संबंधित विभाग ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। परीक्षण के दौरान राशन कार्ड में दर्ज त्रुटि का नियमानुसार सुधार किया गया, जिसके बाद उनका राशन कार्ड पुनः सक्रिय हो गया और उन्हें नियमित रूप से राशन मिलने लगा।श्री देवेंद्र दिनकर ने बताया कि राशन कार्ड में सुधार होने के बाद अब उन्हें और उनके परिवार को बिना किसी परेशानी के नियमित रूप से राशन मिलने के साथ-साथ अन्य पात्रतानुसार शासकीय योजनाओं का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा।समस्या के त्वरित समाधान पर श्री देवेंद्र दिनकर ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान का एक विश्वसनीय माध्यम बन गई है।
- -मचान विधि से बदली किस्मत: घुटरा की विमला दीदी बनीं महिला किसानों के लिए प्रेरणाएमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ) । कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाली ग्राम घुटरा की विमला दीदी आज वैज्ञानिक खेती की मिसाल बन चुकी हैं। इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी) के सहयोग से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर न केवल अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाया, बल्कि आसपास की महिला किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गई हैं। आईएफसी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से विमला दीदी सहित महिला किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मचान विधि (Trellis Method) से बरबटी की खेती करने की तकनीक सिखाई गई। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के बाद उनकी खेती में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला।मचान विधि के कारण बरबटी की बेलों को पर्याप्त सहारा मिला, जिससे पौधों का विकास बेहतर हुआ। फसल को भरपूर धूप और वायु संचार मिलने से पौधे अधिक स्वस्थ रहे तथा रोग एवं कीटों का प्रकोप भी काफी कम हुआ। परिणामस्वरूप बरबटी की फलियां लंबी, आकर्षक और बेहतर गुणवत्ता वाली तैयार हुईं, जिससे बाजार में उनकी अच्छी मांग बनी।इस तकनीक का एक बड़ा लाभ यह भी रहा कि फसल की तुड़ाई पहले की अपेक्षा अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई। खेत में कार्य करने में समय और श्रम दोनों की बचत हुई, जबकि उत्पादन में वृद्धि होने से आर्थिक लाभ भी बढ़ा। बेहतर गुणवत्ता के कारण उत्पाद को उचित मूल्य मिला, जिससे विमला दीदी की आय में सकारात्मक बढ़ोतरी हुई।विमला दीदी का कहना है कि आईएफसी द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने उनकी खेती करने का नजरिया बदल दिया। पहले जहां वे पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थीं, वहीं अब वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर रही हैं। उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीकों को सीखकर अपनाएं, तो कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।आज विमला दीदी की सफलता आसपास के गांवों की महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि सही प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर महिलाएं भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकती हैं।इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (आईएफसी)की यह पहल महिला किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने, उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो रही है। घुटरा की विमला दीदी की यह सफलता दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और सही मार्गदर्शन के साथ खेती में नई संभावनाओं के द्वार खोले जा सकते हैं।
- -जीवन पटेल को खेती-किसानी के छोटे-छोटे खर्चों में मिल रही मददरायपुर । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने में निरंतर मददगार साबित हो रही है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 06 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि तीन समान किस्तों में, प्रत्येक चार माह में 02 हजार रुपये के रूप में सीधे किसानों के खाते में अंतरित की जाती है। मुंगेली जिले के ग्राम सुरेठा निवासी किसान श्री जीवन पटेल ने पीएम किसान सम्मान निधि से मिल रही आर्थिक सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि खेती के दौरान किसानों को बीज, खाद, कृषि सामग्री सहित कई आवश्यकताओं के लिए समय-समय पर राशि की जरूरत होती है। ऐसे समय में पीएम किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि काफी उपयोगी साबित होती है।किसान श्री पटेल ने कहा कि चार माह में मिलने वाली 02 हजार रुपये की किस्त खेती-किसानी के छोटे-छोटे जरूरी खर्चों को पूरा करने में सहायक होती है। इससे किसानों को आर्थिक संबल मिलता है और खेती के कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में सुविधा होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी किसान हितैषी योजनाओं से किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि किसानों के लिए भरोसे का आधार बनी है। श्री जीवन पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं शासन-प्रशासन के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि किसानों के हित में संचालित ऐसी योजनाएं खेती को मजबूत बनाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान कर रही हैं।
