- Home
- सेहत
- कई लोगों को लगातार एसिडिटी की दिक्कत बनी रहती है। आमतौर पर एसिडिटी को लोग कई तरह की समस्याओं से जोड़कर देखते हैं, जैसे रात को अच्छी नींद न होना, रात को सोने से पहले तली-भुनी चीजों का सेवन कर लेना आदि। क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। इसलिए, जरूरी है कि आप इसे इग्नोर न करें, बल्कि यह क्यों हो रहा है, इसके कारणों को जानने की कोशिश करें।लगातार एसिडिटी होने के कारण-1. गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी)यह एक तरह का पाचन विकार है, जिसमें पेट का एसिड भोजन नली में वापिस लौट आता है। इसी वजह से पेट या सीने में जलन की समस्या बनी रहती है। कई बार जब एसिड वापिस ईसोफेगस की ओर लौटता है, तो इसकी वजह से अजीब गंध और स्वाद भी महसूस होती है। इसके मुख्य लक्षणों की बात करें, तो खाना न पचना, खाना निगलने में दिक्कतें और बार-बार उल्टी जैसा महसूस होना शामिल है।2. क्रॉनिक किडनी डिजीजविशेषज्ञों की मानें, तो क्रॉनिक किडनी डिजीज शरीर में एसिड की मात्रा को बढ़ा देते हैं। ऐसे में शरीर में एसिडोसिस जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि किडनी शरीर से टॉक्सिन्स और एसिड को सही तरह से बाहर नहीं निकाल पा रही है। कहने की जरूरत नहीं है कि एसिड की मात्रा शरीर में बढ़ने से सीने में जलन होने लगती है और उल्टी-मतली जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।3. पेप्टिक अल्सरइस बीमारी में पेट या छोटी आंत की परत में दर्दनाक घाव या छाले हो जाते हैं। ये असल में, पेट में एसिड और डाइजेशन जूस से बनते हैं। आपको बता दें कि ये बीमारी घातक है। यह बैक्टीरिया के कारण हो सकता है। इस तरह की बीमारी होने पर पेट के ऊपरी हिस्से में जलन और दर्द हो सकता है, खाने के तुरंत बाद दर्द होने लगता है। हालांकि, कभी-कभी इस बीमारी के लक्षण नजर नहीं भी आते हैं। इसलिए, आपको इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।4. अपचजैसा कि शब्द से ही स्पष्ट है कि खाने की चीजें न पचने के कारण यह समस्या होती है। "अपच वजह से पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, दर्द और बेचैनी महसूस हो सकती है। असल में अपच एक आम समस्या है। जब पाचन प्रक्रिया सही से काम न करे, तभी यह समस्या देखने को मिलती है। यह अक्सर भोजन की खराब आदतें, जैसे जल्दी खाना या मसालेदार चीजों का अधिक सेवन करने से होती हैं।"5. गॉलस्टोनआपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि पित्ताशय की पथरी के कारण भी एसिडिटी की समस्या हो सकती है। असल में पथरी की वजह से पित्त की नलिकाएं ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसे में पाचन प्रक्रिया बाधित होती है। नतीजतन, पेट में भारीपन महसूस होना, गैस बनना और अपच की समस्या जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। यहां तक कि एसिडटी और सूजन जैसे संकेत भी मरीज में दिखने लगते हैं।निष्कर्षसीने या पेट में जलन हो, तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों पर गौर किया जा सकता है। हां, अगर आपको यह समस्या अक्सर होती है, तो बेहतर है कि आप इसे इग्नोर न करें। यह गॉलस्टोन जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। अगर डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने के बाद भी आप नोटिस करें कि आपकी एसिडिटी कम नहीं हो रही है, तो बेहतर है कि आप डॉक्टर से संपर्क करें अपनी जांच करवाएं।
- आजकल ब्लैक टी काफी ट्रेंड में है। लोग इसे शरीर की कैलोरी बर्न करने के साथ वेट लॉस के लिए पीते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ये फैट बर्नर की तरह काम करता है और लिवर के लिए फायदेमंद है लेकिन बिना एक्सपर्ट से जानें आपको इन बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। ब्लैक टी को लेकर सही जानकारी होना बेहद जरूरी है कि क्या ये पेट के लिए सच में फायदेमंद है? जानते हैं इस बारे मेंक्या पेट के लिए फायदेमंद है ब्लैक टीस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में सेवन करने पर काली चाय पेट के लिए फायदेमंद हो सकती है। इसमें पॉलीफेनॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो सूजन को कम करने और आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं, ये पेट के लिए सच में फायदेमंद हैं जैसेपाचन एंजाइमों को बढ़ावा देने में मददगारकाली चाय यानी ब्लैक टी पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करके पाचन क्रिया में सहायता करती है, जिससे पेट भोजन को बेहतर ढंग से पचा पाता है। इतना ही नहीं, ये आंतों के कामकाज को बेहतर बनाने के साथ बॉवेल मूवमेंट को कंट्रोल को रेगुलेट करने में मददगार है।दस्त में फायदेमंद है काली चायकाली चाय को पीना दस्त में बेहद कारगर तरीके से काम करता है। ब्लैक टी में मौजूद प्राकृतिक यौगिक आंतों की परत को कसते हैं इसलिए यह हल्के दस्त को कम करने में भी सहायक हो सकती है। यही कारण है कि दस्त की समस्या होने पर लोग काली चाय बनाकर पीने को कहते हैं।पेट की तकलीफ और सूजन कम करने में कारगरगर्म काली चाय पेट की तकलीफ और सूजन को भी शांत कर सकती है। जिन लोगों को ब्लोटिंग की समस्या रहती है उनके लिए काली चाय पीना बेहद कारगर हो सकता है। ये सूजन को कम करने के साथ आपके पेट की परतों को आराम दे सकता है जिससे आप बहुत ज्यादा राहत महसूस कर सकते हैं।इन स्थितियों में बिलकुल भी न पिएं ब्लैक टीआपको ब्लैक टी आंख बंद करके नहीं पीनी चाहिए। ब्लैक टी में कैफीन होता है, जो पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ा सकता है। एसिडिटी, एसिड रिफ्लक्स या अल्सर से पीड़ित लोगों के लिए, बहुत अधिक काली चाय पीने से लक्षण और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञ बेहतर पेट स्वास्थ्य के लिए दूध और चीनी के बिना काली चाय पीने की सलाह देते हैं।ध्यान दें कि इसे भोजन के बाद पीना सबसे अच्छा है, खाली पेट नहीं। कुल मिलाकर, संतुलित आहार के हिस्से के रूप में और सीमित मात्रा में सेवन करने पर काली चाय पेट के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है। हालांकि, अगर आप भी ले भी रहे हैं तो पहले अपने डॉक्टर से बाक करें, अपनी स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए इसका सेवन करें।ब्लैक टी पीने से क्या फायदा होता है?ब्लैक टी में कैफीन और एल-थीनाइन होता है, जो अलर्टनेस बढ़ाने के साथ मूड को बेहतर बनाता है और आपको हेल्दी रखने में मददगार है। इसके एंटीऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को तेज करने के साथ शरीर की स्फूर्ति बढ़ाने में मददगार हैं।क्या ब्लैक टी से पेट की चर्बी बर्न हो सकती है?क्या ब्लैक टी से पेट की चर्बी आसानी से बर्न हो सकती है। इसमें मौजूद फ्लेवोनोइड, विशेष रूप से थियोफ्लेविन्स, फैट मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने में मददगार है। जब आप इसे रेगुलर पीते हैं तो शरीर से फैट की मात्रा कम होने लगती है और इस प्रकार से आपको वेट लॉस में मदद मिल सकती है।क्या फैटी लिवर के लिए ब्लैक टी ठीक है?ब्लैक टी में मौजूद सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्व शरीर को डिटॉक्स करने के साथ फैटी लिवर की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे लिवर के सेल्स का कामकाज तेज होता है और लिवर की सेहत बेहतर होती है। इससे लिवर अंदर से हेल्दी रहते हैं।
- सर्दियां आने के साथ लोग तिल-गुड़ से बनी चीजों को ज्यादा खाने लगते हैं। हर किसी के घर में तिल और गुड़ से तिलपट्टी और तिलकुट जरूर बनते हैं। इसके अलावा लोग तिल के लड्डू और तिल की रेवड़ी बनाकर महीनों तक खाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी ज्यादा मात्रा में तिल और गुड़ का सेवन सेहत को कैसे प्रभावित कर सकता है। दरअसल, ये दोनों ही गर्म प्रकृति वाले फूड हैं। इनका ज्यादा सेवन पित्त बढ़ाने के साथ पेट की गर्मी बढ़ाने का काम करता है जिससे दूसरी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इतिल गुड़ ज्यादा खाने के नुकसानतिल और गुड़ का अधिक सेवन स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। तिल में कैलोरी और फैटकी मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका अधिक सेवन वजन बढ़ा सकता है। इसके अलावा गुड़ का ज्यादा सेवन शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है इसलिए आपको ज्यादा तिल गुड़ खाने से बचना चाहिए। साथ ही ये तमाम कारण भी हैं जिनकी वजह से आपको तिल-गुड़ खाने से बचना चाहिए।पेट में सूजन हो सकती हैतिल गुड़ ज्यादा खाने से आपके पेट में सूजन की समस्या हो सकती है। दरअसल, जब आप इन दोनों को खाते हैं तो पेट संबंधी समस्याएं परेशान करती हैं जैसे शरीर में सूजन, गैस या दस्त। ये आपकोब्लोटिंग के रूप में महसूस हो सकता है और लंबे समय तक परेशान कर सकता है। कुछ लोगों को ज्यादा मात्रा में तिल-गुड़ खाने पर भरा-भरा और असहज महसूस हो सकता है।एसिडिटी और सीने में जलनजब आप ज्यादा मात्रा में तिल-गुड़ का सेवन करते हैं तो आपको एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या महसूस हो सकती है। दरअसल, तिल और गुड़ को पचाना आसान नहीं होता और जब ये पूरी तरह से पच नहीं पाता तो गैस की दिक्कत होती है और GERD के लक्षणों में आपको एसिडिटी महसूस हो सकती है।ब्लड शुगर बढ़ सकता हैगुड़ एक प्रकार की चीनी है और इसका अधिक सेवन ब्लड शुगर के स्तर को बढ़ा सकता है जो डायबिटीज के रोगियों के लिए खतरनाक हो सकता है। अधिक गुड़ खाने से PCOD की दिक्कत और शुगर सेंसिटिव लोगों को नुकसान हो सकता है। इससे सिर दर्द और हार्मोनल हेल्थ भी प्रभावित हो सकता है इसलिए आप तिल गुड़ खाने से बचना चाहिए।शरीर की गर्मी बढ़ने से हो सकती है ये दिक्कतये दोनों खाद्य पदार्थ शरीर में गर्मी उत्पन्न करते हैं और इनका अधिक मात्रा में सेवन करने से मुंह के छाले, त्वचा पर दाने या नाक से खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आपकी भूख भी प्रभावित हो सकती है इसलिए आपको तिल गुड़ के ज्यादा सेवन से बचना चाहिए।तिल कब नहीं खाना चाहिए?तिल की तासीर गर्म होती है और इसका ज्यादा सेवन आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में जिन लोगों को डायबिटीज, एलर्जी, पेट से जुड़ी समस्याएं या पित्ताशय की बीमारी हो उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए।काले तिल के साइड इफेक्ट क्या हैं?काला तिल पचाना किसी के लिए भी आसान नहीं होता और ज्यादा खाने से एसिडिटी, दस्त और गर्मी बढ़ने की वजह से त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।सबसे अच्छा काला या सफेद तिल कौन सा है?सफेद और काले तिल, दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद हैं लेकिन काले तिल में आयरन की मात्रा ज्यादा होती है जिससे सेहत को ज्यादा फायदे मिल सकते हैं। इसलिए आप इसका सेवन करें।
