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लूज मोशन या डायरिया वायरल/बैक्टीरियल संक्रमण, दूषित खाना या पानी, फूड पॉइजनिंग की वजह से हो सकता है। इसके अलावा, जिनकी पाचन क्षमता कमजोर होती है, उन्हें भी कुछ-कुछ समय के अंतराल में लूज मोशन की दिक्कत हो जाती है। बहरहाल, लूज मोशन होने की वजह से शरीर से काफी मात्रा में पानी की कमी हो जाती है। इसलिए एक्सपर्ट इलेक्ट्रोलाइट को बैलेंस करने की सलाह देते हैं।
दस्त होने पर चाय-कॉफी पीना सही होता है?‘लूज मोशन में चाय या कॉफी पीना बिल्कुल सही नहीं है। इनमें कैफीन होता है। कैफीन एक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जो शरीर से तरल पदार्थों का नुकसान बढ़ाता है और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का कारण बनता है। यही नहीं, दस्त होने पर चाय पीने से आंतों पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिससे डायरिया जैसी कंडीशन और बिगड़ सकती है।’ लूज मोशन होने चाय या कॉफी पीने के बजाय बेहतर है कि आप पानी, नारियल पानी या बिना कैफीन वाली हर्बल चाय का सेवन करें।लूज मोशन में चाय या कॉफी पीने के नुकसानडिहाइड्रेशन का रिस्कः दस्त होने पर शरीर से पहले की काफी मात्रा में पानी निकल जाता है। ऐसे में अगर आप चाय या कॉफी भी पीते हैं, तो इसकी वजह से बॉडी डिहाइड्रेट हो सकती है। दस्त में बॉडी का डिहाइड्रेट होना सही संकेत नहीं है। इससे चक्कर आना, थकान और कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर असरः दस्त यानी डायरिया होने पर चाय या कॉफी इसलिए भी नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इसकी वजह से डाइजेस्टिव ट्रैक्ट पर बुरा असर पड़ता है, जो कि पहले से ही कमजोर है। ऐसे में पेट दर्द, पेट में अकड़न जैसी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं।कमजोर पाचन क्षमताः दस्त होने के बावजूद बार-बार चाय पीना सही नहीं है। इससे पाचन क्षमता पहले की तुलना में और भी कमजोर हो जाती है। इससे मरीज की रिकवरी भी धीमी हो जाती है, जो कि सही नहीं है।निष्कर्षलूज मोशन होने पर किसी को भी चाय या कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। अगर किसी की आदत है नियमित चाय या कॉफी पीने की तो ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि आप हर्बल टी पिएं। इसके अलावा, दस्त लगने पर दिन भर में काफी ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। अदरक की चाय या सूप भी इस अवस्था में फायदेमंद होता है। - भारतीय भोजन में दाल-चावल हो, पराठा हो या फिर खिचड़ी, दही के साथ खाने का स्वाद ही अलग हो जाता है। यही वजह है कि लगभग हर घर में दही रोजाना अलग-अलग तरीकों से खाया जाता है। दही न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि इसे पाचन के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स यानी अच्छे बैक्टीरिया आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं लेकिन पिछले कुछ समय में हेल्दी खाने का ट्रेंड बढ़ने के साथ हंग कर्ड का सेवन भी बढ़ा है। सलाद, डिप्स, सैंडविच और हेल्दी स्नैक्स में इसका इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। कई लोग इसे सामान्य दही से ज्यादा हेल्दी मानते हैं, क्योंकि यह गाढ़ा, क्रीमी और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है।दोनों ही चीजें दूध से बनती हैं और पोषण से भरपूर होती हैं। हालांकि उनकी बनावट, पानी की मात्रा और पोषक तत्वों में थोड़ा अंतर होता है, जिससे पाचन और शरीर पर उनका प्रभाव भी थोड़ा अलग हो सकता है। पाचन के लिहाज से दोनों ही विकल्प अच्छे हो सकते हैं, लेकिन यह व्यक्ति की पाचन क्षमता और जरूरत पर निर्भर करता है। सामान्य दही हल्का होता है और इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को भारी चीजें पचाने में परेशानी होती है या जिनका पाचन कमजोर है, उनके लिए सामान्य दही ज्यादा अच्छा विकल्प हो सकता है।वहीं हंग कर्ड गाढ़ा होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह थोड़ा भारी महसूस हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को हाई प्रोटीन डाइट चाहिए, उनके लिए हंग कर्ड एक अच्छा विकल्प हो सकता है।हंग कर्ड सामान्य दही से ही बनाया जाता है। इसे तैयार करने के लिए दही को एक सूती कपड़े में बांधकर कुछ घंटों के लिए टांग दिया जाता है, जिससे उसका पानी यानी व्हे (Whey) निकल जाता है। इस प्रक्रिया के बाद हंग कर्ड में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा और पानी की मात्रा कम हो जाती है। इसलिए यह गाढ़ा और ज्यादा क्रीमी महसूस होता है।सामान्य दही पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और पेट की कई समस्याओं जैसे गैस, एसिडिटी और कब्ज में राहतदे सकता है। इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए यह शरीर को हाइड्रेशन भी देता है और गर्मियों में ठंडक पहुंचाने में मदद करता है। दही को हमेशा ताजा और सही मात्रा में ही खाना चाहिए। बहुत ज्यादा खट्टा दही पेट के लिए सही नहीं माना जाता। दही को दिन के समय खाना ज्यादा अच्छा माना जाता है क्योंकि रात में कुछ लोगों को इसे पचाने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा दही में ज्यादा नमक या चीनी मिलाने से बचना चाहिए। अगर दही को फल, सलाद या हेल्दी मसालों के साथ लिया जाए तो यह और भी पौष्टिक बन सकता है।हंग कर्ड और सामान्य दही दोनों ही स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन पाचन के लिहाज से सामान्य दही हल्का और जल्दी पचने वाला माना जाता है। वहीं हंग कर्ड प्रोटीन से भरपूर और गाढ़ा होता है, जो खास जरूरतों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। इसलिए यह कहना सही होगा कि दोनों में से कौन बेहतर है, यह व्यक्ति की डाइट, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य जरूरतों पर निर्भर करता है।
- जब किसी के चेहरे पर दाग-धब्बे होते हैं या झाइयां पड़ती हैं तो आयुर्वेद में कुंकुमादि तेल लगाने की सलाह दी जाती है। इस तेल में एंटी-बैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं। कुंकुमादि तेल मुंहासों और फुंसियों को कम करने में मदद करता है। यह तेल त्वचा पर सीबम के उत्पादन को नियंत्रित करता है और रोमछिद्रों को बंद होने से रोकने में मदद करता है।दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाएअगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हैं, तो आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मुलेठी और मंजिष्ठा के गुण होते हैं, जो मेलानिन के उत्पादन को संतुलित करते हैं। यह सनटैनिंग, झाइयों और काले धब्बों को कम करने में असरदार होता है। चेहरे के दाग-धब्बों को मिटाने के लिए आप कुछ दिनों तक कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं।ड्राई स्किन से छुटकारारूखी और बेजान त्वचा से छुटकारा पाने के लिए आप कुंकुमादि तेल का यूज कर सकते हैं। इस तेल को लगाने से त्वचा को पोषण मिलता है और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से त्वचा की ड्राईनेस दूर होती है। यह चेहरे की बनावट को बेहतर करने में मदद करता है और रंगत को सुधारता है।मुंहासों से निजात दिलाएअगर आपके चेहरे पर कील-मुंहासे या एक्ने हैं तो कुंकुमादि तेल लगा सकते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो मुंहासों को मिटाने में असरदार होते हैं। इस तेल को लगाने से मुंहासे पैदा होने वाले बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और इससे मुंहासों को कम करने में मदद मिलती है। इस तेल को लगाने से मुंहासों के दाग भी धीरे-धीरे रिमूव होने लगते हैं।झुर्रियों को मिटाने में असरदारचेहरे की झुर्रियां मिटाने के लिए भी आप कुंकुमादि तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। इस तेल को लगाने से एंटी-एजिंग के लक्षण कम होते हैं। इस तेल को लगाने से फाइन लाइंस की समस्या दूर होती है और झुर्रियां कम होती हैं। यह त्वचा को टाइट बनाता है और जवां बनाए रखने में मदद करता है।बेजान त्वचा से छुटकाराकुंकुमादि तेल बेजान त्वचा से भी छुटकारा दिलाता है। इस तेल को लगाने से त्वचा पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और बेजान त्वचा ठीक होती है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार वापस आता है। इस तेल को लगाने से त्वचा का निखार कई गुना बढ़ जाता है।
