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- महासमुंद / भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा ई-श्रम पोर्टल में पंजीकृत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए दुर्घटना के कारण मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में एक्सग्रेशिया भुगतान योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत पात्र श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।श्रम पदाधिकारी श्री डी.एन. पात्र ने बताया कि इस योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को वृद्धि करते हुए अब 30 जून 2025 तक कर दिया गया है। इसके तहत दुर्घटना से मृत्यु होने पर एवं पूर्ण दिव्यांगता (दोनों आंख, दोनों हाथ या दोनों पैर की अक्षमता) की स्थिति में 2 लाख रुपए सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जिन पंजीकृत श्रमिकों की दुर्घटना से मृत्यु/दिव्यांगता की घटना 31 मार्च 2022 के पूर्व हुई हो वही एक्सग्रेशिया भुगतान के तहत पात्र होंगे। साथ ही श्रमिक ईपीएफओ/ईएसआईसी के सक्रिय सदस्य नहीं होना चाहिए एवं आयकर दाता न हो।आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज मृत्यु की स्थिति में आधार नंबर, यूएएन नंबर (यदि उपलब्ध हो), मृत्यु प्रमाण पत्र, मृत्यु का कारण संबंधित मेडिकल प्रमाण पत्र, एफआईआर की प्रति (यदि लागू हो) व पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा दिव्यांगता की स्थिति में आधार नंबर, यूएएन नंबर (यदि उपलब्ध हो), अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट, दिव्यांगता प्रमाण पत्र एवं स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र शामिल है। पात्र हितग्राही उक्त समस्त दस्तावेजों के साथ कार्यालय श्रम पदाधिकारी, जिला महासमुंद में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए श्रम विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
- बिलासपुर/कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आगामी बरसात को देखते हुए बाढ़ राहत के लिए की जा रही प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आपदाएं किसी को पूर्व सूचना देकर नहीं आती, अचानक रूप से कहीं पर भी प्रकट हो सकती हैं। इसलिए हमें हर समय हर तरह की आपदा से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए। उन्होंने बाढ़ की स्थिति में प्रभावित लोगों को ठहराने के लिए राहत शिविर, सामुदायिक रसोई, नावों की व्यवस्था एवं स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी लेकर हमेशा तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए जिला स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष एवं दूरभाष नम्बर 07752-251000 को सक्रिय रखने को कहा है।कलेक्टर ने कहा कि हमेशा की तरह बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर लिया जाये। इन इलाकों में लोगों को ठहराने के लिए राहत शिविर एवं सामुदायिक रसोई के लिए स्थल का भी चयन कर लिया जाये। सरकारी और निजी स्तर पर नावों की उपलब्धता का आकलन कर लिया जाये। नाविकों को लाईफ जैकेट भी उपलब्ध कराया जाये। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए मोबाईल चिकित्सा यूनिट एवं चिकित्सा दलों का गठन अभी से कर लिया जाये। आपदा प्रबंधन के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं होम गार्डस की टीमों को तैनात किया जायेगा। उन्हें अच्छी तरह से और अधिक प्रशिक्षित किया जाये उनकी मॉक ड्रिल भी समय-समय पर आयोजित होते रहना चाहिए ताकि वे तैयार एवं अपडेट रहें और लोगों में बचाव के प्रति जागरूकता भी आए। उन्होंने जल संसाधन विभाग को बांधों और नदियों में जल स्तर की सतत् निगरानी करते हुए लोगों को इसकी जानकारी देते रहने के निर्देश दिए हैं। जिला कार्यालय में बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर रजनी भगत मोबाईल नम्बर 9174755256 को बनाया गया है। बैठक में में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, डोगरा रेजिमेन्ट के कैप्टन गजराज, जिला कमाण्डेन्ट दीपांकुर नाथ, जल संसाधन विभाग खारंग के ईई मधु चन्द्रा, जल संसाधन संभाग कोटा के ईई डी जायसवाल, अधीक्षक भू-अभिलेख खिलेन्द्र यादव उपस्थित थे।
- युक्तियुक्तकरण से जिले के 20 शिक्षक विहीन स्कूलों को मिले शिक्षकजिले के एकल शिक्षकीय 123 स्कूलों में भी शिक्षकों की हुई पूर्तिबालोद/ छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराया है। जिससे बालोद जिले में भी शिक्षकों की कमी से जुझ रहे स्कूलों में बेहतर शिक्षा हेतु एक नई उम्मीद जगी है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी और संसाधनों के असमान वितरण की समस्या को दूर करना है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बालोद जिल के 20 स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने से वहां के बच्चे शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। साथ ही उनके पालक अपने बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने के लिए चिंतित थे। लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया लाई गई। इसके तहत जिले के अतिशेष शिक्षकों को शिक्षक विहीन एवं एकल शिक्षकीय स्कूलों में पदस्थापना की गई। जिले में सफलतापूर्वक युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पूर्ण होने से जिले के सभी 20 गांव के शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षकों की पूर्ति हो गई है। शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षक मिलने से अब वहाॅ के बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं होना पड़ेगा। साथ ही उन्हें अब अपने गांव में ही उचित शिक्षा मिल पाएगी। वर्षों पुरानी शिक्षकों की कमी की समस्या से निजात मिलने से ग्रामीणों ने भी खुशी जताते हुए सरकार के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर संतुष्टि जताई है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले में कुल 123 एकल शिक्षककीय शाला थे। वर्षों से इन शालाओं में शिक्षकों की मांग की पूर्ति नहीं हो पा रही थी। परंतु युक्तियुक्तकरण के तहत अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग के माध्यम से इन शालाओं में पूर्ति संभव हो पाई। इन विकासखंडो में अब कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं रह गया है। एकमात्र शिक्षक के भरोसे स्कूल चलाना न केवल बच्चों के भविष्य के लिए हानिकारक था, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा था। लेकिन अब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में युक्तियुक्तकरण की पहल ने इन स्कूलों में बेहतर शिक्षा हेतु एक नई उम्मीद की किरण जगाई है। नए शिक्षकों की पदस्थापना से न केवल स्कूल में पढ़ाई के स्तर में सुधार होगा, बल्कि इससे स्कूली विद्यार्थियों, पालकों, ग्रामीणों और स्कूल समिति के सदस्यों में भी खुशी की लहर दौड़ गई है।
- मानसून के पूर्व नालों को कब्जा मुक्त करवाकर सफाई करवाने, नालों का सीमांकन करवाने दिए आवश्यक निर्देशरायपुर/ रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू ने रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप, रायपुर ग्रामीण विधायक प्रतिनिधि श्री मैकमिलन साहू, जोन 9 जोन अध्यक्ष श्री गोपेश कुमार साहू, एमआईसी सदस्य श्री खेम कुमार सेन, वार्ड पार्षद श्रीमती सावित्री धीवर, श्री देवदत्त द्विवेदी, श्री मोहन कुमार साहू, जोन 9 जोन कमिश्नर श्री संतोष पाण्डेय, कार्यपालन अभियंता श्री पद्माकर श्रीवास सहित अन्य सम्बंधित जोन अधिकारियों की उपस्थिति में रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रायपुर नगर निगम जोन क्रमांक 9 के अंतर्गत आने वाले कुशाभाऊ ठाकरे वार्ड नम्बर 7, पण्डित मोतीलाल नेहरू वार्ड नम्बर 8,डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर वार्ड नम्बर 11 के क्षेत्र में विभिन्न नालों का निरीक्षण किया. रायपुर ग्रामीण विधायक और आयुक्त ने जोन 9 क्षेत्र के अंतर्गत दलदल सिवनी और अन्य स्थानों पर नालों का निरीक्षण कर स्थल समीक्षा कर आवश्यक निर्देश दिए. रायपुर ग्रामीण विधायक ने अधिकारियों को रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के तहत रायपुर नगर निगम जोन 9 के अंतर्गत वार्डों के नालों का शीघ्र सीमांकन पटवारी से करवाने और सभी नालों को कब्जोँ से मुक्त करवाने अभियान चलाने के आवश्यक निर्देश दिए. ग्रामीण विधायक और आयुक्त ने सम्बंधित जोन अधिकारियों को मानसून के पूर्व नालों को कब्जोँ से मुक्त करवाकर अच्छी तरह सुव्यवस्थित सफाई करवाने के निर्देश दिए हैँ, ताकि मानसून में तेज बारिश के दौरान जलभराव की समस्या ना आये. ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू ने जोन 9 के क्षेत्र में रायपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में गन्दे पानी की सुगम निकासी करवाने व्यवहारिक आवश्यकता के अनुरूप नालों में सुधार और मरम्मत कार्य शीघ्र करवाने और नए नालों का निर्माण करवाए जाने आवश्यक सक्षम स्वीकृति शीघ्र लेने सर्वे करवाकर प्रस्ताव देने के निर्देश दिए हैँ.
