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- 0- 22 कृषकों के साथ स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी हुईं शामिलरायपुर। मशरूम का उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक अच्छा साधन है। इसे साल भर एक छोटे से कमरे के माध्यम में थोड़ा सा समय देकर आसानी से किया जा सकता है। यही कारण है कि किसान विशेषकर महिला किसानों में मशरूम उत्पादन के प्रति विशेष रूचि देखी जाती है। इसी दृष्टि से कृषि विज्ञान केन्द्र, रायगढ़ में मशरूम उत्पादन पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र डॉ.बी.एस. राजपूत ने बताया कि धान फसल के अवशेषों का उपयोग करते हुए मशरूम उत्पादन किया जा सकता है। इससे कृषक अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। यह एक अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय है, जिससे कम लागत से अधिक मुनाफा अर्जित किया जा सकता है।प्रशिक्षण में महिलाएं किसान, स्व-सहायता समूह की महिलाएं सहित कुल 22 किसान शामिल हुए। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ.मनीषा चौधरी, वैज्ञानिक (आहार एवं पोषण) ने मशरूम के पोषण मूल्य एवं औषधीय महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न प्रकार के मशरूम उत्पादन की तकनीक एवं मशरूम बीज उत्पादन के प्रायोगिक विधि के साथ-साथ वीडियो और चल-चित्र के माध्यम से जानकारी दी। प्रगतिशील मशरूम उत्पादक किसान श्री गोपाल पटेल के साथ प्रक्षेत्र भ्रमण भी कराया गया। उन्होंने मशरूम उत्पादन की चुनौतियों और इसके व्यापारिक लाभों के बारे में अपने अनुभव साझा किए।
- -बस्तर रेंज में ₹2.54 करोड़ के इनामी 66 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें शीर्ष माओवादी नेता SZCM रामन्ना ईरपा भी शामिल-डबल इंजन सरकार की सुशासन, सुरक्षा और पुनर्वास की नीति का ऐतिहासिक परिणामरायपुर,। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर में नक्सलवाद की रात अब ढल रही है और विकास की नई सुबह का उदय हो चुका है। डबल इंजन सरकार के समग्र और समावेशी प्रयासों का यह परिणाम है कि आज बस्तर रेंज में ₹2.54 करोड़ के इनामी 66 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। इनमें ₹25 लाख के इनामी एसजेडसीएम (SZCM) रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश का आत्मसमर्पण शामिल है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि एक ही दिन में बीजापुर से 25, दंतेवाड़ा से 15, कांकेर से 13, नारायणपुर से 8 और सुकमा से 5 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर वे अब हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार हुए हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते 18 महीनों में कुल 1,570 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। यह हमारे शासन की पारदर्शी नीतियों, नागरिक-हितैषी कार्यप्रणाली और पुनर्वास के प्रति ईमानदारीपूर्ण दृष्टिकोण का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सामाजिक और आर्थिक पुनर्निर्माण के समर्पित प्रयासों का परिणाम है।उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर के दूरस्थ और अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में एक साथ सुरक्षा और विकास का कार्य कर रही है। सड़कों का विस्तार, पेयजल व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुँचाया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी नीति बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है। हम आत्मसमर्पण कर रहे नक्सलियों के भविष्य को संवारने हेतु प्रतिबद्ध हैं।
- -परंपरा और तकनीक के अद्भुत समन्वय की मिसाल बनीं चित्ररेखा, भावना और रूचि साहूरायपुर । सावन अमावस्या के अवसर पर जब पूरे छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार की पारंपरिक गूंज सुनाई दी, तब बालोद जिले ने इस पर्व को एक नवीन पहचान दी। इस वर्ष हरेली तिहार न केवल पारंपरिक कृषि उपकरणों की पूजा का प्रतीक रहा, बल्कि यहां की ड्रोन दीदियों ने आधुनिक तकनीक का समावेश कर इस पर्व को नई ऊंचाई दी।जहां हरेली तिहार परंपरा, प्रकृति और कृषि जीवन के प्रति सम्मान का पर्व है, वहीं बालोद की तीन प्रेरणादायक महिलाएं- श्रीमती चित्ररेखा साहू, श्रीमती भावना साहू और सुश्री रूचि साहू ने इस अवसर पर तकनीक और संस्कृति के संगम की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। ‘ड्रोन दीदी’ योजना के अंतर्गत प्रशिक्षित इन महिलाओं ने अपने ड्रोन यंत्रों की पारंपरिक विधि से पूजा की, जैसे किसान अपने बैलों को सजाकर तिलक करते हैं, वैसे ही इन दीदियों ने ड्रोन को धूप-दीप दिखाकर नारियल और गुड़ के चीले का भोग अर्पित किया। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि आधुनिक तकनीक तभी सार्थक है, जब वह हमारी परंपरा और जीवन-मूल्यों का सम्मान करे।चित्ररेखा साहू कहती हैं कि ड्रोन अब हमारा कृषि यंत्र है। इसे पूजना हमारी परंपरा का विस्तार है। तकनीक को अपनाकर भी हम प्रकृति से जुड़ाव बनाए रख सकते हैं। भावना साहू का मानना है कि ड्रोन तकनीक से खेती सरल हो गई है। हम चाहती हैं कि जिले के हर किसान को इसकी शक्ति का लाभ मिले। रूचि साहू ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि हर खेत तक ड्रोन पहुँचे और किसान का जीवन अधिक सुलभ बने। इन तीनों ड्रोन दीदियों ने इस अवसर पर भारत सरकार की ‘ड्रोन शक्ति’ पहल तथा महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे तकनीकी प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।हरेली तिहार के इस पावन अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं प्रेषित कीं तथा यह संकल्प लिया कि वे आगे भी परंपरा और तकनीक के इस सुंदर समन्वय को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्य निरंतर करती रहेंगी।
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रायपुर। बस्तर संभाग के पांच जिलों में गुरुवार को 66 नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से 49 पर कुल 2.27 करोड़ रुपये का इनाम था।
अधिकारियों ने बताया कि बस्तर क्षेत्र के बीजापुर जिले में 25, दंतेवाड़ा में 15, कांकेर में 13, नारायणपुर में आठ और सुकमा में पांच नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 27 महिलाएं भी शामिल हैं।अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों का कहना है कि वे ‘खोखली' माओवादी विचारधारा, निर्दोष आदिवासियों पर किए जा रहे अत्याचारों और प्रतिबंधित संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेदों से निराश हैं। नक्सलियों ने कहा कि वे राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लनार' (आपका अच्छा गांव) योजना से भी प्रभावित हैं, जिसका उद्देश्य दूरदराज के गांवों में विकास कार्यों को सुगम बनाना है। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि बीजापुर में आत्मसमर्पण करने वाले 25 लोगों में से 23 पर कुल 1.15 करोड़ रुपये का इनाम था। यादव ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में उड़ीसा राज्य समिति के सदस्य व माओवादियों की विशेष जोनल समिति के सदस्य रमन्ना इरपा (37) शामिल हैं, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम है। उन्होंने बताया कि वहीं इरपा की पत्नी रामे कलमू (30) ने भी आत्मसमर्पण किया है और उस पर आठ लाख रुपये का इनाम था। अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सुक्कू कलमू उर्फ विनोद (38), बबलू माडवी उर्फ जग्गू (30), कोसी मड़कम (28) और रीना वंजाम (180 पर भी आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था।