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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत ब्याज दर में बदलाव नहीं करने के बृहस्पतिवार के फैसले को बैंकरों ने अपेक्षित बताते हुए कहा कि इससे मुद्रास्फीति पर केंद्रीय बैंक की सख्त निगरानी भी उजागर होती है। भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के चेयरमैन और सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी ए के गोयल ने कहा, “दरों को यथावत रखना और नीति में बदलाव नहीं करना अपेक्षित था। स्पष्ट है कि आरबीआई ने मुद्रास्फीति के मामले में अपनी निगरानी बनाए रखी है।” गोयल ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (सीपीआई) पर आरबीआई का 5.1 प्रतिशत का अनुमान अप्रैल में अनुमानित 5.2 प्रतिशत से थोड़ा कम है। आरबीआई मुद्रास्फीति पर रेपो दर में साल भर में हुई कुल 2.5 प्रतिशत वृद्धि के पूरे प्रभाव का आकलन करना चाहता है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन दिनेश खारा ने मुद्रास्फीति के संदर्भ में भविष्य के लिए बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप आए आरबीआई के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “विकास को लेकर विभिन्न नीतियों में बदलावों से बाजार की सूक्ष्म संरचना से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ेगा।” आईडीबीआई बैंक के उप प्रबंध निदेशक सुरेश खटनहार ने कहा कि दर वृद्धि के सिलसिले पर रोक लगना एक अच्छा संकेत है क्योंकि इससे मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने, निवेश बढ़ाने और धारणाओं को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। विदेशी ऋणदाता स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की भारत में प्रमुख जरीन दारूवाला ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का निर्णय वृद्धि को बढ़ावा देने के साथ-साथ मुद्रास्फीति पर लगाम लगाने की उसकी प्रतिबद्धता दोहराता है। बंधन बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री एवं शोध प्रमुख सिद्धार्थ सान्याल ने कहा कि एमपीसी बैठक में नीतिगत दर रेपो में परिवर्तन नहीं करना पूर्वानुमान के अनुरूप ही था। उन्होंने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को 0.5 प्रतिशत तक घटाने के बावजूद समूचे वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान लगभग अपरिवर्तित है।” -
नयी दिल्ली. कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आने से पेट्रोल और डीजल पर मार्जिन बढ़ने के बावजूद इनकी खुदरा कीमतों में बदलाव तभी होगा जब सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां पिछले साल हुए घाटे की भरपाई कर लेंगी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल की कीमतों में दैनिक बदलाव करने पर पिछले साल से ही रोक लगाई हुई है। उन्होंने अपनी लागत के अनुरूप कीमतों में संशोधन भी नहीं किया है। दरअसल ये कंपनियां कच्चे तेल की कीमतें खुदरा बिक्री कीमतों से ज्यादा होने पर पिछले साल हुए भारी घाटे की भरपाई अब लागत घटने पर कर रही हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) देश में पेट्रोल, डीजल की खुदरा बिक्री करती हैं। अधिकारियों ने कहा कि तीनों कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022-23 की तीसरी तिमाही से ही पेट्रोल पर सकारात्मक मार्जिन कमाया है लेकिन डीजल बिक्री पर उन्हें उस समय भी घाटा हो रहा था। हालांकि पिछले महीने डीजल पर भी पेट्रोलियम कंपनियों का मार्जिन 50 पैसे प्रति लीटर के लाभ के साथ सकारात्मक हो गया। लेकिन पिछले साल हुए भारी घाटे की भरपाई के लिए यह पर्याप्त नहीं है। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मार्च, 2022 में 139 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि अब ये कीमतें 75-76 डॉलर तक आ चुकी हैं। कच्चे तेल के दाम ऊंचे स्तर पर होने की स्थिति में तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 17.4 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 27.7 रुपये प्रति लीटर का घाटा हुआ। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कीमतें कुछ नरम होने पर तेल कंपनियों ने पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर का मार्जिन कमाया लेकिन डीजल पर उन्हें 6.5 रुपये प्रति लीटर का घाटा हुआ था। इसके बाद जनवरी-मार्च 2023 की तिमाही में पेट्रोल पर उनका मार्जिन कम होकर 6.8 रुपये प्रति लीटर हो गया। लेकिन उन्हें डीजल पर मार्जिन 0.5 रुपये प्रति लीटर का सकारात्मक हुआ। अधिकारियों ने कहा कि पिछले घाटों की भरपाई करने के अलावा सार्वजनिक तेल कंपनियां इस पहलू पर भी नजर रखे हुए हैं कि कच्चे तेल की कम कीमतें लंबे समय तक कायम रहेंगी या नहीं। एक अधिकारी ने कहा, "मुझे लगता है कि तेल कंपनियां कम-से-कम एक और तिमाही तक कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखने के बाद ही पेट्रोल, डीजल की खुदरा कीमतों में संशोधन पर कोई फैसला करेंगी।"
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नयी दिल्ली. खाद्य तेल ब्रांड ‘धारा' की बिक्री करने वाली मदर डेयरी ने इस तेल के अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) में प्रति लीटर 10 रुपये तक की कटौती करने की घोषणा करते हुए कहा है कि अगले सप्ताह से नई कीमतों वाली पैकिंग बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। कंपनी ने कहा कि धारा ब्रांड के तेल की कीमतों में कटौती वैश्विक बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में आई गिरावट को देखते हुए की गई है। मदर डेयरी दिल्ली एवं एनसीआर क्षेत्र में दुग्ध उत्पादों की प्रमुख आपूर्तिकर्ता होने के साथ धारा ब्रांड के तहत खाद्य तेल की भी बिक्री करती है। खाद्यतेलों को आम तौर पर खुदरा विक्रेता, बोतल या उसके पैकेट पर छपे एमआरपी से कम दाम पर बेचते हैं।