- -व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जन जागरूकता से बाल श्रम रोकने किए जाएंगे उपाय-14 वर्ष से कम बच्चे पूर्णतः बाल श्रमिक की श्रेणी में-बाल श्रम पाए जाने पर 1098 पर कर सकते है शिकायत दर्जमहासमुंद / अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आज कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर संबंधित विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग, पुलिस प्रशासन सहित बाल श्रम न्यायालय, जिला बाल संरक्षण इकाई, चेम्बर ऑफ कॉमर्स, व्यवसायी संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।कलेक्टर श्री लंगेह ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में किसी भी प्रकार से बाल श्रम की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन शिक्षा, सुरक्षा और संरक्षण में बीते, यह हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संयुक्त जांच दल द्वारा होटल, ढाबा, निर्माण स्थलों, दुकानों एवं अन्य संभावित स्थलों पर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विकासखंडों में बाल श्रम विरोधी रैली, पोस्टर प्रदर्शन, रैली एवं स्कूलों में विशेष सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाल संरक्षण समिति की बैठक हर माह आयोजित कर समीक्षा करने कहा है।कलेक्टर ने कहा कि लंबे समय से स्कूलों में अनुपस्थित बच्चों को स्कूलों में पुनः प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही उनके परिवारों को शासन की योजनाओं से जोड़ा जाएगा। जिले में 15 जून से 30 जून तक जिला स्तरीय बाल श्रम विरोधी अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर ने बाल श्रम की रोकथाम के लिए बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13, 14 तथा सहपठित धारा 15 के तहत कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।श्रम पदाधिकारी श्री डी.एन. पात्र ने बताया कि जिले में टास्क फोर्स के माध्यम से वर्ष 2024 में कुल 92 संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जिसमें श्रम विभाग द्वारा कुल 14 संस्थानों के विरूद्ध माननीय श्रम न्यायालय में अभियोजन दायर किया गया। माननीय श्रम न्यायालय द्वारा कुल 09 संस्थानों के विरूद्ध राशि 5000 रुपए की दर से कुल राशि 45 हजार रुपए अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। शेष 05 संस्थानों का प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन है। इसी तरह वर्ष 2025 (09 जून 2025 की स्थिति में) में कुल 52 संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जिसमें श्रम विभाग द्वारा कुल 20 संस्थानों के विरूद्ध सूचना प्रदर्शन बोर्ड चस्पा नहीं होने के कारण धारा-12 अंतर्गत नोटिस जारी किया गया है। जिसमें से कुल 12 संस्थानों के विरूद्ध माननीय श्रम न्यायालय में अभियोजन दायर किया गया। उक्त कुल 12 संस्थानों का प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।उन्होंने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बालकों का नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। 14 वर्ष से कम आयु के बालकों से खतरनाक नियोजन को छोड़कर शिक्षा अवधि उपरांत पारिवारिक व्यवसाय में सुरक्षा प्रबंध के साथ कार्य लिया जा सकता है। इसी तरह 14 से 18 वर्ष आयु के किशोरी का खतरनाक व्यवसाय/प्रक्रियाओं (अधिसूचित-107 नियोजनों में) नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। मुख्य प्रतिबंधित क्षेत्र कारखाना, होटल एवं ढाबा, घरेलू कामगार, ईंट-भट्टा एवं खपरेल निर्माण कार्य, पत्थर खदान, ऑटो मोचाईल वर्कशॉप एवं गैरेज, बीड़ी उद्योग इत्यादि है।बालक एवं किशोर श्रम नियोजन में दण्ड बाल श्रम का नियोजन करने वाले नियोजक को अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत 06 माह से 02 वर्ष तक का कारावास या राशि रूपये 20 हजार से 50 हजार तक जुर्माना अथवा दोनों से दण्डनीय होगा। बालक एवं किशोर श्रम की शिकायत के संबंध में टोल फ्री हेल्पलाईन 1800-2332-197 एवं 1098 में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- -दो सितारा "अति उत्तम" मान्यता, प्रशिक्षण गुणवत्ता को मिली राष्ट्रीय पहचानभिलाई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी), भिलाई, छत्तीसगढ़ – जो कि CISF का पहला और सबसे पुराना प्रशिक्षण संस्थान है – ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए "नेशनल स्टैंडर्ड्स फॉर सिविल सर्विसेज ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन्स" के तहत "अति उत्तम" स्तर की दो सितारा मान्यता प्राप्त की है। यह मान्यता क्षमता वर्धन आयोग (कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन CBC) द्वारा किए गए कठोर ऑन-साइट मूल्यांकन के उपरांत प्रदान की गई।यह मूल्यांकन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त अपर महानिदेशक श्री वेंकटेश्वर राव के नेतृत्व में आयोग की विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया। गया। मूल्यांकन प्रक्रिया में संस्थान की संरचित शासन व्यवस्था, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, फैकल्टी विकास, प्रशिक्षु सहायता, डिजिटलीकरण एवं प्रशासनिक दक्षता सहित नेशनल स्टैंडर्ड्स फॉर सिविल सर्विसेज ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन्स के आठ आधार स्तंभों पर क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भिलाई के प्रदर्शन की गहन समीक्षा की गई।क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भिलाई को कुल 64.4 अंकों के साथ “अति उत्तम” श्रेणी और दो सितारा ग्रेडिंग प्राप्त हुई, जो सीआईएसफ के प्रशिक्षण संस्थानों में इस केंद्र की उत्कृष्टता और प्रभावशीलता को दर्शाती है। संस्थान को विशेष रूप से आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, स्मार्ट कक्षाओं, सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण, सामरिक अभ्यास सुविधाओं, डिजिटल लर्निंग और डेटा-संचालित मूल्यांकन प्रणालियों के लिए सराहा गया।सीआईएसफ का यह ऐतिहासिक केंद्र आज भी उन्नत तकनीकों, अनुशासन और व्यावसायिक मानकों के अनुरूप कार्य करते हुए सुरक्षा बलों को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह मान्यता क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र भिलाई की टीम की प्रतिबद्धता, नेतृत्व, और पेशेवर उत्कृष्टता का परिचायक है, जो भारत की आंतरिक सुरक्षा संरचना को मजबूती प्रदान करने में निरंतर योगदान दे रहा है।
- रायपुर - नगर पालिक निगम रायपुर के महाराजा अग्रसेन चौक श्रीगणेश मन्दिर के समीप मंगलम भवन परिसर स्थित नगर निगम जोन 7 कार्यालय का राजस्व, स्वास्थ्य, जल, विद्युत, चॉइस हेल्प सेंटर, आवक - जावक शाखा, जोन 7 अध्यक्ष कार्यालय आवक - जावक शाखा की व्यवस्था नगर निगम जोन 7 कार्यालय परिसर के भूतल पर नागरिकों हेतु उपलब्ध है. निगम जोन 7 कार्यालय परिसर की लिफ्ट को तत्काल आवश्यक मरम्मत कर प्रारम्भ किया गया. उक्त जानकारी रायपुर नगर निगम के जोन 7 जोन कमिश्नर श्री राकेश शर्मा और कार्यपालन अभियंता श्री ईश्वर लाल टावरे ने दी है.