दंतेवाड़ा जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उदित पुष्कर ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 15 नक्सलियों में से पांच पर 17 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने बताया कि जून 2020 में शुरू किए गए ‘लोन वर्राटू' (स्थानीय गोंडी बोली में गढ़ा गया शब्द जिसका अर्थ है अपने घर/गांव लौटना) अभियान के तहत अब तक जिले में 254 इनामी नक्सलियों सहित 1020 नक्सली हथियार डाल चुके हैं। अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले 15 नक्सलियों में संभागीय समिति सदस्य बुधराम उर्फ लालू कुहराम और उसकी पत्नी कमली उर्फ मोती पोतावी शामिल हैं, जिन पर क्रमशः आठ लाख रुपये और पांच लाख रुपये का इनाम था। बस्तर क्षेत्र के कांकेर जिले के पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलेसेला ने बताया कि कांकेर में सभी 13 नक्सलियों पर कुल 62 लाख रुपये का इनाम था।नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने बताया कि जिले में आठ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और इन कुल 33 लाख रुपये का इनाम है। गुरिया ने बताया कि इन नक्सलियों में से माओवादियों के उत्तर ब्यूरो तकनीकी दल के प्रभारी वट्टी गंगा उर्फ मुकेश (44) पर आठ लाख रुपये का इनाम था। अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी गई है और सरकार की नीति के अनुसार उनका पुनर्वास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ‘नियद नेल्लानार' और राज्य सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कई माओवादी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं। -
-अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों के द्वारा दी जाएगी प्रस्तुतियां
-त्रिनिदाद एवं टोबेगो की विख्यात कलाकार होंगी कार्यक्रम में शामिलखैरागढ़.। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में 25 जुलाई को श्रुति मंडल (पाक्षिक कार्यक्रम) का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम कुलपति प्रो. लवली शर्मा की अध्यक्षता में होगा वहीं मुख्य अतिथि के रूप में रानी राजश्री देवी नुआपाड़ा, ओडिशा शामिल होंगी। विश्वविद्यालय के कैंपस-2 स्थित डॉ. नरेंद्र देव वर्मा प्रेक्षागृह में शाम 5:00 बजे से कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। उक्त कार्यक्रम में देश के ख्यातिलब्ध कलाकार के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विदेशी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। सर्वप्रथम डॉ. साधना रहटगांवकर रायपुर के द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी तथा द्वितीय प्रस्तुति सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना सुसान मोहिप के द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। त्रिनिदाद एवं टोबेगो देश की निवासी सुसान मोहिप एक प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना है जिन्होंने कई मनमोहक प्रस्तुतियां दे चुकी है। उक्त कार्यक्रम में सहयोगी के रूप में हारमोनियम एवं गायन सहयोग पर राणा मोहिप (त्रिनिदाद एवं टोबेगो), तबले पर पं. अवध सिंह ठाकुर, सारंगी पर उस्ताद शफ़ीक़ हसैन तथा बांसुरी पर इस विश्वविद्यालय के सुप्रसिद्ध कलाकार डॉ. बिहारी लाल तारम संगत करेंगे। - -पुनर्वास नीति के तहत 50-50 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि दी गईकांकेर। जिला पुलिस बल और बीएसएफ द्वारा नक्सलियों के विरूद्ध चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत मिलिट्री कंपनी नम्बर 01 कमांडर सहित 13 इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर 62 लाख का इनाम घोषित था। यह सभी नक्सली कांकेर जिले के रावघाट/परतापुर एरिया कमेटी एवं माड़ डिवीजन में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुर्नवास नीति के तहत 50-50 हजार रूपये प्रोत्साहन राशि दी गई।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आई. कल्याण ऐलीसेला ने प्रेस कान्फ्रेंस में बताया कि बदलाव की एक सशक्त पहल एवं शासन की आत्मसमर्पण एंव पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर तथा नक्सलियों के खोखली विचारधारा, उनके शोषण, अत्याचार, हिंसा से तंग आकर सीपीआई माओवादी संगठन उत्तर बस्तर डिवीजन के अंतर्गत परतापुर, रावघाट एरिया कमेटी एवं माड़ डिवीजन में सक्रिय नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन पर शासन की इनामी पालिसी के तहत् उक्त 01 माओवादी सदस्य पर 10 लाख, 04 माओवादी सदस्य पर 08 लाख, 03 माओवादी सदस्या पर 05 लाख एवं 05 माओवादी सदस्यों पर 01-01 लाख रुपए, इस प्रकार कुल-62 लाख रुपए का इनाम घोषित थौ। इन्हें आत्मसमर्पण करने पर प्रोत्साहन राशि 50-50 हजार रुपये प्रदान की गई है।
- -वन अमला पकड़ने निकला था तेंदुआ, पकड़ा गया अवैध सागौनमोहला । मोहला- मानपुर जिले में तेंदुए की लगातार आमद से जहां ग्रामीणों के बीच खौफ का आलम है वहीं वन महकमा भी तेंदुए को ट्रैक कर सुरक्षात्मक कसरतों में जुटा हुआ है। करीब एक पखवाड़े से तेंदुआ, वन अमला और ग्रामीणों के बीच जारी आंख मिचौली के बीच ऐसा वाक्या भी सामने आया जहां तेंदुए के पदचिन्ह को देखते देखते तेंदुए तक पहुंचने की कोशिश में जुटे वन अफसरों को तेंदुआ तो नहीं मिला लेकिन तेंदुए के पदचिन्ह सागौन के अवैध जखीरे तक पहुंचा दिया। तेंदुए की खोज में निकले वन महकमे के पकड़ में तेंदुआ तो नहीं आया पर करीब 2 लाख की अनुमानित लागत का अवैध सागौन वन अफसरों ने जरूर पकड़ लिया।24 जुलाई को पानाबरस वन विकास निगम के एसडीओ वीरेंद्र पटेल ने उक्ताशय की पुष्टि करते हुए जानकारी दी कि बीते बुधवार को ग्राम पंचायत पुत्तरगोंदी अंतर्गत ग्राम अमलीडीह में तेंदुए की आमद की सूचना पर वन विकास निगम के अफसर_कर्मी अमलीडीह गांव पहुंचे हुए थे। यहां तेंदुए के पदचिन्ह को ट्रैक करते हुए वन अमला तेंदुए की तलाश में जुटा हुआ था। इसी बीच पदचिन्ह का पीछा करते करते आगे बढ़ रहा वन अमला जब स्थानीय ग्रामीण अगनू राम कोरेटी की बाड़ी में पहुंचा तो यहां तेंदुआ तो नहीं मिला पर ग्रामीण द्वारा अपनी बाड़ी में रखा करीब 70 नग सागौन के लट्ठे वन अमले को मिल गया। जिसे जप्त कर वन अफसर मोहला स्थित वन काष्ठगार के आए।एसडीओ वीरेंद्र पटेल के मुताबिक बाड़ी के मालिक अगनू राम कोरेटी से सागौन लट्ठों के संबंध में पूछताछ की तो उसने दावा किया कि उक्त सागौन के लट्ठे उसके खुद के खेत से काटे गए हैं। हालांकि ग्रामीण अगनू राम के पास सागौन को सागौन लट्ठों के भंडारण व उन्हें काटे जाने को लेकर आवश्यक दस्तावेज नहीं मिला। ऐसे में सागौन लट्ठों का उक्त जखीरा अवैध माना गया। लिहाज़ा तमाम लट्ठों को जप्त कर मोहला स्थित वन विकास निगम के काष्ठगार ला लिया गया।एसडीओ वीरेंद्र पटेल के मुताबिक लगभग 70 नग जप्त सागौन लट्ठों का मेजरमेंट किया जा रहा है। वहीं आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए मामले की जांच भी की है रही है। एसडीओ श्री पटेल के मुताबिक हालांकि लट्ठों का मेजरमेंट अभी बाकी है लेकिन प्रथम दृष्टया इन सागौन लट्ठों की अनुमानित लागत करीब दो लाख रुपए है। बहरहाल जांच_पड़ताल जारी है। यदि ग्रामीण अगनू राम द्वारा तत्काल सागौन भंडारण व उनकी कटाई के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तो उक्त सागौन लट्ठों को विधिवत राजसात किया जाएगा। तथा अवैध सागौन कटाई व भंडारण को लेकर उक्त ग्रामीण के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी।