पिछले हफ्ते, केंद्र ने खाद्य तेल उद्योग निकायों को निर्देश दिया कि वे अपने सदस्यों को तत्काल प्रभाव से प्रमुख खाद्य तेलों के एमआरपी को 8-12 रुपये प्रति लीटर कम करने की सलाह दें। मदर डेयरी के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा, ‘‘धारा खाद्य तेल के सभी संस्करणों के एमआरपी में 10 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती की जा रही है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेलों के दाम गिरने और घरेलू स्तर पर सरसों जैसी तिलहन फसलों की उपलब्धता में सुधार को देखते हुए उठाया गया है।'' इसके साथ ही प्रवक्ता ने कहा कि धारा ब्रांड के खाद्य तेल नई एमआरपी के साथ अगले सप्ताह तक खुले बाजार में मिलने लगेंगे। दाम में कटौती के बाद धारा ब्रांड के रिफाइंड सोयाबीन तेल की कीमत 140 रुपये प्रति लीटर होगी जबकि रिफाइंड चावल भूसी तेल (राइस ब्रान) का एमआरपी 160 रुपये प्रति लीटर होगा। धारा रिफाइंड वनस्पति तेल अब 200 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध होगा। इसी तरह धारा कच्ची घानी सरसों तेल की एमआरपी 160 रुपये प्रति लीटर और धारा सरसों तेल की एमआरपी 158 रुपये प्रति लीटर होगी। मदर डेयरी ने कहा कि धारा का रिफाइंड सूरखमुखी तेल का एमआरपी अब 150 रुपये प्रति लीटर और नारियल तेल का एमआरपी 230 रुपये प्रति लीटर होगा। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने 2 जून को खाद्य तेल हितधारकों के साथ एक बैठक की थी जिसमें खाद्यतेलों की वैश्विक कीमतों में निरंतर गिरावट के मद्देनजर खाद्यतेलों की खुदरा कीमतों में और कटौती करने के बारे में चर्चा की गई। उद्योग ने सूचित किया था कि पिछले दो महीनों में विभिन्न खाद्य तेलों की वैश्विक कीमतों में 150-200 डॉलर प्रति टन की गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि तेल मिलों ने एमआरपी कम कर दी है और जल्द ही इसे और कम करेंगे। खाद्य तेलों के प्रमुख आयातक देश भारत ने विपणन वर्ष 2021-22 में 1.57 लाख करोड़ रुपये के खाद्य तेलों का आयात किया था। भारत अपनी कुल खाद्य तेल जरूरतों का 50 प्रतिशत से ज्यादा आयात करता है। -
नयी दिल्ली. बीते वित्त वर्ष (2022-23) की चौथी तिमाही में 43 शहरों में संपत्ति की कीमतों में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) की ओर से बृहस्पतिवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। आंकड़ों के अनसार, सर्वे में शामिल 50 शहरों में से सात शहरों में घरों के दाम नीचे आए हैं। आवास ऋण पर ब्याज दर कोविड-पूर्व के समय से भी कम बनी हुई हैं, जिससे इस क्षेत्र में वृद्धि बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आठ प्रमुख आवास बाजारों में जनवरी-मार्च, 2023 तिमाही के दौरान संपत्ति की कीमतों में वृद्धि देखी गई। एनएचबी द्वारा प्रकाशित आवास कीमत सूचकांक (एचपीआई) के अनुसार, अहमदाबाद में संपत्ति कीमतों में सालाना आधार पर 10.8 प्रतिशत, बेंगलुरु में 9.4 प्रतिशत, चेन्नई में 6.8 प्रतिशत, दिल्ली में 1.7 प्रतिशत, हैदराबाद में 7.9 प्रतिशत, कोलकाता में 11 प्रतिशत, मुंबई 3.1 प्रतिशत और पुणे 8.2 प्रतिशत वृद्धि हुई है। इन शहरों का एचपीआई बैंकों और आवास ऋण कंपनियों से प्राप्त मूल्यांकन के आंकड़ों पर आधारित है। इसमें चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 5.8 प्रतिशत वृद्धि हुई। मार्च, 2022 में इसमें 5.3 प्रतिशत वृद्धि हुई थी।
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नयी दिल्ली. महिंद्रा एंड महिंद्रा सुप्रो सीएनजी डुओ की पेशकश के साथ दोहरे ईंधन वाले छोटे वाणिज्यिक वाहन खंड में उतर गई है। इस गाड़ी की शोरूम कीमत 6.32 लाख रुपये है। सुप्रो सीएनजी डुओ सीएनजी और पेट्रोल दोनों पर चल सकती है।
यह मॉडल 750 किलोग्राम की पेलोड क्षमता और 75 किलो की सीएनजी टैंक क्षमता के साथ आता है। इसमें पांच लीटर का पेट्रोल टैंक भी है। यानी एक बार सीएनजी भरवाने के बाद यह वाहन 325 किलोमीटर तक चल सकता है। ऐसे में एक शहर से दूसरे शहर तक परिवहन के लिए इस गाड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है। महिंद्रा एंड महिंद्रा के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय बिक्री प्रमुख बानेश्वर बनर्जी ने बताया कि यह वाहन मालवहन के विभिन्न क्षेत्रों की मांग को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल एक शहर से दूसरे शहर तक परिवहन के लिए भी किया जा सकेगा। कंपनी इस मॉडल को महाराष्ट्र स्थित चाकन संयंत्र में बना रही है। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि चलन में मौजूद दो हजार रुपये के कुल नोटों में लगभग 50 प्रतिशत बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय बैंक ने पिछले महीने इन नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2023 तक कुल 3.62 लाख करोड़ रुपये मूल्य के दो हजार रुपये के नोट चलन में थे। दास ने यहां द्विमासिक मौद्रिक नीति जारी करने के बाद मीडिया से कहा, ‘‘इस घोषणा के बाद अबतक 1.80 लाख करोड़ रुपये के नोट वापस आ चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि दो हजार रुपये के करीब 85 प्रतिशत नोट बैंक खातों में जमा किए जा रहे हैं, जबकि बाकी नोटों को छोटे मूल्य वर्ग के नोटों से बदला जा रहा है। दास ने पिछले महीने कहा था कि 2,000 के नोटों को चलन से हटाने के फैसले का अर्थव्यवस्था पर ‘बहुत सीमित' असर होगा। चलन में मौजूद कुल मुद्रा में 2,000 के नोट का हिस्सा सिर्फ 10.8 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि 2016 में नोटबंदी के बाद नकदी की कमी की भरपाई के लिए 2,000 रुपये का नोट लाया गया था। गवर्नर ने कहा था कि जिस किसी के पास 2,000 रुपये का नोट है वह उसे अपने बैंक खाते में जमा कर सकता है या किसी अन्य मूल्य की मुद्रा से बदल सकता है। बैंकों को 2,000 का नोट बदलने के लिए जरूरी व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि 30 सितंबर की समयसीमा तक 2,000 के ज्यादातर नोट वापस हो जाएंगे।' -