- -अब पानी के लिए नहीं जाना पड़ता दूर, बेलसरी के हर घर में पहुंचा नल का जलमुंगेेली । शासन की फ्लैगशिप योजना जल जीवन मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए मुंगेेली जिले में हर घर नल से जल पहुंचाने लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मोहदंडा के आश्रित ग्राम बेलसरी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में सुखद बदलाव ला दिया है। कभी गर्मी के दिनों में पेयजल संकट से जूझने वाले इस गांव में अब हर घर नल से जल की सुविधा उपलब्ध हो चुकी है। घर-घर नल कनेक्शन के माध्यम से ग्रामीणों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से गांव में राहत, सुविधा और खुशहाली का नया अध्याय शुरू हुआ है। लगभग 474 की आबादी वाले बेलसरी गांव में पहले ग्रामीण पेयजल के लिए 08 हैंडपंपों पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे चले जाने से कई हैंडपंप सूख जाते थे, जिससे पेयजल की समस्या और बढ़ जाती थी। खासकर महिलाओं को पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। पानी लाने में उनका कई घंटे का समय और श्रम खर्च होता था, जिससे घरेलू कार्यों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी।ग्रामीणों की मांग पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत गांव में पाइपलाइन का विस्तार कर घर-घर नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया। अब ग्रामीण परिवारों को अपने ही घर में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल मिलने लगा है। पानी के लिए दूर जाने की मजबूरी खत्म होने से ग्रामीणों के समय और श्रम की बचत हो रही है तथा दैनिक जीवन पहले की तुलना में कहीं अधिक सहज हुआ है। गांव की महिला जयतरीन बाई ने बताया कि पहले पानी के लिए कई घंटे तक परेशान होना पड़ता था। कई बार दूसरे घरों में जाकर पानी लेना पड़ता था, लेकिन अब घर में ही नल से पानी मिल जाता है। इसी तरह शांति बाई साहू, बैशाखा साहू एवं रामफूल साहू ने बताया कि घर तक नल का पानी पहुंचने से सबसे बड़ी राहत महिलाओं को मिली है। अब पानी भरने में लगने वाला समय बच रहा है और इस समय का उपयोग घर-परिवार, बच्चों की पढ़ाई तथा अन्य जरूरी कार्यों में किया जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।[19:57, 03/08/2026] Manjusha Sharma: 00000002
- -गांव के पास खुला फड़, 365 संग्राहकों को मिला सीधा आर्थिक लाभरायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया माध्यम बन गई है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली।पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। अब गांव के पास फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च बचा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनकी आय बढ़ी है और काम करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। इससे ग्रामीणों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रति उत्साह बढ़ा। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इन फड़ों के माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल केवल तेन्दूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है।
- ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला आयोजित120 स्कूली विद्यार्थियों ने वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से सीखी कार्टून और कैरिकेचर की बारीकियांमुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप कार्टून कैनवास पर उभरी नए बस्तर की तस्वीररायपुर ।बस्तर की सकारात्मक छवि, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को रचनात्मक कला के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से सोमवार को जगदलपुर के एक निजी होटल में ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका ‘कार्टून वॉच’ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में जिले के 10 विद्यालयों के 120 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि अपनी भावनाओं और विचारों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करना भी एक विशेष हुनर है। उन्होंने कहा कि कार्टून और कैरिकेचर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और विकास के सकारात्मक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सशक्त कला है। इस अवसर पर महापौर श्री संजय पांडेय एवं एमआईसी सदस्य श्री संग्राम सिंह, स्कूलों के शिक्षक एवं विद्यार्थीगण भी उपस्थित रहे। बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने भी कार्यशाला में पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट श्री माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे ने लाइव डेमो के माध्यम से विद्यार्थियों को कार्टून एवं कैरिकेचर निर्माण की तकनीकें सिखाईं। उन्होंने विद्यार्थियों को कला के सामाजिक महत्व, रचनात्मक संभावनाओं तथा रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी। गौरतबल है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर विकास, विश्वास और नई संभावनाओं के साथ नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा जनजातीय संस्कृति जैसी धरोहरें बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिला रही हैं। ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला का उद्देश्य इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करना है। कार्यशाला में बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता और सृजनात्मक प्रतिभा से कैनवास पर नए बस्तर की बदलते स्वरूप, विकास और खुशहाली की जीवंत तस्वीर उकेरी।‘कार्टून वॉच’ के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करना और बस्तर की खूबियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की सकारात्मक पहचान को देशभर में स्थापित करने की दिशा में एक अभिनव प्रयास है। यह आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे ने वनमंत्री और महापौर का कैरिकेचर बनाकर उनको भेंट की। कार्यशाला में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और इनाम प्राप्त किया।