- गर्मियों की तपिश जैसे ही शरीर को छूकर निकलने लगती है, हमारा ठंडे पेय पदार्थों के साथ प्यार उतना ही बढ़ने लगता है। गर्मियां जितनी ज्यादा बढ़ती है शरीर को अपना तापमान कंट्रोल करने के लिए उतनी ही ज्यादा हाइड्रेशन की जरूरत पड़ती है और ठंड से संपर्क अच्छा लगने लगता है। ऐसे में आप क्या पीते हैं? नींबू पानी, नारियल पानी? हालांकि, इस समय छाछ एक ऐसा पारंपरिक पेय बन चुका है, जो न केवल शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी बेहतर बना सकता है। आपको बता दें कि दही से बनने वाली छाछ में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो गर्मी के मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि जरूरी है कि आप इसका सेवन सही समय पर करें वरना आपको परेशानी हो सकती है। तो आइए हम आपको बताते हैं कि क्या है छाछ का सेवन करने का सबसे सही समय और इसके सेवन से आपको क्या लाभ मिल सकते हैं।हमारे बुजुर्ग बताते हैं आए हैं कि छाछ पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर का होता है और यह आयुर्वेद भी मानता है। दोपहर के समय में खासकर लंच के बाद छाछ का सेवन करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इस समय जब भोजन के साथ छाछ पीते हैं तो खाने को आसानी से पचने में मदद मिलती है और पेट में भारीपन व गैस जैसी समस्याएं कम हो जाती है। वहीं गर्मियों में मौसम में जब आप दोपहर के समय इसका सेवन करते हैं तो शरीर को ठंडक भी महसूस होती है।छाछ एक प्रोबायोटिक पेय पदार्थ है, जो उसे आपकी आंतों के लिए सबसे अच्छे पेय पदार्थों में से एक बनाता है। छाछ में पाए जाने वाले गुड बैक्टीरिया न सिर्फ पाचन क्रिया को अच्छा बनाते हैं, बल्कि आंतों को हेल्दी रखने में भी मदद करते हैं। ऐसे में जब आप इसका सेवन सही समय पर करते हैं तो गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं आपसे दूर रहने लगती हैं। वहीं जब आप नियमित रूप से छाछ का सेवन करते हैं तो पेट हल्का रहता है और पाचन प्रक्रिया बेहतर ढंग से हो पाती है।मेडिकल साइंस कहता है कि अगर शरीर में तरल की कमी आनी डिहाइड्रेशन हो जाता है, तो उससे पसीना आना कम हो जाता है और शरीर गर्मी का शिकार हो जाता है। अब ऐसे में छाछ भी शरीर को हाइड्रेट रखने का एक अच्छा पेय पदार्थ है और खासतौर पर इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स भी पाए जाते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर हाइड्रेट रहता है। साथ ही इसे पीने से शरीर की थकान और कमजोरी भी दूर हो जाती है।वजन कंट्रोल में भी मददगारअगर आप वजन कम करने का प्लान कर रहे हैं, तो कोल्ड ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थ पीने से कहीं बेहतर विकल्प छाछ है। क्योंकि छाछ में उनकी तुलना में कैलोरी काफी कम होती है और वहीं यह पाचन को अच्छा बनाने में भी मदद करता है जिससे काफी फायदा मिलता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती, आप अनहेल्दी स्नैकिंग से दूर रहते हैं और तय समय पर पौष्टिक भोजन करने की आदत बन जाती है।
- हेल्दी रहने के लिए फलों का सेवन काफी अहम बताया जाता है। हर फल की अपनी खासियत होती है और इनमें अलग-अलग तरह के पोषक तत्व भी होते हैं। ऐसे ही दो फल और हैं जो खासतौर से डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं। डायबिटीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ प्रमोद त्रिपाठी बताते हैं कि ये दो फल इन्सुलिन को सपोर्ट भी करते हैं और थोड़ा-थोड़ा डायबिटीज की दवाइयों की तरह भी काम करते हैं। डॉक्टर हर शुगर के मरीज को ये दो फल खाने की सलाह देते हैं। उन्होंने इनके फायदे और कई जरूरी बातों के बारे में भी बताया है। तो चलिए जानते हैं वो दो फल आखिर कौन से हैं।डायबिटीज में दवा की तरह काम करती है मौसंबीडॉ प्रमोद त्रिपाठी कहते हैं कि पहला फल मौसंबी है, जो हर शुगर के पेशेंट को जरूर खाना चाहिए। इसका GI महज 41-45 होता है और ये फाइबर और फ्लेवनॉयड्स में रिच होती है। दरअसल मौसंबी 'अकार्बोज' नाम की डायबिटीज की दवा की तरह काम करती है। ये खाने के बाद शुगर की स्पाइक को कम करती है क्योंकि आपकी आंतों में कार्बोहाइड्रेट का एब्जॉरपशन धीमा कर देता है।डायबिटीज रोगी खूब खाएं संतरादूसरा फल है संतरा जो डायबिटीज के मरीजों को जरूर खाना चाहिए। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) 50-52 के बीच होता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और हेस्पेरिडिन नामक प्लांट बेस्ड फ्लेवोनॉयड भी मौजूद होता है। डॉ प्रमोद कहते हैं कि संतरे का असर मेटफॉर्मिन नामक दवाई की तरह होता है। ये पूरे शरीर की ब्लड वेसल्स में एंटी इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट ले कर आता है। इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाता है और लिवर से शुगर के रिलीज को स्लो कर देता है।संतरे और मौसंबी का जूस फायदेमंद है या फल?अब एक और अहम सवाल है कि क्या संतरे और मौसंबी को साबुत खाना फायदेमंद है या इनका जूस बनाकर भी पी सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो हमेशा साबुत फल खाना ही बेहतर होता है। जब आप संतरे या मौसंबी का जूस बनाकर पीते हैं, तो सारा फाइबर निकल जाता है। ये फाइबर ही होता है जो शुगर के अवशोषण को कम करता है। जूस में सिर्फ शुगर बचती है, जिससे शुगर लेवल स्पाइक होता है। वहीं जब आप साबुत फल खाते हैं तो फाइबर, विटामिन और बाकी पोषक तत्व शरीर को संतुलित रूप में मिलते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल भी बैलेंस बना रहता है।
- ओट्स एक तरह का होल ग्रेन फूड है। इसमें फाइबर और प्रोटीन भी मौजूद होता है। ओट्स मॉर्निंग एनर्जी और वेट लॉस के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। कई लोग रोल्ड ओट्स को खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग इंस्टेंट ओट्स को हेल्दी ब्रेकफास्ट समझकर खा लेते हैं, लेकिन क्या इंस्टेंट ओट्स वाकई एक हेल्दी विकल्प है? इंस्टेंट ओट्स जल्दी तैयार हो जाते हैं इसलिए इसे ज्यादातर लोग अपने नाश्ते में शामिल करते हैं पर इसके सेहतमंद होने पर सवाल खड़ा होता है। एक्सपर्ट और रिसर्च की मदद से इस सवाल का जवाब आगे जानते हैं।इंस्टेंट ओट्स खाने से पेट जल्दी भरता है-एक स्टडी में 48 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। हर व्यक्ति को अलग-अलग दिनों पर अलग-अलग नाश्ता दिया गया। जिन लोगों को नाश्ते में इंस्टेंट ओट्स दिए गए, उन्हें पेट जल्दी भरा हुआ महसूस हुआ। इस स्टडी में इंस्टेंट ओट्स खाने का कोई नुकसान नहीं देखा गया है।इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं इंस्टेंट ओट्स भी रोल्ड ओट्स की तरह हेल्दी होते हैं। इंस्टेंट ओट्स और रोल्ड ओट्स की कैलोरी में ज्यादा फर्क नहीं होता। 40 ग्राम इंस्टेंट ओट्स में करीब 200 कैलोरी होती हैं वहीं रोल्ड ओट्स में करीब 150 कैलोरी होती हैं। इंस्टेंट ओट्स में फैट और फाइबर तीन ग्राम होता है और रोल्ड ओट्स में फैट और फाइबर पांच से छह ग्राम होता है। इंस्टेंट ओट्स ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इन्हें खाने से शुगर लेवल बढ़ सकता है वहीं दूसरी ओर रोल्ड ओट्स कम प्रोसेस्ड होते हैं, इनमें फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, ये धीरे पचते हैं और इसे खाकर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।इंस्टेंट ओट्स का ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 80 होता है और ग्लाइसेमिक लोड करीब 17 होता है। वहीं रोल्ड ओट्स की बात करें, तो जीआई 55 होता है और जीएल करीब 11 होता है। यानी डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स ज्यादा बेहतर विकल्प है क्योंकि इसका जीआई, इंस्टेंट ओट्स के मुकाबले कम होता है।इंस्टेंट और रोल्ड ओट्स दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं, आप दोनों में से किसी का भी सेवन कर सकते हैं। National Library Of Medicine की स्टडी कहती है कि इंस्टेंट ओट्स खाने से सेहत को कोई नुकसान नहीं होता वहीं इंस्टेंट ओट्स, रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा प्रोसेस्ड होते हैं और इनका जीआई भी रोल्ड ओट्स के मुकाबले ज्यादा होता है, इसलिए डायबिटिक मरीजों के लिए रोल्ड ओट्स बेहतर हैं और स्वस्थ लोगों के लिए भी रोल्ड ओट्स बेहतर विकल्प हैं, हालांकि इंस्टेंट ओट्स खाकर भी सेहत पर कोई बुरा असर देखा नहीं जाता है। आप अपनी सुविधा के अनुसार विकल्प चुन सकते हैं।
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रात का समय शरीर के आराम और खुद को रिपेयर करने का होता है. इस दौरान पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है, इसलिए रात में क्या और कितना खाया जा रहा है, इसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है. अगर रात का खानपान सही न हो, तो शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता. इसके संकेत कई रूपों में दिखते हैं, जैसे रात में पेट भारी लगना, गैस, एसिडिटी, सीने में जलन, नींद बार-बार टूटना या सुबह उठते ही थकान महसूस होना.
कुछ लोगों को रात में बेचैनी, पसीना आना या सुबह सिर भारी लगने की समस्या भी होती है. वजन बढ़ना, कब्ज और दिनभर सुस्ती रहना भी इस बात का इशारा है कि रात के खाने पर ध्यान देने की जरूरत है. ये लक्षण बताते हैं कि रात में भोजन का समय, मात्रा और आदतें सही नहीं हैं. इसलिए अच्छी नींद और बेहतर सेहत के लिए रात के खानपान को संतुलित रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि रात के समय कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए.
रात में कौन से फूड्स नहीं खाने चाहिए?
रात में ऐसे फूड्स नहीं खाने चाहिए जो पचने में भारी हों या पेट पर ज़्यादा दबाव डालें. तले-भुने और बहुत मसालेदार फूड्स पाचन को बिगाड़ सकते हैं और एसिडिटी की समस्या बढ़ा देते हैं. बहुत मीठा खाने से ब्लड शुगर असंतुलित हो सकता है और नींद प्रभावित होती है. ज्यादा नमक वाले फूड्स शरीर में पानी रोकते हैं, जिससे सूजन और बेचैनी हो सकती है.
प्रोसेस्ड और जंक फूड्स में मौजूद फैट पाचन तंत्र को सुस्त कर देता है. रात में चाय, कॉफी या कैफीन वाले पेय लेने से दिमाग एक्टिव रहता है और नींद नहीं आती. बहुत ज्यादा ठंडे या भारी डेयरी प्रोडक्ट्स भी पेट में गड़बड़ी कर सकते हैं. इसलिए रात में ऐसे फूड्स से दूरी रखना सेहत के लिए बेहतर होता है.
रात में कौन से फूड्स खाना सही है?
रात के समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अच्छा माना जाता है. उबली या हल्की सब्जियां, दाल, सादी रोटी या थोड़ा चावल पाचन के लिए सही होते हैं. खिचड़ी, सूप या दलिया जैसे फूड्स पेट पर बोझ नहीं डालते.
सीमित मात्रा में दही या छाछ लेने से पाचन को आराम मिलता है. ये फूड्स शरीर को ज़रूरी पोषण देते हैं और नींद को भी बेहतर बनाते हैं. हल्का भोजन करने से पेट साफ रहता है और सुबह शरीर हल्का महसूस करता है. इसलिए रात में सादा और संतुलित खाना फायदेमंद होता है.