- -महापौर मीनल चौबे, सभापति सूर्यकान्त राठौड़, आयुक्त विश्वदीप सहित किया पैदल भ्रमणरायपुर- आज प्रदेश के पूर्व केबिनेट मन्त्री रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत ने राजधानी शहर रायपुर के जीई मार्ग में वन्दना ऑटो से एनआईटी मार्ग में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का प्रत्यक्ष निरीक्षण पैदल भ्रमण करते हुए शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, सभापति श्री सूर्यकान्त राठौड़, आयुक्त श्री विश्वदीप, लोक कर्म विभाग अध्यक्ष श्री दीपक जायसवाल, जोन 7 जोन अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वकर्मा, पार्षद श्री आनंद अग्रवाल, अपर आयुक्त एवं रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीओओ श्री यू. एस. अग्रवाल, निगम अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय, मुख्य अभियंता श्री यू. के. धलेन्द्र, अधीक्षण अभियंता श्री राजेश राठौर,जोन 5 कमिश्नर श्री खीरसागर नायक, जोन 7 कमिश्नर श्री राकेश शर्मा, कार्यपालन अभियंता श्री अतुल चोपड़ा, श्री अंशुल शर्मा जूनियर, श्री ईश्वर लाल टावरे, नगर निगम और रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अन्य सम्बंधित अधिकारियों की उपस्थिति में दिए हैँ.इस मार्ग में डिवाइडर बन चुका है,किंतु उस पर जाली तथा पोल लगाने का कार्य अभी अधूरा है. इसी प्रकार सेंट्रल लाइब्रेरी के सामने का कार्य भी अपूर्ण है.निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि विकास कार्य जिस गति से होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहे हैँ.इसके अतिरिक्त प्रदेश के पूर्व केबिनेट मन्त्री रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत ने अनुपम उद्यान ( महावीर पार्क) की साइड रोड पर भी दुकानों को उचित रूप से व्यवस्थित करने के निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को दिए हैँ.पूर्व केबिनेट मन्त्री रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत ने अंतर्राष्ट्रीय स्वीमिंग पुल का निरीक्षण करने के दौरान वहां पर की साफ - सफाई व्यवस्था को लेकर गहन असंतोष व्यक्त किया.रायपुर पश्चिम विधायक ने सम्बंधित अधिकारियों को कहा कि वे नियमित तौर पर निरीक्षण किया करें, ताकि परिसर एकदम साफ- सुथरा रहे. उन्होंने यहां स्थित कला केंद्र भी देखा और इसके परिसर को भी व्यवस्थित रखने कहा.इसके पश्चात पूर्व केबिनेट मन्त्री रायपुर पश्चिम विधायक श्री राजेश मूणत वर्तमान चौपाटी तथा जहां यह चौपाटी शिप्ट होनी है उसे भी देखने गए और इस हेतु आवश्यक निर्देश सम्बंधित अधिकारियों को स्थल पर दिए.
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण से सम्मानित अधिवक्ता विवेक सारस्वत की नवीनतम पुस्तक "जीएसटी लॉ मैनुअल 2025" का विमोचन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अधिवक्ता विवेक सारस्वत की यह पुस्तक जीएसटी कानून की अद्यतन जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है और यह मैनुअल कर पेशेवरों और व्यापारियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होगा। इस अवसर पर अधिवक्ता बीना सिंह गौतम, अभय तिवारी, प्रिंसी धावना, वंदना सारस्वत और प्रियांश वर्मा उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि यह मैनुअल भारत के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानूनों का एक अद्यतन और व्यापक संस्करण है, जिसमें सीजीएसटी, आईजीएसटी, यूटीजीएसटी और मुआवजा उपकर के अंतर्गत सभी अधिनियमों, नियमों, अनुसूचियों, अधिसूचनाओं और परिपत्रों का सुव्यवस्थित संकलन किया गया है।"जीएसटी लॉ मैनुअल 2025" की एक विशेषता इसका द्विभाषी (अंग्रेजी और हिंदी) प्रारूप है, जो देशभर के कर पेशेवरों, व्यापारियों और छात्रों के लिए सरल और स्पष्ट पहुंच सुनिश्चित करता है। इस पुस्तक में वित्त अधिनियम 2025 द्वारा किए गए नवीनतम संशोधनों को भी समाहित किया गया है, जिससे यह मैनुअल जीएसटी कानून का सबसे अद्यतन संस्करण बन गया है। किताब में डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक जीएसटी फॉर्मों की डिजिटल प्रतियों तक क्यूआर कोड के माध्यम से सीधी पहुँच की सुविधा भी प्रदान की गई है। यह विशेषता अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाती है और प्रशासनिक कार्यों को सरल करती है। कर पेशेवरों, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स, कंपनी सचिवों, लागत लेखाकारों, सरकारी अधिकारियों, व्यापारियों, छात्रों और शिक्षाविदों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर लिखी गई यह पुस्तक जीएसटी की जटिलताओं को समझने और लागू करने के लिए एक अनमोल संसाधन है। इसकी व्यापक सामग्री, द्विभाषी प्रस्तुति और डिजिटल उपकरण इसे भारत की वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था की प्रभावी व्याख्या, कार्यान्वयन और गहन समझ के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बनाते हैं।अधिवक्ता विवेक सारस्वत को जीएसटी और वैट कानूनों में विशेषज्ञता प्राप्त है। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2022 में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण के अंतर्गत कानून क्षेत्र का सर्वोच्च राज्य पुरस्कार "बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल पुरस्कार 2022" प्रदान किया गया था। उन्होंने जीएसटी और वैट कानूनों पर कई सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन किया है। वे www.cggst.com और www.cgvatlaw.com जैसी सफल वेबसाइटों के निर्माता हैं, और देश का पहला अप्रत्यक्ष कर कानून ऐप CGVATLAW भी विकसित कर चुके हैं। अप्रत्यक्ष कराधान के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले अधिवक्ता विवेक सारस्वत की यह छठी पुस्तक है, जो कराधान साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित करती है।
- रायपुर / गरियाबंद जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में अब शिक्षा की नई रोशनी फैल रही है। वर्षों से जिन गांवों में शिक्षक नहीं थे, वहां अब नियमित शिक्षकों की नियुक्ति हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के अंतर्गत जिले के 16 शिक्षक विहीन स्कूलों में अब शिक्षक पदस्थ हो गए हैं।यह जिले के मैनपुर, देवभोग, छुरा और गरियाबंद ब्लॉकों के मौहानाला, भीमाटीकरा, धुमरापदर, भरूवामुड़ा जैसे दूरस्थ गांवों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के लिए बड़ी राहत है। पहले इन स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते थे और पालक चिंतित रहते थे।जिले में अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग कर उन्हें उन स्कूलों में भेजा गया है, जहां एक भी शिक्षक नहीं था या केवल एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा था। अब जिले की प्राथमिक शाला अकलवारा, डोंगरीपाली कांदागढ़ी, मौहानाला, भीमाटीकरा, बोईरगांव, टीमनपुर, धमना, कुकरार, रावनसिंघी, अमलोर, पीपलाकन्हार, भरूवामुड़ा, नगबेल, ओड़ आदि सभी स्कूलों में शिक्षक तैनात हैं। देवभोग ब्लॉक में पहले ऐसे 6 हाई स्कूल थे जहां केवल एक शिक्षक था। अब इन स्कूलों में भी शिक्षकों की पूर्ण नियुक्ति कर दी गई है, जिससे सभी विषयों की पढ़ाई सही ढंग से हो पाएगी।