- -53 से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया जल भरावधमतरी। धमतरी जिले में हो रही बारिश से बांधों के जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हो रही है। 20 जुलाई तक गंगरेल बांध का जल 53.46 प्रतिशत रहा। 24 जुलाई को जलस्तर बढ़कर 56.26 प्रतिशत हो गया। इसी तरह अन्य बांधों की स्थिति में भी सुधार आया है।गंगरेल बांध के केचमेंट एरिया में बारिश हो रही है। यहां 24 जुलाई को 61 मिमी वर्षा रिकार्ड दर्ज किया गया। गंगरेल बांध का वाटर लेवल 344.70 मीटर है। बांध में 1935 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है। जबकि जावक नील है। बांध का लाईव स्टोरेज केपिसिटी 27.079 टीएमसी है। अब तक बांध में 56.26 प्रतिशत पानी भर चुका है। बांध को लबालब भरने में अभी अधिक बारिश को जरूरत है। माड्मसिल्ली बांध का जल स्तर 369.22 मीटर है। लाईव केपिसिटी 1.46 टीएमसी है। अब तक यहां 25.59 प्रतिशत भर गया है। चार दिनों पहले इस बांध में 21.91 प्रतिशत पानी भरा था। सोंहूर बांध में गुरूवार को 17 मिमी वर्षा हुई। बांध का जल स्तर 464.17 मीटर है। ग्रास केपिसिटी 2.427 टीएमसी, लाईव केपिसिटी 1.774 टीएमसी है। बांध में 27.94 प्रतिशत पानी भर गया है। ज्ञात हो कि 20 जुलाई तक 23.20 प्रतिशत पानी भरा था। चार दिनों में लगभग 4 प्रतिशत पानी बढ़ा है। दुधावा बांध में 9 मिमी वर्षा हुई है। बांध का जल स्तर 417.29 मीटर है। लाईव केपिसिटी 2.283 टीएमसी है। यहां 22.75 प्रतिशत पानी भर गया है। केचमेंट एरिया में 265 क्यूसेक पानी की आवक है। 20 जुलाई तक यहां 21.86 प्रतिशत पानी भर पाया था। दुधावा में भी पानी की आवक कमजोर है। रूद्री बरांज का वाटर लेबल 322.66 मीटर है। यहां 69.75 प्रतिशत पानी भरा हुआ है।
- -उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन होंगे शामिलरायपुर।, राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन का आयोजन 26 जुलाई को रायपुर में किया जा रहा है। लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ और उद्योग विभाग के संयुक्त तत्वाधान में यह सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक स्थानीय जेल रोड स्थित होटल सेलिब्रेशन में दोपहर 2.30 बजे से प्रारंभ होगा। कार्यक्रम में राज्यभर के उद्यमी शामिल होंगे। राज्य स्तरीय उद्यमी सम्मेलन एवं वार्षिक बैठक में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम के सीएसआईडीसी के चेयरमैन श्री राजीव अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं विशेष अतिथि के रूप में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद शामिल होंगे।यह सम्मेलन न केवल उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उद्योग क्षेत्र में आ रही चुनौतियों, संभावनाओं और योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश सिंघानिया, महासचिव श्रीमती सी. पी. दुबे एवं कोषाध्यक्ष श्री दीपक उपाध्याय प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे।
- -सीजीएमएससी की दवाइयों को राज्य भर के अस्पतालों में पहुंचाने वाले लगभग 70 वातानुकूलित वाहन अब अत्याधुनिक जीपीएस से हैं लैस-स्वास्थ्य मंत्री ने सीजीएमएससी अध्यक्ष और स्वास्थ्य विभाग के सचिव के साथ वाहनों का किया अवलोकनरायपुर । स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य में दवाइयों की गुणवत्तापूर्ण सप्लाई के लिए विधानसभा में ये घोषणा की थी कि सभी वाहनों को जीपीएस से लैस किया जाएगा ताकि उनकी सही लोकेशन और सही समय का हमेशा पता चलता रहे । स्वास्थ्य मंत्री की इस घोषणा पर अमल करते हुए सीजीएमएससी ने लगभग 70 वाहनों में अत्याधुनिक जीपीएस लगाया है। इसकी खासियत है कि जहां नेटवर्क नहीं रहता वहां लोकेशन और रूट को रिकॉर्ड कर ये बाद में दिखाता है। इससे गड़बड़ी या देरी की कोई गुंजाइश नहीं रहती।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल इन वाहनों की काम की कार्यशैली को जानने और देखने के लिए सीजीएमएससी के अध्यक्ष श्री दीपक म्हस्के और स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया के साथ नया रायपुर के सेक्टर 27 स्थित सीजीएमएससी कार्यालय पहुंचे और अवलोकन किया। इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने वाहनों की गुणवत्ता, दवाइयों के स्टोरेज, वातानुकूलित व्यवस्था और मांगपत्र लेकर रवाना हो रहे ड्राइवरों की कार्य शैली को देखा। साथ ही वेबसाइट पर इस वाहनों की रियल टाइम लोकेशन भी देखी।लिमिटेड दवाइयों की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए वातानुकूलित सप्लाई चैन वाहनों के जरिए दवाइयों, कंज्यूमेबल समान और रीजेंट्स को पूरे राज्य में पहुंचाया जाता है। हर साल लगभग 1 हज़ार प्रकार की दवाएं और 6 सौ प्रकार के कंज्यूमेबल सामान तथा रीजेंट्स को पूरे राज्य में भेजा जाता है।इन वाहनों की खास बात है कि ये प्रोडक्ट क्वालिटी और दवाइयों की क्षमता को बरकरार रखते हैं। इसमें टेंपरेचर सेंसिटिव दवाइयों को अच्छे तरीके से रखा जाता है ताकि दवाइयों का टेंपरेचर नियंत्रण में रहे और वो खराब न हों। इनमें सुरक्षा के अनुसार दवाइयों का स्टोरेज होता है। इसकी वजह से प्राप्तकर्ता के पास सुरक्षित तरीके से दवाइयां पहुंचती हैं।इन वाहनों के माध्यम से दवाइयों की सप्लाई करने से दवाइयों का जीवन बरकरार रहता है। इस दौरान गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं होता है और बेहतर काम की वजह से सप्लायर और कस्टमर के रिश्ते को मजबूती मिलती है। सीजीएमएससी के इन वाहनों द्वारा वैक्सीनेशन और आपातकालीन कार्यक्रमों के संचालन में अहम भूमिका निभायी जाती है साथ ही राष्ट्रीय टीकाकरण और महामारी के दौरान त्वरित कार्य संपन्न करने में भी ये अहम भूमिका निभाते हैं।सीजीएमएससी ने पारदर्शिता के लिए इसे अपने वेबपोर्टल से लिंक किया है ताकि कोई भी गाड़ियों की लोकेशन को देख सके। इस दौरान सीजीएमएससी की प्रबंध संचालक श्रीमती पद्मिनी भोई ने स्वास्थ्य मंत्री के सामने राज्य में 16 वेयर हाउस की संख्या में इजाफा करते हुए इसे सभी जिलों में खोलने की मांग रखी जिस पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सहानुभूति पूर्वक विचार करने की बात कही है।