रात को अच्छी सेहत के लिए ये भी जरूरी
रात का खाना सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले खा लेना चाहिए. खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और हल्की वॉक करें. टीवी या मोबाइल देखते हुए खाना न खाएं, ताकि पेट भरने का सही संकेत मिले. बहुत अधिक पानी या ठंडा पानी रात में न पिएं. सोने और उठने का समय तय रखें. तनाव से दूर रहना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है. सही खानपान के साथ सही आदतें अपनाने से रात में शरीर को पूरा आराम मिलता है और सेहत बनी रहती है. - आज के समय में ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी में लगे रहते हैं, जिसके बाद लोगों को सोने में परेशानी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार करने से अक्सर लोगों को सोने से पहले मोबाइल और टीवी जैसी स्क्रीन वाली चीजों का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाती है, लेकिन क्या वाकई रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को कैसे प्रभावित करती है?रात में स्क्रीन की ब्राइटनेस नींद को कैसे प्रभावित करती है?"रात में तेज ब्राइटनेस वाली स्क्रीन का इस्तेमाल करने से व्यक्ति की नींद में काफी परेशानी हो सकती है। मोबाइल फोन, टैबलेट, लैपटॉप और टीवी से निकलने वाली नीली रोशनी यानी ब्लू लाइट निकलती है, जो सीधे शरीर के नेचुरल स्लीप-वेक साइकिल पर असर डालती है, जिसे सर्कडियन रिदम भी कहा जाता है। ब्लू लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को कम करती है। बता दें, मेलाटोनिन हार्मोन आपको नींद दिलाने के लिए जिम्मेदार होता है। जब मेलाटोनिन का लेवल कम होता है, तो आपका ब्रेन ज्यादा देर तक अलर्ट रहता है, जिससे सोना मुश्किल हो जाता है।"नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, रात को कंप्यूटर स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) नींद और बायोलॉजिकल रिदम को गंभीर रूप से बाधित करती है। ये ब्लू लाइट व्यक्ति के शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन को कम करती है, शरीर के तापमान को बढ़ाती है और सुबह की एकाग्रता को प्रभावित करती है। लाइट की तीव्रता के मुकाबले उसकी वेवलेंथ स्वास्थ्य पर अधिक बुरा प्रभाव डालता है।नींद की क्वालिटी होती है प्रभावित, "रात में तेज रोशनी वाली स्क्रीन आपके दिमाग को यह भी सिग्नल देती है कि अभी भी दिन है। इससे नींद आने में देर होती है और नींद की क्वालिटी कम हो जाती है। अगर आप सो भी जाते हैं, तो सोने से पहले तेज रोशनी में रहने से नींद हल्की हो सकती है और आप बार-बार जाग सकते हैं, साथ ही, ऐसा लंबे समय तक करने से समय के साथ, खराब नींद मूड, कॉन्संट्रेशन, इम्यूनिटी और पूरी हेल्थ पर बुरा असर डाल सकती है।"अच्छी नींद और नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या करें?नींद की गुणवत्ता में सुधार करने और अच्छी नींद को बढ़ावा देने के लिए कुछ हेल्दी आदतों को अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।-शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें।-नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें।-सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद कर दें और इसके इस्तेमाल से बचें।-अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं।-सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल न करने और शांति का माहौल बनाकर सोने से आपके शरीर को आरामदायक नींद के लिए नेचुरली तैयार होने में मदद मिलती है।निष्कर्षरात को स्क्रीन की ब्राइटनेस आपकी नींद को प्रभावित करती है। रात को सोने से पहले ब्लू लाइट का ब्राइटनेस के साथ इस्तेमाल करने से नींद की क्वालिटी प्रभावित होती है और ऐसा लंबे समय तक करने से काम पर फोकस करने में परेशानी होने, नींद के प्रभावित होने, मूड पर असर पड़ने, इम्यूनिटी पर असर पड़ने और स्वास्थ्य पर बुरा असर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में नींद से जुड़ी समस्याओं से बचने के लिए शाम को स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें। नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें, सोने से 30-60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल बंद करें, अंधेरा और शांत नींद का माहौल बनाएं। इसके अलावा, नींद से जुड़ी अधिक समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- औषधीय गुणों से भरपूर सहजन (मुनगा) का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन की फली में अच्छी मात्रा में बहुत पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद माने जाते हैं। ऐसे में इसके सूप का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। सहजन के सूप को सुपरफूड माना जाता है । आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों में से एक और औषधीय गुणों से भरपूर सहजन यानी मोरिंगा के सूप में भरपूर मात्रा में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटीबैक्टीरियल के गुण, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, विटामिन ए, विटामिन ई और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं, जिससे पाचन में सुधार करने, ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, वजन कम करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।हार्ट के लिए फायदेमंदसहजन के सूप में अच्छी मात्रा में पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।ब्लड शुगर को नियंत्रित करेसहजन यानी मोरिंगा के सूप में एंटी-डायबिटीक के गुण, साथ ही, इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। ऐसे में इसके सूप का सेवन करने से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।पाचन में सुधार करेसहजन के सूप में औषधीय गुण होते हैं, साथ ही, इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर होता है। इसका सेवन करने से गट के बैक्टीरिया को बेहतर करने, पाचन में सुधार करने, बाउल मूवमेंट में सुधार करने, सूजन को कम करने, पाचन प्रक्रिया में सुधार करने और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।हड्डियों के लिए फायदेमंदसहजन के सूप में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, कैल्शियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व होते हैं। इससे हड्डियों को मजबूती देने, शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, शरीर की थकान को दूर करने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करने में सहायकसहजन (मुनगा) के सूप में अच्छी मात्रा में विटामिन सी, एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने, थकान को दूर करने, कमजोरी को दूर करने, शरीर को हाइड्रेट करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।सहजन की फली का सूप बनाने की विधिसामग्रीसहजन¼ छोटा चम्मच मक्खन1 तेज पत्ता1 हरी मिर्च5-6 लहसुन की कलियाँ½ टमाटरकुछ धनिया के डंठल1 बड़ा चम्मच पीली मूंग दालसूप बनाने के लिए 1 कप पानी।सूप के लिए 1.5 कप पानीआवश्यकतानुसार नमक¼ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर¼ छोटा चम्मच सौंफ | सौंफ के बीजस्वादानुसार काली मिर्च पाउडरनिर्देशप्रेशर कुकर/पैन में मक्खन डालें।अब इसमें एक तेज पत्ता, हरी मिर्च, लहसुन की कलियाँ, आधा टमाटर, कुछ धनिया के डंठल और 1 बड़ा चम्मच मूंग दाल मिला दें।एक मिनट तक भूनें और फिर कटी हुई सहजन की फली डालें।एक कप पानी, थोड़ा नमक, हल्दी पाउडर और सौंफ के बीज डालें।कुकर को ढककर बंद कर दें।प्रेशर कुकर में 3 सीटी आने तक पकाएं।प्रेशर कम होने पर कुकर खोलें, सब कुछ ठंडा होने दें।सब कुछ पीस लेंपीसते समय 1 कप पानी डालेंइसे अच्छी तरह छान लेंछानते समय पानी डालेंरेशे को फेंक देंनमक और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।इसे उबलने दें और गैस बंद कर दें।सहजन की फली का सूप तैयार है
- पाचन तंत्र का सही तरीके से काम करना पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। जब पेट ठीक से साफ नहीं होता, तो कब्ज, पेट फूलना, भारीपन, गैस और सुस्ती जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहे, तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा हो सकते हैं। बार-बार दवा लेना लंबे समय में पाचन तंत्र को कमजोर कर सकता है। दवा के बजाय हेल्दी सीड्स का सेवन कर सकते हैं। सीड्स की मदद से पेट साफ रखने में मदद मिल सकती है और पाचन तंत्र के लिए भी कई सीड्स फायदेमंद होते हैं।1. चिया सीड्स-इसमें सॉल्यूबल फाइबर होता है और इसे भिगाने के बाद यह जेल के फॉर्म में बन जाता है। ये जेल तीन काम करता है--शुगर अब्जार्ब होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।-गट में मौजूद गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है।-इससे आप बेहतर ढंग से मल त्याग कर पाते हैं।-MDPI की एक स्टडी के मुताबिक, कब्ज के मरीजों के लिए चिया सीड्स का सेवन फायदेमंद होता है। चिया सीड्स की मदद से बाउल मूवमेंट में सुधार होता है। चिया सीड्स में सॉल्यूबल फाइबर होता है जो स्टूल को नर्म बनाता है और पेट को साफ करने में मदद करता है।कैसे खाएं चिया सीड्स?-इसे ड्राई फॉर्म में न खाएं।चिया सीड्स को रातभर भीगाकर ही खाएं।-अगर रातभर नहीं भीगाकर रखा है, तो खाने से 15 से 20 मिनट पहले जरूर भीगा लें और फिर इसे खाएं।-इसे बादाम के दूध या योगर्ट के साथ मिलाएं और बेरीज डालकर भी खा सकते हैं।-2. फ्लैक्स सीड्स- Flax Seeds-फ्लैक्स सीड्स ओमेगा 3 से भरपूर होते हैं और इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।-ब्लोटिंग, हार्मोनल संतुलिन और कोलेस्ट्रॉल लेवल को बेहतर करने में फ्लैक्स सीड्स का सेवन फायदेमंद है।-नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, फ्लैक्स सीड्स का सेवन करने से आंतों की मूवमेंट बेहतर होती है जिससे पेट साफ होने में मदद मिलती है।कैसे खाएं फ्लैक्स सीड्स?-फ्लैक्स सीड्स को रॉ खाने के बजाय इसे पीसकर खाना जरूरी है तभी शरीर इसके गुणोंं को अब्जार्ब कर पाएगा।-एक टेबलस्पून पीसे हुए फ्लैक्स सीड्स को स्मूदी या ओटमील के साथ मिलाकर खा सकते हैं।-हफ्ते में 3 से 4 बार इसका सेवन कर सकते हैं।-3. सब्जा या बेसिल सीड्स- Basil Seeds-तुलसी के सीड्स को सब्जा सीड्स भी कहते हैं।-इनकी तासीर ठंडी होती है और इसमें भी चिया सीड्स की तरह सॉल्यूबल फाइबर होता है।-डाइजेशन की आयुर्वेदिक मेडिसिन में तुलसी के सीड्स का काफी इस्तेमाल होता है।-नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, सब्जा सीड्स में डाइटरी फाइबर होता है जो आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाता है। स्टडी के मुताबिक, बेसिल सीड्स का हाई फाइबर कंटेंट गट हेल्थ को सपोर्ट करता है और स्टूल मूवमेंट सुधारने में मदद कर सकता है, जिससे पेट साफ रखने में मदद मिलती है।कैसे खाएं सब्जा सीड्स?सब्जा सीड्स को ओटमील में डालकर खा सकते हैं।इसे बादाम के दूध या बादाम के दही के साथ भी मिलाकर खा सकते हैं।निष्कर्ष:पेट को साफ करने के लिए चिया सीड्स, सब्जा सीड्स और फ्लैक्स सीड्स का सेवन फायदेमंद होता है। डॉक्टर की सलाह पर इन्हें अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