- औषधीय गुणों से भरपूर अजवाइन और सोंठ में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। इनका इस्तेमाल ज्यादातर लोग मसाले के तौर पर भी करते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है, लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता क्या इनका सेवन साथ में किया जा सकता है और इनको साथ खाने से क्या होगा?अजवाइन, सोंठ और काला नमक साथ खाने के फायदे?आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और औषधीय गुण से भरपूर अजवाइन, सोंठ और काले नमक में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। अजवाइन में अच्छी मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्व होते हैं, साथ ही, इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-वायरल के गुण होते हैं। वहीं, सोंठ में अच्छी मात्रा में विटामिन्स, मिनरल्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। ऐसे में इनको काले नमक के साथ खाने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।पाचन को दुरुस्त करेअजवाइन, सोंठ और काले नमक में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से गैस, अपच, ब्लोटिंग, पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने, पाचन के लिए जरूरी एंजाइम्स को बढ़ावा देने और पेट से जुड़ी समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें।सूजन कम करेअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से शरीर की सूजन कम करने, दर्द को कम करने, मांसपेशियों को दुरुस्त करने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।इम्यूनिटी बूस्ट करेअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-बैक्टीरियल के गुण होते हैं। इसका सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी को बूस्ट करने, इंफेक्शन से बचाव करने और बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है। इससे स्वास्थ्य दुरुस्त रहता है।श्वसन तंत्र के लिए फायदेमंदअजवाइन और सोंठ में अच्छी मात्रा में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण होते हैं। ऐसे में इसका सेवन करने से श्वसन तंत्र को दुरुस्त करने, गले की सूजन को कम करने, गले का इंफेक्शन से बचाव करने, सर्दी-खांसी से बचाव करने और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में मदद मिलती है।मांसपेशियों के लिए फायदेमंदअजवाइन और सोंठ की तासीर गर्म होती है। ऐसे में इनको हल्के गुनगुने पानी के साथ लेने से मांसपेशियों के दर्द, ऐंठन और सूजन को कम करने में मदद मिलती है, जिससे मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे जोड़ों की ऐंठन कम होती है, साथ ही, इससे शरीर को गर्म रखने में भी मदद मिलती है।वजन कम करेअजवाइन और सोंठ को काले नमक के साथ लेने से शरीर की चर्बी को कम करने, मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करने औप वजन कम करने में मदद मिलती है। ये स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।निष्कर्षअजवाइन, सोंठ और काला नमक में बहुत से पोषक तत्व और औषधीय गुण होते हैं। इसका सेवन करने से पाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने, सूजन को कम करने, इम्यूनिटी को बूस्ट करने, मांसपेशियों को दुरुस्त करने, श्वसन तंत्र को दुरुस्त करने और वजन कम करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इनका सेवन सीमित मात्रा में करें और इनसे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इनका सेवन करने से बचें। इसके अलावा, कोई भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
-
आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में सुबह या शाम समय निकालकर योग करना हर किसी के लिए मुश्किल हो गया है। लोगों के पास इतना समय भी नहीं है कि वो योग करके अपनी सेहत का ध्यान रख सकें। ये दिक्कत सबसे ज्यादा उन लोगों के सामने आती है, जो ऑफिस में घंटों बैठकर काम करते हैं। लगातार काम करने की वजह से शरीर काफी थक जाता है। ऐसे में उनके लिए योग काफी अहम होता है।
अगर आप दफ्तर में ही बैठे-बैठे कुछ आसान योगासन कर लें तो आपका शरीर और दिमाग दोनों तरो-ताजा रह सकते हैं। ऑफिस में डेस्क पर बैठकर किया जाने वाला योग न सिर्फ शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करता है बल्कि तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने में भी मदद करता है। इस लेख में हम ऐसे सरल योगासन और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बताएंगे जिन्हें आप अपनी या कुर्सी पर बैठकर कर सकते हैं।
नेक स्ट्रेच
इसके लिए कुर्सी पर सीधे बैठ जाएं और पीठ को पूरी तरह सीधा रखें। अब अपनी धीरे-धीरे गर्दन को दाईं ओर झुकाएं और लगभग 5 सेकंड तक वहीं रुकें। फिर बाईं ओर झुकाएं और वहीं कुछ सेकंड रुकें। इसके बाद गर्दन को धीरे-धीरे आगे और फिर पीछे झुकाएं। इस प्रक्रिया को 5–6 बार दोहराएं। नेक स्ट्रेच करने से गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन बढ़ता है और लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने से होने वाला दर्द और तनाव कम होता है।
शोल्डर रोल्स
सीधा बैठकर कंधों को ऊपर उठाएं। अब कंधों को धीरे-धीरे पीछे की दिशा में गोल घुमाएं और 5–6 बार दोहराएं। फिर कंधों को आगे की दिशा में भी गोल घुमाएं। शोल्डर रोल्स करने से कंधों की जकड़न दूर होती है और पीठ और गर्दन की रक्त-संचार बेहतर होती है। ये अभ्यास तनाव कम करने और लंबी बैठने से होने वाली थकान मिटाने में बहुत मददगार है।
वॉटर बॉटल एक्सरसाइज
एक हल्की पानी की बोतल (250–500ml) लें और दोनों हाथों में पकड़ें। अब हाथों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और फिर नीचे लाएं। इस क्रिया को 10–12 बार दोहराएं। ये भी एक सरल एक्सरसाइज है, जोकि हाथ और कंधों की मांसपेशियों की ताकत बढ़ाती है, साथ ही ऑफिस में बैठे-बैठे होने वाले तनाव और अकड़न को कम करती है।
सीटेड लेग स्ट्रेच
कुर्सी पर सीधे बैठें और दोनों पैर जमीन पर रखें। अब एक पैर को धीरे-धीरे आगे बढ़ाएं और एड़ी को ऊपर-नीचे हिलाएं। 10–15 बार करने के बाद दूसरे पैर से भी दोहराएं। सीटेड लेग स्ट्रेच करने से पैरों की मांसपेशियों में खिंचाव कम होता है, रक्त-संचार बेहतर होता है और लंबे समय तक बैठने से होने वाली थकान दूर होती है। - चाहे ऑफिस हो या स्कूल लोग या बच्चे घर से निकलते समय टिफिन जरूर ले जाते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि टिफिन बॉक्स का मटेरियल आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है? हमारी भागदौड़ भरी जिंंदगी में, खासकर ज्यादा ह्रयूमिडिटी वाले शहरोंं में, लंच पैक करने का सही तरीका आजमाना बहुत जरूरी है, लेकिन गलत डिब्बे में खाना रखने से खाने में हानिकारक केमिकल मिल सकते हैं, जिससे हार्मोन असंतुलन, पाचन की समस्या और यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।सबसे अच्छे टिफिन बॉक्स मटेरियल-1. स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8-खाने के लिए वे सबसे अच्छे मटेरियल के तौर पर स्टेनलेस स्टील ग्रेड 304 या 18/8 को देखते हैं। ये नींबू चावल या करी जैसे खट्टे खाने के साथ भी रिएक्शन नहीं करते, बीपीए-फ्री होते हैं और कोई जहरीला तत्व नहीं छोड़ते। स्टील के टिफिन में खाने का स्वाद नहीं बदलता, जंग नहीं लगती और साफ करना भी आसान होता है। जर्नल ऑफ फूड साइंंस की रिसर्च के अनुसार, अगर स्टील के टिफिन को ठीक से इस्तेमाल किया जाए, तो इनमें से भारी धातुएं नहीं निकलतीं। भारतीय खाने के लिए लीक-प्रूफ और इंसुलेटेड स्टील टिफिन चुनें।2. कांच के डिब्बे-इनमें खाना साफ दिखाई देता है और ये नॉन-पोरोस होते हैं यानी इस मटेरियल में पानी, तेल या खाने के कण अंदर नहीं जाते, जिससे बैक्टीरिया नहीं पनपते। बोरोसिलिकेट गिलास माइक्रोवेव में सुरक्षित रहता है। सलाद या सब्जी दोबारा गर्म करने के लिए ये बेहतरीन हैं क्योंकि इनमें कोई केमिकल नहीं निकलता।3. फूड ग्रेड सिलिकॉन-फूड ग्रेड सिलिकॉन हल्का, लचीला और 220°C तक गर्मी सहने वाला मटेरियल होता है। इस मटेरियल के टिफिन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नॉन-टॉक्सिक होता है, दाग नहीं पकड़ता और छोटे हिस्सों में खाना रखने के लिए अच्छा है। हमेशा 100% प्लैटिनम क्योर सिलिकॉन ही लें।सबसे खराब टिफिन मटेरियल1. प्लास्टिक-अक्सर प्लास्टिक वाले टिफिन में बीपीए, थैलेट्स या स्टाइरीन होते हैं, जो गर्म करने या ऑयली और खट्टी चीजों के साथ भोजन में मिल जाते हैं। एंडोक्राइन सोसाइटी की स्टडी बताती है कि गर्मी से ये केमिकल जल्दी निकलते हैं जिससे मोटापा, बांझपन और हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक को रीसायकल करने से भी वह सुरक्षित नहीं बनता।2. बिना कोटिंग वाला एल्युमिनियमबिना कोटिंग वाला एल्युमिनियम खट्टे खाने के साथ रिएक्शन करके धातु जैसा स्वाद देता है और शरीर में एल्युमिनियम जमा हो सकता है। यह अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जुड़ा माना जाता है। जरूरी हो तो केवल एनोडाइज्ड या कोटेड एल्युमिनियम ही लें।3. मेलामाइन-दिखने में यह मटेरियल सिरेमिक जैसा लगता है, लेकिन गर्म खाने पर इसमें से फॉर्मेल्डिहाइड (CH₂O) या रासायनिक यौगिक निकलता है, जो अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के मुताबिक संभावित कैंसरकारक है। सस्ते टिफिन में इसका मौजूद होना आम बात है इसलिए इससे पूरी तरह से बचें।निष्कर्ष:खाने में टिफिन के जरिए टॉक्सिन कम होने से पाचन और एनर्जी दोनों में सुधार आता है। इसलिए अच्छी सेहत के लिए प्लास्टिक, बिना कोटिंग वाले एल्युमिनियम, मेलामाइन से बचें और स्टेनलेस स्टील या गिलास जैसे मटेरियल के टिफिन का इस्तेमाल करें।