- -बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपनेरायपुर। आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।कलेक्टर श्री विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- -भिलाई में Vidyarambh 2.0 Orientation कार्यक्रम में बोले – डिग्री नहीं, स्किल, व्यक्तित्व और नवाचार तय करेंगे भविष्यरायपुर। प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि विकसित भारत का सपना युवाओं की प्रतिभा, कौशल और नवाचार की शक्ति से ही साकार होगा। उन्होंने कहा कि आज का युग ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है, जहाँ केवल डिग्री नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता, व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और स्किल सफलता की वास्तविक पहचान हैं। मंत्री श्री चौधरीसोमवार को भिलाई स्थित Rungta International Skills University द्वारा आयोजित Vidyarambh 2.0 Orientation कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर प्रसिद्ध उद्यमी, कंटेंट क्रिएटर एवं लेखक श्री अंकुर वारिकू, रुंगटा समूह के अध्यक्ष श्री संतोष रुंगटा सहित शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।अपने संबोधन में वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और नवाचार आधारित नीतियों ने देश के युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध कराए हैं। आने वाला समय जेन-जी (Gen Z) का है और यही पीढ़ी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।मंत्री श्री चौधरी ने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि रायगढ़ जिले के छोटे से गांव बायंग से लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा और फिर सार्वजनिक जीवन तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। उन्होंने बताया कि बचपन में पिता के निधन के बाद कठिन परिस्थितियों में उनकी माता ने उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में अपनी माता की पेंशन संबंधी समस्या के समाधान के लिए कलेक्टर कार्यालय जाने का अनुभव उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। उसी दिन उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया और स्वाध्याय, अनुशासन तथा निरंतर प्रयास के बल पर अपने लक्ष्य को प्राप्त किया।वित्त मंत्री ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को अपने भीतर नई-नई स्किल विकसित करनी होगी, बदलते समय के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा और जीवनभर सीखने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन, राजनीति, आधुनिक कृषि और निवेश जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में मिली सफलता का आधार निरंतर सीखना और स्वयं को समय के साथ विकसित करना रहा है।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कठिनाइयों को कभी अभिशाप न समझें। संघर्ष ही व्यक्ति को मजबूत बनाता है और बड़े लक्ष्य प्राप्त करने की क्षमता देता है। सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो चुनौतियों का सामना सकारात्मक सोच के साथ करते हैं।मंत्री श्री चौधरी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की तुलना दूसरों से न करें, बल्कि उनकी मौलिक प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि दुनिया में असाधारण सफलता उन्हीं लोगों ने प्राप्त की है जिन्होंने पारंपरिक सोच से अलग हटकर नवाचार और रचनात्मकता का मार्ग चुना।कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि यदि वे ज्ञान, कौशल, नवाचार और सकारात्मक सोच को अपनी ताकत बनाएंगे तो न केवल अपना भविष्य उज्ज्वल करेंगे, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- -नगपुरा वर्षा जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन का बना अनुकरणीय मॉडल-प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरणरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित 'मोर गांव मोर पानी' अभियान के तहत अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दुर्ग जिले की ग्राम पंचायत नगपुरा में जल संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल विकसित किया गया है, जहां लगभग 2 हजार जल अवशोषण ट्रेंच का निर्माण कर वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण की प्रभावी व्यवस्था की गई है। यह पहल अब प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के अंतर्गत विकसित आंवला एवं करौंदा बगीचे में वैज्ञानिक पद्धति से जल अवशोषण ट्रेंच तैयार किए गए हैं। पहले वर्षा ऋतु के दौरान अधिकांश पानी बहकर नालों के माध्यम से निकल जाता था, जिससे मिट्टी की नमी कम होती थी और पौधों की वृद्धि प्रभावित होती थी। ट्रेंच निर्माण के बाद अब वर्षा जल उसी स्थान पर रुककर धीरे-धीरे भूमि में समाहित हो रहा है, जिससे भू-जल स्तर में सुधार के साथ बगीचे की उत्पादकता भी बढ़ रही है।