मैनपुर और देवभोग जैसे आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षक लंबे समय से नहीं जाना चाहते थे, जिससे शिक्षा व्यवस्था कमजोर थी। लेकिन अब युक्तियुक्तकरण के जरिए कुल्हाड़ीघाट, नकबेल, गोबरा, सहेबीनकछार जैसे गांवों में भी शिक्षक भेजे गए हैं। युक्तियुक्तकरण से पहले जिले में 167 स्कूल ऐसे थे जहां केवल एक शिक्षक पदस्थ था। अब इन स्कूलों में भी अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था की गई है।कलेक्टर श्री बी.एस. उईके के निर्देशन में इस प्रक्रिया को शासन के तय समय-सीमा में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। शिक्षक मिलने से गांवों में शिक्षा का माहौल बना है और ग्रामीणों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि अब उनके बच्चों को गांव में ही अच्छी शिक्षा मिलेगी और उन्हें दूर नहीं जाना पड़ेगा।युक्तियुक्तकरण से गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और अब कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है। यह पहल बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- -प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना-सोलर पैनल लगाने के बाद बिजली बिल शून्य, अतिरिक्त बिजली ग्रिड को भेज रहे-योजना से घटा उपभोक्ताओं का खर्च, सौर संयंत्र पर मिल रही सब्सिडीरायपुर।, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम जनजीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना के अंतर्गत लोग अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्राप्त कर रहे हैं। योजना के तहत उपभोक्ताओं को कम ब्याज दर पर ऋण के साथ-साथ 30 हजार से 78 हजार रुपये तक की अनुदान राशि भी दी जा रही है।जांजगीर जिले के चांपा नगर निवासी श्री अमरजीत सिंह सलूजा इस योजना से लाभान्वित होने वालों में एक हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है, जिस पर उन्हें शासन की ओर से 78 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। श्री सलूजा ने बताया कि सोलर सिस्टम लगाने से पहले उनका बिजली बिल काफी अधिक आता था, जिससे उनका घरेलू बजट प्रभावित होता था। लेकिन अब सोलर पैनल लगने के बाद उनका बिजली बिल पूरी तरह से शून्य हो गया है।उन्होंने बताया कि इस योजना से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि बिजली कटौती की समस्या से भी छुटकारा मिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को “एक पंथ दो काज” की संज्ञा देते हुए कहा कि इससे न केवल पर्यावरण को लाभ हो रहा है, बल्कि आमजन को आर्थिक राहत भी मिल रही है।श्री सलूजा ने बताया कि अब चांपा में सोलर सिस्टम को लेकर लोगों में जागरूकता और विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। वे स्वयं भी लोगों को इस योजना की जानकारी देकर प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम जनता के लिए एक दूरदर्शी और सशक्त कदम है, जो पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि दोनों में सहायक साबित हो रही है।
- -कांकेर में मेडिकल कॉलेज की समीक्षा में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवालरायपुर।, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने चिकित्सा और सामुदायिक विकास दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बैठक लेकर मंगलवार को कांकेर जिले में समीक्षा की। मंत्री श्री जायसवाल ने जिले के नांदनमारा स्थित इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित स्वशासी समिति की बैठक लेकर कॉलेज की कार्यप्रणाली, आधारभूत ढांचे और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर विस्तार से चर्चा की। मंत्री ने साफतौर पर निर्देश दिए कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों को इस रूप में विकसित किया जाए कि वे जनता की पहली पसंद बनें। उन्होंने कहा कि बाह्य रोगी विभाग व अंतःरोगी सेवाओं में संवेदनशीलता और उत्कृष्टता लाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।“जनता को केवल इलाज नहीं, बल्कि सम्मान और संवेदना भी मिले, यही हमारी चिकित्सा व्यवस्था की पहचान होनी चाहिए।स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने चिकित्सा अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि विभाग का उद्देश्य सिर्फ उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना ही नहीं है, अपितु आमजनता के प्रति संवेदनशीलता और उन्हें सम्मान भी मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया।बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया ने कॉलेज में पारदर्शिता, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, स्टाफ की नियमित नियुक्ति और उत्तरदायित्व तय करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग की आयुक्त श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी, सांसद श्री भोजराज नाग, कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम, मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष श्री भरत मटियारा, हस्तशिल्प बोर्ड अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत एवं अधिष्ठाता डॉ. खान सहित अन्य जनप्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेज के स्टॉफ उपस्थित रहे।
- -जिला मुख्यालय एवं तालुका स्तर पर विभिन्न इकाई का हुआ गठनरायगढ़ । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के तीन दशक पूरे होने से नालसा के द्वारा 'जागृति, डॉन, संवाद, साथी एवं आशा इकाई का गठन किये जाने का एवं महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडऩ से संबंधित हैंडबुक 'आवाज उठाओ एवं नि:शुल्क विधिक सहायता से संबंधित हैंडबुक का प्रकाशन किया गया है, जिसके तारतम्य में राज्य विधिक सेवा प्राधिरकण बिलासपुर के मार्गदर्शन एवं माननीय जितेन्द्र कुमार जैन, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के निर्देशानुसार जिला मुख्यालय एवं तालुका स्तर पर इकाई का गठन किया गया है।जागृति इकाई का मुख्य कार्य जमीनी स्तर पर नि:शुल्क विधिक सहायता का प्रचार-प्रसार करना एवं शासन की योजनाओं का लाभ प्रदान करना है। प्रचार-प्रसार का माध्यम नुक्कड़ नाटक, मोबाईल लीगल एड वेन पोस्टर बैनर्स, लाउडस्पीकर, लोकल न्यूज पेपर, ऑल इंडिया रेडियो, दूरदर्शन, लीगल एड क्लिनिक, ग्राम सभा, स्कूल, पब्लिक बिल्डिंग एवं अन्य डिजिटल बोर्ड के माध्यम से किया जाना है।डॉन इकाई का मुख्य कार्य जमीनी स्तर पर नशामुक्ति के संबंध में जागरूकता अभियान चलाना है तथा नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाईन नंबर 1933 एवं 14446 एवं नालसा का हेल्पलाईन नंबर 15100 का प्रचार प्रसार करना है। स्कूल कॉलेज, सड़कों पर रहने वाले बच्चे, सेक्स वर्कर, जेल, किशोर गृह, केमिस्ट, ड्रग पीडि़त व्यक्ति एवं उनके परिवारों, आम जनता के मध्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करना है।संवाद इकाई का मुख्य कार्य जनजाति समुदाय क्षेत्रों की पहचान कर उनके मध्य विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करना है। साथी इकाई का मुख्य कार्य बेसहारा बच्चों की पहचान करना उनका आधार नामांकन कराना, विधिक सहायता प्रदान कराना तथा शासन की अन्य लाभकारी योजनाओं से जोडऩा है। आशा इकाई का मुख्य कार्य बाल विवाह की समस्या से निपटने के लिये एक संस्थागत ढांचा तैयार कर, बाल विवाह की प्रथा का उन्मूलन करना, पीडि़ताओं को शासन की कल्याणकारी योजनओं का लाभ प्रदान कराते हुए समाज की मुख्यधारा से जोडऩा है।नालसा द्वारा आवाज उठाओ हैंडबुक अधिनियम का प्रकाशन किया गया है, जो कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीडऩ निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष अधिनियम, 2013 से संबंधित है। इसके अतिरिक्त नालसा ने NALSA@30- A Legacy of free legal aid नामक हैंडबुक प्रकाशित किया है, जिसमें नि:शुल्क विधिक सहायता से संबंधित मुख्य निर्णयों के बारे में जानकारी एवं फोटोग्राफ्स साझा किया गया है।