- हर नए साल की शुरुआत में लोग हेल्दी खाने का संकल्प लेते हैं लेकिन कुछ ही हफ्तों में फिर से पुरानी आदतों में लौट जाते हैं। इसकी वजह यह नहीं होती कि लोग कोशिश नहीं करते बल्कि यह होती है कि वे बहुत हार्ड या ऐसी डाइट चुन लेते हैं जो भारतीय खाने और रोजाना की लाइफस्टाइल के हिसाब से सही नहीं बैठती। फड डाइट और विदेशी खाने के ट्रेंड कुछ दिनों तक तो चल जाते हैं लेकिन लंबे समय तक निभाना मुश्किल होता है।शरीर को किसी थोड़े समय की डाइट नहीं बल्कि ऐसी आसान और टिकाऊ खानपान की जरूरत होती है जिसे रोज अपनाया जा सके। NFHS-5 के अनुसार करीब 56% भारतीय वयस्क पोषण की कमी या असंतुलन से जूझ रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह गलत खानपान और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन है।भोजन के बारे में होम्योपैथी क्या कहती है?होम्योपैथी के अनुसार खाना सिर्फ शरीर को ऊर्जा देने का जरिया नहीं है बल्कि यह शरीर की 'वाइटल फोर्स' यानी अंदरूनी ऊर्जा से जुड़ा होता है। यही ऊर्जा शरीर का संतुलन बनाए रखती है और बीमारियों से लड़ने में मदद करती है। इसलिए होम्योपैथी में टिकाऊ और संतुलित पोषण को अच्छी इम्युनिटी, बेहतर पाचन, मानसिक स्पष्टता और हार्मोन बैलेंस का आधार माना जाता है।क्यों बेहतर है टिकाऊ डाइट?सख्त डाइट की तुलना में टिकाऊ डाइट इसलिए ज्यादा असरदार मानी जाती है क्योंकि भारतीय शरीर स्वाभाविक रूप से घर के बने अनाज, दाल, सब्जियों और पारंपरिक मसालों के अनुसार ढला हुआ है। बहुत सख्त या सीमित डाइट कुछ समय के लिए वजन तो घटा सकती है, लेकिन लंबे समय तक उसे निभाना मुश्किल हो जाता है और लोग जल्दी हार मान लेते हैं। अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि खाने से सब कुछ हटाने के बजाय संतुलित भोजन किया जाए, कैलोरी गिनने के तनाव में पड़ने के बजाय मौसमी और ताजा खाना चुना जाए और खुद को भूखा रखने के बजाय सही मात्रा में भोजन लिया जाए। इसी सोच के साथ भारतीयों के लिए बनाया गया यह आसान न्यू ईयर मील प्लान एक सामान्य और लचीला गाइड है जिसे अधिकतर लोग अपनी रोजाना की जिंदगी में बिना किसी परेशानी के आसानी से अपना सकते हैं और लंबे समय तक स्वस्थ रह सकते हैं।सुबह उठते ही क्या करें?सुबह उठते ही गुनगुना पानी पीना, चाहे नींबू के साथ हो या बिना, पाचन तंत्र को एक्टिव करने में मदद करता है। चाहें तो इसके साथ 2 भीगे हुए बादाम और 1 भीगी हुई खजूर ली जा सकती है, जिससे शरीर को हल्की एनर्जी मिलती है। होम्योपैथी के अनुसार, दिन की शुरुआत में पाचन सही रहने से पूरे दिन का मेटाबॉलिज़्म संतुलित रहता है और शरीर की आंतरिक ऊर्जा बेहतर तरीके से काम करती है।ऐसा होना चाहिए आपका नाश्तानाश्ते में रोज इन चीजों में से किसी एक को चुना जा सकता है जैसे सब्जियों वाला पोहा या उपमा जिसमें मूंगफली शामिल हो, मल्टीग्रेन पराठा घर की बनी दही के साथ, इडली या डोसा सांभर के साथ या फिर ओट्स और रागी की खीर फल के साथ। ये सभी नाश्ते पोषण से भरपूर होते हैं, जिससे ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है, देर तक भूख नहीं लगती और पाचन तंत्र सही तरीके से काम करता है।मिड-मॉर्निंग स्नैकमिड-मॉर्निंग में हल्का और हेल्दी स्नैक लेना फायदेमंद होता है। इस दौरान अमरूद, पपीता, केला या संतरा जैसे ताजे फल खाए जा सकते हैं, साथ ही नारियल पानी भी एक अच्छा विकल्प है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार, फल शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और एंटीऑक्सिडेंट स्तर बढ़ाकर कई बीमारियों से बचाव में मदद करते हैं।दोपहर का खानादोपहर के भोजन में संतुलित थाली बेहद जरूरी होती है। इसमें 1-2 मल्टीग्रेन रोटी या 1 कटोरी चावल, साथ में दाल, राजमा या छोले की एक कटोरी, मौसमी सब्ज़ी और गाजर, खीरा व चुकंदर का सलाद शामिल करें। दही या छाछ पाचन को बेहतर बनाती है। होम्योपैथी के अनुसार शरीर की लगभग 70% इम्युनिटी पेट से जुड़ी होती है, इसलिए लंच का सही और हल्का होना बहुत जरूरी है।इवनिंग स्नैक्सशाम के नाश्ते में तले-भुने या पैकेट वाले खाने की जगह हल्के और पौष्टिक विकल्प चुनें। भुने चने या मूंगफली, स्प्राउट्स की चाट, तुलसी-अदरक या दालचीनी वाली हर्बल चाय और थोड़ा सा फल शरीर को ऊर्जा देते हैं, पाचन पर बोझ नहीं डालते और शाम की भूख को हेल्दी तरीके से कंट्रोल करते हैं।रात का खाना हल्का रखेंरात का खाना हमेशा हल्का और आसानी से पचने वाला रखें। सब्ज़ियों वाली खिचड़ी, दाल का सूप एक रोटी के साथ, ग्रिल्ड पनीर या चिकन के साथ सब्ज़ियां या वेज दलिया अच्छे विकल्प हैं। सोने से 2-3 घंटे पहले डिनर करने से पाचन ठीक रहता है, नींद की गुणवत्ता सुधरती है और शरीर को रात में बेहतर तरीके से रिकवर करने का समय मिलता है।हफ्ते में शामिल करेंहफ्ते में अपनी डाइट में बाजरा, ज्वार और रागी जैसे मिलेट्स कम से कम दो बार जरूर शामिल करें। साथ ही दही, छाछ और कांजी जैसे प्रोबायोटिक्स पाचन और इम्युनिटी को मजबूत करते हैं। मीठे के लिए रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें और नट्स व बीजों को डाइट में जोड़ें क्योंकि ये शरीर को अच्छी फैट और लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं।किन चीजों से दूरी बनाएंअच्छी सेहत बनाए रखने के लिए कुछ आदतों से दूरी बनाना जरूरी है। ज्यादा तला-भुना खाना जैसे समोसा, पकौड़े और कचौड़ी पाचन पर बोझ डालते हैं, वहीं ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां वजन और ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी और देर रात भारी खाना शरीर की प्राकृतिक लय बिगाड़ता है, इसलिए इनका सेवन जितना कम किया जाए उतना बेहतर है।डाइट के साथ ये आदतें भी अपनाएंडाइट के साथ कुछ अच्छी आदतें अपनाना भी जरूरी है। रोजाना 20-30 मिनट टहलने से शरीर एक्टिव रहता है, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहतर है, खासकर गुनगुना पानी। खाना खाते समय मोबाइल से दूर रहकर ध्यान से खाना चाहिए। नियमित और पूरी नींद लेना तथा सुबह की धूप से प्राकृतिक विटामिन डी लेना भी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
- सर्दियों में ज्यादातर लोगों को सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इसलिए इस मौसम में शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए ज्यादातर लोग तरह-तरह की चीजों का सेवन करते हैं। इसमें आप सूप भी शामिल कर सकते हैं। सूप पीने से भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। अगर आप अपनी विंटर डाइट में सूप शामिल करेंगे, तो इससे कई रोगों और संक्रमणों से भी बचाव संभव है।टमाटर का सूप पिएंसर्दियों में टमाटर का सूप पीना बेहद फायदेमंद होता है। टमाटर के सूप में लाइकोपीन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। टमाटर का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है और कई संक्रमणों से बचाव होता है। टमाटर का सूप पीने से सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। टमाटर का सूप पीने से पाचन-तंत्र में सुधार होता है और इससे जुड़ी समस्याएं ठीक होती हैं।मशरूम का सूप पिएंसर्दियों में आप मशरूम का सूप पी सकते हैं। मशरूम में विटामिन डी होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है। सर्दियों में फिट और हेल्दी रहने के लिए आपको मशरूम का सूप जरूर पीना चाहिए। मशरूम का सूप पीने से शरीर की इम्यूनिटी बूस्ट होती है और सर्दियों में होने वाले कई रोगों से बचाव होता है। मशरूम का सूप एनीमिया रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। अगर आप रोजाना मशरूम का सूप पिएंगे, तो इससे में गर्माहट बनी रहेगी और आप हेल्दी महसूस करेंगे।दाल का सूप पिएंदाल का सूप सेहत के लिए काफी अच्छा होता है। आपको अपनी रोज की डाइट में दाल का सूप जरूर शामिल करना चाहिए। आप घर पर ही दाल का सूप आसानी से बना सकते हैं। दाल में विटामिन्स और मिनरल्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, तो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। सर्दियों में दाल का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है और कई तरह के संक्रमण दूर होते हैं। सर्दियों में रोज शाम को एक बाउल दाल का सूप जरूर पीना चाहिए।पालक का सूप पिएंसर्दियों में आपको पालक का सूप जरूर पीना चाहिए। पालक में कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। अगर आप सर्दियों में रोजाना पालक का सूप पिएंगे, तो इससे हड्डियां मजबूत बनेंगी और हीमोग्लोबिन का स्तर भी बढ़ेगा। पालक का सूप पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनती है। रोजाना पालक का सूप पीने से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। शरीर में गर्माहट बनी रहती है और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। आप शाम को चाय की जगह पालक का सूप पी सकते हैं।ब्रोकली का सूप पिएंसर्दियों में ब्रोकली का सूप पीना बेहद लाभकारी होता है। ब्रोकली में विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए जरूरी होते हैं। इसके लिए आप ब्रोकली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और इसमें प्याज-लहसुन मिलाकर अच्छी तरह से पका लें। आप इसमें पालक भी मिक्स कर सकते हैं। रोजाना ब्रोकली का सूप पीने से पाचन-तंत्र मजबूत बनता है और रोगों से बचाव होता है।
- सुबह उठते ही टखनों में जकड़न होना एक आम समस्या है। इसका कारण रातभर शरीर की कम मूवमेंट, ब्लड सर्कुलेशन धीमा होना या अर्थराइटिस, प्लांटर फैसीसाइटिस और काफ मसल्स का टाइट होना हो सकता है। सिंपल मोबिलिटी स्ट्रेच से कई मरीजों को काफी राहत मिली है। ये एक्सरसाइज जॉइंट में लुब्रिकेशन बढ़ाती हैं, ब्लड फ्लो बेहतर करती हैं और फ्लेक्सिबिलिटी सुधारती हैं। इन्हें रोज सुबह उठते ही करें। हर स्ट्रेच को 20 से 30 सेकंड तक होल्ड करें और गहरी सांस लेते रहें। अगर पहले से कोई चोट या क्रॉनिक बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इ1. एंकल सर्कल्स-बिस्तर के किनारे बैठें या कुर्सी पकड़कर खड़े हो जाएं।-एक पैर जमीन से ऊपर उठाएं, घुटना थोड़ा मोड़ा रखें।-अब टखने को धीरे-धीरे 10 बार घड़ी की दिशा में और 10 बार उल्टी दिशा में घुमाएं।-यह मूवमेंट जॉइंट और टेंडन को एक्टिव करता है, रात की जकड़न को कम करता है और टखने में मौजूद लिक्विड के सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। फिर दूसरा पैर बदलें।2. तौलिये से काफ स्ट्रेच करें--पीठ के बल लेट जाएं और पैर को सीधा रखें।-एक पैर के पंजे में तौलिया या बेल्ट डालें।-अब तौलिए को हल्के से अपनी तरफ खींचें, घुटना सीधा रखें।-काफ मसल और एड़ी के पास गहरी स्ट्रेच महसूस होगी।-झटके न दें। हर पैर पर 3 बार दोहराएं।-टाइट काफ मसल्स टखनों पर दबाव डालती हैं, यह स्ट्रेच चलने में जरूरी फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाती है।3. अल्फाबेट राइटिंग विद एंकल- आराम से बैठें और अपने पैर के अंगूठे से हवा में A से Z तक अक्षर लिखें।-धीरे-धीरे और कंट्रोल के साथ करें।-इस एक्सरसाइज से टखने की हर दिशा में मूवमेंट होती है और लंबे समय तक बैठने या गलत चाल से बने असंतुलन को ठीक करने में मदद मिलती है।निष्कर्ष:एड़ी का दर्द दूर करने के लिए नियमितता बहुत जरूरी है। साथ में सही फुटवियर पहनें, पानी पर्याप्त पिएं और हल्दी जैसे एंटीइंफ्लामेटरी फूड्स को डाइट में शामिल करें। अगर जकड़न लगातार बनी रहती है, तो यह गाउट या टेंडोनाइटिस का संकेत हो सकता है, ऐसे में डॉक्टर से जांच कराएं।