- -भगवान भोले की कृपा बनी रहे और हमारा देश व छत्तीसगढ़ सतत् रूप से विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे : मुख्यमंत्रीरायपुर / सावन मास के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ आज बगिया स्थित श्री फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर पहुंचकर पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सुप्रसिद्ध कथा वाचिका किशोरी राजकुमारी तिवारी द्वारा किए जा रहे शिव महापुराण कथा का श्रवण भी किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा सभी पर बनी रहे और हमारा देश और छत्तीसगढ़ सतत् रूप से विकास, शांति और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ता रहे। उन्होंने कहा कि भगवान श्री भोलेनाथ के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। हमारी सरकार की नई उद्योग नीति से आकर्षित होकर बीते छह से आठ महीनों में लगभग साढ़े छह लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं।इस अवसर पर फलेश्वरनाथ महादेव मंदिर परिसर में आयोजित 01 लाख 108 पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं विशेष पूजन अनुष्ठान श्रद्धा, आस्था और शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन 22 जुलाई से प्रारंभ हुआ था और इसका समापन आज 24 जुलाई को विधिपूर्वक किया गया। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। भक्तगण पूर्ण श्रद्धा, निष्ठा और भक्ति भाव से पार्थिव शिवलिंग निर्माण में सहभागी रहे। पूजन एवं अनुष्ठान का आयोजन प्रतिष्ठित विद्वान पंडितों द्वारा शास्त्र सम्मत विधियों के अनुसार किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
- -हरेली पर्व किसान, खेत-खलिहान और गोधन की पूजा का अवसर है – विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह--हरेली पर्व हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक – उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव-हरेली पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और कृषि संस्कृति को संरक्षित रखने की प्रेरणा देता है – राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा-मुख्यमंत्री श्री साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों ने की पूजा-अर्चनारायपुर।, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़े पर्व हरेली के पावन अवसर पर राजस्व मंत्री के निवास कार्यालय में पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, साथ ही गौरी-गणेश, नवग्रहों और कृषि यंत्रों की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री द्वय श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हरेली पर्व छत्तीसगढ़ की जीवनशैली, मेहनतकश किसानों की आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। हमारी सरकार किसानों के कल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बच्चों में गेड़ी जैसी पारंपरिक विधाओं के प्रति आकर्षण बनाए रखना हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा है। हमें चाहिए कि हम ऐसे पर्वों के माध्यम से अपनी नई पीढ़ी को भी छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जोड़ें।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली पर्व किसान, खेत-खलिहान और गोधन की पूजा का पर्व है। मान्यता है कि आज के दिन शिव-पार्वती स्वयं भू-लोक में आकर किसानों की खेती-किसानी को देखने आते हैं। हरेली से ही छत्तीसगढ़ में त्योहारों की श्रृंखला की शुरुआत होती है।उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है। यह हमारी धरती, परिश्रम और परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व हमारे किसानों की आस्था और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में निरंतर कार्य कर रही है। हरेली जैसे पर्व हमें हमारी जड़ों से जोड़ते हैं और कृषि संस्कृति को जीवंत रखने की प्रेरणा देते हैं। इस पर्व में गेड़ी चलाने की प्रतियोगिता बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। साथ ही गोधन को पौष्टिक आहार देकर ग्रामीणजन पशुधन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।इस अवसर पर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, छत्तीसगढ़ी लोक गीतों की प्रस्तुति, गेड़ी चढ़ने की प्रतियोगिता और लोकनृत्यों ने पूरे माहौल को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम स्थल छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोकपरंपरा की झलक से सराबोर हो गया। कार्यक्रम में पारंपरिक कृषि औजारों की पूजा कर प्रकृति और कृषि परंपरा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प दोहराया।
- - खरीफ के लक्ष्य से 94 प्रतिशत खाद का भंडारण, 70 प्रतिशत का वितरण भी-डीएपी की कमी से निपटने तीन लाख बोतल से ज्यादा नैनो डीएपी उपलब्धरायपुर, /चालू खरीफ मौसम में राज्य ने खेती किसानी के लिए रासायनिक खादें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। राज्य सरकार ने चालू खरीफ मौसम में रासायनिक खादों के निर्धारित लक्ष्य से अभी तक 94 प्रतिशत खादों को भंडारण करा लिया है। इसके साथ ही भंडारित खाद में से 70 प्रतिशत खादों का वितरण भी किसानों को कर दिया गया है। राज्य में युरिया, एनपीके, पोटाश, सुपर फास्फेट जैसी रासायनिक खादें पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और किसानों को उनकी मांग अनुसार सरकारी समितियों से लगातार मिल रही है। इस खरीफ मौसम के लिए राज्य में 14 लाख 62 हजार मिट्रिक टन खाद भंडारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के विरूद्ध अभी तक 13 लाख 78 हजार मिट्रिक टन रासायनिक खादों का भंडारण सरकारी और निजी क्षेत्रों में काराकर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में अबतक भंडारित उर्वरकों मंे से किसानों ने 10 लाख 20 हजार मिट्रिक टन का उठाव कर लिया है। ठोस डीएपी की वैश्विक कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने विकल्प के तौर पर नैनो डीएपी की 3 लाख 5 हजार से अधिक बोतलों को भंडारण भी कराया है। डीएपी की कमी से निपटने के लिए किसानों को कृषि अमले द्वारा मिश्रित खादों के उपयोग की लगातार समझाईश दी जा रही है। इसके साथ ही खाद की काला बाजारी या जामाखोरी कर उचे दामों पर बेचने वालों के खिलाफ भी तेजी से कार्यवाही जारी है।कृषि अधिकारियांे से जानकारी के अनुसार प्रदेश में चालू खरीफ मौसम के लिए 6 लाख 22 हजार मिट्रिक टन युरिया का भंडारण किया गया है। जिसमें से 4 लाख 87 हाजर मिट्रिक टन युरिया का वितरण अबतक किसानों को किया जा चुका है, जो कि कुल भंडारण का 68 प्रतिशत है। इसी तरह 2 लाख 22 हजार मिट्रिक टन एनपीके के भंडारण के बाद अबतक 1 लाख 70 हजार मिट्रिक टन का वितरण हो चुका है। जो कि भंडारण का 95 प्रतिशत है। राज्य में 77 हजार मिट्रिक टन से अधिक पोटाश और 2 लाख 76 हजार मिट्रिक टन से अधिक सुपर फास्फेट चालू खरीफ में वितरण के लिए भंडारित किये गए है। इनमें से अबतक 90 प्रतिशत लगभग 53 हजार मिट्रिक टन पोटाश और 83 प्रतिशत लगभग 1 लाख 66 हजार मिट्रिक टन सुपर फास्फेट का उठाव किसानों ने कर लिया है। राज्य में इस वर्ष खरीफ मौसम के लिए 1 लाख 79 हजार मिट्रिक टन से अधिक डीएपी खाद का भंडारण किया गया है। जिसमें से 46 प्रतिशत लगभग 1 लाख 41 हजार मिट्रिक टन का उठाव किसानों ने कर लिया है।राज्य सरकार के निर्देश पर प्रदेश में इफको कंपनी द्वारा 3 लाख 5 हजार बोतल से अधिक नैनो डीएपी का भंडारण कराया गया है। इसमें से डबल लॉक केंद्रों में 82 हजार 470 बोतल, प्राथमिक सहकारी कृषि साख समितियों में अब तक 1 लाख 41 हजार 389 बोतल और निजी क्षेत्र में 48 हजार बोतल तरल नैनो डीएपी भंडारित है। इफको कंपनी के पास अभी भी 33 हजार बोतल से अधिक नैनो डीएपी शेष बचा है। नैनो डीएपी की आधा लीटर की बोतल सहकारी समितियों में 600 रूपए की दर पर किसानों के लिए उपलब्ध है। file photo