- अगर आपके लिए पीक फिटनेस का मतलब 18 परसेंट बॉडी फैट है, यानी कि एकदम सपाट पेट और बहुत पतला लुक , तो यह आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। दरअसल, आइडियल बॉडी फैट परसेंटेज खासकर 20 परसेंट से कम महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़्यादा स्ट्रेसफुल हो सकता है और इसे आइडियल लक्ष्य नहीं मानना चाहिए। अगर महिलाओं के लिए आइडियल बॉडी फैट के परसेंटेज के बारे में बात की जाए, तो यह कुछ महिलाओं के लिए 24 से 30 परसेंट के बीच होता है, जबकि कुछ अन्य 20 से 23 परसेंट के बीच बेहतर होता है।कितना होना चाहिए महिलाओं का आइडियल वजन?महिलाओं का आइडियल वजन उनकी लंबाई पर निर्भर करता है। इसे मापने का सबसे आसान तरीका है BMI होता है। BMI को मापने के लिए आपको अपने वजन से लंबाई को भाग यानि डिवाइड करके पता लग सकता है।ऐसे में अगर आपकी हाइट 4’10 इंच है, तो आपको वजन 41–52 kg के बीच होना चाहिए।5’0 फीट हाइट वालों का वजन 45–56 kg के बीच होना चाहिए।5’2 फीट हाइट वाली महिलाओं का वजन 49–60 kg के आसपास होना चाहिए।5’4 से 5’6 फीट की महिलाओं का वजन 53–65 kg के आसपास होना टाहिए।जरूरत से ज्यादा फैट कम करने के नुकसानन्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं कि बहुत ज़्यादा पतला होना हार्मोन्स और शरीर के अन्य ज़रूरी फंक्शन को बिगाड़कर उल्टा असर कर सकता है, जिससे आखिरकार शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ता है। दरअसल, सुपर फ्लैट पेट, 18% बॉडी फैट के साथ पीरियड्स का अनियमित होना या बंद होना, बहुत ज़्यादा बालों का झड़ना, लगातार भूख और क्रेविंग, कम एनर्जी लेवल और अजीब मूड स्विंग्स होते हैं। कुल मिलाकर, इस तरह का शरीर एक महिला के सिस्टम के लिए हार्मोनल, शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत ज़्यादा स्ट्रेसफुल होता है।न्यूट्रिशनिस्ट की मानें, तो एक महिला के लिए आइडियल बॉडी फैट परसेंटेज सिर्फ़ वह नहीं है, जिसमें वह अच्छी दिखती है, बल्कि वह है जहां उसकी एनर्जी ज़्यादा हो, मूड स्टेबल हो, पीरियड्स रेगुलर हों, बाल हेल्दी हों और वह खुद को सबसे अच्छा महसूस करे। इसलिए, जब आपका शरीर सही से अपना काम कर रही है, तो आपको ज्यादा पतला होने की जरूरत नहीं है।हेल्दी खान-पान पर ध्यानहेल्दी रहने के लिए हमेशा कहा जाता है कि हेल्दी खान-पान पर ध्यान दो। दरअसल, अगर आप हेल्दी खाते-पीते हैं, तो आपका शरीर ऐसे ही फिट रहता है। आपका वजन भी मेंटेन रहता है, आपका फिट रहने के ज्यादा वजन कम करने की जरूरत नहीं होती है। इसलिए ध्यान रखें कि हेल्दी फैट बनाए रखने के लिए हेल्दी खान-पान पर ध्यान दें।
- आज के समय में खान-पान पर खास ध्यान न देने और कई अन्य कारणों लोगों को बालों को झड़ने, टूटने, रूखा होने और पतले होने की समस्या होती है। ऐसे में रूखे-पतले बालों की समस्या से राहत के लिए घर पर 3 हेयर मास्क को बनाया जा सकता है। आइए जानें -1. एलोवेरा जेल, शहद और नारियल तेल हेयर मास्करेसिपी-इसके लिए दो चम्मच ताजा एलोवेरा जेल में एक चम्मच शहद और तीन चम्मच नारियल तेल को अच्छे से मिला लें।अब इस हेयर मास्क को बालों और स्कैल्प में आधे घंटे के लिए लगा रहने दे। इसके बाद बालों को माइल्ड शैंपू की मदद से बालों को धो लें।फायदे-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करने और बालों को अंदर तक नमी प्रदान करने में मदद मिलती है, जिससे बालों की फ्रिजीनेस और बालों की ड्राइनेस को कम करने में मदद मिलती है।नारियल तेल और एलोवेरा जेल के इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को जड़ों से मजबूती देने, टूटने से रोकने, घना बनाने और बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से स्कैल्प का इंफेक्शन से बचाव करने और डैंड्रफ की समस्या से राहत देने में भी मदद मिलती है।-इससे बालों का डैमेज से बचाव करने और हेल्दी रखने में मदद मिलती है। एलोवेरासूखे और बेजान बालों के लिए एक बहुत अच्छा और नेचुरल उपचार है। इसमें मौजूद 75 एक्टिव तत्व, जैसे विटामिन और एंजाइम, बालों को गहराई से मॉइस्चराइज करते हैं और स्कैल्प को स्वस्थ रखते हैं। यह बालों को नेचुरल लचीलापन बढ़ाकर, उनको डैमेज से बचाता है।2. केला, शहद और बादाम तेल हेयर मास्करेसिपी- इसके लिए 1 पके हुए केले को अच्छे से मैश कर लें।अब इसमें 1 बड़ी चम्मच शहद और 2 बड़ी चम्मच बादाम के तेल को डालकर अच्छे से मिला लें।अब इस हेयर मास्क को साफ बालों पर अच्छे से लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद बालों को हल्के गुनगुने पानी से धो लें।फायदे-इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से नमी देने और मॉइस्चराइज करने में मदद मिलती है, जिससे बाल नेचुरली सॉफ्ट और स्मूद बनते हैं।-इसका इस्तेमाल करने से बालों की फ्रिजीनेस को कम करने और बालों को नेचुरल रूप से शाइनी बनाने में मदद मिलती है।-इससे बालों को झड़ने, टूटने और बालों का डैमेज से बचाव करने में मदद मिलती है।-बादाम के तेल, केले और शहद के हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से स्कैल्प को पोषण देने और डैंड्रफ जैसी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।3. एवोकाडो, केला, नारियल तेल और शहद हेयर मास्करेसिपी-इसके लिए 1 पके हुए केले और एवोकाडो को अच्छे से मैश कर लें।-अब इसमें 2 बड़ी चम्मच नारियल तेल और 1 चम्मच शहद को अच्छे से मिला लें।-अब इसको हेयर मास्क को बालों के सिरे पर लगाएं और आधे घंटे के लिए छोड़ दें।-इसके बाद माइल्ड शैंपू की मदद से बालों को धो लें।फायदेनेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन के अनुसार, सूखे और बेजान बालों (Dry Hair) के लिए नारियल तेल सबसे प्रभावी समाधान है। नारियल तेल अन्य तेलों के मुकाबले बालों की गहराई तक जाकर प्रोटीन के नुकसान को रोकता है, साथ ही, बालों में नमी को लॉक करता है, जिससे बालों को धोने के दौरान शैंपू को बालों की नेचुरल नमी नहीं छीन पाता है। इससे बालों को मजबूती देने, टूटने को कम करता है और उनमें लचीलापन लाता है। इस हेयर मास्क का इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से नमी देने, बालों के रूखेपन को दूर करने और बालों में मॉइस्चराइज रखने में मदद मिलती है। इसका इस्तेमाल करने से बालों को गहराई से पोषण देने रिपेयर करने और जड़ों से मजबूती देने में मदद मिलती है। बालों को नेचुरल रूप से शाइनी बनाने और नमी बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा, इससे बालों को झड़ने और टूटने से बचाव करने में मदद मिलती है।निष्कर्ष
बालों के रूखेपन और पतलेपन को कम करने के लिए एलोवेरा जेल, शहद हेयर मास्क और नारियल तेल, केला, शहद और बादाम ऑयल हेयर मास्क और एवोकाडो, केला, नारियल तेल और शहद हेयर मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनसे बालों को गहराई से पोषण देने, नमी को बालों में लॉक करने, बालों को गहराई से पोषण देने और बालों को हेल्दी बनाए रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, बालों को झड़ने, अधिक पतले होने और रूखे होने की समस्या के अधिक होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
- आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हाई कोलेस्ट्रॉल एक गंभीर समस्या बन चुका है, अक्सर हमें इसका तब पता चलता है जब रिपोर्ट में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ा हुआ मिलता है। यह वही फैट है जो धीरे-धीरे हमारी धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है लेकिन क्या हो अगर इस समस्या का समाधान आपकी रोज की थाली में ही छुपा हो? डाइट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ साधारण दिखने वाली दालें जैसे बीन्स, चने, मटर और मसूर आपके दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर कौन-सी दालें खाना फायदेमंद होती हैं?1. राजमाराजमा घुलनशील फाइबर (soluble fiber) से भरपूर होता है। यह फाइबर आंतों में जाकर कोलेस्ट्रॉल को बांध लेता है और उसे शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। नियमित रूप से राजमा खाने से LDL के लेवल में कमी देखी जा सकती है। सप्ताह में कम से कम 2-3 बार राजमा को अपने भोजन में शामिल करें। इसे कम तेल और कम नमक में पकाएं ताकि इसका फायदा मिल सके। राजमा में प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो सेहत के लिए बेहद जरूरी हैं।2. काबुली चनाकाबुली चना या छोले भी हाई फाइबर और प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का अच्छा सोर्स हैं, इनमें मौजूद घुलनशील फाइबर खून में मौजूद अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। उबले हुए चने या चना सलाद का सेवन नाश्ते या लंच में किया जा सकता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और अनहेल्दी स्नैकिंग की आदत कम होती है। चने में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी सहायक होते हैं, जिससे हार्ट डिजीज का जोखिम घटता है।