-
अगर आप चाहते हैं कि स्किन में बढ़ती उम्र के लक्षण नजर न आएं, तो इसके लिए आवश्यक है कि आप अपनी स्किन की अच्छी तरह देखभाल करें। क्या आप जानते हैं कि झुर्रियों को कम करने के लिए आप अरंडी के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसे यूज कैसे करना है, यह भी आपको पता होना चाहिए।
चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के फायदे-
1. सबसे पहले लें पैच टेस्टअरंडी के तेल को स्किन पर यूज करने से पहले पैच टेस्ट लेना न भूलें। इसके लिए आप अरंडी के तेल की कुछ बूंदें लें और अपनी स्किन पर अप्लाई करें। करीब 24 घंटे तक इसे ऑब्जर्व करें। अगर एलर्जिक रिएक्शन हो, तो इसे दोबारा यूज न करें।2. चेहरा साफ करेंजब भी आप अरंडी का तेल यूज करें, तो सबसे पहले अपने चेहरे को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके लिए क्लींजर यूज करना अच्छा होता है। अगर आप रात को सोने से पहले इसे यूज करना चाहते हैं, तो बेहतर है कि अपना मेकअप रिमूव कर लें। इसके बाद चेहरे को क्लीन करें। इससे चेहरे में जमा एक्स्ट्रा ऑयल रिमूव हो जाता है।3. अरंडी का तेल चेहरे पर लगाएंअरंडी के तेल की सिर्फ दो से तीन बूंदों को अपनी फिंगर टिप पर लें और इसे सर्कुलर मोशन में अपने चेहरे पर अप्लाई करें। विशेषकर, जिन हिस्सों में झाइयां और झुर्रियां हो रही हैं, जैसे माथा या अंडर आई इसे अप्लाई करें और हल्के हाथों से मसाज करें। आप चाहें, तो इसे अपनी गर्दन पर भी लगा सकते हैं।4. रात भर चेहरे पर लगा रहने देंअगर आप अपनी स्किन को डीप कंडीशनिंग करना चाहते हैं, हाइड्रेट रखना चाहते हैं, तो चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के बाद इसे रात भर के लिए अपने चेहरे पर लगा छोड़ दें। अरंडी के तेल में कई तरह के न्यूट्रिएंट्स और फैटी एसिड्स होते हैं, जो कि स्किन में गहराई तक एब्जॉर्ब होते हैं। इससे स्किन नॉरिश होती है और त्वचा का निखार भी बढ़ता है।चेहरे पर अरंडी का तेल लगाने के फायदे-अरंडी का तेल लगाने स्किन डीप मॉइस्चर होती है।-अरंडी के तेल में इमोलिएंट होता है, जो कि स्किन की नेचुरल प्रोटेक्टिव लेयर को सुरक्षित रखती है।-अरंडी के तेल में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो फ्री रेडिकल से त्वचा की रक्षा करते हैं।-अरंडी के तेल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व स्किन की सूजन को कम करता है।-अरंडी का तेल लगाने से स्किन टेक्सचर में सुधार होता है।निष्कर्षअरंडी का तेल त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा को नॉरिश रखते हैं और लंबे समय तक स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं। आप चाहें, तो अरंडी के तेल को कैरियर तेल के साथ मिक्स करके भी अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। रात भर के लिए इसे अपने चेहरे पर लगाकर छोड़ दें। इस प्रक्रिया को रोजाना दोहराएं। कुछ ही सप्ताह में आपको फर्क नजर आने लगेगा। - केला हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. इस मिठाई को बनाने में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे एक नेचुरल और हेल्दी ऑप्शन बनाता है. यह मिठाई साउथ की पारंपरिक मिठाई से प्रेरित है. तो चलिए बिना किसी देरी के आपको बताते हैं इसकी रेसिपी.मिठाई की तैयारीइस मिठाई को बनाने के लिए पके हुए केले, देसी घी, गुड़, और इलायची का उपयोग होता है. इस मिठाई के लिए पके हुए केले ही बेस्ट होते हैं. कई लोग अक्सर पिलपिले केलों का भी इस्तेमाल करते हैं. रेसिपी की शुरुआत केलों को छीलने के साथ होती है. जिसके बाद उनका एक फाइन पेस्ट तैयार किया जाता है. इसके बाद इसका स्वाद और बढ़ाने के लिए काजू को हल्का रोस्ट किया जाता है, जिसे बाद में मिठाई में मिलाया गया.सबसे पहले केले को देसी घी में धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ देना चाहिए. इस मिठाई में सारी कुकिंग मीडियम फ्लेम पर होती है, क्योंकि हाई फ्लेम पर पकाने से अनइवन तरीके से कुकिंग होने के चांस हैं. केले को तब तक पकाया जाए, जब तक उसका पानी पूरी तरह से सूख न जाए और उसका रंग बदलकर गाढ़ा न हो जाए.कैसे होगी मिठाई और मीठीअब गुड़ को पिघलाने के लिए थोड़े पानी में गुड़ डाले और केले के साथ मिलाएं. गुड़ नेचुरल स्वीटनर है और इससे मिठाई में एक लचीलापन आता है. मिठाई को तब तक पकाया गया जाता है जब तक वह पूरी तरह से गाढ़ी और सेट न हो जाए.फाइनल टच और परोसने का तरीकामिठाई को ठंडा करने के लिए बटर पेपर का इस्तेमाल करें, और इसे फ्रिज में सेट होने के लिए छोड़ दें. ठंडी होने के बाद इसे आसानी से काटें. और बस तैयार है सर्व करने के लिए.
- सर्दी के मौसम में खाने का स्वाद ही कुछ और होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस मौसम में खाने के कई सारे विकल्प उपलब्ध रहते हैं। इन्हीं विकल्पों में शामिल है लहसुन की चटनी, जो अपने तीखे स्वाद और स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है। इस मौसम में लहसुन की चटनी खाने का एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है।लहसुन न केवल आपके भोजन को स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि ये सेहत के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि ये शरीर को गर्मी प्रदान करता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। ऐसे में आप इसकी चटनी बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।लहसुन की चटनी सर्दी में खासतौर पर बहुत पसंद की जाती है, क्योंकि ये पेट को हल्का महसूस कराती है और भोजन के स्वाद को बढ़ा देती है। इस चटनी को बनाने में भी ज्यादा समय नहीं लगता। तो आइए बिना देर किए आपको लहसुन की चटनी बनाने की विधि के बारे में बताते हैं।लहसुन की चटनी बनाने का सामान---लहसुन की कलियां – 6-7हरी मिर्च – 2सूखी लाल मिर्चकश्मीरी लाल मिर्चनींबू का रस – 1 चम्मचनमक – स्वाद अनुसारजीरा – 1/2 चम्मचधनिया पाउडर – 1/2 चम्मचकाली मिर्च – 1/4 चम्मचलहसुन की चटनी बनाने की विधिलहसुन का स्वाद चटनी में तीखा और मसालेदार होता है, जो खाने में शानदार लगता है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले तो लहसुन की कलियों को छीलकर बारीक काट लें। इसके बाद हरी मिर्च, सूखी लाल मिर्च, नमक, कश्मीरी लाल मिर्च, जीरा, धनिया पाउडर और काली मिर्च डालें।इन सभी सामग्री को मिक्सी में अच्छे से पीस लें, ताकि सभी मसाले आपस में अच्छे से मिल जाएं और चटनी एकसार हो जाए। अब इस मिश्रण में ताजे नींबू का रस डालकर अच्छे से मिला लें। नींबू का रस चटनी में ताजगी और खट्टापन लाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस चटनी को आप खाने के साथ सर्व कर सकती हैं। ये चटनी किसी भी स्नैक, पराठे, पूरी, या चाय के साथ बेहतरीन लगती है।बरतें ये सावधानी--लहसुन की चटनी का स्वाद बहुत तीखा होता है, इसलिए हरी मिर्च और नमक को अपनी पसंद के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकती हैं।चटनी को पिसने के दौरान ध्यान रखें कि अधिक पानी न डालें, वरना चटनी का स्वाद हल्का हो सकता है।नींबू का रस ताजे और खट्टे नींबू से ही डालें, ताकि चटनी में सही खट्टापन रहे।चटनी को हवादार जार या कंटेनर में रखें, ताकि वो ताजगी से लंबे समय तक बची रहे।यदि आपको लहसुन का स्वाद थोड़ा ज्यादा तीखा लगे, तो थोड़ा सा शहद भी डाल सकती हैं ताकि चटनी का स्वाद संतुलित हो जाए।
- ठंड के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. यदि आपको सर्दी के मौसम में कब्ज और गैस की समस्या रहती है तो परेशान न हों. इससे छुटकारा पाने के लिए अपनी डाइट में आपको कुछ बदलाव करना पड़ेगा. हम आपको पांच ऐसे फलों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें खाने के बाद पाचन तंत्र से जुड़ी हर समस्या दूर हो जाएगी. आपको मालूम हो कि ठंड के मौसम में कम पानी पीने. फिजिकल एक्टिविटी अधिक नहीं करने और हैवी खाने से पेट सुस्त हो जाता है. ऐसे में हमें डाइजेशन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है.पपीतापपीता में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस फल में फाइबर खूब पाया जाता है. पानी की मात्रा भी अधिक होती है. पपीता पेट और डाइजेशन के लिए किसी दवा से कम नहीं है. पपीता में पपेन नामक एक ऐसा एंजाइम होता है, जो पाचन को दुरुस्त करता है. आप पपीता को सीधे छिलका उतारकर खा सकते हैं. इसे सलाद और जूस के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.केलाकेला पेट के लिए बहुत ही अच्छा होता है. यह आसानी से पच जाता है. फाइबर से भरपूर केला का इस्तेमाल लंबे समय से कब्ज के घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. केला में मौजूद पोटेशियम शरीर को संतुलित रखता है. इनका हल्का प्रतिरोधी स्टार्च अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है जो पाचन क्रिया को शांत रखते हैं. पका केला खाने से बाउल सिंड्रोम में सुधार होता है. छोटी आंत में मौजूद माइक्रोविली को अच्छे से काम करने में मदद मिलती है. केला खाने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है और कब्ज-गैस से राहत मिलती है.अमरूदसर्दी के मौसम में अमरूद का उत्पादन खूब होता है. अमरूद में ढेर सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. अमरूद में फाइबर बहुत ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज की परेशानी को दूर करने में मदद करता है. अमरूद खाली पेट खाने से आंतों की सफाई शुरू हो जाती है. यह मल को नरम बनाता है और उसे आसानी से बाहर निकलने में मदद करता है.संतरासंतरा का सेवन सभी को करना चाहिए. संतरा न सिर्फ स्वाद बल्कि सेहत के लिए भी काफी अच्छा होता है. संतरा फाइबर और विटामिन सी का एक बढ़िया स्रोत है. संतरा पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है. इसका सेवन करने से कब्ज और गैस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. संतरा को आप फल और जूस किसी भी रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.सेबसेब हमारी सेहत के लिए बहुती ही फायदेमंद होता है. इसी के कारण डॉक्टर भी इसे रोज खाने की सलाह देते हैं. सेब कब्ज के साथ दस्त से भी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. सेब में फाइबर पाया जाता है, जो पेट के गुड बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में मददगार है. हर दिन एक-दो सेब खाने से कब्ज और दस्त की समस्या दूर हो जाती है.