- -जनप्रतिनिधियों सहित मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता और बड़ी संख्या में जनसमुदाय हुआ शामिलरायपुुर।, हरियाली अमावस्या के मौके पर बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी मन्दिर के सामने गुरुवार को पाट जात्रा पूजा विधान के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया। बस्तर दशहरा पर्व के इस प्रथम पूजा विधान में बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, विधायक जगदलपुर श्री किरण देव, महापौर श्री संजय पाण्डे सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और बस्तर दशहरा पर्व समिति के पारंपरिक सदस्य मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, पटेल, नाईक-पाईक, सेवादारों के साथ ही बड़ी संख्या में जनसमुदाय शामिल हुआ।बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित इस ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के पहले पूजा विधान पाट जात्रा में रथ निर्माण के लिए बनाए जाने वाले औजार ठुरलू खोटला तथा अन्य औजारों का परम्परागत तरीके से पूजा-अर्चना कर रस्म पूरी की गयी। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व शुरू हो गया, जो इस वर्ष करीब 75 दिवस की अवधि तक पूरे आस्था, श्रद्धा और पूरे हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाएगा।बस्तर दशहरा पर्व के प्रमुख पूजा विधानों को निर्धारित तिथि अनुसार सम्पन्न की जाती है। जिसके तहत आगामी शुक्रवार 05 सितम्बर को डेरी गड़ाई पूजा विधान, रविवार 21 सितम्बर को काछनगादी पूजा विधान, सोमवार 22 सितम्बर को कलश स्थापना पूजा विधान, मंगलवार 23 सितम्बर को जोगी बिठाई पूजा विधान सहित बुधवार 24 सितम्बर से सोमवार 29 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, सोमवार 29 सितम्बर को सुबह 11 बजे बेल पूजा, मंगलवार 30 सितम्बर को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, बुधवार 01 अक्टूबर को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव, गुरुवार 02 अक्टूबर को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शुक्रवार 03 अक्टूबर को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, शनिवार 04 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान एवं मुरिया दरबार होगा। वहीं रविवार 05 अक्टूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान में ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई होगी और मंगलवार 07 अक्टूबर को मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व सम्पन्न होगी।
- -धूमधाम से मनाया गया छत्तीसगढ़ का पहला लोक पर्व-छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की दिखी झलक-श्री साव ने हल और कृषि औजारों की पूजा कर गौमाता को आटे की लोंदी खिलाई, गेड़ी का भी लिया आनंद-प्रदेशवासियों को दी हरेली की बधाई और शुभकामनाएंबिलासपुर । उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के नवा रायपुर स्थित शासकीय निवास पर आज सुबह से हरेली की धूम रही। उन्होंने सपरिवार हल और कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर गौमाता को आटे की लोंदी और गुड़ खिलाया। उन्होंने गेड़ी का भी आनंद लिया। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री रोहित साहू और श्री मोतीलाल साहू भी हरेली पर्व में शामिल हुए।हरेली पर उप मुख्यमंत्री श्री साव के निवास पर चहुंओर छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक जीवन और खानपान की झलक दिखी। उन्होंने हरेली पर्व में शामिल होने अपने निवास पहुंचे सभी लोगों का परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों चौसेला, गुलगुल भजिया, बरा, टमाटर की चटनी और भजिया खिलाकर स्वागत व आवभगत किया। उन्होंने हरेली पर अपने निवास में शीशम का पौधा लगाया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली तीज-तिहारों से संपन्न छत्तीसगढ़ का साल का पहला लोक पर्व है। मुख्यतः कृषि और किसानों को समर्पित यह पर्व आज पूरे प्रदेश में उत्साह व उमंग के साथ मनाया जा रहा है। हरेली में गेड़ी का परंपरागत साथ बच्चों के लिए भी इस त्योहार को उत्साहपूर्ण बनाता है। हरेली से मेरे बचपन की कई अच्छी और सुखद यादें जुड़ी हुई हैं। रायपुर नगर निगम के सभापति श्री सूर्यकांत राठौर, खनिज विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री छगन मूंदड़ा, बाल संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री यशवंत जैन, श्री पवन साय और श्री अनुराग अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि भी हरेली पर्व में शामिल हुए।
- -किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारा प्रमुख ध्येय: मुख्यमंत्री श्री साय-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ कर रहा है ऐतिहासिक प्रगतिः डॉ. रमन सिंह-किसानों की खुशहाली और हरियाली का उत्सव बना मुख्यमंत्री निवास का हरेली तिहार आयोजनरायपुर ।सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास में आज हरेली पर्व का गरिमामय आयोजन हुआ। त्यौहार मनाने के लिए पूरे परिसर को ग्रामीण परिवेश में सजाया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की खुशहाली और समृद्धि हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है। हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की परंपरा, प्रकृति और खेती-किसानी से जुड़ा ऐसा पर्व है, जो हमें अपने मूल से जोड़ता है। आज पूरा छत्तीसगढ़ हरेली की खुशी में डूबा है। मुख्यमंत्री निवास में भी यह पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक तरीके से मनाया जा रहा है।उन्होंने कहा कि बस्तर से लेकर सरगुजा तक हरेली को मनाने का अपना-अपना अंदाज है। लेकिन सभी जगह इसका रंग एक ही है, आस्था और उत्साह एक ही है। जिस तरह प्रकृति हमारा ख्याल रखती है, उसी तरह हमें भी प्रकृति का ख्याल रखना चाहिए। हरेली केवल खेती-किसानी का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह अपनी धरती की हरियाली और प्रकृति पूजा का भी त्यौहार है। छत्तीसगढ़ महतारी की कृपा हम सब पर बरसाती रहे और सभी किसान भाई खुशहाल रहें। यही मंगल कामना है।उन्होंने कहा कि श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा तय कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। हम सभी ने 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना देखा है और इसके लिए हमने अपना विजन डॉक्यूमेंट भी बनाया है। हमारी सरकार राज्य से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।हरेली त्योहार पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और किसान जीवन का उत्सव है। इस पावन अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार प्रकृति, कृषि और पशुधन से जुड़े हमारे जीवन मूल्यों की गूंज है। उन्होंने कहा कि ऐसा विश्वास है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती स्वयं धरती पर आकर किसानों के बीच उपस्थित होते हैं और उनके खेतों का निरीक्षण करते हैं। यही कारण है कि इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों, हल-बैल और खेत-खलिहानों की पूजा करते हैं।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ कृषि के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति कर रहा है। किसानों को समर्थन मूल्य पर धान खरीद और विभिन्न योजनाओं में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। यह हिंदुस्तान में किसी भी राज्य द्वारा किसानों के लिए किया गया सबसे बड़ा कार्य है। यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मुख्यमंत्री है, जो केवल घोषणाएं नहीं करता, बल्कि धरातल पर किसानों के पसीने की कीमत चुका रहा है।इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, श्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा , महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायकगण, निगम मंडल आयोग के अध्यक्ष सहित जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे।