3. हरी मटरहरी मटर में फाइबर और विटामिन K के साथ अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ-साथ शरीर की इम्यूनिटी को भी मजबूत करती है। मटर को सब्जी, सूप या सलाद के रूप में रोजाना डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स धमनियों में जमा चर्बी को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा मटर वजन कंट्रोल में भी सहायक है, जो कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है।4. मसूर दालमसूर दाल हल्की और जल्दी पचने वाली दाल है, लेकिन इसके फायदे बेहद असरदार हैं। इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर और फोलेट होता है, जो हार्ट हेल्थ के लिए जरूरी है। मसूर दाल का नियमित सेवन LDL को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को संतुलित रखने में मदद करता है। यह ब्लड शुगर को भी स्थिर रखती है, जिससे डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।स्टडी के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 130 ग्राम (करीब एक सर्विंग) दालों जैसे कि बीन्स, चने, मटर और मसूर का सेवन करने से खराब कोलेस्ट्रॉल(LDL) में 5% तक की कमी आ सकती है। यह हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने का एक प्रभावी और नेचुरल तरीका है। दालों में मौजूद हाई फाइबर और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। बैलेंस डाइट में नियमित रूप से दालों को शामिल करना कोलेस्ट्रॉल मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद है।
- गैस्ट्रोएसोफेजियल रिफ्लक्स रोग (GERD) एक पाचन समस्या है। इस बीमारी में पेट का एसिड फिर से खाने की नली में आ जाता है। जीईआरडी से राहत के लिए कुछ हेल्दी फूड्स को डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। इन फूड्स को खाने से पेट की जलन शांत होती है और पाचन बेहतर रहता है। विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी संगठन (World Gastroenterology Organisation) की मानें, तो जीआईआरडी को हल्के में लेने की गलती नहीं करना चाहिए। इससे व्यक्ति की जिंदगी की क्वालिटी खराब हो सकती है, इससे काम की प्रोडक्टिविटी घट सकती है, अनिद्रा की समस्या हो सकती है और रोज के रूटीन पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।1. दही खाने से पेट की जलन दूर होती हैदही का सेवन करने से पेट के एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। दही खाने से पेट की जलन भी दूर होती है। दही का सेवन करने से ब्लोटिंग की समस्या को भी दूर करने में मदद मिलती है। दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स की मदद से डाइजेशन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। दही के गुड बैक्टीरिया पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।2. चावल की कांंजीचावल की कांजी में प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं। इसे पीने से पेट में गुड बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ती है और कब्ज की समस्या से राहत मिलती है। चावल की कांजी का सेवन करने से ब्लोटिंग की समस्या भी दूर होती है और यह आसानी से पच जाती है। जीईआरडी के मरीज इस मौसम में कांजी का सेवन कर सकते हैं।3. मुलेठी जड़ की चायएसिडिटी और जीईआरडी के लक्षणों को कम करने के लिए मुलेठी की जड़ से बनी चाय का सेवन फायदेमंद होता है। मुलेठी की जड़ से बनी चाय का सेवन दोपहर या रात के खाने के बाद कर सकते हैं। दिनभर में एक कप चाय का सेवन काफी है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, मुलेठी जड़ का सेवन करने से हार्टबर्न और जीईआरडी के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।4. आंवला से पेट के एसिड कंट्रोल होते हैंजीईआरडी से राहत के लिए आंवला का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें विटामिन सी पाया जाता है। आंवला का सेवन करने से पेट में बन रहे एसिड को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। ScienceDirect की एक स्टडी के मुताबिक, आंवला का सेवन करने से सीने में जलन कम होती है और जीईआरडी के मरीजों में लक्षणाें को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।5. उबली हुई सब्जियांउबली हुई सब्जियों में फैट की मात्रा कम होती है, ये आसानी से पच जाती हैं और जीईआरडी के मरीजों के लिए खासकर फायदेमंद होती हैं। जीईआरडी से राहत के लिए ब्रोकली, गाजर, बीन्स, मटर वगैरह का सेवन कर सकते हैं। इन सब्जियों में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जिससे पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- बालों को घना और मजबूत बनाने के लिए अक्सर लोगों को प्याज के रस और चावल के पानी जैसी चीजों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इसमें बहुत से गुण होते हैं, जिनसे कई तरीकों से बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। जानें लंबे और मजबूत बालों के लिए प्याज का रस या चावल का पानी क्या ज्यादा फायदेमंद है?लंबे बालों के लिए प्याज का रसप्याज के रस में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-माइक्रोबियल के गुण होते हैं, साथ ही, इसमें सल्फर कंपाउंड और प्रोटीन जैसे तत्व होते हैं। इसको बालों में लगाने से बालों के स्ट्रक्चर को बेहतर करने, स्कैल्प को शांत करने, स्कैल्प की सूजन को कम करने, बालों को झड़ने से रोकने, शाइनी बनाने, बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव करने, बालों को जड़ों से मजबूती देने और घना बनाने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए कई तरीकों से फायदेमंद होता है।लंबे बालों के लिए चावल का पानीचावल के पानी एक तरह का फर्मेंटेड पानी होता है। इसमें अमीनो एसिड, पेप्टाइड्स, विटामिन-बी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में बालों पर चावल के पानी का इस्तेमाल करने से बालों को अंदर से रिपेयर करने, बालों को मजबूती देने, बालों को शाइनी बनाने, बालों का स्ट्रेस से बचाव करने, बालों को स्मूद बनाने, टूटने से बचाने, बालों को शाइनी बनाए रखने और स्कैल्प के पीएच को बैलेंस करने में मदद मिलती है।लंबे बालों के लिए प्याज का रस या चावल का पानी क्या है फायदेमंद?लंबे, घने और मजबूत बालों के लिए प्याज का रस और चावल का पानी दोनों ही अपने-अपने तरीकों से फायदेमंद हैं। इसका इस्तेमाल अलग-अलग किया जा सकता है। इनका इस्तेमाल करने से बालों को टूटने से रोकने, स्कैल्प की सूजन को कम करने, बालों को टूटने से रोकने, ड्राइनेस को कम करने और शाइनी बनाने में मदद मिलती है।सावधानियांदोनों का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। प्याज के रस या चावल के पानी किसी से भी एलर्जी होने पर इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा, इनमें किसी भी चीज का इस्तेमाल सीमित मात्रा में ही करें। बालों से जुड़ी कोई परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- आयुर्वेद के मुताबिक, सोंठ का सेवन करने से पाचन अग्नि को मजबूत करने में मदद मिलती है। यह शरीर में गर्माहट को बढ़ाकर कफ को पतला करता है और वात में दर्द और अकड़न को दूर करता है। सोंठ लगभग हर बीमारी में फायदेमंद होता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इसका सेवन करने से एचबीए1सी और फास्टिंग ग्लूकोज में सुधार होता है। सोंठ को शुंठी भी कहा जाता है। ड्राई जिंजर और सोंठ अलग है। सोंठ जो बाजार में मिल रहा है वो ज्यादातर नकली होता है इसलिए इसे एक्सपर्ट की सलाह लेकर खरीदें। सोंठ डाइजेशन को बेहतर बनाता है। यह वात-कफ शामक है। साथ ही यह त्रिदोष को भी दूर करने में मदद करता है। इस लेख में जानेंगे वात-कफ दोष में सोंठ के फायदे।वात-कफ दोष के लिए सोंठ के फायदे--वात-कफ दोष में पेट में गैस, अपच, पेट फूलने की समस्या हो सकती है। इसे दूर करने के लिए सोंठ का सेवन फायदेमंद है।-सर्दी-खांसी, बलगम और गले की खराश को दूर करने के लिए सोंठ का सेवन भी फायदेमंद है।-वात दोष में जोड़ों के दर्द और सूजन को दूर करने के लिए सोंठ असरदार है।-शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सोंठ का सेवन करना चाहिए।-वजन कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में भी मदद मिलती है।सोंठ का सेवन कैसे करें?बलगम खांसी है, तो शहद के साथ लें। इसे खाने के बाद घी के साथ भी खाने से पहले ले सकते हैं। अगर पाचन को बेहतर करना है या सर्दी से बचना है, तो इसका काढ़ा बनाकर पी सकते हैं। चाय में भी इसे मिलाकर पी सकते हैं। दिनभर में एक से दो ग्राम सोंठ पाउडर का सेवन कर सकते हैं। ज्यादा मात्रा में सोंठ का सेवन करने से पेट में जलन, एसिडिटी और मुंह में छाले हो सकते हैं। सब्जी, दाल या सूप में सोंठ पाउडर डालकर सेवन कर सकते हैं। दिन में एक सोंठ इसे गुनगुने पानी के साथ ले सकते हैं।सोंठ और अदरक में फर्क हैअक्सर लोग सोंठ को अदरक समझ लेते हैं, लेकिन इन दोनों में फर्क है। अदरक पौधे की ताजी जड़ होती है जबकि सोंठ को सुखाकर बनाया जाता है। अदरक को ठंडी प्रकृति का माना जाता है जबकि सोंठ की तासीर गर्म होती है। पाचन सुधारने के लिए, पेट की गैस दूर करने के लिए या सर्दी-जुकाम होने पर अदरक का सेवन फायदेमंद है जबकि वात और कफ दोष संतुलन, जोड़ों के दर्द, अपच में सोंठ का सेवन ज्यादा फायदेमंद है।