- बालों का झड़ना रोकने और नए बालों को उगाने के लिए आप कुछ बहुत ही हेल्दी चीजों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। इससे बालों की जड़ों को मजबूती मिलेगी और चोटी भी नेचुरल तरीके से मोटी हो जाएगी। आइए अब जान लेते हैं कि वो कौन-सी चीजें हैं, जिनका आपको सेवन करना है।बालों के झड़ने और नए बाल ना उगने की समस्या कई लोगों को परेशान करती है। इन समस्याओं का वैसे कोई एक खास मौसम नहीं आता है, लेकिन सर्दियों में बाल थोड़े ज्यादा झड़ते हैं। अगर आप इस स्थिति से बचने के लिए तरह-तरह के शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल कर चुके हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए है। कई बार हमारे बालों को बाहरी देखभाल के साथ अंदरूनी केयर की भी जरूरत होती है। अब अंदरूनी केयर के लिए आपको सप्लीमेंट्स की जरूरत नहीं होती है। आप अपनी डाइट में बदलाव कर सकते हैं। अगर आप कुछ चीजों को डेली डाइट का हिस्सा बनाएंगे, तो बालों का झड़ना कम होगा। इनमें चमक आएगी और नए बाल तेजी से उगेंगे। बता दें कि फूड्स की इस लिस्ट के बारे में जानकारी डॉक्टर सरीन ने अपनी वीडियो में दी है। आइए अब बिना समय बर्बाद किए इन फूड्स के बारे में जान लेते हैं।सोयाबीनआपको बालों को बढ़ाने और इनका झड़ना रोकने के लिए अपनी डेली डाइट में सोयाबीन को जरूर शामिल करना चाहिए। इसमें 52 ग्राम प्रोटीन की मात्रा होती है, जो बालों को जड़ों से मजबूत बनाते हैं। साथ ही, इसमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं। ये सेहत और स्किन दोनों के लिए फायदेमंद होते हैं।बादामबादाम में 21 ग्राम प्रोटीन होता है। ये बालों के लिए बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें विटामिन ई, बायोटिन (B7), मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड की भी अच्छी मात्रा होती है। इनसे बालों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। हेयर फॉल रुकता है और हेयर ग्रोथ बढ़ती है।कद्दू के बीजकद्दू के बीजों में 19 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके अलावा, जिंक, आयरन, मैग्नीशियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने का काम करते हैं। इनसे बालों को मजबूती मिलती है और इनका झड़ना भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। ये बालों को घना बनाने में मदद करते हैं।दालदालों में 9 ग्राम प्रोटीन होता है। इसके साथ ही, दालों में आयरन, जिंक और विटामिन जैसे पोषक तत्व भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। इनसे बालों को जड़ से मजबूत बनाने, हेयर ग्रोथ बढ़ाने, हेयर फॉल रोकने और इन्हें चमकदार बनाने में मदद मिलती है।मजबूत बालों के लिए क्या खाएं?हरी मटरहरी मटर में 7 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें बायोटिन, आयरन, जिंक, और विटामिन बी की अच्छी मात्रा होती है। इससे बालों की ग्रोथ बढ़ती है, उन्हें मजबूत मिलती है और बालों का झड़ना कम होता है।
- ---फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्जआंवला बहुत ही गुणकारी खाद्य पदार्थ है। मॉडर्न साइंस से लेकर आयुर्वेद तक इसे शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक मानता है। इसमें कई सारे न्यूट्रिएंट्स की भरमार होती है, जो आपके पेट, लिवर, दिल, बाल और स्किन को हेल्दी बनाने के लिए जरूरी होते हैं। लेकिन अगर आप किसी तरह की दिक्कत का सामना कर रहे हैं तो उसमें इसे इस्तेमाल करने का तरीका मालूम होना चाहिए।आयुर्वेदिक एक्सपर्ट ने आंवला खाने के कई तरीके बताए हैं। जिसे आप अपनी समस्या के हिसाब से प्रयोग में ला सकते हैं। इसे उपयोग करने से आपको फैटी लिवर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, कब्ज, व्हाइट डिस्चार्ज, हेयरफॉल, पुरानी खांसी से राहत मिलने लगेगी।फैटी लिवरआज के समय में फैटी लिवर काफी आम हो गया है, लेकिन इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर का कहना है कि अगर फैटी लिवर की समस्या है तो 10ml आंवला जूस को 10ml एलोवेरा जूस के साथ लीजिए। इसमें 20ml पानी भी मिलाना है।कोलेस्ट्रॉलयह हार्ट अटैक के सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए इसे कम करना जरूरी है। एक्सपर्ट ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल की समस्या में 10ml आंवला जूस को 10ml अदरक के जूस और 15ml पानी के साथ लीजिए।आंवला का सेवन कैसे करें?व्हाइट डिस्चार्ज और हेयरफॉलव्हाइट डिस्चार्ज की समस्या से राहत पाने के लिए 5 ग्राम आंवला चूर्ण को 1 चम्मच शहद के साथ मिक्स करके लीजिए। ऊपर से चावल का पानी लीजिए। वहीं हेयरफॉल रोकने के लिए 20ml आंवला जूस को 5 ग्राम मिश्री के साथ या फिर 1 चम्मच आंवला चूर्ण को 1 चम्मच देसी घी और मिश्री के साथ लीजिए।पुरानी खांसी और डायबिटीजअगर पुरानी खांसी है और बार बार बीमार पड़ जाते हो, तो आपको इम्यूनिटी बढ़ानी होगी, इसके लिए आंवला चूर्ण या आंवला जूस को शहद के साथ लीजिए। डायबिटीज के रोगी आंवला जूस में ताजी हल्दी का जूस मिलाकर लें।कब्जफिजिकल एक्टिविटी कम होने और खाने में फाइबर की कमी से कब्ज की समस्या बेहद आम हो गई है। जो कि आगे चलकर गंभीर हो सकती है। इसे ठीक करने के लिए सादा आंवला जूस को सुबह खाली पेट लेना है।
- रोजमर्रा के खाने के साथ अक्सर घरों में धनिया-पुदीना वाली हरी चटनी तो जरूर बनती है। ये चटनी केवल स्वाद बढ़ाने के काम में नहीं आती। ये सेहत के लिए भी गजब की फायदेमंद है। न्यूट्रिशनिस्ट शाह ने बताया कि अगर आपके घर में अगर इन 5 चीजों को मिलाकर हरी चटनी तैयार की जाती है तो इसे जरूर खाएं। इस चटनी को खाने के कई सारे फायदे हैं।किन चीजों को मिलाकर बनाएं हरी चटनी--हरी चटनी बनाने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि पुदीना, लहसुन, अदरक, करी पत्ता और अनारदाना लें। साथ ही इसमे सेंधा नमक, हरी मिर्च, नींबू का रस मिलाएं। इस चटनी को इन चीजों के साथ मिलाकर तैयार करें।रोजाना खाने के फायदे--न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कि रोजाना इस चटनी को आदत की तरह अपने मील में शामिल करें। एक चम्मच ये चटनी अगर मील के साथ खाया जाए तो ये शरीर की सौ से ज्यादा बीमारियों को सॉल्व कर सकती है।हरी चटनी कैसे पहुंचाएगी शरीर को फायदा--------अनारदाना और लहसुन--अनारदाना और लहसुन का कॉम्बिनेशन ब्लड फ्लो को इंप्रूव करता है। आर्टरीज को क्लीन करता है। जिससे ब्लड साफ होता है और साथ ही ब्लड का फ्लो भी बेहतर होता है।अदरक और लहसुन--अदरक और लहसुन का कॉम्बिनेशन खाने को पचाने में मदद करता है और डाइजेशन को इंप्रूव करता है।करी पत्ते के फायदे--वहीं इस चटनी में मिक्स करी पत्ता बॉडी के ऑर्गंस को एक दूसरे से सिंक करने में मदद करता है। जिससे सारे बॉडी ऑर्गंस सुचारु रूप से काम कर सके।हरी चटनी के बता दिए इतने सारे फायदे--जब इन सारी चीजों की सामग्री को मिलाकर चटनी बनाकर खाते हैं तो इससे कई तरह की समस्याएं नहीं होगी और फायदा पहुंचेगा।डाइजेशन इंप्रूव होगा। खाया हुआ खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा। जिससे बॉडी को बेहतर नरिश्मेंट मिलेगी।खाना आसानी से डाइजेस्ट होगा तो गैस और ब्लोटिंग नहीं होगी।ब्लड क्लीन होने से स्किन पर एक्ने और पिंपल की समस्या नहीं होगी और ज्यादा फ्रेश ग्लोइंग स्किन नजर आएगी।ब्लड का फ्लो ना केवल अच्छा होगा बल्कि चूंकि आर्टरीज क्लीन होंगी जिसकी वजह से ब्लड की क्वालिटी में भी सुधार होगा।
-
प्रकृति ने हमें अनमोल औषधीय पौधों का खजाना दिया है, जिनमें भूमि आँवला (भूम्यामलकी) एक महत्वपूर्ण पौधा है। आयुर्वेद में इसे लीवर टॉनिक और पथरी नाशक माना गया है। इसका उपयोग लीवर रोग, किडनी स्टोन, पाचन विकार और मधुमेह जैसी समस्याओं में किया जाता है।
भूमि आँवला के पौधे की पहचान कैसे करें —भूमि आँवला एक छोटा हरा-भरा पौधा है जो जमीन के पास फैलकर बढ़ता है। इसके पत्ते आँवला के पत्तों जैसे होते हैं और इसकी डंठल के नीचे छोटे-छोटे हरे फल लगते हैं, जो दानों के समान दिखते हैं। यही फल इसके औषधीय गुणों का प्रमुख स्रोत हैं। यह भारत के अधिकांश हिस्सों में, विशेष रूप से बरसात के मौसम में खेतों, बागानों और रास्तों के किनारे स्वाभाविक रूप से उग आता है।✅️ भूमि आँवला के 7 चमत्कारिक औषधीय फायदे —1️⃣ किडनी स्टोन में लाभकारी :-भूमि आँवला का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह गुर्दे की पथरी को गलाने और मूत्रमार्ग से बाहर निकालने में मदद करता है। यह पेशाब की रुकावट, जलन और मूत्र संबंधी संक्रमणों को भी दूर करता है।2️⃣ लीवर को बनाए मजबूत :-यह लीवर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और हेपेटाइटिस, फैटी लिवर व जॉन्डिस जैसी बीमारियों में अत्यंत लाभकारी है। यह लीवर को विषैले पदार्थों से मुक्त करके शरीर को डिटॉक्स करता है।3️⃣ पाचन तंत्र को सुधारने में :-भूमि आँवला गैस, अपच, पेट दर्द और कब्ज जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी है। इसका नियमित सेवन पाचन शक्ति को मजबूत करता है और भोजन का सही अवशोषण सुनिश्चित करता है।4️⃣ शरीर की गर्मी और त्वचा की समस्या में राहत दे :-यह शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करता है, जिससे त्वचा पर निकलने वाले दाने, खुजली या एलर्जी जैसी समस्याएँ कम होती हैं।