कीमत 2.55 करोड़ रुपये से शुरू
मुंबई. जर्मनी की कार कंपनी मर्सिडीज बेंज इंडिया ने बृहस्पतिवार को अपने स्पोर्ट्स यूटिलिटी वेहिकल (एसयूवी) जी-क्लास के दो संस्करण- जी 400डी एडवेंचर एडिशन और जी 400डी एएमजी लाइन पेश किए। इनकी कीमत 2.55 करोड़ रुपये से शुरू होती है। मर्सिडीज बेंज इंडिया ने बयान में कहा, “दोनों संस्करणों की आपूर्ति चालू वर्ष की तीसरी तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है।” कंपनी ने कहा कि नई जी 400डी की बुकिंग के लिए वरीयता मर्सिडीज-बेंज के मौजूदा ग्राहकों को दी जाएगी।
कंपनी ने कहा कि इन संस्करणों की आपूर्ति इनकी भारी मांग देखते हुए भारतीय बाजारों के लिए इनके आवंटन पर आधारित होगी। मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) संतोष अय्यर ने कहा, “ग्राहकों का ध्यान एसयूवी श्रेणी के वाहनों पर बना हुआ है। जी-क्लास भारतीय ग्राहकों के लिए बहुप्रतीक्षित वाहन रहा है। -
इंदौर. केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश ने बृहस्पतिवार को कहा कि चलन से वापस लिए गए 2,000 रुपये के नोट को बैंकों में जमा करने या बदलने में वाणिज्य और उद्योग जगत को कोई समस्या नहीं हो रही है। वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश ने यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘2,000 रुपये का नोट वापस लिए जाने के फैसले को लेकर मेरी कई व्यापारियों और उद्योगपतियों से बात हुई है। कोई भी व्यक्ति बैंक में जाकर इस नोट को बदल सकता है। इसमें किसी भी व्यक्ति को कहीं कोई समस्या ही नहीं हो रही है।'' उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये के नोट को बैंक में जमा करने या बदलने के लिए सरकार ने लोगों को लंबी मोहलत दी है। गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 2,000 रुपये का नोट चलन से वापस लेने की घोषणा 19 मई को की थी। केंद्रीय बैंक ने बैंकों में अन्य मूल्य वर्गों के नोट से 2,000 रुपये के नोट की अदला-बदली के लिए 30 सितंबर की समयसीमा तय की है। कारोबारियों के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने इंदौर में 26 मई को कहा था कि 2,000 रुपये का नोट जमा करने या बदलने के लिए हर बैंक के अपने-अपने तरीके हैं जिससे खासकर गृहिणियों और व्यापारियों को ज्यादा तकलीफ हो रही है। वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के इनपुट ‘टैक्स क्रेडिट' का बेजा लाभ लेने के लिए फर्जी बिलों के इस्तेमाल के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है और इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों को हर राज्य में गिरफ्तार भी किया जा रहा है। सोमप्रकाश भाजपा के विशेष जनसंपर्क अभियान में शामिल होने के लिए इंदौर आए थे।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष (2023-24) की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। यह लगातार दूसरी मौद्रिक समीक्षा है जबकि केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर में बदलाव नहीं किया है। हालांकि, रिजर्व बैंक ने संकेत दिया है कि वह वृद्धि की रफ्तार को कायम रखते हुए महंगाई दर को और नीचे देखना चाहता हैं। रिजर्व बैंक के इस कदम से वाहन, मकान और अन्य ऋण पर ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी। केंद्रीय बैंक का नीतिगत दर नहीं बढ़ाने का निर्णय बाजार उम्मीदों के अनुरूप है। रिजर्व बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को यथावत रखने का फैसला किया है। इसके अलावा समिति ने 5:1 के मत से अपने उदार रुख को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय भी किया है। केंद्रीय बैंक का उदार रुख पिछले साल अप्रैल से शुरू हुआ था। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को भी 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा है। पिछली मौद्रिक समीक्षा बैठक में वृद्धि दर के अनुमान को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया गया था। वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को घटाकर 5.1 प्रतिशत किया गया है। पहले इसके 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा गया था। मौद्रिक नीति समिति की मंगलवार से शुरू हुई तीन दिन की बैठक में लिये गए निर्णय की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘एमपीसी ने नीतिगत दर को यथावत रखने का निर्णय किया है।'' उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। शेष साल में भी इसके लक्ष्य से ऊपर ही रहने का अनुमान है। दास ने कहा, ‘‘एमपीसी अपने उदार रुख को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करेगी।''
अप्रैल की पिछली मौद्रिक समीक्षा बैठक में भी रिजर्व बैंक ने रेपो दर में बदलाव नहीं किया था। इससे पहले मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये रिजर्व बैंक पिछले साल मई से लेकर कुल छह बार में रेपो दर में 2.50 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है। रेपो दर वह ब्याज दर है, जिसपर वाणिज्यिक बैंक अपनी फौरी जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। केंद्रीय बैंक नीतिगत दर के बारे में निर्णय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर पर गौर करता है। उसे मुद्रास्फीति दो से छह प्रतिशत के बीच रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। आरबीआई का अनुमान है कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहेगी। दास ने कहा कि मुद्रास्फीति को तय दायरे में बनाए रखने के लिए एमपीसी त्वरित और उचित नीतिगत कार्रवाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के दायरे में लाना है। इसे 2-6 प्रतिशत के संतोषजनक स्तर पर रखना पर्याप्त नहीं है।'' गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग की स्थिति वृद्धि के लिए सहायक बनी हुई है, ग्रामीण मांग बेहतर हो रही है। उन्होंने रुपये का जिक्र करते हुए कहा कि यह इस साल जनवरी से स्थिर है। दुनिया के ज्यादातर केंद्रीय बैंकों ने जिंस कीमतें नरम होने के बीच ब्याज दरों में बढ़ोतरी रोक दी है। हालांकि, ऑस्ट्रिया और कनाडा ने इस सप्ताह बाजार को हैरान करते हुए ब्याज दरें बढ़ाई हैं। रिजर्व बैंक ने कहा है कि उदार रुख को वापस लेने का फैसला इसलिए लिया गया है कि तरलता की स्थिति सुधर रही है। प्रणाली में रोजाना औसतन नकदी का स्तर 2.3 लाख करोड़ रुपये का है। ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि नीतिगत दरों में यथास्थिति महंगाई, वृद्धि या वैश्विक घटनाक्रमों के मोर्चे पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होने तक तक लंबी चलेगी। वृद्धि के बारे में दास ने कहा कि रबी उपज बढ़ने, सामान्य मानसून के अनुमान और सेवाओं में तेजी के साथ मुद्रास्फीति के नरम पड़ने से परिवारों का उपभोग बढ़ेगा। इसके अलावा बैंकों और कंपनियों के बही-खाते में सुधार, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति बेहतर होने और अनिश्चितता घटने से निवेश का चक्र तेजी पकड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का पूंजीगत खर्च बढ़ने से भी निवेश और विनिर्माण गतिविधियां तेज होंगी।
गवर्नर ने कहा कि निर्यात की तुलना में आयात घटने से भारत का व्यापार घाटा कम हुआ है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने ई-रुपये वाउचर के दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है। अब गैर-बैंकिंग कंपनियों को इस तरह के उत्पाद जारी करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही रिजर्व बैंक ने बैंकों को 'रुपे प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड जारी करने की अनुमति दी।
- - नयी दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने का भाव 420 रुपये की गिरावट के साथ 60,380 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने बताया कि विदेशी बाजारों में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में गिरावट आने से सोने के दाम में नरमी रही। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।हालांकि, चांदी की कीमत 500 रुपये के उछाल के साथ 73,300 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ जिंस विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की हाजिर कीमत 420 रुपये की गिरावट के साथ 60,380 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गयी।'' विदेशी बाजारों में सोना गिरावट के साथ 1,945 डॉलर प्रति औंस रह गया, जबकि चांदी तेजी के साथ 23.65 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
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नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्तमान वित्त वर्ष की अपनी दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा की है। रिजर्व बैंक ने मुख्य दरों को यथावत रखा है। रेपो रेट 6.5 प्रतिशत बनी रहेगी। नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में इस वर्ष मार्च से अप्रैल के दौरान कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस वित्त वर्ष में मुद्रा स्फीति की दर चार प्रतिशत से अधिक बनी रहेगी। श्री दास ने कहा कि इस वर्ष सामान्य मॉनसून रहने की संभावना है। मुद्रा स्फीति की दर पांच दशमलव एक प्रतिशत रह सकती है। रिजर्व बैंक ने जीडीपी वृद्धि दर छह दशमलव पांच प्रतिशत पर बरकरार रखी है। तिमाही आधार पर 2024 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर आठ प्रतिशत, दूसरी तिमाही में साढ़े छह प्रतिशत, तीसरी तिमाही में छह प्रतिशत और चौथी तिमाही में पांच दशमलव सात प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने घोषणा की कि बैंक अब रूपे प्री-पेड फोरेक्स कार्ड जारी कर सकते हैं। इसके साथ ही रिजर्व बैंक नै ई-रूपी वाउचर का दायरा बढ़ाने की भी घोषित की। इसके लिए नॉन बैंक कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स जारी कर सकेंगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने दो हजार रुपये के नोट वापस लेने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले के तीन सप्ताह बाद सरकार का खर्च बढ़ने से नकदी का प्रवाह भी बढ़ा है। - मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को विदेशी मुद्रा कारोबार के अनधिकृत मंचों में आठ और कंपनियों को जोड़कर अपनी सतर्कता सूची में संशोधन किया है। अब इस सूची में कुल अनधिकृत इकाइयों की संख्या 56 हो गई है।केंद्रीय बैंक ने पिछले वर्ष सितंबर में विदेशी मुद्रा कारोबार मंच की ‘सतर्कता सूची' जारी की थी जिसमें 34 इकाइयों के नाम थे। इसके बाद फरवरी में इस सूची में संशोधन किया गया था। बुधवार को इस सूची में जोड़े गए नामों में क्यूएफएक्स मार्केट्स, विनट्रेड, गुरु ट्रेड7 लिमिटेड, ब्रिक ट्रेड, रुबिक ट्रेड, ड्रीम ट्रेड, मिनी ट्रेड और ट्रस्ट ट्रेड हैं। किसी व्यक्ति या इलेक्ट्रॉनिक कारोबार मंच (ईटीपी) के अधिकृत होने के संबंध में स्थिति आरबीआई की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