- भारत जैसे देश में रहने वाले ज्यादातर लोग अक्सर जापान की महिलाओं की हेल्दी और ग्लोइंग स्किन का सीक्रेट जानने की कोशिश करते हैं। हालांकि, स्किन का हेल्थ अक्सर बार आपके स्थान के पर्यावरण, पानी, वायु और जेनेटिक कारणों पर निर्भर करता है। लेकिन, इसके बाद भी आप अपनी स्किन को लंबे समय तक जवां और हेल्दी रखने के लिए अच्छे स्किन केयर रूटीन में अच्छी चीजों को शामिल करना बहुत जरूरी है। जापान की महिलाओं की हेल्दी स्किन का राज शेल जिंजर को भी माना जाता है।शेल जिंजर का वैज्ञानिक नाम Alpinia zerumbet है, जो एक तरह का नेचुरल हर्ब है और जापान के साथ पूर्वी एशिया के देशों में पाया जाता है। इस हर्ब को आमतौर पर जापानी महिलाओं की जवां और ग्लोइंग स्किन का राज माना जाता है।शेल जिंजर में विटामिन, एंटी-एजिंग और एंटीऑक्सीडेंट्स गुण पाए जाते हैंं। यही कारण है कि जापानी महिलाएं इसे अपनी स्किनकेयर रूटीन में शामिल करती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की स्टडी के अनुसार, "अल्पिनिया से बनने वाले प्रोडक्ट्स में एसेंशियल ऑयल और अल्पिनिया के अर्क से बने साबुन और कॉस्मेटिक शामिल हैं। अल्पिनिया का इस्तेमाल आमतौर पर सनबर्न के इलाज के लिए भी किया जाता है। अल्पिनिया के पाउडर का इस्तेमाल नहाने के पानी में एडिटिव के तौर पर भी किया जाता है।"1. एंटी-एजिंग गुणशेल जिंजर में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो फ्री रेडिकल्स से लड़कर स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचाने से बचाता है। इसके सेवन से स्किन पर उम्र बढ़ने के लक्षण जैसे झुर्रियां और उम्र बढ़ने के निशान कम दिखते हैं।2. त्वचा को जवां रखेंशेल जिंजर में मौजूद पोषक तत्व स्किन की नमी को बनाए रखने और इसकी लोच बढ़ाने में मदद करते हैं। नियमित रूप से इसका इस्तेमाल करने से स्किन को मुलायम, ग्लोइंग और हेल्दी रखा जा सकता है।3. त्वचा को हाइड्रेट रखता हैशेल जिंजर में मॉइश्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं, जो आपकी स्किन पर ड्राइनेस के कारण होने वाली जलन, खुजली आदि समस्याओं को दूर करने में मदद करता है और स्किन की नमी को बनाए रखता है।4. त्वचा को टोन करता हैशेल जिंजर के नियमित इस्तेमाल से स्किन काफी टाइट और फरर्म महसूस होने लगती है, खासकर आपके माथे, आंखों के आसपास और गाल की स्किन टोन रहती है।5. त्वचा की रंगत में सुधारशेल जिंजर में नेचुरल फ्लेवोनॉयड्स पाए जाते हैं, जो स्किन के टेस्चर को बनाते हैं और डार्क स्पॉट्स के साथ-साथ पिग्मेंटेशन को कम करने में मदद करता है।शेल जिंजर का इस्तेमाल कैसे करें?शेल जिंजर का इस्तेमाल स्किन के लिए काफी हेल्दी माना जाता है। यह एक नेचुरल हर्ब के रूप में काम करता है, जिसका इस्तेमाल आप सीधे अपनी स्किन पर कर सकते हैं। आप शेल जिंजर का फेस मास्क, शेल जिंजर का टॉनिक, शेल जिंजर फेस ऑयल और क्रीम के साथ मिलाकर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ध्यान रहे अगर आप पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो पैच टेस्ट जरूर कर लें।निष्कर्षजापानी महिलाओं की जवां और ग्लोइंग स्किन का राज सिर्फ महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स नहीं, बल्कि शेल जिंजर जैसे नेचुरल हर्ब्स को भी माना जाता है। इसके नियमित इस्तेमाल से चेहरे पर उम्र बढ़ने के लक्षणों को कम करने, स्किन की नमी को बनाए रखने, डार्क स्पॉट्स को कम करने और सन डैमेज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
- आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जिनके नाम तो आम लोगों ने सुने होते हैं, लेकिन उनके असली गुणों और उपयोग के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। नाग केसर भी उन्हीं औषधियों में से एक है। नाग केसर का उपयोग खासतौर पर उन बीमारियों में किया जाता है, जिनमें शरीर के अंदर रक्तस्राव की समस्या होती है।नाग केसर की पहचान क्या है?नाग केसर दिखने में लाल रंग के छोटे-छोटे बीज या कली जैसे होते हैं। इसकी बनावट सूखी होती है और रंग गहरा लाल या भूरा-लाल दिखाई देता है। आयुर्वेद में शुद्ध नाग केसर का चयन बहुत जरूरी माना गया है, क्योंकि मिलावटी या नकली नाग केसर से लाभ नहीं मिलता।नाग केसर की तासीर कैसी होती है?आयुर्वेदिक दृष्टि से नाग केसर की तासीर शीत यानी ठंडी मानी जाती है। डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार नाग केसर वीर्य में भी शीतल होता है, इसलिए यह शरीर की गर्मी, रक्तस्राव और पित्त विकारों को शांत करने में मदद करता है। यही कारण है कि इसे बवासीर, नकसीर और महिलाओं के अत्यधिक रक्तस्राव में विशेष रूप से उपयोग किया जाता है।नाग केसर के फायदे क्या हैं?-नाग केसर ब्लीडिंग पाइल्स यानी खून वाली बवासीर में खासतौर पर लाभकारी माना जाता है।इसके सेवन से मल के साथ आने वाला खून धीरे-धीरे कम हो सकता है।-इसके अलावा महिलाओं में रक्त प्रदर यानी अत्यधिक मासिक रक्तस्राव की समस्या में भी नाग केसर उपयोगी होता है।-नाक से बार-बार खून आना यानी नकसीर की समस्या में भी नाग केसर का उपयोग किया जाता है।-आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर की इंटरनल ब्लीडिंग को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।-साथ ही यह शरीर में जमा टॉक्सिन को कम करके अंदरूनी सफाई में सहायक होता है।बवासीर के लिए नाग केसर का उपयोग कैसे करें?जिन लोगों को ब्लीडिंग पाइल्स की समस्या है, उनके लिए नाग केसर काफी फायदेमंद हो सकता है। नाग केसर चूर्ण को शहद या मिश्री के साथ मिलाकर लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि मात्रा और सेवन की अवधि व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी माना जाता है ।नाग केसर बवासीर में सूजन और जलन को शांत करने के साथ-साथ खून बहने की समस्या को भी कम करता है।नाग केसर के नुकसान क्या हैं?नाग केसर के कोई गंभीर नुकसान नहीं बताए गए हैं लेकिन जिन लोगों को बहुत अधिक या पुरानी कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें नाग केसर का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को भी किसी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए।निष्कर्षनाग केसर आयुर्वेद की एक प्रभावशाली औषधि है, जिसका उपयोग ब्लीडिंग पाइल्स, नकसीर, महिलाओं के रक्त प्रदर और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी समस्याओं में किया जाता है। इसकी तासीर ठंडी होती है और यह वात-पित्त को शांत करने में मदद करता है। हालांकि इसके नुकसान बहुत कम बताए गए हैं, फिर भी कब्ज या अन्य गंभीर समस्याओं में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
- अलसी के इस्तेमाल से बालों को पोषण मिलेगा और रूखे-बेजान बालों की समस्या भी कम होगी। अलसी में मौजूद विटामिन E, विटामिन B और ओमेगा 3 फैटी एसिड बालों की क्वालिटी बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इस लेख में जानिए बालों में अलसी का प्रयोग कैसे करें और इसके फायदे क्या हैं।बालों के लिए अलसी के फायदे-अलसी के बीजों में प्रोटीन की मात्रा अच्छी होती है। अलसी के बीजों से आप तेल बना सकते हैं, जिसके इस्तेमाल से स्कैल्प हेल्दी रहेगी और बालों की जड़ों को भरपूर पोषण मिलेगा और बाल मजबूत होंगे।-सर्दियों के मौसम में अलसी के इस्तेमाल से बालों की कमजोर जड़ों को पोषण मिलेगा। जिससे बालों का झड़ना कम हो सकता है।-अलसी के बीजों से बने तेल के इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होगा, जिससे बालों की ग्रोथ होगी और सफेद बालों की समस्या कम हो सकती है।-अलसी के बीजों में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड बालों को मजबूत और हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकता है।-ड्राई स्कैल्प की समस्या में भी अलसी फायदा करती है, इसके इस्तेमाल से ड्राई स्कैल्प और डैंड्रफ जैसी समस्याएं कम हो सकती हैं।-अलसी में मौजूद बीटा-कैरोटीन बालों को सॉफ्ट और शाइनी बनाने में सहायक हो सकता है।-अलसी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स से बालों की क्वालिटी में सुधार हो सकता है।बालों में अलसी का उपयोग कैसे करेंअलसी हेयर मास्क -अलसी के बीजों से आप हेयर मास्क बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी को पानी में भिगोकर 3 से 4 घंटे के लिए रखें। फिर इसे ब्लेंडर में पीसकर एक स्मूथ पेस्ट बना लें और बालों पर लगाएं। इससे आपके बाल मॉइश्चराइज होंगे।अलसी का तेल -बाजार में आपको अलसी के बीजों का तेल आसानी से मिल जाएगा। आप घर में भी अलसी का तेल बना सकते हैं, इसे बनाने के लिए अलसी के बीजों को हल्का भूनने के बाद पीसें और फिर इसके पाउडर को जैतून के तेल के साथ पकाएं। ठंडा होने पर तेल को बोतल में भरें। इस तेल से स्कैल्प पर हल्के हाथों से मसाज करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और बालों को पोषण मिलता है। इससे बाल मजबूत होते हैं और बाल झड़ने की समस्या कम हो सकती है।अलसी का जेलअलसी के बीजों से जेल बनाना बेहद आसान है। इसे बनाने के लिए जरूरत अनुसार अलसी को रातभर के लिए पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह इसे धीमी आंच पर 15 से 20 मिनट के लिए पकाएं। ठंडा होने पर छानकर अलसी के जेल को अलग कर लें।
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हम सभी चाहते हैं कि हमारे बाल झड़ना भी बंद हो जाएं और साथ ही वह लंबे, घने व मजबूत हो जाएं। लेकिन अगर आप इसी तरह अपनी बालों पर केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते रहेंगे तो स्कैल्प ड्राई होने लगेगी और बालों की हेल्थ बद से बदतर होती रहेगी। ऐसे में हर कोई चाहता है कि उसके बाल खूबसूरत हो जाए और यह तभी संभव है जब आप नेचुरल और असरदार चीजों का इस्तेमाल करें। हमारी प्रकृति में आंवला, रीठा, शिकाकाई, मेहंदी जैसी कई चीजें उपलब्ध हैं जिनका इस्तेमाल आपके बालों की हर समस्या के लिए फायदेमंद हो सकता है।