5️⃣ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में :-इस पौधे में एंटी-डायबिटिक तत्व होते हैं जो रक्त शर्करा को नियंत्रित रखते हैं और इंसुलिन के स्तर को संतुलित करते हैं।6️⃣ खून को साफ करने में :-यह रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर त्वचा को स्वस्थ बनाए रखता है।7️⃣ संक्रमण से बचाव :-भूमि आँवला में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।✅️ भूमि आँवला का काढ़ा बनाने का तरीका जाने —■ ताज़े पौधे से :-5–6 टहनियाँ (पत्ते और फल सहित) लें। उन्हें साफ पानी से धो लें, फिर 1 कप पानी उबालें और उसमें टहनियाँ डालें। लगभग 5–7 मिनट धीमी आँच पर पकाएँ। इसे छानकर गुनगुना पीएँ। स्वाद के लिए थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं।■ सूखे पत्तों या पाउडर से :-1 कप पानी में 1 चम्मच सूखा भूमि आँवला पाउडर डालें, 5 मिनट तक उबालें। इसे सुबह खाली पेट पीना सबसे ज्यादा लाभदायक होता है।✅️ भूमि आँवला के पत्तियों और फलों का उपयोग —1) रोज सुबह 4–5 ताज़ी पत्तियाँ चबाना लीवर और पाचन के लिए बहुत लाभदायक है।2) छोटे हरे फलों का रस या पेस्ट बनाकर पीने से पेशाब की जलन, पथरी और मूत्र संक्रमण में राहत मिलती है।3) एक चम्मच सूखा पाउडर गुनगुने पानी के साथ रोज लेना शरीर को डिटॉक्स करता है और लीवर को मजबूत बनाता है।⚠️ सावधानियाँ —■ लगातार 15–20 दिन सेवन के बाद 5–7 दिन का ब्रेक लेना चाहिए।■ अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में ठंडक अधिक बढ़ सकती है।■ गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएँ इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करें।भूमि आँवला का नियमित सेवन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लीवर, किडनी और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह सचमुच प्रकृति की एक अनमोल देन है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के अनेक गंभीर बीमारियों से बचाव करने में सहायक है। - सर्दियों में हड्डियों में अकड़न के साथ दर्द व सूजन की समस्या बढ़ जाती है। इसके अलावा सर्दियों में जोड़ों के दर्द से भी लोग खूब परेशान रहते हैं। ऐसे में पुराने लोग इन तमाम समस्याओं से बचने के लिए रोजाना लहसुन की 1 कली खाने का सुझाव देते थे। कुछ लोग तो पूरी सर्दी लहसुन खाते हैं ये मानते हुए कि ये इम्यूनिटी बूस्टर है। इसके अलावा लहसुन में मिलने वाले कई कंपाउंड्स और एंटीऑक्सीडेंट्स सेहत से जुड़ी कई समस्याओं से बचाव में मदद कर सकते हैं। जानते हैं कि 7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है?7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाना कितना सही?अगर आप लहसुन उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो कि सम तासीर वाले हैं। जिन लोगों का शरीर ठंडा रहता है जिन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या रहती है उनके लिए लहसुन का सेवन फायदेमंद है। ध्यान देने वाली बात ये है कि लहसुन एसिडिक है और पित्त शरीर वाले लोगों के लिए इसे हर दिन खाना नुकसानदेह हो सकता है, सिर्फ सम तासीर हो वहीं इसे खाएं। इसके अलावा शरीर के वायु पर असर आएगा और पाचक पित्त एसिडिक हो जाएगी। आम भाषा में इसे ऐसे समझे कि अगर आप एसिडिक पीएच वाले व्यक्ति हैं तो खाली पेट लहसुन का सेवनइरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) का कारण बन सकता है। इससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। खाली पेट लहसुन का सेवन बॉवेल मूवमेंट को प्रभावित करने के साथ पाचन क्रिया को प्रभावित करता है। इससे पेट में दर्द के साथ कई सारी समस्याएं हो सकती हैं इसलिए सिर्फ सम प्रकृति वाले लोग ही खाली पेट लहसुन का सेवन करें।7 दिन तक खाली पेट लहसुन खाने से क्या होता है-खाली पेट लहसुन का सेवन सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। पहले तो ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है क्योंकि इसमें एलिसिन जैसे शक्तिशाली यौगिक होते हैं। दरअसल, कच्चे लहसुन में मौजूद एलिसिन में शक्तिशाली एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा लहसुन खाना शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार है। लहसुन में सल्फर यौगिक होते हैं जो लिवर को शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद करते हैं। ये पाचक एंजाइमों को उत्तेजित करता है और स्वस्थ आंत बैक्टीरिया यानी प्रीबायोटिक प्रभाव को बढ़ावा देता है। इस प्रकार से ये गट हेल्थ के लिए फायदेमंद है।बीपी और हाई कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगाररोज सुबह खाली पेट लहसुन खाना दिल को हेल्दी रखने में मददगार है। ये ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है। यह भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकता है और ग्लूकोज के स्तर को स्थिर कर सकता है। येबैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने के साथ गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा देने में मददगार है। अधिक मात्रा में सेवन करने या संवेदनशील व्यक्तियों में इससे सीने में जलन, मतली, दस्त या पेट में खुजली जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिए संयम बरतना और अपने शरीर की जरूरतों को समझना जरूरी है।जोड़ों के दर्द के लिए लहसुन का उपयोग कैसे करें?जोड़ों में दर्द के लिए आप लहसुन का उपयोग दो प्रकार से कर सकते हैं। पहले तो आप रोज सुबह खाली पेट 1 लहसुन की कली खा सकते हैं और दूसरा आप लहसुन को सरसों के तेल में पकाकर इससे हड्डियों की मालिश कर सकते हैं।पुरुषों को लहसुन खाने से क्या फायदा होता है?पुरुषों को लहसुन खाने से कई प्रकार के फायदे हो सकते हैं। पहते तो ये टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बढ़ाता है जिससे पुरुषों की स्टेमिना बढ़ती है और पुरुष की फर्टिलिटी भी बढ़ती है।बालों के लिए लहसुन का तेल कैसे बनाएं?बालों के लिए लहसुन का तेल आप कई प्रकार से तैयार कर सकते हैं लेकिन सर्दियों में सरसों तेल में पकाकर लहसुन का तेल बनाएं और इसे अपने बालों में लगाएं। ये बालों की ग्रोथ बढ़ाने के झड़ते बालों की समस्या को रोकने में मददगार है।
- आज भी बड़ी संख्या में लोग महंगे स्किन व हेयर केयर प्रोडक्ट्स की तुलना में देसी व नेचुरल नुस्खों पर ज्यादा भरोसा करने लगे हैं। मेथी भी ऐसे ही देसी नुस्खों में से एक है, लेकिन ज्यादातर लोगों को इसके सभी फायदों के बारे में जानकारी नहीं है। मेथी का उपयोग न सिर्फ डायबिटीज व कब्ज जैसी समस्याओं के लिए किया जाता है, बल्कि बालों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने के लिए भी यह काफी फायदेमंद हो सकती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि मेथी के पानी से बाल धोने से आपको क्या फायदे मिल सकते हैं।बालों के लिए मेथी का पानीमेथी के पानी का इस्तेमाल आमतौर पर लोग डायबिटीज कंट्रोल रखने के लिए और कब्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए करते हैं, लेकिन वास्तव में मेथी के पानी में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो बालों को एक नहीं बल्कि कई फायदे पहुंचाते हैं और सर्दियों में होने वाली कई समस्याओं को दूर करने में मदद करती हैं। इसलिए अगर आपको अपने बालों से जुड़ी कुछ समस्याएं हैं, तो हो सकता है मेथी के पानी की मदद से आपको काफी फायदेमंद हो सकता है।क्या फायदे मिलेंगेमेथी के पानी में अपने बालों को धोना इसलिए फायदेमंद है, क्योंकि इसके पानी में एक लसदार पदार्थ होता है जो बालों को एक नेचुरल कंडीशनर की तरह काम करता है। साथ ही मेथी में मौजूद खास तरह का प्रोटीन बालों को पोषण प्रदान करता है, जिसकी मदद से हेयर फॉल रोकने में मदद मिलती है और बाल जड़ से मजबूत होते हैं। मेथी में खास तरह के इंफ्लेमेटरी और एंटी-फंगल गुण भी पाए जाते हैं, जो डैंड्रफ व सिर में खुजली जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी मदद कर सकते हैं।कैसे करना होगा इस्तेमालअपने बालों के लिए मेथी के पानी का भरपूर फायदा उठाने के लिए आपको उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना भी बहुत जरूरी है और इसलिए आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आप इसका इस्तेमाल कैसे करेंगे। रात को एक मग पानी में दो मुट्ठी मेथी भिगो कर रख दें। सुबह मेथी को छान कर पानी अलग कर लें। अब इस पानी की मदद से अपनी बालों को अच्छे से भिगो लें और सुनिश्चित करें कि आपके बाल जड़ से लेकर सिरे तक अच्छे से इस पानी में भीग चुके हैं। कम से कम 20 मिनट तक अपने बालों को गीला रखें, जो सर्दियों में आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है और इसके लिए आप बालों को अच्छे से भिगोकर तौलिया बांध सकते हैं। 20 मिनट बाद साफ पानी से बालों को अच्छे से धो लें और शैंपू न करें। अगर आपको शैंपू करना है, तो अगले दिन आपको शैंपू करना चाहिए।किन बातों का रखें ध्यानवैसे तो मेथी का पानी आपके बालों के लिए काफी फायदेमंद माना जाएगा लेकिन इसके साथ-साथ आपको कुछ बातों का ध्यान भी रखना होगा। अगर आपको लंबे समय से हेयर फॉल हो रहा है या हेयर ग्रोथ रुकी हुई है। ऐसे में हो सकता है कि आपको स्वास्थ्य से जुड़ी कोई अंदरूनी बीमारी हो जिसके कारण बालों से जुड़ी ये समस्याएं हो रही हों। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना बेहद जरूरी है। साथ ही कुछ लोगों कि स्किन ज्यादा एलर्जिक या सेंसिटिव होती है और हो सकता है कि उन्हें मेथी का पानी भी सूट ना करे। इसलिए पहले आपको एलर्जी टेस्ट करना चाहिए जिसके लिए आप थोड़ी सी जगह पर मेथी का पानी लगाकर उसे ट्राई कर सकते हैं। हालांकि, मेथी से एलर्जी बहुत ही कम मामलों में देखी जाती है, लेकिन फिर भी आपको एक बार इस बारे में डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।