- -छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्वादों से सजी रही पारंपरिक थाली-ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला में जीवंत की छत्तीसगढ़ी पाक शैलीरायपुर / छत्तीसगढ़ की धरती पर जब भी कोई त्योहार आता है, तो वह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं होता, बल्कि वह जीवनशैली, परंपरा, स्वाद और सामाजिक सौहार्द का पर्व बन जाता है। इसी श्रृंखला में प्रदेश के प्रमुख कृषि पर्व हरेली तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास में पारंपरिक स्वादिष्ट छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने सभी अतिथियों का मन मोह लिया। प्रदेश की अतुलनीय पाक परंपरा को जीवंत करते हुए यहां आगंतुकों के स्वागत के लिए विशेष रूप से ठेठरी, खुरमी, पिड़िया, अनरसा, खाजा, करी लड्डू, मुठिया, गुलगुला भजिया, चीला-फरा, बरा और चौसेला जैसे दर्जनों पारंपरिक व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी।बांस की सूप, पिटारी और दोना-पत्तल में परोसे गए इन व्यंजनों ने न केवल स्वाद, बल्कि प्रस्तुतीकरण में भी लोकजीवन की आत्मा को उजागर किया। अतिथियों ने गर्मागर्म पकवानों का स्वाद लेते हुए राज्य की पारंपरिक पाककला की मुक्तकंठ से सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वयं भी इन व्यंजनों का स्वाद चखा और कहा की हरेली तिहार केवल खेती-किसानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारी लोकसंस्कृति, हमारी परंपरा और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इन पारंपरिक व्यंजनों में हमारी माताओं-बहनों की मेहनत, सादगी और स्वाद की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो हमारी असली पहचान है। यह आयोजन न केवल हरेली पर्व की महत्ता को दर्शाता है, बल्कि यह प्रमाणित करता है कि छत्तीसगढ़ की आत्मा उसकी मिट्टी, उसके स्वाद और उसकी परंपराओं में रची-बसी है।इस अवसर पर परिसर का हर कोना छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सौंधी खुशबू से सराबोर था। कहीं ढोल-मंजीरों की थाप पर लोक नृत्य होते दिखे तो कहीं व्यंजनों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचती रही। परंपरागत वेशभूषा में सजे ग्रामीण कलाकारों और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे माहौल को जीवंत और आत्मीय बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कलाकारों और आमजनों ने इस आयोजन को एक स्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव बताया।
- -सरगुजिहा कला पर केंद्रित सजावट में बस्तर और मैदानी छत्तीसगढ़ की भी सुंदर झलक-सावन झूला, गेड़ी नृत्य और कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी से सजा हरेली का कार्यक्रम-रंग-बिरंगी छोटी गेड़ियों, नीम और आम पत्तियों की झालर से आकर्षक बना कार्यक्रम मंडपरायपुर / छत्तीसगढ़ की परंपरा में “हरेली” मानव और प्रकृति के जुड़ाव को नमन करने का उत्सव है। हरेली आती है तो छत्तीसगढ़ के खेत-खलिहान, गाँव-शहर, हल और बैल, बच्चे-युवा-महिलाएँ सभी इस पर्व के हर्षोल्लास से भर जाते हैं। जिस हरेली पर्व से छत्तीसगढ़ में त्योहारों की शुरुआत होती है, उसके स्वागत में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री निवास के द्वार भी सज गए हैं। पूरा मुख्यमंत्री निवास श्रावण अमावस्या को मनाये जाने वाले हरेली पर्व की सुग्घर परंपरा के रंग में रंग गया है।हरेली पर मुख्यमंत्री निवास की सजावट के तीन प्रमुख हिस्से हैं। प्रवेश द्वार, मध्य तोरण द्वार और मुख्य मंडप। प्रवेश द्वार में बस्तर के मेटल आर्ट की झलक है। इस द्वार पर लोगों के स्वागत में छत्तीसगढ़ का पारम्परिक वाद्य तुरही के मध्य में भगवान गणेश की प्रतिकृति है और मेटल आर्ट का घोड़ा भी उकेरा गया है।प्रवेश द्वार के बाद मध्य में तोरण द्वार है जिसे पारम्परिक टोकनी से सजाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगी छोटी झंडियाँ तोरण के रूप में शोभा बढ़ा रही हैं। इस हिस्से में नीम और आम पत्तों की झालर को हरेली की परम्परा के प्रतीक के रूप में लगाया गया है। पूरी सजावट का मुख्य आकर्षण वे छोटी-छोटी रंग-बिरंगी गेड़ियां हैं, जिनका सुंदर स्वरूप यहां से मुख्य मंडप तक हर जगह दिखता है।मुख्य मंडप द्वार को सरगुजा की कला के रंगों से आकर्षक बनाया गया है। इस द्वार की छत को पैरा से छाया गया है और सरगुजिहा भित्ति कला का के मनमोहक चित्र बनाये गए हैं। कई रंगों से सजा बैलगाड़ी का चक्का भी इस द्वार की रौनक बढ़ा रहा है।मुख्य कार्यक्रम मंडप के बाएँ हिस्से में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश का पारम्परिक घर बना है। इस घर के आहते को मैदानी छत्तीसगढ़ की चित्रकला से सजाया गया है। घर के आँगन में तुलसी चौरा और गौशाला है, जहाँ हल, कुदाल, रापा, गैती, टंगिया, सब्बल जैसे पारम्परिक कृषि यंत्र के साथ ही गोबर के उपले रखे हैं। इस ग्रामीण घर की दीवारों को सरगुजा की रजवार पेंटिंग के सुंदर चित्रों से सजाया गया है।कार्यक्रम मंडप में कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण है। खास बात यह है कि इस प्रदर्शनी में पारम्परिक और आधुनिक कृषि यंत्रों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है। पैडी सीडर, जुड़ा, बियासी हल, तेंदुआ हल और ट्रैक्टर जैसे यंत्र प्रदर्शित हैं।मंडप में एक ओर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के जलपान का हिस्सा है तो वहीं सावन का झूला भी सावन के फुहारों भरे मौसम के आंनद को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ का पारम्परिक रहचुली झूला भी आकर्षण का केंद्र है।संस्कृति की छटा बिखेरते पारम्परिक नृत्य :हरेली के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गेड़ी नृत्य और राउत नाचा जैसे पारम्परिक लोक नृत्य की छटा भी मनमोहक धुनों के साथ बिखर रही है। गेड़ी नृत्य के लिए बिलासपुर से दल आमंत्रित किया गया है। गेड़ी नृत्य के दल ने वेशभूषा में परसन वस्त्र के साथ सिर पर सीकबंद मयूर पंख का मुकुट, कौड़ी व चिनीमिट्टी से बनी माला और कौड़ी जड़ित जैकेट पहन रखा है। यह दल माँदर, झाँझ, झुमका, खँजरी, हारमोनियम और बाँसुरी की मधुर धुन में अपनी प्रस्तुति दे रही है। ग़ौरतलब है कि गेड़ी नृत्य की शुरुआत हरेली के दिन से होती है।हरेली के मौके पर मुख्यमंत्री निवास में गड़बेड़ा (पिथौरा) से राउत नाचा के लिए 50 लोगों का दल पहुँचा है। इस दल में पुरुषों ने जहाँ धोती-कुर्ता के साथ सिर पर कलगी लगी पगड़ी, कौड़ी जड़ित बाजूबंद और पेटी के साथ पैरों में घुँघरू पहना है तो महिलाएँ भी पारम्परिक श्रृंगारी करके पहुँची हैं। इन दोनों ही दलों के सदस्यों ने बताया कि उन्हें इस मौक़े पर मुख्यमंत्री निवास पहुँचने का बेसब्री से इंतज़ार रहता है।