पहला नुस्खा है स्मूथ हेयर पाने काइस नेचुरल हेयर मास्क को बनाने के लिए 1 चम्मच फ्लैक्स सीड्स और 1 गिलास पानी की जरूरत है। साथ ही अगर आपके बाल लंबे हैं तो सामग्री को बढ़ाया भी जा सकता है। आइए अब हम इस नुस्खे को बनाने का तरीका जानें--सबसे पहले आप एक पैन लें और उसमें पानी व फ्लैक्स सीड्स डालकर हल्की आंच में उबाल लें।-10 मिनट तक उबालने के बाद के बाद आप गैस बंद कर दें और छान लें।-हेयर मास्क को ठंडा होने के लिए छोड़ दें।-ठंडा होने के बाद आप इसे अपने बालों पर लगाएं और फिर 30 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें।-समय पूरा होने के बाद शैम्पू से हेयर वॉश कर लें।-फिर देखें कैसे आपके बालों में सिल्कीनेस आती है।बाल बढ़ाने के लिए असरदार हेयर मास्कबाल बढ़ाने हैं तो आप इस आंवला मेथी वाले हेयर मास्क का इस्तेमालकरें। इसे बनाने के लिए आपको चाहिए 2 गुड़हल के फूल, 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भीगे हुए मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल। सामग्री तो बता दी, आइए अब हम आपको हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने का तरीका बताते हैं।हेयर ग्रोथ मास्क कैसे बनाएं?इस हेयर ग्रोथ मास्क को बनाने के लिए पहले आप एक मिक्सर लें और उसमें गुड़हल के फूल, आंवला पाउडर, पानी सहित भीगे हुए मे मेथी के बीज और 5 चम्मच एलोवेरा जेल डालकर घुमा लें और पेस्ट तैयार कर लें। इस तैयार पैक को आप अपने बालों पर सिरों से लेकर जड़ों तक लगाएं और 30-45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। समय पूरा होने के बाद हेयर वॉश कर लें और फिर देखें कैसे आपके बालों की ग्रोथ बढ़नी शुरु हो जाती है।बालों को मजबूत करेगा आंवला का नुस्खाइसे बनाने के लिए आपको चाहिए 1 चम्मच आंवला पाउडर, 2 चम्मच भृंगराज, 3 चम्मच एलोवेरा जेल और 1 चम्मच कलौंजी। ये सभी चीजें आप इकट्ठा कर लें। इसके बाद सूखे आंवला और भृंगराज पाउडर सहित सभी चीजों को मिक्स करके पेस्ट तैयार कर लें।जब पेस्ट बनकर तैयार हो जाए तो इसके अपने बालों की जड़ों से सिरों तक लगाएं और 45 मिनट तक सूखने के लिए छोड़ दें। जब समय पूरा हो जाए तो बालों को साफ पानी और शैम्पू से धो लें। पहले ही इस्तेमाल में आपको असर दिखेगा और नियमित तौर पर या हफ्ते में जितनी बार भी आप हेयर वॉश करते हैं तो इसका इस्तेमाल करें।बालों को स्मूथ बनाने के लिए आंवला फायदेमंद है।हेयर ग्रोथ के लिए भृंगराज का इस्तेमाल करें।एलोवेरा जेल आपके हेयर को स्ट्रेंथ देने में मदद करेगा। - अच्छे स्वास्थ्य के लिए अक्सर लोगों को नियमित रूप से एक्सरसाइज करने और वॉक करने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से वॉक करने और खाना खाने के बाद भी वॉक करने से वजन कम करने, पाचन को दुरुस्त करने, नींद की गुणवत्ता में सुधार करने, ब्रेन को रिलैक्स करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, साथ ही, इससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। हेल्दी हार्ट के लिए वॉक करना फायदेमंद होता है। ऐसे में कई बार लोगों के मन में सवाल उठता है कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से कितने कदम चलना चाहिए?हेल्दी हार्ट के लिए दिन में कितने कदम चलना चाहिए? -सर्दियों में हार्ट को हेल्दी रखने के लिए रोजाना फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ठंडा मौसम अक्सर कम मूवमेंट और दिल पर ज्यादा दबाव का कारण बनता है। आदर्श रूप से, ज्यादातर वयस्कों को दिल की सेहत के लिए, सर्दियों में भी हर दिन 7 हजार से 10 हजार कदम चलने का लक्ष्य रखना चाहिए, जो लोग कम एक्टिव रहते हैं, बुजुर्ग हैं या जिन्हें हाइपरटेंशन, डायबिटीज या स्थिर दिल की बीमारी जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए ज्यादा सही और सुरक्षित लक्ष्य रोजाना 5 हजार-7 हजार कदम चलना होगा, जिसे धीरे-धीरे सहनशक्ति बढ़ने के साथ बढ़ाया जा सकता है। चलना हेल्दी ब्लड प्रेशर बनाए रखने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने, कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने और सर्दियों से जुड़ी दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है, जो ठंड के कारण ब्लड वेसेल्स के सिकुड़ने से बढ़ जाती हैं।चलते समय इन बातों का रखें ध्यानहार्ट की समस्या से परेशान लोगों को सलाह दी जाती है कि जिससे हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ऐसे में इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।-चलने को छोटे-छोटे सेशन में बांट लें-दिन के गर्म समय में चलें-सही सर्दियों के कपड़े पहनें-बहुत ज्यादा ठंड में अचानक तेज एक्सरसाइज करने से बचें-तेजी से ज्यादा जरूरी है रेगुलरिटी, ऐसे में रोजाना चलें, भले ही सामान्य गति से हो।निष्कर्षदिल के सेहत के लिए सर्दियों में वयस्कों को 1 दिन में 7 हजार से 10 हजार कदम चला चाहिए। वहीं, कम एक्टिव रहने वाले, बुजुर्ग, हाइपरटेंशन, डायबिटीज या दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से 5 हजार-7हजार कदम चलना चाहिए। ऐसा करने से हार्ट के स्वास्थ्य में सुधार करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है, लेकिन नियमित रूप से वॉक करना बेहद जरूरी है। ऐसे में ध्यान रहे, चलने पर परेशानी होने या हार्ट से जुड़ी कोई भी परेशानी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- आंवला के जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं। के जूस और नींबू पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इनमें बहुत से पोषक तत्व और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं, साथ ही, ये दोनों विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स हैं। आंवला के जूस और नींबू पानी में भरपूर विटामिन-सी होता है। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने और स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ऐसे में कई बार सवाल उठता है कि आंवला जूस या नींबू पानी विटामिन-सी की कमी को दूर करने के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है?विटामिन-सी के लिए आंवला का जूस या नींबू पानी?आंवला जूस और नींबू का पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन किया जा सकता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने, शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाने, बीमारियों से बचाव करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, हड्डियों को मजबूती देने, घाव को जल्दी भरने, आयरन के अवशोषण को बेहतर करने, मूड को बेहतर करने और हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।आंवले का जूस और नींबू पानी पीने के फायदेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी होता है। विटामिन-सी के लिए दोनों का सेवन करना फायदेमंद होता है।शरीर को हाइड्रेट करेआंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर को नेचुरल रूप से हाइड्रेट करने और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों ही विटामिन-सी का एक अच्छा सोर्स माना जाता है। इनका सेवन करने से मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे वजन कम करने और पाचन प्रक्रिया में सुधार करने में मदद मिलती है।पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर करेविटामिन-सी से भरपूर आंवले के जूस और नींबू पानी का सेवन करने से शरीर में विटामिन-सी की कमी को दूर करने के साथ-साथ आयरन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने और शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करने में मदद मिलती है।स्किन और बालों को हेल्दी रखेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर में कोलेजन के उत्पादन को बढ़ावा देने, स्किन को हेल्दी और यंग बनाए रखने, बालों को जड़ों से मजबूती देने और बालों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। इनसे बालों और स्किन में एजिंग के लक्षणों से बचाव करने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, सर्दी-खांसी से बचाव करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।शरीर को डिटॉक्स करेआंवले के जूस और नींबू पानी दोनों में विटामिन-सी होता है। ऐसे में इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ शरीर को नेचुरल रूप से डिटॉक्स करने में मदद मिलती है, जिससे शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं और स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।निष्कर्षविटामिन-सी के लिए आंवला के जूस और नींबू के पानी दोनों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन करने से शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन को दुरुस्त करने, मेटाबॉलिज्म को बेहतर करने, आयरन जैसे पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, शरीर को डिटॉक्स करने, स्किन और बालों को हेल्दी रखने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके अलावा, इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इनका सेवन करने से बचें, साथ ही, स्वास्थ्य से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