तकनीकी सहायक सुश्री दीप्ति सिंह ने बताया कि प्रत्येक ट्रेंच की क्षमता लगभग 2 घन मीटर है। इस आधार पर एक बार की अच्छी वर्षा में लगभग 4 हजार घन मीटर जल का संरक्षण संभव है। यदि वर्षा ऋतु के दौरान ट्रेंच कई बार भरते हैं, तो अनुमानित 1.20 लाख घन मीटर वर्षा जल का भू-जल पुनर्भरण किया जा सकता है। इससे भू-जल स्तर में वृद्धि, मृदा संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा भविष्य में सिंचाई एवं पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है। भूतपूर्व मनरेगा योजना अंतर्गत किए गए इस कार्य से बड़ी संख्या में स्थानीय श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं को रोजगार प्राप्त हुआ। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी भी मजबूत हुई है। यह मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ग्राम पंचायत नगपुरा में विकसित यह मॉडल वर्षा जल के वैज्ञानिक प्रबंधन, भू-जल संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार राज्य की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने और 'मोर गांव मोर पानी' अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
- -शहीदांड में बनने वाले इंटीग्रेटेड पैक हाउस के संचालन में अपनाई जाएंगी आधुनिक कृषि एवं प्रसंस्करण की सर्वाेत्तम तकनीकरायपुर । जशपुर जिले में कृषि को मूल्य संवर्धन आधारित व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) तथा जिले के विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित सह्याद्री फार्म्स का अध्ययन एवं प्रशिक्षण भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य बगीचा विकासखंड के शहीदांड में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड पैक हाउस के प्रभावी संचालन के लिए देश के अग्रणी किसान-स्वामित्व वाले कृषि एवं प्रसंस्करण मॉडल का अध्ययन करना था।प्रतिनिधिमंडल ने सह्याद्री फार्म्स के सफल एफपीओ मॉडल, आधुनिक कृषि प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात प्रणाली का गहन अध्ययन किया। अधिकारियों ने जाना कि संगठित किसान मॉडल के माध्यम से उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक की पूरी श्रृंखला विकसित कर किसानों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कैसे जोड़ा जा सकता है।भ्रमण के दौरान टीम ने अंगूर, अनार सहित विभिन्न उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के खेतों का निरीक्षण किया। यहां ड्रिप सिंचाई, वैज्ञानिक खेती, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन, गुणवत्ता मानकों और निर्यातोन्मुख उत्पादन प्रणाली की आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया गया। विशेषज्ञों ने वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और आधुनिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी भी साझा की।प्रतिनिधिमंडल ने सह्याद्री फार्म्स के अत्याधुनिक प्रसंस्करण एवं वैल्यू एडिशन प्लांट का भी निरीक्षण किया। यहां अंगूर, अनार, केला, आम, स्वीट कॉर्न और टमाटर जैसे उत्पादों की ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, धुलाई, पल्प निर्माण, एसेप्टिक पैकेजिंग, कोल्ड चेन, फ्रोजन स्टोरेज और निर्यात पैकेजिंग की संपूर्ण प्रक्रिया का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने समझा कि प्राथमिक कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।शहीदांड में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड पैक हाउस जिले के किसानों, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों तथा कृषि उद्यमियों के लिए आधुनिक कॉमन फैसिलिटी सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां ग्रेडिंग, सॉर्टिंग, पैकेजिंग, संरक्षण और प्रसंस्करण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। प्रस्तावित इकाई में टमाटर, आम, नाशपाती, कटहल, लीची और खीरा सहित विभिन्न कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के प्रसंस्करण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।इस परियोजना से फसल उपरांत होने वाले नुकसान में कमी आएगी, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा तथा एफपीओ को बड़े खरीदारों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और निर्यात बाजारों से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही यह केंद्र कृषि आधारित उद्यमिता, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क, प्रशिक्षण और क्षमता विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।