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नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बी एस एन एल के लिए 89 हजार 47 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ तीसरे पुनरुद्धार पैकेज को मंजूरी दी है। इसमें इक्विटी इन्फ्यूजन के जरिए बीएसएनएल के लिए 4-जी और 5-जी स्पेक्ट्रम का आवंटन शामिल है। बीएसएनएल की अधिकृत पूंजी एक लाख 50 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर दो लाख दस हजार करोड़ रुपये की जाएगी। इस पुनरुद्धार पैकेज के साथ बीएसएनएल एक मजबूत दूरसंचार सेवा प्रदाता के रूप में उभरेगा, जो देश के दूर-दराज के क्षेत्रों के साथ सम्पर्क पर केन्द्रित होगा। इस स्पेक्ट्रम आवंटन के साथ बीएसएनएल पूरे भारत में 4-जी और 5-जी सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा। विभिन्न सम्पर्क परियोजनाओं के तहत यह ग्रामीण और इस सुविधा से वंचित गांवों में 4-जी कवरेज प्रदान करेगा। यह हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस सेवाएं और कैप्टिव नॉन पब्लिक नेटवर्क के लिए सेवाएं तथा स्पेक्ट्रम प्रदान करेगा।
- फ्रैंकफर्ट. सऊदी अरब ने रविवार को कहा कि वह तेल की गिरती कीमतों पर काबू के लिए इसके उत्पादन में प्रतिदिन दस लाख बैरल की कटौती करेगा। इससे पहले, ओपेक प्लस के सदस्य देशों द्वारा उत्पादन में दो बार कटौती की गई थी। लेकिन इससे तेल की गिरती कीमतों पर काबू नहीं पाया जा सका। उसके बाद सऊदी अरब ने यह एकतरफा कदम उठाया है। ओपेक प्लस पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन है।विएना स्थित ओपेक मुख्यालय में सदस्य देशों की बैठक के बाद सऊदी अरब द्वारा प्रतिदिन दस लाख बैरल की कटौती की घोषणा की गई जो जुलाई से प्रभावी होगी। ओपेक प्लस के बाकी देश 2024 के अंत तक आपूर्ति में पहले की गई कटौती को बढ़ाने पर सहमत हुए।
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नयी दिल्ली. सोशल मीडिया कंपनी मेटा के फेसबुक ने अप्रैल में उपयोगकर्ताओं से मिली शिकायतों में से 41 प्रतिशत शिकायतों पर कार्रवाई की जबकि इंस्टाग्राम ने 54 प्रतिशत शिकायतों पर कार्रवाई की। कंपनी के हालिया भारतीय मासिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। मेटा की ओर से श्रेणीवार दी गई जानकारी के अनुसार, फेसबुक ने उपयोगकर्ताओं की एक-चौथाई से कम शिकायतों पर कार्रवाई की, जिनमें दावा किया गया था कि फेसबुक मंच पर पोस्ट की गई सामग्री आंशिक नग्नता या अश्लीलता को बढ़ावा दे रही थी। इंस्टाग्राम के मामले में मंच ने प्राप्त उसकी नीतियों का उल्लंघन करने संबंधी शिकायतों की एक-तिहाई से कम पर कार्रवाई की, जिनको लेकर दावा किया गया था कि पोस्ट की गई सामग्री आंशिक नग्नता या अश्लीलता को बढ़ावा दे रही थी। मेटा पारदर्शिता रिपोर्ट बताती है कि फेसबुक ने अन्य श्रेणियों जैसे उत्पीड़न या शोषण वाली शिकायतों में 17 प्रतिशत पर कार्रवाई की, अनुचित या आपत्तिजनक सामग्री की लगभग 18 प्रतिशत शिकायतों पर और फर्जी खातों की लगभग 23 प्रतिशत शिकायतों पर कार्रवाई की।
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नयी दिल्ली. ओडिशा में शुक्रवार को भीषण रेल हादसा होने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शनिवार को सभी विमानन कंपनियों को निर्देश दिया कि भुवनेश्वर आने-जाने वाली उड़ानों के किराये में असामान्य वृद्धि पर निगरानी रखें और ऐसा होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। मंत्रालय ने इसके अलावा कहा कि दुर्घटना के कारण किसी हवाई यात्रा के टिकट को रद्द करने और यात्रा का पुनर्निधारण करने पर उन्हें यात्रियों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लेना चाहिए। मंत्रालय ने इस संबंध में सभी विमानन कंपनियों को परामर्श जारी किया है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ओडिशा में हुए दुर्भाग्यपूर्ण रेल हादसे को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सभी विमानन कंपनियों को भुवनेश्वर आने वाली और वहां से जाने वाली उड़ानों के हवाई किराये में असामान्य वृद्धि पर नजर रखने और इस पर रोक लगाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने की सलाह दी है।” ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार रात हुए भीषण रेल हादसे में कम से कम 288 लोगों की मौत हो गई और 1000 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं। मंत्रालय ने ओडिशा से विमान सेवाएं संचालित करने वाली सभी विमानन कंपनियों से इस ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के शवों को मौजूदा नीति के अनुसार उनके गृहराज्य तक पहुंचाने में पूरा सहयोग करने का भी आह्वान किया है। -
मुंबई. भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने बालासोर ट्रेन हादसे के पीड़ितों के वास्ते दावा निस्तारण प्रक्रिया के लिए नियमों में कई छूटों की शनिवार को घोषणा की। एलआईसी अध्यक्ष सिद्धार्थ मोहंती ने देर शाम बयान जारी कर हताहतों के रिश्तेदारों के वास्ते दावा निस्तारण प्रक्रिया के नियमों में कई छूटों की घोषणा की। मोहंती ने बयान में कहा, ‘‘ ओडिशा के बालासोर में शुक्रवार को हुए त्रासद ट्रेन हादसे से हमें गहरा दुख हुआ है। एलआईसी प्रभावितों की मदद करने के लिए कटिबद्ध है और वह वित्तीय राहत प्रदान करने के लिए दावों का तीव्र निस्तारण करेगी।'' निगम ने एलआईसी पॉलिसी के दावेदारों तथा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के दावेदारों की परेशानियां कम करने के लिए कई रियायतों की भी घोषणा की है। उसने कहा कि पंजीकृत मृत्यु प्रमाण पत्र के स्थान पर रेलवे , पुलिस या किसी राज्य एवं केंद्रीय प्रशासन द्वारा जारी हताहतों की सूची को भी मृत्यु का प्रमाण माना जाएगा। निगम ने संभागीय और शाखा स्तर के कार्यालयों में दावा संबंधी प्रश्नों के समाधान एवं दावेदारों को सहायता प्रदान करने के लिए विशेष सहायता डेस्क स्थापित किया है और कॉल सेंटर नंबर (022-68276827) भी जारी किया है।