- सुबह की शुरुआत अक्सर लोग चाय या कॉफी के साथ करना पसंद करते हैं। लेकिन, सवाल यह ये उठता है कि सुबह की शुरुआत किसी हेल्दी ड्रिंक से करनी चाहिए या कॉफी पीने से?सुबह की ड्रिंक क्यों जरूरी है?सुबह उठने के बाद हमारा शरीर 6 से 8 घंटे तक बिना पानी और पोषण के रहता है। ऐसे में सुबह उठने के बाद पहली चीज हम जो भी पीते हैं, उसका सीधा असर हमारे मेटाबॉलिज्म, पाचन, एनर्जी लेवल और हार्मोनल बैलेंस पर पड़ता है। इसलिए, सुबह आप क्या पी रहे हैं यह सोच समझकर पीना चाहिए, ताकि आपकी सेहत पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सके।कॉफी के फायदेऑफिस, कॉलेज या घर पर रहने वाले लोगों को भी कॉफी पीना बहुत पसंद है ऐसे में आइए जानते हैं कॉफी पीने के फायदों के बारे में:-कॉफी में मौजूद कैफीन दिमाग को एक्टिव करने और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।-मूड को बेहतर बनाने में फायदेमंद है-थकान और सुस्ती को कम करता है-वर्कआउट से पहले पीने से परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है।कॉफी के नुकसान-कॉफी पीने के जहां कई फायदे हैं वहीं इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं, जैसे:-खाली पेट कॉफी पीने से एसिडिटी और गैस की समस्या होती है-ज्यादा कॉफी पीने से नींद, एंग्जाइटी और हार्टबीट प्रभावित हो सकती है-डिहाइड्रेशन होने की संभावनाहर्बल टी के फायदे-हर्बल टी जैसे ग्रीन टी, अदरक-नींबू की चाय, दालचीनी की चाय, तुलसी की चाय या कैमोमाइल टी में काफीन नहीं पाया जाता है या बहुत कम होता है, जिस कारण ये शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।-हर्बल चाय पीने से पाचन तंत्र एक्टिव और मजबूत होता है-शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है-इम्युनिटी बूस्ट होती है-स्ट्रेस और सूजन कम होती है-वजन कंट्रोल करने में फायदेमंद हैहर्बल चाय के नुकसानहर्बल चाय पीने से भी कुछ नुकसान है, क्योंकि ज्यादा हर्बल चाय में मौजूद कुछ जड़ी-बूटियां आपके लिए नुकसानदायक होती हैं। एक्सपर्ट की माने तो सुबह खाली पेट हर्बल चाय पीना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद होता है, खासकर अगर आपको एसिडिटी, कब्ज या गैस की समस्या हो। इसलिए, आप ज्यादा मात्रा में हर्बल चाय पीने से बचें और इसकी सामग्रियों का ध्यान रखें, ताकि आपको इसका सही फायदा मिल सके।हर्बल चाय या कॉफी: किसी क्या पीना चाहिए?-हर्बल टी और कॉफी दोनों के फायदे अपने-अपने स्थान पर अलग है। इसलिए आइए जानते हैं कि किसे क्या पीना चाहिए:-अगर आपको एसिडिटी या पेट से जुड़ी समस्या है तो हर्बल चाय आपके लिए बेहतर ऑप्शन है।-लंबे समय तक फोकस चाहिए काम करने के लिए तो आप सीमित मात्रा में कॉपी पी सकते हैं।-तनाव और नींद से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए आप हर्बल चाय पी सकते हैं।-अपने शरीर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए हर्बल चाय पिएं।निष्कर्षहर्बल चाय और कॉफी दोनों के अपने-अपने फायदे हैं, लेकिन सुबह के समय आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हर्बल चाय है। इसलिए, अगर आप सेहत से जुड़ी समस्याओं को दूर करना चाहते हैं तो हर्बल चाय सुबह पीना फायदेमंद होता है, वहीं फोकस बढ़ाने और शरीर को एक्टिव करने के लिए आप कॉफी का सेवन कर सकते हैं। बस ध्यान रखें कि आपको ज्यादा मात्रा में कोई भी चीज लेने से बचना चाहिए।
- आज के दौर में बढ़ती उम्र के निशान चेहरे पर जल्दी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सच में स्किन को जवान बनाए रखने का तरीका बोतलों में बंद है, या फिर इसका जवाब हमारी परंपरा और आयुर्वेद में छिपा है? आयुर्वेद हजारों सालों से यह मानता आया है कि स्किन की सेहत सीधे शरीर के दोषों वात, पित्त और कफ से जुड़ी होती है। जब खासकर वात दोष असंतुलित होता है, तो त्वचा सबसे पहले असर दिखाती है। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि आपकी स्किन के लिए कौन-सा तेल सबसे बेहतर है और किस तरह देसी तेल एजिंग की रफ्तार को कम कर सकते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद काम की है।कौन सा तेल स्किन एजिंग को धीमा करता है?आयुर्वेद के अनुसार स्किन की उम्र बढ़ने का मुख्य कारण वात दोष का असंतुलन होता है। जब वात बढ़ता है, तो स्किन रूखी, बेजान और झुर्रियों वाली हो जाती है। इसके अलावा दोषों का असंतुलन, गलत तेल का उपयोग और ऋतु के अनुसार देखभाल न करना भी स्किन एजिंग को तेज करता है। ''तेल वही फायदेमंद होता है जो दोषों को संतुलित रखे और शरीर की प्रकृति के अनुसार हो।''नॉर्थ इंडिया के लिए सरसों का तेल क्यों है बेहतर?आयुर्वेद के अनुसार नॉर्थ इंडियन लोगों के लिए सरसों का तेल सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह तेल गर्म तासीर का होता है, जो वात दोष को संतुलित करता है। सरसों का तेल पूरे साल उपयोग किया जा सकता है और यह त्वचा में गहराई तक जाकर पोषण देता है। नियमित अभ्यंग से त्वचा में रक्त संचार बेहतर होता है, रूखापन कम होता है और एजिंग की प्रक्रिया धीमी होती है।साउथ इंडिया और नॉर्थ ईस्ट के लिए नारियल तेलसाउथ इंडियन और नॉर्थ ईस्ट के लोगों के लिए नारियल तेल सबसे अच्छा विकल्प है। यह शीतल प्रकृति का होता है और वहां के मौसम व शरीर की प्रकृति के अनुकूल है। नारियल तेल न सिर्फ स्किन को मॉइश्चराइज करता है, बल्कि स्किन पर नेचुरल ग्लो भी लाता है। इसका नियमित उपयोग स्किन बैरियर को मजबूत करता है और समय से पहले झुर्रियां आने से बचाता है।गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में मूंगफली का तेलगुजरात जैसे क्षेत्रों में जहां मूंगफली प्रचुर मात्रा में उगती है, वहां मूंगफली का तेल स्किन के लिए बेहतर माना जाता है। यह तेल वहां के लोगों के दोषों को संतुलित रखता है और त्वचा को पोषण देता है। आयुर्वेद मानता है कि स्थानीय रूप से उगने वाली चीजें शरीर और स्किन के साथ बेहतर तालमेल बनाती हैं।ऋतु के अनुसार तेलआयुर्वेद में ऋतु के अनुसार तेल बदलने पर भी जोर दिया गया है। शिशिर ऋतु यानी शीत काल में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे त्वचा ज्यादा रूखी और बेजान हो सकती है। ऐसे में नॉर्थ इंडिया में तिल के तेल का उपयोग बेहद लाभकारी माना जाता है। तिल का तेल त्वचा को गहराई से पोषण देता है और एजिंग के लक्षणों को कम करता है।स्किन एजिंग स्लो करने के लिए क्या रखें ध्यान?सिर्फ सही तेल ही नहीं, बल्कि सही समय और सही तरीका भी जरूरी है। रोज या सप्ताह में 2-3 बार अभ्यंग, मौसम के अनुसार तेल का चयन और प्राकृतिक तेलों का उपयोग स्किन एजिंग को काफी हद तक धीमा कर सकता है।निष्कर्षआयुर्वेद के अनुसार स्किन एजिंग को स्लो करने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है, क्षेत्र, ऋतु और शरीर की प्रकृति के अनुसार सही तेल का चुनाव। जो तेल जहां उगता है, वही वहां के लोगों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। इसलिए विदेशी तेलों के बजाय सरसों, नारियल, मूंगफली, तिल और घृत जैसे देसी विकल्प अपनाकर आप त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, सॉफ्ट और युवा बनाए रख सकते हैं।
- आयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां ऐसी हैं, जो बहुत पॉपुलर नहीं हैं लेकिन बहुत प्रभावशाली हैं। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बाकुची जिसे त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद आयुर्वेदिक औषधि माना जाता है। खास बात यह है कि इसका प्रभाव त्वचा की बाहरी समस्याओं पर ही नहीं, बल्कि कई अंदरूनी समस्याओं पर भी देखा गया है। आयुर्वेद के साथ-साथ इसके फायदों को विज्ञान ने भी सही माना है। आज इस लेख में हम जानेंगे बाकुची चूर्ण के फायदे।1. सफेद दाग में फायदेमंदबाकुची चूर्ण का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सफेद दाग यानी विटिलिगो से जुड़े मामलों में किया जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, यह त्वचा में रंग देने वाले तत्व मेलानिन की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। बाकुची का वैज्ञानिक नाम Psoralea corylifolia है। कई रिसर्च में भी सामने आया है कि Psoralea corylifolia में पाए जाने वाले Psoralen और Bakuchiol जैसे कंपाउंड्स त्वचा में पिगमेंटेशन से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ क्लिनिकल स्टडीज में Psoralen आधारित थेरेपी को विटिलिगो के इलाज में सहायक पाया गया है। हालांकि इसका असर धीरे-धीरे दिखता है इसलिए इसे आयुर्वेद में लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के रूप में देखा जाता है।2. स्किन इंफेक्शन में राहतआयुर्वेद में बाकुची को प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर माना गया है। दाद, खाज, खुजली और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याओं में इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है।कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि बाकुची में मौजूद एक्टिव कंपाउंड्स फंगस और बैक्टीरिया के ग्रोथ को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि इसे स्किन क्लीनिंग और स्किन डिटॉक्स से जोड़कर देखा जाता है।3. बार-बार निकलने वाले कील-मुंहासे में उपयोगीआजकल की लाइफस्टाइल में मुंहासे सिर्फ टीनएज की समस्या नहीं रह गई है। खराब पाचन, हार्मोनल असंतुलन और बढ़ता स्ट्रेस भी इसकी वजह बनते हैं। आयुर्वेदिक नजरिए से देखा जाए, तो बाकुची चूर्ण शरीर के अंदर जमा अशुद्ध तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। जब अंदर की सफाई बेहतर होती है, तो उसका असर स्किन पर दिखता है। इससे त्वचा जवान बनी रहती है और व्यक्ति अपनी वास्तविक उम्र से कम दिखाई देता है। इसी वजह से ऑयली स्किन और बार-बार पिंपल्स की समस्या में बाकुची को फायदेमंद माना जाता है।4. सोरायसिस और एक्जिमा में भी फायदेमंदसोरायसिस और एक्जिमा जैसी स्किन कंडीशन में स्किन ड्राई, लाल और इरिटेटेड रहती है। आयुर्वेद में बाकुची को स्किन रिपेयरिंग गुणों वाला माना गया है। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इसके बायोएक्टिव कंपाउंड्स स्किन सेल्स के हेल्दी रिन्यूअल को सपोर्ट कर सकते हैं। इसी वजह से इसे क्रॉनिक स्किन डिसऑर्डर में सहायक जड़ी-बूटी माना जाता है।5. पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मददआयुर्वेद में माना जाता है कि अगर पाचन सही है, तो आधी बीमारियां खुद-ब-खुद कंट्रोल में रहती हैं। बाकुची चूर्ण पाचन अग्नि को एक्टिव करने में मदद करता है। यह गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक माना जाता है। जब डाइजेशन बेहतर होता है, तो शरीर पोषक तत्वों को भी सही तरीके से एब्जॉर्ब कर पाता है।कुल मिलाकर आयुर्वेद में त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए बाकुची का प्रयोग पुराने समय से ही किया जाता रहा है। इसके साथ-साथ यह पाचन और इम्यूनिटी को बढ़ाने में भी फायदेमंद है। आधुनिक स्टडीज भी इसके कई पारंपरिक दावों को सपोर्ट करती नजर आती हैं।




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