- -पक्का घर बनने से दूर हुई बारिश के दिनों की परेशानीरायपुर ।यूँ तो धूर साय की उम्र अस्सी साल है,लेकिन इनकी जिंदगी में बीते दिनों के मुसीबतों की कहानियां अनगिनत है। घने जंगल के बीच समय के साथ कई मुसीबतें आई और गई...लेकिन बारिश के दिनों में आने वाली मुसीबतों से उन्हें कभी छुटकारा नहीं मिल पाता था। जब भी बारिश का मौसम आता..धुरसाय सहित पूरा परिवार तैयारी में जुट जाता..सभी काम छोड़कर घर के खपरैलों को निकालता और सफाई कर फिर से जमाता..ठीक करता। धुरसाय अपनी ओर से तो पूरी कोशिश करता लेकिन बारिश तो बारिश ही थीं.. कब मौसम बदले और कब बरस जाएं.. कुछ कहा नहीं जा सकता था..। मौसम के बदलाव के साथ बारिश हर बार धुरसाय के खपरैल वाले कच्चे मकान के लिए मुसीबत बनकर ही बरसती थी। खपरैलों को ठीक करने के बाद भी वह बारिश के कहर से नहीं बच पाता था। एक दिन उन्हें भी मालूम हुआ कि प्रधानमंत्री आवास योजना से उनका भी पक्का मकान बन सकता है तो उन्होंने देर नहीं की। आखिरकार पात्रता के बाद धूर साय को पीएम आवास मिला तो उनके खुशी का ठिकाना न रहा,क्योंकि एक लंबे अरसे बाद उन्हें कच्चे मकान के साथ ही खपरैल पलटने से भी मुक्ति मिल गई।कोरबा जिले में पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत दूरस्थ ग्राम पतुरियाडाँड़ में रहने वाले धुरसाय ने बताया कि वह अपनी पत्नी मोती कुँवर के साथ रहता है। जंगल में रहते हुए जिंदगी कट गई। उन्होंने बताया कि जैसे तैसे उन्होंने अपना आशियाना तैयार तो कर लिया लेकिन घर पक्का नहीं होने से हर साल बारिश के साथ ही मुसीबतों का सामना करना पड़ता था। धुरसाय ने बताया कि घर की दीवारें उखड़ने के साथ ही खपरैल भी इधर-उधर हो जाते थे। इसलिए बारिश से पहले जहाँ खपरैलों को ठीक करना जरूरी होता था वहीं बारिश में छत से पानी टपकने से परेशानी होती थी। बारिश के बाद उखड़ी हुई दीवारों की छबाई करनी जरूरी होती थी। उन्हें प्रधानमंत्री आवास मिलने से इन सभी समस्याओं से मुक्ति मिल गई है। धुरसाय ने बताया कि वह खेती किसानी करता है, लेकिन अब उम्र के साथ उन्हें ऐसे ही आशियाने की जरूरत थी,जिसमे उन्हें कोई परेशानी न हो। पीएम आवास योजना से मिले पक्के मकान से मुसीबतों से भी मुक्ति मिल गई है। सरकार का धन्यवाद, जिन्होंने हम जैसे जंगल में रहने वाले गरीबों के लिए सोचा।
- -25 जून तक आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग से जारी होगा पदस्थापना आदेश-वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 में पदोन्नत हुए छात्रावास अधीक्षकों की काउंसिलिंग के माध्यम से पदस्थापना के लिए दिशा-निर्देश जारीरायपुर,। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा है कि वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 में पदोन्नत हुए छात्रावास अधीक्षकों की पदस्थापना में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को काउंसलिग के माध्यम से संपन्न कराया जाए। मंत्री श्री नेताम ने यह निर्देश मंगलवार को आदिम जाति तथा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर में 19 जिलों के सहायक आयुक्त एवं परियोजना प्रशासकों के साथ विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित 3357 छात्रावास-आश्रमों में छात्रावास अधीक्षक रीढ़ के समान है। इस पर संबंधित संस्था के सुचारू रूप से संचालन की सबसे प्रमुख जिम्मेदारी होती है। अतः इनकी नियुक्ति, सेवा शर्तें, पदोन्नति एवं पदस्थापना संबंधी कार्यों पर प्रमुखता से ध्यान देने की जरूरत है।आदिम जाति विकास मंत्री श्री नेताम ने कहा कि वर्ष 2022 में आयुक्त कार्यालय के आदेश द्वारा कुल 491 छात्रावास अधीक्षकों को श्रेणी “द ” से श्रेणी “स” के पद पर पदोन्नत किया गया है, परन्तु इनकी पदस्थापना अभी तक नहीं हो पाई, क्योंकि कुछ जिलों में स्वीकृत पद से अधिक अधीक्षक नियुक्त थे कई जगह पो.मैट्रिक संस्थाओं में रिक्त पदों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। इसके साथ ही पदस्थापना के संबंध में कई प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं।पदस्थापना नहीं होने से अधीक्षकों की सेवा शर्तों संबंधी समस्याएं आ रही थी। इसी प्रकार अप्रैल 2025 में कुल 486 छात्रावास अधीक्षकों को श्रेणी “द” से श्रेणी “स” के पद पर पदोन्नत किया गया है। अब इन सभी पदोन्नत अधीक्षकों की पदस्थापना पारदर्शी तरीके से एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत् काउंसिलिंग के माध्यम से किये जाने हेतु मंत्री श्री नेताम के निर्देश पर विभाग द्वारा निर्णय लिया गया है। इसके लिए जिला स्तरीय, संभाग स्तरीय एवं राज्य स्तरीय समिति का गठन किए जाने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर, संभाग स्तरीय समिति के अध्यक्ष संभागायुक्त एवं राज्य स्तरीय समिति के अध्यक्ष आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित विकास विभाग होंगे।जिला स्तरीय समिति को 12-13 जून से प्रक्रिया प्रारंभ कर 16 जून तक संपन्न करने के निर्देश दिए गए हैं इसी प्रकार संभाग स्तरीय समिति 17-18 जून से 19-20 जून तक एवं राज्य स्तरीय समिति को 20-21 जून से लेकर 22-23 जून तक प्रक्रिया संपन्न करने हेतु निर्देशित किया गया है। जिला स्तरीय समिति एवं संभाग स्तरीय समिति द्वारा जारी पदस्थापना प्रस्ताव को जिला मुख्यालय में कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त कार्यालय एवं संभाग मुख्यालय में संभागीय आयुक्त एवं सहायक आयुक्त संभाग मुख्यालय के कार्यालय के सूचना पटल पर प्रदर्शित करेंगे। उक्त प्रस्तावों पर किसी भी प्रकार की दावा-आपत्ति होने पर आवेदक राज्य स्तरीय समिति के समक्ष सूची प्रकाशन के 02 दिवस के भीतर अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकता है।राज्य स्तरीय समिति प्राप्त अभ्यावेदन का निराकरण 02 दिवस के भीतर कर आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर को पदस्थापना सूची जारी करने हेतु प्रतिवेदन देगी। राज्य स्तरीय समिति के द्वारा जारी अनुशंसित सूची में कोई त्रुटि या आपत्ति होने पर आवेदक विभाग के भारसाधक सचिव के समक्ष सूची जारी होने के 02 दिवस के भीतर अभ्यावेदन प्रस्तुत करेंगे, जिस पर भारसाधक सचिव द्वारा नियमानुसार अभ्यावेदन का निराकरण किया जाएगा। इस प्रकार प्रक्रिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी। प्रत्येक समिति के दायित्व एवं अन्य नियम-शर्तों का विस्तार से उल्लेख शासन द्वारा जारी आदेश में किया गया है।आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा 25 जून तक पदस्थापना आदेश भी जारी कर दिया जाएगा। काउंसलिग प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो, इसके लिए प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा स्वयं पूरी प्रकिया की सतत मानीटरिंग कर रहे हैं।
- रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण न सिर्फ जरूरतमंदों को पक्का मकान दे रही है, बल्कि उनके सपनों को भी नया ठौर और आत्म-सम्मान दे रही है। ऐसी ही एक कहानी है जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा निवासी 70 वर्षीय संतु चक्रेस की।वर्षों तक कच्चे घर में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने वाले बुजुर्ग संतु चक्रेस आज बेहद प्रसन्न हैं क्योंकि उन्हें उनका पहला पक्का घर मिल गया है। खास बात यह रही कि इस घर की चाबी उन्हें मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों से मिली, जब वे हाल ही में जशपुर प्रवास पर थे।भावुक संतु चक्रेस ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि "उम्र के इस पड़ाव में जब चिंता से मुक्त होकर जीना चाहता है, तब यह पक्का मकान मेरे लिए भगवान का आशीर्वाद है। अब मुझे और मेरे परिवार को न तो बारिश से डर है और न ही जहरीले जीव-जंतुओं से। अब हमारा भी एक सुरक्षित और मजबूत आशियाना है।"संतु चक्रेस ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान स्वीकृत हुआ था, जो अब पूर्ण रूप से बनकर तैयार है। यह महज एक मकान नहीं, बल्कि उनके लिए आत्म-सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का प्रतीक है।वर्षों तक झोपड़ी जैसे घर में जीवन बिताने के बाद जब उन्हें अपना खुद का ठोस छत मिला, तो उनके चेहरे की खुशी देखने लायक थी।
- महासमुन्द / महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम हाड़ाबंद एवं ग्राम भलेसर में आयल पॉम योजना के अंतर्गत संचालित कृषकों के प्रक्षेत्रों का निरीक्षण 10 जून को कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार द्वारा किया गया। निरीक्षण के दौरान उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालक श्री एस. जगदीशन भी उनके साथ उपस्थित थे। आयुक्त श्रीमती निगार ने ग्राम हाड़ाबंद में कृषक श्री तोषण चंद्राकर तथा ग्राम भलेसर में कृषक श्री नारायण चंद्राकर के खेतों में स्थापित आयल पॉम प्रक्षेत्रों का अवलोकन किया। उन्होंने पौधों की स्थिति, फलन की मात्रा, गुणवत्ता, उत्पादन लागत एवं विक्रय की वर्तमान स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने कृषकों से प्रत्यक्ष संवाद कर आयल पॉम की खेती से होने वाली आमदनी, विपणन से जुड़ी समस्याओं तथा उनके सुझावों पर भी चर्चा की।इस अवसर पर आयुक्त श्रीमती निगार ने जिले में संचालित अन्य उद्यानिकी गतिविधियों की जानकारी भी ली। विशेष रूप से उन्होंने ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर की उन्नत खेती, पुष्प उत्पादन क्षेत्र में गुलाब, जरबेरा एवं सेवंती जैसे फूलों की खेती के क्षेत्र में जिले के योगदान में विशेष रुचि दिखाई। उन्हें अवगत कराया गया कि इन गतिविधियों से कृषकों को वैकल्पिक आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर कृषकों की मेहनत एवं नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने की सराहना करते हुए राज्य शासन द्वारा कृषक हित में चलाई जा रही योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने हेतु निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक श्रीमती पायल साव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -डिप्टी सीएम अरुण साव पहुंचे उच्च न्यायालय, अधिवक्ता साथियों से मिल पुराने दिन किए याद-डिप्टी सीएम अरुण साव ने उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से की भेंट, पुरानी यादें हुई ताजा-महाधिवक्ता कक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता साथियों का लिया हाल चाल, नए कानून और समसामयिक विषयों पर हुई चर्चा : उप मुख्यमंत्री अरुण सावबिलासपुर। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सह विधि और विधायी कार्य मंत्री श्री अरुण साव ने आज बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय परिसर का औचक दौरा किया , उच्च न्यायालय में अपने वकालत के दिनों के पुराने अधिवक्ता साथियों से स्नेहिल मुलाकात की। श्री साव ने कहा कि, लंबे समय बाद अधिवक्ता साथियों से मिलना एक भावनात्मक क्षण रहा, जिसमें पुराने दिनों की यादें एक बार फिर ताजा हो गई।इस अवसर पर महाधिवक्ता कार्यालय कक्ष में एडिशनल एडवोकेट जनरल सहित उच्च न्यायालय के अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ विधिक विषयों और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विविध पहलुओं पर सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान सबका हाल चाल लिया, पुराने दिनों को याद कर मस्ती में दिखे उप मुख्यमंत्री.उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि, बिलासपुर उच्च न्यायालय में उप महाधिवक्ता के दायित्व का निर्वहन किया और इसके बाद राजनीति के माध्यम से आम जन का प्रत्यक्ष तौर पर सेवा करने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि, बहुत दिनों बाद उच्च न्यायालय परिसर का भ्रमण किया और वरिष्ठ अधिवक्ता साथियों से भेंट की। इस दौरान केंद्र सरकार के नए कानून एवं जनहित में उसके संवेदनशील क्रियान्वयन को लेकर उपयोगी सुझावों का आदान-प्रदान भी हुआ।
- -शिक्षकों की पदस्थापना से स्कूलों में लौटी रौनक-पालकों में उत्साह, बच्चों में नया जोशबिलासपुर /छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश भर में चलाए गए युक्तियुक्तकरण अभियान के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में क्रियान्वित इस अभियान से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है।दूरस्थ अंचलों में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय शाला होने से बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। वह अब युक्तियुक्तकरण से दूर होने जा रहा है। जिले के 5 शिक्षक विहीन और 132 एकल शिक्षकीय स्कूलों को अब शिक्षक मिल चुके हैं। इससे इन शालाओं में शैक्षणिक वातावरण बेहतर होगा। अब जिले में कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं है।राज्य शासन के दिशा निर्देश में जिले में अतिशेष शिक्षकों के काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद शिक्षक विहीन और एकल शिक्षकीय विद्यालयों को नए शिक्षक मिल चुके हैं। इससे अब न केवल इन क्षेत्रों के स्कूलों को नए शिक्षक मिले हैं बल्कि विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी सुनिश्चित हुई है। अब यहां के पालकों में नया विश्वास जगा है और वे पुनः अपने बच्चों का नामांकन स्थानीय शाला में कराने के लिए आगे आ रहे हैं।कोटा ब्लॉक के ख़पराखोल कुसुमखेड़ा, मस्तूरी ब्लॉक के सबरियाडेरा लोहरसी एवं तखतपुर के डिलवापारा आदिवासी बैगा बाहुल्य ग्राम हैं जो शिक्षक विहीन थे यहां शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। लंबे समय से शिक्षक न होने के कारण शिक्षण कार्य लगभग ठप था। गांव के लोग आशंकित थे कि कहीं उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय न हो जाए किंतु अब नियमित शिक्षकों की पदस्थापना से विद्यालय में फिर से पढ़ाई हो सकेगी। विद्यालय की शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और ग्रामवासियों ने शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।पालक कहते हैं कि अब हम निश्चिंत हैं कि हमारे बच्चे भी पढ़-लिखकर कुछ बन पाएंगे। शिक्षक की पदस्थापना, ये हमारे लिए बहुत बड़ा तोहफा है। शिक्षकों की उपस्थिति से बच्चों को अब नियमित मार्गदर्शन मिलेगा, शैक्षणिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा और समूचे अंचल में शिक्षा के प्रति जागरूकता की नई लहर दौड़ पड़ी है।