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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) किसी भी परिस्थिति में काम करने वाली भुगतान प्रणाली तैयार कर रहा है। प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध जैसी विनाशकारी घटनाओं के दौरान महत्वपूर्ण लेनदेन के लिए यह प्रणाली उपयोगी होगी। केंद्रीय बैंक के अनुसार प्रस्तावित ‘लाइट वेट एंड पोर्टेबल पेमेंट सिस्टम' (एलपीएसएस) पारंपरिक प्रौद्योगिकियों से अलग होगा और इसे बहुत कम कर्मचारी कहीं से भी संचालित कर सकेंगे। बड़ी मात्रा में भुगतान के लिए आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट), एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर) और यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसी मौजूदा भुगतान प्रणालियां तैयार की गईं हैं। ये प्रणालियां उन्नत आईटी अवसंरचना और जटिल तारों के नेटवर्क पर निर्भर हैं। आरबीआई ने मंगलवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और युद्ध जैसी भयावह घटनाओं में ये प्रणालियां अस्थायी रूप से बंद हो सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इसलिए, इस तरह की विषम परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहने में समझदारी है।'' इस बात को ध्यान में रखकर आरबीआई ने एलपीएसएस की परिकल्पना की है, जो पारंपरिक तकनीकों से स्वतंत्र होगा और बेहद कम कर्मचारियों के साथ इसे कहीं से भी संचालित किया जा सकता है।
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नयी दिल्ली. वैश्विक इंजीनियरिंग और डिजिटल सेवा कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने मंगलवार को कहा कि वह 2023-24 में 1,000 से अधिक महिला इंजीनियरों की नियुक्ति करेगी। कंपनी ने कहा कि उसने अपने कार्यबल में लैंगिक विविधता को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया।
टाटा टेक्नोलॉजीज ने बयान में कहा कि कंपनी ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए लैंगिक विविधता आधारित भर्ती अभियान शुरू किया है। कंपनी ने कहा कि ‘रेनबो' कार्यक्रम के जरिये उसने अधिक महिलाओं को भर्ती करने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देने के लिए एक व्यवस्था तैयार की है। कंपनी ने कहा कि वह महिला कर्मचारियों को उनकी नेतृत्व क्षमता विकसित करने तथा करियर में उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करेगी। -
मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि पायलट आधार पर जारी केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) में और बैंकों तथा स्थानों को शामिल करने के लिये धीरे-धीरे इसका विस्तार किया जा रहा है। थोक स्तर पर उपयोग के लिये पायलट आधारित डिजिटल रुपये की शुरूआत एक नवंबर, 2022 को हुई थी। उसके बाद खुदरा खंड में डिजिटल रुपये के उपयोग की घोषणा एक दिसंबर, 2022 को की गयी। पायलट परियोजना की शुरुआत मुंबई, नयी दिल्ली, बेंगलुरु और भुवनेश्वर में की गयी। उपयोग को लेकर इसमें सीमित दायरे में ग्राहकों और व्यापारियों को शामिल किया गया। चरणबद्ध तरीके से पायलट परियोजना में अहमदाबाद, चंडीगढ़, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, लखनऊ, पटना और शिमला को भी शामिल किया जा रहा है। पायलट परियोजना चार बैंकों... भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक - के साथ शुरू हुई। जबकि चार अन्य बैंक... बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक बाद में शामिल हुए। केंद्रीय बैंक ने 2022-23 की रिपोर्ट में कहा, ‘‘पांच और बैंक... पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, फेडरल बैंक, एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक पायलट परियोजना में शामिल होने की प्रक्रिया में हैं। जरूरत के अनुसार और बैंकों, उपयोगकर्ताओं और स्थानों को शामिल करने के लिये इसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है।'' रिपोर्ट के अनुसार, थोक और खुदरा डिजिटल रुपये के मामले में अबतक चीजें संतोषजनक हैं और जो उम्मीद की जा रही थी, उसी के अनुरूप हैं। डिजिटल रुपये थोक खंड के संदर्भ में इसमें कहा गया है कि इसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में द्वितीयक बाजार लेनदेन का निपटान शामिल किया गया है। डिजिटल रुपये-थोक खंड के उपयोग से बैंकों के बीच लेन-देन को और अधिक कुशल बनने की उम्मीद है।
इस व्यवस्था से निपटान लागत में कमी आने की उम्मीद है। फिलहाल नौ बैंक... भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एचएसबीसी... पायलट में भाग ले रहे हैं।
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नयी दिल्ली. विदेशी बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने का भाव 90 रुपये की गिरावट के साथ 59,945 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 60,035 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।
चांदी की कीमत भी 350 रुपये की गिरावट के साथ 72,250 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की हाजिर कीमत 90 रुपये के नुकसान के साथ 59,945 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।'' विदेशी बाजारों में सोना नुकसान के साथ 1,939 डॉलर प्रति औंस रह गया, वहीं चांदी भी गिरावट के साथ 23.05 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। -