- -पारंपरिक-आधुनिक कृषि यंत्रों, लोक वेशभूषाओं की आकर्षक प्रदर्शनी-मुख्यमंत्री ने सराहा, बोले-हरेली प्रकृति के प्रति सम्मान का तिहाररायपुर / छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और कृषि परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार इस वर्ष मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निवास परिसर में अत्यंत हर्षाेल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध विरासत, पारंपरिक कृषि यंत्रों, लोक परिधानों, खानपान और आधुनिक कृषि तकनीकों का समन्वय एक अद्भुत नजारे के रूप में सामने आया। कार्यक्रम स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी रंग-रूप में सजाया गया था, जहां ग्रामीण परिधान पहने अतिथि, कलाकार और आमजन लोक संस्कृति में रमे हुए नजर आए।हरेली उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री निवास में परम्परागत और आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदर्शनी स्थल का भ्रमण कर विभिन्न पारंपरिक यंत्रों और वस्तुओं का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में काठा, खुमरी, झांपी, कांसी की डोरी और तुतारी जैसे ऐतिहासिक कृषि उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। कृषि विभाग द्वारा आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी, जिसमें नांगर, कुदाली, फावड़ा, रोटावेटर, बीज ड्रिल, पावर टिलर और स्प्रेयर जैसे यंत्रों का प्रदर्शन किया गया। ‘काठा’ वह परंपरागत मापक है जिससे पुराने समय में धान तौला जाता था; ‘खुमरी’ बांस और कौड़ियों से बनी छांव प्रदान करने वाली टोपी है; ‘झांपी’ शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली वस्तुएं रखने की बांस से बनी पेटी; ‘कांसी की डोरी’ खाट बुनने में काम आती है और ‘तुतारी’ पशुओं को संभालने में उपयोग होती है।मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि हरेली तिहार केवल पर्व नहीं, बल्कि यह हमारे कृषि जीवन, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी किसानों, युवाओं और आमजनों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। मुख्यमंत्री ने इन उपकरणों की जानकारी लेकर कृषि तकनीकी प्रगति की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ की खेती परंपरा और तकनीक के समन्वय से और भी अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनेगी। किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देकर हम राज्य की कृषि उत्पादकता को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आम नागरिक, किसान, छात्र और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस आयोजन ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और कृषि नवाचार के अद्वितीय संगम को सजीव रूप में प्रस्तुत किया, जो राज्य की समृद्ध परंपरा और विकासशील सोच का प्रतीक है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री निवास में हरेली तिहार के अवसर पर पारंपरिक लोक यंत्रों की गूंज और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छटा के साथ सुंदर नाचा का आयोजन किया जा रहा है। पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण से सराबोर है। ग्रामीण परिवेश की जीवंत छवि इस सुंदर माहौल में साकार हो गई है। कहीं सुंदर वस्त्रों में सजे राउत नाचा कर रहे कलाकारों की रंगत बिखरी है, तो कहीं आदिवासी कलाकार पारंपरिक लोक नृत्य की मोहक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ का अद्भुत ग्रामीण लैंडस्केप अपनी संपूर्ण सांस्कृतिक सुंदरता के साथ यहां सजीव रूप में अवतरित हो गया है। विभिन्न प्रकार की लोक धुनों में छत्तीसगढ़ी संगीत का माधुर्य अपने चरम पर है।राउत नाचा, छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति का एक प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से दीपावली के अवसर पर गोधन पूजा के दौरान किया जाता है। यह नृत्य विशेषकर यादव समुदाय (ग्वाला/गोपालक वर्ग) द्वारा प्रस्तुत किया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोधन की आराधना का प्रतीक माना जाता है।राउत नाचा की परंपरा छत्तीसगढ़ में सदियों पुरानी है। इसे गोवर्धन पूजा से जोड़ा जाता है, जब ग्वाल-बाल भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की स्मृति में यह नृत्य करते हैं। नर्तक रंग-बिरंगे परिधानों में सजते हैं, सिर पर पगड़ी धारण करते हैं और हाथों में लाठी थामे रहते हैं। उनके वस्त्रों को कौड़ियों, घुंघरुओं और अन्य सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।राउत नाचा की प्रस्तुति के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों — जैसे ढोल, मांदर और नगाड़ा — का प्रयोग होता है। इनकी थाप पर नर्तक सामूहिक रूप से तालबद्ध होकर नृत्य करते हैं।यह नृत्य केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, श्रम की महत्ता, पशुपालन के योगदान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी देता है। नाचा के साथ गाए जाने वाले गीतों को ‘राउत गीत’ कहा जाता है, जिनमें धर्म, वीरता, प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन होता है।
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रायपुर /छत्तीसगढ़ी लोकजीवन की खुशबू लिए हरेली तिहार का पारंपरिक उत्सव आज मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निवास में विधिवत रूप से आरंभ हुआ। छत्तीसगढ़ एक ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक अवसर और कार्य के लिए विशेष प्रकार के पारंपरिक उपकरणों एवं वस्तुओं का उपयोग होता आया है। हरेली पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में ऐसे ही पारंपरिक कृषि यंत्रों एवं परिधानों की झलक देखने को मिली, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।
काठा
सबसे बाईं ओर दो गोलनुमा लकड़ी की संरचनाएँ रखी गई थीं, जिन्हें ‘काठा’ कहा जाता है। पुराने समय में जब गाँवों में धान तौलने के लिए काँटा-बाँट प्रचलन में नहीं था, तब काठा से ही धान मापा जाता था। सामान्यतः एक काठा में लगभग चार किलो धान आता है। काठा से ही धान नाप कर मजदूरी के रूप में भुगतान किया जाता था।
खुमरीसिर को धूप और वर्षा से बचाने हेतु बांस की पतली खपच्चियों से बनी, गुलाबी रंग में रंगी और कौड़ियों से सजी एक घेरेदार संरचना ‘खुमरी’ कहलाती है। यह प्रायः गाय चराने वाले चरवाहों द्वारा सिर पर धारण की जाती है। पूर्वकाल में चरवाहे अपन साथ ‘कमरा’ (रेनकोट) और खुमरी लेकर पशु चराने निकलते थे। ‘कमरा’ जूट के रेशे से बना एक मोटा ब्लैंकेट जैसा वस्त्र होता था, जो वर्षा से बचाव के लिए प्रयुक्त होता था।कांसी की डोरीयह डोरी ‘कांसी’ नामक पौधे के तने से बनाई जाती है। पहले इसे चारपाई या खटिया बुनने के लिए ‘निवार’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। डोरी बनाने की प्रक्रिया को ‘डोरी आंटना’ कहा जाता है। वर्षा ऋतु के प्रारंभ में खेतों की मेड़ों पर कांसी पौधे उग आते हैं, जिनके तनों को काटकर डोरी बनाई जाती है। यह डोरी वर्षों तक चलने वाली मजबूत बुनाई के लिए उपयोगी होती है।झांपीढक्कन युक्त, लकड़ी की गोलनुमा बड़ी संरचना ‘झांपी’ कहलाती है। यह प्राचीन समय में छत्तीसगढ़ में बैग या पेटी के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होती थी। विशेष रूप से विवाह समारोहों में बारात के दौरान दूल्हे के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, पकवान आदि रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। यह बांस की लकड़ी से निर्मित एक मजबूत संरचना होती है, जो कई वर्षों तक सुरक्षित बनी रहती है।कलारीबांस के डंडे के छोर पर लोहे का नुकीला हुक लगाकर ‘कलारी’ तैयार की जाती है। इसका उपयोग धान मिंजाई के समय धान को उलटने-पलटने के लिए किया जाता है। -