जिला प्रशासन ने बताया कि सह्याद्री फार्म्स के अध्ययन से प्राप्त अनुभवों और सर्वाेत्तम कार्यप्रणालियों को शहीदांड के इंटीग्रेटेड पैक हाउस के संचालन में शामिल किया जाएगा। विशेष रूप से एफपीओ सशक्तिकरण, गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क तथा किसानों के लिए दीर्घकालिक हैंडहोल्डिंग व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल जशपुर के आदिवासी किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य दिलाने के साथ जिले में कृषि को मूल्य संवर्धन आधारित एग्री-बिजनेस के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल पर मिली आर्थिक राहतरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, वन एवं बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार बीजापुर जिले में नक्सली हिंसा के 13 पीड़ितों को पुनर्वास नीति के तहत कुल 32 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।यह सहायता उन नागरिकों के लिए स्वीकृत की गई है, जो नक्सली हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए हैं या स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे पीड़ितों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना है।स्वीकृत सहायता राशि के अंतर्गत पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ के दौरान क्रॉस फायरिंग में गंभीर रूप से घायल नंदू ओयाम और जिला कुंजाम, माओवादियों की मारपीट में घायल ईस्ता बोर्रा, बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल मितराम रावटे, आईईडी विस्फोट में घायल कोरसे संतोष, चिड़ेम कन्हैया और कविता कुड़ियम, माओवादियों की मारपीट से स्थायी रूप से दिव्यांग हुए इच्चामी सुदरू, तथा आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए राममूर्ति कारम, बबलू उर्फ मोहन कड़ती, गंगा कलमू, राजेश कुमार यादव और सोढ़ी मुकेश शामिल हैं।कलेक्टर श्री विश्वदीप ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से शीघ्र संबंधित हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सली हिंसा से प्रभावित नागरिकों को राहत, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही है। यह पहल पीड़ित परिवारों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और समर्पण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
- -मंत्री श्री यादव ने कहा समाज के लिए गर्व की बातरायपुर। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के ग्लासगो में आयोजित महिला 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव से सोमवार को स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने अपने निवास में आत्मीय मुलाकात कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव की ऐतिहासिक उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए और यादव समाज गर्व का विषय है। साथ मे आये परिवारजन को भी मंत्री यादव ने बधाई दी। उन्होंने कहा सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने अथक परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल कर प्रदेश की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव प्रोत्साहन और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा ज्ञानेश्वरी यादव को 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा राज्य सरकार की खेल प्रतिभाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है।श्री गजेंद्र यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी यादव भविष्य में भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाती रहेंगी तथा प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करेंगी।
- -वन विभाग की सतर्कता से बची संरक्षित वन्यप्राणी की जानरायपुर । वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप और उनके संवेदनशील पहल के अनुरूप छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी जिले के मोहला तहसील के ग्राम कुंजंटोला में वन विभाग की टीम ने दुर्लभ वन्यप्राणी पैंगोलिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया।ग्राम कुंजंटोला निवासी श्री जयंत कुमार के घर में पैंगोलिन के घुसने की सूचना वन विभाग को मिली। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।वनमंडलाधिकारी के मार्गदर्शन में परिक्षेत्र अधिकारी श्री पंकज पटेल के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़कर आरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। इस अभियान में डिप्टी रेंजर श्री महेंद्र बघेल और श्री शोभित राम यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।यह रेस्क्यू अभियान वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, प्रशिक्षित टीम और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील कार्यप्रणाली का अच्छा उदाहरण है। समय पर मिली सूचना और समन्वित प्रयासों के कारण एक दुर्लभ एवं संरक्षित वन्यप्राणी को सुरक्षित बचाया जा सका।वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि कहीं भी कोई वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे नुकसान न पहुंचाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें। लोगों की जागरूकता और सहयोग से वन्यजीवों का संरक्षण और भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।उल्लेखनीय है कि पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित प्रजाति है। इसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार विशेष रूप से प्रतिबद्ध है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग वन्यजीव संरक्षण, त्वरित रेस्क्यू और जनजागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।






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