शाहजहांपुर (उप्र). शाहजहांपुर जिले में किसानों का रुझान काले गेहूं की खेती की ओर बढ़ रहा है। इस बार यहां के किसानों द्वारा भारी मात्रा में काले गेहूं का उत्पादन किया गया है। हालांकि, फायदे का सौदा होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर बाजार की अनुपलब्धता यहां के किसानों को निराश भी कर रही है। शाहजहांपुर जिले में काले गेहूं की खेती अब प्रचुर मात्रा में होने लगी है। पूरे जिले के लगभग 250 एकड़ क्षेत्र में इसे उगाया गया है। स्थानीय प्रशासन भी किसानों को इस बेहद पोषक अनाज माने जा रहे गेहूं की खेती के लिये प्रोत्साहित कर रहा है। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने रविवार को बताया कि जिले में काले गेहूं की पैदावार काफी बढ़ी है। इस बार जिले में 200 से अधिक किसानों ने 250 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में काले गेहूं का उत्पादन किया है। स्थानीय स्तर पर इसे छह हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदा जा रहा है जबकि बड़े शहरों में इसकी कीमत 10 से 12 हजार रुपये तक मिल रही है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि किसानों को स्थानीय स्तर भी उनकी उपज का भरपूर लाभ मिले। तिलहर के राजापुर गांव के किसान प्रेम शंकर गंगवार ने बताया कि उन्होंने इस बार परीक्षण के तौर पर एक एकड़ क्षेत्र में काले गेहूं की पैदावार की है। उन्होंने काले गेहूं से संबंधित एक प्रसंस्करण इकाई भी लगाई है जिसमें मैदे की जगह काले गेहूं के आटे से बिस्कुट बनाये जा रहे हैं। मैदे का बेहतरीन विकल्प होने की वजह से लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं। गंगवार ने बताया कि काले गेहूं में कुदरती एंटी ऑक्सिडेंट और एंटीबायोटिक गुण हैं जो मधुमेह, दिल की बीमारी, कैंसर, मानसिक तनाव, घुटनों के दर्द और एनीमिया जैसे रोगों के निदान में काफी कारगर है। काले गेहूं का आटा छिलकेयुक्त चने के सत्तू की तरह दिखता है और इसका स्वाद साधारण गेहूं की अपेक्षा अलग होता है। मगर यह काफी पौष्टिक है। इसकी फसल साधारण गेहूं की तरह ही होती है मगर पकने पर इसकी बालियां काली हो जाती हैं। मुख्य विकास अधिकारी श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि जिले के हर गांव में किसानों को काले गेहूं की खेती के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्हें बीज उपलब्ध कराने के अलावा कृषि विभाग की एक टीम बनाई है जो कृषकों को इस खास जिंस के उत्पादन के लिये प्रशिक्षित भी कर रही है तथा समय-समय पर काले गेहूं की फसल का निरीक्षण करने के अलावा कृषकों को फसल के रखरखाव के लिए आवश्यक दिशानिर्देश भी यही टीम दे रही है। कृषि क्षेत्र में कार्यरत एक संस्था के संचालक राकेश पांडे ने बताया कि वह 2020 से ही शाहजहांपुर के किसानों को काले गेहूं की फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और इसमें प्रशासन भी सहयोग कर रहा है। इसी का नतीजा है कि आज जिले की कलान, तिलहर तथा पुवायां तहसीलों में एक बड़े क्षेत्रफल में किसान काले गेहूं की फसल उगा रहे हैं। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा कृषि मित्रों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों के जरिये किसानों को लगातार काले गेहूं की पैदावार की तकनीक और इसकी बिक्री से होने वाले वित्तीय लाभ की जानकारी दी जा रही है। हालांकि, राकेश पांडे का कहना है कि जिले में काले गेहूं की मुनाफेभरी बिक्री की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है, इसलिए वह खुद किसानों का गेहूं खरीद कर बाहर भेज रहे हैं। अगर यहां पर प्रसंस्करण इकाइयां लग जाएं या फिर बाजार की व्यवस्था हो जाए तो किसानों की आय दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी। ददरौल क्षेत्र के हसनपुर गांव के किसान अवधेश वर्मा ने भी स्थानीय स्तर पर काले गेहूं का बाजार नहीं होने पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा, ''इस बार हमने 10 बीघा क्षेत्रफल में काले गेहूं की पैदावार की है, मगर यहां बाजार की समस्या होने के कारण हमारा गेहूं बहुत ही कम मूल्य में ही बिक रहा है, जबकि यही गेहूं ऑनलाइन 80 से 100 रुपये प्रति किलो बिकता है। जिलाधिकारी ने इस समस्या के बारे में पूछने पर बताया, ''हम प्रयास कर रहे हैं कि यहां काले गेहूं से संबंधित प्रसंस्करण की इकाई भी लगाई जाए जिसके लिए "उद्योग बंधु" की बैठक में इसे रखेंगे अगर यह इकाई यहां लग जाती है तो किसानों को उनकी उपज का भरपूर लाभ मिल सकेगा।
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नयी दिल्ली. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मई में अबतक भारतीय शेयर बाजारों में 37,316 करोड़ रुपये डाले हैं। मजबूत वृहद आर्थिक बुनियाद और शेयरों के उचित मूल्यांकन की वजह से भारतीय बाजारों के प्रति एफपीआई का आकर्षण बढ़ा है। यह पिछले छह माह में एफपीआई द्वारा शेयरों में किया गया सबसे अधिक निवेश है। इससे पहले उन्होंने नवंबर, 2022 में शेयरों में शुद्ध रूप से 36,239 करोड़ रुपये निवेश किया था। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘आगे चलकर अमेरिका की ऋण सीमा पर प्रस्ताव और घरेलू मोर्चे पर वृहद आर्थिक आंकड़े बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो सकते हैं, जिससे विदेशी निवेशकों का प्रवाह बढ़ सकता है। एसएएस ऑनलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) श्रेय जैन ने कहा कि एफपीआई प्रवाह के लिए परिदृश्य में काफी सुधार हुआ है। इसकी वजह अमेरिका में मात्रात्मक कड़े चक्र का पूरा होना और वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार का बेहतर प्रदर्शन है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने दो से 26 मई के दौरान भारतीय शेयरों में शुद्ध रूप से 37,317 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले उन्होंने अप्रैल में शेयरों में 11,630 करोड़ रुपये और मार्च में 7,936 करोड़ रुपये डाले थे। मार्च के निवेश में मुख्य योगदान अमेरिका के जीक्यूजी पार्टनर्स का रहा था, जिसने अडाणी समूह की कंपनियों में निवेश किया था। अगर जीक्यूजी के निवेश को हटा दिया जाए, तो मार्च का आंकड़ा भी नकारात्मक हो जाएगा। इसके अलावा इस साल के पहले दो माह में एफपीआई ने शेयरों से 34,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। शेयरों के अलावा एफपीआई ने मई में अबतक ऋण या बॉन्ड बाजार में 1,432 करोड़ रुपये डाले हैं। इस ताजा प्रवाह के साथ 2023 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयरों में शुद्ध रूप से 22,737 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं।