-
अक्सर लोग न सिर्फ बालों के झड़ने बल्कि आइब्रो के झड़ने की समस्या से भी परेशान रहते हैं। जिसके कारण कई बार लोगों के आंखों के ऊपर हिस्से में गंजापन दिखने लगता है। ऐसे में आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ाने के लिए अक्सर लोगों को हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ने के लिए कैस्टर ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है। कैस्टर ऑयल में अच्छी मात्रा में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।
भौहों में अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने के फायदेभौहों में अरंडी के तेल का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। अरंडी के तेल में भरपूर मात्रा में हेल्दी फैट्स और विटामिन-ई जैसे पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से भौहों से जुड़ी कई समस्याओं से राहत देने में मदद मिलती है।बालों की ग्रोथ को बढ़ाएअरंडी के तेल में विटामिन-ई और हेल्दी फैट्स के गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो के बालों की ग्रोथ को नेचुरल रूप से बढ़ावा देने और इनके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है।बालों को मॉइस्चराइज करेअरंडी के तेल यानी कैस्टर ऑयल में भरपूर मात्रा में मॉइस्चराइजिंग गुण होते हैं। ऐसे में इसका इस्तेमाल करने से आइब्रो के बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने, इनको घना बनाने और मॉइस्चराइज करने में मदद मिलती है। इससे आइब्रो के बाल शाइनी रहते हैं।गहराई से पोषण देकैस्टर ऑयल में बहुत से पोषक तत्व होते हैं। ऐसे में इसका आइब्रो पर इस्तेमाल या इससे मसाज करने से इन बालों को गहराई से पोषण देने और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देने में मदद मिलती है, जिससे बालों की ग्रोथ और स्वास्थ्य अच्छा होता है।भौहों के लिए अरंडी के तेल का उपयोग कैसे करें?इसके लिए सबसे पहले भौहों यानी आइब्रो को अच्छे से साफ करें। इसके बाद रूई की मदद से कैस्टर ऑयल को आइब्रो पर लगाएं और फिर हल्के हाथ से मसाज करें। इससे भौहों के स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, कैस्टर ऑयल के इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।निष्कर्षअरंडी के तेल का इस्तेमाल भौहों पर लगाने से आइब्रो की ग्रोथ को बढ़ावा देने, इनके बालों को नेचुरल रूप से मॉइस्चराइज करने, शाइनी बनाने और गहराई से पोषण देने में मदद मिलती है। ध्यान रहे, इसका इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें और इससे किसी भी तरह की एलर्जी होने पर इसका इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा, बालों से जुड़ी समस्या महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें। - आंवला एक सुपरफूड है, जिसे खाकर भारत या दुनिया का कोई भी शख्स शरीर को हेल्दी बना सकता है। यह विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स का बहुत बढ़िया सोर्स है। यह आपकी स्किन और बाल को हेल्दी बनाता है। लेकिन इसके इतने सारे फायदे होने के बावजूद लोग इसे बहुत कम खाते हैं।आंवला खाने के 12 तरीके हैं। इन्हें बनाना बेहद आसान है और बहुत कम चीजों की जरूरत होती है। इन टेस्टी तरीकों से आप आंवला को अपनी रेगुलर और डेली डाइट में शामिल कर सकते हैं। जिससे इसे खाने से मिलने वाला कोई फायदा छूटेगा नहीं। यह आपकी पूरे शरीर की इम्यूनिटी के लिए बहुत अच्छा होता है, जो इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है।आंवला कैंडी----आंवला को उबालकर बीज निकाल लें।इसे चीनी या गुड़ की चाशनी में टॉस करें।फिर थोड़ा सा पाउडर मिलाएं।इसके बाद 1-2 दिन के लिए धूप में सुखा दें।आंवला आचार---आंवला को उबालकर इसके बीज निकाल ले।अब इसे सरसों के तेल में सॉटे करें।इसके ऊपर हल्दी, मिर्च, नमक और मेथी डालें।इसे एक कांच के जार में ठंडा करके स्टोर कर लें।आंवला राइस----सबसे पहले चावलों को पकाकर एक तरफ रख लें।अब सरसों के बीज, करी पत्ता और हरी मिर्च को सॉटे कर लें।इसके ऊपर कद्दूकस करके आंवला, हल्दी पाउडर और नमक मिलाएं।अब इसे पके हुए चावल में मिक्स करें।ऊपर से थोड़ा घी और रोस्टेड मूंगफली डालकर खाएं।आंवला मुरब्बा----आंवला को तबतक उबालें, जबतक वो मुलायम ना हो जाए।अब गुड़ की चाशनी बनाएं।इमें आंवला और इलायची मिक्स करें।इन्हें थोड़ा ग्लॉसी होने तक पकाएं।आंवला की चटनी---बीज निकला आंवला, धनिया और हरी मिर्च को ब्लेंड करें।इसमें जीरा, नमक और नींबू का रस मिलाएं।यह स्नैक और खाने के साथ अच्छी रहती है।आंवला इम्यूनिटी शॉट--कटा आंवला, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को ब्लेंड करें।इसमें गुनगुना पानी मिलाएं।रोज 30 ml पीएं।
- आयुर्वेद के अनुसार, गोंद की तासीर गर्म होती है, जिसे सर्दियों में खाने से आपके शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद मिलती है, हड्डियां मजबूत होती हैं और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। इसलिए, सर्दियों में गोंद का सेवन आप कई तरीकों से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।1. गोंद का लड्डूसर्दियों में गोंद का लड्डू कई लोगों को खाना काफी पसंद होता है। यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। गोंद का लड्डू आटे, ड्राई फ्रूट्स, गुड़ और अन्य चीजों को मिलाकर तैयार किया जा सकता है। सर्दियों में इस लड्डू का सेवन आपके शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता है और कड़ाके की ठंड से बचाने के साथ शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। रोज सुबह एक लड्डू दूध के साथ खाने से जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है।2. गोंद की राबराजस्थान और गुजरात में गोंद की राब को एक हेल्दी ड्रिंक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह उन लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जिन्हें गोंद का लड्डू पसंद नहीं होता है या उसे खाना भारी लगता है। इसे घी, गुड़ और पानी में गोंद को भूनकर मिलाकर तैयार किया जाता है। सर्दियों में इस ड्रिंक को पीने से सर्दी-जुकाम से राहत मिलती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने में मदद मिलती है, जिससे आपको ठंड कम लगती है।3. दूध के साथ भुना हुआ गोंदआप दूध के साथ भी गोंद को भूनकर खा सकते हैं। अगर आपके पास समय की कमी है तो गोंद का सेवन करने का ये सबसे बेहतर और प्रभावी तरीका है। गोंद को घी में अच्छी तरह भूनकर एक गिलास गर्म दूध में मिलाकर रात को सोने से पहले पी सकते हैं। आप चाहे तो इसमें शहद या मिश्री भी मिला सकते हैं। गोंद का दूध रातभर आपके शरीर को गर्म रखने में मदद करता है और अनिद्रा की समस्या को दूर कर गहरी नींद लेने में मदद मिलती है। यह शारीरिक कमजोरी को दूर करने का एक बेहतरीन तरीका है।4. गोंद की पंजीरीपंजीरी एक सूखा मिश्रण है, जिसे स्टोर करना भी काफी आसान होता है और यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है। गोंद की पंजीरी मखाने, गोंद और ड्राई फ्रूट्स, आटा और चीनी का बूरा या गुड़ का पाउडर मिलाकर खा सकते हैं। पंजीरी में सोंठ और काली मिर्च मिलाने से ये सर्दियों में आपके लिए ज्यादा फायदेमंद होता है, जो शरीर की गर्माहट को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे यह छाती में जमा कफ और ठंड के कारण होने वाली समस्याओं से बचाव में मदद कर सकता है।5. गोंद और मेवों का हलवागोंद का सेवन आप हलवे के रूप में भी कर सकते है। सूजी या आटे के हलवे में गोंद और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा मिलाकर खाना भी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। गोंद के हलवे का सेवन करने से आपकी मांसपेशियां मजबूत बनती है। खासकर ये बुजुर्ग और बच्चों के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह आसानी से पच जाता है और शरीर को तुरंत गर्मी देने में मदद करता है।निष्कर्षसर्दियों में गोंद का सेवन आप कई तरीकों से कर सकते हैं, जो आपके शरीर को सर्दी के मौसम में भी गर्म रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, ध्यान रखें कि गोंद बहुत बारी और गर्म होता है इसलिए एक दिन में 15 ग्राम से ज्यादा गोंद का सेवन न करें। गोंद का सेवन करने के साथ दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताकि गोंद को पचाने में मदद मिल सके।