दुर्ग,। जिले में 1 जून 2025 से 23 जुलाई 2025 तक 390.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। कार्यालय कलेक्टर भू अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 जून से अब तक सर्वाधिक वर्षा 514.9 मिमी पाटन तहसील में तथा न्यूनतम 317.2 मिमी. तहसील भिलाई-3 में दर्ज की गई है। इसके अलावा तहसील बोरी में 333.0 मिमी, तहसील अहिवारा में 474.0 मिमी, तहसील धमधा में 325.6 मिमी और तहसील दुर्ग में 376.9 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। 23 जुलाई 2025 को तहसील दुर्ग में 2.0 मिमी, तहसील धमधा में 18.2 मिमी, तहसील पाटन में 52.4 मिमी, तहसील बोरी में 22.0 मिमी, तहसील भिलाई 3 में 7.0 मिमी और तहसील अहिवारा में 0.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।
- -पार्षद व एमआईसी सदस्य ने सुगम निकास हेतु शीघ्र पुलिया बनाने निगम द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने के प्रति आश्वस्त कियारायपुर। बुधवार को राजधानी शहर रायपुर में हुई तेज बारिश के दौरान नगर निगम रायपुर के जोन क्रमांक 4 के अतर्गत पंडित भगवतीचरण शुक्ल वार्ड क्रमांक 57 के क्षेत्र में रतन पैलेस के पीछे राजेन्द्र नगर का नाला ओव्हर फ्लो होने एवं उसमें भारी मात्रा में कचरा होने से बस्ती में जलभराव की समस्या अचानक आ गई इसकी जानकारी होते ही वार्ड 57 पार्षद एव निगम एमआईसी सदस्य श्री अमर गिदवानी ने जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरूण ध्रुव, कार्यपालन अभियता श्री शेखर सिंह, सहायक अभियता श्री दीपक देवांगन, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री विरेन्द्र चंद्राकर सहित स्थल निरीक्षण किया एवं राजेन्द्र नगर नाले की सघन सफाई जेसीबी मशीन से करवाकर गंदे पानी का निकास सुनिश्चित किया। नागरिको की मांग पर पार्षद व एमआईसी सदस्य श्री अमर गिदवानी ने भविष्य में राजेन्द्र नगर नाले से गंदे पानी का निकास सुगम बनाये रखने एवं जलभराव की समस्या का निराकरण करने पुलिया निर्माण के आवश्यक कार्य हेतु निगम मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किये जाने एवं कार्यवाही प्रक्रियास्त होने की जानकारी देते हुए नगर निगम से शीघ्र नई पुलिया का निर्माण जलभराव की समस्या का निराकरण करने एवं सुगम निकास कायम करने करवाये जाने के प्रति नागरिकों को आश्वस्त किया।
- -खाद बीज और लोन वितरण कार्य की समीक्षा की-नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग के बारे में किसानों को दें समझाइश-योजनाओं का लाभ किसानों तक आसानी से पहुंचे : श्री चंद्रवंशीबिलासपुर। छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी ने उप संचालक कृषि कार्यालय में अधिकारियों की बैठक लेकर कृषि एवं इससे जुड़े विभागों के काम काज की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसानों और कृषि गतिविधियों का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता सूची में सर्वोपरि है। यह तभी संभव है जब शासन द्वारा किसानों के लिए बनाई गई योजनाएं और सुविधाओं का लाभ उन्हें सुगमता से मिल सके। उन्होंने बैठक में सस्ते विकल्प के रूप में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किसानों के बीच इनका व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए।बैठक में श्री सुरेश चंद्रवंशी ने कृषि विभाग के साथ साथ पशुपालन, उद्यानिकी, मछलीपालन तथा मार्कफेड द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं तथा जिले में खाद एवं बीज की आपूर्ति के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई। उप संचालक कृषि बिलासपुर ने बताया कि जिले में चालू खरीफ में अब तक 479.63 एमएम वर्षा हुई है। जिसके परिणाम स्वरूप मुख्य फसल धान की बुवाई एवं रोपाई का कार्य 1.17 लाख हेक्टर में पूर्ण हो चुका है तथा शेष बुवाई रोपाई का कार्य कृषक कर रहे हैं। अच्छी बारिश होने से किसानों में खुशी है।कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त अध्यक्ष चंद्रवंशी द्वारा जिले में बीज की भंडारण के संबंध में समीक्षा की गई। जिस पर उप संचालक कृषि द्वारा यह बताया गया कि कुल 21986 क्विंटल मांग थी। जिसके विरुद्ध 98 फीसदी बीच का वितरण किया जा चुका है। उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ती जिले में करने तथा डीएपी उर्वरक के विकल्प के रूप में यूरिया, एसएसपी, एनपीके तथा नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने किसानों के बीच प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए। उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में 77% उर्वरक का भंडारण तथा 70% वितरण हो चुका है एवं डीएपी के विकल्प रूप में उपयोग किए जाने वाले खाद के मिश्रण के बारे में प्रचार प्रसार किया जा रहा है।किसानों को नकली उर्वरकों का वितरण को प्रतिबंध लगाने हेतु लगातार उर्वरक निरीक्षक द्वारा निरीक्षण कर रोक लगाने तथा आगामी समय में सभी उर्वरकों का अलग-अलग कलर कोड कर वितरण किए जाने का सुझाव दिए।उप संचालक कृषि द्वारा अवगत कराया गया कि विभाग द्वारा उर्वरक विक्रेताओं के गोदाम तथा विक्रय केंद्र पर लगातार छापे मार करवाई किया जा रहा है। श्री चंद्रवंशी ने पशुधन विकास, मछलीपालन और उद्यान विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब इनका लाभ लेकर किसानों की आमदनी बढ़े और उनका जीवन स्तर और क्रय शक्ति ऊपर उठे। कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त श्री चंद्रवंशी के पहली बार उपसंचालक कृषि कार्यालय आने पर उप संचालक पीडी हथेश्वर, उप संचालक उद्यान कमलेश दीवान, उप संचालक मछलीपालन श्री महीश्वर सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई जोन क्रमांक 04 शिवाजी नगर अंतर्गत सड़क किनारे लगे बैनर-पोस्टर निकालने की कार्यवाही जारी है। बरसात के दिनों में आंधी तूफान से बैनर-पोस्टर निकलकर सड़को पर गिरने से बड़ी दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। जिसे देखते हुए डबरा पारा चौंक से छावनी चौक तक लगे बैनर-पोस्टर निकाला जा रहा है। नेशनल हाईवे होने के कारण सैकड़ो वाहन चालकों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। जिससे उनको किसी प्रकार की समस्या न हो इसके लिए जोन स्वास्थ्य अधिकारी हेमंत मांझी के नेतृत्व में निगम का अमला निरंतर कार्य कर रहा है। शहर के अन्य मार्गो के किनारे लगे बैनर-पोस्टर निकालने की कार्यवाही जोन स्वास्थ्य अधिकारियो द्वारा की जाएगी।नगर निगम भिलाई महापौर एवं निगम आयुक्त सभी विज्ञापन एजेंसियों से अपील किए हैं कि शहर के किसी भी स्थलों पर विज्ञापन, बैनर, पोस्टर लगाने से पहले निगम से अनुमति लेकर ही लगाए। अनावश्यक किसी भी जगह विज्ञापन न लगाए। साथ ही विज्ञापन, बैनर, पोस्टर लगाते समय यह विशेष ध्यान रखा जाए कि फिटिंग ठीक ढंग से हो, जिससे आंधी तूफान से सड़को पर गिरने एवं दुर्घटना से बचा जा सके। बिना अनुमति के होर्डिंग एवं विज्ञापन लगाने वालों के ऊपर नगर निगम अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी ।


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