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नयी दिल्ली. कम से कम 400 औषधीय पौधे ऐसे हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मददगार हो सकते हैं, लेकिन इनमें से अब तक केवल 21 पर ही गहन शोध किया गया है। शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने ‘ट्रीटमेंट इन नेचर्स लैप: यूज ऑफ हर्बल प्रोडक्ट्स इन मैनेजेमेंट ऑफ हाइपरग्लाइसीमिया' शीर्षक वाले इस अध्ययन में यह भी कहा कि (मधुमेह से निपटने संबंधी) "कई एलोपैथिक दवाओं की पृष्ठभूमि जड़ी-बूटियों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों के साक्ष्य-आधारित परीक्षणों से मधुमेह से आधुनिक तरीके से निपटने के लिए नयी दवाएं तैयार की जा सकती हैं।” जवाहरलाल स्नातकोत्तर स्वास्थ्य शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान-पुडुचेरी और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-कल्याणी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन हाल में ‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ डायबिटीज' में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में कहा गया है, "प्रकृति में कम से कम 400 औषधीय पौधे मौजूद हैं जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में प्रभावी हो सकते हैं। ये पौधे टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है।
अध्ययन के अनुसार, अब तक, केवल 21 औषधीय पौधों का अध्ययन किया गया है, जिनमें विजयसार, जामुन, जीरा, दारुहरिद्रा, छोटी लौकी, बेल, मेथी, नीम, आंवला और हल्दी शामिल हैं। ये मधुमेह की समस्या से निपटने में मददगार पाए गए हैं।'' शोधकर्ताओं ने 'पबमेड' पर उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद कहा कि ये औषधीय पौधे मधुमेह के प्रबंधन के लिए कई दवाओं का आधार रहे हैं। उन्होंने वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा तैयार किए गए बीजीआर-34 जैसे हर्बल फार्मूलों का भी हवाला दिया। एमिल फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विपणन की जा रही बीजीआर-34 में चार औषधीय जड़ी-बूटियों दारुहरिद्रा, गुडमार, मेथी और विजयसार से प्राप्त कई सक्रिय यौगिक शामिल हैं। एमिल फार्मास्युटिकल्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने कहा, " इनके अलावा प्रतिरोधक क्षमता व एंटी-ऑक्सीडेंट स्तर को बढ़ाने के लिए इसमें गिलोय और मजीठ जैसे पादप भी मिलाए गए हैं।
शोधकर्ताओं के विचारों को प्रतिध्वनित करते हुए उन्होंने कहा “प्रकृति में अनेकों तरह की गुणकारी औषधियां मौजूद हैं। इसकी जानकारी चिकित्सा और आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में भी उपलब्ध है।'' शर्मा ने कहा, "चूंकि भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या खतरनाक दर से बढ़ रही है, इसलिए अन्य हर्बल पौधों पर शोध चिकित्सा क्षेत्र को एक नया दृष्टिकोण दे सकता है।" पिछले साल नयी दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने एक अध्ययन में आयुर्वेदिक दवा ‘बीजीआर-34' को मधुमेह रोगियों के लिए न सिर्फ असरदार पाया बल्कि इसके सेवन से रोगियों के उपापचय (मेटाबॉलिज्म) तंत्र में भी सुधार देखा। नवीनतम अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया है कि मधुमेह विरोधी गुण दर्शाने वाले अनार, शिलाजीत, बीन, चाय, जिन्कगो बिलोबा और केसर जैसे आठ पौधों पर आंशिक शोध किया गया है और इन पर अधिक परीक्षणों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिलचस्प बात यह है कि कई एलोपैथिक दवाओं की पृष्ठभूमि हर्बल होती है और शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में इसका उल्लेख करते हुए मधुमेह प्रबंधन के लिए मेटफोर्मिन जैसी एलोपैथिक दवाओं के उदाहरणों का हवाला दिया, जो गलेगा आफिसिनैलिस पौधे से प्राप्त की जाती है। अध्ययन में कहा गया है कि इसी तरह मधुमेह के उपचार में प्रभावी दवा एसजीएलटी2 (सोडियम-ग्लूकोज कोट्रांसपोर्टर -2) सेब के पेड़ की छाल से फ्लोरिजिन की प्राप्ति के बाद तैयार की गयी।
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नयी दिल्ली. भारत स्टार्टअप चलाने वाले अपने युवाओं के बल पर दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बनेगा। आतिथ्य और यात्रा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी ओयो के संस्थापक एवं समूह सीईओ रितेश अग्रवाल ने शनिवार को यह बात कही। उन्होंने मोदी सरकार के नौ साल पूरा होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत स्टार्टअप का केंद्र बन गया है, जिसने ओला राइड शेयरिंग, ओयो रूम्स और पेटीएम जैसी नई उम्र की सेवाएं बनाई हैं। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं के बिना आज कोई नहीं रह सकता है, जबकि मोदी सरकार के नौ साल से पहले इनका अस्तित्व नहीं था। अग्रवाल ने कहा, ''मेरी राय में, भारत दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बनेगा और निश्चित रूप से भारत को स्टार्टअप चलाने वाले युवा आगे बढ़ाएंगे।'' उन्होंने कहा कि ओयो की शुरुआत भी 2014 में शुरू हुई थी और कंपनी ने एक ऐसा परिवेश देखा है, जहां भारत केवल आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इन नौ वर्षों में भारत की स्टार्टअप क्रांति ने करीब 300 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार पूंजीकरण तैयार किया है। बायोकॉन की कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने कार्यक्रम में वीडियो संदेश के जरिए कहा कि उन्होंने पिछले नौ वर्षों में कई परिवर्तनकारी पहल हुईं, जिसने समाज के सभी वर्गों को प्रभावित किया।












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