- हरी मिर्च खाने का स्वाद तो बढ़ाता ही है, साथ ही स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है। अक्सर लोग कहते हैं कि हरी मिर्च खाने से एसिडिटी हो सकती है, लेकिन अगर हरी मिर्च सही मात्रा और सही तरीके से खाई जाए, तो यह स्किन के साथ-साथ पूरे शरीर के लिए भी फायदेमंद होती है। हरी मिर्च डाइजेशन, इम्युनिटी और स्किन हेल्थ से जुड़ी हुई है।। इसके अलावा, हरी मिर्च खाने से स्किन को भी कई फायदे होते हैं।”विटामिन C से स्किन में नेचुरल चमकहरी मिर्च विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है। विटामिन C स्किन में कोलेजन प्रोडक्शन को सपोर्ट करता है, स्किन को फर्म और हेल्दी बनाए रखता है और स्किन की चमक बनाए रखता है। जो लोग रेगुलर और सीमित मात्रा में हरी मिर्च खाते हैं, उनकी स्किन को अंदर से न्यूट्रशिन मिलता है और इसी वजह से नेचुरल ग्लो दिखाई देता है।पिंपल्स और मुहांसों से छुटकाराहरी मिर्च में कैप्साइसिन मिलता है, जो न सिर्फ तीखापन देता है, बल्कि इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं। ये मुहांसे वाले बैक्टीरिया को कंट्रोल करता है, स्किन की सूजन कम होती है और बार-बार पिंपल्स निकलने की समस्या घट सकती है।बेहतर मेटाबॉलिज्म से स्किन का क्लीयर होनाअच्छी स्किन के लिए महंगे प्रोडेक्ट्स लगाना ही काफी नहीं होता, बल्कि मेटाबॉलिज्म अच्छा होना जरूरी है। हरी मिर्च खाने से मेटाबॉल्जिम बूस्ट होता है, डाइजेशन बेहतर होता है और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे स्किन साफ होती है और पिंपल्स से छुटकारा मिलता है।एंटीऑक्सीडेंट्स एजिंग कम करने में मदद मिलनाहरी मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को कम करते हैं, जो स्किन एजिंग का बड़ा कारण होते हैं। हरी मिर्च खाने वाले लोगों की फाइन लाइन्स और झुर्रियां धीमी होती है, स्किन लंबे समय तक यंग दिखती है और पॉल्यूशन से स्किन को जो नुकसान होता है, उससे भी बचाव होता है।हरी मिर्च कितनी खानी चाहिए?हरी मिर्च खाना फायदेमंद है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाना नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को एसिडिटी, अल्सर या बहुत सेंसिटिव स्किन की समस्या होती है, उन्हें ज्यादा हरी मिर्च खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, कच्ची, बहुत ज्यादा तीखी मिर्च रोज खाना सही नहीं है। इसलिए खाने में थोड़ी मात्रा में हरी मिर्च लेनी चाहिए। खाना पकाते समय हरी मिर्च डालनी चाहिए।”“दुनियाभर में हरी मिर्च का इस्तेमाल स्लाइवा और डाइजेशन एंजाइम्स को एक्टिव करती है और फूड-बर्न इन्फेक्शन के रिस्क को कम करती है। इसके अलावा, कई देशों में हरी मिर्च को खाने को सेफ करने में मदद करती है, बैक्टीरिया और फंगस की ग्रोथ को रोकती है। ठंडे देशों में पहले हरी मिर्च का इस्तेमाल सीमित था, लेकिन माइग्रेशन और ग्लोबलाइजेशन के कारण हरी मिर्च पॉपलर हो गई है।”
- सर्दियों का मौसम शुरू होते ही कई लोग कूल्हों में जकड़न और जोड़ों में दर्द की शिकायत करने लगते हैं। यह समस्या गर्मियों से ज्यादा सर्दियों के मौसम में अधिक परेशान करती है। एक्सपर्ट की मानें तो इस समस्या के पीछे ज्यादातर शारीरिक कारण छिपे हुए होते हैं। सीके बिरला हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक डॉक्टर प्रवीण टिट्टल कहते हैं कि ठंड में मांसपेशियां और टिशू सिकुड़ जाते हैं। जिसकी वजह से खासतौर पर हिप जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों में दर्द ज्यादा महसूस होने लगता है। आइए डॉक्टर प्रवीण से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर सर्दियों में क्यों जाम होने लगते हैं आपके कूल्हे और क्या है इस समस्या का उपचार।कूल्हे की जकड़न बढ़ने का बड़ा कारणसर्दियों में ठंड का असर मांसपेशियों, टेंडन और लिगामेंट्स पर पड़ने से कूल्हे की जकड़न बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि कम तापमान रक्त संचार को धीमा करता है, जिससे ऊतक सिकुड़कर कठोर हो जाते हैं। जिससे जोड़ों में अकड़न, दर्द और गतिशीलता कम हो जाती है। खासकर गठिया या पुरानी चोट वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।हिप जॉइंट के आसपास की मांसपेशियों में जकड़न होने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, खासकर सुबह उठते समय या देर तक बैठे रहने के बाद, दर्द ज्यादा महसूस होता है।खून का संचार कम होने से लचीलापन घटता हैठंड के मौसम में शरीर सबसे पहले अपने कोर यानी बीच के हिस्से को गर्म रखने की कोशिश करता है। इसके कारण हाथ-पैर और कूल्हों की तरफ खून का बहाव थोड़ा कम हो जाता है।जब हिप एरिया में खून का संचार कम होता है, तो वहां ऑक्सीजन और पोषण भी कम पहुंचता है, जिससे जॉइंट्स की रिकवरी और लचीलापन प्रभावित होता है।कम फिजिकल एक्टिविटी से जकड़न बढ़ती हैसर्दियों में लोग आमतौर पर बाहर कम निकलते हैं, जिससे एक्सरसाइज भी कम हो जाती है। जब मूवमेंट कम होता है, तो जोड़ों में मौजूद सिनोवियल फ्लूइड (जो जोड़ों को चिकनाई देता है) भी ठीक से सर्कुलेट नहीं हो पाता। इससे हिप जॉइंट्स और ज्यादा सख़्त महसूस होने लगते हैं।सर्दियों में बढ़ जाती है पहले से मौजूद जोड़ों की समस्याजिन लोगों को पहले से अर्थराइटिस की समस्या है या कभी हिप में चोट लगी हुई हो, उनके लिए सर्दियां ज्यादा मुश्किल हो सकती हैं।बारोमेट्रिक प्रेशर में बदलावठंड के मौसम में बारोमेट्रिक प्रेशर में बदलाव होता है, जिससे जोड़ों की सेंसिटिविटी बढ़ जाती है और दर्द व जकड़न ज्यादा महसूस होती है।गलत लाइफस्टाइल और बैठने की आदतें भी वजहसर्दियों में ज्यादा समय तक घर के अंदर बैठना आम बात है। लंबे समय तक बैठने से हिप फ्लेक्सर मसल्स छोटी और टाइट हो जाती हैं, खासकर अगर बैठने की पोजिशन सही न हो।इसका असर तब दिखता है जब आप खड़े होते हैं, चलते हैं या सीढ़ियां चढ़ते हैं। इसमें हिप मूवमेंट सीमित हो जाती है।सर्दियों में हिप की जकड़न कैसे कम करें?हिप जॉइंट्स को ठीक से काम करने के लिए एक्टिव रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए इन चीजों से हिप्स को लचीला बनाया रखा जा सकता है--रोजाना वॉक-दिन में हल्की-फुल्की स्ट्रेचिंग करते रहें-योग-गुनगुने पानी में स्विमिंग-गर्म कपड़े पहनें-लंबे समय तक लगातार न बैठेंठंड में भी एक्टिव रहें, दर्द से बचेंसलाह----सर्दियों में हिप की जकड़न आम समस्या है, ऐसा इसलिए क्योंकि ठंड मांसपेशियों को सख्त बना देती है। जिससे एक्टिविटी कम हो जाती है। लेकिन अगर आप खुद को गर्म रखें और नियमित रूप से शरीर की मूवमेंट बनाए रखें, तो हिप्स के आसपास होने वाले दर्द से राहत पाई जा सकती है।
- सर्दियों में मूंगफली सबसे आम और पसंदीदा स्नैक बन जाती है। मूंगफली में प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं। सर्दियों में जब शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है, तब मूंगफली एक आसान और स्वादिष्ट विकल्प बन जाती हैसर्दियों में मूंगफली क्यों खाई जाती है?सर्दियों में मूंगफली शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती है। इसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो ठंड के मौसम में शरीर को एनर्जी और मजबूती देते हैं। यही वजह है कि सर्दियों में मूंगफली का सेवन ज्यादा किया जाता है।सर्दियों में मूंगफली खाने के क्या फायदे हैं? -मूंगफली में मौजूद हेल्दी फैट शरीर को लंबे समय तक एनर्जी देता है। इसमें प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। ठंड में मूंगफली खाने से थकान कम होती है और शरीर एक्टिव बना रहता है। साथ ही इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है।-मूंगफली में मोनोअनसैचुरेटेड फैट और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो दिल की सेहत के लिए अच्छे माने जाते हैं।-नियमित और सीमित मात्रा में मूंगफली खाने से खराब कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है और हार्ट हेल्थ को सपोर्ट मिलता है।-सर्दियों में जब लोग कम एक्टिव रहते हैं, तब मूंगफली दिल के लिए लाभकारी हो सकती है।-मूंगफली पौष्टिक होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा खाने पर यह वजन बढ़ा सकती है।-डायबिटीज के मरीज भी मूंगफली खा सकते हैं, लेकिन नमक या चीनी लगी मूंगफली से बचना जरूरी है और मात्रा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।भुनी हुई मूंगफली खाने के क्या नुकसान हैं? -कुछ लोगों के लिए सर्दियों में मूंगफली नुकसानदायक भी हो सकती है। जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या पाचन की समस्या रहती है, उन्हें ज्यादा मूंगफली खाने से पेट में भारीपनऔर गैस की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा मूंगफली तासीर में गर्म होती है, इसलिए ज्यादा मात्रा में खाने से मुंह में छाले, गले में खराश या स्किन पर फोड़े-फुंसी की समस्या भी हो सकती है। जिन लोगों को नट्स से एलर्जी होती है, उन्हें मूंगफली से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। एलर्जी की स्थिति में खुजली, सूजन या सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है।इसके अलावा जिन लोगों को एक्ने या स्किन इंफ्लेमेशन की समस्या रहती है, उन्हें सर्दियों में भी मूंगफली सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए।निष्कर्षसर्दियों में मूंगफली एक सस्ता, स्वादिष्ट और पौष्टिक स्नैक है, जो सही मात्रा में खाने पर सेहत के लिए कई फायदे देता है। यह शरीर को गर्म रखती है, एनर्जी देती है और दिल की सेहत को सपोर्ट करती है लेकिन ज्यादा मात्रा, गलत समय या गलत तरीके से खाने पर यही मूंगफली वजन बढ़ाने, गैस और स्किन समस्याओं का कारण भी बन सकती है। मूंगफली को संतुलित मात्रा में और अपनी सेहत को ध्यान में रखकर ही डाइट में शामिल करें।


.jpg)



.jpg)
.jpg)
.jpg)


.jpg)
.jpg)
.jpg)

.jpg)

.jpg)
.jpg)


.jpg)