- दुर्ग, / गुरू बिन ज्ञान नहीं रे, यह कहावत वर्षों से सुनते आ रहे हैं। गुरू ही लोगों को सही ज्ञान और मार्गदर्शन देता है। बच्चों को सही दिशा व उच्च स्थान में पहुंचाने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन इसका असली अर्थ तब समझ आता है जब स्कूल में शिक्षक हों। दुर्ग जिले के प्राथमिक स्कूलों बच्चे थे, पर शिक्षक नहीं थे।शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। शिक्षक विहीन शालाओं में शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। अब बच्चों को स्कूल खुलने का इंतजार है। अब वह नए जोश और उमंग से स्कूल में आएंगे और क्यों न आए क्योकि अब उन्हें नये शिक्षक मिलने वाला है। जहां सालों से कोई शिक्षक नही था वहां अब बच्चों और शिक्षकों की आवाज गूंजेगी। हम बात कर रहे हैं शिक्षक विहीन शालाओं की दुर्ग जिले के शासकीय प्राथमिक शाला अगार में बच्चों की दर्ज संख्या 85 है जहां एक भी शिक्षक कार्यरत नही थे, परंतु काउंसिलिंग के बाद अब वहां 3 शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इसी प्रकार शासकीय प्राथमिक शाला ढौर में दर्ज संख्या 42 और शिक्षक की संख्या निरंक काउसलिंग उपरांत 2 शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला खपरी बरहा में दर्ज संख्या 25 अब 2 शिक्षक पदस्थ हैं। पहले स्कूल तो था पर गुरुजी नहीं थे। शासकीय प्राथमिक शाला अगार में 85 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन एक समय था जब वहां एक भी शिक्षक नहीं थे। बच्चे स्कूल जरूर आते थे, पर पढ़ाई नहीं हो पाती थी। लेकिन हाल ही में हुई शिक्षकों की काउंसलिंग ने गांव के स्कूल की तस्वीर बदल दी। तीनों स्कूलों में अब शिक्षक पदस्थ हो चुके हैं। आगामी सत्र से स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और कक्षाओं से आवाजें गुंजेगी। पहले बच्चे इंतजार में लगे रहते थे कि कब शिक्षक आएंगे और पढ़ाएंगे। बच्चों के इंतजार के दिन खत्म हो गए। अब बाकी स्कूलों के सामान शासकीय प्राथमिक शाला अगार, शासकीय प्राथमिक शाला ढौर एवं शासकीय प्राथमिक शाला खपरी बरहा में भी पढ़ाई होगी। शिक्षक आएंगे, कक्षाएं लगेगी और बच्चे पूरे मन से पढ़ाई में जुट जाएंगे। वहीं शासकीय प्राथमिक शाला खपरी बरहा की शाला में भी अब बदलाव देखने को मिलेगा, यहां 25 बच्चों के लिए अब दो शिक्षक मौजूद हैं, जो हाल ही में काउंसलिंग के बाद पदस्थ किए गए हैं। गांव वालों के लिए यह बदलाव सिर्फ शिक्षकों व शालाओं का युक्तियुक्तरण नही है। यह उनके बच्चों के भविष्य की बुनियाद है। यह बदलाव शिक्षक काउंसलिंग के चलते संभव हो सका, जिसके माध्यम से जरूरतमंद स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर शिक्षकों की तैनाती की गई।
- दुर्ग, / शिक्षा विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी, डौण्डी जिला बालोद श्री जयसिंह भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह निर्णय जिला स्तरीय युक्तियुक्तकरण समिति, बालोद की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिसमें युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में की गई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।जांच में सामने आईं मुख्य गड़बड़ियांश्रीमती रीता गरेवाल, शिक्षक विज्ञान टी संवर्ग, शासकीय बालक पूर्व माध्यमिक शाला डौण्डी की नियुक्ति संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग दुर्ग में हुई है, जिनका कार्यभार ग्रहण तिथि 12 जुलाई 2022 है। संबंधित कर्मचारी परिवीक्षा अवधि में है। परिवीक्षा अवधि में होने के बावजूद उक्त शिक्षिका को अतिशेष की श्रेणी में गणना किया गया है। श्री नूतन कुमार साहू शिक्षक विषय गणित पूर्व माध्यमिक शाला कुमुड़कट्टा संस्था में एक ही गणित विषय का शिक्षक कार्यरत होने के बावजूद अतिशेष की श्रेणी में गणना किया गया है। पूर्व माध्यमिक शाला साल्हे में कला विषय में श्रीमती लेखनी साहू कनिष्ठ को अतिशेष की श्रेणी में गणना किया जाना था, किन्तु उनके स्थान पर श्रीमती परमिला ठाकुर शिक्षक विषय कला को गलत ढंग से अतिशेष चिन्हांकित गया है। पूर्व माध्यमिक शाला धुरवाटोला में विषय कला में श्री भूपत कुमार धनेन्द्र को अतिशेष की श्रेणी में गणना किया जाना था, किन्तु उनके स्थान पर श्री रविन्द्र कुमार बड़तिया शिक्षक विषय गणित को गलत ढंग से अतिशेष चिन्हांकित किया गया है। पूर्व माध्यमिक शाला पूत्तरवाही विषय कला में श्री संजय जायसवाल कनिष्ठ को अतिशेष की श्रेणी में गणना किया जाना था, किन्तु उनके स्थान पर श्रीमती मोतिम सिन्हा शिक्षक विषय कला को गलत ढंग से अतिशेष चिन्हांकित गया है। इन सभी मामलों में श्री जयसिंह भारद्वाज की ओर से घोर लापरवाही और अनियमितता सामने आई है, जो कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन है।राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के तहत संभागीय आयुक्त को प्राप्त अधिकारों के अनुसार, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के अंतर्गत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि में श्री भारद्वाज का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बालोद निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होगा।
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- महासमुंद में 1252 सोखता गड्ढों का निर्माण, जल संरक्षण की ओर ठोस कदम
महासमुंद / कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व में महासमुंद जिले में जल संरक्षण को लेकर "मोर गांव मा पानी" अभियान अंतर्गत एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है। पिछले समय-सीमा की बैठक में दिए गए कलेक्टर के निर्देशों के अनुरूप जिले में जन भागीदारी और विभागीय समन्वय से जल संचय के लिए विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है, जो अब मूर्त रूप लेता दिख रहा है।इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, शिक्षा विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वित प्रयासों से स्कूलों, आंगनवाड़ियों, पंचायत भवनों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों में जन सहयोग से सोखता गड्ढों का निर्माण किया जा रहा है।कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने बताया कि "मोर गांव मा पानी" अभियान का उद्देश्य सिर्फ जल संचय नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि सोखता गड्ढे न सिर्फ जल संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि वे मिट्टी की नमी बनाए रखने, जल प्रवाह को नियंत्रित करने और आसपास के पर्यावरण को भी संतुलित बनाए रखने में सहायक होते हैं।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एस. आलोक ने बताया कि अब तक जनभागीदारी से कुल 1252 सोखता गड्ढों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है और तेजी से इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोखता गड्ढे वर्षा जल को जमीन में समाहित करने में मदद करते हैं, जिससे जल स्तर को बनाए रखने और भूजल संसाधनों को पुनर्जीवित करने में सहयोग मिलेगा। यह एक स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। - -अब शिक्षक विहीन नहीं रहा राज्य का कोई भी प्राथमिक, माध्यमिक और हायर सेकेण्डरी स्कूल-युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया बच्चों के भविष्य को संवारने का सफल प्रयास : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बेहद सार्थक परिणाम सामने आए हैं। राज्य की कुल 453 शिक्षक विहीन शालाओं में से 447 स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। राज्य में 16 जून से शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र से इन स्कूलों में घंटी बजेगी, क्लास लगेगी और बच्चों के पढ़ाई के स्वर गुंजेंगे। शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षकों की पदस्थापना से एक नई उम्मीद जगी है। गांवों में शिक्षक के आने की खबर से पालक और बच्चे बेहद खुश हैं। शासन-प्रशासन का आभार जताने के साथ ही पालकगण बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद फिर से संजोने लगे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शिक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य के कई स्कूल शिक्षक विहीन स्थिति में थे विशेष रूप से सुदूर अंचलों के। इसलिए हमनें युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता से लागू किया है और यह सुनिश्चित किया गया है कि जहां-जहां जरूरत हो वहां शिक्षकों की तैनाती हो। राज्य के शत-प्रतिशत शालाओं में शिक्षकों की पदस्थापना इस प्रक्रिया की सफलता का प्रमाण है। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हमारे बच्चों के भविष्य को संवारने की दिशा में किया गया सफल प्रयास है।शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत शिक्षक विहीन 357 प्राथमिक शालाओं, 30 माध्यमिक शालाओं में नियमित शिक्षकों की पदस्थापना कर दी गई है। राज्य के शिक्षक विहीन 66 हाई स्कूलों में से सुकमा जिले के 4 हाई स्कूल तथा नारायणपुर जिले के 2 हाई स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना के लिए अभी काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी है, जबकि 60 शिक्षक विहीन हाईस्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पूरी कर ली गई है।जिला शिक्षा अधिकारी नारायणपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 3 शिक्षक विहीन हाई स्कूलों में से सुलेगा धौड़ाई हाई स्कूल में 3 शिक्षकों की नियुक्ति युक्तियुक्तकरण के माध्यम से पूरी कर ली गई है। हाईस्कूल कन्हारगांव एवं सोनपुर हाईस्कूल में शिक्षकों की तैनाती के लिए 12 जून को काउंसलिंग की जाएगी। इसी तरह सुकमा जिले के चिंतलनार, गुम्मा, गंजेनार एवं कांजीपानी हाई स्कूल जिला स्तर पर पूरी हो चुकी युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बाद भी शिक्षक विहीन हैं। इन हाई स्कूलों में राज्य स्तर पर होने वाली काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों की पदस्थापना की उम्मीद जिला प्रशासन को है। जिला शिक्षा अधिकारी सुकमा ने बताया कि उक्त चारों हाई स्कूलों के कैम्पस में संचालित पूर्व माध्यमिक शालाओं एवं अतिथि शिक्षकों के माध्यम से यहां अध्ययन-अध्यापन का प्रबंध पूर्व से ही होता रहा है। अब तक की स्थिति में सुकमा जिले के 4 और बीजापुर जिले के मात्र 2 हाई स्कूलों को फिलहाल छोड़ भी दें, (जबकि इन 6 हाई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती अभी प्रक्रियाधीन है) तो राज्य में प्राथमिक शाला से लेकर हायर सेकण्डरी स्कूल तक अब ऐसा कोई भी स्कूल है, जो शिक्षक विहीन हो।यहां यह उल्लेखनीय है कि राज्य का कोई भी हायर सेकेण्डरी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं था। मात्र 4 हायर सेकेण्डरी स्कूल एकल शिक्षकीय थे, जिनमें युक्तियुक्तकरण के तहत एक से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति गई है। युक्तियुक्तकरण के तहत हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में विषयवार व्याख्याताओं की नियुक्ति प्राथमिकता के आधार पर की गई है, ताकि बच्चों को नियमित रूप से अध्ययन-अध्यापन का बेहतर अवसर उपलब्ध हो सके।राज्य में 5672 प्राथमिक स्कूल एकल शिक्षकीय थे, इनमें से युक्तियुक्तकरण के बाद 4465 स्कूलों में दो अथवा दो से अधिक शिक्षकों की तैनाती पूरी कर ली गई है। राज्य में मात्र 1207 प्राथमिक शालाएं एकल शिक्षकीय रह गई हैं। इसी तरह 211 एकल शिक्षकीय पूर्व माध्यमिक शालाओं में से 204 शालाओं दो अथवा दो अधिक शिक्षकों की तैनाती की गई है, अब मात्र 7 माध्यमिक शालाएं ही राज्य में एकल शिक्षकीय रह गई हैं। इन शालाओं में भी और अधिक शिक्षकों की तैनाती को लेकर शिक्षा विभाग व्यवस्था बनाने में जुटा है। इसी तरह राज्य के 49 एकल शिक्षकीय हाई स्कूलों में से 48 हाई स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की पदस्थापना पूरी कर ली गई है। आज की स्थिति में राज्य में मात्र एक हाई स्कूल एकल शिक्षकीय बचा है।
- रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुकमा जिले के कुकानार थाना अंतर्गत पुसगुन्ना क्षेत्र में पुलिस जवान एवं सुकमा डीआरजी की संयुक्त पुलिस टीम के जवानों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिलने पर बधाई दी है।उल्लेखनीय है कि सर्चिंग के दौरान हुई मुठभेड़ में दो नक्सलियों को जवानों ने न्यूट्रलाइज किया है, जिनमें 5 लाख रुपए का इनामी पेदारास एलओएस कमांडर बमन भी शामिल है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे सुरक्षाबल के जवान पूरी ताकत से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने जवानों की इस बहादुरी और अदम्य साहस की सराहना करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ यह सफलता सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलवाद के खात्मे के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और जवानों को हर संभव मदद एवं सहयोग दिया जाएगा।
- - दो दशकों बाद स्कूलों में गूंजेगा ककहरा-युक्तियुक्तकरण से अब नहीं है जिले का कोई भी स्कूल शिक्षक विहीनरायपुर, / शिक्षा के क्षेत्र में बीजापुर जिले के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ है। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के अंतर्गत जिले के 78 शिक्षक विहीन स्कूलों में अब नियमित शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि वर्षों से बंद पड़े स्कूलों में फिर से पढ़ाई होगी।जिला शिक्षा कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन के निर्देशों के अनुरूप युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके तहत जिले में चिन्हांकित 198 अतिशेष शिक्षकों में से 189 शिक्षकों की नई पदस्थापना की गई है। इनमें 104 सहायक शिक्षक, 13 प्रधान अध्यापक (प्राथमिक), 45 शिक्षक, 31 प्रधान अध्यापक (माध्यमिक) और 5 व्याख्याता शामिल हैं।नई पदस्थापना के तहत 82 शिक्षक पूरी तरह शिक्षकविहीन स्कूलों में, 44 शिक्षक एकल शिक्षक वाले स्कूलों में और 63 शिक्षक सामान्य जरूरत वाले स्कूलों में भेजे गए हैं। विशेष बात यह है कि जिले के 76 ऐसे स्कूल जो दो दशकों से बंद पड़े थे, वहां अब पहली बार नियमित शिक्षक तैनात किए गए हैं। इनमें गुंडापुर, मुदवेंडी, हिरमगुंडा, बोटेतोंग, गुंजेपरती, जीड़पल्ली और मुरकीपाड़ जैसे दुर्गम और अतिसंवेदनशील इलाके शामिल हैं। इन गांवों में अब शिक्षकों की नियमित आवाजाही शुरू होगी, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।इसी तरह एक उच्च माध्यमिक विद्यालय, जहां सभी व्याख्याता पद रिक्त थे, वहां अब हिंदी और सामाजिक अध्ययन विषयों के व्याख्याताओं की नियुक्ति कर दी गई है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और स्कूल में विषयवार पढ़ाई सुनिश्चित की जा सकेगी। सरकार की इस पहल से शिक्षा व्यवस्था को मिली मजबूती एक बड़ा बदलाव लेकर आई है। इस युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से यह साफ है कि सरकार बीजापुर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील जिलों में भी शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। वर्षों से सुनसान पड़े स्कूलों में अब फिर से बच्चों की आवाजें गूंजेंगी और उनके उज्जवल भविष्य की नई इबारत लिखी जाएगी।







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